घर मे वासना का खेल – 1

Family me chudai ka khel:- आदित्य- हेलो पापा हम कल आ रहे हैं वापस।

अलोक- ओके बेटे आ जाओ बहुत दिन हो गये तुम दोनों को देखे, प्रिया कहाँ पर है?

आदित्य – वो थोड़ा आराम कर रही है पापा! क्या है न हम अभी अभी शॉपिंग करके आए हैं।

अलोक – कोई बात नहीं तुम दोनों आराम से कल या जाना।

आदित्य – हां पापा आना भी पड़ेगा 2 दिन बाद मेरी एक इम्पोर्टेन्ट क्लाइंट के साथ ज़रूरी मीटिंग भी है पापा! मम्मा को बता देना के हम कल आ रहे हैं।

अलोक- ओह वैसे भी इस वक़्त पूजा कर रही है, मैं बता दूंगा।

आदित्य- ओके पापा बाय।

अलोक – बाय बेटा।

आदित्य और प्रिया की शादी 3 महीने पहले हुई थी, लेकिन इन तीन महीने में आदित्य के काम की वजह से हनीमून नहीं मना पाए थे।

अभी 15 दिन पहले थोड़ा फ्री होते ही दोनों स्विट्ज़रलैंड आए थे, अपना हनीमून मानाने. आदित्य एक बड़े खानदान का लड़का था, एक बार आदित्य ने प्रिया को कहीं देख लिया और प्रिया ठहरी बला की खूबसूरत, अच्छी खासी एक्ट्रेस भी उसके सामने फीकी लगें, नज़र चाहे किसी की भी पड़े, उसपर वो दोबारा उसे ज़रूर देखता। प्रिया को एक बार देख कर आदित्य जैसे लट्टू हो गया था. लव फर्स्ट साइट हुआ था उसे, फिर क्या था आदित्य ने वो बात अपने घर में बताई, हालाँकि प्रिया भी एक रिच फॅमिली से थी लेकिन आदित्य जितनी नहीं.

प्रिया की खूबसूरती देख आदित्य की सास ने फ़ौरन पसंद कर लिया उसे, प्रिया के माँ बाप ने तो खुद को खुशकिस्मत फील करके सीधे हां कर दी। रिश्ते के लिए दोनों की शादी धूमधाम से हुई। दोनों खुश थे एक दूसरे के साथ, आदित्य के पापा अलोक का अच्छा खासा बिज़नेस था, लेकिन अलोक गाँव में पैदा हुआ आदमी, तो उसे अपने गाँव से लगाव था। सिटी में रहते हुए उसने गाँव में एक अच्छी खासी हवेली तैयार करवा ली थी। सिटी में रहते हुए कुछ 1 साल पहले ही वो सिटी से यहाँ  शिफ्ट हुए थे। गाँव में सब इज़्ज़त करते थे, अलोक राजपूत की हवेली में नौकर चाकर सब थे, आदित्य की एक बहन भी थी जिसका नाम अंजली है, वह सिटी मे पढ़ती है और डेली उसको ड्राप करने के लिए गाँव से सिटी तक, एक गाड़ी और ड्राइवर रखा हुआ है.

अंजली लाड़ली है घर की इसलिए उसको सिटी में ना रखके अपने पास रखने के लिए, डेली आना जाना किया हुआ था। इसके अलावा आदित्य का एक और भाई था, जो मुंबई में रहता था अपने बीवी के साथ। तो अगले दिन सब कुछ पैक करके आदित्य और प्रिया वापस आने के लिए निकल जाते हैं

उधर सुबह सुबह घर में आवाज़ श्लोका की होती है नौकरों को बुलाने की। श्लोका आलोक की वाइफ यानि आदित्य की माँ और इस घर की मालकिन है।

श्लोका- अरे विमला नाश्ता रेडी हुआ के नहीं? अंजली को देरी हो रही है।

विमला जो इस घर की अधेड़ उम्र की नौकरानी है।

विमला- हां मालकिन हो गया है तैयार।

श्लोका- हाँ ले आ फिर।

विमला- जाईये जल्दी लेकर छोटी मालकिन आ गयी होगी, प्लेट्स उठा कर एक अधेड़ उम्र का आदमी जो विमला का पति भी है उसके काम में हाथ बँटाता है। दूसरे घर के काम भी करता है वो बाहर डाइनिंग टेबल एरिया में आकर टेबल पर प्लेट्स रख देता है।

