एक जवान प्यासी बीवी की कहानी 1

Ek wife ki gair mardo se chudai ki kahani:- ये कहानी है एक क्यूट, ब्यूटीफ़ुल, इमोशनल लड़की की, जो धीरे-धीरे एक सीधी-सादी लड़की से कैसे कई लोगों के प्यार में पड़ जाती है। उसकी कहानी में कई इवेंट्स आएंगे जो उसे ये सब सिखाएँगे।

तो ये कहानी शुरू होती है 2011 में। पर उससे पहले, इस कहानी की मेन किरदार, सुप्रिया शर्मा के बारे में जानते हैं। सुप्रिया यूपी के एक छोटे से शहर झाँसी के एक मिडिल क्लास फ़ैमिली से थी। उसके पापा एक प्राइवेट जॉब करते थे। सुप्रिया की मम्मी हाउस वाइफ़ थीं और उसका एक बड़ा भाई उससे 8 साल बड़ा था। सुप्रिया उसके मम्मी-पापा के लिए भी वो एक छोटा सा सरप्राइज़ थी जो 1988 में उन्हें मिला था।

Ek wife ki gair mardo se chudai ki kahani

छोटे होने की वजह से सुप्रिया को घर में सबसे काफ़ी ज़्यादा अटेंशन मिली, ख़ासकर पापा और भैया से। पापा वैसे तो काफ़ी कंज़र्वेटिव ख़याल के थे, पर सुप्रिया को बचपन से ही काफ़ी छूट मिली हुई थी। सुप्रिया को जींस, टॉप, स्कर्ट सब पहनना अलाउ्ड था, जो उनके विस्तृत परिवार के कुछ लोगों की हिसाब से काफ़ी मॉडर्न था।

बचपन से सुप्रिया काफ़ी क्यूट थी, और बड़े होते-होते वो और भी ज़्यादा क्यूट और सुंदर होती गई। उसने एक अच्छे इंग्लिश मीडियम कॉलेज से अपनी 12वीं पूरी की। जब वो 12वीं क्लास में थी, उसके बड़े भाई की शादी आरती से हो गई। आरती वैसे तो सुप्रिया से 4 साल ही बड़ी थी, पर काफ़ी ज़्यादा समझदार थी। शादी के बाद, सुप्रिया और उसकी भाभी ऐसे गहरे दोस्त बन गए, जैसे एक-दूसरे की परछाई। भाभी को हर बात की समझ भी जो थी। सुप्रिया अपनी मम्मी से ज़्यादा क्लोज़ भाभी से हो गई।

सुप्रिया कॉलेज में हर जगह काफ़ी एक्टिव थी। हर डांस, सॉन्ग और एक्स्ट्रा एक्टिविटी में पार्ट लेना तो जैसे फ़िक्स ही था। साथ ही पढ़ाई में भी वो काफ़ी अच्छी थी और बीकॉम में उसने अपनी ग्रैजुएशन पूरी की। सीए का भी ट्राई किया पर वो उससे नहीं हो पाया।

ऐसा नहीं था कि सुप्रिया लड़कों से अनजान थी। कॉलेज टाइम से ही काफ़ी लड़के उसकी तरफ़ आकर्षित थे। और कॉलेज आते-आते तो ये लिस्ट और भी बड़ी हो गई। एक-दो लड़कों से उसकी गहरी दोस्ती भी हो गई थी, पर भाभी की गाइडेंस से उसने कभी कोई रेखा नहीं लाँघी। थोड़ा-बहुत किस और टच बस, उससे ज़्यादा कुछ नहीं।

कॉलेज में ही उसके रिश्ते भी आने लगे थे। जो लड़की कॉलेज में काफ़ी ज़्यादा पतली थी अब थोड़ा भर सी गई थी। भाभी हमेशा उसको बोलती थी कि लड़कों को थोड़ा चब्बी चीक्स वाली लड़कियाँ ही पसंद आती हैं। भाभी उसको प्यार से गोलू बुलाती थी। पर सुप्रिया बिल्कुल भी मोटी नहीं थी। उसकी हाइट, 5’3 के लिए उसका वेट 55 केजी बिल्कुल ठीक था।

