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मेरी दीदी बनी देसी रंडी 10

Didi ka nikah muslim mochi se sex story:- दोस्तों, पिछले पार्ट मे आपने पढ़ा कि सारे मर्द और औरतें जिधर निकाह हो रहा था चले गए थे और मैं भी उधर चला गया था। मौलवी निकाह के लिए बोलता है और सारे हाँ बोलते हैं।

अब आगे—

आगे पढ़ने से पहले पिछले पार्ट जरूर पढ़ लेना नहीं तो कहानी का मज़ा नहीं आएगा ==> मेरी दीदी बनी देसी रंडी 9

Didi ka nikah muslim mochi se hindi sex story

क़ाज़ी: तो शुरू करते हैं।

सब बोलते हैं: शुरू करो क़ाज़ी साहब।

क़ाज़ी: तो अकरम और नी…

ट्रर्र ट्रर्र ट्रर्र…… फोन की आवाज़ आई। सारे देखने लगे किसका फोन बजा।

फोन जीजा का था। जीजा ने फोन देखा और कॉल कट कर दी। जब जीजा ने कॉल देखा तो जीजा के चेहरे पर एक घबराहट जैसा भाव बन गया।

जीजा ने फोन जेब में रखा और बोले—

जीजा: माफ़ करना आप, शुरू करिए क़ाज़ी साहब।

क़ाज़ी: तो आज के दिन अकरम का निकाह नी…

ट्रर्र ट्रर्र ट्रर्र। फिर से फोन बजा। फोन वापस जीजा का ही था। जिस पर मौलवी और बाक़ी के सभी बोले—बात कर लो, कोई ज़रूरी होगा।

सुल्तान: भाई साहब जाकर बात कर लो।

जीजा: ठीक है, मैं करके आता हूँ।

जीजा के चेहरे पर एक अलग सा भाव था….

तो जीजा रूम के बाहर चले गए और वो किसी से कॉल पर तेज़ आवाज़ में बोले—

जीजा: क्यों बार-बार फोन कर रही हो?

उसके बाद की आवाज़ सुन नहीं पाया। शायद जीजा थोड़ा दूर चले गए होंगे। इधर क़ाज़ी—

क़ाज़ी: आप लोग अपना फोन बंद कर लो कि बार-बार परेशानी न हो।

इस पर सुल्तान बोला—

सुल्तान: अब कोई दिक्कत नहीं होगी क़ाज़ी साहब, आप शुरू करो।

क़ाज़ी: तो आज का निकाह अकरम का निकाह नीतू के साथ होने के लिए तय था।

क़ाज़ी: अकरम, तो आपको नीतू से निकाह क़बूल है?

अकरम: हाँ क़बूल है… क़बूल है… क़बूल है…

अकरम ने ये ऐसा बोला जैसे वो मर रहा हो निकाह के लिए या बोलें तो दीदी के लिए…..

फिर सब लोग ताली बजाने लगे। ये मेरा पहली बार था कि मैं किसी दूसरे धर्म की शादी देख रहा था…

क़ाज़ी: तो नीतू, आपको अकरम से निकाह क़बूल है?

दीदी: जी क़बूल है… क़बूल है………… क़बूल है।

दीदी के बोलने के बाद सारे लोग ताली बजाकर अकरम और दीदी को मुबारक बोलने लगे।

क़ाज़ी: तो आप दोनों का निकाह पूरा हुआ।

अब आप दोनों को क़ुरान में लिखे निकाह के वादे का आलम पढ़कर सुनाता हूँ जो कि बेगम और अपने शौहर के लिए करना ही पड़ता है और शौहर को अपनी बेगम के लिए करना होता है।

क़ाज़ी फिर आलम पढ़ने लगते हैं और बाक़ी सब ग़ौर से सुन रहे होते हैं। तभी मेरा फोन जेब में रखा वाइब्रेट हो रहा होता है। तो मैं उसे जेब से निकालकर देखता हूँ। फोन मम्मी का था। तो मैं बात करने के लिए रूम से बाहर जाता हूँ और हेलो-हेलो करता हूँ। सामने से मम्मी की आवाज़ साफ़ नहीं आ रही थी। मेरे नेटवर्क फुल नहीं आ रहे थे। तभी मुझे जीजा वापस से निकाह वाले रूम में जाते हुए दिखे तो मैं उनके पास जाकर बोलता हूँ—

