हुमा एक हाउस वाइफ और मिश्रा पान वाला 17

Panwala se huma ki hardcore chudai:- हुमा की चूत अब मिश्रा के लंड का पूरा मजा ले रही थी… कुछ देर की घमासान चुदाई के बाद मिश्रा झड़ने के करीब आ गया। हुमा की चूत ने भी जल्द ही पैनिक हो दिया…

जैसे मिश्रा ने अपना लंड बाहर निकाला हुमा की गोरी गाँड पर पिचकारी मार दी। हुमा की गोरी गाँड की गोलाई पर मिश्रा के लंड के पानी बहते हुए नीचे की तरफ आने लगा कि हुमा जल्द खड़ी हो गई। पानी अब उसकी गाँड की गोलाई से होते हुए नीचे उसकी जाँघों पर जाने लगा…

Pichla part nhi padha aapne to yahan padhen ==> हुमा एक हाउस वाइफ और मिश्रा पान वाला 16

Panwala se huma ki hardcore chudai hindi kahani

हुमा पलटकर गुस्से से—

हुमा: उफ्फ ये क्या किया आपने?

मिश्रा यहाँ-वहाँ देखता है और कुछ पत्ते तोड़कर हुमा की गाँड पर उसका जो पानी बह रहा था उसको पोछने लगा…

गाँड का पानी पोछकर उसने पत्तों को फेंकते हुए कहा—

मिश्रा: मैंने सब पोछ दिया।

हुमा ने बिना देखे ही सलवार और पैंटी ऊपर कर ली। सच तो ये था कि आज जो खुले आसमान के नीचे चुदकर आज जो मजा उसको आया था वो लफ्जों में बयान नहीं कर सकती थी…

कुछ देर में वो खेत से बाहर निकल गए और घर पहुँच गए। हुमा सीधा बाथरूम में नहाने चली गई। कुछ देर बाद सैफ और शांता भी आ गए…

गाँव के मजे के दिन जल्द खत्म हुए और हुमा, मिश्रा, सैफ और शांता शहर आ गए।

शहर आकर मिश्रा और हुमा की चुदाई का सफर चलता रहा। ऐसे ही एक दिन हुमा घर में बैठी थी कि डोर बेल बजी। उसने जाकर डोर ओपन किया तो सामने एक 18 साल की लड़की खड़ी थी हाथ जोड़े हुए…

हुमा: आप कौन?

लड़की: मैडम आपने मुझे नहीं पहचाना। मैं गीता हूँ। आपके यहाँ जो औरत काम करती हैं…

हुमा: शांता?

लड़की: हाँ उनकी बेटी हूँ मैं।

गीता पीछे पलटकर आवाज लगाती है—

गीता: बाबा अंदर आइए।

डोर के अंदर के दुबला-पतला काला सा उसके सिर के बाल भी कुछ कम थे या कहो तो झड़े हुए थे। उसके हाथ में एक प्लास्टिक बैग था। उसने वो बैग गीता को दिया और हुमा को देख हाथ जोड़ने लगा…

गीता: ये मेरे बाबा हैं।

हुमा उसको देख हाथ जोड़ने लगी और हल्के से मुस्कुरा दी।

वो शख्स: जी मालकिन मेरा नाम जगन है।

हुमा: अरे आप मुझे मालकिन न कहें।

जगन: आप मालकिन हैं हमारी।

हुमा: ऐसे न कहिए जगन जी।

जगन हाथ जोड़ते हुए—

जगन: मालकिन आज मेरी बेटी का पहला नंबर आया है क्लास में और ये सिर्फ आपकी वजह से हो सका। आप देवी हो। आपने मेरी बेटी की कॉलेज की पढ़ाई में काफी मदद की फीस भी भरी मगर कभी कहा नहीं… आप महान हैं मालकिन।

हुमा: अरे ऐसे न कहिए आप जगन जी। गीता मेरी बेटी की तरह है। शांता ने बताया कि वो बहुत होशियार स्टूडेंट है पढ़ना चाहती है तो मुझे लगा कि गीता को मौका देना चाहिए…

गीता: मैडम थैंक यू। आप जैसे लोग हजारों नहीं लाखों में एक होते हैं।

हुमा: बस कीजिए आप लोग मेरी तारीफ करना। जो भी है तुम्हारी मेहनत है। अरे मैंने तो आप लोगों को बैठने को भी नहीं कहा…