पापा ने सब रिश्तों को ये बोलकर मना कर दिया था कि अभी तो सुप्रिया छोटी है और कॉलेज भी पूरा नहीं हुआ। पर कॉलेज ख़त्म होने के बाद तो पापा ने भी शादी के लिए ज़ोर देना शुरू कर दिया। किसी तरह भाभी ने सबको समझाया कि अभी छोटी है और 1-2 साल और रुकना अच्छा होगा।

वैसी भी इतनी तो इम्मच्योर है वो, कैसे घर सँभालेगी, भाभी ने सबको बोला। सुप्रिया फिर सोचती कि भाभी बचा रही है या इन्सल्ट कर रही है। पर भाभी ठहरी गहरी दोस्त, तो उनकी बातों का क्या बुरा मानना। सुप्रिया जॉब भी करना चाहती थी, तो भाभी की सिफ़ारिश और काफ़ी ज़्यादा ज़िद के बाद, पापा ने उसे अपने एक दोस्त की सीए फ़र्म में जॉब करने दिया। सुप्रिया को स्कूटी चलाना तो आता ही था, और जॉब करने से तो जैसे उसमें और भी कॉन्फ़िडेंस आ गया था।

सुप्रिया को अब जॉब को भी करते-करते 2 साल हो चुके थे। मम्मी को तो जैसे शादी की चिंता सताई जा रही थी। सुप्रिया के पापा दहेज के सख़्त ख़िलाफ़ थे, तो काफ़ी सारे रिश्ते तो ऐसे ही मना हो जाते थे। और जिनको दहेज नहीं चाहिए होता, उसमें कुछ न कुछ ऐसा निकल ही जाता जो रिजेक्ट ही करना पड़ता। पर सुप्रिया को कहाँ जल्दी थी।

एक दिन, मम्मी के पास उनके मायके से एक लड़के का रिश्ता आया। मम्मी का मायका ग्वालियर में था और ये फ़ैमिली उनके काफ़ी क़रीबी थी।

मम्मी: आरती सुन, ये लड़के की फ़ोटो देख ज़रा।

आरती: मम्मी जी लड़का तो ठीक लग रहा है। कौन है?

मम्मी: ग्वालियर से है। मैंने भेजी थी ना गुड्डू की फ़ोटो उनको। वहीं रहते हैं पास में।

आरती: अच्छा, तो आप ग्वालियर भेजने के चक्कर में हो।

मम्मी: अरे नहीं, लड़के की तो जॉब लखनऊ में है। बैंक में जॉब है। वहीं रहेगी। ससुराल ग्वालियर है।

आरती: तब तो दहेज माँग रहे होंगे। पापाजी मना कर देंगे।

मम्मी: नहीं ना। ये लोग नहीं चाहते दहेज-वहेज। बस शादी धूम-धाम से हो जाए।

आरती: ये तो बढ़िया है।

मम्मी: तू बात कर ना गुड्डू से, तेरी तो सुन लेगी। और किसी की बात नहीं मानेगी। 4 दिन बाद आ रहे हैं यहाँ देखने।

आरती: मुझे क्या मिलेगा उसके लिए। (आरती ने हँसके बोला।)

मम्मी: अरे जो तुझे चाहिए दिला दूँगी। बस उसको समझा दे कि पिछली बार की तरह न करे। जींस में बैठ गई थी आ कर।

आरती: वो तो लड़का भी अईवी था। मान जाएगी, मैं मना लूँगी उसको।

शाम को सुप्रिया घर आती है, ज़ोर से आवाज़ लगाते हुए।

सुप्रिया: भाााभीीी, ओह मेरी प्यारीीी भाभीीी। कहाँ छुपी हो।

आरती: आ गई मैडम। क्या हुआ, आज तो बड़ी ख़ुश लग रही है।

सुप्रिया: ऐसे ही, आज दिन अच्छा गया ना।

आरती: अच्छा, लगता है फ़ोटो लीक हो गई।

सुप्रिया एकदम चौंकते हुए—

सुप्रिया: फ़ोटो??!! किसकी फ़ोटो??

