माँ की चुदाई देखी सिनेमा हाल मे – 1
Maa ki chudai cinema hall me:- हैलो दोस्तों! मैं आपका दोस्त करण आपके सामने लेकर आया हूँ एक और अपनी नयी Hindi sex story। जिसमे मेरी माँ मेरे सामने ही सिनेमा हाल में चुद जाती है। मैंने अपनी माँ की चुदाई देखि और खूब मजे लिए। चलिए फ्रेंड्स ज्यादा टाइम ख़राब न करते हुए अब मैं सीधा कहानी पर आता हूँ। मेरी माँ के बारे में तो आपको पता ही है। उनका नाम विनीता है और उनकी उम्र 42 साल है और उनका मस्त फिगर 36-30-38 है। मेरी माँ का साइज सुनकर ही आपका लंड जरूर खड़ा हो गया होगा। और इस तरह ही हमारे घर के आस पास के लोगो का लंड मेरी माँ को देखते ही खड़ा हो जाता है। मेरे दोस्त मेरे घर पर ज्यादा आते है क्योकि उनको मेरी माँ की गांड और बूब्स देखने का बहोत मन करता है।
Maa ki chudai cinema hall me
मैंने काफी बार देखा है की मेरे फ्रेंड्स मेरी माँ के बूब्स और गांड को दबा देते है। मेरी माँ भी ख़ुशी ख़ुशी ये सब आराम से करवा लेती थी, शायद उनको भी मजा आता होगा। अब स्टोरी पर आता हूँ। एक दिन अपने रूम में मैं बैठ कर देसी हिंदी कहानी पढ़ कर मुठ मार रहा था। फिर मुठ मारने के बाद मैं बाहर गया, तभी मेरी माँ का फ़ोन जो बाहर पड़ा था। उस पर एक कॉल आया, मैंने फ़ोन को उठाया तो देखा की सुमन आंटी का फ़ोन था। सुमन आंटी मेरी माँ की अच्छी दोस्त थी और चालू भी बहोत थी। उसने भी काफी लंड लिए हुए थे, पर अभी उन्हें मेरी माँ से कोई काम था।
जब मैंने फ़ोन उठाया तो हमारी ये बात हुई।
मैं – हेलो सुमन आंटी कैसी हो आप?
सुमन – ठीक हूँ, बेटा करण तू बता केसा है?
मेरा सुमन आंटी की आवाज सुनकर ही लंड खड़ा हो गया था और मैं बोला।
मैं – अच्छा हूँ आप बताओ क्या कर रही हो?
सुमन – मैं भी ठीक हूँ कुछ नहीं बस फ्री टाइम था, तो सोचा की तेरी माँ से बात कर लू। तू बता तू क्या कर रहा है?
मैंने सुमन आंटी के मजे लेने शुरू कर दिए और मैं बोला।
मैं – मैं कुछ नहीं मेरा मन कर रहा है।
सुमन आंटी भी बहोत चालू थी वो बोली – क्या मन कर रहा है?
मैं – आंटी मेरा आम चूसने का या दूध पीने के बहोत मन कर रहा है।
सुमन आंटी मस्ती में बोली – आम चूसने है तो अपनी माँ को बोल। उसके पास अच्छे और बड़े बड़े आम है उनमें काफी रस भी है।
ये बात सुन कर मुझे मेरी माँ के मोटे मोटे गोल गोल बूब्स की याद आ गयी। सच में मेरी माँ के आम बहोत बड़े और अच्छे थे और उन में रस भी बहोत सारा था। मैं ये सब कुछ सोच ही रहा था की तभी मेरे सामने मेरी माँ आ गयी। मेरी माँ ने ब्लू कलर का सूट डाला हुआ था जिसमे से माँ के बूब्स क्या मस्त लग रहे थे। पीछे से उनकी बड़ी और मोटी गांड जिसमे माँ का कुरता फसा हुआ था। माँ अपने बूब्स हिला हिला कर मेरे पास आयी और बोली
माँ – बेटा किसका फ़ोन है?
मैं – मम्मी सुमन आंटी का है लो मम्मी बात करो।
मेरी माँ ने जल्दी से फ़ोन लिया और बोली – चल अब तू अंदर जा। मुझे लगा पता नहीं सुमन आंटी ने ऐसी क्या बात करनी है, जो मेरी माँ ने मुझे अंदर भेज रही है। तभी मेरी माँ के बोलने पर मैं अंदर जा रहा था। तभी मैंने रूम में जा कर सोचा क्यों न माँ की आंटी की बातें सुनु। तो मैं बाहर छुप कर माँ और आंटी की बात सुनने लग गया।
माँ – हाँ सुमन रानी बोल क्या बात है और क्या मजे ले रही थी तू मेरे बेटे के साथ?