मैं: जीजा जी, ज़रा अपना फोन दिखाना। मम्मी की कॉल आ रही है और मेरे फोन में नेटवर्क नहीं आ रहे हैं।

जीजा: अच्छा ठीक है, ये लो।

मैंने जीजा से फोन ले लिया और जीजा निकाह के रूम में चले गए। लेकिन जीजा अभी भी घबराए से हुए लग रहे थे।

तो मैं जल्दी से मम्मी को फोन लगाता हूँ और बात करता हूँ। मम्मी से थोड़ी-बहुत बात होती है। मैं मम्मी को बाद में करने के लिए बोल देता हूँ और रूम में जाने लगता हूँ।

तभी जीजा के फोन पर किसी का मैसेज का नोटिफ़िकेशन आता है। तो मैं जैसे ही देखता हूँ तो वो मैसेज एक पूजा नाम की लड़की का होता है और उसका मैसेज था—

पूजा का मैसेज: धोखेबाज़ तुम कहाँ चले गए।

ये लड़की जीजा को धोखेबाज़ क्यों बोल रही है? जीजा ने ऐसा क्या कर दिया?

तो मैं व्हाट्सऐप खोलता हूँ और मैसेज देखता हूँ। उस लड़की ने जीजा को बहुत सारे मैसेज कर रखे थे—

धोखेबाज़ तुम कहाँ भाग गए
मैं तुमको छोड़ूँगी नहीं हरामी
जल्दी बताओ तुम कहाँ हो
तुमने पूरी बात होने से पहले कॉल कैसे काट दी

मुझे समझ नहीं आ रहा था कि ये क्या चल रहा है। तो मैं स्क्रॉल करते-करते उस दिन पर आ जाता हूँ। ये टाइम जीजा के घर आने से 2 दिन पहले का था।

जैसे ये चैट थी मैं समझ गया जीजा का इस लड़की के साथ चक्कर चल रहा है। इन दोनों के बीच में ये किस बात पर लड़ाई हो रही है….. और जीजा भी दीदी की तरह निकले। जीजा का चक्कर चल रहा है। तभी जीजा इतने महीने बाद घर आते हैं। अब समझ गया मैं…

पूजा और जीजा की चैट

पूजा: बेबी तुमको एक सरप्राइज़ देना है।

जीजा: कौन सा सरप्राइज़ डार्लिंग?

पूजा: रुको मैं तुमको दिखाती हूँ।

जीजा: आज कौन सी ड्रेस पहन रखी है बेबी जो सरप्राइज़ दिखाना है?

तभी पूजा एक फोटो भेजती है और वो फोटो थी जिससे प्रेग्नेंसी चेक करते हैं।

जीजा: ये क्या है?

पूजा: ठीक से देखो।

जीजा: क्या तुम प्रेग्नेंट हो….

पूजा: हाँ डार्लिंग।

जीजा: क्या बोल रही हो.. मज़ाक तो नहीं कर रही?

पूजा: नहीं डार्लिंग ये सच है। मैं तुम्हारे बच्चे की माँ बनने वाली हूँ।

जीजा: ऐसा नहीं हो सकता। मैंने तो कंडोम पहन के सेक्स किया था। ये बच्चा मेरा नहीं हो सकता।

पूजा: क्या? तुम्हारा मतलब क्या है? ये बच्चा तुम्हारा नहीं है तो किसका है?

जीजा: वही तो तुम्हें ही पता होगा किसका बच्चा है। क्या पता तुम किसके साथ सोई हो।

पूजा: तुम्हारी ऐसा कहने की हिम्मत कैसे हुई?

