मुझे अंकल ने चोदा – 7
Uncle ne meri hardcore chudai ki:- अंकल मेरे ऊपर से उठकर बैठ गए। लंड अभी भी मेरी चूत में ही था। फिर अंकल ने अपने लंड को बहुत ही धीरे-धीरे बाहर निकालना शुरू किया, जिससे मुझे दर्द ज्यादा न हो। उन्होंने लंड की टोपी मेरी चूत में छोड़कर बाकी पूरा लंड बाहर निकाल लिया। लंड बाहर आने से मुझे चूत में बहुत आराम मिला। ऐसा लगा जैसे मेरी चूत अंदर से खाली हो गई हो।
अगर आपने पिछला पार्ट नहीं पढ़ा तो यहाँ पढ़ें ==> मुझे अंकल ने चोदा – 6
Uncle ne meri hardcore chudai ki
लेकिन वो बस थोड़ी देर के लिए ही खाली हुई थी। अंकल ने फिर से अपने लंड को धीरे-धीरे अंदर डालना शुरू किया। मुझे थोड़ा दर्द हुआ, लेकिन उतना नहीं जितना पहले हो रहा था। अंकल ने अपना लंड उतना ही अंदर डाला जितना पहले डाला हुआ था।
अंकल का अभी तक आधा ही लंड मेरी चूत में गया था और मेरी ये हालत थी। जब ये लंड मेरी चूत में पूरा जाएगा तब मेरा क्या होगा? बस यही सोचकर मुझे डर लग रहा था।
अंकल अपने लंड को अब धीरे-धीरे अंदर-बाहर कर रहे थे। बहुत ही स्लोली, जिससे मुझे ज्यादा दर्द न हो।
अंकल: अब ज्यादा दर्द तो नहीं हो रहा?
मैं: नहीं।
अंकल: ठीक है। अगर ज्यादा दर्द हो तो बता देना।
मैं: ओके।
अंकल उसी स्पीड से बहुत देर तक अपने लंड को चूत में अंदर-बाहर करते रहे। शायद वो चूत में लंड की जगह बना रहे थे।
अब मुझे दर्द की जगह मजा आने लगा था और मेरे मुँह से हल्की-हल्की सिसकारियाँ निकलने लगी थीं। अंकल को भी इस बात का एहसास हो गया था कि अब मुझे दर्द की जगह मजा आ रहा है, इसलिए उन्होंने भी अपनी स्पीड थोड़ी बढ़ा दी।
अंकल मेरे ऊपर लेट गए और मुझे किसिंग करने लगे। मैंने भी अपने हाथ उनकी कमर पर लपेट दिए और उन्हें अपनी बाहों में भर लिया। अंकल लंड को भी अंदर-बाहर करते रहे, मीडियम स्पीड से। अब मुझे मजा आ रहा था। मुझे खुद पता नहीं चला कब मेरी सिसकियाँ सिसकारियों में बदल गईं।
अंकल: अब कैसा लग रहा है?
मैं: उम्मम्म… आआआह्ह्ह्ह… अच्छा लग रहा है।
अंकल अपने आधे लंड से ही मेरी नॉर्मल स्पीड में चुदाई करने लगे थे। अब मुझे भी चुदाई में मजा आ रहा था। मैंने अपनी टाँगें भी उठाकर अंकल की कमर पर लपेट दीं। अंकल मेरी गर्दन पर किस कर रहे थे और मैं उनकी गर्दन पर।
पिछले 10 मिनट से अंकल एक ही स्पीड में लंड को चूत में अंदर-बाहर कर रहे थे और अब मैं भी चुदाई का पूरा मजा ले रही थी। मेरे मुँह से अब सिसकारियाँ निकल रही थीं, मजे की सिसकारियाँ।
मैं: आआआह्ह्ह्ह… अंकल ऐसे ही… आआआह्ह्ह्ह… उम्मम्म… मजा आ रहा है।
अंकल: अभी तो और मजा आएगा मेरी जान। अभी तो चुदाई स्टार्ट ही की है।
मैं: आआआह्ह्ह्ह… आआआह्ह्ह्ह… उम्मम्म… और तेज… और तेज अंकल… बहुत मजा आ रहा है।
