अपने बेटे से ही चुदाई कर बैठी 2
Maa beta ki chudai ki shuruaat ki kahani:- पिछले पार्ट मे आपने पढ़ कि मैंने विक्रम का अकाउंट अनब्लॉक करके उससे बात शुरू की। उसने बताया कि वो अपनी मम्मी को नींद की गोली देकर उनकी चुदाई करता है और वीडियो बनाकर बेचता है। उसकी बातों और वीडियो से मेरी चूत गीली हो गई। रात को बेटे के आने के बाद मैंने अकाउंट लॉगआउट कर दिया।
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Maa beta ki chudai ki shuruaat ki hindi sex kahani
मैं भी अपने कमरे में आकर जल्दी से अपना अकाउंट खोलने लगी। विक्रम से की हुई बातें और उसकी भेजी हुई वीडियो मेरे दिमाग से निकल रही थीं। मैं बस जल्दी से जल्दी उसकी भेजी हुई वीडियो देखना चाहती थी।
फिर अकाउंट खोलके मैं विक्रम की भेजी हुई वीडियो देखने लगी। वीडियो में विक्रम की मम्मी बेड पर लेटी हुई थीं। उन्होंने ब्लाउज और पेटीकोट पहना हुआ था। विक्रम की मम्मी ने अपना पेटीकोट अपनी नाभि के नीचे बाँधा हुआ था।
जिससे उनका निकला हुआ पेट और गहरी नाभि काफी कामुक लग रही थी। विक्रम अपना एक हाथ अपनी मम्मी की नाभि के आस-पास घुमा रहा था। और उनकी नाभि में बार-बार उँगली डाल रहा था।
नाभि में उँगली डालते हुए विक्रम ने अपनी जीभ अपनी मम्मी की नाभि में डाल दी। फिर वो अपनी मम्मी की नाभि को चाटने लगा। वीडियो में विक्रम अपनी मम्मी की नाभि को चाट रहा था। और इधर मुझे अपनी नाभि में गुदगुदी महसूस हो रही थी।
विक्रम ने अपने चेहरे पर एक मास्क लगाया हुआ था। जिससे उसका चेहरा नहीं दिख रहा था। मगर उसकी जीभ अपनी मम्मी की नाभि जाती हुई साफ-साफ दिख रही थी। वो नजारा इतना कामुक था कि उसे देखने वाला कोई भी इंसान कुछ ही सेकंड में गरम हो सकता था।
और मेरा हाल भी कुछ ऐसा ही था। कुछ देर अपनी मम्मी की नाभि चाटने के बाद विक्रम उनका ब्लाउज खोलने लगा। और उसने एक हाथ से ब्लाउज के सारे हुक खोल दिए। और हुक के खुलते ही उसकी मम्मी के बड़े-बड़े दूध बाहर निकलके लटकने लगे।
उसकी मम्मी के दूध के साइज 38C का लग रहा था। विक्रम अपनी मम्मी के दोनों दूध को हल्के-हल्के दबा-दबा रहा था। दूध को दबाने के बाद विक्रम अपनी जीभ से अपनी मम्मी के निप्पल्स से खेलने लगा।
वो बड़े आराम-आराम से अपनी मम्मी के निप्पल्स पर अपनी जीभ फिरा रहा था। और देखने से ऐसा लग रहा था। जैसे कि उसकी मम्मी के निप्पल भी खड़े हो गए थे। फिर विक्रम उठके अपनी मम्मी के मुँह के पास आ गया।
उसने अपनी मम्मी को भी एक मास्क पहना रखा था। जिसमें से सिर्फ उनके होंठ दिख रहे थे। फिर विक्रम अपना लंड अपनी मम्मी के होठों पर रगड़ने लगा। विक्रम का लंड देखते ही मैं उसे पहचान गई कि ये विक्रम ही है।
