बड़े घर की पाकीज़ा चूतें 4
साँसें कंट्रोल करते हुए जब मेरी नज़र कालूजी के पैंट पर पड़ी, जिसमें से उनके खड़े लंड का उभार साफ-साफ मेरी नज़रों के बिल्कुल सामने था… तभी कालूजी ने उनके लंड को पैंट के ऊपर से ही मसल दिया… जिसे देखके मेरी साँसें दोबारा फूलने लगीं… लेकिन मैंने खुद पे कंट्रोल किया… और जैसे-तैसे उठके किचन से बाहर आ गई… और सीढ़ियाँ चढ़ते हुए अपने रूम में चली गई…
पिछला पार्ट यहाँ पढ़ें ==> बड़े घर की पाकीज़ा चूतें 3
अब आगे…
रूम में घुसते ही मैं डायरेक्ट बाथरूम में घुस गई… और अपने सारे कपड़े उतारके शावर के नीचे खड़ी हो गई… जैसे-जैसे ठंडा पानी मेरे जिस्म पे पड़ने लगा… वैसे-वैसे मेरी अंदर की गर्मी शांत होने लगी…
अमीरा (शावर में): (क्या कालूजी ने वो जानबूझके किया…)
शावर लेने के बाद मैं बेड पे लेट गई… और मेरी नींद लग गई… अब लेट सोई थी तो उठी भी लेट…
(सुबह 9 बजे)
जब मैं नींद से उठी… तो इकबाल बेड पे मेरे पास ही बैठे थे… और उनके एक हाथ में नाश्ते की प्लेट थी… और दूसरे में कॉफी का कप…
अमीरा (उठते हुए): इकबाल आप ये सब…
इकबाल: तुम पूरे घर को कितने अच्छे से संभालती हो… अकील के कॉलेज की रिस्पॉन्सिबिलिटी… सर्वेंट्स… सब कुछ… तभी तो मैं फ्रीली अपने काम पे ध्यान दे पाता हूँ…
अमीरा: लेकिन फिर भी… आप ये सब…
इकबाल: जब मेरी इतनी ब्यूटीफुल और केयरिंग वाइफ मेरे लिए इतना कुछ कर सकती है… तो मैं इतना तो उसके लिए कर ही सकता हूँ…
ये कहते हुए इकबाल अपने हाथों से मुझे नाश्ता खिलाने लगे… और अब मैंने जो कल रात को किया… उसके लिए गिल्टी फीलिंग आने लगी…
अमीरा: (इकबाल मुझसे कितना प्यार करते हैं… और मैंने कल रात उनको धोखा दिया… या… आाह्ह ये मैंने क्या कर दिया… लेकिन अब बस जो हुआ वो हुआ… अभी से मैं कालूजी से दूर रहूँगी…)
ऐसे ही शाम हो गई… और मैं किचन में रात के डिनर की तैयारी कर रही थी…
कालू (किचन में एंटर होते हुए): मालकिन…
मेरा मुँह किचन के स्टैंड तरफ था… और पीठ गेट तरफ… और जैसे ही मैं मुड़ी… वैसे ही कालूजी ने मुझे गले से लगा लिया… जिससे मैं एकदम शॉक रह गई… और मुझे गुस्सा भी आ गया… तो मैंने कालूजी को पीछे धकेला… और एक करारा थप्पड़ कालूजी के राइट गाल पे रसीद दिया… चटाक्क्क्क्… जिसकी आवाज़ पूरे किचन में गूँज गई…
अमीरा (गुस्से में): तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे हाथ भी लगाने की…
कालू: लेकिन मैं तो…
अमीरा (गुस्से में): बस सही कहते हैं… नौकरों को ज़्यादा छूट नहीं देनी चाहिए… वरना सर पे बैठ जाते हैं… मैंने तुम्हें कुछ ज़्यादा ही छूट और इज़्ज़त दे दी… जो तुमने ये सब किया… आज के बाद अपनी हद मत भूलना और मुझसे दूर रहना… वरना नौकरी और इस सोसाइटी दोनों से निकाल फेंकूँगी… समझा…
