मेरी दीदी बनी देसी रंडी 8

Didi ki mochi se shadi ki kahani:- इससे पहले पार्ट तक तुमने पढ़ा था कि दीदी और अकरम शॉपिंग करने गए थे अपनी शादी के लिए, जहाँ उन्होंने बहुत मजे भी किए। उसके बाद दीदी घर आ गई थीं और हम सो गए थे।

अब आगे…

पिछला पार्ट यहाँ पढ़ें ==> मेरी दीदी बनी देसी रंडी 7

Didi ki mochi se shadi ki desi sex kahani

रोज की तरह मैं जब उठा तो दीदी नहाकर नाश्ता बना रही थीं और मैं भी दीदी के पास गया और जाकर सोफे पर बैठ गया। दीदी उस समय नाश्ता बना रही थीं। मुझे दीदी की पीठ दिख रही थी।

उस समय दीदी ने एक नॉर्मल ब्लू कलर की साड़ी पहनी थी, लेकिन दीदी ने जिस तरह से साड़ी पहनी थी, दीदी वैसे कभी भी नहीं पहनती थीं। दीदी पहले एक संस्कारी वाइफ की तरह अपने कपड़े पहनती थीं, जिसमें शरीर का कोई भी हिस्सा न दिखे। लेकिन दीदी ने आज साड़ी ऐसी पहनी थी, जिसमें दीदी का पूरा गोरा बदन दिख रहा था…

एकदम दूध की तरह मुझे दीदी की गोरी-गोरी पीठ दिखाई दे रही थी और दीदी की दिल को मोह लेने वाली कमर और उसके नीचे दीदी के दो गोल-गोल तरबूज की तरह दीदी की गाँड के दोनों फाँके। दीदी जब काम कर रही थीं तो हिल रही थीं, जिससे दीदी की गाँड की फाँकें जैसे हिल रही थीं। उसे देखकर मेरा भी मन दीदी की तरह डोलने लगा और मेरे दिमाग में चलने लगा।

और मुझे पता नहीं एक अलग सी फीलिंग आने लगी यह सोचकर कि आज दीदी और अकरम की निकाह होने वाली है। उसके बाद अकरम दीदी को किस तरह दीदी के शरीर का मजा लेगा। दीदी उस बूढ़े के नीचे रहेगी। वो दीदी के रसीले शरीर से अपने बूढ़े शरीर को अपनी बाँहों में लेकर सोएगा और दीदी भी उसके साथ जाने क्या-क्या करेगी।

मेरे दिमाग में यह सब चलने लगा और मुझे जलन भी हो रही थी कि अकरम को दीदी कैसे मिल गई। कहाँ दीदी और कहाँ वो। और दीदी इतनी संस्कारी बनती थीं, लेकिन अकरम ने ऐसा क्या जादू कर दिया कि दीदी ने अपने संस्कार भूलकर एक रांडी की राह पर चल दी। मुझे अपने ऊपर गुस्सा भी आने लगा कि मैं दीदी को रोकने के बजाय दीदी को उसके साथ रहने की खुली परमिशन दे दी थी। पता नहीं क्यों मुझे दीदी को दूसरे के साथ देखने में एक बहुत मजा सा आने लगा था और भी खासकर किसी गंदे बूढ़े के साथ।

मैं यह सब सोच रहा था कि तभी दीदी की नजर मुझ पर पड़ी और दीदी मुझसे बोलीं—

दीदी: अरे तू उठ गया… तूने बताया ही नहीं मुझको।

दीदी: क्या हुआ उधर क्या बैठा है?

राहुल: दीदी कुछ नहीं बस नहाने ही जा रहा था।

दीदी: तू अभी तक नहाया भी नहीं?

राहुल: नहीं दीदी बस जा ही रहा था कि मेरी नजर आप पर पड़ गई…

दीदी: तो क्या हुआ?

राहुल: कुछ नहीं दीदी जा रहा हूँ बस।

दीदी: जा जल्दी जा। नाश्ता रेडी होने वाला भी है और हमारे पास ज्यादा टाइम भी नहीं है।

राहुल: क्यों दीदी क्या है आज?

