बुड्ढा टेलर 2
Budhe tailor se ameer ghar ki aurton ki chudai kahani:- अगर आपने इस कहानी का पिछला पार्ट नहीं पढ़ा है तो अभी पढ़ लें क्यूंकी आपको तभी ये पार्ट समझ आएगा। पिछला पार्ट यहाँ पढ़ें ==> बुड्ढा टेलर 1
Budhe tailor se ameer ghar ki aurton ki chudai hindi kahani
पूर्वी: मैं भी मजाक कर रही थी पूजा दीदी।
पूजा: हा हा हा।
पूर्वी: वो कहाँ रहता है?
पूजा: वो अपने मॉल के साइड से एक छोटी सी गली जाती है। वहाँ एक स्लम एरिया है, करीम नगर। वहाँ रहता है।
पूर्वी: अपने घर में ही उसका शॉप है क्या?
पूजा: भाभी, मुझे उतना ज्यादा पता नहीं है। आने के बाद तसल्ली से उसको पूछ लेना।
पूर्वी: हाँ पूछ लूँगी लेकिन आप नाराज मत होना मुझ पर।
पूजा: मैं क्यों नाराज होऊँगी आपको?
पूर्वी: ज्यादा देर तक उसको रुका लिया तो।
पूजा: ज्यादा देर तक रुका लोगी तो आपको ही प्रॉब्लम क्रिएट होगी।
पूर्वी: ज्यादा इंफॉर्मेशन लेने होगी तो उसको ज्यादा टाइम रोकना होगा ना।
तब दोनों हँस पड़ती हैं।
तभी पूजा अपनी कामवाली पद्मा को आवाज दे देती हैं—
पूजा: पद्मा!
एक 40 साल की औरत थी, एकदम भरे हुए बदन की मालकिन थी। रंग साँवला था, हाइट 5’6 थी, फिगर 36-34-38 थी, एकदम चुलबुली किस्म की औरत थी।
पूजा: पद्मा, पानी और चाय लाना।
पद्मा: जी दीदी जी।
थोड़ी देर में पद्मा पानी लाती है। तब वो करीम के बारे में ही बात कर रही थीं।
थोड़ी देर बाद पद्मा चाय लाती है।
पूर्वी: वो ब्लाउज अच्छे से सिला देगा ना?
पूजा: हाँ भाभी।
तभी पूर्वी पद्मा की तरफ देखकर कहती हैं—
पूर्वी: तुम भी करीम नगर में ही रहती हो ना?
पद्मा: हाँ बहुरानी जी।
पूजा: तो करीम टेलर को जानती होगी ना?
करीम टेलर का नाम सुनते ही पद्मा अपनी जगह पे उछल जाती है।
वो सोचती है कि उस कमीने से इन दोनों का क्या काम पड़ गया होगा।
वो करीम को अच्छे तरीके से जानती थी। वो उसके घर के पिछली गली में ही रहती थी। करीम ने उसे भी एक-दो बार ठोका था।
पद्मा: जी मैं जानती हूँ ना।
पूर्वी: उसका नाम सुनते ही इतनी उछली क्यों तुम?
पद्मा: वो क्या है ना, मैं समझ नहीं पाई कि आप जैसे बड़े लोगों का उस मामूली टेलर से क्या काम आ गया होगा।
(असल में वो समझ चुकी थी कि उस टेलर से उनका क्या काम होगा। उसको भी बहुत दिनों से करीम से मिलना था लेकिन इस बंगले में बहुत काम होने से वो करीम के पास जा नहीं पा रही थी। वो तभी समझ गई थी कि जब वो पानी देने आई थी तभी उसने करीम टेलर और करीम नगर के बारे में सुना था। उसको भी एक बार करीम से चुदाने की इच्छा हो रही थी, उसका 10′ लौंडा उसे याद आ रहा था।)
पूर्वी: वो अच्छा टेलर है ना?
पद्मा: हाँ बहुरानी, वो बहुत अच्छा टेलर है।
पूजा: वो आदमी कैसा है?
पद्मा: दीदी जी, अब हम क्या बोलें। अच्छा ही है…..
पूर्वी: ठीक तरीके से बताओ।
पद्मा: ऐसा है बहुरानी, वो बहुत अच्छा टेलर है। आपके बड़े से बड़े ब्यूटीक में जो ब्लाउज स्टिच नहीं किया जाएगा उतना अच्छा और मॉडर्न तरीके से वो स्टिच करेगा। वो क्या बोलते हैं ना……………………………………………….. डीप नेक, स्लीवलेस और बैकलेस वो स्टिच करेगा….. लेकिन बहुरानी…………
(वो सोचती है बताऊँ कि नहीं)
पूजा: लेकिन क्या…..
पद्मा: हमने आपके यहाँ का नमक खाया है, हमारी रोजी-रोटी आपके वजह से चलती है।
पूर्वी: बातें मत बनाओ….. जो सच है वो बताओ।
पद्मा: वो हमारे करीम नगर में बहुत बदनाम है… शराब और औरत की वजह से…………………………..
