बड़े घर की पाकीज़ा चूतें 1
मैं अलीना खान।
मैं 42 साल की भरे हुए जिस्म की मालकिन हूँ… जैसी कि आप देख ही सकते हैं।
मेरे सोहर आशिफ शहर के डीजीपी हैं। तो आप सोच ही सकते हैं हम किस सोसाइटी से बिलॉन्ग करते हैं। मेरे सोहर की उम्र 43 है। हमें सिर्फ एक साल का गैप है… और वो इसलिए क्योंकि हमारी लव मैरिज हुई थी। मैं अपने सोहर आशिफ से बहुत प्यार करती थी… या कहूँ करती हूँ। लेकिन एक दिन कुछ ऐसा हुआ… कि मेरा प्यार भी मेरी पाकीज़ा इज़्ज़त को नहीं बचा पाया। वो कैसे… आपको आगे धीरे-धीरे पता चलेगा।
अब आते हैं मेरी ननद पे। आशिफ की छोटी बहन।
इनाया खान।
जो अभी 29 साल की है। और फिगर से तो आप देख ही सकते हैं… जिसे देसी लैंग्वेज में पूरा पका हुआ माल कहा जाता है। और अनमैरिड भी। अनमैरिड इसलिए… क्योंकि वो भी अपने भाई की तरह कुछ बनना चाहती थी। और कुछ ही महीनों पहले ट्रेनिंग करके एसआई बनी थी। उसकी पोस्टिंग तो दूसरे शहर में थी… लेकिन मेरे सोहर के सोर्सेज़ की वजह से उसे उन्हीं के स्टेशन में एसआई के तौर पर जॉइनिंग लग गई। तो दोनों भाई-बहन एक ही स्टेशन में हैं। और हाँ… थोड़ी गरम मिज़ाज की।
अब आते हैं मेरी प्यारी सी स्वीटहार्ट इकलौती बेटी पे।
मुस्कान खान।
जो सिर्फ 20 साल की है। कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग के सेकंड ईयर में… क्योंकि इसे टेक्नोलॉजी से कुछ ज़्यादा ही प्यार है।
अब आते हैं मेरी देवरानी पे। मेरे सोहर के छोटे भाई की बेगम पे।
अमीरा खान।
जो 32 साल की… मेरी तरह भरे हुए जिस्म की मालकिन है। और इसके सोहर… यानी मेरे सोहर के छोटे भाई मेरे देवर इकबाल… जिनकी उम्र 36 साल है। और जिनका बिल्डिंग मटेरियल का बिज़नेस है।
अमीरा और इकबाल दोनों हमारे घर के पास वाले घर में ही रहते हैं। वैसे तो दोनों भाइयों में बहुत प्यार है… लेकिन हमारे पास प्रॉपर्टी कुछ ज़्यादा ही है… इसलिए।
अमीरा का एक बेटा है।
अब आते हैं स्टोरी पर।
अकील: अम्मी प्लीज़…
अमीरा: नहीं…
अलीना: क्या हुआ? किस लिए मना कर रही है?
अमीरा: पेट के लिए…
ये है अकील… अमीरा का इकलौता बेटा। जो पेट के लिए अपनी अम्मी से रिक्वेस्ट कर रहा है।
अलीना: पेट… कौनसा?
अमीरा: बता तेरी बड़ी अम्मी को।
अकील: बड़ी अम्मी… मुझे डॉग पालना है।
अलीना: क्या…??
अकील: प्लीज़ बड़ी अम्मी…
अलीना: अकील… अपने अब्बू से पूछा?