ऐसे ही दो दिन निकल गए… और कालूजी भी मेरे आसपास नहीं भटक रहे थे… जिससे मैं खुश थी… क्योंकि अब मैं अपनी फैमिली के लिए लॉयल रहना चाहती थी… इकबाल के लिए लॉयल रहना चाहती थी… और जब तक मैं कालूजी से दूर रहूँगी… तब तक इकबाल और अपनी फैमिली के लिए लॉयल रहूँगी… (ऐसा मैंने सोचा था… जो मेरी सबसे बड़ी बेवकूफी थी…)
ऐसे ही दो हफ़्ते निकल गए… सब कुछ ठीक था…
(एक हफ़्ते पहले… अलीना के घर…)
इनाया: ओये… तू यहाँ क्या कर रहा है…
कालू: कुछ नहीं मालकिन… बस फूलों को पानी दे रहा हूँ…
इनाया: हाँ पानी दे और निकल यहाँ से… अंदर आने की सोचना भी मत… वरना टाँगें तोड़ दूँगी… समझा…
शमा: क्या हुआ फूफी जान… आप इन बिचारे को ऐसे क्यों…
इनाया: शमा तुम अभी-अभी यहाँ आई हो… इसलिए तुम्हें पता नहीं… और मैं डिटेल में सब बता भी नहीं सकती… बस इतना याद रखना इससे दूर रहना… ये समझना कि भाभीजान ने कहा है…
शमा: पर अम्मी जान ऐसा क्यों कहेंगी… और इन्होंने अकील की जान भी तो बचाई है…
इनाया: वो सब मुझे नहीं पता…
ये कहते हुए इनाया अंदर चली गईं… और वैसे ही कालूजी भी…
(प्रेजेंट डे…)
अमीरा: हेलो…
अननोन कॉलर: कैसी है मेरी चमक चालो…
अमीरा: त्तुम्म… तुम…
अननोन कॉलर: हाँ मैं… तेरा आशिक…
अमीरा: अपनी बकवास बंद करो… उस दिन की वॉर्निंग भूल गए… पिटना चाहते हो… बुलाऊँ क्या उन्हें…
अननोन कॉलर: अच्छा मैं भी तो देखूँ… कौन पीटेगा मुझे… बुला…
अमीरा: (ये तो मेरी धमकी से डर ही नहीं रहा…)
अननोन कॉलर: क्या हुआ बुला ना… मुझे भी उसे कुछ दिखाना है…
अमीरा: क्क्क… क्या दिखाना है…
तभी मेरे व्हाट्सएप पे एक नोटिफिकेशन आई… और जैसे ही मैंने उसपे क्लिक किया…
अमीरा: ये… ये तुम्म…
अननोन कॉलर: जब तेरा शौहर तेरी ये फोटो देखेगा… साली फिर तेरा क्या होगा… हा हाआ…
अब मेरे हाथ काँप-काँपाने लगे… और मेरी आँखों से आँसू बहने लगे…
अमीरा (रोते हुए): प्लीज़… ऐसा क्यों कर रहे हो… क्या चाहते हो…
अननोन कॉलर: साली चिनाल… अब आई तू लाइन पे… परसों ठीक रात 8 बजे मुझे #### मिलना… वो भी अकेली… समझी वरना… (फोन कट)
अमीरा: क्याआ… हेलो… हेलो…
ऐसे ही टाइम निकलने लगा… मैंने बहुत कोशिश की इकबाल को सब बताने की… लेकिन कहीं इकबाल मुझे ही गलत ना समझ ले… इसलिए मेरी हिम्मत ही नहीं हुई… और ऐसे ही वो दिन भी आ गया…
(शाम 6 बजे)
अमीरा: क्या करूँ… सिर्फ 2 घंटे और हैं… या… आाह्ह कुछ तो कर…