उतना ही कमीना भी है। आप जरा सँभल के रहिए नहीं तो आपको भी बर्बाद कर देगा।
……… ज्यादा बोला होगा तो माफ कर देना।
अब पूर्वी और पूजा दोनों और ज्यादा कंफ्यूज हो जाती हैं।
थोड़ी देर बाद—
पूजा: भाभी अब क्या करें, इसने तो ज्यादा डरा ही दिया।
पूर्वी: कुछ नहीं होगा…. हमारा काम थोड़े देर का ही है… आप मुझे उसका नंबर दे दीजिएगा, हम आपके भैया को कॉल करके बता देंगे।
अब पूजा ने करीम का नंबर पूर्वी को दे दिया।
पूर्वी अरुण का नंबर लगा रही थीं लेकिन उसका मोबाइल स्विच ऑफ आ रहा था। तब पूजा ने ही ट्राई किया लेकिन मोबाइल स्विच ऑफ ही आ रहा था।
1 घंटा ट्राई करने के बाद दोनों ने सोचा कि अगर अरुण का फोन नहीं लगता तो खुद ही करीम को कॉल करती हैं।
रात के 8:30 बज चुके थे।
करीम अपने महौल में था। इस टाइम करीम हर रोज दारू चढ़ाए होता है और अपने किसी आइटम के घर में होता है या फुल दारू चढ़ाए होता है।
करीम एक निहायत बिगड़ा हुआ शराबी और शबाब का शौकीन रहने वाला आदमी था। अपने यहाँ आने वाली बहुत सारी औरतों और लड़कियों को सेड्यूस करके उसको चोदना और उनके पैसे पे आयरशी करना उसका काम था।
उसने अभी तक 4 शादियाँ की थीं। उसमें से दो बीबियाँ गुजर चुकी थीं और 2 उसके साथ रहती थीं। वो दो बीबियाँ कुछ नहीं बोल सकती थीं करीम के सामने। उसकी उम्र 58 थी, हाइट 6’1 थी, उसकी बॉडी एवरेज थी, इस उम्र में भी उसका पेट बाहर नहीं निकला था।
अब वो बहुत नशे में था।
पूर्वी ने अपने मोबाइल से 2-3 बार कॉल किया करीम को लेकिन उसका फोन भी स्विच ऑफ ही आया था।
पूर्वी: लगता है आज का दिन ही खराब है।
पूजा: भाभी जी, अपसेट मत हो, थोड़ी देर के बाद ट्राई करो कॉल लग जाएगी।
मैं जरा बाहर जाके आती हूँ।
पूर्वी 10-15 मिनट के बाद करीम को कॉल करती हैं।
इस बार कॉल कनेक्ट हो जाता है।
पूर्वी: हेलो।
करीम: बोल रांड…… क्या चल रहा है?
पूर्वी: मैं पूर्वी परवीन बोल रही हूँ।
करीम: तो रांड कहाँ चुदने आओ तुम, तुम्हारे घर आ जाऊँ या किसी होटल में?
पूर्वी: तुम क्या बात कर रहे हो, मैं पूर्वी अरुण परवीन बोल रही हूँ, MLA कांति शेठ की बहू बोल रही हूँ।
(कांति शेठ का नाम सुनते ही करीम की आधी शराब उतर जाती है…. तब वो समझ जाता है कि वो कोई नया कस्टमर है और वो कांति शेठ परवीन के घर से। वो अपनी जगह से खड़ा हो जाता है….)
करीम: हाँ तो बोलो ना….
पूर्वी: आप कैसे गंदी बात कर रहे थे?
करीम: वो मैंने आपको पहचाना नहीं… मैं आपको दूसरा ही कोई समझ बैठा था।
……… आपका काम क्या है?
पूर्वी: मुझे एक स्लीवलेस, बैकलेस, डीप नेक वाला ब्लाउज स्टिच करना है।
करीम: कल आके माप दे देना।
पूर्वी: आप हमारे घर आकर मेजरमेंट लेके जाना।
करीम: मैं किसी के घर आता नहीं हूँ……. अगर आपको जरूरत है तो मेरे यहाँ आकर माप दे जाना।
पूर्वी: तुम्हें पता है ना तुम किससे बात कर रहा हो….. मैं अगर ये बात मेरे पति या हस्बैंड से बोल दूँ तो क्या होगा पता है ना।
करीम: मैं नहीं आ सकता…… कोई भी होगा तो।
पूर्वी: तो तुम नहीं आओगे ना?
करीम: हाँ हाँ।
तभी पूर्वी बाहर अपने हस्बैंड अरुण की और अपने ससुर कांति शेठ की आवाज सुनती हैं……….. और गुस्से से मोबाइल कट कर देती हैं।
उधर करीम सोचता है जाने दो कोई भी होगा तो………… मैं किसी से नहीं डरता।
अब पूर्वी बाहर गुस्से हाल में चली आती हैं। उनका चेहरा देखकर कांति शेठ समझ जाते हैं कि ब्लाउज का मैटर अभी तक सॉल्व नहीं हुआ है।
कांति शेठ: क्या हुआ पूर्वी…. टेलर नहीं मिला क्या?