हुमा ने चाय और बिस्किट दिए। कुछ देर बातें हुईं। गीता ने जाते वक्त हुमा को गले लगाया।

हुमा: गीता वादा करो और पढ़ोगी अपने माँ-बाबा का नाम ऊँचा करोगी और हाँ एक बात और मुझे आज के बाद मालकिन या मैडम मत कहना समझी।

गीता: ओके मैडम सॉरी। आज से मैं आपको मौसी बुलाऊँगी।

हुमा: हाँ ये ठीक है। मौसी यानी मासी माँ जैसी।

तीनों मुस्कुरा दिए… कुछ देर बाद गीता और जगन उर्फ जग्या ने हुमा से विदा ली।

जग्या और गीता जग्या की ऑटो रिक्शा से अपने घर की तरफ जाने लगे। ऑटो चलाते वक्त जग्या सिर्फ और सिर्फ हुमा के बारे में सोच रहा था… कितनी खूबसूरत है। जैसा अच्छा दिल वैसे ही खूबसूरत। जग्या नजरें चुराकर हुमा के बूब्स और गाँड को भी देख रहा था जो ऑटो चलाते वक्त वो इमेजिन कर रहा था…

मगर कुछ देर बाद उसने सोचा यार मेरी बेटी के लिए इतना कुछ किया और मैं क्या सोच रहा हूँ।

कुछ दिन बाद हुमा बाजार जाने के लिए रोड पर खड़ी थी तभी एक ऑटो वाला और पूछने लगा—

ऑटो वाला: कहाँ जाना है मैडम?

हुमा उस ऑटो वाले को देखा और कहने लगी—

हुमा: अरे जगन जी आप।

हुमा वेल में थी इस वजह से जग्या उसको पहचान नहीं पाया मगर आवाज से पहचान गया।

जग्या: अरे मालकिन आप।

हुमा: मालकिन न कहें मुझे।

जग्या: कहाँ जाना है आपको?

हुमा: कुछ नहीं बस यूँ ही बाजार जा रही थी…

जग्या: चलो मैं छोड़ देता हूँ…

हुमा ने कुछ नहीं कहा ऑटो में बैठ गई… पता नहीं मगर क्यों जग्या का दिल धड़क रहा था…

उसको बार-बार हुमा के बूब्स और गाँड का शेप याद आ रहा था मगर उसको फिर याद आया यही औरत उसकी बेटी की मदद कर रही थी और मैं क्या सोचने लगा। तभी हुमा की आवाज आई—

हुमा: जगन जी गीता कैसी है?

जग्या: अच्छी है।

हुमा: और आपकी तबीयत…

जग्या: मुझे क्या हुआ मैं अभी अच्छा हूँ।

कुछ देर बाद बाजार आ गया।

हुमा पैसे देने लगी—

हुमा: कितने हुए?

जग्या: क्यों शर्मिंदा कर रही हो आप।

हुमा: नहीं आपको लेने होंगे…

जग्या: एक शर्त पर लूँगा। आप बाजार लेकर आओ मैं वापस आपको घर छोड़ दूँगा उसके बाद पैसे लूँगा।

हुमा: ठीक है।

कुछ देर बाद हुमा बाजार लेकर आई। जग्या ने उसको घर छोड़ा। हुमा जब पैसे देने लगी तो वो चला गया… हुमा जाते हुए जग्या देखकर सोचने लगी वैसे तो ये शराबी इंसान लगते नहीं फिर शांता ने क्यों इनकी इतनी बुराई की होगी…

हुमा घर के अंदर चली गई…

मिश्रा को भी कुछ दिन उसके असली गाँव जाना पड़ा… जग्या जब से हुमा से मिला उसको देखा तब से उसके बारे में सोचने लगा… अब वो बार-बार हुमा के घर के आसपास ऑटो ले आता इंतजार करता कि कब हुमा बाहर आए और कब वो उसकी मदद करे मगर जग्या की ये आदत उसको कुछ राज़ समझाने वाली थी…

मिश्रा गाँव से आ गया था। हुमा उससे मिलने जा रही थी तभी जग्या को लगा जाकर उसकी मदद करे मगर उसी वक्त उसकी ऑटो में प्रॉब्लम आई…