घड़ी का काँटा चलता रहा और 7 बज गए… अब मुझे कोई रास्ता नहीं दिख रहा था सिवाय कालूजी के… तो मैंने जैसे-तैसे कालूजी को सब कुछ बता दिया… और कालूजी साथ चलने को तैयार भी हो गए…
(रात 8 बजे… #### प्लेस)
अननोन कॉलर (मास्क पहने हुए): साली टाइम पे आ गई… वाह…
अमीरा: देखो मैं आ गई हूँ ना… अब वो फोटो डिलीट करो…
अननोन कॉलर: कर दूँगा… पहले तेरी चुदाई तो कर लूँ…
ये कहते हुए वो आदमी मेरे करीब आने लगा… और जैसे ही वो आगे बढ़ा वैसे ही कालूजी ने उसे पीछे से पकड़ लिया… और दोनों में हाथापाई शुरू हो गई… कालूजी ने उसे बहुत मारा… और कुछ मार कालूजी को भी झेलनी पड़ी… लेकिन आखिर में कालूजी ने उससे उसका मोबाइल छीन लिया… और वो वहाँ से भाग निकला…
कालू (चिल्लाते हुए): साले मादरचोद… अगर फिर मेरी मालकिन के साथ कुछ ऐसा-वैसा करने की सोची… तुझे वहीं ज़िंदा गाड़ दूँगा…
ये कहते हुए कालूजी ने उसका मोबाइल तोड़ दिया…
अमीरा: थैंक्स कालूजी… आपने मुझे गलत नहीं समझा… और मेरी हेल्प भी की… थैंक यू…
कालू: हमारी औकात ही क्या है… कि हम आपको कुछ समझें…
अब ये सुनके मुझे बहुत बुरा लगा… फिर कार चल निकली… और पूरे रास्ते हमें कोई बात नहीं हुई…
अमीरा (कार से उतरते हुए): ये क्या कालूजी… आपकी कोहनी से तो खून आ रहा है…
कालू: नहीं… हम ठीक हैं…
अमीरा: ऐसे कैसे ठीक हैं… चलिए अंदर आपकी पट्टी कर देती हूँ…
ये कहते हुए मैंने कालूजी के हाथ को पकड़ा… वैसे ही कालूजी ने मेरा हाथ झटक दिया…
कालू: हमें कोई पट्टी-वट्टि नहीं करवानी…
अमीरा: कालूजी मान जाइए… देखिए कितना खून आ रहा है…
कालू: हम जो चाहते हैं वो तो आप देती नहीं… बस दिखावा करती हैं…
अमीरा (उदास होते हुए): ऐसा क्यों कह रहे हैं…
कालू: सही तो कहा… आप एक अनजान आदमी को अपनी वैसी फोटो भेज सकती हैं… और हम जो आपसे इतना प्यार करते हैं… हमें ज़रा सा प्यार नहीं दे सकतीं…
ये कहते हुए कालूजी कार की की कार पे रखकर चले गए… और मेरी आँखों में अपने-आप ही आँसू आ गए…
ऐसे ही दो हफ़्ते गुज़र गए… कालूजी मुझे देखके भी अंधेका कर देते थे… जिससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए था… बल्कि खुशी होनी चाहिए थी… लेकिन पता नहीं क्यों मुझे सिर्फ फर्क ही नहीं पड़ रहा था… बल्कि बुरा भी लग रहा था…
ऐसे ही एक महीना निकल गया…
(एक महीने बाद)
इकबाल: अमीरा जल्दी चलो… रुबीना (इकबाल के बिजनेस पार्टनर की बेटी) की एंगेजमेंट के लिए हम लेट हो जाएँगे…
अमीरा: हाँ बस दो मिनट…
(5 मिनट बाद)
अमीरा: क्या हुआ… ड्राइवर कहाँ है…
इकबाल: वो ट्रैफिक में अटका है… और मैं ड्राइव कर नहीं सकता… पार्टी में ड्रिंक तो करनी ही पड़ेगी…
अमीरा: क्यों ना हम कालूजी को ले चलें… वो ड्राइव भी अच्छा करते हैं…