पूर्वी: मिला पापा, लेकिन वो मेजरमेंट लेने यहाँ नहीं आ रहा है।
कांति: मेरे घर आने को कौन मना कर सकता है।
अरुण: मैं उसको देखता हूँ।
कांति: अरुण तुम रुको, कौन है वो?
तब तक पानी लेकर पद्मा आ जाती हैं।
पद्मा: बड़े साहब, वो हमारे करीम नगर के करीम काका हैं…. थोड़े टेढ़े हैं।
कांति: उसका नंबर दे दो मैं देखता हूँ।
पूर्वी तब तक कांति शेठ को नंबर दे देती हैं।
कांति उस नंबर को अपने फोन से कॉल करता है।
कांति: मैं MLA कांति शेठ बोल रहा हूँ।
करीम: हेलो, शेठ जी।
कांति: करीम टेलर, तू मेरे बहू को क्या बोला रे?
(करीम अब सोचने लगता है कि लगता है उस रांड ने सब कुछ बता दिया क्या….. अब कांति के गुंडे मार देंगे शायद… दारू कुछ ज्यादा ही हो गई शायद…)
करीम: कुछ नहीं शेठ जी, मैं तो आपका नौकर हूँ, जो आप कहो वो कर दूँगा।
कांति: क्या कुछ नहीं….. तू यहाँ आने को नहीं बोल रहा था ना…. हरामखोर वहाँ मेरे आदमी भेज दूँ क्या?
(अब करीम की जान में जान आ गई.. वो समझ गया कि उस रांड ने आधा ही बता दिया है…. अच्छा हुआ… वो उतनी भी बुरी नहीं है… थोड़ी घमंडी लगती है…. देखते हैं कल कैसी दिखती है रांड)
करीम: नहीं शेठ जी मैं कल सुबह आपके घर आ जाऊँगा।
कांति: तो ठीक है कल आ जाना और मेरे बहू पूर्वी जैसे कहे वैसे ही ब्लाउज बना देना……. गड़बड़ मत करना…. मुझे कोई कंप्लेंट नहीं चाहिए… समझे।
करीम: जी, वैसे ही होगा जैसे पूर्वी मैडम चाहेंगी।
कांति शेठ पूर्वी को बताता है कि वो कल मॉर्निंग आ जाएगा।
पूर्वी अब खुश हो जाती हैं।
नेक्स्ट डे करीम की मॉर्निंग जल्दी ही हो गई थी। उसका पहराव नॉर्मल ही था। बाथ करने के बाद एक ब्लू शर्ट उसने पहन ली थी, वो ज्यादा मैली भी न थी न ज्यादा क्लीन भी नहीं थी। ऊपर का फर्स्ट बटन वो कभी नहीं लगाता था। उसकी पैंट एक पुरानी व्हाइट पैंट पहन लेता है। और सर पर एक टिपिकल टिक्की पहन लेता है। उसके पास एक पुरानी ब्लैक जावा वाली बाइक थी, जो उसे बहुत पसंद थी, उसपे से वो कांति शेठ के घर पहुँच जाता है, मॉर्निंग के 9:30 को।
कांति शेठ का घर एक बड़ा सा बंगला था। उसके वॉचमैन बड़े सख्त नेचर के थे।
वॉचमैन: कहाँ जा रहा है अंदर, बूढ़े?
करीम: बूढ़ा होगा तेरा बाप…………… मुझे शेठ ने बुलाया है….. करीम टेलर नाम है हमारा।
वॉचमैन: ठीक है पूछ लेता हूँ।
वॉचमैन अंदर कॉल लगाता है, पद्मा कॉल उठा लेती हैं।
पद्मा: उसे अंदर भेज दो।
करीम अंदर आ जाता है। पोर्च में ही उसे पद्मा मिल जाती हैं।
करीम: अरे रांड तू इधर कैसे?
पद्मा: मैं यहाँ काम करती हूँ। यहाँ जरा धीरे बोल….. जरा अच्छे बोल….. ये अपना करीम नगर नहीं है।
करीम: मुझे कुछ फर्क नहीं पड़ता……… तू तो बहुत फटाका बन गई है… लगता है एक बार चुदाना ही पड़ेगा।
पद्मा: इतने दिन याद नहीं आई क्या मेरे?
(तब करीम पद्मा के पास आ जाता है और उसके पीछे खड़ा हो जाता है…)
करीम: याद तो बहुत आई रांड…. लेकिन क्या करूँ तू कहाँ काम करती पता ही नहीं था।
(तब पीछे हाथ डालके करीम साड़ी और ब्लाउज के ऊपर से ही उसके आम को जोर से दबा लेता है)
पद्मा: आआआआआआह्ह्ह्ह्ह्हाआआ….. जरा धीरे से कमीने…. कोई सुन लेगा यहाँ।
तब करीम एक तरफ दोनों हाथों से दोनों आम दबाता है और दूसरी ओर उसके पेट को चूम लेता है।
पद्मा: करीम य्य्य्य्य्याआआहाआआ नहीं………………प्प्प्प्ल्ल्ल्ल्ज़ज़ज़ज़ज़………द्द्द्द्द्ध्ह्ह्ह्ह्हिर्र्र्र्रे से……. कोई देख्ह्ह्ह लेगा।
तब करीम एक हाथ साड़ी के ऊपर से चूत के ऊपर ले जाता है।
करीम: ये पूर्वी कौन है?