हुमा आगे निकल गई… कुछ देर बाद जग्या का ऑटो स्टार्ट हुआ तब तक हुमा बहुत दूर जा चुकी थी मगर फिर जग्या उसके पीछे गया…

कुछ दूर जाने के बाद बहुत दूर उसको हुमा दिखाई दी। वो मिश्रा की दुकान के बाहर खड़ी थी। जग्या ने ऑटो रोका और देखा मजरा क्या। हुमा ने यहाँ-वहाँ देखा और मिश्रा के शॉप में चली गई…

जग्या का दिल धड़क गया। उसने पता लगाने की कोशिश की। उसको पता चल गया कि मिश्रा का और हुमा का कुछ चक्कर चल रहा है…

जग्या को तो बहुत बड़ा झटका लगा। वो सोचने लगा इतनी नेक देवी जैसी औरत आखिर उस कमीने मिश्रा के जाल में कहाँ से और क्यों आई। उसने कुछ ही दिनों में सब पता लगा लिया खासकर कि उसकी खुद की बीवी भी उसमें शामिल है। पता चलते उसको बहुत बुरा लगा मगर उसकी बीवी से उसको कोई खास उम्मीद भी नहीं बची थी…

उसको अब फिक्र थी हुमा की…

उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो कैसे ये सब हुमा को बताए…

आखिर उसने हुमा को बताने की ठान ली…

वो हुमा के घर पहुँचा और एक साँस में हुमा को सब बता दिया। हुमा को ये सब सुनकर जग्या पर बहुत गुस्सा आया। उसने जग्या को एक थप्पड़ लगा दिया…

छट्टाआआक्क्क्क्क्क्…

हुमा: कितना अच्छा इंसान समझती मैं आपको। शांता सही कहती है आप शराबी इंसान हो। अब भी शायद पीकर आए हो…

जग्या गाल को सहलाते हुए हुमा को देख रहा था…

हुमा: फरिश्ते जैसे मिश्रा जी के बारे में अपनी बीवी के बारे में तुम क्या बोल रहे हो। होश है तुमको?

हुमा बहुत गुस्सा हो गई थी। उसे लग रहा था जग्या का मुँह नोच ले…

जग्या: मालकिन आपको यकीन दिलाकर ही रहूँगा। वादा रहा…

जग्या वहाँ से चला जाता है…

हुमा की आँखों में आँसू आ गए थे। वो कुछ देर रोती रही। कुछ देर बाद शांता आई मगर उसको हुमा ने कुछ नहीं बताया… हुमा को लग रहा था कि जग्या वाकई में बहुत बड़ा शराबी है…

यहाँ जग्या बहुत उदास था। वो सोच रहा था कि कैसे यकीन दिलाऊँ मगर तकदीर जग्या के साथ थी…

एक दिन जग्या मिश्रा पर नजर रखे हुए था। उसको कुछ पता चला। वो उसी वक्त हुमा के घर पहुँचा।

हुमा ने डोर ओपन किया और जग्या को देख उसको बहुत गुस्सा आया—

हुमा: तुमम्म

जग्या: मालकिन एक बात मेरी बात ध्यान से सुनिए। अगर मैं गलत साबित हुआ तो आप मुझे सिक्योरिटी ऑफिसर के हवाले कर दीजिए…

हुमा: तुम यहाँ से चलो जाओ नहीं तो मैं सच में सिक्योरिटी ऑफिसर को बुला लूँगी। शराबी इंसान उस दिन का थप्पड़ भूल गए क्या…

जग्या: आप मेरे साथ चलिए उसके बाद आपको जिसके हवाले करना है कर दीजिए।

हुमा: मुझे कहीं नहीं आना तुम्हारे साथ। जाओ यहाँ से।

हुमा ने चिल्लाते हुए कहा…

बहुत हाथ-पाँव जोड़ने के बाद हुमा जग्या के साथ जाने के लिए तैयार हुईं…

जग्या जल्दी से ऑटो स्टार्ट करके हुमा को उसके बस्ती के बाहर लेकर जाने लगा। वहाँ एक बड़ा सा गोदाम था। हुमा को मिश्रा भी कभी यहाँ लाया था…

हुमा को याद आया तभी जग्या ने ऑटो रोका और हुमा को नीचे उतरने को कहा। हुमा नीचे उतर गई तो जग्या उसको बोला—