दीदी: (थोड़ा शरमाते हुए) क्यों तुझे पता नहीं है?

राहुल: क्या दीदी?

दीदी: अरे आज अकरम जी और मेरी…

मैं दीदी के मुँह से सुनना चाहता था। मुझे दीदी के मुँह से अकरम के बारे में सुनने में पता नहीं क्यों एक अलग सा मजा आता है।

दीदी जब मुझसे बात कर रही थीं तो दीदी बहुत ज्यादा शरमा रही थीं।

राहुल: क्या दीदी? क्या अकरम अंकल और आप?

दीदी: (शरमाते हुए धीरे से बोलीं) आज हमारी शादी है।

राहुल: (भूलने का नाटक करने लगा) अरे हाँ दीदी मैं तो भूल ही गया था।

दीदी शरमाने लगीं।

राहुल: दीदी आप तो बड़ी खुश दिख रही हो।

मैं दीदी से मजे लेने लगा।

दीदी: अरे ऐसा कुछ नहीं है।

राहुल: आपका चेहरा तो देखो कैसे लाल हो गया है अकरम अंकल से शादी के नाम पर।

दीदी: चल बदमाश जल्दी जा नहाकर आ।

मैं फिर नहाने चला गया।

मैं नहाकर आया तो दीदी ने नाश्ता लगा दिया था। उसके बाद हमने नाश्ता किया और तभी दीदी के फोन पर अकरम का फोन आया।

दीदी अकरम से बात करने अपने कमरे में चली गईं।

दीदी ने कॉल पिक अप किया। उसके बाद उन दोनों की बात शुरू हुई, जो मैं अपने फोन में सुन रहा था।

अकरम: हेलो बेगम।

दीदी: हेलो अकरम जी।

अकरम: कैसी हो बेगम साहिबा?

दीदी: अकरम जी अभी बेगम बनी नहीं हूँ।

(और हँसने लगीं)

अकरम: तो आज तो बन भी जाओगी।

दीदी इस पर कुछ नहीं बोलीं, बस खिलखिलाकर हँस दीं।

अकरम: और बताओ बेगम साहिबा सब तैयार है या नहीं?

दीदी: क्या अकरम जी?

अकरम: निकाह के लिए सब तैयार है ना?

दीदी: हाँ अकरम जी।

अकरम: अच्छा मैंने सब चीज की तैयारी कर ली है। 4 बजे का टाइम है आज।

दीदी: अच्छा अकरम जी।

दीदी: अच्छा फिर मेरे पास टाइम नहीं है। मैं आपसे बाद में बात करती हूँ।

अकरम: क्यों क्या हुआ बेगम?

दीदी: कुछ नहीं अकरम जी बस पार्लर जाना है।

अकरम: तुम्हें पार्लर जाने की क्या जरूरत है। तुम तो वैसे ही इतनी सुंदर लगती हो।

दीदी: रहने दीजिए आप।

अकरम: अरे मेरी डार्लिंग ठीक है चली जा।

दीदी: ठीक है जी।

उसके बाद दीदी मुझसे बोलती हैं—

दीदी: राहुल मैं पार्लर जा रही हूँ। थोड़ी देर में आ जाऊँगी ठीक है ना? और हमको 4 बजे जाना है। रेडी रहियो।

राहुल: ठीक है दीदी।

उसके बाद दीदी पार्लर के लिए चली जाती हैं 10 बजे और फिर 1 बजे आती हैं।

जब दीदी पार्लर से आई थीं तो मैं दीदी को देखता ही रह गया। दीदी का चेहरा इतना सुंदर दिख रहा था क्या बताऊँ। मेरी नजर दीदी से हट ही नहीं रही थी।

दीदी: क्या देख रहा है इतना?

राहुल: दीदी आज तो आप कमाल लग रही हो।

दीदी: अच्छा बाकी दिन बेकार लगती हूँ क्या?

