मेरी दीदी बनी देसी रंडी 7

Didi ki showroom me chudai ki kahani:- अब दीदी को मेरे बारे में सब पता चल गया है और आज दीदी ने मेरे सामने ही अकरम का लंड चूसा। दीदी अब जो भी कर रही थीं, बिना किसी के डर से कर रही थीं। क्योंकि दीदी को मेरा साथ मिलते ही दीदी का डर चला गया था।

अकरम दीदी को चोदकर चला गया था। अकरम के जाने के बाद…

पार्ट 6==> मेरी दीदी बनी देसी रंडी 6

Didi ki showroom me chudai ki kahani

जब दीदी अकरम को छोड़ने गेट पर जा रही थीं तो दीदी की चाल अजीब-सी ही थी। हो भी क्यों न, दीदी ने अकरम का इतना बड़ा लंड लिया है। दीदी की चाल देखकर मैं दीदी से मजे लेने की सोचने लगा। मैं दीदी से बोला—

मै: दीदी क्या हो गया? ठीक से चल क्यों नहीं पा रही?

दीदी: अरे कुछ नहीं, पैर में लग गई है।

मै: दीदी पैर में लगी है या कहीं और? लगता है नए जीजा ने बड़ी बेरहमी से मारी है आपकी।

दीदी: पिटेगा तू मेरे हाथ से।

मै: दीदी पहले हाथ धो लेना। ऐसे हाथ से अपने नए जीजा का हिलाया था।

मैं हँसने लगा।

उस समय दीदी पेटीकोट और ब्लाउज में थीं। दीदी क्या ही लग रही थीं। अब तो दीदी के बूब्स और गाँड का साइज भी पहले से ज्यादा बढ़ गया था।

दीदी: अच्छा, बड़े मजे ले रहा है मुझसे तू? तो पिटेगा अब।

मै: मैं कहाँ मजे ले रहा हूँ? मजे तो नए जीजा ले रहे हैं आपके।

दीदी अब शरमाते हुए मुझे मारने आने लगीं। मैं उधर से अपने रूम की तरफ भागने लगा। लेकिन दीदी भाग नहीं पा रही थीं क्योंकि अकरम ने दीदी को दर्द जो दे दिया था।

मै: क्या हुआ दीदी? दर्द हो रहा है?

दीदी: भाग यहाँ से बेशर्म।

मै: दीदी जब दर्द हो रहा है तो लिया क्यों था?

उसके बाद दीदी नहाने चली गईं और नहाकर आईं। अब रात के आठ बज गए थे। दीदी रात का खाना बनाने चली गईं और मैं अपने कमरे में जाकर थोड़ा रेस्ट करने लगा।

उसके बाद दीदी ने नौ बजे खाना खाने के लिए बुलाया। दीदी ने आज रात को पेटीकोट और ब्लाउज ही पहना था।

मैं खाना खाने के लिए बैठ गया। फिर दीदी भी खाना लगाकर खाना खाने के लिए बैठ गईं।

खाना खाते समय मैं दीदी से बात करने लगा—

मै: दीदी आप सच में अकरम अंकल से निकाह करने वाली हो क्या?

दीदी: हाँ राहुल, मुझे अकरम जी से प्यार हो गया है। अब उनके बिना रह नहीं सकती।

मै: अकरम अंकल के बिना या उनके लंड के बिना?

दीदी (हँसते हुए): अरे बाबा, दोनों के लिए।

फिर हम हँसने लगे।

मै: तो फिर दीदी क्या सोचा है? कैसे करोगी सब? अगर किसी को पता चल गया तो आप तो गईं।

दीदी: अब पता लगने दे। अब मुझे कोई डर नहीं है। मैं खुलकर जीना चाहती हूँ।

मै: अच्छा दीदी। तो फिर कब कर रही हो निकाह?

दीदी: अकरम जी खुद बता देंगे पता करके। उन्होंने बोला है।

मै: अच्छा दीदी। निकाह के बाद तो आपके दो-दो हसबैंड हो जाएँगे।

दीदी: लेकिन मैं अकरम जी को ही अपना पति मानूँगी।

मै: ओह दीदी, इतना प्यार।

दीदी: चल चुपचाप से खाना खा।

फिर हम खाना खाने लगे।

और उसके बाद हम टीवी देखने लगे। दीदी पेटीकोट और ब्लाउज में बड़ी सेक्सी लग रही थीं। जब दीदी टीवी देख रही थीं तो मैं दीदी को देखकर अपना लंड मसल रहा था। दीदी ने मुझे देख लिया लंड मसलते हुए।

दीदी: बेशर्म, क्या कर रहा है?

मै: कुछ तो नहीं।

दीदी: अच्छा, जैसे मैंने तो देखा ही नहीं।

मै: अच्छा, क्या देखा आपने?

दीदी: जो तू कर रहा था। मुझे देखकर अपना नुनू हिला रहा था।

मै: दीदी नुनू नहीं है वो, कोबरा है।

दीदी: अच्छा जी, खच्चे में तेरे कोबरा है?

राहुल (हँसते हुए): दीदी ध्यान से रहना। कहीं वो कोबरा कहीं आपके बिल में न घुस जाए।

दीदी: तू बहुत बिगड़ गया है।

मै: कहाँ दीदी?

दीदी: पहले तू कितना सीधा था, अब देख।

मै: दीदी आप भी तो संस्कारी थीं, लेकिन अब तो आप रन…

दीदी: क्या? क्या रन… बोल।

राहुल (हँसते हुए): रंडी बन गई हो।

दीदी ने मेरे सर पर नकली गुस्से से मारा।

दीदी: अच्छा जी, अब रंडी बोलेगा मुझको?