पद्मा: हमारी छोटी मालकिन हैं।
करीम: कैसा माल है?
पद्मा: तू अपनी आदत नहीं छोड़ेगा ना? वो बहुत अच्छे हैं..
करीम: माल कैसा है?
पद्मा: बहुत खूबसूरत हैं….. जो भी करना है सोच-समझके करना…. नहीं तो शेठ के हाथों से बहुत मार खाएगा।
तब करीम पद्मा की चूत को जोरदार मसल देता है साड़ी के ऊपर से…… तभी पद्मा की जोरदार चीख निकल जाती है।
पद्मा: उऊऊऊऊऊईईईईईईईईई……… म्मम्माआआआआआआआआ….
ये सीन घर के एंट्री वाला जो हॉल के बाहर एक छोटा सा पोर्च था उसके दरवाजे से थोड़े दूर पर चल रहा था। तभी किसी काम से लता वहाँ आ जाती हैं।
ये आवाज सुनते ही लता पद्मा को आवाज दे देती हैं।
लता: पद्मा… कौन है बाहर?
बड़ी मालकिन की आवाज सुनते ही पद्मा करीम से दूर हट जाती हैं।
पद्मा: कोई नहीं मालकिन ——– वो करीम टेलर आया है।
लता: उसे बाहर क्यों खड़ा किया है…. उसे अंदर लेके आ जाओ..
पद्मा: जी मालकिन।
करीम धीरे से पद्मा को पूछता है—
करीम: कौन है?
पद्मा: हमारी बड़ी मालकिन, लता जी, कांति शेठ की बेगम।
तब पद्मा और करीम बड़ा दरवाजा ओपन करके अंदर आ जाते हैं।
अंदर आते ही करीम एक खूबसूरत औरत को देख लेता है।
उसे देखकर ही वो पागल की तरह उस मॉडल को देखता रहता है।
और सोचता है— या अल्ला….. ये कांति शेठ की बीवी है… ये तो 30-35 की लगती हैं… ये अगर सास हैं तो बहू क्या माल होगी….. लगता है करीम तेरे यहाँ लॉटरी लगेगी….. सास यहाँ बहू…
उसे देखते हुए देखकर लता बोलती हैं—
लता: तू अच्छे से ब्लाउज सिला देगा ना?
करीम झट से बोलता है—
करीम: सिलने में मेरा हाथ कोई पकड़ नहीं सकता मैडम……. कौन सी चीज कहाँ इस्तेमाल करना मुझे अच्छे से पता है… मैडम।
लता: (हँसते हुए बोलती हैं) ठीक है, मेरी बहू पूर्वी अभी नहा रही हैं, थोड़ी देर में आएंगी, तुम हॉल में जाके बैठ जाओ।
करीम: जी मैडम।
अब करीम अंदर चला जाता है।
अंदर जाने के 4-5 मिनट बाद एक मस्त लड़की उस हॉल में सीढ़ियों से उतरती हुई आ जाती है।
उसे देखते हुए ही रह जाता है, जब वो फर्स्ट स्टेप पे थी तब से लेके लास्ट स्टेप पर आती है तब तक वो उसे देखता ही है।
एक पल के लिए भी वो अपनी आँख नीचे नहीं करता।
पूजा: कौन हो तुम….. और ऐसे घूर के क्या देख रहे हो?
तब पद्मा वहाँ आ जाती हैं।
पद्मा: दीदी जी, ये करीम टेलर हैं।
पूजा: वो हो तो तुम हो।
करीम: जी…. मैडम इस नाचीज को करीम टेलर कहते हैं।
पूजा करीम का ड्रेस और गंदगी देखकर थोड़ा साइड हो जाती हैं।
पद्मा: टेलर जी आपको उधर बहुरानी ने बुलाया है।
(तब करीम को पता लगता है कि ये पूर्वी नहीं हैं)
करीम: कहाँ जाना है…
पद्मा: मेरे पीछे आ जाओ।
पद्मा करीम को एक दूसरे रूम के तरफ ले जाती हैं।
जाते-जाते वो पूछता है—
करीम: ये कौन थी?