अमीरा: कहाँ पूछा… वो नहीं मानेंगे। इसलिए तो मैं मना कर रही हूँ।
अकील: प्लीज़ बड़ी अम्मी…
अलीना: ठीक है… जब शाम को आएँगे… मैं पूछ लूँगी।
अकील: नहीं… अभी पूछो। प्लीज़ बड़ी अम्मी…
अलीना: ठीक है बाबा… अभी पूछ लेती हूँ।
फिर मैंने इकबाल को कॉल किया। और जैसे-तैसे उसे मना ही लिया। लेकिन अपने घर में रखने के लिए।
अलीना: शाम को अब्बू के साथ चले जाना।
अकील: नहीं… मुझे अभी लेना है।
अमीरा: तो बड़ी अम्मी के साथ चला जा। आपी आप ही इसे ले जाइए। वैसे भी कुत्ता तो आपके घर में ही रहने वाला है।
अलीना: ठीक है… तो चलें। मैं इराक (ड्राइवर) से बोल देती हूँ कार निकालने के लिए।
अकील: ये… थैंक्स बड़ी अम्मी…
अब मैं आपको बता दूँ… हमारे घरों में नौकरानियाँ बहुत हैं। साफ़-सफ़ाई के लिए अलग… किचन में खाना बनाने के लिए अलग। वैसे ही ड्राइवर भी सबके अलग-अलग हैं। और सभी मुसलमान हैं।
फिर हम डॉग शॉप पर पहुँचे। और एक साइबेरियन ब्रीड व्हाइट डॉग ‘सैमोयेड’ को ख़रीद (अडॉप्ट) लिया। जो अकील की पसंद थी।
शॉप ओनर: मैडम… आप अपना एड्रेस इसपे लिख दीजिए। मैं आपका डॉग अपने एक वर्कर के साथ भेज दूँगा। वो आपको सब समझा देगा कैसे आपको इसके खान-पान का और इसके इन्फ़ेक्शन वग़ैरह का ध्यान कैसे रखना है। वो आपको सब डिटेल में समझा देगा।
अलीना: ठीक है। वैसे कब तक डिलीवरी करेंगे?
शॉप ओनर: शाम तक आपको आपका डॉग डिलीवर हो जाएगा।
अलीना: ओके… थैंक यू।
शॉप ओनर: माय प्लेज़र मैडम।
(शाम 5 बजे…)
अकील: बड़ी अम्मी… बड़ी अम्मी… अभी तक कोको क्यों नहीं आया?
अलीना: कोको…?? कौन… डॉग?
अकील: हाँ… नाम कैसा है?
अलीना: अच्छा है।
अकील: कब तक आएगा?
अलीना: बेटा सब्र करो… आ जाएगा। हम…
(शाम 6:30 पे…)
टिंग टोंग… टिंग टोंग… टिंग टोंग…
अलीना: मरियम (नौकरानी) देखना तो कौन है।
मरियम: जी बड़ी मालकिन… बड़ी मालकिन कोई कुत्ते को लेकर आया है।
अलीना: ठीक है… मैं देखती हूँ।
जैसे ही मैं बाहर निकली तो मुझे पहली बार उसे देखते ही घिन आने लगी। और एक अजीब सी बदबू भी… जो उसके गंदे कपड़ों से और उसके काले जिस्म के पसीने से मिली-जुली थी। उसने एक फटी-मैली सी शर्ट और नीचे एक गंदा सा सिला हुआ पैंट पहन रखा था। और उसके मुँह में शायद वो कुछ चबा रहा था… शायद तम्बाकू था। और चेहरा क्या बताऊँ… कोआला से भी काला। और सर पे कुछ गिने-चुने बाल थे… जो सफ़ेद पड़ने लगे थे। और दाढ़ी भी कुछ-कुछ सफ़ेद थी।
कालू: नमस्ते… हम कालिया हैं। लोग प्यार से हमें कालू बुलाते हैं। हम आपका कुत्ता लेकर आए हैं।
वैसे तो वो मुझसे 7-8 फ़ीट दूर था। लेकिन जैसे ही उसने ये सब बोलने के लिए मुँह खोला… वैसे ही मुझे शराब की स्मेल आने लगी। तो मुझे समझने में देर नहीं लगी… ये ड्रिंक भी करता है… करता क्या… करके आया भी है।