मै: दीदी मजाक कर रहा था।

दीदी: अच्छा समझ रही हूँ तेरा मजाक।

हम दोनों बात ही कर रहे थे तो दीदी को अकरम का कॉल आया।

मै: दीदी किसका कॉल आ रहा है?

दीदी (रंडी जैसी आवाज में): तेरे जीजा का।

मै (हँसते हुए): कौन से जीजा? मेरे तो दो जीजा हैं।

दीदी: चल भाग जा अपने कमरे में।

दीदी फिर उठकर अपने कमरे में चली गईं और कॉल पिक अप किया।

अकरम: बेगम, क्या कर रही थी?

दीदी: कुछ नहीं। तुम्हारा साला मुझसे बड़ा मजाक कर रहा था।

अकरम (हँसते हुए): अच्छा।

अकरम: बेगम, और कितना दिन वेट करना पड़ेगा? अब मुझे तुमसे दूर रहना का मन नहीं करता। बताओ तो कब की डेट निकालूँ?

दीदी: मुझे भी अब आपके बिना मन नहीं करता।

अकरम: तो बताओ कब की डेट निकालूँ?

दीदी: जितना जल्दी हो सके उतना कर लीजिए।

अकरम: फिर परसों का करता हूँ। कल हम सब तैयारी कर लेंगे।

दीदी: अच्छा जी।

अकरम: बेगम, ये बताओ तुम किसी को बुलाओगी अपनी तरफ से?

दीदी: नहीं अकरम जी। खाली राहुल रहेगा।

अकरम: बेगम, मेरे सारे दोस्त आ रहे हैं। बोल रहे थे भाभी जी के मजे लेने हैं हमको।

दीदी (नॉटी स्माइल के साथ): अच्छा जी, मेरे मजे लेने हैं?

उसके बाद दोनों की ऐसी ही बात होने लगी। थोड़ी देर बाद अकरम बोला—

अकरम: अच्छा बेगम, मैं फिर सब चीजों की तैयारी करता हूँ कैसे क्या करना है।

दीदी: अच्छा जी।

अकरम: बाय बेगम।

दीदी: बाय जानू।

रात के ग्यारह बज गए थे। दीदी अब अपने फोन में कुछ यूज करने लगीं। तब जो अकरम ने ग्रुप बनाया था “नितु बेगम” नाम से, उस पर मैसेज आया।

अब्दुल: हाई भाभी जी।

दीदी ने फिर थोड़ी देर के बाद उसका रिप्लाई किया।

दीदी: हाई अब्दुल जी, कैसे हैं आप?

अब्दुल: बस भाभी जी, मजे में हूँ।

दीदी: अच्छा जी।

अब्दुल: भाभी जी, मैंने सुना आप अकरम भाई से परसों निकाह करने वाली हो।

दीदी: हाँ अब्दुल जी।

अब्दुल: भाभी जी, मुझे एक बात पता चली है।

तभी सुल्तान का मैसेज आया।

सुल्तान: क्या बातें हो रही हैं भाभी जी? नमस्ते। और क्या बात पता चली है?

दीदी: नमस्ते सुल्तान जी।

अब्दुल: भाई, तेरे को नहीं बताई क्या अकरम भाई जान ने?

सुल्तान: नहीं, क्या बात है?

अब्दुल: अरे भाभी के भाई को भाभी जी के बारे में पता चल गया।

सुल्तान: क्या बात कर रहा है?

अब्दुल: भाई, मेन बात ये नहीं है। बात तो ये है कि भाभी के भाई को कब का पता चल गया था भाभी के बारे में।

सुल्तान: क्या बोल रहा है? कैसे पता चला?

अब्दुल: भाई, उस दिन जब भाभी जी अकरम भाई का और मेरा केला ले रही थीं तो उनके भाई ने देख लिया था।

अब्दुल: क्यों भाभी जी?

दीदी: अब्दुल जी, आप भी ना।

सुल्तान: भाभी जी, आपका भाई ने आपको कुछ बोला नहीं?

दीदी: नहीं सुल्तान जी। राहुल मेरे साथ है।

सुल्तान: अच्छा, सही है भाभी जी।

अब्दुल: भाई, आगे तो सुन। जब भाभी हमारा केला ले रही थीं तो उनका भाई अपना लंड हिला रहा था अपनी बहन को देखकर।

सुल्तान (हँसते हुए): क्या बात कर रहा है? अपनी बहन को देखकर हिला रहा था?

सुल्तान: अरे भाभी जी, आपका भाई तो बड़ा बहनचोद है।

दीदी: सुल्तान जी, अब आप भी शुरू हो गए।

सुल्तान: अरे भाभी जी, मजाक कर रहा हूँ।

अब्दुल: लेकिन उस दिन भाभी ने क्या ही चूसा था मेरा लंड। क्यों भाभी?

दीदी: अब्दुल जी, चुप रहिए ना।

सुल्तान: भाभी जी, आपने अब्दुल भाई जान को तो मजे ही दिला दिए हैं। हमें भी मजे दे दो।

दीदी: कैसी बात कर रहे हैं? अब मैं आपके भाई से निकाह करने वाली हूँ।

सुल्तान: तो क्या हो गया? हमारे में चलता है। निकाह के बाद भी देवर या भाई का अब्बू भी बहू के मजे ले लेता है।

दीदी: अच्छा जी, फिर तो आप सबसे बचकर रहना पड़ेगा।

अब्दुल: क्यों भाभी जी?

दीदी: क्या पता आप निकाह के बाद मेरे साथ क्या कर दें।

इस पर सब हँसने लगे।

सुल्तान: भाभी जी, निकाह तो होने दीजिए। देखिए उसके बाद मैं क्या करता हूँ।

दीदी: अच्छा, क्या करेंगे आप?

