भाभी ने दिलाई मम्मी की चूत 5
Mummy ki chut me mera lund gaya:- नमस्कार दोस्तों, मैं सुनीता हाजिर हूँ। आपके लिए इस सेक्सी स्टोरी का नेक्स्ट पार्ट लेकर आई हूँ। पढ़िए और मुझे मेल करना मत भूलना। सामने टीवी चल रहा था। और मम्मी करवट लेकर टीवी की तरफ लेटी हुई थीं। मैंने अपना खड़ा लंड अंडरवेयर से बाहर निकाला। और पेटीकोट के ऊपर से मम्मी की गाँड में लगा दिया।
Part 4 ==> भाभी ने दिलाई मम्मी की चूत 4
Mummy ki chut me mera lund gaya hindi sex story
मम्मी वैसे ही लेटी हुई टीवी देख रही थीं। और मैं हल्के-हल्के अपना लंड उनकी गाँड में डाल रहा था। अभी तक मम्मी ने कुछ नहीं बोला था।
मगर मैं चाहता था कि वो मुझसे कुछ बोलें। मैं हल्के-हल्के अपना लंड आगे धकेल रहा था। मैं अपने पैर से मम्मी के पैर को सहलाने लगा।
और हल्के-हल्के मम्मी का पेटीकोट ऊपर करने लगा। मगर तभी मम्मी ने मेरा हाथ रोक दिया। मम्मी वैसे ही लेटी रहीं। शायद मुझे देखना नहीं चाहती थीं।
मम्मी: बेटा ऐसा मत कर। ये सही नहीं है।
मम्मी मना तो कर रही थीं। मगर उनकी आवाज एकदम दबी हुई थी। जैसे एक गरम औरत मना करने पर भी करने को कह रही हो।
मैंने अपने होंठों को मम्मी की गर्दन पर लगा दिया। और अपनी जीभ से मम्मी की गर्दन को चाटने लगा। औरतों की गर्दन उनकी कमजोरी होती है।
मेरी जीभ मम्मी की गर्दन को चाट रही थी। और अब मेरा हाथ मम्मी के दूध को दबा रहा था। मम्मी के मुलायम-मुलायम दूध को दबाने में मजा आ रहा था।
मैंने मम्मी का पेटीकोट ऊपर कर दिया। मगर वो बार-बार उसे नीचे कर रही थीं। मगर आखिरकार उनका पेटीकोट पूरा ऊपर हो गया।
मैंने मम्मी की गाँड सहलाते हुए एक उँगली उनकी चूत में डाल दी। और उसे अंदर-बाहर करने लगा। मम्मी कसकसाने लगीं। और मैं उनके पीछे से उठ गया।
और मम्मी को सीधा करके उनकी टाँगों के बीच आ गया। मम्मी आँखें बंद किए लेटी थीं। और मैंने उनकी टाँगें फैला दीं। टाँगें फैलाते ही मम्मी की चूत का छेद पूरा खुल गया।
पापा ने मम्मी की बहुत चुदाई की थी। इसलिए मम्मी की चूत का छेद खुला हुआ दिख रहा था। मैं अपना मुँह मम्मी की चूत के पास ले गया।
और उनकी चूत से आती हुई तेज गंध मुझे मदहोश करने लगी। मैं थोड़ा नीचे झुका। और अपनी जीभ को मम्मी के चूत के दाने पर लगा दिया।
मम्मी हाथ से मेरा सिर पकड़ रही थीं। मगर मैंने उनके दोनों हाथ पकड़ लिए। और बाकी काम मेरी जीभ मम्मी की चूत के दाने पर दिखा रही थी।
मम्मी: बेटा ऐसा मत कर। ये गंदा है। वहाँ मुँह मत लगा।
शायद आज पहली बार मम्मी की चूत पर किसी ने अपनी जीभ लगाकर चाटा था। इसलिए वो इसे गंदा कह रही थीं। मगर हमारी उम्र के लड़कों के लिए तो चूत चाटना जन्नत जैसा है।
कुछ देर मैं ऐसी ही चूत पर अपनी जीभ चलाता रहा। और इसी बीच मैंने मम्मी के हाथ छोड़ दिए। मगर अब मम्मी मुझे नहीं रोक रही थीं।
बल्कि उन्होंने अपने हाथ से तकिया पकड़ लिया। मम्मी को चूत चटवाने में मजा आ रहा था। मम्मी अपने होंठों को काट रही थीं। और उन्होंने अपना दूध भी दबा दिया।
मैं: मम्मी अपनी टाँगें थोड़ी खोल दो।
मैंने जानबूझकर मम्मी से ऐसा कहा। मैं देखना चाहता था मम्मी क्या करती हैं। और मम्मी ने इसका जवाब मुझे अपनी टाँगें फैलाकर दे दिया।