पहले मुझे लग रहा था कि हो सकता है विक्रम मुझे इंप्रेस करने के लिए कोई पॉर्न वीडियो भी भेज सकता है। मगर उसका लंड देखने के बाद मेरे दिमाग से सारे शक निकल गए थे।
और अब मुझे पूरा यकीन हो गया था कि विक्रम सच में अपनी मम्मी की चुदाई करता है। विक्रम अपने लंड को अपनी मम्मी के होठों पे रगड़े जा रहा था। और वो बार-बार अपने लंड को अपनी मम्मी के मुँह में डाल रहा था। जो ठीक से अंदर नहीं जा रहा था।
क्योंकि उसके लंड का सुपाड़ा काफी मोटा था। इसी वजह से सिर्फ थोड़ा सा सुपाड़ा ही उसकी मम्मी के मुँह में जा रहा था। फिर विक्रम अपनी मम्मी के पैरों के पास आ गया। और उसने अपनी मम्मी की टाँगें मोड़के उनका पेटीकोट ऊपर कर दिया।
पेटीकोट के ऊपर होते ही विक्रम की मम्मी की चूत सामने आ गई थी। जिसपर छोटे-छोटे बाल थे। और उनकी चूत का चमड़ा बाहर निकला हुआ था। फिर विक्रम अपने लंड को अपनी मम्मी की चूत पर मारने लगा।
और बार-बार अपने लंड को उनकी चूत से निकले चमड़े पर रगड़ने लगा। विक्रम की वीडियो देखकर मेरी चूत पानी-पानी हो गई थी। जिस तरह विक्रम अपनी मम्मी के साथ खेल रहा था। अगर ऐसा वो किसी भी औरत के साथ करता—
तो वो औरत उसका लंड लिए बिना रह नहीं पाती। विक्रम बार-बार अपना लंड मम्मी की चूत पर रगड़ रहा था। फिर कुछ देर बाद वो अपना लंड आगे-पीछे करने लगा। और उसके लंड से गाढ़े पानी की धार निकलके उसकी मम्मी के पेट पर गिरने लगी।
विक्रम ने सारा पानी अपनी मम्मी की नाभि में डाल रहा था। और उसकी मम्मी की नाभि विक्रम के पानी से पूरी भर गई थी। पानी निकलने के बाद वीडियो खत्म हो गई। मगर उसकी इस 7-मिनट की वीडियो देखकर। मेरी चूत पूरी तरह गीली हो गई थी।
मैं लेटे-लेटे विक्रम और उसकी मम्मी के बारे में सोच रही थी। विक्रम अपनी मम्मी के बदन का मजा ले रहा था। मगर उसकी मम्मी को इस बात की भनक तक नहीं थी। विक्रम अपनी माँ के बदन के लिए पूरी तरह पागल था।
और मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि सच में इस दुनिया में ऐसे बच्चे भी हैं। जो अपनी माँ को चोदना चाहते हैं। अभी 1 दिन पहले तक मुझे माँ-बेटे के ऐसे रिश्ते के बारे में पता तक नहीं था।
मगर अब जब मैं ये जान गई थी। तो मेरे दिमाग से ये बात निकल ही नहीं रही थी। मैं लेटी-लेटी माँ-बेटे की चुदाई के बारे में सोच रही थी। मैं ये बात सोचते-सोचते सो गई। फिर शाम को मैं अपने बेटे के साथ मार्केट से सब्जी लेने गई।
अपने बेटे की बाइक पर बैठे-बैठे भी मुझे विक्रम की इनसेस्ट वाली बातें याद आ रही थीं। और तभी मेरे बेटे ने बाइक की ब्रेक लगा दी। और मेरे दूध उसकी पीठ पर दब गए। और जैसे ही मेरे साथ ऐसा हुआ—
