मुझे अंकल ने चोदा 8
Uncle ne meri chut faad di:- पिछले पार्ट में मै और अंकल बाथरूम में शॉवर के नीचे थे। अंकल ने मेरे बूब्स से खेलना शुरू किया, फिर धीरे-धीरे उनका लंड मेरे होठों पर फिराने लगे। मैंने समझते हुए खुद ही लंड को मुँह में ले लिया और चूसना शुरू कर दिया। अंकल ने धीरे-धीरे गहराई बढ़ाई और मेरे मुँह में जोर-जोर से धक्के मारने लगे। मुझे तकलीफ हो रही थी, आँसू आ गए थे और उल्टी जैसा महसूस हो रहा था, लेकिन अंकल मजे में खोए हुए थे और रुक नहीं रहे थे। अब पढ़ें आगे …
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Uncle ne meri chut faad di desi hindi sex story
थोड़ी देर मैंने अंकल के लंड को अपने बूब्स में दबाकर बूब्स चुदाई करवाई। फिर अंकल ने लंड को अपने हाथ में पकड़ा और मेरे बूब्स से निकाल लिया।
और फिर से लंड की टोपी को मेरे होठों पर फेरने लगे। मैं समझ गई थी कि अंकल क्या चाहते हैं। मैंने लंड को अपने हाथों में लिया और अपना मुँह खोलकर लंड की टोपी को अपने मुँह में ले लिया।
मैं अंकल की आँखों में देखते हुए लंड की टोपी को चूसने लगी। कभी-कभी लंड को मुँह से बाहर निकालकर लंड की टोपी पर अपनी जीभ घुमाती।
अंकल के मुँह से सिसकारियाँ निकलना शुरू हो गई थीं। फिर अंकल ने अपने दोनों हाथों से मेरे हाथ पकड़े (जो लंड पर थे) और अपनी हिप्स पर रख दिए।
और अपने दोनों हाथ मेरे सर पर रखकर मेरे सर को पकड़ लिया। अंकल लंड को धीरे-धीरे मेरे मुँह में अंदर डालने लगे।
लंड की टोपी जाकर जब मेरे हलक में टच हो गई, तब अंकल रुके।
अब अंकल ने अपनी कमर हिलानी शुरू की, जिससे लंड मेरे मुँह में अंदर-बाहर होने लगा।
लंड हर बार मेरे हलक में जाकर टच होने लगा, जिसके कारण मेरी आँखों में आँसू आ गए। लेकिन शॉवर चलने की वजह से मेरे आँसुओं का पता नहीं चल रहा था।
अब अंकल ने कमर हिलाने की थोड़ी स्पीड बढ़ा दी। अंकल लंड को पूरा बाहर निकालते और एक शॉट में ही मेरे हलक तक पहुँचा देते।
मैं अंकल को रोकना चाहती थी पर रोक नहीं पाई। क्योंकि अंकल मुझे अब तक तीन बार झाड़ चुके थे और मैं एक बार भी नहीं।
बस यही सोचकर मैंने अंकल को नहीं रोका। मुझे तकलीफ तो हो रही थी लेकिन मैं अंकल को भी खुश करना चाहती थी। तो इसीलिए मैं इस तकलीफ को बर्दाश्त करने लगी।
अब अंकल जोर-जोर से धक्के मार-मारकर अपने लंड को मेरे मुँह में अंदर-बाहर करने लगे। शायद अब अंकल मेरी तकलीफ को देख ही नहीं रहे थे।
कि मुझे कितना दर्द और तकलीफ हो रही है। कभी-कभी तो मेरी साँस भी रुक जाती थी, जब अंकल के लंड की टोपी मेरे हलक में जाकर टच होती।
अंकल तो अपनी आँखें बंद किए हुए मजे में धक्के मारे जा रहे थे।
लेकिन मेरी हालत खराब हो चुकी थी।
मेरी आँखों में आँसू और मेरे मुँह से उल्टी (वॉमिटिंग) होने को हो रही थी।
पर अंकल रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। वो कंटिन्यू लंड को मेरे मुँह में अंदर-बाहर करते रहे। लंड पूरी तरह गीला हो चुका था मेरे मुँह की लार (सलाइवा) से। और कुछ लार नीचे भी गिर रही थी मेरी ठुड्डी (चिन) से होते हुए।
मेरे मुँह से अजीब-अजीब सी आवाजें भी आ रही थीं। (मैं लिख तो नहीं सकती, लेकिन आप समझ ही सकते हैं कि कैसी आवाजें होंगी वो।)
खैर… अंकल को मुझ पर जरा भी रहम नहीं आ रहा था उस टाइम। पता नहीं कौन सा भूत सवार था अंकल के सर पर।
अंकल और भी कोशिश कर रहे थे लंड को मेरे हलक में अंदर तक पहुँचाने की। लंड बहुत मोटा था और मेरा मुँह बहुत छोटा लंड के हिसाब से।