श्लोका- अरे रामु, हरिया को बोल दो के कार रेडी रखे अंजली आएगी थोड़ी देर में रेडी होकर, कॉलेज जाने के लिए।

रामु- जी मालकिन।

रामु फिर चला जाता है, तभी सीढ़ियों से होते हुए एक हसीन जवान खूबसूरत लड़की जीन्स और टैंक टॉप में उतरने लगती है, खुले बाल उसकी खूबसूरती को चार चाँद लगा रहे थे। उसके गोलगोल बड़े चुचों का शेप, उस टॉप मे काफी हद तक पाता चल रहा था और उस जीन्स में उसकी गांड और उभर कर दिख रही थी। गोरा रंग परफेक्ट और वेल मैनटैनड उसका जिस्म, किसी को भी दीवाना कर दे.

सीढ़ियों से उतरते हुए उसके चूचे हलके हलके जम्प हो रहे थे,

उतरते हुए अंजली- मम्मा मेरा ब्रेकफास्ट रेडी है न???

श्लोका- हां बेटा आ रेडी ही है।

अंजली आकर फिर नाश्ता करने बैठ जाती है, उधर रामु बाहर घर के पीछे बने हुए एक छोटे से रूम तक जाता है, जिसमें हरिया रहता था।

रामु- हरिया उठा के नहीं? मालकिन गाड़ी तैयार करने बोल रही हैं।

हरिया- हाँ आया।

रामु- जल्दी आ जा छोटी आ रही होगी।

हरिया और रामु दोनों दोस्त थे, जबसे वो दोनों काम को यहाँ लगे हैं, रामु तो विमला के जरिए यहाँ आया था और हरिया रामु के जरिए। दोनों मौक़ा मिलने पर कभी कभी यहाँ दारू पिया करते हैं, हरिया रामु की तरह ही अधेड़ू उम्र का था, कह सकते हैं दोनों बूढ़े हैं, लेकिन दोनों काम के बड़े पक्के थे।

हरिया को गाड़ी चलाने का एक्सपीरियंस था, रामु को घर के कामों का। हरिया की उम्र और एक्सपीरियंस देख कर ही उसे अंजली का ड्राइवर रखा हुआ था और रामु को तो उसकी पत्नी विमला ने श्लोका राजपूत से सिपारिश करके यहाँ पर काम से लगवाया था। रामु फिर वहां से चला जाता है हरिया जल्दी जल्दी तैयार होने लगता है क्यूंकि ज़रा सा भी देरी होने पर श्लोका राजपूत गुस्सा करती, इतनी लाड़ली थी अंजली घर की। हरिया जल्दी से मुंह धोये बिना ही कार के पास आ जाता है थोड़ी देर बाद श्लोका और अंजली बाहर आ जाते हैं।

20 साल की अंजली बहुत हॉट लग रही थी, अंजली हमेशा जाते हुए ऊपर से जैकेट पहन लेती थी, कुछ भी पहना हो उसने, अब टॉप के ऊपर से जैकेट पहना हुआ था. कार तक आने के बाद हरिया डूर खोलता है।

अंजली- बाय मम्मा।

श्लोका- बाय बेटा।

डूर बंद करके हरिया ड्राइवर सीट पर बैठ कर कार स्टार्ट करके चल पड़ता है. उधर रामु किचन में चला जाता है रामु और विमला वहीँ किचन से लग कर बने हुए एक छोटे से कमरे में रहते थे. थोड़ी देर बाद अलोक जो जॉगिंग पर गया हुआ था वापस आ जाता है।

श्लोका- आ गये आप? फ्रेश हो जाईये जाकर, मैं नाश्ता लगवा देती हूँ।

अलोक- ठीक है अंजली चली गयी?

श्लोका- हां थोड़ी देर पहले।

अलोक- ओह ठीक है! अरे हाँ वो मै बताना भूल गया, आदित्य और प्रिया कल आ रहे हैं वापस।

श्लोका- अच्छा? चलो अच्छा हुआ आ रहे हैं दोनों, कितने दिन हो गये दोनों को देखे।

अलोक- हाँ वो तो है.