जीजा: सही कह रहा हूँ। ज़रूर तुम बॉस के साथ सोई होगी। ये उन्हीं का बच्चा होगा और तुम मेरे सर थोप रही हो।

पूजा: तुम ऐसी बात कैसे कर सकते हो? मैं तुमसे प्यार करती हूँ और तुम बोल रहे हो कि मैं बॉस के साथ चु…

जीजा: क्या प्यार? हमने बस मज़े के लिए सेक्स करते थे कि तुम्हारी और मेरी नीड पूरी हो सके। इसमें प्यार कैसे आ गया?

पूजा: प्यार… प्यार कैसे आ गया…
तुम्हें ये मज़ाक लग रहा है जो तुमने मेरे साथ किया….
…तुमने जो मुझको प्रपोज किया था उसका क्या?

जीजा: मैंने तो बस ऐसे ही किया था। कोई प्यार-वायर नहीं है। मुझको तुमको… ये बच्चा गिरा दो।

पूजा: बच्चा गिरा दूँ? कैसे गिरा दूँ…

जीजा: मैं नहीं जानता। तुम जो बोल रहा हूँ वो करो। कल हम मिलेंगे और हॉस्पिटल जाकर ये बच्चा गिरवा देंगे।

पूजा: ठीक है….

उसके अगले दिन (जीजा के आने के 1 दिन पहले) शाम का मैसेज—

तुम कॉल क्यों नहीं उठा रहे
जल्दी कॉल उठाओ कहाँ चले गए तुम

पूजा: तुम जल्दी-जल्दी से मेरे कॉल या मैसेज का रिप्लाई करो।

पूजा: तुम इस वजह से तो ग़ायब नहीं हुए ना कि ये बच्चा 1 महीने का है और ऐसे गिरा नहीं सकते।
जल्दी जवाब दो। तुमने वादा किया था हॉस्पिटल में कि मैं थोड़ी देर में आ रहा हूँ। जल्दी जवाब दो।

उसके बाद आज जीजा के आने के बाद मैसेज—

कहाँ हो तुम जल्दी बताओ। कॉल क्यों नहीं उठा रहे। अगर तुम नहीं आए तो मैं पुलिस स्टेशन चली जाऊँगी। जल्दी रिप्लाई करो।

जीजा ने कोई रिप्लाई नहीं दिया था।

और अभी का मैसेज—कहाँ पर हो तुम हरामी। अगर तुम नहीं आए तो मैं कल पुलिस स्टेशन चली जाऊँगी।

मतलब जीजा उधर से इसलिए भागकर आए हैं। उन्होंने झूठ बोला। उनकी कोई कंपनी बंद नहीं हुई है। मतलब जीजा का चक्कर चल रहा था और वो उसके बच्चे के बाप बनने वाले हैं।

मेरा तो दिमाग़ ख़राब हो गया ये सब पढ़कर। इधर दीदी जीजा को धोखा दे रही हैं और उधर जीजा दीदी को। दोनों अलग-अलग गुल खिला रहे हैं। मुझे समझ नहीं आ रहा मैं क्या करूँ। तभी—

जीजा के फोन पर उस पूजा का फोन आता है। मैं फोन जीजा के पास ले जाकर जाता हूँ और जीजा से बोलता हूँ—

मैं: जीजा जी, किसी का फोन आ रहा है।

जीजा: दिखाओ।

जीजा फोन देखकर डर जाते हैं और मुझसे बोलते हैं—

जीजा: राहुल अपनी दीदी से मत बताना कि किसी लड़की का फोन आया है नहीं तो वो बेफ़ालतू का शक करेगी। ये मेरी कलीग का फोन है।

मैं बस “ठीक है” बोल देता हूँ।

जीजा फोन लेकर बाहर की तरफ़ जाने लगते हैं। मैं भी उनके पीछे चला जाता हूँ।

जीजा एक कोने में जाकर बात करने लगते हैं और मैं दूर से उनकी बात सुनने लगता हूँ।

जीजा: तुम बार-बार फोन क्यों कर रही हो…
मैंने कहा ना मैं नहीं आ रहा…
ये बच्चा मेरा नहीं है। मैं नहीं जानता तुमको जो करना है करो।