शायद इसीलिए लंड और अंदर नहीं जा पा रहा था। लेकिन जितना लंड मेरे मुँह में जा रहा था, अंकल उसी से मेरे मुँह को जानवरों की तरह चोद रहे थे।
मेरी हालत बहुत खराब हो चुकी थी।
मैं अंकल को रोकने की कोशिश कर रही थी, पर अंकल रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे।
कम से कम 15 मिनट तक अंकल ने अपने लंड से मेरे मुँह को चोदा।
जब अंकल ने लंड को मेरे मुँह से बाहर निकाला तो वो मेरे थूक (स्पिट) से पूरा भीगा हुआ था।
अंकल थोड़ा सा पीछे को हुए तो मैंने अपने हाथ फर्श (फ्लोर) पर टिका दिए और जोर-जोर से खांसने (कफ) लगी।
मैं उस टाइम अपने घुटनों और हाथों के सहारे फर्श (फ्लोर) पर (डॉगी स्टाइल) में थी। मुझे हलक में से जोर-जोर से खांसी आ रही थी।
मेरी बहुत बुरी हालत थी उस टाइम। मेरी आँखें लाल हो चुकी थीं। और मेरा मुँह? मुँह क्या, मेरे बूब्स भी मेरे थूक से भीगे हुए थे।
मेरा खांस-खांसकर बुरा हाल हुआ जा रहा था। अंकल भागकर रूम में गए और एक गिलास में पानी लेकर आए।
अंकल ने मुझे मेरे शोल्डर्स से पकड़कर सीधा बैठाया। फिर अंकल ने मुझे पानी का गिलास दिया। मैंने एक बार अंकल के मुँह की तरफ देखा रोते हुए।
फिर मैं पानी पीने लगी। पानी पीकर मुझे थोड़ा आराम मिला। अंकल अपने हाथ से मेरी पीठ (कमर) सहला रहे थे।
पानी पीने के बाद मैंने फिर अंकल के मुँह की तरफ देखा। अंकल बोले…
अंकल: सॉरी फलक… पता नहीं मुझे क्या हो गया था। मेरी वजह से तुम्हारा ये हाल हो गया। I am very very sorry फलक।
मैं: आपने तो मुझे आज मार ही डाला था। क्या कोई ऐसे भी करता है क्या?
अंकल: I know फलक… पर मुझे मजे-मजे में पता ही नहीं चला। मुझे इतना मजा आ रहा था कि मुझे तुम्हारा ध्यान ही नहीं रहा।
मैं: आपके मजे के चक्कर में? मेरी हालत देखो क्या हो गई है?
(मैंने रोते हुए बोला)
अंकल: I am sorry… मेरी जान… मैं समझ सकता हूँ। पर तुम भी तो समझो कि मजे के आगे कुछ पता ही नहीं चलता।
मैं: हाँ मैं समझ सकती हूँ। पर आपको मेरा ध्यान रखना चाहिए था।
अंकल: अब जो हो गया सो हो गया… I am very very sorry… आगे से ध्यान रखूँगा।
फिर अंकल ने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया बैठे-बैठे ही और मुझे चुप कराने की कोशिश करने लगे। क्योंकि मैं रो रही थी।
थोड़ी देर तक मैं रोती रही। अंकल के दिलासा देने से मैं कुछ देर बाद चुप हुई। फिर अंकल बोले…
अंकल: मेरी जान… देखो… चुदाई में थोड़ा-बहुत दर्द तो बर्दाश्त करना पड़ता ही है। पॉर्न मूवी में तो देखा ही होगा? वो लोग कैसे चुदाई करते हैं।
मैं: हम्मममम
(मैं अपने आँसू साफ करते हुए बोली)
अंकल: और उस चुदाई में क्या मजा जिसमें दर्द और तकलीफ न हो? नॉर्मल चुदाई तो सभी करते हैं।
मैं: हम्मममम
अंकल: अब तुम खुद को ही देख लो। क्या तुम्हें अपने हसबैंड के साथ चुदाई करने में मजा आता है?
मैं: नहीं।
अंकल: और मेरे साथ?
मैं: हम्मममम… आ रहा है।
ये बात तो सच है कि मुझे अंकल के साथ चुदाई करने में मजा तो आ रहा है। भले ही अंकल मुझे दर्द और तकलीफ दे रहे हों।
ऐसा मजा जो मुझे समीर के साथ कभी नहीं आया।
अंकल: तो बस… एन्जॉय करो मेरी जान… इस दर्द को भी और इस चुदाई को भी।
फिर अंकल ने अपने लिप्स मेरे लिप्स पर रख दिए और किसिंग करने लगे।
थोड़ी देर किसिंग करने के बाद अंकल खड़े हो गए और मुझे भी पकड़कर खड़ा किया और बोले…
अंकल: अब ठीक हो तुम?