अब मैंने अपना मुँह मम्मी की चूत की जगह उनके गाँड के छेद पर लगा दिया। मैं मम्मी की चूत को सहलाते हुए उनकी गाँड चाटने लगा।
मेरे चूत और गाँड चाटने से मम्मी का पानी निकल गया। और मम्मी ने अपनी दोनों टाँगें जोड़ लीं। मम्मी उस पल का आनंद ले रही थीं।
और मैंने अपना अंडरवेयर उतार दिया। मैं नीचे उतरकर मम्मी के पास खड़ा हो गया। मैं जानता था मम्मी मेरा लंड मुँह में नहीं लेंगी।
मगर वो मेरा लंड पकड़ लेती हैं तो वो भी मुझे अच्छा लगता। मैंने मम्मी का हाथ अपना लंड पर रख दिया। और उन्होंने भी मेरा लंड मुट्ठी में दबा लिया।
मम्मी के लंड पकड़ने से मेरा लंड और ज्यादा टाइट हो गया। मैं मम्मी का ब्लाउज खोलने लगा। और उनके ब्लाउज के सारे हुक खोल दिए।
मम्मी के बड़े-बड़े दूध बाहर आ गए। आज मम्मी आधी-अधूरी नंगी मेरे सामने लेटी थीं। जिनका ब्लाउज खुला था मगर उतारा नहीं था।
मम्मी की चूत और गाँड मेरे सामने थी। मगर उनका पेटीकोट अभी भी उनके पेट पर था। ऐसी आधी-अधूरी नंगी जवानी मर्दों को और भी ज्यादा ललचा देती है।
मम्मी के निप्पल टाइट हो गए थे। और मैं अपने लंड से मम्मी के दूध पर थप-थप मार रहा था। अपने लंड से मम्मी के निप्पल लड़ा रहा था।
अब मैंने मम्मी की टाँगें पकड़ीं और उन्हें अपनी तरफ घुमा लिया। मम्मी की चूत बिल्कुल मेरे सामने थी। और मेरा लंड मम्मी की चूत से लग रहा था।
मम्मी की चूत और मेरा लंड जब लगकर अलग होते तो एक लार मेरे लंड और मम्मी की चूत को जोड़ देती थी। ये लार मम्मी के पानी से बन रही थी।
मैं बार-बार अपने लंड को उनकी चूत पर मारता। और मेरा लंड उनके पानी से और भी ज्यादा गीला हो जाता। आखिरकार मैंने अपना लंड मम्मी की चूत पर लगाया।
और उसे अंदर डाल दिया। मैंने बिना रुके अपना लंड अंदर डालता रहा। जब तक मेरा लंड पूरा अंदर नहीं घुस गया। मम्मी की चूत टाइट नहीं थी। इसलिए लंड आसानी से जड़ तक चला गया।
मम्मी ने एक जोर की आह्ह भरी और मैं ऐसे ही उनके ऊपर लेट गया। मैं और मम्मी उस पल का भरपूर मजा ले रहे थे। अभी तक मैंने कोई भी धक्का नहीं लगाया था।
बस लंड अंदर डाले उस पल का मजा ले रहा था। मेरा लंड अंदर मम्मी की चूत की दीवार से लग रहा था। और अंदर फड़फड़ा रहा था।
मैंने अपना लंड बाहर खींचा। मेरा पूरा लंड मम्मी की चूत के पानी से गीला था। मगर जैसे ही मैं उसे अंदर डालने वाला था, बाहर किसी ने गेट बजा दिया। मम्मी गेट की आवाज सुनने से हड़बड़ा गईं।
मम्मी: बेटा जल्दी से हट। कोई आया है। जाके देख कहीं तेरा भाई तो नहीं आ गया। आज वो आने वाला है।
मम्मी की ऐसी चिकनी चूत छोड़कर जाने का मन नहीं कर रहा था। मगर डर भी था। कहीं किसी ने देख लिया तो प्रॉब्लम हो जाएगी। मैंने जल्दी से बनियान और अंडरवेयर पहना।
और मम्मी ने भी अपना पेटीकोट ठीक किया। और ब्लाउज को बंद कर लिया। वो चादर को ठीक करने लगीं। और मैं बाहर गेट पर गया।
मैंने देखा सामने भाई और भाभी खड़े थे। भाभी का प्रोग्राम एक हफ्ते का था। मगर वो भाई के साथ जल्दी आ गई थीं। मैं गेट खोलके ऊपर चला गया। और भाई और भाभी अंदर आ गए।