आरती: आपके उनकी।

सुप्रिया थोड़ा नक़ली ग़ुस्से में आते हुए—

सुप्रिया: भाभी आपने भी इन लोगों को जॉइन कर लिया। ऐसी उम्मीद नहीं थी मुझे।

आरती: चल नौटंकी। ये देख ज़रा। (आरती उसको जल्दी से अपने फ़ोन पर फ़ोटो दिखाती है।)

सुप्रिया तिरछी आँखों से फ़ोटो को देखती है—

सुप्रिया: हाँ तो?

आरती: तो ये। 4 दिन बाद संडे को ये आएँगे और आप इस बार कोई ड्रामा नहीं करोगे। समझे?

सुप्रिया: भाभी पर… ऐसी क्या जल्दी है।

आरती: गोलू, मैं तुझे समझा रही हूँ ना। ऐसे नहीं करते। शादी तो करनी ही है ना। फिर ये तो अच्छा ही लग रहा है।

सुप्रिया एकदम चुप-चुप नीचे देखते हुए।

आरती: और जब वो यहाँ और यहाँ छुएगा ना, तब भाभी को याद करना। (भाभी उसको गुदगुदी करके हँसा देती है। और फिर उसके गाल खींचकर उसके गले लगा लेती है।)

आरती: बस मिल ले अच्छे से। फिर देखेंगे बाक़ी सब। इतना तो भरोसा है ना मुझपर?

सुप्रिया की आँखों में हल्के से आँसू, वो अपना सिर हिला देती है हाँ में। और फिर हँसने और रोने के बीच में कुछ आवाज़ करते हुए भाभी से चिपकी रहती है।

संडे की सुबह सुप्रिया झुंझलाहट के साथ उठी। पिछले तीन दिनों में भाभी ने उसको एक बार भी दोबारा लड़के की फ़ोटो नहीं दिखाई थी। उसने ज़िद के मारे माँगी भी नहीं थी। भाभी शायद ये खेल अच्छे से जानती थी, इसको अच्छे से तड़पाओ और इंतज़ार करवाओ। सुप्रिया को तो अब लड़के की शक्ल भी याद नहीं थी। नाम क्या बताया था सबने – अतुल, हाँ शायद यही था।

मम्मी रूम में फुरती से चलते हुए आईं और बोलीं—

मम्मी: गुड्डू, उठ जा बेटा, लड़के वाले आने वाले होंगे। 10 बजे का टाइम है।

भला इतनी सुबह-सुबह कौन आता है, सुप्रिया ने मन में सोचा। उसने मम्मी को कोई जवाब नहीं दिया और सोने की एक्टिंग की।

थोड़ी देर में भाभी भी रूम में आईं, और बोलीं—

आरती: गोलू उठ जा अब तो। नहा ले जा कर।

सुप्रिया ने एक आँख से भाभी को ग़ुस्से में घूरा। उसने भाभी को भी कोई जवाब नहीं दिया।

थोड़ी देर बाद घर की डोरबेल बजी। सुप्रिया फटाफट उठकर दरवाज़े के कोने से देखने गई कि कौन आया था। 5 लोग आए थे। उनको देखकर सुप्रिया ने अनुमान लगाना शुरू किया। 2 थोड़े बड़े लोग थे, शायद अतुल के मम्मी-पापा होंगे। 1 लड़की थी, यंग थी, पर उससे थोड़ी मोटी थी। उसने गोल्डन कलर की साड़ी पहनी हुई थी। शायद बहन या भाभी?