राहुल: नहीं दीदी आप तो रोज ही सुंदर लगती हो।

दीदी: अच्छा कभी तो बोला नहीं तूने।

राहुल: अरे दीदी लगता है आज तो अकरम अंकल को आप मार ही डालोगी।

दीदी: (शरमाते हुए) कैसी बात कर रहा है राहुल।

राहुल: दीदी आज तो अकरम अंकल आपको देखकर पागल हो जाएँगे।

दीदी: चल हट।

फिर मैं दीदी से मजे लेने की सोचने लगा।

राहुल: दीदी आज अकरम क्या अकरम के दोस्त भी आपको देखकर पागल हो जाएँगे।

दीदी: कैसी बात कर रहा है।

(और शरमाने लगीं)

राहुल: कहीं उनके दोस्त आपको अकरम अंकल से चुराकर उठाकर न ले जाएँ।

दीदी: मेरे मजाक में मेरे सर पर एक थप्पड़ मार देती हैं।

राहुल: (दीदी से भागते हुए) दीदी जैसे आप केला लेने के लिए गई थीं, क्या पता आज भी उसके दोस्त शादी में आपको अपना-अपना केला न दे दें।

दीदी: रुक तुझे छोड़ूँगी नहीं।

राहुल: दीदी कैसे आप केला ले रही थीं अकरम अंकल के दोस्त का। दीदी आपने तो पूरा मुँह में ले लिया था।

(और हँसते हुए भागता रहा घर में इधर-उधर)

दीदी मेरा पीछा करते हुए—

दीदी: रुक बदमाश तुझे अभी बताती हूँ ऐसे बात करते हैं अपनी दीदी से।

(दीदी नकली गुस्सा कर रही थीं)

राहुल: दीदी आज कहीं शादी में अकरम के सारे दोस्त आपको केला न दे दें। आप तो ले भी नहीं पाओगी। उनका बहुत बड़ा और मोटा होता है।

दीदी ने मुझको पकड़ लिया और दीदी मुझको मजाक में मारने लगीं और बोलने लगीं—

दीदी: तू दिन पर दिन बिगड़ गया है बदमाश। तेरे दोस्त भी तेरे जैसे ही होंगे।

मैं दीदी से ऐसी ही मजाक कर रहा था कि तभी डोर बेल बजती है।

दीदी डोर खोलने जाती हैं।

दीदी जैसे ही डोर खोलती हैं तो सामने देखकर खुशी के मारे शॉक हो जाती हैं।

दीदी को गेट पर खड़ा देख मैं दीदी के पास जाता हूँ और देखता हूँ कि सामने मेरे जीजा हरिश खड़े थे।

जीजा: सरप्राइज!

दीदी: (दीदी जीजा को देखकर बहुत खुश हो गई थीं)

जीजा: अरे ऐसे क्या देख रही हो। अंदर भी तो आने दो।

दीदी: ओह्ह सॉरी आइए।

राहुल: जीजा नमस्ते।

जीजा: नमस्ते कैसे हो राहुल?

राहुल: ठीक हूँ आप बताओ।

जीजा: मैं भी ठीक हूँ।

दीदी: अरे वो सब छोड़ो आप इधर कैसे?

जीजा: इधर कैसे मतलब?

दीदी: वो आपका तो 4 महीने बाद छुट्टियाँ मिलनी थीं ना?

जीजा: तुम खुश नहीं हो क्या मेरे आने से?

दीदी: अरे ऐसी कोई बात नहीं है। मैं तो बहुत खुश हूँ। बस सरप्राइज हो गई आप को देखकर।

जीजा: तुम से ठीक से बात ही नहीं होती थी और कंपनी में थोड़े प्रॉब्लम के कारण कंपनी बंद हो गई है। इसलिए मैं आ गया।

दीदी: अच्छा चलो आप थक गए होंगे। पहले आप फ्रेश हो जाओ। उसके बाद बात करते हैं।

जीजा उसके बाद फ्रेश होने चले गए और दीदी उनके लिए कुछ बनाने चली गई थीं। इस टाइम 2 बज रहे थे।

दीदी जीजा के आने से बहुत खुश थीं…

दीदी जीजा के आने से भूल ही गईं कि आज दीदी की अकरम से निकाह है। उसके बारे में दीदी भूल ही गई थीं।