पता नहीं क्यों, मगर पहली बार मैं अपने बेटे पर भी शक करने लगी। क्योंकि ऐसा पहली भी कई बार हुआ है। मगर आज जिंदगी में पहली बार मैं अपने बेटे पर शक कर रही थी। मगर फिर मैंने खुद को समझाया कि मेरा बेटा ऐसा नहीं है।
मैं इस बात को भूलकर सब्जी वगैरह लेने लगी। मेरा बेटा मेरे साथ खड़ा हुआ था। और आते-जाते लोग मुझे देख रहे थे। यहाँ तक कि सब्जी देने वाले आदमी की भी नजर मेरे दूध और मेरी कमर पर थी।
फिर सब्जी लेके मैं और मेरा बेटा वापस घर आ गए। और घर आकर हम दोनों चाय पीते हुए बातें करने लगे। चाय पीने के बाद मैं खाना बनाने लगी। और मेरा बेटा मोबाइल पर गेम खेलने लगा।
खाना बनाते हुए भी मैं इनसेस्ट रिश्तों के बारे में ही सोच रही थी। और मुझे बार-बार विक्रम और उसकी मम्मी की वीडियो दिखाई दे रही थी। और बार-बार विक्रम की बातें मेरे दिमाग में घूम रही थीं।
मैं कान में हेडफोन लगाके गाने सुनते हुए रोटी बना रही थी। तभी आधे घंटे बाद एकदम से मेरे बेटे ने मुझे पीछे से पकड़ लिया। मेरे बेटे का हाथ मेरी कमर पर था।
और वो मेरे कंधे पर सिर रखकर बड़े प्यार से बोला।
मेरा बेटा: क्या बना रही हो मम्मी?
अपने बेटे की बात सुनके मैंने हेडफोन निकाल दिए। मैं बोली—
मैं: भिंडी की सब्जी और रोटी बना रही हूँ।
मेरा बेटा: अच्छा, वैसे मम्मी मैं मंचूरियन लेने जा रहा हूँ। आप खाओगे?
मैं: ठीक है ले आ जाके।
फिर मेरा बेटा किचन से बाहर चला गया। मेरा बेटा अक्सर मुझे ऐसे पीछे से पकड़के अपना प्यार दिखाता था। मगर मैंने आज तक उसके ऊपर शक नहीं किया। मैं आज भी उसपर शक नहीं करना चाहती थी।
मगर माँ-बेटे की चुदाई की बातें मेरे दिमाग में घूम रही थीं। और वो बार-बार मुझे वो सोचने पर मजबूर कर रही थीं। जिसे मैं सोचना नहीं चाहती थी। माँ-बेटे की चुदाई के बारे में सोचते ही मेरा ध्यान पहली बार अपने बेटे के लंड पर गया।
जो मेरे बेटे के पकड़ने से मेरी गाँड पर लग रहा था। मैं खुद को समझाने लगी कि मेरा बेटा ऐसा नहीं है। मगर बार-बार मुझे उसके लंड का अहसास याद आ रहा था। फिर खाना बनाके मैं सीरियल देखने लगी।
फिर मेरा बेटा भी कुछ देर बाद आ गया। फिर 9 बजे हम दोनों खाना खाने बैठ गए। खाना खाने के बाद मेरा बेटा अपने कमरे में चला गया। मैं कमरे में आकर अपने पति से बात करने लगी।
अपने पति से बात करने के बाद मैं अपनी साड़ी निकालने लगी। साड़ी निकालते ही जब मेरी नजर शीशे पर गई। तो मैं खुद को शीशे में देखने लगी। मैं इस वक्त ब्लाउज और पेटीकोट में शीशे के सामने खड़ी हुई थी।
और मेरा रूप इस वक्त बहुत ही कामुक लग रहा था। ब्लाउज में कैद मेरे बड़े-बड़े दूध पहाड़ जैसे ताने हुए थे। और मेरा पेटीकोट मेरी नाभि के नीचे था। जो मुझे पूरी तरह कामुक दिखा रहा था।