जग्या: आप मेरे पीछे-पीछे आ जाओ…

जग्या आगे-आगे चलने लगा। हुमा पीछे-पीछे। जग्या उस गोदाम की दीवार के पास जाकर रुक गया और पीछे पलटकर हुमा को इशारे से चुप रहने को कहा…

जैसे जग्या ने वॉल के एक छेद में से अंदर झाँका कुछ देर देखने के बाद हुमा को बोला अंदर देखें। हुमा आगे बढ़ी और वो भी उस छेद की तरफ गई। उसमें से उसने जो देखा उसके पैरों के नीचे की जमीन हिल गई…

अंदर का नजारा ये था कि एक औरत झुकी हुई थी उसकी साड़ी उसकी कमर पर थी और मिश्रा उसको पीछे से चोद रहा था।

औरत: आआह्ह्ह मिश्रा जी सिर्फ 6000 लिए थे आपसे 2 साल से आप मेरी ले रहे हो।

मिश्रा चोदते हुए कहता है—

मिश्रा: अरे मेरी जान ये ब्याज है। अभी असल बाकी है।

औरत: भगवान से डरो मिश्रा जी कुछ तो रहम करो आआह्ह्ह आराम से।

हुमा की आँखों के सामने तो अंधेरा सा छा गया था।

आज जो उसने देखा था उसका तो अपने आप से भरोसा उठ गया था। उसकी आँखों के सामने अंधेरा सा छा गया था…

उसकी आँखों में आँसू आ गए थे। उसने पलटकर एक बार जग्या की तरफ देखा और ऑटो में जाकर बैठ गई…

जग्या जब ऑटो के पास पहुँचा तो हुमा फूट-फूटकर रो रही थी।

जग्या को भी हुमा का इस तरह रोना अच्छा नहीं लग रहा था…

जग्या: मालकिन ऐसे मत रोइए मुझे अच्छा नहीं लग रहा।

हुमा: (रोते हुए) आप मुझे घर छोड़ दीजिए प्लीज।

जग्या ने भी ज्यादा कुछ नहीं कहा। ऑटो स्टार्ट करके हुमा को घर छोड़ दिया…

हुमा के आँसू घर जाकर भी नहीं रुके थे। वो सोच रही थी मुझे तो आज के बाद मर्दजात से ही भरोसा उठ गया है। जिसको फरिश्ता समझा वो भी शैतान निकला। ऐसा मेरे साथ ही क्यों होता है। बहुत बड़ी सजा मिली है मुझे और मिलनी भी चाहिए। शौहर को धोखा जो दिया है…

बेचारे जग्या जी को भी थप्पड़ मार दिया… अगर ये सच है तो क्या शांता भी… नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता…

अब मैं क्या करूँ मुझे एक बार जग्या जी से बात करनी चाहिए। हुमा उठी और कुछ ढूँढने लगी। उसने एक पेपर पर जग्या का नंबर लिखा था जब गीता और वो उससे मिलने आए थे तभी उसको वो पेपर मिल गया…

उसने उसपर से नंबर डायल किया जग्या का।

जग्या ने कॉल उठाया—

जग्या: हेलो कौन?

हुमा: जी जी मैं हुमा बोल रही हूँ…

जग्या: आप मालकिन क्या हुआ आप ठीक हैं?

हुमा: मैं ठीक हूँ जगन जी। आप मुझे माफ कर दीजिए मैंने आप पर हाथ उठाया। बहुत बड़ी गलती हो गई।

जग्या: आप कैसी बात कर रही हो मालकिन। आपकी जगह कोई भी होता तो यही करता…

हुमा: जगन जी मेरी आखिरी मदद कर दीजिए। जैसे उस कमीने मिश्रा का नकाब हटाया है उसी तरह मुझे शांता को भी रंगे हाथों पकड़ना है।

जग्या: कोई बड़ी बात नहीं। जल्द ही आपको सबूत दूँगा मालकिन।

2 दिन बाद जग्या का कॉल आता है। जग्या एक अड्डे पर हुमा को बुलाता है। हुमा उस जगह पहुँचती है। वो भी एक पुराना गोदाम था। जग्या एक गोदाम के करीब एक बड़े होल से नजारा दिखाता है। अंदर का नजारा ये था कि शांता की दोनों टाँगें मिश्रा के गले में थीं और वो धड़ाधड़ धक्के लगाए जा रहा था।