अलीना: (ये… ये आज क्या हुआ… एक अनजान कोआला से भी काले बुड्ढे ने मेरे जिस्म को जी भरके मसला… पूरी मनमानी की… यहाँ तक कि मेरे होंठों को तक चूस लिया… और मैं सब जानते हुए भी कुछ नहीं कर पाई…)
अब दोबारा मेरे दिमाग़ में वही सीन घूमने लगा। जब उसने मेरे मुलायम गुलाबी होंठों पे उसके काले फटे बदबूदार होंठ रखे थे… और दोबारा मेरी चूत में हलचल होने लगी।
अलीना: (होश में आते हुए) ये… ये मैं क्या-क्या सोच रही हूँ… छी… उस हरामख़ोर की इतनी हिम्मत कैसे हुई… उसकी तो मैं चमड़ी लुछवा दूँगी…
उस इंसीडेंस के बाद मैंने बहुत कोशिश की कि मैं आशिफ को सब कुछ बता दूँ। लेकिन ये एक मिसअंडरस्टैंडिंग भी हो सकती है… क्योंकि उसने मुझे फ़रीना समझके ही वो सब किया। तो उसे क्या पता कि बुर्के के अंदर मैं हूँ… (ऐसा मैंने सोचा था।) और मुझे आशिफ के ग़ुस्से के बारे में पता है। ऊपर से डीजीपी… कहीं ग़ुस्से में आकर कालू को जान से ही न मार दे। इसलिए मैंने ये बात किसी को नहीं बताई। और ये तय कर लिया कि अब मैं पेट शॉप पे हरगिज़ नहीं जाऊँगी।
(आशिफ को न बताना… इसे एक मिसअंडरस्टैंडिंग समझना मेरे लिए बहुत बुरा फ़ैसला होने वाला था…)
ऐसे ही ये महीना भी गुज़र गया। और दोबारा वही दिन आया।
अलीना: अकील… तुम इतने जल्दी कोको को इंजेक्शन लगवाके ले आए?
अकील: नहीं बड़ी अम्मी…
अलीना: क्या… आज तुम नहीं गए… फिर कौन?
अकील: वो अंकल आज से हर महीने कोको को घर पे आकर ही इंजेक्शन लगाया करेंगे।
अलीना: (शॉक्ड) क्या…
ऐसे ही टाइम निकलने लगा। और दोपहर का 1 बज गया। मैं अपने रूम में रेस्ट करने चली गई। और मेरी नींद 4 बजे खुली। मैं किचन में पानी पीने निकली। फिर मैंने किचन का काम कम्प्लीट किया। और ऐसे ही 6 बज गए। और बाहर मुझे कुछ आवाज़ें सुनाई दीं। जब मैंने जाके देखा तो… कालिया कोको को इंजेक्शन लगा रहा था। और जैसे ही मैं बाहर पहुँची तो मुझे देखके एक कमीनी हँसी उसके चेहरे पे फैल गई।
अलीना: (कमीना कहीं का… कैसे हँस रहा है…)
फिर मैं अंदर आ गई। और अपने रूम में जैसे ही घुसी…
कालू: मैडमजी…
अलीना: तुम मेरे रूम में क्या कर रहे हो?
कालू: वो आपसे बात करनी थी।
अलीना: मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी।
और फिर मैं गेट को बंद करने लगी। तो…
कालू: उस दिन पेट शॉप पे आप ही थी ना…
और जैसे ही मैंने ये सुना… मेरे हाथ अपने आप रुक गए। और कालू ने दोबारा आधे खुले गेट को पूरा खोल दिया।
अलीना: क्या… क्या बात कर रहे हो… कौनसे दिन… मैं कभी पेट शॉप पे नहीं गई।
कालू: मैंने पेट शॉप का तो नाम ही नहीं लिया। और वैसे भी नाटक करने की ज़रूरत नहीं है। मुझे अकील ने सब बता दिया है। उस दिन फ़रीना नहीं… आप थी। वैसे कैसा लगा मेरा लंड हाथ में लेकर?