मैं चुदाई के मजे में पता नहीं क्या-क्या बोले जा रही थी। लेकिन एक बात है, जो मजा अंकल के साथ चुदाई करने में आ रहा था, वो मजा हसबैंड के साथ कभी नहीं आया। शायद इसलिए कि अंकल का लंड मोटा है।
मेरी चूत में अंकल का लंड बिल्कुल फँसकर जा रहा था। मुझे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे मेरी चूत अंकल के लंड के साथ बाहर आती हो और अंदर भी साथ जाती हो।
अंकल ने अब और स्पीड बढ़ा दी थी। मेरी चूत से अब “फच्च-फच्च” की आवाज आने लगी थी।
अंकल: आआआह्ह्ह्ह… मेरी जान कितनी मस्त चूत है तुम्हारी। मजा आ रहा है तुम्हारी चूत को चोदने में।
मैं: आआआह्ह्ह्ह… अंकल, मुझे भी मजा आ रहा है आपके मोटे लंड से।
अब अंकल बैठ गए और मेरी टाँगों को अपने शोल्डर पर रख लिया। शोल्डर पर टाँगें रखकर अपने हाथों से मेरी जाँघों को मजबूती से पकड़ लिया और फिर चुदाई शुरू कर दी।
इस पोजीशन में ये मेरी फर्स्ट चुदाई हो रही थी। अंकल अपने आधे लंड से ही मेरी चुदाई कर रहे थे। मैंने अपने हाथ आगे बढ़ाकर अंकल के हाथ पकड़ लिए। फिर उन्होंने अपनी स्पीड बढ़ा दी। अंकल का लंड मेरी चूत में अब स्पीड से अंदर-बाहर हो रहा था।
मैं: आआआह्ह्ह्ह… आआआह्ह्ह्ह… उम्मम्म… अंकल ऐसे ही चोदिए मुझे… आआआह्ह्ह्ह… मजा आ रहा है।
मैं अपनी आँखें बंद किए हुए इस चुदाई का भरपूर मजा ले रही थी। फिर अंकल ने मेरी जाँघें छोड़ दीं और अपने दोनों हाथ मेरी कमर के लेफ्ट और राइट साइड में रख लिए। अपनी टाँगें सीधी फैला दीं। अंकल के ऐसे सीधे लेटने से मेरी जाँघें मेरे बूब्स से टच हो रही थीं, क्योंकि मेरी टाँगें अभी भी उनके शोल्डर पर ही रखी थीं।
ये मेरा फर्स्ट एक्सपीरियंस था इस पोजीशन में चुदाई करने का। अंकल की पोजीशन मेरे ऊपर ऐसी थी जैसे जिम में पुश-अप करते हैं। मैंने भी अपने दोनों हाथों से अंकल की बाँहें पकड़ लीं।
अब अंकल मेरी अच्छे से ठुकाई कर रहे थे अपने लंड से, लेकिन प्यार से। उनका ऐसा चुदाई करना मुझे बहुत अच्छा लग रहा था और मजा भी बहुत आ रहा था। पहली बार मोटे लंड से जो चुदाई करवा रही थी मैं।
मैं मजे में अंकल से क्या-क्या बोले जा रही थी, ये मुझे भी नहीं पता। बस मैं तो ये सोच रही थी कि समीर ने कभी ऐसे क्यों नहीं चोदा मुझे? अलग-अलग पोजीशन में?
कुछ देर इसी पोजीशन में चुदाई करने के बाद अंकल रुक गए। मैंने आँखें खोलकर देखा कि क्या हुआ? अंकल क्यों रुक गए? शायद वो थक गए थे। फिर अंकल सीधे होकर बैठ गए, रेस्ट करने के लिए। मेरी टाँगें भी उन्होंने नीचे बेड पर रख दीं।
लंड अभी भी मेरी चूत में ही था। उन्होंने मुझे अपनी तरफ ऐसे देखते हुए देखा तो बोले—
अंकल: थक गया हूँ थोड़ा सा। इसलिए रुका हूँ।
मैं कुछ नहीं बोली।
अंकल: मजा तो आ रहा है न तुम्हें?
मैं: हम्मम्म।
अंकल: पहले आया है ऐसा मजा?