सामने से वो कुछ बोलती है और जीजा डर जाते हैं और थोड़ा डर से बोलते हैं—

जीजा: तुम पुलिस स्टेशन में हो? ऐसा मत करो। FIR मत लिखवाओ। मैं बर्बाद हो जाऊँगा।

सामने से कुछ बोलती है।

जीजा: मुझे माफ़ कर दो प्लीज़। FIR मत लिखवाओ। मेरी शादी टूट जाएगी। मैं डर गया था। मुझे माफ़ कर दो।

सामने से…

जीजा: नहीं नहीं मुझे माफ़ कर दो। मैं नहीं आ सकता।

सामने…

जीजा: ठीक है कल आ जाऊँगा। प्लीज़ अभी नहीं आ सकता।

सामने से…

जीजा: कैसी बात कर रही हो? मैं अभी कैसे आ सकता हूँ? समझो।

सामने से…

जीजा: ठीक है मैं आता हूँ। तुम FIR मत लिखवाओ।

उसके बाद जीजा कॉल कट देते हैं और निकाह वाले रूम में जाने लगते हैं। मैं जल्दी से भागकर निकाह के रूम में चला जाता हूँ।

इधर निकाह पूरा हो गया था। सब खाने जाने वाले होते हैं। अकरम, सुनीता, दीदी, निर्मला, सुल्तान, अब्दुल, सलीम बातें कर रहे होते हैं। तभी जीजा आते हैं।

जीजा: नीतू चलो, शादी हो गई ना। हमें घर जाना है। चलो जल्दी।

अकरम: बेटा क्या हो गया? कल चले जाना।

जीजा: नहीं अंकल, हमें जाना है।

दीदी: क्या हो गया? आप गुस्से में क्यों हैं?

जीजा: मैं कहाँ गुस्से में हूँ।

दीदी: देखो अपने आप को। बताओ क्या हुआ।

जीजा: अरे कुछ नहीं। मुझको अभी जल्दी से वापस चेन्नई जाना होगा।

दीदी: क्यों? आपकी कंपनी तो बंद हो गई थी ना?

जीजा: मैं तुमको बाद में बताऊँगा। जल्दी चलो।

अकरम: बेटा ऐसा करो तुम चले जाओ। मैं नीतू को कल छोड़ दूँगा।

जिस पर दीदी बोलती हैं—

दीदी: आप चले जाइए। मैं कल आ जाऊँगी।

जीजा: पागल हो क्या? मैं तुमको इधर कैसे छोड़कर जा सकता हूँ।
चलो तुम भी।

तभी सलीम बोलता है—

सलीम: भाई साहब आप चले जाओ। मैं कल अम्मी को घर छोड़ दूँगा।

जीजा: क्या-क्या बोले तुम?

सुल्तान: अरे भाई साहब ये अप्पी बोल रहा है।

सुनीता: हरीश जी हम भी तो आज इधर ही रुकने वाले हैं। रहने दीजिए ना नीतू को इधर।

निर्मला: रुकने दीजिए ना।

तभी अब्दुल ग़लती से बोलता है—

अब्दुल: अभी तो सुहाग…

और चुप हो जाता है।

जीजा: क्या..?

सुनीता: (अब्दुल को आँख दिखाते हुए) कुछ नहीं। रुकने दीजिए ना हरीश जी।

जीजा: चलो ठीक है। लेकिन कल सुबह छोड़ देना जल्दी से घर।
और तुम नीतू जल्दी चली जाना।

दीदी: (ख़ुशी से) ठीक है, चली जाऊँगी।

जीजा: तो मैं जा रहा हूँ। जैसे मुझको टाइम मिलेगा तो तुमसे कॉल पर बात करूँगा।

दीदी: ठीक है।

जीजा: राहुल अपनी दीदी का ख़्याल रखना।

मैं: ठीक है जीजा जी।

उसके बाद जीजा जी उधर से निकलते हैं और हम ही जीजा को कार तक छोड़ने जाते हैं।

दीदी: बाय।

जीजा: बाय। अपना ख़्याल रखना।

दीदी: ठीक है। आप भी ख़्याल रखना।

फिर जीजा उधर से निकल जाते हैं।

अब्दुल: अच्छा हुआ वो चला गया। अब तो अकरम भाई आपके मज़े हैं आज तो भाभी के साथ……

इस पर सब लोग हँसने लगते हैं। मैं बस उनकी बात खड़ा-खड़ा सुन रहा था। तभी—

सलीम: (अकरम के पास जाकर) अब्बू ये नई अम्मी के भाई का क्या करना है बताओ।

अकरम: क्या-क्या करना है..