और मैंने भी दीदी को नहीं बताया। मुझे अब अच्छा लग रहा था कि जीजा आ गए। अब दीदी उस हरामी बूढ़े से नहीं मिलेगी।

दीदी कुछ बनाने लगीं तो जीजा भी फ्रेश होकर आ गए थे।

हॉल में मैं और जीजा जी बातें करने लगे और दीदी भी हमारे पास आ गईं।

दीदी जीजा के पास जाकर बैठ गईं।

जीजा: आज तुम बहुत सुंदर लग रही हो।

दीदी: (बस मुस्कुरा दीं)

ऐसे ही हम सब की बात हो रही थी। उसके बाद जीजा बोलते हैं—

जीजा: नीतू मैं थोड़ी देर सोने जा रहा हूँ। थक गया हूँ। शाम को हम कहीं बाहर चलेंगे घूमने।

दीदी: ठीक है आप आराम करिए।

उसके बाद जीजा आराम करने चले जाते हैं और मैं भी अपने कमरे में चला जाता हूँ क्योंकि बाहर बहुत गर्मी थी तो बाहर जाने का मन नहीं किया।

उस टाइम 3:30 हो रहे थे।

दीदी हॉल में बैठकर टीवी देख रही थीं। दीदी ऐसे ही टीवी देख रही थीं। टीवी देखते-देखते दीदी की भी आँख लग गई और दीदी भी सोफे पर सो गईं।

उधर अकरम और उसके दोस्त निकाह के लिए दीदी का वेट कर रहे थे। अकरम ने पूरी तैयारी कर ली थी लेकिन दीदी इधर आराम से सो रही थीं। जब 4 बज जाते हैं तो अकरम दीदी को फोन लगता है।

दीदी फोन नहीं उठातीं। ऐसे ही अकरम दीदी को 10 से ज्यादा कॉल लगाता है। दीदी कॉल नहीं उठा रही थीं। शायद दीदी का फोन म्यूट पर होगा।

जब शाम को 5 बजे दीदी की आँख खुली तो दीदी देखती हैं टीवी ऑन है। दीदी टीवी ऑफ करके अपना फोन चेक करती हैं तो उसमें अकरम के मिस्ड कॉल थे।

दीदी अकरम का मिस्ड कॉल देखकर शॉक हो जाती हैं क्योंकि दीदी को याद आता है दीदी को तो आज निकाह के लिए जाना था। दीदी को बहुत बुरा लगता है। दीदी को बहुत गिल्ट हो रहा था। उसने जीजा के पीठ पीछे अकरम के साथ क्या-क्या कर लिया। लेकिन दीदी को अकरम के साथ अच्छा भी लगता था। दीदी इस टाइम बड़ी मुश्किल में फँस गई थीं कि क्या करें। वो अकरम जो दीदी को कुछ टाइम पहले मिला है और दूसरी तरफ जीजा जी।

दीदी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें। अगर जीजा को पता चल गया अकरम के बारे में तो दीदी की पूरी लाइफ बेकार हो जाएगी और बदनामी होगी वो ही अलग। दीदी के दिमाग में यह सब चल ही रहा था कि तभी दीदी को अकरम का फोन आता है।

दीदी जल्दी से ऊपर छत की तरफ जाती हैं और कॉल उठाती हैं।

उधर अकरम बहुत गुस्सा था।

अकरम: हेलो (गुस्से में)

हेलो……..

हेलोओओओओओ

दीदी को समझ नहीं आ रहा था कैसे अकरम से बात करें।

दीदी: हेलो हेलो अकरम जी।

अकरम: कहाँ मर गई साली तू?