श्लोका- आप जाईये फ्रेश होकर आईये.

अलोक- ठीक है।

ऐसे ही दिन गुज़र जाता है, शाम में करीबन 5 बजे हवेली के बाहर कार की हॉर्न बजती है। अंजली आ गयी थी कॉलेज से, कॉलेज से गाँव का सफर एक घंटे का था। कार से उतर कर अंजली सीधा अंदर चली जाती है, हरिया भी कार पार्क करके पीछे रूम में चला जाता है. अंजली चाहे कार में आराम से बैठ कर आती थी, लेकिन सफर के वजह से वो हमेशा थक जाती थी। मेन डोर खोलकर वो सीधा अपने रूम में चली जाती है। वहाँ जाकर वो सीधा शावर लेने चली जाती है।

उधर श्लोका अपने रूम से कार का हॉर्न सुनकर अब बाहर आयी थी।

श्लोका- अरे विमला।

किचन में सो नौकरानी बाहर आकर विमला- जी मालकिन?

श्लोका- अंजली आ गयी है उसके लिए जूस का गिलास रख दो बाहर।

विमला- जी मालकिन.

फिर अलोक भी बाहर आ जाता है फिर वो दोनों सोफे पर बैठ कर कुछ बातें करने लगते हैं, करीब आधे घंटे बाद अंजली अपने रूम से आती है, सीढ़ियों से उतर कर डाइनिंग टेबल पर रखा हुआ जूस का गिलास उठा कर सोफे तक चली जाती है।

अंजली- हाय मम्मा, पापा।

अलोक- कैसा रहा आज का दिन?

अंजली पूछो मत पापा बहुत बोरिंग था.

श्लोका- बोरिंग? देखिये इसको पढ़ाई बोरिंग लग रही है आपने चढ़ा के रखा है इसे।

अलोक- ऐसी कोई बात नहीं है अंजली बस मज़ाक कर रही है।

अंजली- हाँ मम्मा चिल, थोड़ी देर शांति के बाद।

अंजली- मम्मा भैया भाभी कब आ रहे हैं वापस?

भाभी ने तो वहां जाने से लेकर अब तक एक भी मेसेज नहीं किया मुझे।

श्लोका- कल ही आ रहे हैं.

अंजली- सच में?

श्लोका- हाँ।

अंजली- फिर तो मुझे भाभी से बात करनी होगी, मैंने लिस्ट दी थी भाभी को वहां से समान लाने के लिए, पता नहीं भाभी को याद भी होगा या नहीं।

श्लोका- अब उनको डिस्टर्ब मत कर, ज़रूर ले आएगी मेरी बहु।

अंजली- हाँ हाँ मम्मा पता है आपकी बहु बहुत इंटेलीजेंट है.

सब हँसते हैं श्लोका अपने बहु की हमेशा तारीफ करती थी. ऐसे ही रात हो जाती है सब खाना खाकर चले जाते है। उसके बाद रामु और विमला बर्तन उठा कर अंदर ले जाते हैं. किचन का काम होने के बाद।

रामु- विमला मैं आता हूँ थोड़ा बाहर जाकर।

विमला- इस वक़्त कहाँ जा रहे हैं आप?

रामु- वो हरिया का थोड़ा काम है।

विमला- पीने वीने मत बैठ जाना वहां।

रामु- अरे पीना कहा विमला जल्दी आ जाऊंगा।

विमला- ठीक है।

फिर रामु चला जाता है घर के पीछे हरिया के कमरे में।

हरिया- आजा आजा ससुरा तेरे बिना पीने का मज़ा नहीं।

रामु- अरे वाह गिलास तैयार करके रखा है।

हरिया- हां रामु।

लेकिन आज जल्दी जाना है विमला को बोल के आया हूँ।

हरिया- चला जाइयों, पहले बैठ।

दोनों बैठ कर दारू पिने लगते हैं, उधर अंजली अपने रूम में अपने आलीशान बेड पर पेट के बल लेटी हुई किसी को टेक्स्ट कर रही थी। उसके चेहरे पर प्यारी सी स्माइल थी, तभी उसके मोबाइल पर कॉल आता है. नाम देख कर वो ब्लश करती है और तुरंत कॉल उठा लेती है।