अपने आपको ऐसे देखकर मैं इतना तो समझ गई थी कि क्यों लोग मुझे अभी भी घूर-घूर के देखते हैं। इस उम्र में भी मेरे बदन से कामुकता टपक रही थी। जिसे देखकर लोगों का लंड खड़ा हो जाता है।
मैं शीशे के सामने खड़ी-खड़ी अपना ब्लाउज खोलने लगी। और ब्लाउज और ब्रा खोलते ही मैं ऊपर से नंगी हो गई। और जैसे ही मैं ऊपर से नंगी हुई। तभी मेरा बेटा मेरे कमरे में आ गया। और मुझे देखकर वो बोला—
मेरा बेटा: वो मम्मी मैं आपसे ये कहने आया था कि कल मेरे कॉलेज की छुट्टी है। इसलिए कल सुबह मुझे जल्दी मत जगाना।
मैं: ठीक है बेटा।
अपनी बात बोलते ही मेरा बेटा कमरे से निकल गया। और उसके जाते ही मैं मैक्सी पहनने लगी। ये पहली बार नहीं था कि मेरे बेटे ने मुझे ऊपर से नंगा देखा था। मिडिल क्लास फैमिली में ये सब नॉर्मल होता है।
यहाँ औरतें बिना किसी शर्म के अपने बेटों के सामने कपड़े बदल लेती हैं। मैं भी अपने बेटे के सामने ऊपर के कपड़े बदल लेती हूँ। जो वो काफी टाइम से देखता आ रहा है। और मुझे भी इससे कोई दिक्कत नहीं है।
अपने बेटे के जाते ही मैं भी लाइट बंद करके लेट गई। कमरे में डिम लाइट जल रही थी। मैंने अपना दूसरा अकाउंट लॉगिन किया। और सीधा विक्रम की चैट खोलके उसे देखने लगी।
विक्रम ऑनलाइन बैठा हुआ था। उसकी चैट पर ग्रीन लाइट दिख रही थी। और जैसे ही मैंने उसकी चैट खोली। तभी विक्रम बोला—
विक्रम: हाई, आंटी।
मैं: हेलो।
विक्रम: आप इस वक्त ऑनलाइन हो। आपके पति नहीं हैं क्या?
मैं: मेरे पति दूसरे शहर में काम करते हैं। सिर्फ सैटरडे-संडे को आते हैं।
विक्रम: ओह्ह अच्छा, वैसे वीडियो कैसी लगी आंटी?
मैं: अच्छी थी, वैसे तुम भी इस वक्त ऑनलाइन हो। क्या हुआ आज अपनी मम्मी के साथ मजे नहीं कर रहे हो?
विक्रम: अरे नहीं आंटी, मैं सिर्फ सैटरडे या संडे को ही उन्हें नींद की गोली देता हूँ। और उसी दिन मैं उनके साथ चुदाई का मजा लेता हूँ।
मैं: ओह्ह मुझे लगा, तुम रोज उनके साथ ऐसा करते हो।
विक्रम: आंटी सच कहूँ तो मन तो मेरा हर रोज होता है। अगर मेरी मम्मी भी चुदाई के लिए हाँ बोल दें। तो मैं तो उन्हें कपड़े भी न पहनने दूँ। हर वक्त उन्हें नंगा रखूँ। और हर दिन उनकी चुदाई करूँ।
विक्रम की बातें सुनके मेरी चूत गरम होने लगी थी। वो अपनी माँ के बदन के लिए पूरी तरह से पागल था। उसकी बात सुनके मैं बोली—
मैं: विक्रम तुम अपनी माँ के साथ ये सब करते हो। क्या तुम्हें तुम्हारी उम्र की लड़की पसंद नहीं है?
विक्रम: नहीं, आंटी, मुझे सिर्फ भरे बदन वाली भाभियाँ और आंटियाँ ही पसंद हैं। लड़कियाँ बहुत नखरे दिखाती हैं।
मैं: अच्छा, मतलब तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड भी रही है?