और फिर 2 लड़के थे, दोनों यंग से लग रहे थे। दोनों शायद 25-30 के बीच में होंगे। 1 लड़का थोड़ा लंबा, शायद 5’10, गोरा, हैंडसम और फ़िट बॉडी। काफ़ी स्मार्ट लग रहा था। दूसरा लड़का उससे थोड़ी छोटी हाइट का, 5’7। उसका रंग इतना गोरा नहीं था, पर क्लीन शेव्ड, ग्लासेस पहने हुए, वो भी ठीक ही लग रहा था, पहले वाले जैसी बॉडी तो नहीं पर पतला ही था। अब इनमें से कौनसा है, भाभी ने फ़ोटो भी तो नहीं दिखाई दोबारा। शायद ग्लासेस तो नहीं पहने थे। सुप्रिया ने उन्हें देखकर सोचा।

भाभी अंदर ग़ुस्से में दनदनाती हुई आईं और बोलीं—

आरती: सुप्रिया तू अभी तक रेडी नहीं हुई।

सुप्रिया समझ गई कि भाभी काफ़ी ग़ुस्से में हैं। अगर भाभी उसे गोलू, जानू, स्वीटी, क्यूटू या बेबी की जगह सुप्रिया बुला रही हैं तो इसका मतलब ख़तरा ही है, सुप्रिया समझ गई।

सुप्रिया: बस 10 मिनट्स दो भाभी। (कहकर वो जल्दी से बाथरूम की ओर भागी।)

बाहर बातें और जान-पहचान चल रहा था। और चाय-नाश्ता भी शुरू हो गया था। भैया अच्छे से जाँच-पड़ताल कर रहे थे, आख़िर उनकी प्यारी सी बहन की बात थी। पापा पॉलिटिक्स की बातें लेकर बैठ गए थे।

मम्मी: आरती, देख ज़रा गुड्डू रेडी है क्या।

फिर मेहमानों को देखकर—

मम्मी: मैं प्यार से गुड्डू बुलाती हूँ, वैसे तो सबने अलग नाम रखे हुए हैं उसके।

आरती: हाँ मैं देखती हूँ, हो गई होगी रेडी।

भाभी जल्दी से अंदर आईं और सुप्रिया की ओर देखा। बहुत ही क्यूट लग रही थी वो। उसने एक लाइट ब्लू कलर का कुर्ती सूट पहना हुआ था और उसके गाल शर्म से लाल हो रखे थे। भाभी ने उसे देखते ही कहा—

आरती: अगर मैं अतुल जी की जगह होती तो आज ही शादी कर देती तुझसे।

सुप्रिया के बाहर आते ही सब लोग उसे ही देख रहे थे। वो लग भी इतनी क्यूट और सुंदर जो थी। भाभी उसका हाथ पकड़कर घर के आँगन में ले आईं। और फिर उसको अतुल की बहन, अर्पिता के पास बिठा दिया।

अर्पिता: फ़ोटो से भी ज़्यादा सुंदर है ये तो। भाई आप देख रहे हो ना।

सुप्रिया के चेहरे पर एक स्माइल आ गई और उसके गाल और लाल हो गए। उसने बिना सिर उठाए ये समझने की कोशिश की कि आख़िर अतुल है कौन।

अतुल की मम्मी, सरिता भी पास आकर बैठ गईं और सुप्रिया का हाथ अपने हाथ में हल्के से ले लिया। सुप्रिया को ऐसा लगा जैसे वो कुछ जाँच रही थीं।

सुप्रिया को तो जैसे कुछ सुनाई ही नहीं दे रहा था। उसके दिल की धड़कन काफ़ी तेज़ हो गई थी इस सब में। उसने चोरी से लंबे लड़के की ओर देखा और पाया कि वो उसको देखकर काफ़ी स्माइल कर रहा था। यही होगा अतुल शायद।

आरती: आप सब सहमत हो तो अतुल और सुप्रिया को थोड़ा टाइम दे दें अकेले बात करने का।

सबने सहमति में सिर हिलाए। भाभी ने सुप्रिया को हल्के से उठाया और बोला—

आरती: चलिए अतुल जी।

ये बोलते ही, थोड़ी कम हाइट वाला लड़का खड़ा हो गया। उसके खड़े होते ही सुप्रिया के चेहरे से जैसे हँसी ग़ायब ही हो गई। ओह ये अतुल है, मुझे लगा… सुप्रिया ने सोचा।