शांता: आज बहुत जोशआआह्ह्ह चढ़ा है मिश्रा। तेरी गोरी मैम हुमा आजकल तुझे चोदने नहीं देती क्या आआह्ह्ह

मिश्रा: वो तो मेरी स्पेशल रांडी है।

ये नजारा देख हुमा को दुनिया के हर इंसान से नफरत हो रही थी मगर जग्या जैसे कुछ लोग थे जिन पर वो भरोसा कर सकती थी…

हुमा एक हारे हुए इंसान की तरह बेजान लाश की तरह खड़ी थी। जग्या ने धीरे से 2 बार मालकिन कहा मगर फिर भी उसका ध्यान नहीं था…

जग्या: मालकिन।

हुमा ने पलटकर देखा और बिना कुछ कहे ऑटो की तरफ जाने लगी। जग्या भी पीछे जाने लगा। जग्या ने ऑटो स्टार्ट किया। अब भी हुमा चुप थी। जग्या ने उसको घर छोड़ा। हुमा चुप थी। जग्या को लगा कि इस हालत में हुमा को अकेला छोड़ना ठीक नहीं होगा…

वो अंदर घर तक साथ उसके साथ आया। हुमा अब भी चुप थी शॉक में थी। जग्या ने उसको कहा—

जग्या: मालकिन ऐसे हिम्मत मत हारिए। मैं समझ सकता हूँ आप पर क्या बीत रही है। जिन पर भरोसा किया सबने आपको धोखा दिया। हिम्मत रखिए।

ये सुनते ही हुमा जोर चिल्लाकर रोने लगी। जग्या घबरा गया मगर हुमा के करीब आकर उसको समझाने की कोशिश की। कुछ देर रोकर हुमा चुप हुईं।

हुमा: जगन जी आप ही बताइए अब मैं क्या करूँ। इस हालत में मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा।

जगन: मुझे लगता है हमें सिक्योरिटी ऑफिसर के पास जाना चाहिए।

हुमा: मगर सिक्योरिटी ऑफिसर में जाएँगे तो बदनामी होगी…

तभी डोर पर एक लड़की की आवाज आती है—

गीता: मौसी आपको सिक्योरिटी ऑफिसर स्टेशन जाना चाहिए।

वो लड़की गीता थी…

गीता: मौसी अगर मेरी माँ ने ये पाप किया है तो उसको भी सजा मिलनी चाहिए और खासकर कि उस कमीने मिश्रा को जिसने बस्ती की कई औरतों की जिंदगी बर्बाद कर रखी है। मौसी आपको जाना ही चाहिए।

हुमा और जग्या उसकी तरफ गौर से देख रहे थे…

गीता: हाँ आप लोग सोच रहे होंगे मुझे कैसे पता चला। मैंने आप लोगों की बात सुन ली थी…

हुमा गीता की बात सुनकर सिक्योरिटी ऑफिसर स्टेशन जाने को तैयार होती है…

तभी जग्या बोलता है कि सिक्योरिटी ऑफिसर को कुछ सबूत देंगे तो आसानी होगी।

हुमा: सबूत मैं समझी नहीं।

गीता और हुमा जग्या को देख रहे थे कि जग्या आखिर किस सबूत की बात कर रहा है।

जग्या: मेरे साथ आओ बताता हूँ।

तीनों बाहर आकर ऑटो में बैठकर निकल जाते। हुमा और गीता सोच रहे थे जग्या कहाँ ले जा रहा है। एक पुराने से घर के बाहर आकर जग्या ऑटो रोक देता है…

घर के बाहर जाकर जग्या डोर नॉक करता है। डोर खुलता है। सामने एक औरत खड़ी थी जिसे देख हुमा शॉक हो जाती है…

हुमा: आआप्प्प्प

वो औरत वही नाटक मंडली वाली थी जो मिश्रा की फेक बीवी बनी थी। वो औरत हुमा को देख भागने की कोशिश करती है मगर जग्या उसको पकड़ लेता है।

जग्या: अरे भाग कहाँ रही है अभी तो तुझे अपने पापों का प्रायश्चित करना है।

औरत: मुझे माफ कर दो मुझे पैसों की जरूरत थी। वो पनवाले और शांता ने मुझे पैसों का लालच दिया तो मैं और मेरा बेटा उस पनवाले का परिवार बन गए। हमें माफ कर दो हम बहुत गरीब हैं…

