एक जवान प्यासी बीवी 2
Shadi ke baad suhagraat me seel tuti kahani:- कार के घर पर पहुँचते ही सब लोगों ने उन्हें घेर लिया। अतुल और सुप्रिया कार से उतरे और घर के दरवाज़े पर अतुल की मम्मी सरिता ने उनकी आरती की। उन्होंने सुप्रिया को चावलों से भरे एक-एक कलश को अपने दाएँ पैर से गिराने के लिए कहा और फिर सुप्रिया लाल रंग के पानी में पैर रखकर घर में प्रवेश हुई।
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Shadi ke baad suhagraat me seel tuti kahani
अतुल का घर सुप्रिया के घर से काफ़ी बड़ा था, और अभी काफ़ी सारे रिश्तेदार भी थे। अतुल के कज़न्स सुप्रिया के आसपास घूम रहे थे। सभी नई भाभी से मिलना चाहते थे। सुप्रिया सबके बीच में थोड़ी घबराई हुई थी पर उसने हिम्मत करके सारी रस्में धीरे-धीरे पूरी कीं।
पहले अतुल और सुप्रिया को घर के मंदिर ले जाकर उनसे पूजा करवाई गई। उसके बाद घर की सारी लेडीज़ मुँह दिखाई के लिए एक साथ बैठ गईं। साथ में गीत और ढोल भी चल रहे थे। अतुल की ताईजी, चाची, मौसी और मामी ने एक-एक करके सुप्रिया की मुँह दिखाई की रस्म की और उसे गिफ़्ट्स और ज्वेलरी दी। सभी ने सुप्रिया को देखकर यही कहा कि बहू तो बहुत ही ज़्यादा सुंदर है और अतुल की तो क़िस्मत ही खुल गई।
फिर उसके बाद, सुप्रिया और अतुल को साथ बिठाकर कुछ खेल जैसी रस्में करवाई गईं। पहले कंगना खुलाई की रस्म हुई।
अर्पिता: आप दोनों को इस कंगना पर बंधे कपड़े को खोलना है। भाई आप सिर्फ़ एक हाथ ही यूज़ कर सकते हो। सुप्रिया आप दोनों हाथ यूज़ कर सकती हो।
सुप्रिया ने हल्के से मुस्कुरा के कहा:
सुप्रिया: दीदी मैं भी एक हाथ से खोल लूँगी।
अर्पिता: ओह होоо। भाई इसे कहते हैं कॉन्फ़िडेंस। तू नहीं जीतने वाला सुप्रिया से।
ये सुनते ही सुप्रिया की स्माइल और बड़ी हो गई। गाँठ काफ़ी टाइट थी और अतुल से एक हाथ से नहीं खुल रही थी। फिर सुप्रिया ने ट्राई किया और उसने एक हाथ से ही गाँठ खोल दी। सभी लोग जैसे सुप्रिया की साइड हो गए थे।
उसके बाद एक थाल में चावल के पानी और फूल के साथ एक अँगूठी रखी गई। उन दोनों के पास 3 मौक़े थे अँगूठी निकालने के। जिसने ज़्यादा बार निकाल दी वही जीतेगा। सुप्रिया ने तीनों बार फटाफट से अँगूठी को उठा लिया और खुश हो गई।
अर्पिता: भाई अब तो कन्फ़र्म हो गया। सुप्रिया की ही चलने वाली तुम दोनों में।
इस तरह से काफ़ी सारा हँसी-मज़ाक़ चलता रहा और उन दोनों को खाना भी खिलाया गया। रात होने पर, अर्पिता सुप्रिया को ऊपर के फ़्लोर में एक रूम में ले गई। रूम काफ़ी ज़्यादा सजा हुआ था और बीच में एक बेड था जिस पर फूलों से एक दिल बना हुआ था। सुप्रिया समझ गई कि यही उसका सुहागरात का रूम होगा। अभी रूम में घर की काफ़ी सारी लेडीज़ थीं और बच्चे भी खेल रहे थे। लेडीज़ आपस में और सुप्रिया से सुहागरात की बातें करने लगीं।