सुल्तान: आपको आपके घर से उठाकर ले जाऊँगा और सात दिन तक अपने साथ रखूँगा।

दीदी: अच्छा जी, और अकरम जी आपको ले जाने देंगे?

सुल्तान: अरे भाभी जी, देख लेना आप कैसे मैं आपको लेकर जाता हूँ। उसके बाद मैं फिर आपकी जमकर मारूँगा।

दीदी: हटो बदमाश। भाभी से कोई ऐसी बात करता है?

सुल्तान: हाँ भाभी जी।

अब्दुल: सुल्तान भाई, फिर मुझे भी बुला लेना। दोनों मिलकर फिर मारेंगे भाभी की।

दीदी: अब आप भी शुरू हो गए।

अब्दुल: सुल्तान भाई जान, भाभी को एक साथ चोदेंगे। एक चूत में, एक गाँड में।

सुल्तान: हाँ भाई।

दीदी: अच्छा जी, और मैं आपको करने दूँगी?

सुल्तान: मतलब आप मेरा लेने के लिए रेडी हैं?

दीदी: मैंने ऐसा तो नहीं बोला।

अब्दुल: भाई जान, भाभी के बारे में सोचकर मेरा तो लंड ही खड़ा हो गया।

दीदी: अरे अब्दुल जी, सो जाइए जाकर।

अब्दुल: भाभी जी, अब इसको शांत किए बिना नींद नहीं आएगी।

सुल्तान: तो करवा ले भाभी से शांत।

और सब हँसने लगे।

अब्दुल: हाँ भाभी जी, आपने खड़ा किया है तो आप ही बैठाएँगी।

दीदी: अरे मैंने क्या किया?

अब्दुल: भाभी जी, अब आप ही शांत करो इसे।

दीदी (नॉटी स्माइल के साथ): मैं क्यों करूँ?

अब्दुल: अपनी एक सेक्सी-सी फोटो भेज दीजिए भाभी जी। मैं हिलाकर सो जाऊँगा।

सुल्तान: हाँ भाभी जी।

दीदी: नहीं जी, मैं नहीं भेज रही।

अब्दुल: भेजना पड़ेगा आपको।

दीदी: आप लोग पीछे पड़ गए हैं। ठीक है, भेजती हूँ एक।

उसके बाद दीदी ने अपनी एक फोटो भेजी।

अब्दुल: अरे भाभी, बवाल लग रही हो।

सुल्तान: क्या माल हो भाभी जी। अब तो आपको पक्का उठाकर ले जाऊँगा।

दीदी: चलिए जाइए सो जाइए। मैं भी सोने जा रही हूँ। गुड नाइट।

उसके बाद दीदी भी फोन रखकर सो गईं। और मैं भी।

उसके बाद मैं सुबह आठ बजे सोकर उठा। और मैं जब हॉल में गया तो दीदी उठ चुकी थीं और नाश्ता बना रही थीं। दीदी रोज की तरह आज भी बड़ी सेक्सी लग रही थीं। मुझे दीदी को देखकर अब रहा नहीं जा रहा था। मैं अब अकरम से जलने लगा था कि कैसे अकरम को इतनी सेक्सी माल मिल गई। काश दीदी मेरी होती तो कितना मजा आता।

दीदी को देखकर मेरे मन में यही सब चल रहा था और मेरे से कंट्रोल भी नहीं हो रहा था। मेरा लंड पूरी तरह से पजामे में खड़ा हो गया था।

दीदी ने आज नेट वाली साड़ी पहनी थी।

और दीदी नाश्ता बना रही थीं। दीदी की बैक मेरी तरफ थी। दीदी की गाँड एक नंबर की लग रही थी। आह्ह, मेरा लंड भी दीदी की गाँड को देखकर झटके मारने लगा।

फिर पता नहीं मुझे क्या हुआ उस समय। मेरे दिमाग ने काम करना ही बंद कर दिया था। मुझे तो बस दीदी की गाँड ही दिख रही थी। ब्लैक साड़ी में मोटे-मोटे तरबूज जैसे गाँड। और मैं दीदी की गाँड देखते-देखते दीदी के पास जाने लगा और एकदम से पीछे से दीदी को हग कर दिया। जिससे मेरा लंड दीदी की गाँड की दरार में घुस गया। और दीदी एकदम से शॉक हो गईं।

दीदी: क्या कर रहा है राहुल?

मैं तो दीदी के गाँड के नशे में पागल ही हो गया था। मुझे तो कुछ नहीं पता था मैं क्या कर रहा हूँ क्या नहीं। जब दिमाग पर हवस चढ़ जाती है तो दिमाग काम करना बंद हो जाता है। और मेरा इस समय वही हाल हुआ था।

दीदी वापस से मुझे बोलीं—

दीदी: सुनाई नहीं दे रहा क्या तुझे राहुल… राहुल…

मैं जैसे होश में आया।

मै: हाँ दीदी, क्या हुआ?

दीदी: क्या कर रहा है तू?

मुझे रियलाइज हुआ कि मैं क्या कर रहा हूँ। मैं दीदी को पीछे की साइड से हग किया था जिससे किसी को भी उल्टा लगेगा। और ऊपर से मेरा लंड भी पूरा खड़ा था।

मैं दीदी से अलग हुआ।

मै: दीदी कुछ तो नहीं कर रहा। वो मैं तो आपको गुड मॉर्निंग बोलने आया हूँ।

(बात को टालते हुए)

दीदी: अच्छा, आज से पहले तो मुझको गुड मॉर्निंग नहीं किया।

मै (हँसते हुए): अरे दीदी…

दीदी: चल छोड़। जा नहा ले जाकर।

मैं मन में – सही है, दीदी ने कुछ और नहीं पूछा।

मै: ठीक है दीदी।

उसके बाद मैं नहाने चला गया। और फिर साढ़े आठ बजे मैं और दीदी साथ में नाश्ता करने लगे।

मै: दीदी आज क्या करोगी?