विक्रम: हाँ आंटी एक कॉलेज टाइम में थी। चुदाई के वक्त बहुत नखरे दिखाती थी। ये मत करो वो मत करो। जैसे ही मैं अपना लंड उसकी चूत में डालता था। तो रोने लगती थी। कहती थी मेरा लंड बहुत बड़ा है।
मैं: हाँ ये तो है। तुम्हारा लंड वाकई बहुत बड़ा और मोटा है। कोई जवान लड़की इसे आसानी से नहीं ले पाएगी।
विक्रम: इसीलिए मुझे भरे बदन वाली बड़ी उम्र की औरतें पसंद हैं। वो चुदाई के वक्त कोई नखरे नहीं दिखाती हैं। वो खुलके चुदाई का मजा लेती हैं।
मैं: क्या इसी वजह से तुम अपनी मम्मी के लिए इनसेस्ट बने हो?
विक्रम: हाँ आंटी एक वजह ये भी है। और मेरे इनसेस्ट बनने में थोड़ा हाथ मम्मी का भी है।
मैं: तुम्हारी मम्मी का हाथ, वो कैसे?
विक्रम: आंटी मेरी उम्र का हर लड़का चुदाई वाली वीडियो देखता है। और उन वीडियो में हर लड़के को माँ-बेटे वाला वीडियो सबसे ज्यादा पसंद होता है। मैं भी वो वीडियो देखता था। और अपना लंड हिलाता था।
तभी से मुझे बड़ी उम्र की औरतें पसंद आने लगी थीं। और औरतों की गहरी नाभि मुझे सबसे ज्यादा पसंद है। तभी मेरी नजर अपनी मम्मी पर जाने लगी। क्योंकि वो मेरे सामने बिना किसी शर्म के कपड़े बदल लेती थीं।
मम्मी के बड़े-बड़े दूध, उनका मखमली मुलायम पेट, उनकी गहरी नाभि और उनकी बड़ी गाँड मैंने हर रोज देखा करता था। और मम्मी का बदन देखकर हल्के-हल्के मेरा लंड खड़ा होने लगा। मम्मी हमेशा अपनी साड़ी नाभि के नीचे बाँधती हैं।
और उनकी नाभि हर वक्त मेरे सामने रहती थी। जिसे देखकर मेरा लंड हमेशा खड़ा ही रहता था। मैं अपनी मम्मी को देखकर अपना लंड हिलाने लगा। और हल्के-हल्के मैं मम्मी को चुदाई की नजर से देखने लगा।
मैं: तो तुम कब से अपनी मम्मी की चुदाई कर रहे हो?
विक्रम: 3 महीने से मैं मम्मी को नींद की गोली देके मजे ले रहा हूँ आंटी। उससे पहले मैं बस उन्हें छूने का मौका ढूंढता रहता था। जब मैं मम्मी को बाइक पर कहीं लेके जाता था। तो जानबूझकर ब्रेक लगाता था।
जिससे मम्मी के बड़े-बड़े दूध मेरी पीठ पर लगते थे। और उनके दूध के अहसास से ही मेरा लंड खड़ा हो जाता था। और बार-बार उन्हें पीछे से पकड़ लेता था। और उन्हें प्यार दिखाते हुए उनकी कमर को सहलाता था।
और अपना लंड उनकी गाँड पर लगाता। और कई बार मम्मी के साथ सोते हुए नींद का बहाना करके उनके दूध दबा देता था। और कभी-कभी अपना लंड उनकी गाँड पर लगा देता था।
मैं: तुम्हारी मम्मी को कभी तुमपे शक नहीं हुआ?
विक्रम: नहीं आंटी मेरी मम्मी को अभी तक मुझपे शक नहीं हुआ। और कोई भी माँ अपने बेटे पर शक नहीं करती है। क्योंकि उन्हें लगता है। उनका बेटा उन्हें प्यार कर रहा है। मगर उस वक्त एक इनसेस्ट बेटा अपनी माँ के बदन की गर्मी ले रहा होता है।
मैं: क्या हर इनसेस्ट लड़का अपनी माँ के साथ यही सब हरकतें करता है?