जग्या: कामिनी औरत पैसों के लिए तूने इस देवी जैसी औरत को भी धोखा दे दिया…

वो औरत हाथ जोड़कर रो रही थी तभी उसका बेटा बाहर से आया। जग्या ने उसको भी पकड़ लिया और सब लोग सिक्योरिटी ऑफिसर स्टेशन पहुँच गए…

सिक्योरिटी ऑफिसर इंस्पेक्टर को सब बात बता दी। दोनों माँ और बेटे ने मिश्रा और शांता के खिलाफ बयान दे दिया। सिक्योरिटी ऑफिसर ने केस बना लिया। एक घंटे में मिश्रा और शांता को अरेस्ट करके सिक्योरिटी ऑफिसर स्टेशन लाया गया। शांता की हिम्मत नहीं हो रही थी अपनी बेटी से आँख मिलाने की। मिश्रा को भी बहुत अफसोस हो रहा था। उसने सोचा भी नहीं था हुमा उसको अरेस्ट भी करा सकती है…

दोनों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया तभी सैफ भी सिक्योरिटी ऑफिसर स्टेशन आ गया।

सैफ: (हुमा को देखते हुए) हुमा ये सब क्या है? वो तो मुझे शांता ने कॉल किया तो पता चला।

सिक्योरिटी ऑफिसर इंस्पेक्टर सैफ को सब बात बताता है…

सैफ को बहुत गुस्सा आता है। वो मिश्रा का गिरेबान पकड़कर—

सैफ: कमीने हरामजादे तूने मेरी बीवी के साथ ऐसा किया…

तभी सिक्योरिटी ऑफिसर कांस्टेबल सैफ को मिश्रा से दूर करते हैं।

सिक्योरिटी ऑफिसर इंस्पेक्टर: मिस्टर, आप कानून को अपने हाथ में न लें नहीं तो मुझे आपको भी अरेस्ट करना होगा।

सैफ हुमा की तरफ जाकर हुमा को तमाचा लगा देता है—

सैफ: तुमको सिक्योरिटी ऑफिसर स्टेशन आने से पहले मुझे बताना चाहिए। तुम कितनी गिर गई हो उस पनवाले के साथ सो गई। थू है तुम पर।

हुमा: वाह सैफ साहब। औरत करे तो गुनाह मर्द करे तो कुछ नहीं। शर्म तुमको आनी चाहिए। तुमने एक नौकरानी को भी नहीं छोड़ा। मैंने जो किया वो हालात कुछ और थे मैं फँस गई थी इनके जाल में मगर तुम्हारा क्या…

सैफ शर्मिंदा होकर सिक्योरिटी ऑफिसर स्टेशन से चला जाता है…

दो दिन बाद मिश्रा, शांता और वो माँ-बेटे को कोर्ट लेकर जाते हैं और उनको सजा हो जाती है। मिश्रा को 3 साल की सजा, शांता को एक साल की सजा और माँ-बेटे को 2 महीने की सजा सुनाई जाती है…

एक वीक गुजर जाता है। सैफ गली से गुजर रहा था तभी 2 मर्द बातें करते हैं—

पहला: अबे ये वही जिसकी बीवी उस काले कलूटे से चुदती।

दूसरा: क्या बात कर रहा है वही है। हाँ मैंने अखबार में पढ़ा था। साला काले पनवाले की भी लॉटरी लग गई।

पहला: ये बीवी को खुश नहीं रख पाता होगा।

सैफ ये सब सुनकर बहुत गुस्सा होता है मगर उन दोनों को कहता कुछ नहीं… गुस्से से वो सीधा घर जाता है। घर पर हुमा थी… वो अपना गुस्सा हुमा पर निकाल देता है…

सैफ: तुम्हारी वजह से मैं किसी को मुँह दिखाने लायक नहीं रहा। इस शहर में रहने लायक नहीं छोड़ा मुझे। तुम और मैं अब साथ नहीं रह सकते…

सैफ गुस्से में हुमा को जाने को कह देता है। हुमा भी अपना बैग लेकर गुस्से में चली जाती है…

कुछ देर बाद सैफ का गुस्सा ठंडा होता है तो वो हुमा को ढूँढने को निकल जाता है। सैफ को पता था उसके अलावा हुमा का कोई नहीं है। उसको पछतावा होता है…