भाभी अतुल और सुप्रिया को कमरे में ले आईं और बोलीं—

आरती: आप लोग आराम से बात कीजिए। सुप्रिया ज़्यादा परेशान मत करना अतुल जी को।

सुप्रिया ने भाभी को घूरकर देखा और वो हँसते हुए रूम से चली गईं। अतुल और सुप्रिया दोनों चुप बैठे हुए थे, सोचते हुए कि कहाँ से शुरुआत करें।

अतुल: आपकी भाभी काफ़ी फ़नी और स्वीट हैं। (अतुल ने फिर सोचा कहीं ये न सोचे कि इसकी भाभी पर लाइन मार रहा हूँ।)

सुप्रिया: हाँ, वो मेरी बेस्ट फ्रेंड है।

सुप्रिया तो जैसे फिर शुरू ही हो गई बोलना, भाभी के बारे में, अपने बारे में, अपनी जॉब के बारे में सब चीज़ों के बारे में। अतुल जो खुद ज़्यादा बोलता नहीं था, उसको थोड़ी इरिटेशन हो रही थी पर उसने दिखाई नहीं।

अतुल: तुम मैरिज के बाद जॉब करोगी क्या?

सुप्रिया: हाँ, मैं बिल्कुल जॉब कंटिन्यू करना चाहूँगी।

अतुल: ओके, पर आपको करने की ज़रूरत नहीं है। मैं एक बैंक ब्रांच में सीनियर लोन ऑफ़िसर हूँ और काफ़ी अच्छा कमाता हूँ।

सुप्रिया: हाँ पर मैं जॉब करना चाहूँगी। मुझे अच्छा लगता है।

अतुल: चलो बाद में देख लेंगे वो सब। पर मेरी तरफ़ से इस रिश्ते के लिए हाँ है।

इतने में भाभी उनको लेने आ गईं। सुप्रिया ने सोचा कि मैं तो अतुल से कुछ ख़ास पूछ भी नहीं पाई। भाभी उसको अकेले में लेकर गईं और पूछा—

आरती: कैसा लगा।

सुप्रिया: पता नहीं भाभी, इतनी जल्दी थोड़ी न समझ आता है।

आरती: इतना ही टाइम मिलता है। सुन, मम्मी तो हाँ बोलने वाली है। अगर तुझे कुछ कहना है तो अभी बोल दे वरना बाद में मैं हेल्प नहीं कर पाऊँगी।

सुप्रिया: देखने में ठीक ही है, बुरा तो नहीं है। बाक़ी आप लोग देख लो। (सुप्रिया ने सोचा कि वो कैसे मना कर दे, वो पहले ही कितने लड़कों को मना कर चुकी थी।)

आरती: ठीक है तो पक्का हुआ। (भाभी ने उसे ज़ोर से गले लगा लिया, और उसके गाल पर किस कर दी।)

फिर बाहर जाकर सबको बता दिया। सब काफ़ी ख़ुश हो गए और थोड़ी देर में ही वहीं रोके की रस्म भी हो गई। अतुल की मम्मी ने सुप्रिया को सोने की चेन और चूड़ियाँ पहना दीं। सुप्रिया के पापा ने भी अतुल का टीका किया और उसे 5,001 का लिफ़ाफ़ा दे दिया। सुप्रिया और अतुल को साथ बिठाया गया और उन दोनों ने एक-दूसरे को लड्डू खिला दिया। फिर सुप्रिया ने झुककर सबसे आशीर्वाद लिया।

उसको पता चला कि वो लंबा लड़का अर्पिता दीदी के हसबैंड विनीत हैं। उसने उनके भी पैर छूने की कोशिश की पर वो पीछे हट गए और बोले कि वो इतने बड़े नहीं कि उनके पैर छुए जाएँ। उन्होंने सुप्रिया के सिर पर हाथ रख दिया।

फिर दिन के खाने के बाद सब लोग वापस चले गए। और सुप्रिया अपने कमरे में अकेले बैठकर सोच रही थी कि क्या उसको उसका परफ़ेक्ट लाइफ़ पार्टनर मिला या नहीं। भाभी की छोटी बेटी, अन्या उसके आसपास खेल रही थी।