ताईजी: सुप्रिया तुम थक तो काफ़ी गई होंगी पर आज रात सोने को नहीं मिलेगा। अभी तो रात भर की कुश्ती बाक़ी है।
चाची: इसे देखकर तो नहीं लगता कि इसे नींद आ रही है। ये भी वेट ही कर रही है कि कब अतुल आए और हम लोग बाहर जाएँ।
ताईजी: नहीं, देखो कितना घबरा रही है। अब हर कोई तुम्हारी तरह बेशर्म नहीं होता ना। तुम लोगों की तो अपनी सुहागरात में इतनी ज़ोर-ज़ोर आवाज़ें की थीं कि पूरा घर नहीं सो पाया था।
चाची: अब उसमें मेरी क्या गलती थी। आपके देवर ही पागल हो गए थे।
ताईजी: रहने दो, तुम भी कम नहीं थीं। अर्पिता तू भी तो बता अपनी। विनीत जी भी कम नहीं हैं हमें पता है।
अर्पिता (थोड़ा शरमाते हुए): हाँ हम लोगों भी ज़्यादा सो नहीं पाए थे। विनीत को रोकना तो एक मुश्किल काम ही है। कम से कम तीन बार तो किया था हमने।
ताईजी: काफ़ी लकी हो तुम जो तुम्हें विनीत जैसा पति मिला है। और अब अतुल को सुप्रिया जैसी बीवी मिल गई। दोनों ही बहुत लकी हो।
चाची: हाँ भाई अतुल तो घर का सबसे सीधा लड़का है। सुप्रिया कहीं उसका तो तुम्हें छूते ही ना निकल…
अर्पिता (थोड़े गुस्से में): चाची आप भी ना… कुछ भी बोलते हो। सुप्रिया डरो मत, आपके जीजू सब समझा देंगे भाई को।
थोड़ी देर तक ये हँसी-मज़ाक़ चला और फिर अतुल को लेकर उसके जीजाजी रूम में आ गए। अतुल के कज़न्स रूम से निकलने को तैयार ही नहीं थे। उन सबकी डिमांड थी कि भाई से जब तक एक बड़ा सा गिफ़्ट नहीं मिलेगा वो लोग बाहर नहीं जाएँगे। किसी तरह से अर्पिता ने उन सबको मनाया और 10,001 देकर रूम से बाहर किया।
जाते-जाते, वो सुप्रिया के कान में बोली:
अर्पिता: सुप्रिया वहाँ बेड के साइड पर दूध का ग्लास रखा है, भाई को पिला देना। और ड्रॉअर में वैसलीन भी रखी है अगर कोई प्रॉब्लम हो तो। ऑल द बेस्ट!
और फिर उसने कमरे के दरवाज़े बंद कर दिए और बाहर से कुंडी लगा दी। अब रूम में सिर्फ़ सुप्रिया और अतुल अकेले रह गए थे।
कमरा बंद होने के बाद अतुल ने भी अंदर से कुंडी लगा दी। सुप्रिया बेड के एक कोने पर बैठी हुई थी और उसकी आँखें नीचे देख रही थीं। अतुल ने डिज़ाइन वाला कुर्ता-पायजामा पहने हुए था, जबकि सुप्रिया साड़ी और ज्वेलरी पहने हुए थी।
अतुल: हाई सुप्रिया…
सुप्रिया (सॉफ्टली): हाई…
अतुल: चलो फ़ाइनली ये लोग कमरे से निकले। कितना लंबा रहा ना ये दिन।
सुप्रिया: हम्म। हाँ।
अतुल: तुम काफ़ी थक गई होंगी, मैं हेल्प कर दूँ ज्वेलरी और बाक़ी सब उतारने में?