दीदी: क्यों, क्या हुआ?

मै: कुछ नहीं, बस ऐसे ही।

दीदी (शरमाते हुए): कुछ नहीं। आज अकरम जी के साथ जा रही हूँ मार्केट कपड़े लेने के लिए।

मै: कपड़े लेने… लेकिन क्यों दीदी?

दीदी (शरमाते हुए): अरे तू भूल गया क्या? हम निकाह करने वाले हैं। उसके लिए कपड़े लेने जा रहे हैं।

मै: अच्छा दीदी।

दीदी को शरम आ रही थी मेरे इस बारे में बात करते हुए। उसके बाद हम नाश्ता करके अपने-अपने रूम में चले गए।

और दस बजे के करीब अकरम का दीदी के पास कॉल आया।

अकरम: क्या कर रही हो मेरी बेगम जान?

दीदी: कुछ नहीं अकरम जी। बस आपको याद कर रही थी।

अकरम: अच्छा, मेरी बेगम को मेरी याद आ रही है।

दीदी नॉटी स्माइल कर दीं।

अकरम: बस एक दिन और बेगम साहिबा। उसके बाद तो तुम मेरी हो। उसके बाद तो हम तो साथ में ही रहने वाले हैं।

अकरम: अच्छा बताओ कब चलें मार्केट?

दीदी: आप जब बोलें तभी चल लेंगे।

अकरम: ठीक है बेगम साहिबा। ग्यारह बजे चलते हैं। रेडी हो जाना। मैं आ रहा हूँगा तुमको लेने।

दीदी: ना बाबा ना। मत आना। कोई देख लेगा तो गलत सोचने लगेगा। मैं आपको आपके घर के पास आ जाऊँगी।

अकरम: ठीक है बेगम साहिबा।

दीदी भी अजीब ही हैं। खुद अकरम के दोस्तों के सामने मजे करती हैं, उनका लंड चूसती हैं, उनके सामने नंगी होकर अकरम के साथ मजे करती हैं। और फिर बाकी लोगों के सामने शरीफ बनती हैं।

अकरम से बात करने के बाद दीदी रेडी होने के लिए चली गईं। और रोज की तरह आज भी दीदी एकदम देसी रंडी की तरह लग रही थीं। अगर दीदी किसी कोठे की रंडी होतीं तो सारे मर्द पागल हो जाते दीदी के लिए। क्योंकि दीदी हैं ही इतनी सेक्सी माल। किसी के भी लंड में आग लगा देती हैं। मेरी रंडी दीदी।

रेडी होने के बाद दीदी मेरे पास आईं और बोलीं—

दीदी: राहुल, मैं अकरम जी के साथ शादी के लिए शॉपिंग करने जा रही हूँ।

मै: दीदी बड़ी खुश लग रही हो शादी के लिए।

दीदी: चल हट पागल। घर का ध्यान रखियो ठीक है।

मै: दीदी मैं भी चलूँ क्या आपके साथ?

दीदी: तू क्या करेगा हमारे साथ? कभी और चलियो तू।

मै: ठीक है दीदी।

दीदी फिर घर से निकल गईं अकरम के घर के पास।

और मैं कहाँ घर में बैठने वाला था। मुझे भी देखना था कि दीदी और अकरम क्या शॉपिंग करते हैं जो दीदी मुझे लेकर नहीं जा रहीं। तो मैं भी जल्दी से डोर लॉक करके दीदी के पीछे निकल गया।

दीदी रोड पर अपनी मोटी-मोटी बड़ी-बड़ी तरबूज हिलाते हुए जा रही थीं। वाह! क्या ही गाँड लग रही थी दीदी की…

रोड पर आने-जाने वाले लोग भी दीदी को गंदी-गंदी नजर से घूर रहे थे जैसे कि अभी ही रोड पर ही नंगा करके चोद देंगे।

कुछ लोग तो आपस में ही दीदी के ऊपर गंदी-गंदी बातें कर रहे थे।

कोई: क्या माल है भाई।

दूसरा: हाँ यार, सही बोल रहा है।

पहला: देख तो साली कैसे गाँड हिला रही है।

दूसरा: हाँ भाई, लगता है रंडी रोज अपनी गाँड मरवाती होगी।

फिर दोनों हँसने लगे।

यह सब बातें सुनकर मेरा लंड और भी ज्यादा पैंट में झटके देने लगा।

फिर दीदी अकरम की दुकान के पास पहुँचीं। उधर भोसड़ीका बूढ़ा पहले से ही दीदी का वेट कर रहा था। गंदी की धोती और कुर्ते में। और दीदी को देख-देखकर हँस जा रहा था।

फिर दीदी उसके पास पहुँच गईं।

अकरम: अरे बेगम, क्या लग रही हो…

बेगम अब कंट्रोल नहीं हो रहा। निकाह कर मन कर रहा है अभी तुम्हें झोपड़ी में ले जाकर तुम्हारी गाँड मार लूँ…

दीदी: कैसी बात कर रहे हो अकरम जी? आप भी बाकी लोगों की तरह बातें कर रहे हो।

अकरम: बेगम नाराज क्यों हो रही हो?

दीदी: मत बोलिए मुझसे।

अकरम: अरे बेगम, मैं तो मजाक कर रहा था।

और हँसने लगा।

दीदी: ऐसे कोई मजाक करता है?