ये सुनके मुझे बहुत ग़ुस्सा आया।
अलीना: ये… ये तू क्या बकवास कर रहा है।
कालू: बकवास कहाँ… सच कह रहा हूँ। आपकी तरह नरम चुचियाँ मैंने आज तक नहीं छुईं।
अलीना: तेरा ये गंदा मुँह बंद रख।
कालू: मुँह से याद आया… हाँ… और आपके ये नरम होंठ… बस अफ़सोस ये है कि नक़ाब के ऊपर से चूमने को मिले। अगर नंगे होते तो…
अब ये सब सुनके मैं ग़ुस्से से तिलमिला उठी। और एक तेज़ थप्पड़ कालू के लेफ्ट गाल पे ज़ड़ दिया।
अलीना: हरामख़ोर… निकल जा मेरे घर से।
थप्पड़ खाने के बाद कालू भी चुपचाप घर से निकल गया। और मैं बेड पे बैठके सोचने लगी।
अलीना: (ये सब बहुत हो रहा है… आज इसकी इतनी हिम्मत हो गई… कि मुझसे इतनी गंदी बातें करने लगा… अगर अभी इसे नहीं रोका तो आगे जाके इसकी हिम्मत और बढ़ जाएगी… नहीं… मुझे इसका इंतज़ाम करना होगा… अब मैं इस कमीने को अपने घर के आस-पास भी नहीं भटकने दूँगी…)
आशिफ को मैंने सच इसलिए नहीं बताया क्योंकि वैसे भी आशिफ बहुत ग़ुस्से वाले हैं। और जब पता चलेगा कि मेरे साथ कालिया ने क्या-क्या किया… तो कहीं ग़ुस्से में कालिया को मार ही न डाले। और ख़ून के जुर्म में पता नहीं क्या ही सज़ा मिले… नहीं… मैं अपने आशिफ पे कोई मुसीबत नहीं आने दूँगी। तभी मैंने कालू को झूठे केस में फँसाने की सोच ली। और घर के चार कॉस्टली शो-पीस छुपा दिए। और चोरी का इल्ज़ाम कालू पे डलवा दिया। और आशिफ की वजह से मुझे ज़्यादा कुछ करना भी नहीं पड़ा। फिर कालू को अरेस्ट कर लिया। और केस शुरू कर दिया। उसे बहुत मारा… लेकिन उसने कुछ नहीं बताया। बताता भी क्या… जब उसने कुछ किया ही नहीं। सिर्फ़ इतना बोलता रहा कि उसने कुछ नहीं चुराया… और जो सच भी था।
फिर सिक्योरिटी ऑफ़िसर्स ने छानबीन शुरू कर दी। कालू के घर में… पेट शॉप पे… और जहाँ-जहाँ उसके रिलेटिव्स थे सब में। लेकिन न तो कुछ सामान मिला… न ही पैसे। शक था कि शायद उसने सामान बेच दिया हो… लेकिन उससे बिके पैसे भी नहीं मिले। लेकिन मैंने उसे रिलीज़ नहीं होने दिया। और उसने डीजीपी के घर में चोरी की थी… तो आख़िर कोर्ट ने उसे 6 महीने के लिए जेल भेज दिया। और जब मुझे ये न्यूज़ मिली तो मुझे बहुत सुकून मिला।
(आफ़्टर 6 मंथ्स…)
कालिया जेल से रिलीज़ तो हो गया… लेकिन उसकी जॉब चली गई। और उसका घर जो किराये से था… वहाँ से भी उसे निकाल दिया। और जो उसके रिलेटिव्स थे… उन्होंने भी उसे लात मार दी। और दो महीने तक बेचारा दर-दर भटकता रहा।
कालू: उस साली मुली रंडी ने मुझसे सब कुछ छीन लिया। मुझे पूरी तरीके से बर्बाद कर दिया। लेकिन अब बस बहुत हो गया। मैं अपने पे बीती हर वो मार… हर वो बेइज़्ज़ती का बदला लूँगा।
(फिर एक दिन…)
(अमीरा की व्यू…)