मैं: हम्मममम ठीक हूँ।
अंकल: तुमने पहली बार लंड चूसा है ना? इसलिए ज्यादा तकलीफ हुई है तुम्हें लंड को चूसने में। धीरे-धीरे आदत हो जाएगी।
मैं: हम्मममम शायद।
फिर अंकल ने अपने हाथों में मेरे चेहरे को पकड़ा और अपने लिप्स फिर से मेरे लिप्स पर रख दिए और किसिंग करने लगे।
मैंने भी अपने हाथ अंकल के हाथों के ऊपर रख दिए और अंकल का साथ देने लगी किसिंग करने में।
फिर अंकल ने अपना राइट हैंड मेरे चेहरे से हटाकर मेरे कुल्हे पर रख दिया और मुझे अपने साथ बिल्कुल चिपका लिया।
अंकल का लंड अब हमारे दोनों के पेट के बीच में था। और अंकल अपने हाथ से मेरे कुल्हे को सहलाने लगे।
अब मेरे दोनों हाथ अंकल की गर्दन के पीछे थे। मैं अंकल को गर्दन से पकड़कर अपने होठों के साथ चिपकाए हुए थी।
और अंकल का दूसरा हाथ मेरी कमर पर था, जिससे वो मेरी को सहला रहे थे। मैं फिर से गरम होती जा रही थी।
फिर अंकल ने मेरे होठों को छोड़कर मेरे गालों पर किसिंग करनी शुरू कर दी। कभी-कभी हल्के से दाँत भी मारते मेरे गालों पर।
अब अंकल का दूसरा हाथ भी मेरे कुल्हे पर आ चुका था। अब अंकल दोनों हाथों से मेरे दोनों कुल्हों को मसल रहे थे और मेरी गर्दन पर किसिंग कर रहे थे।
मैं भी अपना एक हाथ अंकल की कमर पर ले जाकर उनकी कमर पर फेरने लगी और दूसरे हाथ से उनके सर को पकड़कर डायरेक्शन देने लगी कि कहाँ-कहाँ किस करें।
मैं अंकल के सर पर थोड़ा जोर देकर अपने बूब्स की तरफ दबाने लगी, ताकि अंकल अब मेरे बूब्स भी चूसें।
फिर अंकल ने मेरे एक कुल्हे को छोड़कर मेरे बूब्स को पकड़ लिया और बूब्स को पकड़कर अपने मुँह में लेकर चूसने लगे।
उफ्फ्फ्फ्फ… मेरे मुँह से फिर से सिसकारियाँ निकलने शुरू हो गई थीं।
अंकल कभी लेफ्ट वाला बूब्स चूसते तो कभी राइट वाला। बड़ा मजा आने लगा था मुझे। इस मजे में मैं सब कुछ भूल गई थी। वो दर्द, वो तकलीफ सब कुछ।
थोड़ी देर बूब्स चूसने के बाद अंकल नीचे बैठ गए और चूत के ठीक ऊपर किस करने लगे। मैं गिरते-गिरते बची जब अंकल ने अपनी जीभ मेरी चूत के ऊपर से फेरी।
उफ्फ्फ्फ्फ कितना मजा देते हैं अंकल।
मैं अपनी टाँगें थोड़ी फैलाकर खड़ी हो गई, ताकि मेरी चूत थोड़ा बाहर को आ जाए और अंकल अच्छे से चाट सकें।
अब पोजिशन ये थी— अंकल बैठे हुए थे और मैं खड़ी थी टाँगें (लेग) चौड़ी करके। अंकल के दोनों हाथ मेरी हिप्स पर थे और मेरे हाथ अंकल के सर पर।
अब अंकल मेरी चूत को चाट रहे थे और मैं पागल होती जा रही थी।
मैं: आआआह्ह्ह्ह्ह अंकल उम्मममम उम्मममम उम्मममम आआआह्ह्ह्ह्ह
आप तो मुझे पागल ही कर दोगे?
थोड़ी देर चूत चाटने के बाद अंकल ने मुझे घुमा दिया। अब मेरी गाँड अंकल के मुँह की तरफ थी। मैंने अपने दोनों हाथ दीवार पर रख दिए और अपनी गाँड को और पीछे की तरफ कर दिया।
मैं अपनी टाँगें पहले की तरह चौड़ी करके खड़ी हो गई। अब अंकल बैठे-बैठे ही पीछे से मेरी चूत को चाटने लगे।
मैं: आआआह्ह्ह्ह्ह आआआह्ह्ह्ह्ह उम्मममम उम्मममम उफ्फ्फ्फ्फ आआआह्ह्ह्ह्ह
फिर अंकल ने मेरी चूत में मिडिल फिंगर डाल दी पीछे से ही और उसको अंदर-बाहर करने लगे।
जिससे मुझे बहुत मजा आ रहा था।
फिर अंकल मेरी कमर पर किस करते-करते खड़े हो गए।
खड़े होकर अंकल ने अपने दोनों हाथ मेरे दोनों कुल्हों पर रखे और उनको लेफ्ट-राइट फैलाकर देखने लगे और बोले…
अंकल: आआआह्ह्ह्ह्ह तुम्हारी गाँड कितनी मस्त है? तुम्हारे कुल्हे कितने गदराए हुए हैं?
