हुमा एक हाउस वाइफ और मिश्रा पान वाला – 1

दोस्तों मै कोमल आपके लिए एक नयी कहानी लेकर आई हूँ। ये कहानी मैंने काफी पहले पढ़ी थी और मुझे बहुत पसंद आई थी। मै इस hindi sex story को दुबारा से अपने स्टाइल मे लिखूँगी, तो उम्मीद करती हूं आपको ये कहानी पसंद आएगी। तो चलिए शुरू करते है Ek housewife ki hindi sex story।

सबसे पहले कहानी के पात्र जो होंगे उनके बारे मे बात देती हूँ।

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Ek housewife ki hindi sex story

हुमा खान उम्र 30 साल इस कहानी की मेन हीरोइन! हुमा का फिगर ऐसे था, जैसे कोई साउथ की हीरोइन और रंग ऐसा था, जैसे कोई कोरियन हीरोइन। बूब्स बड़े थे, मगर इतने नहीं की लटके हुए हो, गांड बाहर को ऐसे निकली थी, की बूढ़े को भी जवानी चढ़ जाये, जिस्म भरा हुआ था, मगर थुल थुला नहीं फिट थी।  

सैफ खान – उम्र 35 साल दिखने में हैंडसम! उसकी शहर में perfume इत्र की दुकान है, ये हुमा का शौहर है।

माधव मिश्रा- उम्र 51 साल! सब इनको मिश्रा जी कह कर पुकारते थे, इनकी पान की दुकान है, मिश्रा हमेशा धोती कुर्ते में रहता था, रंग काला था, मगर इतना भी नहीं की नीग्रो जैसा लगे, उसका हल्का से पेट निकला हुआ था, उसके सर पर एक चुटिया थी, जब कस्टमर नहीं होते उसकी दुकान पर, तो वो अक्सर उस चुटिया से अपनी उंगलियों से खेला करता। औरतो के मामले में कमीना इंसान था।

शांता बाई – उम्र 41 साल मगर लगती नहीं थी की 41 की है, सब इसको शांता ही बुलाते थे, साँवली थी मगर नैन नक्श बहुत कटीले थे। ये हुमा की नौकरानी है।

रामा राव – उम्र 46 साल सब इसको रामा बुलाते थे, ये ऑटो रिक्शा चलाता था और ये एक शराबी इंसान था, जितना कमाता था उतना शराब में उड़ा देता था। ये दुबला पतला, बीमार सा दिखता था हमेशा शेव बढ़ी रहती और शराब की बू उसके मुह से आती रहती। ये शांता का पति है।

काम्या – उम्र 22 साल ये शांता और रामा की बेटी है। स्लिम फिट, अनुष्का शर्मा की तरह दिखती है। इसके माँ और बाप को देख लगता नहीं था, की ये उनकी बेटी है, बहुत खूबसूरत।

सुल्तान खान- उम्र 26 साल! ये मिश्रा जी की दुकान पर काम करता था, मिश्रा जी की पान की दुकान के अलावा कुछ जनरल स्टोर्स का भी सामान होता था, जिसका हिसाब किताब सुल्तान देखता था। सुल्तान गुंडा टाइप सनकी था, कभी कभी मिश्रा भी उस से डर जाता था।

सुल्तान और काम्या का अफेयर पिछले 2 सालो से चल रहा था। लखनऊ के पास एक गाँव की ये कहानी है। ये गाँव था मगर शहर से कम नहीं था, मगर फिर भी लोग इसे गाँव ही कहते थे। इस गाँव की एक कॉलोनी में एक रौ हाउस था, उसका नाम था खान विला। उस घर का मालिक था सैफ खान, उसकी एक नेक बीवी भी है उसका नाम है हुमा खान। दोनों की अरेंज मैरिज हुई थी। सैफ के माँ बाप नहीं थे, घर में दोनों ही रहते थे।

इनकी शादी की 6 साल हो गए थे, इनका कोई बच्चा नहीं था। हुमा बहुत की नेक और फ़रमाबरदार बीवी थी, वो बहुत स्ट्रिक्ट थी, जैसे की बिना बुर्क़े के बाहर न निकलना, अपने शौहर की हर बात मानना। दोनों की ज़िन्दगी बहुत अच्छी चल रही थी, कभी आपस में कोई झगड़ना नहीं, मगर दोनों के बीच तनाव जब बन जाता, जब उनके बच्चे के बारे में रिश्तेदार पूछ लेते, जैसे किसी शादी वगैरह में बच्चे के लिए। कई डॉ. हकीमों से दोनों मिले, डॉ. की रिपोर्ट में सैफ और हुमा दोनों की रिपोर्ट नार्मल आती, मगर फिर भी हुमा प्रेग्नेंट नहीं हो रही थी।