सुमन – कुछ काम नहीं था तो सोचा तुझसे बात करूँ और मजे मैं नहीं तेरा बेटा ले रहा था तभी तू बीच में आ गयी।
माँ – क्या बोल रहा था मेरा बेटा।
सुमन – कुछ नहीं बोल रहा था उसका आम चूसने का मन कर रहा है। मैंने भी कह दिया बेटा आम तो तेरे घर में ही है। तेरी माँ के पास जो काफी बड़े और गोल गोल है जा चूस ले।
माँ हँसते हुए बोली – अच्छा मतलब मेरा बेटा अब बड़ा हो गया है।
सुमन – हाँ पहले मैंने सोचा की ये कह दूँ की तू मेरे आम चूसना चाहता है क्या? क्योकि तेरी माँ के आम तो रोज पता नहीं कितने चूसते है।
माँ – चूसते है तो क्या हुआ मजा भी तो आता है और साथ में माँ ने अपने हाथ से अपना लेफ्ट वाला बूब्स मसल दिया।
सुमन – हां सीमा और बता कब घोड़ी बनी थी इन दिनों में।
माँ उदास होते हुए बोली – कहाँ पर घोड़ी बनी मेरा संजय के साथ तो ब्रेकअप हो गया और कोई नया मुर्गा मिल नहीं रहा है।
सुमन – ये बात है क्या तो तू एक काम कर यहाँ पर एक चीप सा सिनेमा है। वहाँ पर चालू लड़के आते है और वो औरतो को चूसते और उनकी गांड और चूत का भोसड़ा बना कर रख देते है। साले फुल मजे देते है उस सिनेमा में वहां पर चली जा तेरी चूत की गर्मी ख़तम हो जाएगी।
माँ – ये बात है क्या चल ठीक है तू मुझे एड्रेस सेंड कर मैं चली जाउंगी और मजे ले कर आती हूँ।
सुमन – अच्छा देख साली कितनी चालू है चुदने के लिए कितनी जल्दी से तैयार हो गयी है। चल मैं सेंड करती हूँ ओके बाई मैं सेंड करती हूँ और फुल मजे देना वहां पर बाई।
माँ भी मस्ती में बोली – ठीक है मजा आएगा आज तो बाई एंड थैंक्स।
फिर माँ ने फ़ोन कट किया और एड्रेस देख कर अपने रूम में चली गयी। मैंने सोचा आज मैं भी माँ की चुदाई देखूंगा। तो मैंने माँ के मोबाइल से एड्रेस लिया और अपने रूम में जाने लगा। तभी मैंने देखा की माँ के रूम का डोर खुला है मेरा मन माँ को नंगी देखने का होने लग गया। मैं माँ के रूम के पास गया वहां पर एक होल पहले से ही था। फिर मैं आराम से उस होल में से अंदर का नजारा देख रहा था। मैंने अपनी आंख वहीं पर लगा ली थी। मेरा लंड अंदर का नजारा देख कर खड़ा हो गया।
मैंने देखा की मेरी माँ पानी भर रही थी और फिर उसने सबसे पहले अपना ब्लू कलर का कुरता खोलना शुरू किया। मेरी माँ का पहले मुँह दूसरी तरफ था फिर मेरी तरफ हो गया। मैंने देखा की मेरी माँ ने ब्लैक रंग की ब्रा डाली हुई थी। और उस में माँ के बूब्स मुश्किल से आ रहे थे, वो बाहर आने को मचल रहे थे। फिर माँ ने अपने दोनों हाथ पीछे किया और अपनी ब्रा के हुक्स खोल कर धीरे से अपनी ब्रा उतार कर अपने पास रख ली। माँ की ब्रा खुलते ही उनके बूब्स एक दम उछल कर बाहर आये थे। दोनों बूब्स एकदम गोरे और बहोत बड़े एक दम आम जैसे लग रहे थे। और उनके निप्पल्स की तो बात ही अलग थी।
इसके बाद फिर मेरी माँ ने अपने बूब्स को दबाया और फिर अपनी सलवार का नाडा खोला और सलवार को नीचे कर दी। मेरी माँ क्या मस्त रंडी लग रही थी। माँ ने सलवार को साइड में रखा और वो पीछे बकेट को देखने के लिए जैसे ही वो झुकी। तो उनकी गांड में उनकी ब्लैक रंग की पैंटी पूरी तरह से फंस गयी और क्या कमाल की लग रही थी। फिर मेरी माँ ने अपनी पैंटी को उतारना शुरू कर दिया। मेरी माँ ने पैंटी को ऊपर से पकड़ा और फिर उसे नीचे कर दिया। फिर माँ ने गांड मेरी तरफ करी क्या बात थी, मेरी माँ की गांड अगर आप देख लेते तो आपके लंड का पानी बिना हिलाये ही निकल जाता।
माँ की गांड देख कर मैं तो माँ को घोड़ी बना कर चोदने के सपने देखने लग गया। तभी माँ मुड़ी और उनकी चूत मेरे सामने आ गयी। माँ की चूत पर बाल थे। फिर माँ ने अपनी चूत के ऊपर के साइड को पकड़ा और उसमे उन्होंने ऊँगली डाल दी। माँ की ऊँगली के कारन मुझे उनकी चूत साफ़ साफ़ दिख रही थी। एक दम गुलाबी रंग की चूत सच में मस्त लग रही थी। फिर माँ ने काफी देर तक अपनी चूत में ऊँगली करी पहले एक ऊँगली फिर दो फिर फिर तीन ऊँगली मेरी माँ की चूत में जा रही थी।
माँ – आहह अहह उमहम्म ओह्ह्ह यस आह्हः।
माँ ऐसी आवाजें निकाल रही थी मैं भी अब काफी देर से उनको देख कर मुठ मार रहा था। कुछ देर के बाद माँ ने अपनी उंगलिया बाहर निकाली वो गीली हो चुकी थी। मतलब अब वो झड़ चुकी थी। फिर माँ ने मुझे आवाज लगाई पर मैं मुठ मार रहा था। की तभी मुझे लगा की माँ ने मुझे देख लिया है इसलिए उन्होंने मुझे आवाज लगाई है।
मैंने बाहर आ कर बोला – हाँ मम्मी क्या है?