छपाट… थप्पड़ की आवाज पूरे बाथरूम में गूँज गई और मेरे मुँह से एक आआआह्ह्ह्ह्ह निकली जोर से।
क्योंकि अंकल ने मेरे कुल्हे पर बहुत जोर से थप्पड़ मारा था।
ऐसे ही दूसरे कुल्हे पर भी थप्पड़ मारा।
थप्पड़ मारने के बाद अंकल ने अपनी मिडिल फिंगर मेरी गाँड की लकीर में डालकर ऊपर-नीचे को फेरी एक-दो बार।
फिर अंकल मेरे पीछे आकर खड़े हुए और अपने लंड को मेरी गाँड की लकीर में डालकर खड़े हो गए।
मैं एक पल के लिए डर गई थी। मुझे ये लगा कि अब अंकल मेरी गाँड मारेंगे। पर अंकल ने ऐसा नहीं किया।
अंकल ने मेरे दोनों कुल्हों को अपने लंड पर दबाया और लंड को आगे-पीछे करना शुरू कर दिया।
अंकल ऊपर-ऊपर से ही मेरी गाँड मार रहे थे। मुझे भी मजा आ रहा था। थोड़ी देर ऐसा करने के बाद अंकल ने मेरे कुल्हे छोड़े।
और अपने लंड को पकड़कर लंड की टोपी को मेरी चूत पर घिसने (रबिंग) लगे। मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं।
मैं: आआआह्ह्ह्ह्ह उम्मममम आआआह्ह्ह्ह्ह अंकल प्लीज डाल दीजिए अंदर।
मैं ऑलरेडी बहुत गरम हो चुकी थी। और अब लंड को चूत पर घिसने से मेरी बर्दाश्त की हद पार हो चुकी थी।
मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने अंकल को बोल दिया।
पर अंकल शायद मुझे और तड़पाना चाहते थे। इसलिए उन्होंने अपने लंड को मेरी थाईज के बीच में रखकर मेरी थाईज को भींच लिया और धक्के मारने लगे।
अंकल के ऐसा करने से लंड की रगड़ मेरी चूत पर भी लग रही थी, जिसे बर्दाश्त करना मेरे बस की बात नहीं थी।
मैं तो लंड को अपनी चूत के अंदर चाहती थी। लेकिन अंकल ऐसा करके मुझे और तड़पा रहे थे।
मैं सिसकारियाँ लेते हुए फिर अंकल से बोली…
मैं: आआआह्ह्ह्ह्ह अंकल प्लीज अंदर डालिए ना? अब बर्दाश्त नहीं हो रहा। प्लीज अंकल।
अंकल: ठीक है मेरी जान… डालता हूँ। लेकिन थोड़ा-बहुत दर्द होगा उसको बर्दाश्त कर लेना।
मैं तड़पती हुई बोली…
मैं: आआआह्ह्ह्ह्ह अंकल कर लूँगी। आप बस अंदर डालिए।
अंकल: ठीक है।
फिर अंकल ने मेरी टाँगों को थोड़ा चौड़ा किया और अपने लंड की टोपी को मेरी चूत के मुँह पर रख दिया और धीरे-धीरे अंदर डालने लगे।
लंड की टोपी ही मेरी चूत में गई थी।
और मेरे मुँह से एक चीख निकल गई।
मेरी चीख सुनकर अंकल रुक गए।
और अपने हाथों से मेरी हिप्स को सहलाने लगे।
मैं भी दर्द को बर्दाश्त करने की कोशिश कर रही थी। लेकिन अंकल का लंड था ही इतना मोटा कि अच्छों-अच्छों की चीख निकलवा दे।
थोड़ी देर अंकल उसी पोजिशन में रुके रहे और मुझसे बोले…
अंकल: ज्यादा दर्द हो रहा है क्या?
मैं दर्द में सिसकती हुई बोली…
मैं: आआआह्ह्ह्ह्ह… आपका लंड है ही इतना मोटा। जितनी बार अंदर जाएगा उतनी बार दर्द देगा।
अंकल मेरी बात सुनकर मुस्कुराते हुए बोले…
अंकल: अब भगवान ने इतना मोटा बनाया है तो इसमें मैं क्या कर सकता हूँ।
फिर अंकल ने थोड़ी सी हरकत की। अपने लंड को थोड़ा सा वापस बाहर निकाला आराम-आराम से और फिर उतना ही अंदर किया जितना पहले था।
मैं: आआआह्ह्ह्ह्ह अंकल आराम से करिए। दर्द हो रहा है।
अंकल: आराम से ही कर रहा हूँ मेरी जान।
अंकल धीरे-धीरे लंड को बाहर निकालते और फिर अंदर करते। ऐसे ही अंकल ने लंड को 10-15 मिनट तक अंदर-बाहर किया आराम-आराम से।
अब मुझे भी ज्यादा दर्द नहीं हो रहा था। अंकल हर धक्के के साथ थोड़ा-थोड़ा लंड अंदर करते जा रहे थे।
मुझे दर्द तो हो रहा था, लेकिन मैं दर्द को बर्दाश्त कर रही थी।
अंकल का आधा लंड अब मेरी चूत में जा चुका था। अब अंकल आधे लंड को ही मेरी चूत में अंदर-बाहर कर रहे थे आराम-आराम से।