पद्मा: ये दीदी जी हैं, पूजा दीदी। ये शेठ की बेटी हैं।
करीम: यहाँ तो एक से एक बढ़कर माल है।
पद्मा: चुप कर और बहुरानी की तरफ चल।
उस रूम में करीम पद्मा के साथ एंट्री करता है….. और पद्मा करीम को वहाँ छोड़कर अपना दूसरा काम करने चली जाती हैं।
वहाँ एक औरत बाथ करके मेकअप करती हुई करीम को दिखती हैं।
पूर्वी अब करीम को देख लेती हैं।
करीम एक ब्लू शर्ट में था, वो भी थोड़ी गंदी थी। उसकी व्हाइट पैंट भी गंदी हो चुकी थी। शर्ट का ऊपर वाला बटन खुला था, करीम कभी शर्ट और पैंट के अंदर कुछ पहनता नहीं था, उस वजह से उसकी चेस्ट पूर्वी को खुली दिख रही थी। पद्मा के साथ आते वक्त उसने अपने मुँह में पान ठूस लिया था, उस वजह से उसके लिप्स पर पान का रेड जूस आ रहा था।
करीम के साँवले कलर पर वो पान का रेड कलर और साथ में गंदे ड्रेस देखकर पूर्वी को बहुत घिन आ रही थी। और उस टाइम करीम उसे घूरता ही जा रहा था। उनके काले बाल जो बाथ की वजह से और ही ज्यादा सेक्सी लग रहे थे। उनके रेड लिप्स को देखकर तो उसके मुँह को पानी आ रहा था। उसके नीचे जाते हुए वो पूर्वी के मम्मे देखता है, वो लगभग बाहर आने को तड़प रहे। करीम के कंट्रोल से अब ये बाहर हो जा रहा था। उसके नीचे जाते हुए करीम पूर्वी की पतली कमर देखता है। कमर को सोचते हुए वो जानना चाहता है कि इसकी गाँड कैसी होगी।
पूर्वी को लगभग करीम ऐसे कुछ मिनट तक देखता है और धीरे से बोलता है—
करीम: माशा अल्लाह!!!! क्या खुदा ने कारीगरी की है!!!!!!! लगता है बहुत ही फुर्सत से बनाया होगा इस मोहतरमा को!!!! सलाम इस खूबसूरती को करीम के तरफ से!!
इस धीरे से हुई आवाज को पूर्वी सुन लेती हैं। उन्हें लगता है ये ज्यादा ही घूर रहा है। करीम से ऐसे घूरने की वजह से उन्हें बहुत गुस्सा आ रहा था। अब वो सोचती हैं इसको रोकना ही पड़ेगा।
पूर्वी: हो गया क्या घूरना मुझे?
करीम: नहीं मोहतरमा, इस खूबसूरती को देखने के लिए तो सारी जिंदगी काम पड़ जाए शायद!!!!
पूर्वी: क्या!!!!! तुम्हारी ये नौटंकी यहाँ नहीं चलेगी, जो काम यहाँ कराने को आए हो वही काम करो, इधर-उधर झाँको मत नहीं तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा, पापा को बुला लूँगी। तुम जानते ही हो पापा आने के बाद क्या होने वाला है।
(ऊपर से उन्होंने बहुत गुस्सा दिखा दिया था लेकिन खुद की तारीफ सुनकर अंदर थोड़ी खुश हो गई थीं)
करीम: मैं तो उस काम में बहुत काबिल हूँ मोहतरमा (ये डबल मीनिंग सेंटेंस था)
पूर्वी: क्या????????
करीम: टेलरिंग के बारे में बोल रहा हूँ, मैडम।
पूर्वी: हा हा!! मैं जानती हूँ, वही करो जो करने आए हो।
करीम: यस, ऑफकोर्स मैडम।
तभी पद्मा अंदर आती हैं।
पद्मा: शेठ जी ने बुलाया है बहुरानी।
चलते हुए पूर्वी कहती हैं—
पूर्वी: चलो पापा ने बुलाया है।
करीम: चलिए बहू…… रानी (बहू धीरे से बोलता है और रानी वर्ड पे ज्यादा जोर देता है)
पद्मा गुस्से से करीम की ओर देखती हैं।
करीम: (हँसते हुए) हाँ आता हूँ।
अब कांति शेठ एक रूम में बैठे थे सोफे पे, करीम उनके एक साइड को खड़ा हो जाता है और पूर्वी दूसरे बाजू वाले सोफे पे बैठ जाती हैं एकदम करीम के अपोजिट साइड और शेठ जी के सामने वाले सोफे पे लता बैठ जाती हैं। करीम एक कॉर्नर में खड़ा होने की वजह से करीम की नजर कहाँ जा रही है वो कांति शेठ नहीं देख पा रहे थे न लता मैडम।
कांति: तो तुम हो करीम टेलर।
करीम: जी मालिक।
कांति: टेलरिंग अच्छे से करता है ना?