बहुत ढूँढने के बाद हुमा नहीं मिली। हुमा रेलवे स्टेशन आ गई थी मगर वो सोच रही थी आ तो गई मगर जाए कहाँ। उसका कोई नहीं था। दूर के रिश्तेदार थे मगर उनके पास जाना बेकार था…

तभी रेलवे स्टेशन पर 2 शराबी आते हैं। रेलवे स्टेशन पर कोई खास भीड़ नहीं थी…

पहला शराबी: अरे देख क्या माल है। चल पूछते हैं कितना लेगी।

शराबी हुमा के पास जाकर—

शराबी: कितना लेगी एक शॉर्ट का?

हुमा उसकी बात समझ नहीं पाती उसको देखती रहती है। शराबी देखता है कुछ नहीं बोल रही उसकी डेयरिंग बढ़ जाती है। वो आगे बढ़कर हुमा का हाथ पकड़ लेता है…

हुमा: (चिल्लाती है) छोड़ कमीने।

तभी उस शराबी को एक थप्पड़ पड़ता है। वो शराबी नीचे गिर जाता है। वो थप्पड़ जग्या ने मारा था।

हुमा जग्या को देखती है। उसके जान में जान आती है। जग्या एक और लात शराबी को मारता है। शराबी और उसका दोस्त घबराकर भाग जाते हैं…

जग्या: मालकिन आप यहाँ कहाँ जा रही हो आप?

हुमा की आँख में आँसू आ जाते हैं…

हुमा: जगन जी अच्छा हुआ आप सही वक्त पर आ गए। फिर हुमा उसको सब बताती है।

जग्या: ओह ऐसा किया साहब ने। अच्छा नहीं किया। मगर आप अब कहाँ जा रही हैं?

हुमा: पता नहीं।

जग्या: मतलब?

हुमा: मेरा कोई करीबी रिश्तेदार नहीं है… सोच रही थी कहाँ जाऊँ।

जग्या: एक बात बोलूँ मालकिन। मेरी हैसियत नहीं है झोपड़ा है हमारा मगर आप उसको अपना घर समझकर रह सकती हैं। गीता भी है।

गीता का सुनकर हुमा मान जाती है और जग्या के साथ उसके बस्ती में उसके टूटे-फूटे घर में आ जाती है।

गीता हुमा को गले लगा लेती है।

गीता: बाबा आपने बहुत अच्छा किया मौसी को यहाँ ले आए।

गीता, जग्या और हुमा अब उस छोटे से घर में रहने लगते हैं। ज्यादा बड़ा घर नहीं था। एक छोटा सा घर था… सामने किचन उसके बगल में बाथरूम। टॉयलेट के लिए बाहर जाना पड़ता था। एक सिंगल हॉल था…

हुमा को आदत नहीं थी ऐसे बस्ती में रहने की मगर वो एडजस्ट कर रही थी और कोई रास्ता भी नहीं था। दूसरी बात गीता और जग्या उसका ख्याल भी बहुत रख रहे थे।

वो बाहर निकलती तो सब उसको देखते…

मोहल्ले के लोग उसके बारे में बातें करते। इसी औरत ने शांता को जेल करा दी। कुछ औरतें उसका शुक्रिया भी करतीं क्योंकि मिश्रा जैसे कमीने को उसने जेल करवाया…

कुछ दिन ऐसे ही गुजर गए। वहाँ सैफ को हुमा नहीं मिली। उसने उसको बहुत ढूँढा मगर वो शांता के घर होगी ये उसने नहीं सोचा। खैर अब हुमा की फिक्र उसको कम ही थी। उसको अब शांता की याद ज्यादा आती। उसने अच्छा एडवोकेट करके शांता को जेल से बाहर निकालने का फैसला किया…

6 महीने बीत गए। आखिर सैफ ने शांता को जेल से रिहा करा दिया। शांता अब सैफ के घर रहने लगी मगर उसको मोहल्ले वाले के ताने बहुत सुनने पड़ रहे थे…

शांता ने सोचा वो क्यों न उसके पति के घर जाए मगर उसमें हिम्मत नहीं थी। आखिर उसने घर जाने का फैसला किया…

शांता जब उसके घर पहुँची तो वो शॉक हो गई क्योंकि उसके घर में हुमा झाड़ू लगा रही थी।

शांता: तुमम्म

हुमा: तुम जेल इतनी जल्दी आ गई।

शांता: तू मेरे घर में क्या कर रही है?