माँ – बेटा बाहर टेबल पर एक क्रीम पड़ी है वो ले कर आ और मुझे दे।
मैंने वो क्रीम देखि तो वो क्रीम चूत और लंड के बाल साफ़ करने वाली थी। फिर मैं वो क्रीम माँ को देने के लिए चला गया। मैंने माँ को आवाज दी और माँ ने दरवाजा खोला। तो मैंने जान बूझ कर दरवाजा के अंदर ही चला गया और वहां पर जा कर बस माँ का जिस्म देखने लग गया। कभी मेरा धयान माँ के बूब्स पर जाता तो कभी उनकी चूत तो कभी उनके भीगे हुए होंठो पर। माँ मुझे देख रही थी और उन्हें पता चला गया था की मेरा धयान उनके जिस्म पर है।
माँ – बेटा क्या देख रहा है?
उनकी आवाज सुन कर मुझे होश आया और मैं बोला – कुछ नहीं माँ आप सच में बहोत सूंदर और हॉट हो।
तो माँ ने मुझे धीरे से थप्पड़ मारा और बोली – चल हट पागल जा बाहर मुझे नहाने दे।
फिर मैं बाहर आ गया और मेरे बाहर जाते है माँ ने दरवाजा अंदर से लगा लिया। मैं फिर से होल के सामने बैठ कर अंदर देखने लग गया। माँ अंदर नीचे बैठ गयी और अपनी चूत पर खूब क्रीम लगा कर उसे एक टूल से साफ़ कर रही थी। कुछ ही देर में माँ की चूत पर एक भी बाल नहीं था अब उनकी चूत पूरी साफ दिख रही थी। क्या मस्त माल थी मेरी माँ सच में ऊपर से उनकी चूत उन पर चार चार चाँद लगा रही थी। मस्त गोरी गोरी और टाइट चूत किसी का भी लंड आराम से खड़ा कर सकती थी। वो मर्द कितना किस्मत वाला होगा जिस को मेरी माँ की चूत में अपना लंड डालने का मौका मिलता होगा।
चूत साफ़ करने के बाद माँ ने पानी का मग उठाया और नहाने लग गयी। माँ जब बैठी थी तो उसकी चूत मुझे साफ़ साफ़ दिख रही थी। मेरी माँ की चूत और उनका जिस्म सच में बहोत ही क़यामत लग रहा था। माँ जब भी अपने ऊपर पानी डालती तो पानी सबसे पहले उनके मुँह पर फिर उनके बूब्स और फिर उनकी चूत पर जाता था। पानी के कारन माँ का अंग अंग चमक रहा था और इतने में कोई दरवाजे पर आ गया और मेरा धयान वहां पर चला गया। और माँ को भी पता चल गया की बाहर दरवाजे पर कोई है। तो मुझे माँ ने जा कर देखने को कहा।
मेरा वहां से जाने का दिल नहीं था पर माँ के कहने पर मझे बाहर जाना ही पड़ा और मैं बाहर चला गया। बाहर न्यूज़ पेपर वाला था जो अपने पैसे लेने के लिए आता था। मैंने उसे मन में गालिया दी और मैं जल्दी से पैसे दे कर अंदर आ गया। पर इसी बीच में 10 मिनट से ज्यादा निकल चुके थे जिस कारन माँ नहा कर अपने रूम में चली गयी थी। वहां पर मैं गया और छुप कर माँ को देखने की ट्राई करने लग गया। फिर माँ तैयार होने लग गयी। उन्हें तैयार होता देख मेरे लंड का पानी फिर से निकल गया।
आगे क्या हुआ वो बताऊँगा अगले पार्ट मे, माँ की चुदाई भी होगी और एक नहीं काफी लोगो से। मैं अब जल्दी ही नेक्स्ट पार्ट ले कर आता हूँ। अगर आपको मेरी ये कहानी पढ़ कर जरा सा भी मजा आया हो। तो प्लीज कहानी को लाइक और शेयर जरूर करें। और अपना प्यार दिखने के लिए आप मुझे कमैंट्स भी कर सकते है।
Next Part ==> माँ की चुदाई देखी सिनेमा हाल मे – 2
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