ट्रिंग… ट्रिंग… ट्रिंग…
अमीरा: हेलो…
अनजान कॉलर: तेरे बेटे को ज़िंदा देखना चाहती है… तो चुपचाप मेरी बात सुन।
अमीरा: ये… ये तुम क्या बकवास कर रहे हो…
अनजान कॉलर: तेरे बेटे को हमने किडनैप किया है। इसलिए मुँह बंद करके चुपचाप मेरी बात सुन… वरना…
अमीरा: (अकील तो कॉलेज गया है… कॉलेज में फ़ोन करके पता करती हूँ…)
फिर मैंने कॉलेज में फ़ोन किया। तो पता चला कि अकील तो कॉलेज पहुँचा ही नहीं। फिर मैंने वही नंबर से कॉल लौटाया।
अनजान कॉलर: क्यूँ… पता कर लिया ना… अब चुपचाप मेरी बात कान खोलके सुन। सिक्योरिटी ऑफ़िसर को बताना भी मत। ये मुझे कहने की ज़रूरत नहीं… इतनी तो तू समझदार होगी ही।
अमीरा: (रोते हुए) तुम कौन हो… और मेरे अकील को क्यूँ किडनैप किया है… प्लीज़ उससे कुछ मत करना…
अनजान कॉलर: वो तो तेरे ऊपर है।
अमीरा: तुम चाहते क्या हो… प्लीज़ प्लीज़… मेरे अकील को छोड़ दो…
अनजान कॉलर: मुझे क्या चाहिए… ये मैं बाद में बताऊँगा। पहले तू तेरी एक फ़ोटो भेज।
अमीरा: क्या??
अनजान कॉलर: भेजती है या नहीं… या तेरे बेटे की चीखें सुनना चाहती है।
अमीरा: नहीं नहीं… प्लीज़ उससे कुछ मत करना… मैं भेजती हूँ…
फिर मैंने उसी नंबर पे व्हाट्सऐप पे अपने एक फ़ोटो सेंड कर दी।
अनजान कॉलर: (वाह साली… क्या लगती है ये…)
अमीरा: भेज दी मैंने… प्लीज़ अब तो मेरे बेटे को छोड़ दो…
अनजान कॉलर: पहले तो मैं सिर्फ़ पैसे की ही सोच रहा था।
अमीरा: तो बताओ तुम्हें कितने पैसे चाहिए… जितने माँगोगे मैं उतने दूँगी।
अनजान कॉलर: पैसे तो मैं लूँगा ही। लेकिन अब साथ में मैं कुछ और भी लूँगा।
अमीरा: (शॉक्ड) क्या…
अनजान कॉलर: वो मैं कल बताऊँगा।
अमीरा: (रोते हुए) नहीं… प्लीज़ ऐसा मत करो… मेरे बेटे को छोड़ दो…
फ़ोन कॉल डिसकनेक्टेड…
अमीरा: हेलो… हेलो…
फिर मैंने सब कुछ इकबाल को बता दिया (सिर्फ़ फ़ोटो वाली बात छोड़के)। इकबाल ने आशिफ भईजान को… और आशिफ भईजान ने पूरी फ़ोर्स को अकील को ढूँढने के लिए लगा दिया। ऐसे ही आज का दिन निकल गया। लेकिन अकील का कुछ पता नहीं चला।
अलीना: अमीरा… हिम्मत से काम लो… खुद को कंट्रोल करो।
अमीरा: (रोते हुए) कैसे हिम्मत रखूँ आपी… पूरा एक दिन हो गया और अकील का कुछ पता नहीं चला…
फिर उसी टाइम उसका दोबारा कॉल आया।
अनजान कॉलर: साली कुतिया… तूने सिक्योरिटी ऑफ़िस में शिकायत करी?
अमीरा: ज़रा तमीज़ से बात करो। और मैंने कोई कंप्लेंट नहीं करी है।
अनजान कॉलर: तो साली… सब अख़बारों में तेरे बेटे की लापता होने की ख़बर क्यूँ छप रही है?
अमीरा: मेरे सोहर ने दिया है। तुम्हारे मुताबिक़ मैंने किसी को कुछ नहीं बताया।
अनजान कॉलर: साली बहन की लोड़ी… सच कह रही है ना?