मंडे को वैसे तो सब नॉर्मल सा था, सुप्रिया अपनी जॉब पर भी गई थी, पर शायद सब कुछ बदल सा गया था। 2-3 दिनों के अंदर ही शादी की तारीख़ भी फ़ाइनल हो गई। शादी सिर्फ़ 3 महीनों में थी। सुप्रिया का सारा परिवार शादी की तैयारियों में लग गया। सुप्रिया की भाभी ने सुप्रिया की शॉपिंग का ज़िम्मा उठाया और साथ ही सुप्रिया को शादी से पहले का ज्ञान देने की भी कोशिश की। वो अक्सर घंटों-घंटों बातें करते रहते थे।

आरती: गोलू तुझे सेक्स के बारे में जानना काफ़ी ज़रूरी है। शादी की नींव सेक्स पर ही टिकी होती है।

सुप्रिया: भाभी…. मुझे क्यों जानना है सेक्स के बारे में, अतुल करेंगे जो उन्हें करना है ना।

आरती: ओह हो, देखो ज़रा कैसे बेक़रार है अतुल के सब करने को लेकर। सुहागरात वाले दिन काफ़ी लंबी हाथापाई चलेगी तुम लोगों की, उसके तैयार हो जा अभी से।

सुप्रिया: भाभी आप भी ना…

आरती: तूने कभी वीडियो देखी है ये सब की। आ मैं तुझे दिखाती हूँ, अभी तो अन्या भी घर पर नहीं है, अच्छा मौक़ा है।

भाभी उसे खींचकर अपने रूम में ले गईं और अंदर से कुंडी लगा दी। कमरे में अँधेरा हो रहा था। भाभी ने सीडी प्लेयर में एक सीडी डाली और टीवी पर चलाकर वॉल्यूम बिल्कुल ऑफ़ कर दिया। फिर वो और सुप्रिया दोनों कंबल में लेट गए और टीवी देखने लगे। सुप्रिया ने पहले चोरी-छुपे अपने फ़ोन पर 3-4 बार वीडियोज देखी थीं, पर ये पहली बार वो किसी और के साथ ये वीडियोज देख रही थी।

वीडियो अंग्रेज़ी था जिसमें एक गोरा लड़का और एक गोरी लड़की थी। लड़का लड़की को किस कर रहा था और हल्के-हल्के उसके बूब्स दबा रहा था। उसके बाद उसने उसकी ब्रा उतार दी और उसके बूब्स चूसने लगा।

सुप्रिया: लड़कों को बूब्स चूसने में क्यों मज़ा आता है? (सुप्रिया ने एक भोला सा सवाल किया।)

आरती: पगली, इतने सॉफ़्ट जो होते हैं ये। और फिर बचपन की याद दिलाते हैं उन्हें। और तेरे अभी इतने बड़े नहीं हैं, पर शादी के बाद हो जाएँगे।

भाभी ने उसके बूब्स को अपने हाथों से छूते हुए बोला। भाभी के बूब्स छूते ही जैसे सुप्रिया के अंदर की आग और बढ़ गई हो। वीडियो में लड़के ने फिर अपने कपड़े उतारे और लड़की का सिर नीचे करके उसे अपना लंड चूसवाने लगा। सुप्रिया के मन में आया कि सच में ऐसा होता है क्या, और एक लड़की भला एक लड़के का लंड क्यों चूसेगी।

सुप्रिया: छी, ये कितना गंदा है।

आरती: कुछ गंदा नहीं है, सब प्यार है। अगर वो अपना गन्ना चूसने को बोले ना तो पीछे मत हटियो, बस ये बोल दियो कि आपको भी मेरी चूत चाटनी होगी।

सुप्रिया: भाभी क्या बोल रहे हो आप….

