बेटे की अजीब ख्वाहिश 3
Maa beta mast kamuk sex story hindi:- सोनू की अब कॉलेज की छुट्टियाँ जो दो महीने की थीं गुज़रती जा रही थीं और अब वो भी अपनी माँ के आकर्षण में हर रोज़ डूबता ही जा रहा था। रोज़ रात को वो अपने लैपटॉप पर आकर इनसेस्ट के बारे में नेट पर पढ़ता, रिसर्च करता और फिर जो अपनी मम्मी की पिक्स उसने मार्केट में खींची थीं उसको देख उत्तेजित होता। यहाँ मैं बताऊँ कि सोनू को दूसरे लड़कों की तरह मास्टरबेशन की आदत नहीं थी। पर इसलिए भी शायद उसके अंदर की उत्तेजना बढ़ती ही जा रही थी जैसे कि उसके शरीर के अंदर एक लावा सा बन रहा हो।
पिछला पार्ट यहाँ पढ़ें ==> बेटे की अजीब ख्वाहिश 2
Maa beta mast kamuk sex story hindi
उधर अभिनव भी अपनी दुनिया में था और राज भी। राज की तो अब मम्मी भी गाँव से वापस आ गई थीं और वो भी अब अभिनव और सोनू की तरह ही अपनी मम्मी को जब भी मौका मिले घूरने लगता था। उसने तो गाँव में उसकी मम्मी को एक बार नहाते समय बिना ब्लाउज़ के भी देख लिया था तो वो घर पर भी ऐसा मौका मिल जाए भगवान बस यही प्रार्थना करता रहता था। कॉलेज की छुट्टियाँ खत्म अब हो गईं पर सोनू की ज़िंदगी में एक नया अध्याय शायद अब शुरू होने वाला था।
दिन बीत रहे थे और अब रोज़ कॉलेज जाते समय सोनू, अभिनव और राज का डिस्कशन अब इनसेस्ट पर ही होता था। सोनू भी जब भी घर पर होता तो उसकी मम्मी पूनम देवी को ही घूरता रहता। पर सेक्स की अभी तक भावना सोनू के दिमाग में नहीं आई थी जैसे कि अभिनव के दिमाग में थी उसकी माँ के लिए और जैसे राज को उसकी अपनी माँ के लिए। शायद सोनू बस ऐसे ही देखकर, स्टोरीज़ पढ़के, वीडियोज देखके ही अपनी फैंटेसी पूरी करना चाहता था।
इससे कुछ आगे बढ़ने का उसने नहीं सोचा था। उसकी माँ का क्लीवेज भी नहीं देख पाता था वो क्योंकि साड़ी से ढका हुआ रहता था। पर सोनू एक बात में तो एक्सपर्ट हो रहा था। वो नेट पर इनसेस्ट के बारे में रिसर्च, इनसेस्ट की शुरुआत कैसे हुई, कौनसे-कौनसे देश में इनसेस्ट है लीगल और सब हिस्ट्री को डिटेल में पढ़ रहा था नेट पर रेगुलरली। कॉलेज शुरू होकर अब डेढ़ महीना बीत चुका था।
फिर कुछ दिन संडे के दिन सोनू उसके दोस्तों के साथ पार्क में जाके मिला और बातें करने लगे वो लोग।
अभिनव: सोनू क्या चल रहा तू भी पढ़ रहा क्या इनसेस्ट की कहानियाँ और वीडियोज देख रहा क्या.. ये राज तो देख एक्सपर्ट हो गया है रोज़ जाके घर यही करता है..हाहा।
राज: अरे चुप। सब तुझसे ही इंस्पिरेशन ली हैं मैंने। हाँ अब तो रोज़ पढ़ता हूँ देखता हूँ और मम्मी को भी घूरता हूँ पर कुछ मौका नहीं मिल रहा है उस गाँव में जैसे दृश्य दिखा था।
सोनू: अरे मैं तो कभी-कभी ही पढ़ता हूँ पर हाँ इनसेस्ट की हिस्ट्री के बारे में और पुराने ज़माने में भी इनसेस्ट थी यह सब डिटेल में पढ़ रहा हूँ।
अभिनव: ओह अच्छा बता दो ज़रा फिर हमको भी पुराने ज़माने में मतलब वो राजा-महाराजा के युग में भी माँ-बेटे का इनसेस्ट होता था क्या?