अंजली- हाय वो धीरे से बोलती है।

राज- हाय।

ये है अंजली का बॉयफ्रेंड! ये बात अंजली ने घर में पता लगने नहीं दी थी, कॉलेज में उसका बॉयफ्रेंड था लेकिन अंजली ने उसे कुछ करने नहीं दिया। हालाँकि वो कई बार ट्राई कर चुका था, लेकिन अंजली ही अलाव नहीं की थी अभी तक, लेकिन दोनों में लव वाली फीलिंग भी थी।

अंजली- क्या कर रहे हो?

राज- तुमको याद।

अंजली शर्मा जाती है।

अंजली- झूठ।

राज- सच में!

ऐसे ही दोनों बातें करते हैं, उधर करीबन आधा घंटा दारू पीने के बाद रामु उधर से निकल पड़ता है और वापस आकर सो जाता है।

उधर अंजली भी अपने बॉयफ्रेंड के साथ थोड़ी देर बात करके सुकून से सो जाती है। अगली सुबह अलार्म की आवाज़ से अंजली की नींद खुलती है, वो उठकर शावर लेने चली जाती है, नीचे हर रोज़ की तरह श्लोका की आवाज़ पुरे घर में गूंजने लगती है।

श्लोका- विमला नाश्ता तैयार हुआ के नहीं?

विमला- हां बड़ी मालकिन हो गया।

श्लोका- हां लगा दे अंजली आती होगी और हाँ आज बहु और आदित्य आ रहे हैं तो उनके लिए भी खाना बना देना।

विमला- जी बड़ी मालकिन।

किचन में विमला कुछ काम कर रही थी, तभी रामु उसे पीछे भींच लेता है।

विमला- आहह क्या कर रहे हैं आप? मालकिन आ गयी तो परेशानी हो जायेगी।

रामु- अरे विमला रात में भी समय नहीं मिलता, तुझे चोदने का अब तो कुछ करने दे।

विमला- आप ये कैसी गन्दी बातें कर रहे हैं? ये कोई उम्र है ये सब करने के लिए.

रामु- चुदाई की कोई उम्र नहीं होती विमला, इतना बोलकर विमल के लटके हुए निचुड़े हुए चूचे ब्लाउज के ऊपर से मसलने लगता है।

विमला- जी रुक जाईये न मरवाएँगे आप।

लेकिन रामु पर विमला की बातों का बिलकुल अहसास नहीं हो रहा था, वो उसको मसले जा रहा था तभी बाहर से आवाज़ आती है।

श्लोका- रामु हरिया ने गाड़ी निकाली या नहीं?

रामु- जी मालकिन देखता हूँ फिर वो किचन से निकल कर बाहर निकल जाता है।

रामु- साला ठीक से मज़े लेने भी नहीं देते ये लोग. वो सीधा पीछे चला जाता है और दरवाज़ा खटखटा कर-

रामु- हरिया उठा या नही?

हरिया- हाँ उठ गया।

रामु- जल्दी आ जा वो आती होगी।

हरिया- हाँ।

तभी वो दरवाज़ा खोलता है, हरिया रामु को देख कर-

हरिया- तुझे क्या हुआ? सुबह सुबह मन उतरा हुआ है

रामु- क्या बताऊँ यहाँ नौकरी करके अपनी बीवी के साथ मज़े करने को भी नहीं मिलता।

हरिया- तेरा तो फिर भी ठीक है, बीवी है तेरी, मेरा हाल देख अकेला हूँ बीवी मरे हुए 5 साल हो गये तबसे मेरा लौड़ा चूत की गर्मी को महसूस नहीं कर पाया है।

रामु- ससुरा ये शहर के लोगों का अच्छा है, वहां रंडिया चोदने को मिल जाती है, हम लोग को यहाँ गाँव में कौन मिलेगा? ससुरा ज़िन्दगी झंड है बस।

रामु फिर चला जाता है उधर से। उधर अंजली फ्रेश हो चुकी थी और आज उसने सलवार कमीज़ पहनी थी, उसमें उसका परफेक्ट फिगर उफ़ कातिलाना था। खुले बाल, खूबसूरत चेहरा, क्यूट सी स्माइल किसी को भी पागल बनाने के लिए काफी थे। अंजली आईने के सामने रुक कर रेडी हो रही थी, तभी उसके मोबाइल पर उसके बॉयफ्रेंड का कॉल आता है. अंजली बलुशिंग करने लगती है कॉल उठा कर।

राज- हाय।

अंजली- हेलो क्या बात बात है सुबह सुबह?