आरती: अरे, मैंने भी तेरे भैया को यही बोला था। दोनों को बहुत मज़ा आता है। हम लोग तो अभी भी करते हैं ये सब।

सुप्रिया के दिमाग़ में एकदम से भाभी और भैया का ये करते हुए कई दृश्य चलने लगा। सुप्रिया ने किसी तरह उसे अपने मन से हटाया।

सुप्रिया: भाभी प्लीज़ मुझे आपके और भैया के बारे में मत बताओ। कितना अजीब लगता है।

आरती: क्या अजीब है इसमें। सब लोग करते हैं। मम्मी-पापा भी करते होंगे। शादी के जस्ट बाद तो हम हर रात कई-कई बार करते थे, अब तो बस हफ़्ते में 2-3 बार, जब अन्या सो जाती है।

सुप्रिया ने कभी भी भाभी और भैया के बारे में ये सब नहीं सोचा था। शायद यही उसका बचपन था।

आगे की वीडियो देखते-देखते सुप्रिया अपनी भाभी के और क़रीब आ गई। उसने भाभी को पीछे से पकड़े हुए था, और सोच रही थी वो ये सब कैसे कर पाएगी। भाभी भी हल्के-हल्के उसकी पीठ सहला रही थीं।

आरती: गोलू घबरा मत, सब हो जाएगा। और ये वाला तो बहुत आराम से कर रहा है। मैं तुझे और वीडियोज दिखाऊँगी तो तू तो भाग ही जाएगी।

सुप्रिया ने मुँह बनाकर भाभी की ओर देखा—

सुप्रिया: भाभी आप भी ना, बड़े गंदे हो।

आरती: अरे इसमें क्या गंदी हूँ। और वैसे भी गंदे तो अतुल होने वाले हैं तेरे साथ।

सुप्रिया: ऐसा लगता है शादी करते हुए जैसे सबको पता है हम लोग सेक्स ही करने वाले हो। कितना अजीब लगेगा। मुझे तो बहुत ज़्यादा शर्म आएगी।

भाभी हँसते हुए—

आरती: अरे इसमें शर्माना क्या, फ़्री सेक्स करने का लाइसेंस है शादी।

मूवी चल ही रही थी कि इतने में सुप्रिया की मम्मी ने बाहर से आवाज़ लगाई, और सुप्रिया और उसकी भाभी टीवी बंद करके बाहर आ गए। सुप्रिया रात भर सेक्स के बारे में ही सोचती रही। सुप्रिया रोज़ रात अतुल से भी बात करती थी। वैसे तो वो ही बोला करती थी, और अतुल सिर्फ़ सुनता था। दिन भर अतुल ऑफ़िस के काम में बिज़ी होता और सिर्फ़ टेक्स्ट पर थोड़ी-बहुत बात हो जाती, जैसे क्या कर रहे हो, खाना खाया क्या आदि। रात को सुप्रिया उसे दिन भर की बातें बताती और शादी की शॉपिंग का अपडेट देती। अतुल भी उसे अपने दिन के बारे में बताता जो ज़्यादातर ऑफ़िस की बोरिंग मीटिंग्स और बॉस की फटकार के बारे में होता। वो सुप्रिया से कभी-कभी अपने फ़्यूचर की और प्यार भरी बातें भी करता, पर कभी सेक्स के बारे में बात नहीं करता।

इस तरह से जल्दी ही तीन महीने भी बीत गए और शादी की डेट आ गई। सुप्रिया की शादी एक बैंकवेट हॉल में हुई, क्योंकि उसका परिवार इतना अमीर नहीं था। लड़के वालों के रिश्तेदारों को लग रहा था कि अतुल की शादी थोड़ी हल्की जगह हो गई। पर जैसे ही सुप्रिया शादी के मंडप में लाल रंग का लहंगा पहनकर आई, सारे लोग उसे जैसे देखते ही रह गए। अतुल ने जैसे उसे स्टेज पर देखा उसे तो यक़ीन ही नहीं हुआ कि उसकी शादी इस लड़की से हो रही थी। सुप्रिया के सामने तो सच में वो जैसे हल्का पड़ रहा था। कुछ लोग दबी आवाज़ में ये बोल भी रहे थे या मन में सोच रहे थे।