मैं: नहीं। (मैं शर्माते हुए बोली)
अंकल: अब आया करेगा।
फिर अंकल मेरे ऊपर लेट गए और मुझे किसिंग करने लगे। पहले गर्दन पर किसिंग की, फिर मेरी चुचियों को पकड़कर उन पर किस करने लगे। नीचे से हल्के-हल्के धक्के मारने लगे। मैं मजे में आकर फिर से आँखें बंद कर ली और अपना एक हाथ अंकल की कमर पर और दूसरा हाथ उनके सर पर रख दिया।
अंकल ने फिर से धक्के मारने की स्पीड बढ़ा दी थी। मैं मजे में उनके सर और कमर को सहलाने लगी थी। अंकल अभी भी मुझे अपने आधे लंड से ही चोद रहे थे। शायद वो मुझे और तकलीफ नहीं देना चाहते थे।
अंकल: मेरी जान, मेरे साथ चुदाई करके मजा तो आ रहा है न तुम्हें?
मैं: हम्मम्म। (मैं मजे में आँखें बंद किए हुए ही बोली)
अंकल: क्या इतना मजा समीर ने भी दिया है तुम्हें जितना मजा मेरे साथ आ रहा है?
मैं: नहीं… आआआह्ह्ह्ह… उम्मम्म…
अंकल: तो मुझसे अब रोज चुदवाया करोगी न?
मैं: हाँ… रोज चुदवाया करूँगी… आआआह्ह्ह्ह… आआआह्ह्ह्ह… उम्मम्म…
अंकल: जब समीर आ जाएगा तब भी?
मैं: हाँ… तब भी… उफ्फफ्फ… आआआह्ह्ह्ह…
अंकल: अगर समीर को पता चल गया तो?
मैं: तो चलने दो पता…
(मैं चुदाई के मजे में पता नहीं क्या-क्या बोले जा रही थी। उस समय तो मुझे बस चुदाई का खुमार चढ़ा हुआ था।)
हमें चुदाई करते हुए कम से कम 30-40 मिनट हो चुके थे, लेकिन अभी तक अंकल एक बार भी नहीं झड़े थे। समीर तो 5-10 मिनट में ही झड़ जाते थे।
मेरा शरीर फिर से अकड़ना शुरू हो गया था। मैं फिर से झड़ने के करीब पहुँच गई थी। मैंने अंकल की जोर से कोली भर ली और अपनी टाँगें भी उनकी कमर पर लपेट दीं।
मैं: आआआह्ह्ह्ह… आआआह्ह्ह्ह… अंकल और जोर से मारिए धक्के… आआआह्ह्ह्ह… मैं झड़ने वाली हूँ… अंकल प्लीज और जोर से चोदिए…
अंकल ने भी पूरे जोर लगाकर धक्के मारने शुरू कर दिए। मैं एक चीख मारते हुए झड़ने लगी।
मैं: आआआआआआआ… अंकल मैं गई… आआआआआआआ… आआआआआआआ… उम्मम्म… उईईईईई… माँ… मैं गई… मैं गई…
मेरे अंदर जितनी ताकत थी, उतनी ताकत से मैंने अंकल की कोली भर ली और झड़ने लगी। झड़ते समय मेरा जिस्म पूरा काँप गया था, क्योंकि मैं तीसरी बार झड़ रही थी।
जब तक मैं पूरी तरह से झड़ नहीं गई, तब तक अंकल मेरी चूत में धक्के मारते रहे। जब मैं झड़कर शांत हो गई तब उन्होंने धक्के मारना बंद किए।
अब मुझमें जरा भी ताकत नहीं बची थी। मेरा जिस्म ऐसे ठंडा हो गया था जैसे कोई मरा हुआ इंसान। अंकल भी थककर मेरे ऊपर ही लेट गए थे।
लेकिन अंकल अभी तक एक बार भी नहीं झड़े थे। आखिर किसी इंसान का स्टैमिना कितना लंबा हो सकता है? मैं बस यही सोच रही थी। समीर तो जल्दी झड़ जाता है। कभी-कभी तो समीर मेरे झड़ने से भी पहले झड़ जाता है। लेकिन अंकल? अंकल तो अभी तक एक भी बार नहीं झड़े। क्या कमाल का स्टैमिना है अंकल का!