विक्रम: हाँ आंटी हर इनसेस्ट लड़के ने अपनी माँ के साथ ये सब हरकतें की होती हैं। बस ये बात उसकी माँ नहीं जानती है। और अगर उन्हें शक होता भी है। तो हर माँ यही सोचती है कि मेरा बेटा ऐसा थोड़ी कर सकता है।
विक्रम की बातें सुनने के बाद मैं अपने बेटे के बारे में सोचने लगी। क्योंकि ये सारी हरकतें मेरे बेटे ने भी की थीं। मैं भी यही सोचती थी कि मेरा बेटा ऐसा थोड़ी कर सकता है।
जिंदगी में पहली बार मैं अपने बेटे की हरकतों को दूसरे नजरिए से देख रही थी। और अब मुझे अपने बेटे की हरकतों पर शक हो रहा था। मेरे दिमाग में यही चल रहा था कि कहीं मेरा बेटा भी विक्रम की तरह मेरे लिए इनसेस्ट तो नहीं है।
विक्रम: वैसे आंटी आप हर रात अकेली होती हो। तो क्या आपका मन नहीं करता चुदवाने का?
मैं: करता है।
विक्रम: तब आप कैसे अपनी चूत की गर्मी निकालती हो?
मैं: मेरे पास एक डिल्डो है। उसी से अपना काम चला लेती हूँ।
विक्रम: सही है आंटी, वैसे सच-सच बताना आंटी। क्या आपके पति आपको सैटिस्फाइड कर पाते हैं?
मैं: नहीं अब वो सैटिस्फाइड नहीं कर पाते हैं। वो ज्यादातर अपने काम की वजह से थके हुए होते हैं। और इस उम्र में सेक्स कम हो ही जाता है।
विक्रम: मुझे लगा ही था आंटी। वैसे हफ्ते में घर आकर आपके पति कितनी बार आपकी चुदाई करते हैं?
मैं: हफ्ते में नहीं महीने में 1-2 बार करते हैं बस।
विक्रम: ये तो बहुत ही कम है आंटी। आपकी उम्र में तो चुदाई की इच्छा बहुत ज्यादा होती है।
मैं: हाँ वो तो है। मगर हर औरत की सारी इच्छाएँ पूरी नहीं होती हैं।
विक्रम: आंटी कभी आपका मन नहीं किया। बाहर किसी और से चुदवाने का?
मैं: मन तो हुआ था। मगर डर भी लगता है। इसलिए ऐसा कभी किया नहीं।
विक्रम: क्या आपने अपने पति के अलावा किसी और का लंड लिया है?
मैं: हाँ शादी से पहले मेरा एक बॉयफ्रेंड था। उससे किया था।
विक्रम: वैसे आंटी क्या मैं आपका डिल्डो देख सकता हूँ?
मैं: उसमें क्या देखना, एक डिल्डो ही तो है?
विक्रम: प्लीज आंटी मैं बस देखना चाहता हूँ कि कैसा डिल्डो है। जो आपकी रसीली चूत में जाता है।
मैं: ठीक है रुको।
मैंने अलमारी खोलके डिल्डो निकाल लिया। और बेड पर रखकर उसकी एक फोटो ले ली। विक्रम को भेज दी। फोटो देखकर विक्रम बोला—
विक्रम: बिल्कुल मेरे लंड के बराबर है आंटी। लगता है आपके पति आपका बहुत ख्याल रखते हैं। खुद नहीं चोद पाते हैं। इसलिए आपको डिल्डो लाके दिया है।
मैं: ये मेरे पति ने नहीं, बल्कि मेरी एक फ्रेंड ने दिया है। मेरे पति को तो इसके बारे में पता तक नहीं है।
विक्रम: ओह्ह मतलब ये आपका छुपा हुआ दोस्त है। जो पति के बाहर जाने पर आपकी गर्मी निकालता है।
मैं: हा हा हा हा बस यही समझ लो।
अपनी बात बोलते ही विक्रम ने एक फोटो भेज दी। जिसमें उसका खुले सुपाड़े वाला मोटा लंड था। जो एकदम टाइट खड़ा हुआ था। विक्रम का लंड देखकर मेरी चूत गरम होने लगी थी। तभी विक्रम का मैसेज आया—
विक्रम: वैसे आंटी क्या ये नकली लंड इस लंड के जैसा मजा दे सकता है?