अंकल ने अपना एक हाथ आगे लाकर मेरे बूब्स को पकड़ लिया और उसे मसलने लगे।
अब तक लंड मेरी चूत में अपनी जगह बना चुका था, तो अब मुझे ज्यादा दर्द नहीं हो रहा था। धीरे-धीरे मजा आने लगा था मुझे भी।
ये पहली बार था कि कोई मुझे पीछे से चोद रहा है। मुझे इस पोजिशन में मजा आने लगा था।
समीर तो बस हमेशा एक ही पोजिशन में चुदाई करते थे।
अब मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी थीं। मजे की सिसकारियाँ।
मैं: आआआह्ह्ह्ह्ह अंकल उम्मममम उम्मममम ऐसे ही… मजा आ रहा है।
अंकल: हाँ मेरी जान… अभी तो और भी मजा आएगा।
अब अंकल ने थोड़ी स्पीड बढ़ा दी थी धक्के मारने की। मुझे थोड़ा दर्द भी हो रहा था और मजा भी आ रहा था।
मैं दोनों को एन्जॉय कर रही थी। दर्द को भी और मजे को भी।
लेकिन शायद ये मजा मेरे लिए थोड़े देर का ही था। क्योंकि अगले ही पल मेरे मुँह से बहुत जोरों की चीख निकली और मेरी आँखों में आँसू आ गए थे।
हुआ ये था… अंकल अब नॉर्मल स्पीड से मेरी पीछे से चुदाई कर रहे थे।
मुझे भी मजा आ रहा था अब। और मजे में मैं पता नहीं क्या बोले जा रही थी।
मैं: आआआह्ह्ह्ह्ह आआआह्ह्ह्ह्ह उम्मममम उम्मममम आआआह्ह्ह्ह्ह अंकल ऐसे ही… ऐसे ही चोदिए… मजा आ रहा है… आआआह्ह्ह्ह्ह आआआह्ह्ह्ह्ह उम्मममम उम्मममम उफ्फ्फ्फ्फ
अंकल को भी शायद जोश आ गया था मेरी बातें सुनकर। वो भी अब अच्छी स्पीड से चुदाई कर रहे थे मेरी।
फिर अंकल ने अपने दोनों हाथ मेरे शोल्डर पर रखकर मजबूती से पकड़ लिए। फिर अंकल ने अपने लंड को बाहर निकाला। लंड की टोपी चूत में ही रहने दी।
और जोरदार धक्का मारा, जिससे अंकल का पूरा लंड मेरी चूत में समा गया। और मेरे मुँह से बहुत जोरों की चीख निकली।
मेरी टाँगें काँपने लगी थीं। क्योंकि ये पहली बार था अंकल का पूरा लंड मेरी चूत में गया था। जड़ तक।
मैं जोर-जोर से चिल्लाने लगी—
मैं: अंकल प्लीज बाहर निकालो… मर गई मैं… प्लीज बाहर निकालो… बहुत दर्द हो रहा है।
लेकिन अंकल कहाँ बाहर निकालने वाले थे। वो तो लंड को पूरा अंदर डालकर मुझे मजबूती से पकड़े हुए खड़े रहे।
मुझे हिलने भी नहीं दे रहे थे। इतनी मजबूती से पकड़ा हुआ था मुझे।
मेरा रो-रोकर बहुत बुरा हाल हो चुका था। लेकिन अंकल न ही खुद हिले जरा सा भी और न मुझे हिलने दिया।
मुझे अंकल का लंड अपने आधे से ज्यादा पेट (बेली) के अंदर महसूस हो रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने मेरी चूत में बहुत लंबी और बहुत मोटी रॉड डाल दी हो।
10-15 मिनट तक अंकल वैसे ही रुके रहे और मैं रोती रही। इस बीच अंकल मेरी कमर पर और गर्दन पर किसिंग भी करते रहे। जब मेरा रोना बंद हुआ तब अंकल बोले…
अंकल: बस मेरी जान… जितना दर्द होना था हो गया। अब आएगा मजा ही मजा।
मैं सिसकती हुई बोली…
मैं: आपने तो मेरी चूत फाड़ दी अंकल। और आपको अभी भी मजे की पड़ी हुई है।
अंकल: मेरी जान… अभी तो पूरा गया है लंड चूत में। अब आएगा असली मजा तो चुदाई का। अब तक तो सिर्फ आधे लंड से चुदाई कर रहा था मैं।
मैं: मुझे तो आधे लंड से ही मजा आ रहा था अंकल। आपने तो अब मेरी चूत पूरी फाड़ दी।
अंकल: पर मेरी जान… मुझे तो मजा नहीं आ रहा था ना आधे लंड से। अब देखना तुमको भी पहले से ज्यादा मजा आएगा।
मैं सिसकती रही। मेरी आँखों से आँसू कंटिन्यू बहते रहे। पर अंकल पर कोई असर नहीं हुआ। न मेरे रोने का, न मेरे चिल्लाने का। किसी चीज का कोई असर नहीं हुआ।
जब मैं रो-धोकर चुप हो गई, तब अंकल ने अपने लंड से हरकत करनी शुरू की। अंकल लंड को धीरे-धीरे बाहर निकालने लगे। मुझे थोड़ा दर्द हुआ, लेकिन मैंने बर्दाश्त किया।