सैफ और हुमा की सेक्स लाइफ भी अच्छी थी, सैफ पूरी तरह सेटिसफ़ाई कर देता था हुमा को। सैफ के लंड का साइज 5 इंच था, ज्यादा मोटा नहीं था सैफ का लंड, मगर फिर भी हुमा खुश थी। उनकी सेक्स लाइफ मे सबकुछ अच्छा चल रहा था। उनके कालोनी से कुछ आगे नुक्कड़ पर एक पान की दुकान थी। पान की दुकान प्लस जनरल स्टोर्स था, जिसमे पान के अलावा दूध के पैकेट, कोल्ड ड्रिंक, परफ्यूम, पॉपकॉर्न, चिप्स वैगरह मिलता था। उस दुकान का मालिक था माधव मिश्रा, सब लोग उसको मिश्रा जी कह कर बुलाते थे। उसके यहाँ एक नौकर था, जिसका नाम सुल्तान था।

मिश्रा की और सुल्तान की अच्छी बनती थी, सुल्तान की सनक गयी तो मिश्रा भी उसके आगे कुछ नहीं बोलता था। मिश्रा की बीवी, बच्चे गाँव में थे। साल में एक या दो बार वो गाँव जाता, उसको चुदाई का बहुत शौक था, हर आने जाने वाली औरत पर उसकी गन्दी नज़र रहती। इत्तेफाक से सैफ और मिश्रा में अच्छी दोस्ती हो गयी थी, आज से 2 साल पहले जब मिश्रा सैफ की शॉप पर आया था। सैफ का एक बड़ा सा शॉप था परफ्यूम और इत्र का। छोटे शॉप के लोग उससे होलेसेल में परफ्यूम ले जाया करते थे।

उसी सिलसिले में मिश्रा जी भी आये थे और उनकी पहचान सैफ से हुई, जब सैफ को पता चला की मिश्रा जी की दुकान उनके ही कॉलोनी के पास है, तो दोनों में बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ। धीरे धीरे दोस्ती हुई। अब 2 साल बाद हालत ये थे, की बिना पान खाये सैफ जाता ही नहीं था अपनी शॉप। हर रोज़ सुबह जब भी अपनी शॉप पर जाता, मिश्रा जी का बनारसी पान खा कर जाता और रात का भी यही रूटीन था। हर दिन रात को खाना खा कर सैफ, मिश्रा जी की शॉप पर आ जाता और गप्पे लडाता।

एक दिन ऐसे ही सैफ रात का खाना खा कर, पान खाने मिश्रा जी की शॉप पर जा रहा था की हुमा ने सैफ से कहा।

हुमा – क्या जी आप हर रोज़ चले जाते है फिर घंटा 2 घंटा नहीं आते, मै अकेली बोर हो जाती हु।

सैफ – अरे बेगम! क्या करू मिश्रा जी का पान जितना इंट्रेस्टिंग लगता है उससे भी कही ज्यादा उनकी बातें इंट्रेस्टिंग होती है।

हुमा – मगर रोज़ रोज़ जाना ज़रूरी है क्या?

सैफ – हाँ बेगम मेरा मन बहल जाता है।

हुमा – और मेरा क्या? मै घर में बोर होती हु।

सैफ – तुम टीवी पर सीरियल देखा करो न सास बहु वाले।

हुमा – मुझे उसमे इंट्रेस्ट नहीं है।

सैफ – तो फिर एक काम करो तुम चलो मेरे साथ।

हुमा – क्या जी आप भी ना! मै क्या करुँगी वहाँ? वहाँ तो बहुत से मर्द होंगे।

सैफ – अरे नहीं अभी इस वक़्त मै और मिश्रा जी ही होते है, कोई कस्टमर भी नहीं आता ज्यादा इस वक्त।

हुमा – नहीं आप जाएँ।

सैफ – अरे भाई चलो, अब नखरे न करो, तुमने कहा न मै अकेली घर में बोर हो जाती हूं अब मुझे भी अच्छा नहीं लगेगा, तुम्हे ऐसा छोड़ कर जाने को।

हुमा – ठीक है मै अभी बुर्का पहनकर आती हु।

सैफ – अरे यार 2 मिनट की दुरी पर जाना है, उसके लिए भी बुर्का! छोड़ो इतनी रात को कौन देख रहा है?

हुमा – नहीं जी बुर्का पहन लेती हूं आखिर मिश्रा जी भी गैर मर्द है।

सैफ – अरे भाई मै बोल रहा हूं तुम्हारा शौहर मत पहनो कोई बात नहीं दिन का वक़्त होता मै खुद बोलता पहन लो,

कुछ देर बहस के बाद हुमा बुर्का न पहनते हुए सिर्फ लेग्गी कमीज़ और दुप्पटा में आने को तैयार होती है, उसने दुप्पटा भी अपने सर को पूरी तरह कवर किया हुआ था। कुछ देर बाद वो लोग घर से निकले और कुछ ही देर में मिश्रा पान स्टाल जनरल स्टोर्स पहुंचे, जहा मिश्रा जी बैठे थे अपनी चोटी को अपनी उंगलियों से बार बार घुमा रहे थे.

तभी सैफ ने कहा कैसे हो मिश्रा जी?

मिश्रा सैफ की आवाज़ से अपनी सोच से बाहर आए।

मिश्रा – अरे भाई सैफ आओ आओ।

मिश्रा की नजर सैफ के पास खड़ी उस खूबसूरत बला पर गई।

मिश्रा – भाई ये कौन?

सैफ – अरे भाई माफ़ करना इनके बारे में बताना ही भूल गया, ये है मेरी बीवी है हुमा।

मिश्रा ने अपने दोनों हाथ जोड़ कर नमस्ते किया, उसका जवाब मुस्कुराते हुए गर्दन हिलाकर हुमा ने दिया।

मिश्रा – भाई बनारसी लगा दु।

सैफ – हाँ भाई लगा दो।

मिश्रा – भाभी जी के लिए भी लगा दु।

हुमा – नहीं भाई साहब मै पान नहीं खाती।

मिश्रा – अरे भाभी आज पहली बार आप हमारी दुकान पर आयी है कुछ तो लीजिये।

हुमा – जी नहीं शुक्रिया।

मिश्रा – भाभी जो हमारा मन रख लीजिये।

सैफ – कुछ तो ले लो।

मिश्रा – मीठा पान लगा दूँ।

सैफ – हाँ लगा दो भाई।

फिर सैफ और मिश्रा यहाँ वहाँ की बातें करते है, मिश्रा पान बना रहा था, बातें भी कर रहा था, मगर आज मिश्रा सैफ से मन से बातें नहीं कर पा रहा था, उसकी नज़र बार बार हुमा पर जा रही थी, वो नज़रे चुरा कर हुमा को देख रहा था।

हुमा भी देख रही थी की जनरल स्टोर्स में क्या क्या है, मगर मिश्रा की नज़रे सिर्फ और सिर्फ हुमा के जिस्म पर घूम रही थी। हुमा ने दुपट्टा वैल की तरह पहना हुआ था, उसमे उसके बूब्स भी पूरी तरह कवर थे, मगर मिश्रा की तजुर्बे कार नज़रे उसके बूब्स का साइज नाप रही थी। मिश्रा को लग रहा था की सैफ अच्छा दोस्त है मेरा, उसकी बीवी को उस नज़र से देखु या न देखु, मगर उसकी ये गन्दी नज़र वाली आदत से वो मजबूर था और हुमा को बुरी नज़र से ताड़े जा रहा था।

तभी सैफ ने कहा – अरे हुमा ये दुकान तुमको यहाँ से छोटी लग रही है, मगर ज़रा इस तरफ आओ देखो अंदर कितना बड़ा जनरल स्टोर है।

हुमा भी पान की दुकान के लेफ्ट साइड आकर देखने लगी।

मिश्रा – अरे भाभी आप पहली बार आयी है आईये अंदर आईए।

हुमा – जी नहीं भाई साहब शुक्रिया! मगर हाँ उस तरफ से लगता ही नहीं इतनी बड़ी शॉप है आपकी।

मिश्रा भी ऊपर से नीचे तक सेक्स भरी नज़रो से हुमा को देख कहता है।

मिश्रा – हाँ भाभी जी मुझे भी लगा नहीं था, इतनी बड़ी दुकान होगी इतना कह कर बूब्स जो दुप्पटे में कवर थे उसको देखने लगता है.

मगर अगले पल जब हुमा और आगे बढ़ी उस शॉप के ठीक से देखने के लिए, तो उसकी पीठ मिश्रा की तरफ आ गयी, जब पीछे से मिश्रा ने हुमा की गांड को देखा तो उसका लंड धोती में झटका खा गया। सामने से उसको लगा नहीं था की हुमा की इतनी बड़ी गांड होगी। मिश्रा का दिल धड़क गया वैसे तो मिश्रा की हर आती जाती औरतो की गांड बूब्स देख लंड झटका खा जाता मगर ये गांड की बनावट ने उसको पागल कर दिया.

सैफ इन बातो से बेखबर, हुमा को जनरल स्टोर्स दिखा रहा था, बता रहा था की यहाँ राखी परफ्यूम की बोत्तल हमारी शॉप से आती है और इसके कस्टमर भी मिश्रा जी के यहाँ बढ़ रहे है। सैफ अपनी बातो में लगा था, उस बेचारे को कहाँ पता था, जिसको वो मिश्रा भाई कह रहा है उसकी नज़र और नियत उसकी बीवी पर ख़राब हो चुकी है। कुछ देर यहाँ वहाँ की बातें करते हुए, मिश्रा जी ने भी हुमा को इम्प्रेस करने के लिए काफो जोक्स किये। हुमा को बहुत हंसी आयी, अच्छा भी लगा। कुछ देर बाद सैफ और हुमा ने मिश्रा जी से जाने की इज़ाज़त ली।

मिश्रा का मन तो नहीं कर रहा था की हुमा जाये मगर मन मार के उसको कहना पड़ा.

मिश्रा – अच्छा सैफ भाई भाई आते रहिये आपकी ही दुकान है और भाभी आप आज आये, अच्छा लगा।

सैफ और हुमा मुस्कुराते हुए जाने लगे जैसे ही हुमा जाने के लिए पलटी तो मिश्रा की नज़र उसकी हिलती हुए बड़ी गांड पर जम गयी। जब तक हुमा की गांड उसकी आँखों से ओझल नहीं हुई तब तक मिश्रा उसको देखता रहा।

मिश्रा (मन में) साला इतने दिन हुए सैफ भाई से दोस्ती किये हुए, इतना गजब माल है उनकी बीवी पता ही नहीं चला। कही बार हुमा मिश्रा की पान की शॉप के सामने से गुजरी मगर बुर्क़े में। इस लिए अब तक मिश्रा उसको ठीक से देख नहीं पाया था, क्योंकी हर आती जाती औरत पर उसकी नज़र होती थी, मगर बुर्क़े वाली औरतों को वो देख नहीं पाता था, उसकी एक्सरे मशीन नज़रो वाला वहाँ काम नहीं करता था। मगर आज बिना बुर्क़े के आना, हुमा के लिए आने वाले वक़्त में क्या बर्बादी लाएगा ये हम आगे देखेंगे।

मिश्रा की नजर अब बुरी तरह हुमा पर बिगड़ गयी थी, वो रात भर सो नहीं पाया था, जब भी आँखे बंद करता, उसको हुमा दिखाई दे रही, उसको नींद नहीं आ रही थी। आज पहली बार ऐसा हुआ की रात को 3 बजे मिश्रा ने, हुमा को याद कर मुठ मारी। जब उसका पानी निकला, तब जाके मिश्रा सो पाया, मगर उसकी बेचैनी अब भी वही थी। दूसरे दिन वो सोचने लगा की क्या करे कैसे करे, आखिर हर हल में उसको हुमा को पटाना था। हुमा कोई चालू औरत तो थीं नहीं जिसको पैसो का लालच देकर पटा सके। ये बात मिश्रा को पता थी, मगर वक़्त भी उसके साथ था।

2 दिन बाद ऐसा हुआ की सैफ को अपने शॉप का सामान परचेस करने मुंबई जाना पड़ा, जब वो मुंबई निकल रहा था तो हुमा के सर में हल्का सा दर्द होने लगा।

सैफ – अच्छा बेगम मै चलता हूं, 2 दिन में आ जाऊंगा।

हुमा – (सर को हाथ लगाते हुए) ठीक है।

सैफ – क्या हुआ सर को क्यों पकड़ा है।

हुमा – जी जी वो कुछ नहीं बस हल्का सा सर दर्द है।

सैफ – डॉ. के पास चलना है?

हुमा – जी नहीं इतना भी नहीं है।

सैफ – .ठीक है फिर मै निकलता हु।

हुमा –  जी अच्छा।

और सैफ मुंबई के लिए निकल पड़ा, कुछ घंटा बाद हुमा का सर दर्द बढ़ा और उसको बुखार भी आ गया, उसको अब कमज़ोरी फील होने लगी। उसने सैफ को कॉल किया, मगर वो नॉट रीचेबल आया।  हुमा अपने आपको बहुत कमज़ोर फील कर रही थी। तभी डूर बेल बजी।

हुमा ने लड़खड़ाते हुए जाकर डूर ओपन किया, तो सामने मिश्रा खड़ा था।

मिश्रा हाथ जोड़ कर नमस्ते भाभी जी।

हुमा ठीक से खड़ी भी नहीं हो पा रही थी।

हुमा (धीमी आवाज़ में) नमस्ते भाई साहब।

मिश्रा – जी ये कुछ सामान देने आया था, भाई मुंबई जा रहे थे, तो जाते वक़्त उन्होंने कहा की कुछ सामान घर भेज देना, तो ये जनरल स्टोर्स का कुछ सामान देने मै खुद चला आया।

हुमा की आँखे बंद खुल रही थी।

मिश्रा – क्या हुआ भाभी जी आप बहुत बीमार सी लग रही हो।

हुमा – जी हाँ मेरी तबियत ठीक नहीं है।

मिश्रा ने हाथो के कैर्री बैग नीचे रखे और अपना हाथ आगे बढाकर हुमा के कलाई को छू लिया, मिश्रा ने डेरिंग तो की मगर डर भी गया।

हुमा भी कुछ शॉक हुई मगर उसकी हालत नहीं थी, ज्यादा रियेक्ट करने की।

मिश्रा (हाथ को छूते ही) – हे भगवान आपको तो बहुत तेज़ बुखार है चलिए अभी चलिए डॉ. के पास।

हुमा (कमज़ोर आवाज़ में) – भाई साहब आप को तकलीफ करने को कोई ज़रुरत नहीं है, मै खुद चली जाएंगी।

अब तक ये सभी बातें घर के डूर पर ही हो रही थी।

मिश्रा – आप कोई गैर नहीं भाभी जी, आप मेरे जिगरी दोस्त की पत्नी हो, चलिए जल्दी से डॉ. के पास।

हुमा अब ज्यादा बहस करने की हालत में नहीं थी।

हुमा – जी रुकिए आती हु।

मिश्रा अब भी घर के डूर पर खड़ा था। हुमा इस हालत में भी बुर्का पहनकर घर के डूर पर आते ही कहा।

हुमा – माफ़ करना भाई साहब आपको अंदर बुलाना भूल गई।

मिश्रा – वो सब छोड़िये पहले हॉस्पिटल चलते है।

हुमा – जी।

मिश्रा घर के बाहर आया, घर एक रौ हाउस जैसा था, बाहर भी एक गेट था, उस गेट के बाहर आकर रुक गया और पलट कर देखा तो हुमा घर के डूर को लॉक लगा रही थी।  लॉक लगाने की लिए वो झुकी थी बुर्का टाइट था, तो उसकी गांड कुछ ज्यादा बाहर आ गयी थी। वो नज़ारा देख कर मिश्रा की धोती में भूचाल आ गया, मगर अगले पल उसको ठीक नहीं लगा।

मिश्रा (मन में) छी छी बेचारी की तबियत ठीक नहीं है और मै क्या सोच रहा हूं! भगवान मुझे माफ़ करे।

तभी उसको आवाज़ आई चलिए भाई साहब।

आवाज़ हुमा की थी। हुमा उसके करीब आकर बड़ी मुश्किल से खड़ी होकर उसको कह रही थी।

हुमा – जी भाई साहब कोई ऑटो रोक लीजिए।

मिश्रा – भाभी जी ऑटो क्यों मेरे पास ये फटफटिया है ना।

हुमा को फटफटिया वर्ड समझ नहीं आया, मगर जब मिश्रा ने एक पुराणी सी बाइक की तरफ इशारा किया तो वो समझ गयी की मिश्रा जी बाइक का कह रहे है.

हुमा को कुछ अनकंफर्ट लगा, मिश्रा के साथ बाइक पर बैठने को, मगर उसकी मजबूरी उसको ज्यादा सोचने को नहीं कह रही थी.

हुमा – जी इस पर।

मिश्रा – जी इस से जल्दी पहुँच जाएंगे।

मिश्रा अगले पल गेट से बाहर खड़ी उस पुराणी बाइक पर जा बैठा और उसको किक मारने लगा। हुमा अब घर के मेन गाइट को लॉक करते हुए बाइक के पास आयी, जो बहुत शोर कर रही थी फट फट्ट्ट्ट फट्ट्ट्ट फट्ट्ट्टाभी।

मिश्रा कुछ ऊंची आवाज़ में आईये भाभी जी बैठिये।

इतनी तबियत ख़राब होने के बावजूद भी हुमा का दिल नहीं कर रहा था, किसी गैर मर्द के साथ उसकी बाइक पर बैठने का। मगर उसकी टांगें कमज़ोरी की वजह से कांप रही थी, वो ज्यादा ना नहीं कर पायी और फिर वो बाइक पर बैठ गयी। मगर डिस्टेंस मैन्टन रखते हुए उसने बाइक के पीछे का स्टैंड ज़ोर से पकड़ लिया।

मिश्रा – भाभी जी बैठ गई ठीक से।

हुमा – जी।

बाइक निकल गयी, मगर मिश्रा के जिस्म से हुमा का जिस्म टच नहीं हुआ था, हुमा इतनी बीमारी की हालत में भी अपने आपको मिश्रा से दुरी बनाये बैठी थी। कुछ देर बाद हॉस्पिटल आ गया। मिश्रा और हुमा अंदर गए, डॉ. ने हुमा का चेकउप किया और हुमा को आज रात के लिए हॉस्पिटल में एडमिट रहने को कहा।

हुमा – एडमिट मुझे हुआ क्या है?

डॉ – डरिये नहीं मैडम हम सिर्फ आपको अंडर ओब्जेर्वेशन के लिए रख रहे है, कल आपको डिस्चार्ज मिल जाएगा।

मिश्रा – कोई बात नहीं भाभी जी आप एडमिट हो जाइये।

हुमा (घबराते हुए) – मगर वो अभी शहर में नहीं है ऐसे कैसे एडमिट हो जाए।

मिश्रा – भाभी जी मै हूं न आप चिंता न करे, आप एडमिट हो जाईये, मै सब संभाल लूँगा।

हुमा ने सैफ को कॉल किया और उसको सब बात बता दी, मगर सैफ कुछ काम के टेंशन में था उसने हुमा से ओछी आवाज़ में कहा।

सैफ – ओह्हो तुम्हारा तो हर बार का है यार, जब देखि बीमार पड़ जाती हो, अब मै मुंबई का काम देखु या फिर भाग कर वहाँ या जाऊ? अभी अभी तो मुंबई पंहुचा हु।

हुमा सैफ की ऐसे जवाब की उम्मीद नहीं रख रही थी, उसको बहुत बुरा लगा।

हुमा – ठीक है मै घर चली जाती हु।

सैफ फिर उसी अंदाज़ में.

अब डॉ.ने कहा है न एडमिट होने को हो जाओ, मै मिश्रा जी से बात कर लूंगा, ठीक है!

और फ़ोन कट हो गया, हुमा को रोने जैसा फ़ील हुआ मगर डॉ. और मिश्रा की मौजूदगी में रो न पायी.

डॉ – क्या कहा आपके हस्बैंड ने?

तभी मिश्रा का फ़ोन बजा ये, कॉल सैफ का था।

मिश्रा – हेलो हाँ बोलो भाई।

सैफ – भाई साहब आप का बहुत बहुत शुक्रिया! आज आप न होते तो मेरा टेंशन बहुत बढ़ जाता! हमारा उस शहर में जान पहचान का भी कोई नहीं है।

मिश्रा – आप भी न भाई! क्या आप का परिवार मेरा परिवार नहीं है? आप अपना काम करो मै भाभी जी का पूरा ख्याल रखूँगा।

Part 2==> हुमा एक हाउस वाइफ और मिश्रा पान वाला – 2

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