करीम: जो भी काम करता हूँ वो अच्छे से करता हूँ (पूर्वी की तरफ घूरते हुए)
कांति: तो ठीक है हमारे यहाँ तुम्हारे लिए बहुत सारा काम है, लेकिन काजल से पहले पूर्वी का काम अच्छे से करवा लो, बाद में बाकी का काम मिलेगा।
करीम: बहुरानी का काम तो मैं अच्छे से करवा दूँगा शेठ जी लेकिन दूसरे का किसी का काम है तो जल्दी बता दीजिएगा वो भी करा दूँगा।
(ये डबल मीनिंग बात वो पूर्वी के आम देखते हुए कह रहा था, और पूर्वी वो समझ चुकी थीं इस वजह से उन्होंने अपना पल्लू थोड़ा ठीक कर दिया)
कांति: वो काम तो लता मैडम आपको बता देंगी।
लता: हमारे घर में छोटे-छोटे बहुत सारे काम हैं टेलरिंग के लिए, सब घर को पहनने करने हैं, ये पर्दे पुराने हो गए हैं। सुना है तुम्हारी चॉइस बहुत अच्छी है।
करीम: हाँ मैडम, मेरी चॉइस तो बहुत अच्छी है, मैं ऐसे-वैसे चीजों को हाथ भी नहीं लगाता मैडम।
ये बात वो लता के आम को देखकर बोल रहा था, उस टाइम लता की साड़ी का पल्लू थोड़ा नीचे चला गया था और लता को वो समझ नहीं आया था लेकिन पूर्वी सब समझ गई थीं। पूर्वी समझ चुकी थीं कि ये आदमी बहुत कमीना लग रहा है मेरे मदर-इन-लॉ को भी नहीं छोड़ रहा है…. ये सोचते हुए उनके चेहरे पर थोड़ी सी हल्की सी स्माइल आ जाती है… ये स्माइल करीम देख लेता है।….. उसको लग रहा था कि अगर ट्राई किया जाए तो जाल में फँस सकती हैं पूर्वी…. उसने अपने मन में ठान लिया था कि अगर एक भी पट जाए इस घर की तो अपनी लाइफ बन सकती है।
कांति: लेकिन इसके लिए कुछ दिनों तक तुझे यहाँ रहना होगा, दिन भर यहाँ काम करके रात को अपने घर जा सकता है तू, तेरे काम के लिए यहाँ अपने पास दो मशीन हैं वो स्टोर रूम में अगर वो नहीं चल सकती हैं तो तेरी मशीन यहाँ उठा ला सकते हैं, हमारी गाड़ी में…. देख तू फाइनल कर कैसे कर सकता है…. अगर तेरे घर से काम करोगे तो तुझे बहुत तकलीफ होगी… बहुत छोटे-मोटे काम हैं तो उस वजह से तुझे बहुत सारे राउंड लगाने पड़ेंगे…… तू फाइनल कर।
ये बात सुनकर करीम बहुत खुश हो गया था… उसे तो यही चाहिए था…. वो अब सोच रहा था कि जिस काम को 1 दिन लगाना होगा उसे मैं 2-3 लगाऊँगा… अब तो मेरी लॉटरी लग गई।
कांति शेठ की ये बात सुनकर पूर्वी के चेहरे पर की स्माइल गुम हो गई…… वो तो ऐसा नहीं चाहती थीं…. वो तो उसे जल्द से जल्द यहाँ से भगाना चाहती थीं.. वो कुछ बोलना चाहती थीं.. उससे पहले ही करीम बोल पड़ा—
करीम: जी मालिक…. जैसा आप और बड़ी मालकिन चाहें वैसा ही होगा… मैं यहाँ रुक जाऊँगा… जितने दिन आप चाहो और जितना काम आप मुझसे करवाना चाहते हो वो मैं कर दूँगा……।
(ऐसे कहते हुए वो कातिल हँसी अपने चेहरे पर लाता है और पूर्वी की तरफ देखने लगता है….. पूर्वी समझ चुकी थीं अब कुछ फायदा नहीं है)
कांति: तुम अपना कुछ टेलरिंग का काम अगर पेंडिंग पड़ा है वो भी यहाँ से करवा लो….. और जितना काम अच्छे से करोगे उतना ही अच्छा अमाउंट मिलेगा…. किसीकी कोई तकलीफ नहीं होनी चाहिए… समझ गया।
करीम: जी शेठ जी मैं बहुत आराम से और बहुत प्यार से काम करूँगा… किसीको कोई तकलीफ नहीं होगी… मैं अपना घर समझकर ही अपना काम बड़े ही प्यार से करूँगा… (ऐसे कहते हुए वो पूर्वी की तरफ हँसते हुए देखता है)
पूर्वी के चेहरे पर एक बार फिर हल्की सी हँसी छूट गई थी….
शेठ: पूर्वी बेटा… सब ठीक है ना?