मैं अब अंकल के नीचे लेटी हुई यही सब सोच रही थी। इस चुदाई से हम दोनों ही बहुत थक चुके थे। मैं तीसरी बार झड़ने से और अंकल धक्के मार-मार के।
हमारी दोनों की साँसें बहुत तेज-तेज चल रही थीं। ऐसा लग रहा था जैसे हम कहीं बहुत दूर से भागकर आए हों।
अंकल मेरे ऊपर से उठकर साइड में लेट गए और एक हाथ से मेरे बालों को सहलाने लगे। मुझे उनकी ये आदत बहुत अच्छी लगी कि वो झड़ने के बाद मेरी केयर करते हैं।
पर समीर? समीर खुद झड़ने के बाद साइड में होकर ऐसे लेट जाते जैसे उन्होंने पता नहीं कौन सा तीर मार दिया हो। ना तो वो मेरी केयर करते और ना ही ये सोचते कि मैं झड़ी भी हूँ या नहीं।
पर अंकल? समीर से बिल्कुल अलग थे। अंकल मेरी केयर भी कर रहे थे और मेरा पानी भी अच्छे से निकाल रहे थे।
अंकल मेरे बालों को सहलाते हुए बोले—
अंकल: जान, क्या तुम ठीक हो?
मैं: हम्मम्म… ठीक हूँ। (मैं हाँफते हुए बोली)
अंकल: पानी पियोगी?
मैं: हम्मम्म।
फिर अंकल ने मुझे एक गिलास पानी का दिया। मैंने बैठकर पानी पिया। पानी पीने के बाद मैंने अपनी चूत की तरफ देखा तो मेरे होश उड़ गए।
मेरी चूत सूज गई थी। सूजकर ऐसी हो गई थी जैसे मधुमक्खी के काटने से सूज जाती है। फिर मेरी नजर बेडशीट पर गई। बेडशीट को देखकर मुझे बहुत हैरानी हुई, क्योंकि बेडशीट पर खून और मेरी चूत के पानी के दाग लगे हुए थे।
मुझे खून को देखकर ज्यादा हैरानी हुई कि ये खून कहाँ से आया। पर मुझे ये समझते देर नहीं लगी कि ये खून मेरी चूत से आया है, क्योंकि अंकल का इतना मोटा लंड मेरी छोटी सी चूत को जो फाड़ चुका था।
अंकल मुझे ऐसे हैरानी से बेडशीट को देखते हुए बोले—
अंकल: क्या हुआ? ऐसे क्या देख रही हो?
मैं: वो खून… (मैं बस इतना ही बोल पाई)
अंकल: घबराओ मत। थोड़ा बहुत खून तो आना ही था। तुम्हारी चूत टाइट ही इतनी है।
फिर मैं चूत की तरफ इशारा करते हुए बोली—
मैं: और ये भी सूज गई है।
अंकल: टेंशन मत लो। ये भी सुबह तक ठीक हो जाएगी।
मैं फिर कुछ नहीं बोली और उठने की कोशिश करने लगी, क्योंकि मुझे टॉयलेट जाना था। जैसे ही मैं बेड से उठने लगी तो मेरी चूत में दर्द होना स्टार्ट हो गया। मेरे मुँह से एक “आआआह्ह्ह्ह” निकल गई।
अंकल: रुको, मैं ले चलता हूँ तुम्हें।
फिर अंकल बेड से उठकर नीचे आए मेरी साइड पर। अपना एक हाथ मेरी गर्दन के नीचे दिया और दूसरा मेरे घुटनों के नीचे से। उन्होंने मुझे अपनी गोद में उठा लिया। मैंने भी अपने हाथ उनकी गर्दन में डाल दिए।
मुझे वो सीन बड़ा ही रोमांटिक लगा। क्योंकि एक तो हम दोनों बिल्कुल नंगे थे और दूसरा मुझे आज तक ऐसे किसी ने गोद में नहीं उठाया था। समीर ने भी नहीं।
अंकल मुझे गोद में उठाकर टॉयलेट ले गए। वहाँ ले जाकर उन्होंने मुझे गोद से नीचे उतारा और खुद एक साइड में खड़े हो गए।
मुझे शर्म आ रही थी, क्योंकि मुझे सुसु करना था और अंकल वहीं खड़े थे।
मैं: अंकल प्लीज आप बाहर चले जाइए। (मैं शर्माते हुए बोली)
अंकल: क्यों, क्या हुआ?
मैं: मुझे शर्म आ रही है।
अंकल: अरे मेरी जान, अब मुझसे क्या शरमाना? मैं तुम्हारा सब कुछ तो देख चुका हूँ।
मैं: फिर भी अंकल… प्लीज समझिए बात को। (मैंने रिक्वेस्ट करते हुए बोला)
अंकल: ठीक है, ठीक है। जाता हूँ।
अंकल बाहर जाने लगे और मैं टॉयलेट सीट की तरफ। जैसे ही मैंने अपने कदम टॉयलेट सीट की तरफ बढ़ाए तो मेरे मुँह से दर्द भरी सिसकी निकल गई।
अंकल टॉयलेट के गेट तक ही पहुँचे थे। मेरी सिसकी की आवाज सुनकर रुक गए।
अंकल: क्या हुआ? चलने में परेशानी हो रही है क्या?