अकरम: अच्छा सॉरी। बस अब चलें।

दीदी: नहीं रहने दीजिए आप तो।

अकरम: सॉरी बेगम साहिबा। अब नहीं करूँगा ऐसा मजाक।

दीदी: अच्छा ठीक है।

उसके बाद अकरम एक ऑटो रोकता है और दोनों मार्केट चले जाते हैं शॉपिंग करने के लिए।

मैं भी ऑटो ढूँढ़ने लगा उनके पीछे जाने के लिए। लेकिन कोई ऑटो ही नहीं आ रहा था। पंद्रह मिनट के बाद एक ऑटो आया तो मैं मार्केट गया और उन लोगों को ढूँढ़ने लगा। लेकिन इतने बड़े मार्केट में उनको ढूँढ़ना कोई आम बात तो नहीं थी। मैं उन लोगों को हर दुकान में ढूँढ़ने लगा। करीब तीस मिनट बाद मुझे वो दिखे। वो शायद किसी और दुकान में जा रहे थे। जब मुझे वो दिखे फिर मैं उनके पीछे-पीछे जाने लगा।

दीदी और अकरम के हाथ में शॉपिंग बैग थे। अकरम दीदी की कमर में हाथ डालकर चल रहा था और दीदी उसको कुछ नहीं बोल रही थीं। जैसे दीदी को कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा था कि कोई उनको देखे या न देखे।

अकरम और दीदी अंडरगारमेंट्स की शॉप पर गए और मैं भी उनके पीछे-पीछे जाने लगा। शॉप में ज्यादा लोग नहीं थे। बस एक-दो आंटी थीं और एक ही सेल्सगर्ल थी।

दीदी और अकरम अंदर गए और मैं भी चुपके से अंदर गया और उनको देखने लगा।

सेल्सगर्ल: मैम, आपको क्या चाहिए?

अकरम: बेगम बताओ क्या चाहिए।

दीदी को शरम आ रही थी अकरम के सामने ब्रा-पैंटी खरीदने में।

दीदी: वो… जरा अंडरगारमेंट्स चाहिए।

सेल्सगर्ल: ओके मैम।

फिर सेल्सगर्ल दीदी को अलग-अलग ब्रा-पैंटी दिखाने लगी जो कि दीदी और अकरम देख रहे थे। अकरम का एक हाथ अभी भी दीदी की कमर पर ही था और वो मादरचोद दीदी की कमर को मसल रहा था और धीरे-धीरे अपना हाथ दीदी की गाँड के पास लेकर जा रहा था।

दीदी सारी ब्रा और पैंटी देखने लगीं लेकिन दीदी को कोई पसंद नहीं आ रहा था।

दीदी: आपके पास कोई और डिजाइन में नहीं है क्या?

सेल्सगर्ल: येस मैम। और डिजाइन के भी कुछ अंडरगारमेंट्स के न्यू कलेक्शन भी आए हैं। आप मेरे साथ आइए।

सेल्सगर्ल दीदी और अकरम को अपने साथ बेसमेंट वाले फ्लोर पर लेकर गई। उधर उस समय कोई भी नहीं था।

नीचे वाले फ्लोर पर बहुत सारे ब्रा और पैंटी के कलेक्शन दीवार पर लगे हुए थे। वैसे तो मैंने भी कभी नहीं देखा था।

सेल्सगर्ल: मैम ये देखिए। ये सारे न्यू आए हैं।

और वो दीदी को नेट वाली डिजाइन्स वाले ब्रा और पैंटी दिखाने लगीं। दीदी फिर सारी देखने लगीं।

और अकरम भी ब्रा और पैंटी देखने लगा और साथ में दीदी की गाँड पर हाथ रगड़ना स्टार्ट कर दिया। वो शायद ब्रा-पैंटी में दीदी को इमेजिन करके अपने आप को कंट्रोल नहीं कर पाया होगा।

और कोई कैसे भी कंट्रोल कैसे कर पाएगा अगर दीदी को वैसे देख लेगा तो उसका अपने आप ही पानी निकल जाए। ऐसी हैं दीदी।

दीदी जब अंडरगारमेंट्स देख ही रही थीं तो ऊपर वाले फ्लोर पर कुछ लोग आ गए जिसकी वजह से सेल्सगर्ल ऊपर जाने लगीं।

सेल्सगर्ल: मैम आप देखिए और आप ट्राई भी कर सकती हैं। उधर ट्रायल रूम है।

फिर सेल्सगर्ल ऊपर चली गईं। उसके बाद अकरम बोला—

अकरम: बेगम तुम तो इसमें कमाल की लगोगी। तुम तो पागल कर दोगी मुझको।

दीदी: आप भी ना अकरम जी।

उसके बाद अकरम की एक पैंटी-ब्रा पर नजर गई जो कि ब्लैक गिरल की थी और नेट वाली थी जिसमें अंदर का सारा चीज दिख जाए वैसी ब्रा-पैंटी थी।

अकरम: बेगम वो देखो कितनी अच्छी है वो वाली।

दीदी: कौन सी अकरम जी?

अकरम: अरे वो देखो।

दीदी: अच्छा वो।

फिर दीदी ने वो वाली अंडरगारमेंट्स देखा। दीदी ने जब वो देखा था वो ऐसा था जिससे अंदर का सब कुछ दिखे।

दीदी: आप भी ना अकरम जी। आपको खाली ऐसी ही पसंद आती है।

अकरम (हँसने लगा): बेगम देखो तो कितने बढ़िया हैं। तुम तो इसमें एक नंबर की माल लगोगी।

दीदी रंडी की तरह शरमाने लगीं।

अकरम: बेगम ये वाली जरूर लेना।

दीदी: अच्छा ठीक है अकरम जी।

अकरम: बेगम जरा ट्राई करके तो आओ। मुझे देखा है तुम पर कैसे लगती है ये।

दीदी: हाँ मुझे पता है आप ट्राई करने के लिए क्यों बोल रहे हो।

अकरम (हँसते हुए): क्यों बेगम?