सुप्रिया ने मन ही मन सोचा कि ज़्यादा ही जल्दी है इसे तो सब उतारने की, पहले एक-दूसरे को जान तो ले।
अतुल: मेरा मतलब था थोड़ा हल्का फ़ील करोगी और आराम से बैठ पाएँगे।
सुप्रिया ने अतुल को देखकर सिर हाँ में हिला दिया और अपनी ज्वेलरी उतारने लगी। जब उससे गले का हार पीछे से नहीं खुला तो उसने अतुल की ओर देखा। अतुल अभी तक दरवाज़े के पास ही खड़ा था, और वो सुप्रिया का इशारा समझ नहीं पाया।
सुप्रिया को बोलना पड़ा:
सुप्रिया: अतुल सुनो। ये नेकलेस नहीं खुल रहा, हेल्प कर दोगे प्लीज़।
सुप्रिया ने शादी से पहले ही अतुल से ये मनवा लिया था कि वो उसे नाम से ही बुलाएगी। अजी या सुनो उसके लिए काफ़ी ओल्ड फ़ैशन्ड था। वैसे अतुल उससे 5 साल बड़ा था, सुप्रिया अभी कुछ ही महीनों पहले 23 की हुई थी और अतुल 28 का। पर अतुल को भी इससे कोई प्रॉब्लम नहीं थी।
अतुल जल्दी से पलंग पर सुप्रिया के पीछे बैठ गया और पीछे से नेकलेस खोलने लगा। उसे पीछे से सुप्रिया की गोरी पीठ दिख रही थी जो काफ़ी चिकनी और सॉफ़्ट लग रही थी जैसे उस पर कोई भी बाल ही ना हो। नेकलेस खोलते हुए अतुल की ठंडी उँगलियाँ सुप्रिया के गले पर लगीं और सुप्रिया का पूरा शरीर जैसे काँप ही उठा। नेकलेस खुलते ही अतुल ने अपने हाथ पीछे कर लिए।
सुप्रिया: थैंक यू, अब मेरे बालों के पिन भी हटा दोगे प्लीज़?
अतुल: हाँ बिल्कुल।
अतुल एक-एक करके सुप्रिया के बालों के पिन हटाने लगा। पिन हटाते-हटाते उसने गिनती खो दी थी कि कितने पिन थे। कुछ पिन खुलते ही सुप्रिया के बाल उसकी पीठ और चेहरे पर गिरने लगे। सुप्रिया के बाल उसके कंधों से थोड़ा नीचे उसके ब्लाउज़ के बीच तक आ रहे थे। अतुल उसके बालों को छूकर फ़ील कर पा रहा था कि उसके बाल काफ़ी ज़्यादा ही सिल्की और सॉफ़्ट थे। अतुल को यक़ीन नहीं हो रहा था कि ये सब अब उसका था।
अतुल ने पिन निकालकर साइड में रख दिए। सुप्रिया को अब काफ़ी बेहतर महसूस हो रहा था। उसने अपने हाथों से भारी कंगन भी निकाल दिए और माँग टीका भी उतारके साइड में रख दिया। सारी ज्वेलरी उतारने के बाद सुप्रिया बेड पर ऊपर सरक कर बैठ गई और उसके ठीक सामने अतुल बैठा था।
अतुल उसे ग़ौर से देख रहा था। उसे पहली बार मौक़ा मिला था सुप्रिया को फ़ोटो के बाहर इतनी पास से देखने का। सुप्रिया का फ़ेस काफ़ी क्यूट था और उसके भरे हुए गाल जैसे कोई भी पकड़कर खींचना चाहे। सुप्रिया वैसे तो पतली थी पर उसका शरीर सही जगह से भरा हुआ था। तभी तो शायद उसकी भाभी उसे गोलू बुलाती थी।
सुप्रिया अतुल को घूरते हुए देखा तो वो पूछ बैठी:
सुप्रिया: क्या हुआ, क्या देख रहे हो?