अतुल की बहन अर्पिता और उनके हसबैंड विनीत ने उनके यहाँ से सारी ज़िम्मेदारी उठा रखी थी। विनीत थोड़ी-थोड़ी देर में सुप्रिया को थोड़ा पानी और जूस भी दे रहे थे। सुप्रिया भी स्टेज पर नर्वस थी पर विनीत जीजू का व्यवहार उसे काफ़ी अच्छा लगा। रात होते-होते सुप्रिया को काफ़ी नींद और थकान हो रही थी पर अभी तो फेरे भी बाक़ी थे। अतुल और सुप्रिया को साथ बिठाकर खाना परोसा गया, साथ में अतुल के जीजू, बहन और ख़ास रिश्तेदार भी बैठे थे। सुप्रिया की भाभी ने उन दोनों को थोड़ा खाना खिलाया। विनीत और अर्पिता ने भी सुप्रिया को अपने हाथ से खिलाया।

फिर थोड़ी देर में उन दोनों के फेरे हो गए, और अतुल ने सुप्रिया को मंगलसूत्र पहना दिया और उसकी माँग भर दी। विदाई के समय सुप्रिया का रो-रोकर बुरा हाल था। ये पहली बार होगा जब वो अपने परिवार से दूर एक अनजान परिवार के साथ एक नए शहर में रहने जा रही थी। भाभी का भी जैसे यही हाल था, पर उसने अपने आप को किसी तरह से सँभाला और सुप्रिया को विदा किया।

सुप्रिया रोते-रोते कार में बैठी, एक बड़ी सी एसयूवी, जिसमें पीछे उसके साथ अतुल और अर्पिता बैठे हुए थे और आगे विनीत जीजू बैठे थे। ड्राइवर ने धीरे-धीरे कार चलानी शुरू की और इस तरह सुप्रिया अपने नए जीवन की तरफ़ चल पड़ी।

कार में भी सुप्रिया के आँसू बह रहे थे। थोड़ी देर बाद, आगे से विनीत ने सुप्रिया को टिश्यूज़ दिए और बोला—

विनीत: अब इतने भी ख़राब लोग नहीं हैं हम सुप्रिया कि तुम रोती ही जाओ। किडनैप करके नहीं ले जा रहे तुम्हें।

सुप्रिया को रोते-रोते हल्की सी हँसी आ गई। अतुल ने भी उसका हाथ पकड़कर उसे थोड़ा नॉर्मल किया। सुप्रिया ने पानी पिया और अपने फ़ोन पर चेक किया अगर भाभी या घर से कोई मैसेज हो। पर कोई भी मैसेज नहीं आया, शायद सब लोग अभी भी बिज़ी होंगे मेहमानों को विदा करने में, सुप्रिया ने सोचा। फिर सबने थोड़ी-थोड़ी बातें शुरू कर दीं, और विनीत और अर्पिता मज़ाक करके सुप्रिया को और कंफ़र्टेबल करने की कोशिश करने लगे।

सुप्रिया ने अब से पहले तक विनीत जीजू से ज़्यादा बात नहीं की थी, पर वो उसे काफ़ी ही हँसमुख लगे। रात भर जागने की वजह से थोड़ी देर बाद कार में सुप्रिया सो गई और अपना सिर अतुल के कंधे पर रख दिया। झाँसी से ग्वालियर का रास्ता 2 घंटे का था। अब तक सुप्रिया के आँसू कब के रुक चुके थे और उसके चेहरे पर मुस्कान वापस आ गई थी। अब उसकी आवाज़ भी चहक कर निकलने लगी थी।

पर अपने भारी लहंगे और ज्वेलरी से वो थोड़ा परेशान हो चुकी थी। आख़िरकार 2 घंटे बाद वो ग्वालियर पहुँच ही गए। सुप्रिया को काफ़ी थकान हो रही थी पर उसे पता था कि अभी तो काफ़ी रस्में बाक़ी थीं और फिर वो सोचने लगी कि आज रात को क्या होगा।

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