राज- हां तेरी याद आ रही थी।

अंजली के चेहरे पर स्माइल थी।

अंजली- अच्छा मेरी याद रोज़ तो मिलते हो फिर भी इतनी याद?

राज- हाँ।

तभी नीचे से श्लोका- अंजली!

अंजली- आयी मम्मा! अच्छा सुनो माँ बुला रही है कॉलेज में मिलतीं हूँ बाय।

राज- बाय फिर अंजली बैग लेकर नीचे चली जाती है और डाइनिंग टेबल पर बैठ कर ब्रेकफास्ट करने लगती है। वहां श्लोका भी थी।

अंजली- मम्मा आज मैं जल्दी आ जाऊंगी?

श्लोका- क्यों?

अंजली- भैया भाभी आ रहे हैं ना।

श्लोका- उसकी कोई ज़रूरत नहीं शाम में आकर मिल लेना।

अंजली- मम्मा।

श्लोका- नहीं मतलब नहीं!

अंजली भी चुप हो जाती है थोड़ी देर बाद नाश्ता होने के बाद अंजली और श्लोका बाहर आ जाते है. हरिया कार का डोर खोल देता है।

अंजली- बाय मम्मा।

श्लोका- बाय बेटा।

फिर अंजली कार मे बैठ जाती है।

श्लोका- संभल कर ड्राइव करना।

हरिया- जी बड़ी मालकिन।

अंजली अंदर बैठते ही अपने मोबाइल में लग जाती है, हरिया कार स्टार्ट करके निकल पड़ता है श्लोका अंदर जाकर कुछ आधे घंटे बाद आलोक जॉगिंग करके वापस आ जाता है फिर वो दोनों मिलकर नाश्ता करते हैं। दोपहर में सबका खाना होने के बाद श्लोका और आलोक हॉल में सोफे पर बैठे हुए थे, के बाहर कार की हॉर्न बजती है।

श्लोका- लगता है आ गये आदित्य और बहु।

फिर वो बाहर चले जाते हैं बाहर जाकर देखते हैं के एक कार रुकी है, जो आदित्य की थी पहले आदित्य उतरता है फिर थोड़ी देर बाद साइड डोर खुलता है और अंदर से एक खूबसूरत पैर बाहर निकलता है, फिर दूसरा। उसके गोरे पैरों से ही उसका दूध जैसे रंग का पता चल रहा था। उसके पैरों में एक्सपेंसिव पायल थे और उसपर रेड कलर की नेल पोलिश। उसके पैरों की खूबसूरती को और बढ़ा रही थी उस परी ने इस वक़्त पिंक कलर की साड़ी पहनी हुई थी। डोर पूरा ओपन होते ही, थोड़ा ऊपर देखा तो उस उस परी की गोरी नाभि कहर ढा रही थी। उसका वो खूबसूरत बेली बटन उफ्फ्फ सिर्फ वही देखने से किसी का भी निकल जाये।

उसका सपाट पेट, एकदम गोरा, दूध जैसा रंग, थोड़ा ऊपर उसके उभार, उस पिंक ब्लाउज में बाहर आने को जैसे तरस रहे हों। उसके हाथों में कांच की नयी, ब्राइड वाले कंगन और गले में अपने पति के नाम का मंगलसूत्र, फिर उसका खूबसूरत चेहरा, जो अच्छे अच्छे एक्ट्रेस को पीछे छोड़ दे। उसकी काली ज़ुल्फ़ें, लगभग कमर तक जा रही थी। कुल मिला कर खूबसूरती की मूरत थी, कार से उतर कर वो अपने पति के साथ उधर चली जाती है। आदित्य और प्रिया जाकर पेरेंट्स के पैर छूते हैं।

श्लोका- तो कैसा रहा ट्रिप बहु?