अमीरा: (ग़ुस्से में) मैंने कहा ना… तमीज़ से बात करो।
अनजान कॉलर: साली… लगता है तू तेरे बेटे की चीखें सुनके ही मानेगी।
अमीरा: ननहीं… ननहीं… प्लीज़… उससे कुछ मत करना।
अनजान कॉलर: तो मुझे तेरे मुँह से ‘ना’ नहीं सुनना है। मेरा जैसे मन करेगा मैं तुझसे वैसे बात करूँगा। समझी… चिनाल…
पहली बार किसी ने मुझे गाली दी थी। वो भी इतनी गंदी। मुझे ग़ुस्सा तो बहुत आ रहा था… लेकिन क्या कर सकती थी। सवाल मेरे इकलौते बेटे का जो था।
अमीरा: समझ गई…
अनजान कॉलर: शाबाश। चल… तेरी फ़ोटो भेज… ब्रा-पैंटी में।
अमीरा: (शॉक्ड) क्या…
अनजान कॉलर: समझ में नहीं आया क्या… कपड़े उतार… सिर्फ़ ब्रा-पैंटी में फ़ोटो भेज। और अगर तूने ‘ना’ कहा… तो जानती है ना क्या होगा…
मेरे पास कोई चारा नहीं था। तो मैंने काँपते हुए हाथों से ब्रा-पैंटी छोड़के… अपने साड़ी-कपड़े उतार दिए। और चेहरा छोड़के एक फ़ोटो क्लिक करके सेंड कर दी।
अनजान कॉलर: साली चिनाल… इसमें तेरा चेहरा तो दिख ही नहीं रहा।
अमीरा: प्लीज़… तुमने ब्रा-पैंटी बोला था… मैंने भेज दी।
अनजान कॉलर: साली… बिना चेहरे के मज़ा कैसे आएगा?
अमीरा: प्लीज़… मुझे और बेइज़्ज़त मत करो। तुम मुझे गालियाँ तो दे ही रहे हो ना… कम से कम मेरी इज़्ज़त तो मत नीलाम करो…
अनजान कॉलर: देख बहन की लोड़ी… आख़री बार बोलता हूँ… मुझे ‘ना’ नहीं सुनना है। जल्दी से एक बार और भेज… इस बार पूरी होनी चाहिए… वरना तेरे बेटे को…
अमीरा: (डरते हुए) नहीं नहीं… भेजती हूँ… प्लीज़ उससे कुछ मत करना… तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती हूँ…
आख़िरकार हारके मुझे फ़ोटो भेजनी ही पड़ी।
अनजान कॉलर: वाह… क्या जिस्म है… तुझे चोदने में मज़ा आएगा…
अमीरा: (शॉक्ड) क्या… क्या बकवास…
मैं इतना ही बोल पाई कि… मुझे किसी के चीखने की आवाज़ आई।
अमीरा: (घबराते हुए) ननहीं… ननहीं… प्लीज़… उसे मत मारो…
अनजान कॉलर: मैंने कहा था ना… ‘ना’ नहीं… समझी नहीं क्या?
अमीरा: समझ गई…
अनजान कॉलर: अहा… साली… तूने तो लंड खड़ा कर दिया… देखेगी… भेजूँ फ़ोटो?
अब ये सुनके मेरी आँखों से आँसू बहने लगे। मैं चाहती तो नहीं थी… लेकिन मना कर नहीं सकती थी।
अमीरा: (रोते हुए) हम्म…
अनजान कॉलर: चिनाल… मुँह से बोल…
अमीरा: (रोते हुए) देखूँगी…
अनजान कॉलर: ये हुई ना चिनालों वाली बात… ये ले… मज़े कर…
अब जैसे ही मेरी नज़र स्क्रीन पे पड़ी… मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं।
अमीरा: (ये… अ… हा… ये क्या है… इतना मोटा और इतना लंबा…)
ना चाहते हुए भी मैं अपनी नज़रें स्क्रीन से हटा नहीं पा रही थी। ऐसा नहीं था कि मुझे अच्छा लग रहा था। पहली बार इकबाल के अलावा किसी और का देखा था… वो भी इतना मोटा और लंबा… और उसपे कुछ टोपी सी भी थी… बस इसीलिए थोड़ी शॉक में आ गई थी। मेरा ध्यान तब टूटा जब उसने आगे बात करना शुरू किया।
अनजान कॉलर: कैसा लगा?