इकबाल: ठीक है मैं कॉल करता हूँ…
अमीरा: मैं अभी आती हूँ…
इकबाल: अब कहाँ चली…
अमीरा: कुछ भूल गई हूँ… बस दो मिनट…
(10 मिनट बाद)
इकबाल: जल्दी अमीरा… कालू कार लेकर आ गया… जल्दी करो…
अमीरा: बस आई… (मुझे इग्नोर कर रहे थे ना… अब देखती हूँ कैसे मुझे नहीं देखते…)
अब मैं जैसे ही कार के पास पहुँची तो इकबाल तो कार में बैठ चुके थे… लेकिन कालूजी बाहर ही खड़े थे… और जब मैं कार के पास पहुँची तो कालूजी का चेहरा देखने लायक था… उनकी नज़र मुझपे से हट ही नहीं रही थी… फिर मैं भी कार में बैठ गई… और कार चल पड़ी… पूरे रास्ते जब भी मौका मिलता… इकबाल की नज़रों से छिपते हुए… कालूजी मुझे देखते रहे… जब भी वो मुझे देखते उसी दौरान कई बार हमारी नज़रें मिलीं… लेकिन कालूजी तो मुझे बिना डरे वैसे ही देखते… जिससे मैं ही अपनी नज़रें शर्म से नीचे कर लेती थी…
ऐसे ही हम पार्टी में पहुँच गए… एंगेजमेंट भी हो गई… अकील ने भी खूब एंजॉय किया… कि तभी… मुझे शमा का कॉल आया… पार्टी में बहुत शोर था… इसलिए मैंने बाहर पार्किंग में आकर कॉल अटेंड किया…
अमीरा (फोन पे): हाँ शमा… तुझे बताया था ना…
अमीरा (फोन पे): हाँ मुझे याद है…
मैं फोन पे शमा से बात ही कर रही थी… कि किसीने मुझे पीछे से कसके पकड़ लिया… जिससे मैं शॉक में चिल्ला उठी…
अमीरा: आाह्हआआआ…
कालू: चिल्लाएँ नहीं मालकिन…
शमा: क्या हुआ चाचीजान… आप चीखी क्यों…
अमीरा: वो… वो शमा… कुछ बच्चे एकदम से मेरे पास से भागते हुए निकले… मैं थोड़ी चौंक गई थी… बस इसलिए चीख निकल गई… (ये कालूजी क्या कर रहे हैं…)
के तभी कालूजी ने उनका हाथ साड़ी के पल्लू के अंदर से मेरे नंगे पेट पे रख दिया… और धीरे-धीरे सहलाने लगे…
अमीरा (धीरे से): आाह्हआआ…
शमा: आपने कुछ कहा चाचीजान…
अमीरा: नहीं वो…
मैं इतना ही बोल पाई… कि तभी कालूजी ने मेरे गले के पीछे चूमना शुरू कर दिया…
अमीरा (फोन पे हाथ रखते हुए): कालूजी मत…
मैं इतना ही बोल पाई… कि कालूजी ने मुझे घुमा दिया… जिससे मेरा चेहरा बिल्कुल कालूजी के चेहरे के सामने आ गया… और जैसे ही कालूजी उनके होठों को मेरे होठों के पास लाने लगे…
अमीरा: (या… आाह्ह ये तो मेरे होठों पे किस…) नहीं कालूजी… प्लीज़…
शमा: चाचीजान कुछ कहा आपने…
अमीरा: शमा तेरे चाचाजान बुला रहे हैं… मैं जाती हूँ बाय…
ये कहते हुए मैंने बिना देखे स्क्रीन पे टैप किया फोन कट करने के लिए… लेकिन कट की जगह स्पीकर पे क्लिक हो गया… और मुझे लगा कि कॉल कट हो गया लेकिन अब वहाँ शमा को सब सुनाई देने वाला था…
अमीरा: नहीं कालूजी प्लीज़…
शमा: (ये चाचीजान क्या कह रही हैं…)