अंकल ने लंड को थोड़ा बाहर निकाला और फिर धीरे-धीरे अंदर करने लगे। मुझे दर्द तो हो रहा था, लेकिन मैं बर्दाश्त करती रही।
अंकल बहुत देर तक ऐसे ही आधे लंड को धीरे-धीरे अंदर-बाहर करते रहे। बहुत देर बाद मेरा दर्द पहले से कम हुआ।
फिर अंकल ने मुझे थोड़ा सीधा खड़ा किया। सीधा खड़ा करने के बाद अंकल ने अपने हाथ में पकड़कर मेरे मुँह को अपनी तरफ पीछे को घुमाया।
और खुद भी थोड़ा सा आगे को झुककर अपने लिप्स मेरे लिप्स पर रख दिए और किसिंग करने लगे। मैं धीरे-धीरे अब नॉर्मल होती जा रही थी।
दर्द की जगह अब थोड़ा-थोड़ा मजा आने लगा था। दर्द अभी भी हो रहा था, लेकिन इतना नहीं जितना पहले हो रहा था।
अंकल मुझे किस भी करते रहे और पीछे से अपने लंड को मेरी चूत में अंदर-बाहर भी करते रहे।
अंकल अभी धीरे-धीरे से ही चुदाई कर रहे थे। अपने आधे लंड से ही। ताकि लंड मेरी चूत में अच्छी तरह से अपनी जगह बना ले।
10-15 मिनट के बाद मेरा दर्द खत्म हो गया था। अब मुझे भी मजा आने लगा था। अब अंकल भी धीरे-धीरे लंड को पूरा बाहर लाते और फिर धीरे-धीरे ही पूरा अंदर डाल देते।
अंकल ऐसे ही कुछ और देर तक करते रहे, ताकि लंड अच्छे से पूरा अंदर-बाहर हो सके। अंकल ने मेरा मुँह छोड़ दिया था। मैं अब मजे में सिसकियाँ ले रही थी।
अंकल ने अपने हाथ आगे लाकर मेरे बूब्स पकड़ लिए और उन्हें मसलने और दबाने लगे। अब अंकल धीरे-धीरे अपनी कमर हिलाने की स्पीड बढ़ाने लगे थे। मेरे मुँह से अब सिसकारियाँ निकलने लगी थीं।
मैं: आआआह्ह्ह्ह्ह आआआह्ह्ह्ह्ह आआआह्ह्ह्ह्ह उम्मममम उम्मममम आआआह्ह्ह्ह्ह अंकल
अंकल: मजा आ रहा है ना अब मेरी जान?
मैं: आआआह्ह्ह्ह्ह आआआह्ह्ह्ह्ह हाँ अंकल अब मजा आ रहा है।
अंकल: आधे लंड से ज्यादा मजा आ रहा था या अब पूरे लंड से?
मैं: अब ज्यादा मजा आ रहा है अंकल… आआआह्ह्ह्ह्ह आआआह्ह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फ्फ उम्मममम उम्मममम
अंकल: मैंने कहा था ना कि असली मजा तो अभी बाकी है।
मैं: हम्मममम
अब अंकल ने जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए थे। बाथरूम में अब थप-थप की आवाज गूँज रही थी।
क्योंकि जब अंकल लंड अंदर करते तो उनकी थाईज मेरे हिप्स पर आकर लगतीं, जिससे थप-थप की आवाज आती।
मैं भी अब पूरे जोश में आ गई थी। क्योंकि अंकल चुदाई ही बड़ी जबरदस्त कर रहे थे। अंकल भी मेरी सिसकियाँ सुन-सुनके पूरे जोश में आ चुके थे।
अंकल ने अब मुझे आगे को झुका दिया।
तो मैंने अपने हाथ दीवार पर रख दिए। और अंकल ने अपने हाथों से मेरी कमर को साइड से पकड़ लिया था।
अब अंकल अपना पूरा लंड बाहर निकालते… लंड की टोपी को छोड़कर… और फिर पूरी ताकत से अंदर धक्का मारते। अब थप-थप की आवाज भी और ज्यादा होने लगी थी।
अब मेरे मुँह से चीख निकल रही थी। मजे की चीख…
मैं: आआआह्ह्ह्ह्ह आआआह्ह्ह्ह्ह अंकल और जोर से चोदिए मुझे… आआआह्ह्ह्ह्ह उम्मममम उम्मममम मजा आ रहा बहुत।
अंकल अब अपनी पूरी ताकत से मेरी चुदाई कर रहे थे। मेरी टाँगें काँप (शेकिंग) रही थीं। अंकल इतनी जोर-जोर से धक्के मार रहे थे।
फिर अंकल ने धक्के मारते-मारते मेरे कुल्हे पर जोरों से एक थप्पड़ मारा, जिसकी वजह से मेरे मुँह से एक दर्द भरी आआआह्ह्ह्ह्ह निकली।
थोड़ी देर बाद दूसरे कुल्हे पर जोरों से थप्पड़ मारा अंकल ने। अब अंकल मेरी ऐसे ही चुदाई कर रहे थे। थोड़ी-थोड़ी देर बाद कुल्हों पर थप्पड़ मार-मारकर।