मैं ऊपर बैठा बहुत गाली दे रहा था। मम्मी की चुदाई बस होने वाली थी। और भाई-भाभी को बस अभी आना था। मगर दिल में एक खुशी थी। अब रात में मम्मी को आराम से चोदूँगा।
मैं बैठा काम करने लगा। मगर मेरा लंड अभी भी खड़ा ही था। मैं काम करने लगा। और शाम को चार बजे मम्मी मेरे लिए चाय लेकर आईं।
मम्मी को देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया। मम्मी मेरे लंड को ही देख रही थीं। वो मेरे पास आईं और चाय रखकर जाने लगीं। मगर तभी मैंने उन्हें पकड़ लिया।
मैंने मम्मी को दीवार से लगा दिया। मम्मी और मेरे हाथों की मुट्ठी एक-दूसरे के हाथ में बंद हो गई। और मैंने अपने होंठ मम्मी के होंठों में लगा दिए।
मम्मी अभी मेरा साथ नहीं दे रही थीं। मगर मैं तो उनके होंठों पर अपनी गीली जीभ फिरा रहा था। मैंने मम्मी का मुँह अपने थूक से गीला कर दिया था।
मम्मी: बेटा ये मत कर। यहाँ कोई देख लेगा। तेरे भाई और भाभी नीचे ही हैं।
मम्मी बार-बार मुझे मना कर रही थीं। मगर उस समय तो मेरे सिर और लंड पर मम्मी की चूत का भूत सवार था। मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया।
और मेरा लंड सीधा मम्मी की नाभि में घुस रहा था। मैंने अपना लंड मम्मी की नाभि में लगा दिया। और मम्मी के मोटे और लटकते हुए पेट में लंड घुसाने लगा।
मेरे लंड का सुपाड़ा मम्मी की नाभि में घुसा हुआ था। और मुझे मम्मी की नाभि चोदने में मजा आ रहा था। मम्मी को डर लग रहा था।
मगर वो मुझे रुकने को कह रही थीं। मगर रोक नहीं रही थीं। मैंने मम्मी को उल्टा कर दिया। और उनकी साड़ी और पेटीकोट ऊपर करने लगा।
मम्मी: बेटा यहाँ नहीं। कोई आ जाएगा। कहीं किसी ने देख लिया तो परेशानी हो जाएगी।
मैं: मम्मी बस थोड़ी देर। कोई नहीं देखेगा। मैं बस थोड़ी करूँगा फिर आप चली जाना। बस आप थोड़ा झुक जाओ। और अपना पेटीकोट और साड़ी पकड़ लो।
मम्मी ने अपनी साड़ी और पेटीकोट पकड़ लिया। और मैंने अपने लंड पर थूक लगाया। और उसे मम्मी की चूत में डाल दिया। लंड अंदर जाते ही मुझे मम्मी की चूत की गरमी मिलने लगी।
और मेरे पूरे शरीर में एक करंट-सा दौड़ गया। मैंने मम्मी की कमर को पकड़ लिया। और धक्के लगाने लगा। मम्मी आँखें बंद किए
मम्मी: म्म उम्म आह्ह
की आवाज कर रही थीं। और जब मेरा पूरा लंड अंदर जाता तो मम्मी की गाँड पर थप-थप की आवाज आती। इस आवाज को सुनके और भी मजा आ रहा था।
मैं धक्के लगाए जा रहा था। और मम्मी डर रही थीं। वैसे उनका डरना भी ठीक था। जब कोई माँ सबके रहते हुए अपने बेटे का लंड चूत में ले रही हो तो उसका डरना जरूरी है।
मम्मी: बेटा बस अब निकाल ले। कहीं कोई ऊपर न आ जाए।
मैं: मम्मी बस थोड़ी और करने दो। फिर मैं निकाल लूँगा। बस आप थोड़ी देर खड़े रहो। वैसे भी मेरा इतनी जल्दी नहीं निकलता है।
मैं धक्के लगाता रहा। और फिर मम्मी को अहसास हुआ जैसे कोई ऊपर आ रहा है। मम्मी ने पीछे हाथ डालके मेरा लंड पकड़ा। और उसे अपनी चूत से निकाल दिया।
मम्मी ने जल्दी से अपने कपड़े सही कर लिए। मगर मैं नंगा ही कुर्सी पर बैठ गया। मेरा लंड मम्मी की चूत के पानी से चमक रहा था।
मम्मी: बेटा जल्दी से इसे अंदर कर ले। मुझे लग रहा है कोई आ रहा है।
मैं: मम्मी ये आपकी चूत के पानी से गीला हो गया है। आप इसे खुद साफ करके अंदर कर दो।