सलीम: मतलब इसको अगर पता चल गया कि निकाह आपका और इसकी बहन का हुआ है तो…

अकरम: इसको सब पता है…

सलीम: क्या अब्बू? सच? इसको पता है उसके बाद भी ये अपनी बहन का निकाह करवा रहा है?

अकरम: हाँ।

सुनीता: तब अब आगे क्या करना है कि इधर ही बस बातें करते रहोगे?

सलीम: अरे अब्बू नई अम्मी को लेकर घर चलो। नई अम्मी को सबसे मिलवाना पड़ेगा ना और उधर ही आपकी और नई अम्मी की सुहागरात भी हो जाएगी।

इस पर दीदी शर्माने लगती हैं।

अब्दुल: अकरम भाई सलीम सही बोल रहा है। चलते हैं आपके घर ही।

सुनीता: हाँ अकरम जी चलते हैं।

अकरम: ठीक है चलो सब लोग।

तो सलीम एक रिक्शा का जुगाड़ करता है लेकिन एक रिक्शा में सब कैसे आएँगे।

सलीम: अरे अब्बू पहले आप और अब्दुल और सुल्तान अंकल बैठिए। आप लोगों की गोद में अम्मियाँ बैठ जाएँगी। क्यों अम्मी बैठ जाओगी ना?

निर्मला: हाँ मैं तो बैठ जाऊँगी।

सुनीता: मैं तो अकरम जी की गोद में ही बैठूँगी वरना नहीं जाऊँगी।

अकरम: फिर नीतू कहाँ बैठेगी?

सुनीता: सुल्तान मियाँ की गोद में बैठ जाएगी। क्यों नीतू बैठ जाऊँगी?

दीदी: (शर्माने लगी हैं) नहीं मैं अकरम जी के अलावा किसी और की गोद में नहीं बैठ सकती।

अकरम: (इस पर बड़ा ख़ुश होता है)

सलीम: सुनीता अम्मी आप बैठ जाओ सुल्तान अंकल की गोद में।

सुल्तान: वो तो आज बैठेगी ही। (और हँसने लगता है)

इस पर सुनीता सुल्तान के कंधे पर हल्का सा थप्पड़ मार देती है और हँसने लगती है।

निर्मला: नीतू वैसे भी तुम आज पूरी रात अकरम जी की गोद में ही बैठने वाली हो तो बैठने दो ना सुनीता दीदी को।

इस पर दीदी शर्मा जाती हैं।

अकरम: नीतू बेगम बैठ जाओ सुल्तान की गोद में। देवर है तुम्हारा।

दीदी: अब आप भी अकरम जी…

अकरम: क्या हो जाएगा? बैठ जाओगी तो।

दीदी: कुछ नहीं। ठीक है बैठ जाती हूँ।

इस पर सुल्तान बड़ा ख़ुश होता है।

इसके बाद सारे—अकरम पहले कोने में बैठ जाते हैं, उनकी गोद में सुनीता बैठ जाती है। उसके बाद अब्दुल बैठ जाते हैं, उनकी गोद में निर्मला बैठ जाती है। उसके बाद सुल्तान बैठ जाते हैं।

दीदी खड़ी-खड़ी कुछ सोचने लगती हैं। तभी—

सलीम: अम्मी जल्दी बैठो, चलना है।

उसके बाद दीदी अंदर घुसती हैं और सुल्तान की गोद में बैठती हैं। जैसे ही दीदी सुल्तान की गोद में बैठती हैं उसका लंड पूरी तरह से इरेक्ट हो जाता है।

मैं और सलीम आगे बैठ जाते हैं। उसके बाद हम जाने लगते हैं। रास्ता बहुत ख़राब था। ऑटो बहुत हिल रही थी और दीदी गेट के पास ही बैठी थीं।

सुल्तान दीदी की कमर को दोनों तरफ़ से पकड़ लेता है। जिस पर दीदी थोड़ी शॉक हो जाती हैं और बोलती हैं—

दीदी: आप क्या कर रहे हो?

