मम्मी को दादा जी से चुदवाया – 1

Mummy aur dada ji ki chudai story:- मेरी ये कहानी मम्मी और दादा जी के बीच बने रिश्ते की है। मेरे घर में 4 लोग है। पापा, मम्मी, मैं और मेरे दादा जी। पापा दिल्ली में जॉब करते है और महीने में 1 बार ही घर आते है। मेरी मम्मी का नाम सीमा है। उनकी उम्र 39 साल है। वह बिलकुल एक देसी औरत है। मोटे मोटे दूध 36 साइज के, बड़ी मोटी गांड 40 या 42 साइज की। और वह हमेशा साड़ी ही पहनती है। जिसमें उनका खुला हुआ पेट और कमर बहुत सेक्सी लगती है और बहोत ही सुन्दर हैं।

Mummy aur dada ji ki chudai story

मैं कॉलेज के फर्स्ट ईयर में हूँ और पढ़ाई के साथ साथ चुदाई की जानकारी भी पूरी मिल चुकी है। वैसे चुदाई का ज्ञान मुझे जल्दी ही मिल गया था। मगर बाद में पता चला की अभी मुझे और भी बहुत कुछ जानना है। कॉलेज के दोस्तों ने मुझे भाभी और आंटी की आदत लगवा दी। और यही से मुझे सेक्स कहानी की आदत लगी। जिसे पढ़ने के बाद मुझे पता चला की लोग अपनी माँ की भी चुदाई कर देते है। कहानी पढ़ने के बाद खुद को कण्ट्रोल करना मुश्किल होता था। और मेरी नज़र भी बार बार मम्मी के बदन पर जाती थी। जिसे देखकर पता चलता था की मम्मी अंदर से कितनी गरम माल है।

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मैंने कभी मम्मी के बारे में ऐसा नहीं सोचा था। मगर कहानी पढ़के पता चला की जो औरते अपने पति से दूर रहती है उनकी चूत में ज्यादा खुजली होती है। और ऐसी औरते अपनी चूत की गर्मी बाहर किसी और से निकलवा लेती है। अब मेरा दिमाग मम्मी के बारे में चलने लगा। मम्मी भी तो अकेली रहती है और पापा महीने में 1 बार आते है। वह भी सिर्फ 2 दिन के लिए और २ दिन में वह कितनी बार मम्मी की चुदाई करते होंगे। कही मम्मी भी तो बाहर किसी से नहीं चुदवाती है।

जब से मैंने ऐसा सोचना शुरू किया, तब से मैंने देखा की हमारे मोहल्ले में कई लोग मम्मी को घूरते है। जब मम्मी छत पर होती है तब भी कई लोग छत पर आ जाते है और मम्मी की गांड और उनके दूध को घूरते है। मम्मी के बारे ऐसा सोच के मेरा लंड हमेशा खड़ा ही रहता था और अब तो रात को मुझे सपने भी मम्मी के आते थे। मैं मम्मी को कभी सामने वाले अंकल से चुदवाते हुए देखता था तो कभी मम्मी को दूध वाला चोद रहा होता था। मैं मम्मी को कई लोगे के साथ ऐसे सपने में देख चुका था। इसी बीच मैंने मम्मी पर नज़र रखी और उनके कपडे बदलते हुए पिक्स लेने लगा।

रात में कमरे में वह मैक्सी पहन लेती थी और मैक्सी के अंदर मैंने कई बार उन्हें नंगा देखा है। मम्मी ब्रा पैंटी में एक दम माल लगती है। और जब वह नंगी होती है तब तो स्वर्ग की अप्सरा लगती है। मैंने कई बार देखा था की मम्मी अपनी चूत को कई बार रगड़ती थी। अब या तो उन्हें सच में खुजली होती थी या फिर उनकी चूत की गर्मी उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर करती थी। इस बात सबूत मुझे जल्दी ही मिल गया।

एक दिन मैंने मम्मी के नहाने से पहले अपना मोबाइल बाथरूम में छुपा दिया और मम्मी की पूरी नंगी जवानी की वीडियो मैंने मोबाइल में देखि। वीडियो में मैंने देखा की मम्मी काफी बार अपनी चूत को रगड़ती थी। मम्मी को ऐसे चूत रगड़ते देखकर मैंने भी आपने लंड हिलाया और फिर मुझे वह मिला जिसकी मदद मैंने खुद की मम्मी की चूत दिलाने में।

वह इंसान कोई और नहीं बल्कि मेरे दादा जी है। दादा जी का नाम सुन्दर लाल है। उनकी उम्र 60 प्लस है। सर के बाल सफ़ेद हो चुके है और शरीर भी नार्मल ही है। दिखने में ठीक ठाक लगते है। दादा जी घर पर ही रहते है और हर महीने उनकी पेंशन आती है। इसीलिए खुद के खाने पीने का भी पूरा ख्याल रखते है। दादा जी मुझे बहुत प्यार करते है और मैं भी उनके साथ काफी टाइम बिताता हूँ यहाँ तक की मेरा मोबाइल भी मुझे दादा जी ने दिलाया है। मैं उनके साथ बाहर भी घूमने जाता रहता हूँ। जब भी मैं और दादा जी पार्क में घूमने जाते थे। तब मैं हमेशा देखता था की दादा जी की नज़र औरतो की बड़ी बड़ी गांड और उनके मोटे मोटे दूध पर होती थी।