शांता हुमा को तू से बात कर रही थी।

तभी गीता आ जाती है।

गीता: माँ मौसी अब हमारे घर का हिस्सा है और तुम अब इस घर का हिस्सा नहीं हो।

शांता: बेटी मैं तेरी माँ हूँ। इस डायन ने क्या जादू कर दिया तुझ पर।

गीता: माँ जादू नहीं किया। मैं अब बच्ची नहीं हूँ। तुम्हारी गंदी हरकतों की वजह से मैं यहाँ रहना चाहती हूँ तुम्हारे साथ। तुम यहाँ से जा सकती हो।

हुमा: गीता ऐसे न कहो ये तुम्हारी माँ है।

शांता: तुम ज्यादा महान मत बनो। ये मेरी और मेरी बेटी के बीच की बात है।

तभी जग्या भी वहाँ आ जाता है।

जग्या भी शांता को घर से जाने को कहता है…

शांता गुस्से से निकल जाती है और सैफ के पास जाकर उसको बताती है क्या हुआ। सैफ को भी सुनकर गुस्सा आ जाता है…

शांता: साहब मेरे घरवालों ने भी अब मुझे घर से निकाल दिया। अब मैं कहाँ जाऊँ। अब मेरा कोई नहीं है।

शांता चालाक औरत थी। सैफ को अपने जाल में आखिर उसने फिर से फँसा लिया।

सैफ: शांता तू फिक्र मत कर। मैं हूँ। मैं अपनाऊँगा तुझे। दो दिन वक्त दो मुझे।

दो दिन में सैफ एडवोकेट से मिलकर उसके और हुमा के डिवोर्स पेपर बनाता है साथ ही शांता और जग्या के भी…

दो दिन बाद सैफ और शांता जग्या के घर पहुँचते हैं… आज जग्या भी घर पर ही था। गीता और हुमा बातें कर रहे थे। जैसे सैफ को हुमा ने देखा उसको खुशी हुई। आज 6 महीने बाद उससे मिली थी वो।

शांता जग्या के पास जाकर—

शांता: सुनो ये हमारे तलाक के पेपर हैं। इस पर अपना अंगूठा लगा दो।

जग्या: क्याआआ

गीता: यही उम्मीद थी तुमसे माँ।

शांता: मैं और साहब शादी कर रहे हैं।

हुमा: क्याआआआ

हुमा: ये मैं क्या सुन रही हूँ?

सैफ: सही सुन रही हो।

सैफ हुमा को कुछ पेपर दिखाते हुए कहता है—

सैफ: इस पर तुम साइन कर दो। मैं तुमसे तलाक ले रहा हूँ।

हुमा शॉक हो गई…

हुमा की आँखों में आँसू आ गए।

गीता: रो मत मौसी। जल्दी साइन करो और इस गंदगी को घर से बाहर निकलो।

सैफ और शांता को गीता की बात से और ज्यादा गुस्सा आता है…

सैफ: हाँ तो रुकना भी कौन चाहता है। अभी साइन करो। जाना है हमको भी।

हुमा साइन कर देती है। जग्या भी अंगूठा लगा देता है। शांता और सैफ घर से निकल जाते हैं…

सैफ अपना घर और शॉप बेचकर दूसरे शहर चला जाता है और शांता से शादी कर लेता है।

यहाँ हुमा की आखिरी उम्मीद भी खत्म हो जाती है। उसको लगा था कि सैफ फिर से उसको अपनाएगा मगर हुआ नहीं ऐसा।

एक दिन हुमा गीता और जग्या से बोलती है कि वो जॉब करना चाहती है। अब और ज्यादा बोझ नहीं बनना चाहती वो किसी पर।

गीता: मौसी आप हम पर बोझ नहीं।

जग्या: आज आपने ऐसा बोलकर दिल तोड़ दिया। आपको हमेशा अपना समझा मैंने।

हुमा: मेरी बात वो मतलब नहीं है। मैं तो सोच रही थी पढ़ी-लिखी हूँ घर में कुछ पैसे आ जाएँगे नौकरी करके…

जग्या: मैं अब ज्यादा से ज्यादा ऑटो चलाऊँगा मगर आपको नौकरी नहीं करने दूँगा।

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