मैं: हम्मम्म… दर्द हो रहा है। हल्का-हल्का।
अंकल: इसलिए तो नहीं जा रहा था मैं यहाँ से।
फिर अंकल मेरे पास आए और साइड से आकर मुझे पकड़ लिया। अपना सहारा देकर चलने में मेरी हेल्प करने लगे। मुझे टॉयलेट सीट पर बिठाकर अंकल थोड़ा वापस पीछे हटकर खड़े हो गए। बाहर नहीं गए।
मैं सीट पर बैठकर सुसु करने की ट्राई करने लगी, लेकिन सुसु नहीं आ रहा था दर्द की वजह से।
अंकल: क्या हुआ? नहीं आ रहा है क्या पेशाब?
मैं: नहीं… शायद दर्द की वजह से।
अंकल: रुको, मैं अभी आया।
इतना कहकर अंकल रूम में चले गए। (हमारा टॉयलेट बेडरूम में अटैच है)
थोड़ी देर में अंकल वापस टॉयलेट में आए। उनके हाथ में एक स्टील का बर्तन था।
मैं: इसमें क्या है?
अंकल: गरम पानी है।
फिर अंकल ने मुझे सीट पर से खड़ा किया और एक पैर टॉयलेट की सीट पर और दूसरा नीचे रखवाया। इससे मेरी चूत बाहर को आ गई थी। फिर अंकल ने एक कपड़ा लिया और उस कपड़े को गरम पानी में भिगोकर मेरी चूत की हल्के-हल्के से सिकाई करने लगे।
मुझे यूँ अंकल को अपनी केयर करते देख उन पर बहुत प्यार आ रहा था। ऐसे केयर तो समीर ने भी कभी नहीं की थी मेरी।
अंकल का लंड भी अब ढीला हो चुका था। ढीला होकर उनकी जाँघों के बीच में ऐसे लटक रहा था जैसे हाथी की सूंड। पर ढीला होने के बाद भी अंकल का लंड काफी बड़ा था। समीर का तो खड़ा होकर भी इतना बड़ा नहीं होता था।
खैर, अंकल ने मेरी चूत की अच्छे से सिकाई की जिससे मुझे बहुत आराम मिला। फिर अंकल खड़े हो गए और मैं सीट पर बैठकर सुसु करने की फिर से ट्राई करने लगी।
इस बार मेरा सुसु आ गया, लेकिन चूत के अंदर जलन सी करता हुआ। जब मैं सुसु कर रही थी तो मेरी चूत से एक सीटी बजने की आवाज आ रही थी। मुझे उस समय बहुत शर्म आ रही थी, क्योंकि अंकल भी वहीं खड़े थे।
जैसे-तैसे करके मैंने पूरा सुसु किया और अपनी चूत को धोने लगी। चूत धोने के बाद मैं खड़ी होने लगी, पर मुझसे खड़ा हुआ नहीं गया। तो अंकल ने खड़े होने में मेरी हेल्प की।
अब मुझे इतना दर्द नहीं हो रहा था जितना पहले हो रहा था। मैं खड़ी होकर टॉयलेट से बाहर जाने लगी तो अंकल ने रोक लिया।
अंकल: क्या तुम कभी अपने हसबैंड के साथ बाथरूम में नहाई हो?
मैं: नहीं… क्यों? क्या हुआ?
अंकल: मेरे साथ नहाओगी?