अतुल: कुछ नहीं, ऐसे ही। यक़ीन ही नहीं होता कि हम अब पति-पत्नी हैं।
सुप्रिया को समझ नहीं आया वो क्या बोले:
सुप्रिया: मुझे भी यक़ीन नहीं हो रहा कि मेरी शादी हो गई है। सॉरी मतलब हमारी शादी हो गई।
अतुल ने थोड़ी हिम्मत करके बोला:
अतुल: तुम्हें पता है ना शादी के बाद पति-पत्नी क्या करते हैं। यानी कि हमें आज रात क्या करना है।
सुप्रिया के गाल एकदम लाल हो गए और वो भोली बनते हुए बोली:
सुप्रिया: नहीं मुझे तो नहीं पता।
अतुल: झूठ मत बोलो। तुम्हें तुम्हारी भाभी ने बताया तो सब होगा।
सुप्रिया ने उसे घूरकर देखा और बोली:
सुप्रिया: आप मुझे पहले ही दिन झूठी बोल रहे हो?
अतुल हड़बड़ा सा गया:
अतुल: नहीं, मेरा वो मतलब नहीं था। मैं तो बस कह रहा था…
सुप्रिया उसको हड़बड़ा देखकर हँस पड़ी:
सुप्रिया: इट्स ओके, मज़ाक कर रही थी। आपको भी सब पता ही होगा। वैसे आपकी दीदी आपके लिए ये दूध का ग्लास देकर गई थी।
ये बोलते ही सुप्रिया को लगा कि ये नहीं बोलना चाहिए था। क्या ये सोचेगा कि मैं इसको दूध पीने का बोलकर इनवाइट कर रही हूँ सब करने के लिए।
सुप्रिया: मतलब, आपका मन है तो पी लो नहीं तो ठीक है।
अतुल ने सोचा कि मन तो बहुत है मेरा, और वेट भी इतना किया है मैंने। अतुल ने ग्लास उठाते हुए बोला:
अतुल: हाँ मैं पी लेता हूँ।
एक-दो घूँट पीने के बाद उसे याद आया कि उसे सुप्रिया से भी पूछ लेना चाहिए:
अतुल: तुम पीओगी क्या?
सुप्रिया: नहीं नहीं, आप पीजिए।
अतुल ने जल्दी से दूध ख़त्म किया और फिर सुप्रिया की ओर देखने लगा। उसने कभी सेक्स नहीं किया था तो उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो कैसे शुरू करे सब। पर बाहर बैठे सभी लोगों की शायद यही उम्मीद थी उससे कि वो आज रात सब कर लेगा। और वो ख़ुद भी चाहता था कि वो सुप्रिया के साथ आज रात सब कर ले।
सुप्रिया: हम लोग आज रात बस बातें भी कर सकते हैं।
अतुल: हाँ क्यों नहीं।
अतुल आकर सुप्रिया के बराबर में बैठ गया और उसकी बातें सुनने लगा। ज़रा सी देर में सुप्रिया तो जैसे बोलना ही शुरू हो गई, और वो उसे शादी की बातें बताने लगी। हिम्मत करके अतुल ने सुप्रिया का हाथ अपने हाथ में ले लिया और उसे आराम-आराम से मसलने लगा। उसका हाथ था ही इतना मुलायम कि अतुल उसे छोड़ ही नहीं पा रहा था। पर सुप्रिया की कहानियाँ तो ख़त्म ही नहीं हो रही थीं। थोड़ी देर के बाद बोलते-बोलते सुप्रिया को भी उबासी आने लगी और उसकी आँखें भी काफ़ी भारी हो चुकी थीं। काफ़ी ठंड थी, तो अतुल ने खड़े होकर बेड पर एक रज़ाई बिछा दी और फिर लाइट ऑफ़ कर दी।