अमीरा: (काँपते हुए होठों से) आच्छा…
अनजान कॉलर: साफ़-साफ़ बोल…
अमीरा: अच्छा…
अनजान कॉलर: ये हुई ना बात चिनाल… कल तू मुझे पूरी नंगी होकर फ़ोटो भेजेगी… समझी…
ये सुनके तो मैं रोने ही लगी।
अमीरा: (रोते हुए) क्यूँ मेरी इज़्ज़त नीलाम कर रहे हो… प्लीज़ कुछ तो रहम करो…
अनजान कॉलर: साली… तेरे जैसा माल अगर नहीं चखा तो मेरे इतने बड़े लंड का क्या काम… कल 5 बजे मुझे तेरी फ़ोटो मिल जानी चाहिए। मुझे फ़ोन करने की ज़रूरत न पड़े। और अगर मुझे फ़ोन करना पड़ा… या तूने किसी को ये सब बताया तो तेरे बेटे की एक उँगली काटके तुझे गिफ़्ट में दूँगा… समझ गई चिनाल…
अमीरा: ननहीं… प्लीज़ ऐसा मत… (फ़ोन डिसकनेक्टेड) हेलो… हेलो… हेल्लोooo…
ये सुनके मेरी आँखों से आँसू रुक ही नहीं रहे थे। लेकिन फिर भी जैसे-तैसे मैंने खुद को संभाला ताकि किसी को शक भी न हो। और ऐसे ही आज का दिन भी निकल गया। फिर सुबह से दोपहर और शाम हो गई। शाम के 4 बज गए। लेकिन अभी तक अकील का कोई पता नहीं चला।
अब जैसे-जैसे टाइम निकलने लगा… वैसे-वैसे मेरी हालत ख़राब होने लगी। सिर्फ़ एक घंटे के अंदर मैं किसी अनजान आदमी… जिससे मैंने देखा तक नहीं… पता नहीं… बुड्ढा है… जवान है… या एडल्ट है… कुछ पता नहीं… सिवाय आवाज़ के… वो भी शायद बदलके ही बात कर रहा है… ऐसे अनजान आदमी के सामने मैं पूरी नंगी होंगी… ये सोचके ही मेरी आँखों से आँसू बहने लगे। मेरा दिल तक रोने लगा। मैं करना भी नहीं चाहती थी… लेकिन बात अकील की थी… मेरे इकलौते बेटे की…
फिर टाइम 4:30… 4:50 हो गया। सिर्फ़ 10 मिनट्स थे… और मैंने आख़िर हार मान ली। और उठके अपने रूम में जाने लगी। वैसे ही मुझे आवाज़ आई…
अकील: अम्मी… अम्मी… अम्मीiii…
अमीरा: अकील… अक़ीलlll… (गले लगाते हुए) मेरा बच्चा… (प्यार करते हुए) कहाँ चला गया था… और तुझे कौन ले गया था…
अकील: मुझे नहीं पता अम्मी… मुझे कौन कहाँ ले गया… हर टाइम मेरे आँखों पे पट्टी बँधी रहती थी…
इकबाल: फिर तू वहाँ से निकला कैसे?
अकील: अब्बू… डॉग वाले अंकल ने मुझे बचाया…
अमीरा: क्या…??
अकील: हाँ अम्मी… उनकी फ़ाइट भी हुई। और मुझे बचाते हुए चोट भी आई। वो देखिए…
और जब मैंने गेट पे देखा तो कालिया खड़ा हुआ था। उसकी शर्ट पूरी फट चुकी थी। चेहरे पे ख़ून… हाथ और पेट पे कई जगह चोट के निशान थे।
इकबाल: थैंक यू सो मच कालिया… तुमने बहुत बड़ा काम किया है।
कालू: नहीं सर जी… ये तो मेरा फ़र्ज़ था।
इकबाल: किडनैपर्स कितने थे और कौन थे… चेहरा देखा तुमने?