10-15 मिनट ऐसे ही मुझे चोदने के बाद अंकल रुक गए और लंड को मेरी चूत से बाहर निकाल लिया। मुझसे सही से खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था।
क्योंकि मेरी टाँगें काँप रही थीं। इतनी दमदार चुदाई होने से।
एक बात तो है अंकल में… चुदाई बड़ी जबरदस्त करते हैं। मेरी चूत के सारे पुर्जे हिला डाले थे अंदर से।
फिर अंकल ने मुझे बैठने के लिए बोला। मैं नीचे बैठ गई। लेकिन बैठते टाइम मुझे बहुत दर्द हुआ चूत में।
फिर अंकल अपने लंड को हाथ में पकड़े हुए मेरे मुँह के आगे आकर खड़े हो गए। मैंने जब लंड को देखा तो वो पूरा गीला हुआ पड़ा था। मेरी चूत के पानी से।
फिर अंकल ने अपने लंड की टोपी को मेरे होठों पर फेरना शुरू कर दिया।
मैंने अपना मुँह पीछे को हटा लिया।
क्योंकि लंड पर चूत का पानी लगा हुआ था।
जिसकी वजह से मुझे उल्टी (वॉमिटिंग) सी आने को होने लगी। मुझे ऐसा करते देख अंकल बोले…
अंकल: क्या हुआ??? मुँह में लो ना लंड को जल्दी।
मैं: ये पूरा गंदा (डर्टी) हुआ पड़ा है।
अंकल: गंदा?? कहो ना।
मुझे बोलते हुए शर्म लगी लेकिन बोलना पड़ा।
मैं: चूत के पानी से।
(मैंने शरमाते हुए कहा)
अंकल: तो क्या हुआ??? तुम्हारी ही चूत का तो पानी है। मैंने भी तो पिया था तुम्हारी चूत का पानी। मुझे तो बहुत टेस्टी लगा था।
अंकल ने तो सच में ही पिया था मेरी चूत का पानी। बल्कि चाट-चाटकर बिल्कुल क्लीन कर दी थी चूत को। क्या इतना टेस्टी है मेरी चूत का पानी? मैं ये सब लंड को देखते हुए सोच रही थी।
फिर सोचा… क्यों न ट्राई किया जाए? मैं भी टेस्ट करके देखूँ। कैसा टेस्ट होता है? जब अंकल पी सकते हैं तो टेस्ट अच्छा ही होगा।
ये सोचकर मैंने अंकल के लंड को अपने हाथों में पकड़ लिया। मैंने एक बार अंकल के मुँह की तरफ देखा और फिर अपना मुँह खोलकर लंड को अपने मुँह में लेने लगी।
जैसे ही लंड की टोपी मेरे मुँह में गई, लंड की टोपी पर लगा हुआ चूत का पानी मेरी जीभ पर लगा तो मुझे उसका टेस्ट थोड़ा नमकीन (सॉल्टी) सा लगा।
मैंने अब से पहले कभी चूत के पानी या लंड के वीर्य (स्पर्म) को टेस्ट नहीं किया था। ये पहली बार था। पता नहीं अंकल मुझसे और क्या-क्या करवाएँगे।
खैर… मैं लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी और लंड पर लगा हुआ पानी मेरे मुँह में अंदर जाने लगा। मुझे पहले तो अजीब सा लगा।
लेकिन मैं धीरे-धीरे उसको पी गई।
फिर अंकल ने अपने दोनों हाथों से मेरे सर को पकड़ लिया और लगे मेरे मुँह में धक्के मारने।
अंकल पहले की तरह ही मेरे मुँह को फिर से चोदने लगे। लंड को मेरे हलक तक पहुँचा देते धक्के मार-मारकर।
अबकी बार मैंने भी थोड़ी हिम्मत दिखाई। मैंने अपना मुँह जितना हो सकता था उतना खोल दिया। अब अंकल मेरे मुँह को भी बड़े ही दमदार तरीके से चोदने लगे।
अंकल मुझ पर जरा भी रहम नहीं कर रहे थे। बस जितनी ताकत हो सके उतनी ताकत से मेरे मुँह को चोदे जा रहे थे। लंड को भी जितना अंदर जा सके उतना अंदर पहुँचाने की कोशिश कर रहे थे।
मेरी फिर से हालत खराब हो चुकी थी। क्योंकि अब लंड मेरे हलक में अंदर तक जा रहा था। जब लंड मेरे हलक में अंदर जाता तो बाहर से मेरे गले में लंड अंदर जाता हुआ साफ दिखाई देता।
मैं अंकल को रोकने की पूरी कोशिश कर रही थी, पर अंकल रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे।
जब मेरी हालत ज्यादा ही खराब हो गई, तब मैंने अंकल की थाईज पर मुक्के मारने शुरू किए। तब जाकर अंकल रुके।
मेरे मुँह से लंड बाहर आते ही मैं जोर-जोर से खांसने लगी। मेरी आँखों से आँसू और मेरे मुँह से लार गिर रही थी।