सुल्तान: भाभी ऑटो हिल रही है। आप गिर न जाएँ इसलिए पकड़ा है।

दीदी: रहने दीजिए। मैं सँभाल लूँगी।

सुल्तान: आप गिर सकती हैं।

अकरम: पकड़ने दो बेगम। तुम गिर जाओगी तो दिक्कत हो जाएगी।

दीदी फिर कुछ नहीं बोलतीं। सुल्तान ऐसे ही दीदी की कमर पकड़कर रखता है।

हम जैसे-जैसे अकरम के घर की तरफ़ जा रहे थे तो एक रास्ता आता है बहुत ही ख़राब। आप जानते ही होंगे गाँव की सड़क कैसे होती है।

वो रास्ता ऐसा था कि जिसके कारण ऑटो बहुत ज़्यादा उछल रही थी। जिसके कारण दीदी, सुनीता और निर्मला भी गोद में उछलने लगे। मैं ये आगे शीशे में देख रहा था। मुझे तो ये लग रहा था कि दीदी सुल्तान के लंड पर उछल-उछल कर चुद रही हैं और सेम ऐसे ही निर्मला और सुनीता का भी लग रहा था।

ऑटो जैसे हिल रही थी अब्दुल ने तो निर्मला आंटी को पूरा कसकर पकड़के पीठ से पूरा चिपका दिया था और उसके बग़ल में दीदी सुल्तान की गोद में उछल रही थीं। सुल्तान दीदी की कमर को मसल रहा था साथ ही दीदी की नरम-नरम गाँड को महसूस कर रहा था। सुल्तान का फेस देखकर ऐसा लग रहा था कि वो जन्नत में है।

ऐसे ही हम जा रहे थे कि दीदी की एकदम से आाह्ह्ह्ह निकली।

अकरम: क्या हुआ बेगम?

दीदी: कुछ नहीं।

सुनीता: (हँसते हुए) लगता है सुल्तान मियाँ का कुछ चुभ गया।

निर्मला: यही लगता है दीदी। (और हँसने लगी)

इधर दीदी भी रंडी की तरह मुस्कुरा दीं। दीदी का अब फेस का एक्सप्रेशन बदल गया था। अब लग रहा था कि दीदी को भी बहुत मज़ा आ रहा है सुल्तान की गोद में बैठकर।

हम ऐसे ही आगे बढ़ते हैं कि सुल्तान दीदी के कान में कुछ बोलता है और दीदी इस पर मुस्कुरा देती हैं।

और दीदी हल्की सी खड़ी होती हैं। उसके बाद सुल्तान कुछ करता है जो कि मुझे शीशे से नहीं दिखता क्योंकि दीदी सामने थीं। उसके बाद सुल्तान दीदी को अपनी गोद में बिठाता है कमर पकड़कर। मुझे इस टाइम ऐसा लग रहा था कि सुल्तान दीदी को अपने लंड पर बिठा रहा है और दीदी बैठ रही हैं।

जैसे ही दीदी बैठीं दीदी का फेस का एक्सप्रेशन कुछ अलग सा लगा। दीदी पहले जो पूरी तरह से सुल्तान की गोद में बैठी थीं अब हल्की सी उठी हुई थीं और अकरम का एक हाथ दीदी के पीछे था जो कि मुझे नहीं दिख रहा था। और दीदी का फेस ऐसा था जैसे दीदी को दर्द और मज़ा दोनों आ रहा है।

ऐसे ही हम आगे बढ़ते रहते हैं। दीदी का फेस का एक्सप्रेशन वही रहता है। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है।

उसके बाद ऑटो एक घर के सामने रुकती है जो काफ़ी बड़ा नहीं था, एवरेज सा था। बाहर से घर पर प्लास्टर नहीं हुआ था बस ब्रिक्स दिख रही थीं।