सोनू: यार इंडिया का तो पता नहीं है पर हाँ ग्रीस में होता था मैंने पढ़ा है कि कुछ-कुछ युवराज तो खुद के पिताजी से ही बगावत करके जंग जब जीत जाते और पूरे राज्य पर कब्ज़ा कर लेते थे। तो फिर उनकी माँ पर भी कब्ज़ा होता था। पर अब इससे ज़्यादा तो नहीं लिखा था कि आगे क्या होता था।
राज: ओह कब्ज़ा मतलब वो खुद बेटा क्या अपनी माँ से शादी करके क्या सेक्स करता होगा।
सोनू: अरे ऐसा हो सकता क्या..मुझे नहीं लगता यार कि कोई भी माँ ऐसा करने को तैयार होगी। आख़िर सगे बेटे से कैसे वो तैयार होगी।
अभिनव: हाँ तैयार तो नहीं होगी रे सोनू पर ये पुराने राजा-महाराजा लोग भी बहुत थरकी थे। पता नहीं क्या-क्या तरीके अपनाते होंगे..उनके पास तो समय ही समय था..हमारे तरह ना कॉलेज होता था..ना पढ़ाई ना कुछ..बस यही सब सोचते होंगे…हाहा।
अभिनव: वैसे मैं तो चाहता हूँ कि हमारे यहाँ भी इनसेस्ट मूवीज़ बननी चाहिए और थिएटर में रिलीज़ होनी चाहिए मज़ा आएगा..हाहा सब लोगों को शराफ़त पता चल जाएगी।
राज: हाहा सही बोला..सब आजकल इंटरनेट पर सब कुछ देखते हैं। पढ़ते हैं पर ऊपर से बड़े भोले और शरीफ़ बनते हैं।
सोनू: नहीं यार हमारे यहाँ नहीं बनेंगे और यहाँ पर इनसेस्ट रियल में हो भी नहीं सकता मेरे हिसाब से क्योंकि इंडियन मॉम्स बहुत ट्रेडिशनल होती हैं और वो इसको कभी एनकरेज नहीं करेंगी।
अभिनव: हाँ वो तो सही है। पर सेक्स की कौन बात कर रहा है। मैं भी जानता हूँ सेक्स करना तो शायद इंपॉसिबल है इनसेस्ट में यहाँ पर आजकल तो बहुत सारे दूसरे शौक भी आ गए हैं ना।
इतने में उधर सोनू को फोन आया घर से। उसके मम्मी और दादी कहीं रिलेटिव्स के पास जाने वाले थे। पिताजी भी बाहर गए थे काम से तो उसकी मम्मी ने बुलाया घर आ जाओ जल्दी वरना घर पर कुंजी नहीं होगा। सोनू इसलिए वहाँ से दोस्तों को बाय बोलके जल्दी-जल्दी घर की ओर चला गया।
पूनम देवी: अरे सोनू बेटा आ गया तू अच्छा हुआ। हम लोग वो चाची जी के यहाँ जाके आएँगे ठीक है तू घर पर ही रहना।
सोनू: जी मम्मी मैं रहूँगा घर पर ही आप लोग जाकर आइए आराम से।
दादी: हाँ वो चाची के तेरे भाई की शादी होने वाली है सोनू बेटा तो लड़की देखने जा रहे।
सोनू: अच्छा दादी..आप लोग जाके आइए आराम से फिर..