प्रिया-  बहुत अच्छा मोम जी।

अलोक- चलो अच्छा हुआ तुम दोनों का रिफ्रेशमेंट भी हो गया, वैसे भी आदित्य की मीटिंग है न क्लाइंट के साथ कल।

आदित्य- हां पापा वो मीटिंग अगर सक्सेस्फुल रही ना तो हमारी कंपनी को बहुत बड़ा प्रोजेक्ट मिल जायेगा. फिर तो शायद ज़्यादा टाइम न मिले, इसलिए अच्छा है हम दोनों घूम आए।

प्रिया आदित्य के तरफ एक बार देखती है, उसका चेहरा उतर सा जाता है।

अलोक- चलो अच्छा है।

श्लोका- चलो अंदर चलते हैं, तुम दोनों फ्रेश हो जाओ, थक गए होंगे ना।

आदित्य- हाँ माँ बहुत थक गए हैं और ज़ोरो की भूख भी लगी है।

श्लोका- तुम दोनों जल्द से फ्रेश हो जाओ मैं लगवाती हूँ खाना।

फिर सब अंदर चले जाते हैं, प्रिया और आदित्य का रूम 2nd फ्लोर पर था, जबकि अंजली और एक गेस्ट रूम 1st फ्लोर पर और ग्राउंड फ्लोर पर हॉल किचन और अलोक और श्लोका का रूम था। 2nd फ्लोर पर ही लास्ट में एक पुराना रूम था, बंद था कोई भी use नहीं करता था। उसे प्रिया और आदित्य 2nd फ्लोर पर अपने कमरे में चले जाते हैं। आदित्य बैग्स रख देता है और पीछे से प्रिया अपना मोबाइल लिए हुए आती है.

लेकिन उसका खूबसूरत सा चेहरा मुरझाया हुआ था, आदित्य कुछ कर ही रहा था के उसकी नज़र प्रिया के उदास चेहरे पर जाती है उसको अजीब लगता है के अभी अभी तो वो दोनों रोमांटिक सा हनीमून मना के आ रहे हैं और प्रिया उदास क्यों?

आदित्य उसके पास जाकर – क्या हुवा?

प्रिया- कुछ नहीं वो नीचे देखते हुए बोलती है।

आदित्य- क्या कुछ नहीं? तुम्हारा चेहरे क्यों उतरा हुआ है अभी तो ठीक थी क्या हुआ अचानक?

प्रिया अब आदित्य के तरफ देखते हुए – तुमने मुझे प्रोजेक्ट वाली बात क्यों नहीं बताई और प्रोजेक्ट मिलने के बाद मेरे लिए टाइम नहीं मिलने से तुम्हारा क्या मतलब था?

आदित्य- ओहो तो इस बात से नाराज़ है मेरी जान।

आदित्य उसके पीछे आकर उसे अपनी बाँहों में घेर लेता है

आदित्य- प्रिया आई ऍम सॉरी मैं भूल गया था और जान काम तो करना पड़ेगा न मुझे! हमारा बिज़नेस खूब एक्सपैंड करना है।

प्रिया- हटो तुम बातें मत बनाओ, इतना बोलकर वो वाशरूम चली जाती है फ्रेश होने।

आदित्य- कोई बात नहीं मना लूंगा बाद में!

थोड़ी देर बाद बाहर से श्लोका- आदित्य बहुउउ।

आदित्य रूम से ही – हां माँ! आ रहे हैं थोड़ी देर बाद दोनों नीचे आ जाते हैं और खाने बैठ जाते हैं दोनों के बीच बात नहीं हो रही थी।

लेकिन आदित्य स्माइल कर रहा था उसे अपनी बीवी के नखरे अच्छे लगते थे और उसको पता था प्रिया को कैसे मनाना है। थोड़ी देर बाद दोनों का खाना हो जाता है, प्रिया बिना कुछ बोले रूम में जाने लगती है।

तभी श्लोका- अरे बहुउउ क्या हुवा?

प्रिया रुक कर – कुछ नहीं मोम जी बस यूँ ही।

श्लोका- अरे आओ तो, थोड़ा बातें कर लेते हैं।

प्रिया एक बार आदित्य के तरफ देख कर – मोमजी बाद में, मैं थोड़ा थक गयी हूँ।

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