मुझे ये सुनकर अजीब लगा। पर फिर सोचा, इतनी देर से हम फोरप्ले और चुदाई कर रहे हैं जिससे हमारी बॉडी गंदी हो चुकी है। तो क्यों न नहा लिया जाए? बस ये सोचकर मैंने हाँ कर दी।
अंकल मेरे मुँह से हाँ सुनकर खुश हो गए। वे मेरे पास आए और मुझे अपनी बाहों में भर लिया। बाहों में भरकर मुझे किसिंग करने लगे। लिप टू लिप।
थोड़ी देर किसिंग करने के बाद अंकल मुझे बाहों में लिए हुए ही शावर के नीचे ले आए और शावर को ऑन कर दिया। शावर का ठंडा-ठंडा पानी हमारे जिस्म को भिगोने लगा।
मुझे ये सब बहुत अच्छा लग रहा था, क्योंकि ये सब मैं पहली बार कर रही थी। वो भी किसी दूसरे इंसान के साथ।
अंकल मुझे अपनी बाहों में लिए हुए शावर के नीचे खड़े हुए थे। कभी अपना मुँह ऊपर करके शावर की ओर देखते, कभी मेरे माथे पर किस करते।
मैं भी अंकल की बाहों में सिमटी हुई खड़ी थी। मैं भी इस मोमेंट को फुल एन्जॉय कर रही थी। मैं बहुत खुश थी। शायद इतना खुश तो मैं अपने हसबैंड के साथ भी नहीं हुई थी।
अंकल: मजा आ रहा है न?
मैं: हाँ… बहुत।
अंकल: तुम खुश तो हो न मेरे साथ ये सब करके?
मैं: हाँ… क्यों? क्या हुआ? आप ऐसे क्यों पूछ रहे हो?
अंकल: कुछ नहीं। बस ऐसे ही पूछा।
फिर अंकल ने मेरा फेस अपने हाथों में लिया और मुझे किसिंग करने लगे।
सच में मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। शावर के नीचे ऐसे खड़े होकर किसिंग करना। मेरे लिए ये सबसे बेस्ट ऑफ बेस्ट मोमेंट था।
किसिंग करते हुए मेरी आँखें बंद हो गई थीं। अंकल कभी मेरे फेस को देखते और कभी मुझे किस करते।
फिर अंकल अपने हाथों को मेरी कमर पर ले गए और मुझे बाहों में भरकर मेरे शोल्डर पर किस करने लगे। मैंने भी अपने हाथ उनकी कमर पर लपेट दिए और उनकी छाती पर किसिंग करने लगी।
अंकल किसिंग करते-करते शोल्डर से मेरे क्लीवेज पर आ गए थे। अब वे मेरे बूब्स के ऊपर वाले हिस्से पर किस कर रहे थे। मैं अपना एक हाथ उनके सर पर रखकर उनके सर को अपने बूब्स पर दबाने लगी थी। मैं फिर से गरम होने लगी थी।
अब अंकल ने एक हाथ से मेरी चुची को पकड़ा और निप्पल को अपने मुँह में लेकर चूसने लगे। मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकलने शुरू हो गईं।
मेरा एक हाथ अंकल के सर पर था और दूसरा हाथ उनकी कमर पर। मैंने अपना सर पीछे की ओर कर लिया। ऐसा करने से मेरे बूब्स बाहर को आ गए थे।
अब अंकल मेरे बूब्स अपने दोनों हाथों में पकड़कर आम की तरह चूसने लगे थे और मैं उनका सर पकड़कर अपने बूब्स पर दबा रही थी।
अंकल: वाह… क्या मस्त चुची है तुम्हारी। जितना भी इनको पीऊँ उतना कम है।
मैं: आआआह्ह्ह्ह… अंकल आप ही के लिए हैं। आराम से पीजिए।
अंकल: आआआह्ह्ह्ह… ये आराम से पीने की चीज नहीं है मेरी जान। इनको तो जितना दबा-दबाकर पियो उतना ही मजा आता है।
मैं: आआआह्ह्ह्ह… आआआह्ह्ह्ह… उम्मम्म… तो आपको किसने रोका है? जैसे आपकी मर्जी हो वैसे पीजिए।
अंकल ने मेरे दोनों बूब्स चूस-चूसकर लाल कर दिए थे। फिर नीचे बैठकर मेरे पेट पर किसिंग करने लगे और अपने हाथों से मेरे कुल्हों को सहलाने लगे।
मैं अंकल के सर पर अपना हाथ रखकर नीचे को दबा रही थी ताकि वे मेरी चूत पर किसिंग करें। पर शायद अंकल अभी चूत पर किसिंग करना नहीं चाहते थे।
ये बड़ा ही रोमांटिक सीन चल रहा था। ऊपर से शावर का ठंडा-ठंडा पानी गिर रहा था और नीचे से अंकल मुझे गरम कर रहे थे।
फिर अंकल ने मुझे घुमा दिया। अब मेरी गाँड अंकल के मुँह की तरफ थी। मैंने अपने हाथ दीवार पर रख दिए, सहारा लेने के लिए।
अब अंकल के दोनों हाथ मेरे कुल्हों पर थे। वे मेरे दोनों कुल्हों को अपने दोनों हाथों से सहलाने लगे और अपना मुँह बीच वाली दरार में रख दिया। वहाँ अपनी जीभ फेरने लगे।
मेरी पूरी बॉडी में एक करंट सा दौड़ गया। अंकल के ऐसा करने से।
फिर अंकल मेरे एक कुल्हे पर अपनी जीभ रखकर उसे चाटने लगे। उफ्फफ्फ… क्या बताऊँ? मुझे कितना मजा आ रहा था उस समय!