कालू: 4 लोग थे… चेहरा तो नहीं देख पाया… सबने मास्क पहने हुए थे।
इकबाल: (1 लाख की गड्डी देते हुए) ये लो… तुम्हारी बहादुरी का इनाम।
कालू: नहीं सर जी… हमें पैसे नहीं चाहिए।
इकबाल: तो क्या चाहिए?
कालू: रहने के लिए एक झोपड़ी… और काम दिलवा दीजिए। आपकी बहुत बड़ी मेहरबानी होगी।
इकबाल: इसमें मैं तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकता।
कालू: (मेरे पैर पकड़ते हुए) मैडमजी… आप ही कुछ बोलिए… हमने कोई चोरी नहीं की… फिर भी अलीना मैडम के इल्ज़ाम की वजह से हमारा घर… काम… सब कुछ छिन गया। और दो महीने से हम दर-दर भटकते रहे हैं… सिर्फ़ इतनी मेहरबानी कर दीजिए…
इकबाल: नहीं… मैं ऐसा नहीं कर सकता। भाभीजान ने मना किया है। (10 लाख देते हुए) तुम ये पूरे रखो।
कालू: नहीं सर जी… हमें पैसे नहीं चाहिए। (मेरी आँखों में देखते हुए) चलते हैं मैडमजी…
फिर कालिया हॉल से बाहर को जाने लगा।
अमीरा: आपने मना क्यूँ कर दिया… उसने हमारे अकील की जान बचाई है…
इकबाल: तो उसका इनाम मैं दे तो रहा था… उसने हमारे अकील को बचाया… उसके बदले 10 लाख तो दे रहा था…
अमीरा: आपको क्या लगता है… उसने सिर्फ़ अकील की जान बचाई… (आपको क्या पता… उसने मेरी इज़्ज़त आज एक अजनबी के सामने नीलाम होने से बचाई है…)
इकबाल: वैसे भी ये उनको अच्छा नहीं लगेगा…
अमीरा: उनसे मैं बात कर लूँगी।
इकबाल: और उसे किस काम पे रखोगी… और वो रहेगा कहाँ… हम्म?
अमीरा: अकील का ड्राइवर… वैसे भी आपने देखा ना… कॉलेज वैन से क्या हुआ था… वो किडनैप हो गया था। और कॉलोनी के सर्वेंट क्वार्टर्स हैं ना… वहाँ ही रहेगा। आप जाइए और कमिटी से एक रूम बुक कर दीजिए।
ये कहते हुए मैं कालू के पीछे भागी। और उसे रोकके जॉब पे रख लिया। साथ में कॉलोनी के सर्वेंट क्वार्टर में उसे एक रूम भी दिलवा दिया।
रात के 9:30 बजे…
रेहान: अम्मी… अम्मी…
अलीना: रेहान… तुम यहाँ… मैंने कहा तो था कि अकील मिल गया… फिर क्यूँ…
रेहान: अम्मी… मेरा ट्रांसफ़र इसी शहर में हुआ है। अब मैं इसी शहर का कलेक्टर हूँ। और आज से मैं यहीं रहूँगा।
अलीना: (ख़ुश होते हुए) क्या… (शामा की तरफ़ देखते हुए) इज़ दैट ट्रू?
शमा: येस अम्मी जी… इट्स एब्सोल्यूटली ट्रू।
रेहान खान… जिसकी उम्र 27 साल है… मेरा बेटा… जो इतनी कम उम्र में कलेक्टर बन गया। अब आते हैं इसकी वाइफ़ पे… यानी मेरी बहू पे।
शमा खान।
उम्र – 24 साल…
गोरी इतनी कि जिस्म पे छू भर लो तो लाल हो जाए…
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Nice story 2nd part kab aayega