मम्मी ने एक पल का भी समय नहीं गँवाया। और वो मेरे पास आईं। मेरा लंड पकड़ा और उसे अपनी साड़ी से साफ करके मेरे अंडरवेयर में कर दिया।
मम्मी: बेटा मैं नीचे जा रही हूँ। तू चाय पी लेना।
मैं: मम्मी अब मैं चाय नहीं, हर रोज आपका दूध पियूँगा। और उसकी शुरुआत मैं आज रात से करूँगा।
मम्मी हल्के से मुस्कुराने लगीं और वो समझ गई थीं। आज रात उनके लिए लंबी होने वाली है। मम्मी नीचे चली गईं। और मेरा लंड भी अब खुश था।
मम्मी की चूत की गहराई में जाके उसे भी थोड़ी शांति मिल गई थी। मैंने अपना काम किया। और शाम को अपने काम के लिए निकल गया।
शाम को आते हुए मैंने कुछ फ्लेवर कंडोम ले लिए। ताकि उसे पहनके मैं मम्मी को लंड चुसवा सकूँ। जब घर आया तो भाभी खाना बना रही थीं।
और मम्मी बैठी टीवी देख रही थीं। खाना बनाने के बाद भाभी अपने बच्चे को लेकर अपने रूम में चली गईं। और मम्मी किसी काम से किचन में गईं।
मैं भी उनके पीछे गया। और मैंने देखा वो गैस के पास खड़ी चाय गरम कर रही थीं। मैं चुपचाप उनके पीछे गया। और हल्के से उनकी साड़ी और पेटीकोट उठाने लगा।
मम्मी को इस बात का अंदाजा होते ही वो पलट गईं।
मम्मी: तुझे शरम नहीं आती है क्या? सबके रहते हुए भी तू ऐसी हरकत कर रहा है। अगर किसी ने देख लिया तो सब बर्बाद हो जाएगा।
मैं: मम्मी आप इतना डरती क्यों हो? यहाँ कोई नहीं है इसलिए मैंने ऐसा किया। वैसे भी मुझे आपकी चूत चाटने की इच्छा हो रही थी।
मम्मी: छी छी बेटा तू कैसे बातें करता है। उसे भी कोई चाटता है क्या? वो बहुत गंदी होती है। और वहाँ तू अपना मुँह लगाता है।
मैं: मम्मी अगर आपकी चूत गंदी होती तो जब मैं आपकी चूत चाटता हूँ तब आपको इतना मजा नहीं आता। अब आप घूम जाओ। और मुझे अपनी चूत का पानी पीने दो।
मम्मी: बेटा यहाँ किचन में कोई आ गया तो?
मैं: मम्मी सिर्फ भाभी ही किचन में आती हैं। और आप खिड़की की तरफ ही देखो। जब भाभी या भाई सीढ़ियों से नीचे आते दिखें तो बस मुझे हटा देना। वैसे भी मैं नीचे बैठा हूँगा। उन्हें नहीं दिखूँगा।
मम्मी पीछे पलट गईं। और इस बार उन्होंने अपनी साड़ी और पेटीकोट खुद ऊपर कर दी। मम्मी की गाँड दिखने लगी। और मैंने अपने हाथ से उनकी गाँड फैला दी।
और अपना मुँह मम्मी की गाँड में लगा दिया। मेरी जीभ मम्मी की चूत से लेकर गाँड तक को चाट रही थी। और मैंने दो उँगली मम्मी की चूत में डाल दी।
उँगली करते हुए चूत और गाँड चाटने लगा। मम्मी कुछ ही देर तक खुद को रोक पाईं। और जब उनका पानी निकलने लगा तब उनकी टाँगें काँप गईं।
मैं खड़ा हो गया। और मम्मी ने अपनी साड़ी और पेटीकोट नीचे कर ली। मम्मी मेरी तरफ देखकर शरमा रही थीं। मैंने मम्मी की कमर पकड़ी। और उन्हें अपने पास खींच लिया।
मैं: मम्मी आपको मजा आया?
मम्मी नीचे देखने लगीं। और मैंने उनका चेहरा पकड़ा। और उसे ऊपर कर दिया। मम्मी ने हाँ में सिर हिलाया। और मैंने उनके होंठों पर अपने होंठों की मोहर लगा दी।
मैं मम्मी के होंठों को चूसने लगा। और इस बार मम्मी भी पीछे नहीं रहीं। उन्होंने मेरी गर्दन में हाथ डाला। और मेरे बालों को सहलाते हुए मेरे होंठों को चूसने लगीं।
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