सोनू की मम्मी और दादी अब निकलके ऑटो में बैठने लगे।
सोनू की मम्मी ने आज लाल रंग की साड़ी और उसी रंग का ही ब्लाउज़ पहना था और गले में एक छोटी सी चेन भी पहनी थी और बेहद ख़ूबसूरत लग रही थीं। सोनू तो जैसे बस देखता ही रह गया जब तक उसकी मम्मी ऑटो के अंदर तक बैठ न जाए। ऑटो उसकी नज़रों से जब तक पूरा दूर न हुआ..सोनू की नज़रें ऑटो पर ही थीं..पर मन उसका ऑटो के अंदर बैठी हुई उसकी सुंदर मम्मी पर।
अब सोनू घर पर अकेला था और वो दरवाज़े को लॉक करके अपने रूम की ओर जाने लगा। पर अचानक उसकी नज़र उसके मॉम-डैड के बेडरूम की ओर गई तो ना जाने क्यों उसके क़दम बिना रुके ही उस ओर चल दिए। वहाँ पर बेड पर ही उसकी मम्मी की अभी-अभी उतारी हुई पुरानी ब्लाउज़ साड़ी पेटीकोट पड़ा था जो शायद माँ फिर से घर वापस आके पहनने वाली थीं।
सोनू धीरे से उन कपड़ों के पास गया। उसने काँपते हुए हाथों से अपनी माँ का ब्लाउज़ उठाया। उस ब्लाउज़ से एक भीनी सी ख़ुशबू आ रही थी जैसे कि गर्मी के मौसम में गरम-गरम ज़मीन पर पानी छिड़कने से आती है। उस डोरी वाले ब्लाउज़ को वो गौर से देखने लगा और बस अपनी मम्मी के जैसे स्तन को इमेजिन करने लगा। उस रूम की दीवार पर ही उसकी मम्मी और डैड की तस्वीर लटकी थी। डैड का फेस देखते ही वो अचानक होश में आ गया और उसने ब्लाउज़ ड्रॉप कर डाली और अपने रूम में गया।
नहीं नहीं ये ग़लत है मुझे इतना डीप नहीं सोचना चाहिए..डैड को पता लगा तो खैर नहीं..पर क्या करूँ इन सब ख़यालों को रोकने की कोशिश करता हूँ पर कंट्रोल नहीं होता..वैसे भी ये सब इमेजिन ही करना ठीक है। और कुछ तो होने वाला नहीं है। मम्मी तो डैडी की पत्नी हैं और मैं उनके साथ कुछ ग़लत नहीं कर सकता। बस यही खुद को बोलके वो दिलासा दे रहा था पर जैसे उसकी माँ का ब्लाउज़ की ख़ुशबू अब भी उसको फील हो रही थी। वो बेड पर लेटकर सोने की कोशिश करने लगा पर नहीं सो पा रहा था। उसको हेडेक सा होने लगा ज़ोर का तो जाके उसने एक हेडेक की गोली खा ली। सोचने लगा कल अभिनव से मिलके बात करूँगा कि हमको अब ये सब सोचना बंद कर देना चाहिए वरना दिमाग खराब हो जाएगा। उसने डिसाइड किया कि अभिनव को कॉल करेगा और कल मिलने के लिए बोलेगा.. पर सोनू को नहीं पता था उसके पार्क से चले जाने के बाद भी अभिनव और राज पार्क में ही बैठे अब तक बातें कर रहे थे। क्या बातें कर रहे थे वो दोनों बिना सोनू के?
उधर पार्क में बैठे अभिनव और राज बातें कर रहे थे सोनू के जाने के बाद..
अभिनव: अरे ये सोनू तो चला गया। लगता है इसकी मम्मी कहीं बाहर जा रही रिलेटिव्स के पास।
राज: हाँ बताया ना यार उसने इसलिए तो निकल गया उसकी दादी और मम्मी कहीं बाहर जा रहे हैं।
अभिनव: वैसे यार एक बात बोलूँ क्या। सोनू अगर उसकी मम्मी को पटा ले तो सोच सोनू की तो जैसे किस्मत ही खुल जाएगी ना।
राज: हाहा अरे तू भी कौनसे दिन में सपने देख रहा। उसकी मम्मी क्या तेरी मम्मी ना मेरी मम्मी कोई भी नहीं पटेंगे हम बस ये सब फैंटेसी करते-करते ही ज़िंदगी निकल जाएगी।
अभिनव: ह्मम पर मैं तो बस उसकी मम्मी को बात कर रहा हूँ ना। हम दोनों की मॉम्स उस सोनू की मम्मी जितनी सुंदर कहाँ। मैं सोनू की जगह होता तो रिस्क लेकर पक्का पटाने की कोशिश करता यार। ऐसी मॉम के लिए तो कोई भी रिस्क लिया जा सकता है।
राज: ह्मम उसकी मॉम है तो सच में एकदम क़यामत और सच में सोनू बहुत लकी है। पर उसकी मम्मी भी एक घरेलू हाउसवाइफ़ है यार और मॉम्स कभी नहीं पटेंगी बेटे से। कितने भी पापड़ बेल ले पर कुछ नहीं हो सकता।