दीदी अकरम की पैंट के ऊपर इशारे करते हुए बोलीं—

दीदी: ऐसे देखो।

अकरम का लंड पैंट में पूरा खड़ा था। उसका कोबरा पैंट से निकलने के लिए तड़प रहा था।

अकरम (अपनी पैंट की तरफ देखते हुए हँसने लगा): अरे बेगम… ये सब तुम्हारे लिए ही हो रहा है।

दीदी: अकरम जी, मैं आपको इधर कुछ भी नहीं करने दूँगी। ठीक है ना?

अकरम (हँसते हुए): ठीक है बेगम। जाओ ट्राई तो करो।

दीदी: ठीक है।

दीदी अंदर आईं और दीदी ने अपना ब्लाउज उतारा और फिर ब्रा। उसके बाद दीदी ब्रा पहनने लगीं। दीदी के चूचों का साइज थोड़ा बड़ा हो गया था जिससे ब्रा के हुक नहीं लग रहे थे। दीदी ट्राई कर रही थीं लेकिन नहीं हो रहा था। फिर दीदी को लगा अब अकरम जी को बुलाना ही पड़ेगा।

दीदी: अकरम जी, थोड़ा इधर आना।

अकरम: क्या हुआ बेगम?

दीदी: वो… आपकी थोड़ी हेल्प चाहिए।

अकरम: ओके बेगम।

अकरम दीदी के पास गया। दीदी ने गेट ओपन किया और फिर अकरम दीदी को घूरने लगा। क्योंकि दीदी ब्रा में एकदम कयामत लग रही थीं। दीदी के निप्पल्स साफ-साफ दिख रहे थे।

अकरम: क्या हुआ बेगम?

दीदी (नॉटी आवाज में): वो हुक नहीं लग रहा।

अकरम जैसे ऐसी ही का वेट कर रहा था।

अकरम (हवस भरी हंसी के साथ): अच्छा बेगम, अभी लगा देता हूँ।

उसके बाद दीदी अपनी पीठ अकरम की तरफ करके खड़ी हो गईं।

अकरम दीदी की पूरी नंगी पीठ और कमर देखने लगा। वो अपनी जीभ होंठ पर फेरने लगा।

उसके बाद अकरम अपना हाथ दीदी की पीठ पर लेकर गया और दो-तीन बार अपना हाथ दीदी की पीठ पर फेरा और दीदी की पीठ पर एक किस कर दिया।

दीदी: क्या कर रहे हो आप?

अकरम: कुछ नहीं बेगम। वो थोड़ा बाहर गया था।

दीदी: मैंने आपको बोला है कि मैं आपको इधर कुछ भी नहीं करने दूँगी।

अकरम: ठीक है जान।

उसके बाद अकरम ब्रा को पकड़कर दीदी की ब्रा के हुक लगाने की कोशिश करने लगा लेकिन ब्रा के हुक लग ही नहीं रहे थे।

अकरम (हँसते हुए): बेगम, तुम्हारे चूचों के साइज बढ़ गए हैं तभी नहीं लग रहे हैं।

दीदी: आपकी वजह से ही हुए हैं।

अकरम हँसने लगा।

दीदी: आप भी हर जगह मेरे बूब्स बढ़ाते रहते हो। देखो आपकी वजह से कितने बड़े हो गए हैं।

और दीदी रंडी जैसे हँसने लगीं। और अकरम भी हँसने लगा।

अकरम: मेरे पास एक आइडिया है। उससे हुक लग जाएँगे।

दीदी: क्या?

अकरम: रुको।

अकरम दीदी के बूब्स को दोनों हाथों से पकड़ा और दबाने लगा।

दीदी (रंडी जैसे हँसते हुए): अकरम जी, मुझे पता था आपकी पास ऐसा ही आइडिया होगा। छोड़ो मुझे।

अकरम: रुको बेगम। अभी ढीला करता हूँ इनको। तभी ये ब्रा में फिट आएँगे।

और उसके बाद अकरम दीदी से पूरी तरह से चिपक गया। अकरम का लंड जो कि पूरी तरह से खड़ा था वो दीदी की गाँड में चुभने लगा। और दीदी के बूब्स को दबाने लगा।

दीदी को जैसे ही अपने पीछे चुभने लगा तो दीदी बोलीं—

दीदी: अकरम जी, आपका कोबरा मेरे पीछे दस्तक दे रहा है।

दीदी ये बात एकदम रंडी जैसे बोलीं।

अकरम (खुश होकर): तो बेगम उसको गुफा में जाने दो ना।

दीदी: कैसे जाने दूँ? वो किसी और ही गुफा में जाना चाहता है।

अकरम: तो क्या हुआ? जाने दो।

दीदी: नहीं अकरम जी। आपका कोबरा मेरे गुफा में नहीं जा पाएगा।

अकरम: एक बार जाने तो दो उसको।

अकरम और दीदी की बातों से दीदी गरम हो रही थीं। साथ में अकरम भी दीदी के चूचों को दबा रहा था जिससे दीदी और भी ज्यादा गरम हो गई थीं।

अकरम ने एक हाथ से दीदी की कमर को पकड़ा और एक हाथ से दीदी के बूब्स को। और दीदी की गाँड में तीन-चार झटके मारे।

दीदी: आह्ह अकरम जी, आप तो मेरी जान निकलने में लगे हुए हो।

अकरम: अभी कुछ करा भी क्या है?

और फिर वो दीदी के बूब्स को मसलने लगा और साथ में दीदी की गर्दन पर किस करने लगा और दीदी की गाँड में लंड रगड़ने लगा। और पाँच मिनट तक वही किया।

उसके बाद उसने दीदी को अपनी साइड घुमाया और दीदी के शरीर से ब्रा को अलग किया और दीदी के बूब्स को दोनों हाथों से दबाने लगा।

दीदी: आह्ह अकरम जी, मैंने मना किया था आपको कि मैं कुछ नहीं करने दूँगी। लेकिन आप फिर भी…

अकरम: बेगम तूने मना तो किया था लेकिन तुझे देखकर मेरा लंड पागल हो गया था तो क्या करूँ?