पूर्वी: पापा आप चाहते हो तो अच्छा ही होगा।
कांति: तो ठीक है, आज पूर्वी के ब्लाउज के देख लो, पूर्वी बेटा उसे वो स्टोर रूम और वहाँ की मशीन दिखा दो वो आज से काम शुरू कर देगा… मैं अभी ऑफिस जा रहा हूँ….. पूजा कहीं दिख नहीं रही है।
लता: वो कोई अपने फ्रेंड्स के घर गई हैं… कोई प्रोग्राम है वहाँ।
कांति: ठीक है मैं अब जा रहा हूँ…. करीम तुम काम अच्छे से करना।
करीम: जी शेठ जी।
तब कांति शेठ चला जाता है….. और थोड़ी देर में लता वहाँ से ये कहते हुए चली जाती हैं कि उसको अपना एक अच्छा सा फिटिंग ब्लाउज दो… वो आज ही स्टिच करा देगा।
पूर्वी: जी मम्मी जी।
अब वहाँ सिर्फ उस हॉल में करीम और पूर्वी रह गए थे।
करीम अब पूर्वी की तरफ बहुत लालची नजर से देख रहा था….. वो जिस तरह देख रहा था उससे तो ऐसा लग रहा था कि अब करीम डायरेक्टली पूर्वी को चोद ही लेगा…. पूर्वी अब थोड़ी सी खुल रही थीं लेकिन उनका पूरा गुस्सा चला अभी तक नहीं गया था.. उनके चेहरे पर थोड़ी सी स्माइल थी… थोड़ी सी ब्लशिंग थी….. करीम उनके बदन को देखते हुए ही धीरे-धीरे उनके पास आ रहा था.. जहाँ थोड़ी देर पहले कांति शेठ बैठे थे वहाँ तक करीम आ चुका था…. करीम को नजदीक आते हुए देखकर अब पूर्वी की नजर नीचे झुक चुकी थी…. अब करीम को लग रहा था कि पूर्वी अब शर्मा रही हैं….
थोड़ी देर की खामोशी के बाद करीम कहता है—
करीम: कहाँ से शुरू करना है मैडम…
पूर्वी: (ऊपर की ओर नजर करते हुए और थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए) ज्यादा स्मार्ट मत बनो… यहाँ कोई चालाकी नहीं चलेगी…… मैं तुम्हारे बारे में सब जानती हूँ।
करीम: क्या जानती हो मैडम मेरे बारे में आप?
पूर्वी: तुम्हें जो बुरी आदत है.. वो मैं सब जानती हूँ।
करीम: कौन सी बुरी आदत……. बहू… रानी (…… मेरी……. आदत)
रानी वर्ड ऐसे प्रोनाउंस कर रहा था कि जैसे बोल रहा है मेरी रानी।
पूर्वी: मैं जानती हूँ कि तुम अपने लेडीज कस्टमर के साथ क्या करते हो।
तब तक वो समझता था कि पूर्वी को उसकी शराब की आदत पता है लेकिन अब लेडीज कस्टमर के बारे में पूर्वी ने जब बात की तो उसे लगा कि पद्मा ने सब कुछ बता दिया होगा। अब वो पद्मा को मन ही मन में गालियाँ देने लगा था।
अब वो दूसरा दाँव चलाना चाहता था।
करीम: रानी जी… अब पद्मा के बात में मत आओ… वो ऐसे ही मेरे बारे में बोल गई होगी…. उसके पति का और मेरा एक बार झगड़ा हुआ था… तो उसका गुस्सा निकालने के लिए मेरे बारे में झूठ बोल गई होगी… मैं ऐसा नहीं हूँ।
रानी जी सुनते ही वो थोड़ा चौंक जाती हैं… इतनी जल्दी इसकी ये हिम्मत कि मुझे रानी बोलने लगा ये….. इस बात पे उसे गुस्सा भी आया था.. लेकिन साथ में उसे थोड़ा अच्छा ही लगा क्योंकि उनके हस्बैंड ने भी अभी तक उन्हें रानी नहीं बुलाया था….. वो बनावटी गुस्से से कहती हैं—
पूर्वी: मेरा नाम रानी नहीं है…. एक तो मुझे पूर्वी मैडम बोलो या बहुरानी बोलो…. रानी मुझे सिर्फ मेरे हस्बैंड ही बोल सकते हैं…. तुम नहीं।
करीम को लगा जरा जल्दबाजी हो गई शायद।
करीम: जी मैडम, आप जो भी कहेंगे वैसे ही होगा….. लेकिन मैं उतना बुरा ही नहीं हूँ….. मोहतरमा जी।
पूर्वी: फिर से तुम शुरू हो गए… ओनली पूर्वी मैडम या बहुरानी।
करीम: जी बहुरानी जी।
पूर्वी: वैसे मुझे पद्मा ने नहीं बताया ये सब…
करीम: तो किसने बताया?
पूर्वी: प्रिया ने…. प्रिया पटेल।
करीम: ये प्रिया पटेल कौन है.. मैं नहीं जानता हूँ उसे..
पूर्वी: वो मेरी ननद पूजा की फ्रेंड है…. उसकी भाभी के साथ आपका कुछ था…
अब करीम सोचने लगा कि ये प्रिया पटेल कौन…. वो सोचता है जाने दो मुझे क्या करना है….. लेकिन वो थोड़ी ही देर में वो समझने लगा कि इस पटेल के बारे में बात करके पूर्वी को थोड़ा खुलाना तो पड़ेगा ही.. अब वो मुझे तुम से आप पर आ गई थीं।
करीम: वैसे बहुरानी, मैं इस प्रिया पटेल को नहीं जानता न ही उसकी भाभी को नहीं जानता और आप जो बोल रही हैं ना कि उसकी भाभी के साथ मेरा कुछ था… तो इस कुछ के बारे में मैं नहीं जानता।
मेरा क्या था उसके साथ आप ही बता दो तो अच्छा रहेगा।
पूर्वी अब शर्मा जाती हैं और नीचे देखने लगती हैं.. और फिर गर्दन उठाकर करीम को देखने लगती हैं..