अभिनव: पर सोनू कोशिश कर सकता है यार तू क्या मेरी एक हेल्प करेगा।
राज: मैं क्या हेल्प कर सकता हूँ बे..मैं क्या सोनू की दादी थोड़ी हूँ..हाहा।
अभिनव: अरे मज़ाक नहीं सच कह रहा हूँ…तू मेरी हेल्प करेगा तो हम दोनों मिलके सोनू को एनकरेज कर सकते हैं।
राज: एनकरेज..किस बात के लिए..अरे तू क्या समझता है सोनू अपनी मॉम को पटाने को रेडी होगा और क्या आंटी मानेगी..ऐसे सपने मत देख…और वो पटा भी लेगा तो तुझे क्या तू अपनी मॉम को पटा ले ना..हाहा।
अभिनव: अरे समझ ना..हम कौनसा सोनू को चाहते कि वो अपनी मम्मी के साथ कोई सेक्सुअल करें। मैं भी जानता हूँ कि सोनू उसकी मम्मी के साथ सेक्स का सोचता नहीं होगा और सेक्स के बारे में तो किसी भी मॉम को रेडी करवाना नामुमकिन है।
राज: हाँ मैं भी तो यही बोल रहा तुझसे…वो कभी ऐसा कुछ सेक्सुअल करने ना ही तैयार होगा और ना ही उसकी मम्मी।
अभिनव: पर यार राज आजकल तो सेक्स के अलावा भी बहुत से फेटिश आ गए हैं। तुझे शायद पता नहीं है और वो भी सेक्स से कुछ कम सुख या आनंद नहीं देते हैं।
राज: फेटिश क्या मैं कुछ समझा नहीं रे। और वैसे भी कुछ भी करवाने को सोनू ना ही उसकी मम्मी रेडी होंगे।
अभिनव: अच्छा ठीक है मैं लैपटॉप नहीं लाया वरना तुझे दिखाता…एक काम कर तू कल सुबह मेरे घर आजा..वहाँ पर मैं मेरे लैपटॉप पर दिखाके समझाऊँगा तुझे। ओके ना।
राज: अच्छा ओके डन। मैं कल सुबह शार्प 11 बजे आ जाऊँगा तेरे घर।
अभिनव: और सुन सोनू को मत बताना कि हम मिलने वाले हैं ठीक है ना..तू भरोसा कर कोई ग़लत या गंदी चीज़ नहीं बताऊँगा..
राज: अच्छा ठीक है नहीं बोलूँगा.. चल कल मिलता हूँ सुबह फिर तेरे घर पे..बाय..
अभिनव और राज अपने-अपने घर चले गए.. उधर सोनू अपने घर पर अकेले डिसाइड कर चुका था कि अभिनव को बोल देगा कि अबसे मॉम्स के ऊपर सेक्सुअल थॉट्स नहीं सोचेंगे। पर ऐसा क्या पॉसिबल था?
शाम को सोनू की मम्मी दादी के साथ घर वापस आ गईं। सोनू ने दरवाज़ा खोला तो उसकी सुंदर मम्मी का फेस और स्माइल देखके जैसे उसका हेडेक भी ग़ायब हो गया था।
उसकी मम्मी सीधा अब अपने रूम में गईं और दादी भी जाके रेस्ट करने लगीं। सोनू की मम्मी ने बेडरूम का दरवाज़ा लगाया और शायद अब वो अपने कपड़े बदलने लगी थीं क्योंकि हॉल में बैठे सोनू को फिर से चूड़ियों की खनक ज़ोर से सुनाई दे रही थी। उसका दिल फिर से ज़ोर से धड़कने लगा कि जिस ब्लाउज़ को कुछ देर पहले उसने छूकर देखा था उसकी मम्मी वही ब्लाउज़ पहनने वाली थीं अब।
10 मिनट्स के बाद उसकी मम्मी कपड़े चेंज करके बाहर आ गईं और जाके किचन में चाय बनाने लगीं। किचन में खड़ी उसकी मम्मी को सोनू घूरे जा रहा था..वो कल अभिनव से जो बोलने वाला था कि सेक्सुअल थॉट्स मॉम के बारे में आगे से नहीं करूँगा वो सब भूल गया था।
उसकी मम्मी ऊपर रखे हुए शुगर के बॉक्स को निकालने के लिए किचन में हाथ ऊपर किया तो सोनू ने देखा कि उसकी मम्मी की चिकनी कमर और भी लंबी हो गई थी एकदम कामुक लग रही थी और ऐसा करते समय उसकी मम्मी की साड़ी जो कमर में फँसी थी वहाँ से थोड़ी खुल भी गई थी… ओह मम्मी का पल्लू भी गिर जाएगा क्या…यही सोच रहा ही था कि उसकी मम्मी ने शुगर का बॉक्स निकाल लिया और साड़ी फिर से ठीक करके अपना पल्लू और कमर के पास ठीक कर ली। हाय रे किस्मत। बस यही लफ़्ज़ निकल रहे थे सोनू के दिल से।