दीदी: आह्ह मम्मी… ये कोई जगह है ये सब करने की…

अकरम: लेकिन बेगम तुम्हारा हाथ कहाँ पर है? तुमको भी तो मजा आ रहा है।

दीदी: क्या? मेरा हाथ कहाँ पर है?

अकरम: नीचे देखो।

दीदी ने जब नीचे देखा तो दीदी का हाथ अकरम के लंड पर था पैंट के ऊपर से। और दीदी उसको मसल रही थीं। दीदी इतनी गरम हो गई थीं कि दीदी को पता भी नहीं था कि दीदी क्या कर रही हैं।

दीदी नीचे देखकर शरमाने लगीं। जिसे देखकर अकरम हँसने लगा।

अकरम: बेगम अब रोको मत और मजे करने दो।

और फिर वो दीदी के लिप्स पर अपने काले फटे हुए गंदे से लिप्स रखकर दीदी के प्यारे मुलायम गुलाबी रसीले होंठों को चूसने लगा। और दीदी भी उसका पूरा साथ देने लगीं।

दीदी का एक हाथ अकरम की गर्दन पर था और दूसरा अकरम की पैंट के ऊपर।

दीदी को भी अब बहुत मजा आ रहा था। किसी रंडी जैसे चोरी-छुपे ये सब करने में दीदी को एक थ्रिल आ रहा था।

अकरम और दीदी एक-दूसरे के मुँह में अपना-अपना थूक पास करने लगे। अकरम अपना थूक दीदी के मुँह में डालने लगा। दीदी उसको पी जातीं। फिर दीदी अकरम के मुँह में अपना रस भरा नशीला थूक अकरम के मुँह में डालने लगीं जिसे अकरम पूरा पी जाता।

दोनों दस मिनट तक ऐसे ही कर रहे थे।

उसके बाद अकरम दीदी के मुँह से अपना मुँह अलग किया और दीदी के बूब्स को मुँह में लेकर चूसने लगा और एक हाथ से दीदी के बूब्स को अच्छे से मसलने लगा।

दीदी: आह्ह अकरम जी आम्म…

अकरम: बेगम ऊपर से क्या मसल रही हो अपने आशिक को? आजाद करो।

दीदी: आह्ह अकरम जी, मेरा आशिक तो पैंट में ही इतने झटके दे रहा है। अगर इसे आजाद कर दिया तो फिर ये क्या करेगा?

अकरम: मेरी जान, वो तो उसको आजाद करके ही पता चलेगा।

फिर दीदी किसी रंडी की तरह अकरम के पैरों में बैठ गईं और पैंट के ऊपर से अकरम के लंड पर एक किस दिया। जिसे देखकर अकरम मुस्कुरा दिया और बोला—

अकरम: बेगम तुम तो दिन पर दिन बहुत ही सेक्सी होती जा रही हो।

जिसे दीदी रंडी की तरह शरमाने लगीं।

उसके बाद दीदी ने अकरम की पैंट को खोलने लगीं और पैंट को खोल दिया। और पैंट अकरम के पैरों में गिर गई। उसके बाद दीदी अंडरवियर को नीचे करने लगीं। जैसे ही दीदी ने अकरम के अंडरवियर को नीचे किया अकरम का कोबरा दीदी के मुँह पर जा लगा। जिसे दीदी देखकर हँसने लगीं।

अकरम: देखा नितु मेरी जान, कैसे ये तुम्हारे लिए पागल है। कैसे तुम्हारे लिए ये खड़ा हुआ है।

दीदी: उसको देखकर अपने होंठों पर अपनी जीभ फेरने लगीं और उसके बाद बोलीं— देखिए अकरम जी, कैसे देख रहा है मुझको ये। जैसे खा जाएगा मुझको।

और हँसने लगीं।

अकरम: नितु मेरी जान, इसको और मत तड़पाओ। अगर कोई आ गया तो इसका क्या होगा?

दीदी: आप भी अकरम जी।

अकरम: नितु डार्लिंग, जरा अपने मुँह का जादू तो दिखाओ अपने छोटे शौहर को।

दीदी: अच्छा जी, छोटे शौहर?

अकरम: हाँ मेरी जान।

दीदी: देखो मेरे छोटे शौहर मेरे लिए कितना तड़प रहे हैं। अभी इनकी तड़प दूर करती हूँ।

उसके बाद दीदी अकरम के लंड को दोनों हाथों से पकड़कर पहले थोड़ा हिलाती हैं और फिर उसके बाद दीदी अकरम के टोपे को हल्का-सा चाटती हैं।

जिसे अकरम की आह्ह निकल जाती है।

अकरम: आह्ह बेगम आह्ह, मत तड़पाओ।

दीदी अकरम को देखकर हँसने लगती हैं और अकरम को तड़पाने के लिए फिर से अकरम के टोपे को मुँह में लेकर अपनी जीभ को टोपे पर गोल-गोल फेरने लगती हैं और फिर टोपे को बाहर निकाल देती हैं।

जिससे अकरम की हालत खराब हो जाती है। जैसे ही उसको आराम मिलता है दीदी उसके लंड को बाहर निकाल देती हैं। ऐसा दीदी दो-तीन बार करती हैं और हँसने लगती हैं रंडी की तरह।

अकरम: आह्ह मेरी नितु डार्लिंग, तू कितना तड़पा रही है। मत तड़पा मेरी जान।

दीदी (हँसते हुए): अकरम जी, अपनी हालत तो देखिए कैसे मेरे छोटे शौहर मेरे लिए तड़प रहे हैं।

अकरम: बेगम तू इसको शांत कर रही है या मैं अपने आप करूँ?