ऐसे ही उन्होंने दूसरे कुल्हे को भी चाटा। फिर धीरे-धीरे किसिंग करते हुए ऊपर को आने लगे, मेरी कमर पर।
अंकल का राइट हैंड मेरे कुल्हे पर था और लेफ्ट हैंड मेरे पेट पर। मेरे दोनों हाथ दीवार पर थे और सर ऊपर को जैसे टॉयलेट की छत देख रही हूँ।
अंकल ने मेरी पूरी कमर पर किसिंग की। किसिंग करते-करते ही खड़े हो गए थे मेरे पीछे। कमर पर किसिंग करने की वजह से मेरे जिस्म का रोम-रोम खड़ा हो गया था।
अब अंकल के दोनों हाथ मेरे बूब्स पर थे। पीछे से ही खड़े होकर वे मेरे शोल्डर पर किसिंग करने लगे। अंकल का लंड मेरी गाँड की दरार में था, जिसे वे मेरी गाँड की दरार में डालकर सहला रहे थे।
काश… समीर ने भी कभी मुझे ऐसे प्यार किया होता। पर नहीं किया।
अंकल अब मेरे बूब्स को जोर-जोर से दबाने और मसलने लगे थे। कभी मेरे शोल्डर पर किस करते तो कभी मेरी गर्दन पर। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था अंकल का ऐसा मुझे प्यार करना। मेरे मुँह से कंटीन्यू सिसकारियाँ निकल रही थीं।
मैं: आआआह्ह्ह्ह… आआआह्ह्ह्ह… उम्मम्म… अंकल ऐसे ही…
अंकल: मजा आ रहा है न?
मैं: हम्मम्म… बहुत मजा अंकल। इतना मजा तो मुझे पहले कभी नहीं आया। आप तो मुझे पागल ही कर दोगे… आआआह्ह्ह्ह… आआआह्ह्ह्ह… उम्मम्म…
अंकल: मुझे भी बहुत मजा आ रहा है मेरी जान। तुम्हारे जैसी लड़की मैंने आज तक नहीं चोदी।
मैं: आआआह्ह्ह्ह… अंकल तो किसने रोका है आपको चोदने से? आआआह्ह्ह्ह… चोद डालो मुझे।
मैं अब पूरी गरम हो चुकी थी। दिल चाह रहा था कि अंकल अब मुझे चोद दें।
अंकल: चोदूँगा मेरी जान। पर पहले मेरे लंड को तो चोदने के लिए रेडी करो।
अंकल ने मुझे अपनी तरफ घुमा दिया। अब मेरा फेस और अंकल का फेस आमने-सामने थे। उन्होंने मेरे लिप्स पर किस करने लगे और अपने हाथ से मेरा हाथ पकड़कर अपने लंड पर रख दिया।
मेरा हाथ जैसे ही लंड पर टच हुआ, मैंने अंकल के लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया।
उफ्फफ्फ… कितना मोटा और लंबा लंड है अंकल का! मैंने तो ऐसा लंड मूवीज में या स्टोरी में ही पढ़ा था। लेकिन आज रियल में मेरे सामने था।
मैं अंकल के लंड को अपने हाथ में लेकर सहलाने लगी, जो कि मेरे हाथ में आ भी नहीं रहा था।
फिर अंकल ने अपना एक हाथ मेरे सर के पीछे रखकर मेरे बालों को पकड़ा और मुझे डायरेक्शन करने लगे। उन्होंने मुझे अपनी चेस्ट पर किसिंग करवाने के लिए मेरे मुँह को अपनी चेस्ट पर ले गए।
मैं अंकल की चेस्ट पर किसिंग करने लगी। उनकी चेस्ट पर बहुत घने बाल थे, जो मुझे बहुत अच्छे लगे। (मुझे मर्दों की चेस्ट पर बाल बहुत पसंद हैं।) समीर की चेस्ट पर तो एक भी बाल नहीं है। उनकी चेस्ट तो ऐसी ही जैसे औरतों की चेस्ट।
मुझे अंकल की चेस्ट पर किसिंग करते हुए बहुत अच्छा लग रहा था, क्योंकि पहली बार किसी मर्द की बालों वाली चेस्ट पर किसिंग कर रही थी।