उसके बाद सलीम उतरता है। उसके बाद मैं भी उतरता हूँ। फिर दीदी उतरती हैं और जब दीदी उतरती हैं तो सुल्तान अपने हाथ से अपने घोटी के ऊपर हाथ रखकर कुछ छिपा रहा था।

ऐसे करते-करते सारे ऑटो से उतर जाते हैं। ऑटो वाले को पैसे देकर फिर ऑटो वाला चला जाता है।

सलीम: अब्बू आप इधर रुकिए। मैं अभी आता हूँ।

अकरम: क्यों? अंदर चलो।

सलीम: रुको अब्बू बस 5 मिनट।

अकरम: ठीक है।

सलीम घर में चला जाता है और हम बाहर वेट कर रहे थे कि तभी सुनीता की नज़र दीदी के पीछे पड़ती है गाँड पर।

सुनीता: नीतू तुम्हारे पीछे क्या लगा है?

दीदी: क्या लगा है मेरे पीछे?

फिर निर्मला भी देखती है।

निर्मला: ये तो कुछ सफ़ेद-सफ़ेद है।

और निर्मला उसको हाथ से छूती है तो वो चिपचिपा सा था। छूते ही निर्मला समझ जाती है कि ये क्या है और फिर सुल्तान से बोलती है—

निर्मला: सुल्तान जी आपने नीतू की लहंगा ख़राब कर दिया पीछे से।

सुल्तान: मैंने क्या कर दिया?

निर्मला: ये क्या है?

जिस पर सुल्तान देखकर हँस देता है। जिसे बाद में अब्दुल भी देखता है और बोलता है—

अब्दुल: अरे सुल्तान मियाँ भाभी जान के तरबूज़ ने तो तुम्हारा भी माल निकाल दिया।

दीदी: (ये सुनकर रंडी की तरह शर्मा जाती हैं)

सुनीता: तुम्हारा भी क्या मतलब है?

अब्दुल: तुमको बाद में बताऊँगा सुनीता जी।

उसके बाद सुनीता भी दीदी के पीछे लगे माल को हाथ में लेती है और दीदी के सामने ही मुँह में उँगली डालकर चूस जाती है।

दीदी: ये आप क्या कर रही हैं दीदी?

सुनीता: अब ये बर्बाद थोड़ी करूँगी। इससे फेस पर चमक आती है। देख मेरा फेस।

निर्मला: तुमको अकरम जी ने नहीं खिलाया क्या?

दीदी: (रंडी जैसे शर्माते हुए) हाँ किया है।

सुनीता: तो फिर शर्माना क्यों? ऐसे बर्बाद मत करो। तुम भी ट्राई करो।

उसके बाद निर्मला भी उँगली में लेकर उँगली चूसने लगती है।

जिससे देखकर दीदी को कुछ-कुछ होने लगता है, पता नहीं क्या।

निर्मला अपने उँगली में एक बार फिर से माल लेती है और इस बार दीदी की तरफ़ कर देती है।

निर्मला: तुम भी ट्राई करो।

दीदी: नहीं मुझको नहीं करना।

सुनीता: कर लो। कुछ नहीं होता।

दीदी: नहीं। (और शर्माने लगती हैं)

लेकिन निर्मला उँगली दीदी के होंठों पर ले जाकर चिपका देती है और दीदी के होंठों पर माल लग जाता है। जिस पर दीदी जैसे ही दीदी का मुँह खुलता है तो निर्मला अपनी उँगली दीदी के मुँह में घुसा देती है।

अब दीदी के पास कोई चारा नहीं था। दीदी अब उँगली को चूस लेती हैं। उसके बाद निर्मला उँगली निकाल लेती है और बोलती है—

निर्मला: कैसा लगा बताओ।

दीदी: कुछ नहीं बोलतीं और रंडी की तरह बस शर्मा जाती हैं।

ऐसे ही बाहर बात होती रहती है। तभी—

सलीम: (अंदर से) अंदर आ जाओ सभी।

फिर सब लोग अंदर जाने लगते हैं।

अकरम और दीदी आगे थे। उनके साइड में निर्मला और सुनीता थीं और उनके पीछे हम तीनों।

कहानी जारी रहेगी।

Next Part ==> मेरी दीदी बनी देसी रंडी 11

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