लाइट बंद करने के बाद भी कमरे में बाहर की रोशनी आ रही थी। लाइट बंद करके अतुल भी रज़ाई में आकर लेटा, और उसके पैर सुप्रिया के पैरों से टकराए। पैर टकराते ही सुप्रिया तो जैसे नींद से जाग ही गई। अँधेरे में अतुल का थोड़ा कॉन्फ़िडेंस बढ़ा और उसने अपने पैरों के नीचे सुप्रिया के पैर दबा लिए। शायद दूध में जो भी मिला हुआ था वो भी अब काम करने लगा था। वो धीरे-धीरे सुप्रिया के और पास आ गया और उसे पीछे से पकड़ लिया। उसने सुप्रिया के गालों को हल्के से किस किया और उसे अपनी ओर खींचा। फिर उसने अपनी एक टाँग सुप्रिया की टाँग पर रखते हुए उसे अपने नीचे कर लिया। ये सब इतनी जल्दी हो गया था कि सुप्रिया को कुछ सोचने का मौक़ा ही नहीं मिला। पर उसकी नींद अब पूरी तरह से उड़ चुकी थी।
गालों को चूमते-चूमते, अतुल ने उसके होठों का चूमना शुरू किया और अपना हाथ सुप्रिया के पेट पर घुमाने लगा। सुप्रिया का पूरा शरीर इतना सॉफ़्ट था कि अतुल और एक्साइटेड हो रहा था। सुप्रिया ने किस करते हुए अपनी आँखें बंद कर लीं और वो भी अतुल को हल्के-हल्के किस कर रही थी।
अतुल को सुप्रिया के शरीर की ख़ुशबू और स्पर्श ने पागल सा कर दिया था। उसने सुप्रिया को हल्का सा उठाया और उसकी साड़ी को खींचकर उतार फेंका। उसके बाद वो फिर से सुप्रिया के ऊपर आ गया और उसके गालों और होठों को और भी ज़्यादा ज़ोर से किस करने लगा। सुप्रिया ने अपने एक हाथ से ज़ोर से बेड की चादर को पकड़ लिया।
अतुल: सुप्रिया… आाह्हह… कितने सॉफ़्ट हैं तुम्हारे होठ।
अतुल के लगातार किस से सुप्रिया के होठ तो जैसे सिल ही गए थे और वो धीरे-धीरे सिसकियाँ ले रही थी।
किस करते हुए अतुल के हाथ सुप्रिया के पूरे शरीर पर घूम रहे थे। अतुल ने उसका ब्लाउज़ और पेटीकोट भी खोल दिया और अब वो सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में थी। सुप्रिया अतुल के नीचे थी और अतुल उसके गले और ब्रा के ऊपर चूम रहा था। अतुल ने फटाफट से अपना कुर्ता-पायजामा भी उतारा और सुप्रिया को अपनी बाँहों में भर लिया। अतुल इतना एक्साइटेड हो चुका था कि उसे समझ आ गया कि उसे जल्दी-जल्दी सब कर देना चाहिए, इससे पहले उसका वीर्य अंडरवियर में निकल जाए।
उसने सुप्रिया की पैंटी को खींचकर नीचे उतारा और अपना अंडरवियर भी उतार दिया। दोनों नीचे से अब बिल्कुल नंगे होकर एक-दूसरे से लिपटे हुए थे। सुप्रिया की दिल की धड़कन बढ़ी हुई थी और उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि अभी तक शांत अतुल ने एकदम से कैसे इतनी जल्दी उसके सारे कपड़े उतार दिए थे।
अतुल ने सुप्रिया की टाँगों को फैलाया और अपने लंड से योनि का द्वार खोजने लगा। उसे अँधेरे में समझ नहीं आ रहा था कि वो कहाँ अपना लंड डाले। सुप्रिया को उसका लंड नीचे टकराता हुआ महसूस हुआ। वैसे तो काफ़ी ठंड थी, पर उसके पसीने निकले हुए थे। भाभी ने उसे समझाया था कि कई बार लड़कों को चूत का छेद नहीं मिलता, तो उनकी हेल्प कर देनी चाहिए। हेल्प करना ग़लत छेद में डालने से तो बेहतर ही है। सुप्रिया ने नीचे हाथ करके उसके लंड को सही दिशा दी। लंड पकड़ने पर उसे लगा कि अतुल का लंड ज़्यादा बड़ा या मोटा नहीं है। शायद उसकी हथेली से थोड़ा सा लंबा।