कालू: आप चाहें तो हमें फाँसी पे चढ़ा दीजिए मालकिन… लेकिन अब हम खुद को आपके इन गुलाबी होठों को चूमने से नहीं रोक पाएँगे…
शमा: (ये आवाज़ चाचाजान जैसी तो नहीं है… एक सेकंड… इसने क्या कहा… मालकिन और चाचीजान ने क्या कहा… कालूजी… मतलब क्या ये वही कालू नौकर है जो उस दिन… नहीं… ऐसा नहीं…)
ये कहते हुए कालूजी ने उनके काले फटे हुए होठों को मेरे गुलाबी रस भरे होठों पे रख दिया… और मेरे होठों को चूमने लगे…
अमीरा: आाह्हआआ स्स्स्स्सा म्मममप्प्प्प्प्पुउप्प्मम…
शमा: (या… आाह्ह इसने तो सच में चाचीजान को किस करना शुरू कर दिया…)
मेरे होठों को चूमते हुए ही कालूजी उनके दोनों हाथ मेरी कमर से होते हुए मेरी गाँड तक ले गए… और दोनों हाथों से मेरी गाँड की दोनों फाँकों को साड़ी के ऊपर से ही दबाने लगे…
खुली पार्किंग में कालूजी मेरे होठों को चूमते हुए मेरी गाँड को दबा रहे थे… और मैं ठीक से रेज़िस्ट भी नहीं कर पा रही थी…
कालू: अब सब्र नहीं होता मालकिन… चाहे आप मुझे नौकरी से निकालिए… या सूली पे चढ़ा दीजिए… लेकिन आज हम आपके इस खूबसूरत जिस्म को बिना कपड़ों के देखके रहेंगे…
ये कहते हुए कालूजी ने मेरे गले पे चूमना शुरू कर दिया…
अमीरा: (कालूजी तो ऐसे हक से बोल रहे हैं… जैसे मैं उनकी बेगम हूँ… और उनका मुझपे पूरा हक हो…)
शमा: (या… आाह्ह ये तो चाचीजान को ऐसे ऑर्डर दे रहा है… जैसे ये चाचीजान का नौकर नहीं… बल्कि चाचीजान इसकी बेगम हो…)
ये सोचते हुए पहली बार मेरी चुत में कुछ हलचल सी हुई… कि तभी किसीके आने की आहट सुनाई दी… वैसे ही कालूजी ने मुझे छोड़ दिया… और मैं बिना देर किए… अंदर भाग गई…
फिर पार्टी खत्म हुई… और हम भी घर के लिए निकल गए… जब हम घर पहुँचे तब तक अकील सो चुका था…
इकबाल (अकील को गोद में लेते हुए): मैं अकील को उसके रूम में सुलाके आता हूँ…
अमीरा: हम्म…
अकील को लेकर इकबाल आगे चलने लगे… और जैसे ही मैं भी जाने लगी… वैसे ही कालूजी ने मेरा राइट हाथ पकड़ लिया…
अमीरा (शॉक्ड): कालूजी ये आप क्या कर रहे हैं… इकबाल देख लेंगे… फिर जानते हैं ना आपका क्या होगा…
कालू: चाहे कुछ भी हो जाए… हमारी जान ही क्यों ना चली जाए… लेकिन आज हम आपके जिस्म का दीदार करके ही रहेंगे…
अमीरा: ये आप क्या…
इकबाल: अमीरा… कहाँ रह गईं…
अमीरा: आई…
कालू: हम यहीं आपका इंतज़ार करेंगे… जब तक आप नहीं आतीं… ठंड में पूरी रात यहीं इंतज़ार करेंगे…
ये कहते हुए कालूजी ने मेरा हाथ छोड़ दिया… मैंने भी मेन गेट लॉक कर लिया… और बेडरूम में जाके… बिना नाइटी में चेंज किए… वैसी ही साड़ी में ही बेड पे लेट गई… वैसे भी आज नींद मेरी आँखों से कोसों दूर थी…

Next part jaldi lana