यहाँ तक की जब मैं उन्हें बैंक लेके जाता था तब भी वह वह औरतो की जवानी को ही घुरा करते थे। दादा जी काफी टाइम से अकेले है। और हर अकेला इंसान यही सब करता है। दादा जी की इसी आदत की वजह से मुझे एक सपना आया। उस सपने में मैंने देखा की एक रात मैं आपने बिस्तर से उठा। तो मैंने देखा मम्मी बेड पर नहीं है। और जब मैं उन्हें देखने गया तब मैंने देखा की वह दादा जी के लंड की सवारी कर रही है। दादा और मम्मी पुरे नंगे है और दादा जी मम्मी के दूध चूस रहे है। मम्मी दादा से बोल रही है।

“जोर से कीजिये पापा जी निकाल दीजिये मेरी साड़ी गर्मी।”

और दादा जी मम्मी की पलंग तोड़ चुदाई कर रहे है। जब सुबह मेरी आँख खुली तब ऐसा लगा जैसे ये सच में हुआ हो। उस दिन के बाद से मैं ये सपना रोज रोज देखने लगा। मैं रोज यही सोचता था की क्या ये सपना कभी पूरा हो सकता है। दादा जी मम्मी को देखते तो थे। मगर मुझे ऐसा लगा नहीं की वह गलत नज़र से देख रहे है। जबकि बाहर की औरतो को वह खा जाने वाली नज़र से देखते थे। मैं हर रोज यही सोचता था की दादा जी से कैसे खुल के बात करू।

फिर मैंने एक प्लान बनाया। मैंने मम्मी की जितनी भी फोटो ली थी उसका एक फोल्डर बना दिया। और उसमें कुछ नार्मल फोटो भी रख दी। अब बस दादा को वह साड़ी फोटो दिखाना था। दादा जी मुझसे बहुत प्यार करते थे। यहाँ तक की गर्लफ्रेंड के बारे में भी पूछ लेते थे। मगर आज मैं जो उनसे बाते करना चाह रहा था। उसका लेवल बहुत खतरनाक था।

शाम के टाइम जब मैं और दादा जी बाहर घूमने गए। तब मैंने अपनी और दादा जी की कुछ फोटो ले ली। और उसे भी उस फोल्डर में डाल दिया।

मैं – दादा जी मैं अभी पानी पिके आता हूँ तब तक आप मोबाइल में फोटो देखो। देखो तो मैंने कितनी साड़ी फोटो ली है।

दादा जी – है ठीक है बेटा।

मैं दादा जी को मोबाइल देके चला गया। और फिर एक जगह छुप गया। मैंने देखा दादा जी मोबाइल में देख रहे है और साथ के साथ वह जो आंटी टहल रही थी उनकी बड़ी गांड को भी देख रहे थे। तभी दादा जी चौंक गए और इधर उधर देखने लगे। मैं समझ गया की दादा जी ने मम्मी की फोटो देख ली है। वह इधर उधर भी देख रहे थे। मगर उनका ज्यादा ध्यान फोटो में था। मैंने देखा दादा जी ने फोटो देखते हुए कई बार आपने लंड मसाला था।

यानी मम्मी को देखकर उनका भी बुरा हाल हो गया था। लगभग 15 मिनट बाद मै उनके पास पहुँच तो दादा जी मेरी तरफ बड़ी अजीब नज़रो से देख रहे थे।

मैं – दादा जी कैसे लगी आपको फोटोज?

दादा जी – बहुत अच्छी फोटो है बेटा।

दादा जी ने फोटो के बारे में कोई बात नहीं की और फिर हम दोनों घर आ गए। मगर अगले दिन दादा जी की नज़र बदल गयी। मैं और दादा जी नास्ते के लिए बैठे थे। तभी मम्मी दादा जी और मेरे लिए नास्ता लेके आयी। मम्मी ने हलके नीले रंग की साड़ी और ब्लाउज पहना था। मम्मी के ब्लाउज में से उनकी काली ब्रा साफ़ दिखाई दे रही थी और उनकी साड़ी के साइड से मम्मी की कमर और उनका खुला पेट दिख रहा था।

मैंने देखा दादा जी की नज़र मम्मी के दूध और उनके पेट पर थी। मम्मी ने सर पर पल्लू ले रखा था। मम्मी ने नास्ता दादा जी को दिया और फिर वह मेरी तरफ झुक के मुझे प्लेट देने लगी। तब मैंने देखा दादा जी की नज़र मम्मी की गांड पर थी और उन्होंने अपने लंड को पाजामे के ऊपर से मसल दिया। यानी जो फोटो दादा जी ने देखि थी उसका असर उन पर हो गया था और वह मम्मी के बारे में सोच रहे थे। पुरे दिन में मैंने कई बार दादा जी को मम्मी की जवानी को घूरते देखा था।