अतुल का लंड चूत के बाहर टकरा रहा था और अंदर जाने की कोशिश कर रहा था। सुप्रिया सिसकियाँ ले रही थी और उसने अतुल के हाथ कसके पकड़े हुए थे। अतुल ने ज़ोर लगाकर सुप्रिया की चूत में अपना लंड थोड़ा सा घुसा दिया। लंड अंदर जाते ही सुप्रिया की ज़ोर सी चीख निकल गई और उसे लगा कि उसकी चूत में से कुछ बह रहा है। भाभी ने उसे बताया था कि पहली बार करने पर खून निकलता है तो वो थोड़ी डर सी गई और उसके आँसू निकलने लगे।
अँधेरे में अतुल सुप्रिया की हालत समझ नहीं पाया और उसने अपना लंड पूरी तरह से अंदर डाल दिया और उसके हाथों को कसके पकड़कर वो उसके अंदर धक्के मारने लगा। सुप्रिया को दर्द हो रहा था और उसकी हालत ख़राब थी और उसने अपनी टाँगों को हवा में उठाया और अतुल से लिपट गई। कुछ ही झटकों के बाद अतुल ने एक ज़ोर का धक्का मारा और सुप्रिया को कसकर पकड़कर उसके ऊपर लेट गया। सुप्रिया को अपनी चूत के अंदर कुछ गीला सा महसूस हुआ, शायद अतुल झड़ गया था। अतुल के धक्के धीरे होते गए और फिर उसने अपना लंड उसकी चूत से निकाल दिया और बेड पर साइड में लेट गया। धीरे-धीरे उन दोनों की तेज़ साँसें नॉर्मल हुईं।
सुप्रिया को लगा कि क्या बस इतना ही था? उसका तो अभी तक कुछ भी नहीं हुआ था और उसे तो अभी शायद ये सब थोड़ा अच्छा लगना शुरू हुआ था। अतुल उठकर बाथरूम गया और अपने लंड पे लगे खून को देखकर थोड़ा घबरा सा गया पर उसे भी उसके जीजू ने समझाया था कि ये नॉर्मल है, बल्कि अच्छा है क्योंकि इससे ये पता चलता है कि सुप्रिया ने इससे पहले किसी मर्द के साथ सेक्स नहीं किया था। अतुल ने अपने आप को साफ़ किया और कपड़े पहनकर बाहर आया।
अतुल के बाहर आने पर, सुप्रिया भी अपने कपड़े समेटकर बाथरूम में गई और अपने आप को साफ़ करके और कपड़े पहनकर बाहर आई। उसे नीचे थोड़ा दर्द हो रहा था। तब तक अतुल ने बेड की चादर चेंज कर दी और फिरसे कम्बल बिछाकर उसमें लेट गया। सुप्रिया भी बाहर आकर बेड पर अतुल के बराबर में लेट गई।
अतुल मन में काफ़ी खुश था कि उसने सुप्रिया की सील तोड़ दी। वहीं सुप्रिया को समझ नहीं आया कि सब इतनी जल्दी कैसे ख़त्म हो गया। शायद अभी थोड़ा बाद में और करे, उसने सोचा।
अतुल ने सुप्रिया का हाथ पकड़ते हुए कहा:
अतुल: सुप्रिया अब हम दोनों एक हो गए हैं। आई होप तुम्हें अच्छा लगा होगा ये सब।
सुप्रिया उसकी ओर देखकर हल्के से मुस्कुराई और अपना चेहरा उसके सीने में छुपा लिया।
अतुल ने सुप्रिया को अपनी बाँहों में भर लिया और जल्द ही वो दोनों ऐसे ही सो गए।