पूर्वी: तुम्हारा उसके साथ झगड़ा था।
करीम: झगड़ा मतलब… मैं कुछ नहीं समझा बहुरान्ननीईईई।
पूर्वी और ज्यादा शर्मा जाती हैं और नीचे गर्दन करके अपने दोनों हाथों में अपना चेहरा छिपा लेती हैं और बोलती हैं—
पूर्वी: मैं कुछ नहीं जानती..
और वहाँ से उठ खड़ी हो जाती हैं और ऊपर वाले फ्लोर को जाने के लिए निकलती हैं और जल्दबाजी में करीम के थोड़े पास से जाती हैं.. उनकी साड़ी का उड़ता हुआ पल्लू करीम के चेहरे को घिसते हुए जाता है।
करीम: वा क्या अदा है…… मेरी बहुरानी की… क्या खुशबू है…. मजा आ गया।
तब पूर्वी कहती हैं—
पूर्वी: ज्यादा स्मार्ट मत बनो– मेरा ब्लाउज ले जाके मेरा नया ब्लाउज स्टिच कर दो और मेरे नजदीक आने की कोशिश मत करो…. नहीं तो पापा को बोल दूँगी (अपने चेहरे पर गुस्सा दिखाते हुए बोलती हैं)
स्टेप के नजदीक जाते हुए पूर्वी कहती हैं—
पूर्वी: ऊपर आ जाओ मैं तुम्हें मेरा ब्लाउज देती हूँ…. बाद में स्टोर रूम में जाकर उसे स्टिच कर देना।
करीम अब घूमकर पूर्वी के पीछे आ जाता है और तब पूर्वी स्टेप चढ़ना शुरू कर देती हैं।
अब करीम के सामने पूर्वी की नंगी पीठ और उनकी 36′ की गाँड दिख रही थी।
करीम अब धीरे-धीरे पूर्वी के पीछे चला जाता है और पूर्वी ये जान चुकी थीं कि वो क्या देख रहा है… वो शर्माकर अपनी पीठ अपने साड़ी के पल्लू से छिपा लेती हैं….
करीम मन ही मन कहता है— साली नजारा भी नहीं देखने देते हैं।
अब पूर्वी उसके मास्टर बेडरूम में थीं। उनके पीछे करीम आ जाता है। वो बड़ी ही बढ़िया रूम थी…. एसी चल रहा था।
पूर्वी: बैठ जाओ उस चेयर में।
करीम एक चेयर में बैठ जाता है। थोड़ी देर के बाद पूर्वी एक ब्लाउज देती हैं…
पूर्वी: इस ब्लाउज का मेजरमेंट लेके नया ब्लाउज सिला देना।
करीम थोड़ा सोचने के बाद बोलता है—
करीम: आर यू श्योर??? पक्का ना मैडम….
पूर्वी: श्योर… श्योर….. पक्का… पक्का…. कुछ प्रॉब्लम है क्या????/
करीम: मुझे कुछ प्रॉब्लम नहीं है मैडम, अगर ब्लाउज लूज या टाइट हो गया तो मुझे नहीं बोलना बाद में।
पूर्वी: प्रॉब्लम क्यों होगा, अच्छे से मेजरमेंट लोगे तो लूज या टाइट नहीं होगा।
करीम: मैं तो यही बोल रहा हूँ….. अच्छे से मेजरमेंट लेने दो… ब्लाउज अच्छा ही आएगा।
पूर्वी: मेरा मतलब था कि इस ब्लाउज का ही मेजरमेंट ले लो… अच्छा आ जाएगा।
करीम: मैं तो ले लूँगा मैडम… लेकिन अगर मेजरमेंट चेंज हुआ होगा तो टाइट हो जाएगा।
पूर्वी: चेंज क्यों होगा?
करीम: मैडम आपकी शादी हुई है ना… और ये पहला ही साल है तो आपके आम का साइज चेंज होगा ही ना।
पूर्वी: क्या???/ आम…..
तब करीम उनके बूब्स के तरफ इशारा करता है।
पूर्वी: मेरे साथ गंदी लैंग्वेज बोलना नहीं है।
करीम: क्या गंदी लैंग्वेज… अब आम को आम नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे।
पूर्वी: उसे बूब्स या चेस्ट कहते हैं।
करीम: इंग्लिश में कहोगे तो अच्छा और हिंदी में कहोगे तो गंदी लैंग्वेज।
पूर्वी समझ गई थीं कि अब ये अपनी औकाद में आ गया है…. सब्जेक्ट चेंज करना ही बेहतर है… नहीं तो ये और आगे बढ़ेगा।

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