दीदी: अकरम जी सॉरी मुझे माफ कर दो। मैं भूल गई थी।

अकरम: तेरा मैं इधर कब से वेट कर रहा हूँ और तू कहाँ अपनी गाँड मरवा रही है।

दीदी: अकरम जी प्लीज गुस्सा मत करो।

पता नहीं क्यों दीदी को इस तरह गुस्सा अकरम पसंद आ रहा था। शायद दीदी ने अकरम को पति मान लिया था, जो अपने पति की बात न मानने के कारण गुस्सा हो रहा था और उसकी पत्नी उसको गुस्सा न करने के लिए बोल रही थी।

अकरम: गुस्सा न करूँ…. मैं तेरा इधर कब से इंतजार कर रहा हूँ और तू आई नहीं।

दीदी: अकरम जी मैं आपको समझती हूँ। पहले आप शांत हो जाइए।

अकरम: साली तू जल्दी इधर आ।

दीदी: अकरम जी मुझे माफ कर दो। मैं नहीं आ सकती।

अकरम: क्यों नहीं आ सकती। मैं कुछ नहीं सुनना चाहता।

दीदी: समझा करो अकरम जी। मेरे हसबैंड वो घर आए हुए हैं।

अकरम: क्या? वो कब आया?

दीदी: आज ही आए हैं 2 बजे।

अकरम: अकरम तू उसके लिए अपने शौहर को भूल गई।

दीदी: ऐसा नहीं है अकरम जी।

अकरम: तो क्या है?

दीदी: अकरम जी मुझे माफ कर दो। मैं नहीं आ सकती।

अकरम: तू आएगी। मैं नहीं जानता।

दीदी: माफ कर दो अकरम जी। मैं नहीं आ सकती।

दीदी को पता नहीं था कि दीदी के पीछे जीजा जी आ गए थे और उन्होंने दीदी की यह बात सुन ली कि “मैं नहीं आ सकती अकरम जी”।

जीजा: किस से बात कर रही हो?

दीदी: वो…..

जीजा: वो क्या बोलो।

दीदी: (दीदी घबराते हुए) क्या बोलूँ उनको समझ नहीं आ रहा क्या बोलूँ। तभी दीदी को एक आइडिया आता है।

दीदी: बाजार के पास एक मोची की शॉप है ना?

जीजा: हाँ है तो क्या हुआ?

दीदी: उन अंकल की आज शादी है…

जीजा: क्या उस बूढ़े की शादी है?

(और हँसने लगे)

दीदी: अरे आप कैसे बोल रहे हैं।

जीजा: पहले तो यह बताओ तुम उसको जानती कैसे हो?

दीदी: वो मैं अपनी सेंडल ठीक करने गई हूँ ना तो ऐसे ही बात होने लगी तो जान-पहचान हो गई।

जीजा: तुम पागल हो क्या? किसी से भी जान-पहचान बना लेती हो।

दीदी: वो अच्छे हैं हरिश।

जीजा: अच्छा अब तुम मुझे बताओगी?

दीदी: गुस्सा मत करो आप।

जीजा: गुस्सा नहीं कर रहा बस समझा रहा हूँ। वैसे लोगों से दूर रहा करो।

दीदी: क्या हरिश आप भी ना। वो अच्छे इंसान हैं।

जीजा: अच्छा ठीक है अब खुश…… तो क्या बोल रहे हैं वो?

दीदी: आज उनकी शादी है तो वो बुला रहे हैं।

जीजा: अरे उसको अभी भी शादी करनी है क्या?

दीदी: आप फिर शुरू हो गए।

जीजा: अच्छा बाबा अब नहीं बोलूँगा।

(अपनी हँसी रोकते हुए बोले)

दीदी: शादी में बुला रहे हैं। क्या करूँ?

जीजा: एक काम करो तुम दिखाओ। मैं बात करता हूँ उससे।

दीदी: आप क्या बोलोगे?

जीजा: दिखाओ तो।

दीदी: अच्छा ठीक है।

(घबराकर)

दीदी और जीजा की बात अकरम ने सुन ली थी तो वो बूढ़ा अब एक्टिंग करने लगा।

जीजा: हेलो….

अकरम: हेलो बेटा।

जीजा: सॉरी अंकल नीतू नहीं आ सकती शादी में।

अकरम: क्या हुआ बेटा? मना क्यों कर रहे हो?