फिर मैं अंकल के निप्पल पर किसिंग करने लगी। उनके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं।
अंकल: आआआह्ह्ह्ह… मेरी जान ऐसे ही किसिंग करो।
फिर मैं अपनी जीभ की नोक अंकल के निप्पल पर फेरने लगी। मेरे ऐसा करने से अंकल बहुत एक्साइटेड हो गए थे। मैंने बारी-बारी से उनके निप्पल चूसे।
फिर अंकल ने मेरे सर को और नीचे किया। अब मेरा मुँह उनके पेट पर आ गया था। मैं घुटनों पर बैठकर उनके पेट पर किसिंग करने लगी। मेरा एक हाथ उनके लंड पर था और दूसरा हाथ उनके हिप्स पर। अंकल का एक हाथ मेरे सर पर था और दूसरा हाथ दीवार पर।
मैंने अंकल के पूरे पेट पर किसिंग की। फिर उन्होंने मेरे मुँह को अपने लंड के ऊपर वाले हिस्से पर रख दिया। मैं भी बहुत एक्साइटेड थी। मैंने भी लंड पर किसिंग करना शुरू कर दी। अपनी जीभ निकालकर कभी लंड के ऊपर फेरती तो कभी अपने होंठों में लेकर चूसती।
फिर अंकल थोड़ा सा पीछे को हुए, जिससे उनकी लंड की टोपी ठीक मेरे मुँह के सामने आ गई। मैंने एक बार अपना मुँह ऊपर उठाकर अंकल के मुँह की तरफ देखा। अंकल भी मुझे ही देख रहे थे।
अंकल ने मेरे सर को छोड़कर अपने हाथ से लंड को पकड़ लिया और अपनी लंड की टोपी को मेरे लिप्स पर फेरने लगे। फिर मेरे गालों पर। उन्होंने अपने लंड को मेरे पूरे मुँह पर फेरा। फिर लंड को मेरे गालों पर ऐसे मारने लगे जैसे कोई डंडा मार रहे हों।
अंकल अपने लंड को कभी मेरे गालों पर मारते, कभी लिप्स पर तो कभी मेरे माथे पर।
फिर उन्होंने मुझे मेरे शोल्डर से पकड़कर थोड़ा ऊपर को उठाया, जिससे उनका लंड मेरे बूब्स पर टच होने लगा। फिर उन्होंने वही किया जो मेरे मुँह पर कर रहे थे। अपने लंड को पकड़कर मेरे बूब्स पर मारने लगे। उनका लंड जब मेरे बूब्स पर आकर लगता तो मुझे ऐसा लगता जैसे कोई डंडे से मार रहा हो। क्योंकि अंकल का लंड एक तो बहुत मोटा और लंबा था और दूसरा बहुत हार्ड भी।
फिर अंकल ने मेरे दोनों बूब्स अपने हाथ में पकड़े और लंड को मेरे बूब्स की बीच की दरार में रख दिया। मेरे दोनों बूब्स को लंड पर दबा दिया। फिर अपनी कमर को आगे-पीछे हिलाने लगे, जिससे उनका लंड मेरे बूब्स की दरार में आगे-पीछे होने लगा।
मैंने भी अपने हाथ अपने बूब्स के ऊपर अंकल के हाथों पर रख दिए। अंकल नीचे की तरफ ही देख रहे थे। मैं भी कभी अंकल के मुँह की तरफ देखती तो कभी बूब्स की।
फिर अंकल ने मेरे बूब्स पर से अपने हाथ हटा लिए और दीवार पर रख दिए। अब मेरे बूब्स मेरे हाथों में थे। अंकल ने अपनी कमर हिलानी बंद कर दी और मुझसे बोले—
अंकल: अब तुम करो।
फिर मैं अपने बूब्स को लंड पर जोर से दबाकर अपने बूब्स को लंड पर ऊपर-नीचे करने लगी। अंकल को बहुत मजा आ रहा था। तभी तो वे अपनी आँखें बंद किए हुए एन्जॉय कर रहे थे।





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