फिर जब शाम को मैं और दादा जी पार्क में गए। तब दादा जी बोले।

दादा जी – बेटा वह कल तू फोटो दिखा रहा था, वह मुझे फिर से तो दिखा।

मैं समझ गया की दादा जी मम्मी का नंगा बदन फिर से देखना चाहते है। मैंने उन्हें फिर मोबाइल दे दिया और मैं वहाँ से चला गया। और फिर मैं छुप के देखने लगा। दादा जी मम्मी की एक एक फोटो को ज़ूम कर कर के देख रहे थे। मैं समझ गया था। अगर उन्हें मुझे कुछ कहना होता तो वह पहले ही कह चुके होते। अब मैं उनसे डायरेक्ट बात करना चाह रहा था। इसीलिए मैं उनके पास चला गया। और दादा जी ने तुरंत मोबाइल बंद कर दिया।

मैं – कैसे लगी फोटो दादा जी?

दादा जी – बहुत अच्छी फोटो है बेटा।

मैं – दादा जी आपको एक वीडियो दिखाऊँ? आपको बहुत अच्छी लगेगी।

मैंने मम्मी की चूत रगड़ने वाला वीडियो निकाला और मोबाइल दादा जी को दे दिया। दादा जी ने जैसे ही वीडियो देखा, उनकी आँखे बड़ी हो गयी और मैं दादा जी से बोल पड़ा।

मैं – दादा जी अभी आप मम्मी की फोटो देख रहे थे, अब वीडियो देख लो।

दादा जी – ये क्या बकवास है तूने अपनी माँ की ऐसी वीडियो क्यों ली है।

दादा जी का गुस्सा बनावटी था, ये मुझे साफ़ पता चल रहा था।

मैं – दादा जी आज सुबह आप भी तो मम्मी के दूध और उनकी गांड को घर रहे थे और कल भी यही फोटो देखे थे। तब तो आपने कुछ नहीं कहा।

दादा जी मेरी तरफ देख रहे थे मगर उनके पास कोई शब्द नहीं थे।

मैं – दादा जी मैं जानता हूँ आप औरतो की जवानी को देखकर मज़े लेते है और ये पार्क में भी इसीलिए आते है। ये भी तो बस एक औरत ही है।

दादा जी – बेटा जिसकी तू बात कर रहा है वह तेरी माँ है। तू अपनी माँ की ऐसी फोटो क्यों लेता है?

फिर मैंने दादा को सब बता दिया, कैसे मैंने कहानी पढ़ी और फिर मैं अपनी मम्मी का दीवाना हो गया। और दादा जी ये बाते सुनके मुझसे पूरी तरह खुल गए।

दादा जी – बेटा मुझे तो यकीन नहीं होता है, तू अपनी माँ के बारे में ऐसा सोचता है।

मैं – दादा जी वह तो आप भी सोचते है, आज सुबह मैंने देखा था की कैसे आप अपना लंड रगड़ रहे थे।

दादा जी – बेटा ये भी तेरी वजह से ही हुआ है, कल जब मैंने तेरी मम्मी की नंगी फोटो देखि थी। तब से मेरे दिमाग में यही सब चल रहा है। मैं खुद भी तुझसे बात करना चाहता था।

मैं – वैसे दादा जी इतने सालो में कभी भी आपने मम्मी को ऐसे नहीं देखा था क्या?

दादा जी – अब तुझसे क्या छुपाऊ मैंने कई बार देखा था, मगर वह मेरी बहु है, इसीलिए बस सिर्फ देखता था।

मैं – मतलब आपको भी मम्मी के बड़े बड़े दूध और उनकी बड़ी गांड पसंद है।

दादा जी – हाँ बेटा पसंद है, मगर वह मेरी बहु है।

मैं – तो क्या आप उन्हें देखकर अपना पानी भी निकालते है।

दादा जी मेरी बात सुनके चौंक गए।

दादा जी – बेटा तू अपनी माँ के बारे में ऐसे बाते कैसे सोच सकता है।

मैं – दादा जी वह माँ से पहले एक औरत है, जिसकी जरूरते है। आपने देखा न वह कैसे अपनी चूत को रगड़ रही थी। यानी उन्हें पापा की याद आती है।

दादा जी – बेटा अब तेरे पापा दूर रहते है, इसीलिए बहु को ऐसा करना पड़ रहा है।

अगले पार्ट में रहेगी आगे की कहानी की कैसे माँ तृप्त हुई। दादाजी और माँ की चुदाई हुई या नहीं पढिए अगले पार्ट मे?

Next Part ==> मम्मी को दादा जी से चुदवाया – 2

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