जीजा: वो अंकल आज मैं इतने दिनों बाद आया हूँ तो मैं थोड़ा टाइम स्पेंट करना चाहता हूँ।

अकरम: बेटा शादी बार-बार थोड़ी न होती है।

इस पर जीजा को हँसी आ गई।

जीजा: सॉरी अंकल जी।

अकरम: बेटा आज की ही बात है। कल दोपहर तक मैं खुद घर छोड़ दूँगा।

जीजा: क्या? कल दोपहर को…

अकरम: क्या हुआ बेटा?

जीजा: नहीं अंकल मैं नहीं भेज सकता इतनी देर के लिए अनजान की शादी में।

अकरम: बेटा मैं अनजान नहीं हूँ….

जीजा: नहीं अंकल सॉरी। मैं नहीं भेज सकता।

अकरम के बार-बार बोलने पर भी जीजा जी मना कर दे रहे थे तो अकरम एक लास्ट बार बोलता है—

अकरम: बेटा तो आप भी साथ में आ जाओ ना।

जीजा: नहीं अंकल। न मैं आ सकता हूँ न ही नीतू को भेज सकता हूँ।

अकरम: बेटा आप साथ में आ जाओ। आपकी अच्छे से खातिरदारी की जाएगी।

जीजा: अंकल मुझे थोड़ा टाइम दीजिए। मैं सोचकर बताता हूँ।

अकरम: बेटा एक बार नीतू बेटी को फोन देना।

अकरम: सुन बेगम वो साला नहीं मान रहा तो तू उसके साथ आ जा। मैं सब प्लान कर लूँगा।

दीदी कुछ बोल नहीं रही थीं, बस हाँ हम्म कर रही थीं।

फिर अकरम ने फोन कट कर दिया।

दीदी: क्या बोल रहे थे अकरम जी?

जीजा: कौन अकरम जी?

दीदी: जिस से आप बात कर रहे थे।

जीजा: वो बूढ़े का नाम अकरम है।

दीदी: (थोड़ा शर्माई इस बात पर) हाँ।

जीजा: तुम नाम से बोलती हो उसको?

दीदी: हाँ क्या हो गया?

जीजा: कुछ नहीं।

जीजा: वो बोल रहा था शादी में आने के लिए और मुझको भी बुला रहा था।

दीदी: तो चलते हैं ना।

(खुश होकर)

जीजा: तुम बड़ी खुश हो रही हो।

जीजा को क्या पता था कि अकरम का निकाह किस से हो रहा है।

दीदी: आप भी ना। मैं कहाँ खुश हो रही हूँ।

जीजा: तुम्हारा मुँह तो देखो।

दीदी: तो सोचा आपने?

जीजा: तुम्हें जाने में खुशी हो रही है तो मैं तुमको मना कैसे कर सकता हूँ।

दीदी यह बात सुनकर एकदम खुशी के मारे उछलने लगीं और जीजा के गले लग गईं।

दीदी: आप कितने अच्छे हैं।

जीजा: तुम्हारी खुशी के लिए करना पड़ता है।

दीदी: चलो ना फिर हम रेडी होने चलते हैं।

जीजा: अभी इतनी जल्दी क्या करोगी। आराम से चलेंगे ना।

दीदी: अरे हमको जल्दी जाना पड़ेगा ना।

जीजा: क्यों?

दीदी: आप सवाल बहुत पूछते हैं।

जीजा: अच्छा बाबा चलो फिर।

उसके बाद जीजा और दीदी नीचे आने लगे। मैं जल्दी से नीचे चला गया और सोफे पर जाकर बैठ गया।

वो दोनों नीचे आए और दीदी बोलीं—

दीदी: राहुल जा जल्दी से रेडी हो जा। हमको शादी में जाना है।

राहुल: किसकी?

दीदी: अकरम अंकल की।

राहुल: क्या?