दीदी (हँसते हुए): अच्छा बाबा, रुको करती हूँ।

फिर दीदी अपना जादू शुरू कर देती हैं। दीदी अकरम के लंड को ऊपर से नीचे तक पूरी जगह अपनी जीभ फेरने लगती हैं। दीदी के मुँह में अकरम के बदबूदार झाँट भी आ रहे थे लेकिन दीदी फिर भी अकरम का लंड चाट रही थीं। दीदी को कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। उल्टा दीदी को तो मजा आ रहा था।

दीदी अकरम के लंड को मुँह में लेना स्टार्ट कर दिया। दीदी जितना हो सकता उतना मुँह में लेने की कोशिश कर रही थीं। और अकरम लंड चुसाई के कारण आवाजें निकालने लगा।

दीदी अकरम का लंड दस मिनट तक चूसती रहीं।

और मैं ये सब छुपकर देख रहा था। तभी मुझे ऊपर से नीचे आने की किसी की आवाज आई। वो कोई और नहीं सेल्सगर्ल थी। वो नीचे आईं और दीदी को अकरम को ढूँढ़ने लगीं।

सेल्सगर्ल: अरे वो दोनों कहाँ चले गए? थोड़ी देर पहले तो यहीं थे।

तभी अकरम की आह्ह की आवाज सेल्सगर्ल को सुनाई देने लगी।

सेल्सगर्ल: ये आवाज तो उन अंकल की है लेकिन…

तब सेल्सगर्ल चेंजिंग रूम के पास जाने लगीं और वो देखकर शॉक हो गईं कि इतना बड़ा लंड जिसे आज तक सेल्सगर्ल ने नहीं देखा था। उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि किसी का इतना बड़ा भी हो सकता है। और कैसे दीदी अकरम का लंड चूस रही थीं। वो भी खुल्लम-खुल्ला। और अकरम पूरा मजा ले रहा था।

दीदी अकरम का लंड पूरा मुँह में ले रही थीं और बड़े मजे से चूस रही थीं जैसे दीदी लंड खा ही जाएँगी। दीदी को लंड चूसते-चूसते पंद्रह मिनट हो गए थे। और सेल्सगर्ल को जैसे ही रियलाइज हुआ कि ये रियल है वो बोलीं—

सेल्सगर्ल: आप दोनों यहाँ क्या कर रहे हैं?

जैसे ही सेल्सगर्ल की आवाज आई अकरम का पानी दीदी के मुँह में और दीदी के फेस पर गिर गया।

और अकरम जैसे ही सेल्सगर्ल की तरफ मुड़ा तो उसके माल की एक धार सेल्सगर्ल के ड्रेस पर जा गिरी।

दीदी के मुँह में, मुँह पर और शरीर पर अकरम का सफेद गाढ़ा माल लगा हुआ था। और दीदी भी सेल्सगर्ल की तरफ मुड़ीं तो दीदी भी शॉक हो गई थीं। दीदी जल्दी से मुँह का सारा माल पी गईं और अपनी साड़ी के पल्लू से अपने चेहरे का माल साफ करने लगीं और जल्दी से ब्लाउज और ब्रा पहनने लगीं।

सेल्सगर्ल दीदी और अकरम की हरकत पर बौखलाती हैं।

सेल्सगर्ल: आप लोग क्या कर रहे हैं ये सब? ये कोई जगह है ये सब करने की?

जिसे सुनकर अकरम बोला—

अकरम: क्या हो गया? मैं अपनी बेगम के साथ कुछ भी करूँ तुम्हें क्या?

अकरम का लंड अभी भी बाहर ही था। जिस पर सेल्सगर्ल की नजर उसी पर ही थी। और फिर बोलीं—

सेल्सगर्ल: आपको यहीं सब करना था?

और अकरम के लंड को देखने लगीं।

जिसे देखते हुए दीदी ने देख लिया। सेल्सगर्ल अकरम के लंड को देखकर अपने होंठों पर जीभ फेर रही थीं। दीदी को ये देखकर जलन होने लगी कि कोई दूसरी औरत उसके शौहर के लंड पर नजर डाल रही है। दीदी उसी वक्त अकरम के लंड को पकड़कर पैंट के अंदर करने लगीं और अकरम से बोलीं—

दीदी: आपको बड़ा मजा आ रहा है इसको दूसरों को दिखाकर।

अकरम: नहीं बेगम, मैं भूल गया था। अभी ठीक करता हूँ।

अकरम ने पैंट बंद की और दोनों चेंजिंग रूम से बाहर आए।

सेल्सगर्ल: मैम, आपको शरम नहीं आई खुले में ये करते हुए?

दीदी: तुम्हें शरम नहीं आई मेरे शौहर के लंड को देखते हुए हाँ?

अकरम: छोड़ो बेगम, जाने दो।

दीदी: आप चुप रहिए।

सेल्सगर्ल: मैम ठीक से बात कीजिए।

दीदी: तू ठीक से बात कर।

सेल्सगर्ल: कैसी बदचलन औरत है। पब्लिक प्लेसेस में ये सब करती है।

दीदी: मैं अपने शौहर के साथ कहीं भी कुछ भी करूँ तुम्हें क्या?

सेल्सगर्ल: मैम आप कुछ भी करो हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन हमारी शॉप में मत करो।

ऐसे ही उनकी बातें हो रही थीं कि अकरम दीदी को समझाकर शॉप से बाहर लेकर गया और वो दूसरे शॉप में चले गए अंडरगारमेंट्स के लिए। और थोड़ी-बहुत और शॉपिंग करके वो लोग घर चले गए। जिसे देखकर मैं भी घर चला गया।

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