लेकिन मेरी ऐसी हालत देखकर भी अंकल को मुझ पर जरा भी रहम नहीं आया।
अंकल ने लंड को मेरे मुँह से बाहर निकालते ही मुझे खड़ा करने लगे।
मैं बड़ी मुश्किल से खड़ी हो पाई।
खड़ी करने के बाद अंकल ने मेरा एक पैर टॉयलेट की सीट के ऊपर रखवाया और दूसरा पैर नीचे ही रहने दिया।
मेरे पीछे आकर अंकल ने फिर से अपना लंड मेरी चूत में एक ही धक्के में पूरा अंदर डाल दिया।
मेरे मुँह से फिर से जोर की चीख निकली। लेकिन अंकल नहीं रुके। उन्होंने तो लंड को चूत में डालते ही मेरी चुदाई फिर से शुरू कर दी। पहले की तरह ही।
मैंने भी अपने हाथ दीवार पर रख लिए और रोते हुए अंकल के धक्कों को सहने लगी। अंकल को अब मेरी हालत की कोई परवाह नहीं थी।
अंकल तो बस मेरी ठुकाई करने पर लगे हुए थे। कुछ देर बाद मुझे भी मजा आने लगा था।
अब मैं भी इस दमदार ठुकाई को एन्जॉय करने लगी। अंकल ने एक हाथ से मेरे बाल पकड़कर पीछे को खींच लिए, जिसकी वजह से मुझे थोड़ा दर्द हुआ।
अब अंकल एक हाथ से मेरे बाल पकड़े हुए और दूसरे हाथ से मेरे कुल्हों पर थप्पड़ मारते हुए मेरी चुदाई कर रहे थे।
मुझे भी मजा आ रहा था। पता नहीं क्या बात थी अंकल में… वो मुझे जितना दर्द देते बाद में उस दर्द में भी मजा आने लगता मुझे।
अंकल को मेरी चुदाई करते हुए 15-20 मिनट हो चुके थे। अब अंकल भी सिसकारियाँ लेने लगे थे। शायद अब अंकल भी झड़ने वाले थे।
अंकल: आआआह्ह्ह्ह्ह आआआह्ह्ह्ह्ह मेरी जान मजा आ रहा है ना?
मैं: आआआह्ह्ह्ह्ह आआआह्ह्ह्ह्ह उम्मममम उम्मममम। हाँ अंकल बहुत मजा आ रहा है। चोदते रहिए ऐसे ही।
अंकल: पहले भी चुदाई हुई है ऐसी तुम्हारी? आआआह्ह्ह्ह्ह
मैं: उम्मममम आआआह्ह्ह्ह्ह आआआह्ह्ह्ह्ह… नहीं अंकल। आपसे चुदवाकर मजा आ गया।
अंकल: अब रोज ऐसे ही चोदा करूँगा तुम्हें? आआआह्ह्ह्ह्ह आआआह्ह्ह्ह्ह
मैं: हाँ अंकल ऐसे ही चोदा करना मुझे रोज… आआआह्ह्ह्ह्ह आआआह्ह्ह्ह्ह आआईईईईईईईईईई
अंकल: आआआह्ह्ह्ह्ह आआआह्ह्ह्ह्ह उम्मममम उम्मममम…
मेरी जान… मैं झड़ने वाला हूँ।
मैं: आआआह्ह्ह्ह्ह आआआह्ह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फ्फ उम्मममम उम्मममम
मैं भी झड़ने वाली हूँ अंकल।
प्लीज और जोर से चोदिए मुझे।
और फिर वो टाइम भी आ गया, जब हम दोनों एक साथ झड़ने लगे। अंकल ने मेरी चूत में ही अपने लंड की पिचकारियाँ मारनी शुरू कर दीं।
अंकल का वीर्य जब मेरी चूत में अंदर गिरा तो ऐसा लगा जैसे कुछ गरम-गरम चीज मेरी चूत में गिरी हो। मैं भी अंकल के वीर्य की गरमाहट से खड़ी-खड़ी झड़ने लगी।
झड़ते टाइम मेरा पूरा शरीर काँप गया था। क्योंकि मैं 4 बार झड़ रही थी। वो भी एक ही रात में।
अब मेरे शरीर के अंदर हिम्मत ही नहीं रही थी। अंकल भी मेरी कमर पर अपने मुँह रखे हुए खड़े थे।
अंकल का लंड अभी भी मेरी चूत में अंदर ही झटके मार रहा था। अंकल कुछ देर बाद मेरे पीछे से हटे। जब अंकल ने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाला तो एक आवाज हुई—
टक डे सी… जैसे किसी बोतल का ढक्कन खुलने पर आती है। अंकल पीछे हटकर खड़े हो गए। और मैं वहीं नीचे बैठ गई। अपनी गाँड फर्श पर रखकर।
क्योंकि मेरे शरीर के अंदर अब इतनी ताकत नहीं बची थी कि मैं खड़ी रह सकूँ। मेरे बैठने के बाद मेरी चूत में से वीर्य बाहर आने लगा।
जो अंकल ने मेरी चूत में डाला था।
मेरी चूत भी सूजकर लाल हो चुकी थी। उसे तो लाल होना ही था। अंकल ने इतनी तगड़ी चुदाई जो की थी।

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Aiisa hi uncle ji chahiye
Sach main
Next part plz