दीदी: हाँ जल्दी तैयार होने जा।

मुझे पता नहीं था कि उधर अकरम क्या सोच रहा है कि वो बूढ़ा जीजा के सामने ही मेरी दीदी से शादी करेगा क्या।

तो दीदी के बोलने पर हम तैयार होने चले गए और उधर

अकरम सोच में पड़ा था कि क्या करे। कैसे भी आज निकाह तो करना है। उसको दीदी से अब दूरी बर्दाश्त नहीं हो रही थी तो एक प्लान बनता है।

वो अपनी 2 पुरानी रांडियों को फोन करता है और उनको अपने निकाह में बुलाता है।

एक का नाम होता है सुनीता…. एज 45 साल।

दूसरी का नाम निर्मला एज 40 साल।

यह अकरम की रांडियाँ हैं जो उसने पटायी थीं जैसे उसने दीदी को पटायी थी वैसे ही अकरम ने इनको भी पटायी थी और इनसे भी निकाह कर रहा था और इन सब को खुद भी चोदता था और पार्टी में अपने दोस्तों के साथ मिलकर भी चोदता था।

तो वो कुछ बोल प्लान बनाकर उन दोनों को बुला लेता है।

इधर मैं और जीजा जी तो रेडी हो गए थे 15 मिनट के अंदर और हॉल में दीदी का इंतजार कर रहे थे।

जबकि दीदी उस टाइम से रूम में रेडी ही हो रही थीं।

वेट करते-करते हम बोर हो गए थे तो जीजा रूम के डोर के पास बोलते हैं—

जीजा: अरे कितना टाइम लगेगा।

दीदी: अरे बस हो गई रेडी। थोड़ी देर वेट कर लो।

जीजा: कब से वेट कर रहे हैं।

दीदी: बस थोड़ी देर और कर लो।

जीजा ठीक है। ऐसे ही हम हॉल में वेट करते रहे।

6:30 बज गए।

जीजा: (गुस्से में) कितनी देर से वेट कर रहे हैं।

तभी दीदी गेट खोलकर बाहर आती हैं।

दीदी: अरे क्यों गुस्सा हो रहे हो।

दीदी को देखते ही जीजा और मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं।

क्योंकि दीदी इतनी सेक्सी लग रही थीं क्या बताऊँ। उस कपड़े में दीदी क्लीवेज कुछ ज्यादा ही दिख रही थी। साथ में दीदी की जान लेने वाली नाभि और चिकनी कमर।

तभी जीजा बोले—

जीजा: अरे तुम तो ऐसे रेडी हुए हो जैसे तुम्हारी ही शादी है।

जीजा ने ऐसा इसलिए बोला था क्योंकि दीदी ने जो पहना था दीदी ने एक लाल रंग की शादी वाली लहंगा पहना था जैसे दुल्हन पहनती है और रेडी भी वैसी ही हुई थीं।

दीदी: क्या? नॉर्मल ही तो है।

जीजा: यह नॉर्मल है क्या? ऐसा लग रहा है कि तुम्हारी ही शादी हो रही है अकरम से।

दीदी: (इस पर शरमा गईं और बोलीं) कैसी बात कर रहे आप।

जीजा: सच बोल रहा हूँ। जाओ दूसरा कुछ पहनकर आओ।

इस पर दीदी बोलीं—

दीदी: सही तो है।

(और मेरी तरफ आँख मारकर बोलीं) क्यों राहुल?

मैं समझ गया दीदी मुझको हाँ करने के लिए बोल रही हैं तो मैं बोला—

राहुल: जीजा जी सही तो लग रहा है।

जीजा: क्या बोल रहे हो राहुल?

दीदी: सही तो बोल रहा है।

जीजा: तुम भाई-बहन से मैं नहीं जीत पाऊँगा। चलो फिर चलते हैं।

तो फिर हम घर से निकल गए और जीजा की कार में हम दीदी और जीजा के साथ जाने लगे, जो कि हमारे घर से 1:30 की दूरी पर था एक गाँव के पास।

आगे की स्टोरी नेक्स्ट पार्ट में।

More Stories

6 Comments

  1. Msg me on telegrm @mayank_narula
    I am from Delhi and best for girls who are not satisfied or want to talk for Josh

  2. So hot story pti khus na kr paye to lrki kehi tau jayegi usma c rau hq he bhai behut supporting he aisa akrm uncle hr lrki ki khwais

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *