विदेशी बहुरानी – 1
Videshi bahu ki hindi sex story:- यह उस समय की कहानी है जब जमींदार राज चलता था। कोलकाता के एक गाँव के जमींदार रुद्रनाथ का राज था। गाँव के सब लोग रुद्रनाथ को बहुत मानते और डरते भी थे। क्यूंकि अपनी जवानी में उन्होंने जो अत्याचार किया है वह आज भी गाँव के लोगों को डराता है। अब रुद्रनाथ का उम्र 70 साल हो गया है। अब उनका ज़मींदारी उनके बारे बेटे राजेन्द्रनाथ संभालता है। लेकिन अभी भी पिताः से आदेश लेकर ही राजेंद्र सब काम करता है। राजेन्द्रनाथ की शादी को 5 साल हो गए है और उनका एक छोटा बच्चा भी है। रुद्रनाथ का मंझला यानि दूसरा बेटा अपनी पढ़ाई के लिए विलायत गया है। और छोटा बेटा अनिमेष अभी भी बहुत छोटा है। आज बहुत समय बाद रुद्रनाथ का दूसरा बेटा तरुण विदेश से लौट रहा है। वैसे तो यह ज़मींदार परिवार के लिए आनंद का समय होना चाहिए था।। पर अभी कोई भी उस हालात में नहीं है।
Videshi bahu ki hindi sex story
विदेश से लौटने से पहले तरुण ने एक चिट्ठी अपने घर भेजा था। उसको पढ़के रुद्रनाथ के दिमाग पे गुस्सा सातवे आसमान में पहुंच गया है। तरुण को विदेश में एक विदेशी लड़की से प्यार हो गया है और वह उस लड़की को लेकर ही लौट रहा है अपने देश। दोनों साथ में ज़िन्दगी गुज़ारना चाहते है। रुद्रनाथ उस लेटर को पढ़के गुस्से से हवेली के छत पे इधर उधर टहल रहे है। बाकी सब घरवाले भी वहां मजूद है। लेकिन जमींदार रुद्रनाथ के सामने जाना भी कोई नहीं चाहता इस वक़्त। इतने गुस्से में है वह।
रुद्रनाथ – कलंकित कर दिया उसने। एक बंगाली जमींदार घर का बेटा होकर एक विदेशी लड़की के साथ! छि। छि! खानदान का नाम मिटटी में मिला दिया, पढ़ाई के लिए विलायत भेजा था उसको ताकि हमारा नाम और बढ़े और वह नालायक वहीँ की लड़की को लेकर आ रहा है। बोलता है शादी करेगा! इतना दुस्साहस! अब एक फिरंगी इस घर की बहु बनेगी?!
रुद्रनाथ की पत्नी कमला बोलती है – मेरी बात ज़रा सुनिए।
रुद्रानाथ (चिल्ला कर)- कुछ नहीं सुन्ना है मुझे! यह शादी कभी नहीं हो सकती। जब तुम्हारा बेटा उस लड़की को लेकर आए तो बोल देना उसे, यह मेरा आदेश है। अगर वह मेरी बात सुनेगा तो ही घर के अंदर आएगा, वार्ना इस घर के अंदर पैर भी न रखेगा वह कमबख्त!
कमला- मेरी बात सुनिए। वह आपका बेटा है। आप तो बहुत प्यार करते है उससे। वह अगर एक विदेशी लड़की से शादी करना चाहता है तो उसमें क्या बुराई है?
रुद्रनाथ – कमला तुम जानती हो क्या बोल रही हो तुम? अरे वह एक विदेशी लड़की है। चलो फिर भी मान लेता अगर बंगाली न होकर दूसरी कहीं की होती। लेकिन तुम्हारा बेटा तो उससे भी आगे बढ़ गया। एक विलायती लड़की! कभी नहीं। अगर ऐसी आधुनिक सोच वाली लड़की इस परिवार में आ गयी तो सारे रीती रिवाज़ कायदे कानून मिटटी में मिला देगी! इस परिबार में उसकी कोई जगह नहीं हो सकती। मैं कभी यह रिश्ता मान नहीं सकता।
कमला – पर। हम अगर उनका रिश्ता ना मानें तो कहाँ जाएंगे वो? मेरी बात मानिये जी। उनका रिश्ता मान लीजिये।
रुद्रनाथ – अरे तुम समझ नहीं रही हो। वह एक विदेशी लड़की है। कैसे मान लू एक विदेशी को अपनी बहु? हमलोग इन विदेशी को बिलकुल भी पसंद नहीं करते और ना ही उनपे बिस्वास करते है। बहुत चालाक होते है यह लोग। नहीं। नहीं। कभी नहीं। इस घर में उसकी कोई जगह नहीं। और ना ही तुम्हारे बेटे की। नालायक कहीं का!
कमला रोती हुई पति के पास आकर बोलती है – ए जी। आपके पैर पड़ती हूँ। मेरा लाडला बेटा इतने दिन बाद आ रहा है उसको ऐसे निकालो मत। वह तो आपका भी बेटा है। एक माँ से उसके बेटे को मात छीनो।
अपनी पत्नी को रोता हुआ चेहरा देखकर रुद्रनाथ का गुस्सा थोड़ा शांत हुआ। लेकिन अभी भी गुस्सा था अंदर। पर अपनी पत्नी के आँखों में आंसू देखकर न चाहते हुए भी वह बोला –
रुद्रानाथ – अच्छा ठीक है ठीक है। रो मत उफ्फ्फफ्फ्फ़।
कमला – तो आप यह रिश्ता मान लेंगे?
रुद्रनाथ फिर से गुस्से से – नहीं!! मैंने जो बोला है उस पे अटल हु। इस घर पे उनका कोई जगह नहीं। लेकिन।
कमला- लेकिन क्या जी?
रुद्रनाथ – मैं तुमको भी ऐसे रोता हुआ नहीं देख सकता इसलिए बोल देना तुम्हारे उस लाडले को जिससे चाहे शादी करे।
कमला खुश होकर – सच में। शुक्रिया आपको।
रुद्रनाथ – लेकिन एक बात जान लो कमला। इस घर में उस विलेटी मेम का कोई जगह नहीं। यहाँ नहीं रहे सकती वह।
कमला – तो। तो कहा रहेंगे वह दोनों?
रुद्रनाथ – हमारी दूसरे हवेली, वह हवेली जो गाँव के छोटे तालाब के पास है वहां रहेगी वह। अगर इस बात से तुम राज़ी हो तो देखो।। वर्ना मैं और कुछ नहीं कर सकता।
कमला वैसे तो पती के इस बात से राज़ी नहीं थी, पर कुछ नहीं से थोड़ा कुछ अच्छा है। वह राज़ी हो गयी। कम से काम बेटा और बहु से रिश्ता तो जुड़ा रहेगा। उनके साथ नहीं तो कम से कम इसी गाँव में तो रहेंगे। एक दूसरे से ज़रूरत में मिल पाएंगे। रिश्ता बना रहेगा। इसलिए कमला मान गयी।
रुद्रनाथ – ठीक है। राजेंद्र। ज़रा सुनो।
राजेंद्र- जी पिताजी?
रूद्र – गाँव की हमारे उस दूसरी हवेली को साफ़ सुथरा करवा दो। तुम्हारा भाई और उसकी विदेशी बहु वही रहेंगे।
राजेंद्र- जी पिताजी। आज ही करवा दूंगा।
रुद्रनाथ – सिर्फ तुम्हारे लिए मैंने ज़बान लिया कमला। मैं अपने कमरे में जा रहा हु। तुम्हारा वह लाडला आए तो उसे सब बोल देना। आज के बाद मैं उसका शक्ल भी नहीं देखना चाहता।
रुद्रनाथ चले गए। राजेंद्र भी हवेली के नौकर लोगों को आदेश दिया जो कुछ और नौकर को साथ लेकर उस दूसरी हवेली में चले जाये और उसका साफ़ करना शुरू कर दे।
दोपहर को जमींदार हवेली के बाहर एक गाडी अकार रुकी। उस गाड़ी से उतरे एक जवान लड़का और फिर उस लड़के ने बहुत प्यार से एक लड़की को बाहर निकाला। हवेली के सामने ही कमला उसके दोनों बेटे राजेंद्र और अनिमेष और राजेंद्र की बहु रेवती इंतज़ार कर रही थी। रुद्रनाथ की तरह राजेन्द्रनाथ भी अपने भाई के इस फैसले से खुश नहीं था। वह भी गुस्से में था तरुण के ऊपर। लेकिन जब उसने पहलीबार तरुण के साथ उस लड़की को गाड़ी से उतर के हवेली के अंदर आता हुआ देखा तो उसके होश उड़ गए।
गुस्से वाला शकल जैसे हैरान हो जाता है। राजेन्द्रनाथ जैसे कंफ्यूज हो जाता है एक बात से। यह जो धीरे धीरे हवेली के गेट की सीढ़ियों से ऊपर आ रही। यह क्या कोई अप्सरा है?
Part 2 ==> विदेशी बहुरानी – 2
Read more hindi sex stories