मैं: नहीं बिल्कुल नहीं, असली लंड का मजा अलग ही होता है। मगर ये नकली लंड भी कई औरतों के काम आता है। खासकर जो औरतें अकेली होती हैं।
विक्रम: वो तो है आंटी। वैसे क्या आपके पति का भी लंड मेरे जैसा है?
मैं: नहीं उनका लंड तुम्हारे लंड से छोटा है। तुम्हारा लंड वाकई काफी बड़ा और मोटा है।
विक्रम: आंटी सच-सच बताना। अगर मैं आपके पास होता। तो क्या आप मेरे लंड की सवारी करतीं?
मैं: बिल्कुल करतीं, ऐसा लंड की सवारी कौन औरत नहीं करना चाहेगी।
विक्रम ने अपनी बातों से मुझे गरम कर दिया था। और उसका खड़ा लंड देखकर मेरी चूत भी गीली हो गई थी। और अब मैं विक्रम से बातें करते हुए अपनी चूत को रगड़ रही थी।
विक्रम: आंटी आपको चूत चटवाना पसंद है?
मैं: हाँ पसंद है। मगर मेरे पति ज्यादा नहीं चाटते हैं।
विक्रम: लगता है आपके पति को तो पता ही नहीं है कि वो किस मजे को छोड़ रहे हैं। फिर तो वो आपकी गाँड को भी नहीं चाटते होंगे।
मैं: नहीं वो तो बिल्कुल भी नहीं चाटते हैं। तुम चाटते हो अपनी मम्मी की गाँड?
विक्रम: हाँ हाँ आंटी जब मैं अपनी मम्मी को नींद की गोली देता हूँ। तब मैं आधा-आधा एक-एक घंटा उनकी चूत, उनकी गाँड और उनकी नाभि को चाटता हूँ। और नींद में ही उनका पानी कई बार निकाल देता हूँ।
मैं: तो तुम्हारी मम्मी को कभी शक नहीं होता कि उनका साथ कुछ हुआ है?
विक्रम: नहीं आंटी उस गोली की वजह से उन्हें ये सब सपने जैसा लगता है। मैं कभी कोई सबूत नहीं छोड़ता हूँ। वैसे सच कहूँ आंटी। मैंने सिर्फ आपकी आवाज सुनी है। और आपकी सेक्सी आवाज सुनके मैं ये तो जान गया हूँ कि आप दिखने में भी बहुत सेक्सी होगीं।
मैं: अच्छा, सिर्फ मेरी आवाज सुनके तुम्हें ये पता चल गया।
विक्रम: हाँ आंटी, जिसकी आवाज शहद जैसे मीठी हो। वो दिखने में तो और भी कमाल होगी। वैसे आंटी क्या मैं आपका फिगर जान सकता हूँ?
मैं: 36C-34-40।
विक्रम: ओह माय गॉड, फिगर सुनके पता चल रहा है कि आप कितनी हॉट दिखती होगीं। वैसे आंटी आप कैसे कपड़े पहनना पसंद करती हो?
मैं: मैं हमेशा साड़ी ही पहनती हूँ।
विक्रम: आप साड़ी नाभि से नीचे बाँधती हो?
मैं: हाँ नीचे बाँधती हूँ।
विक्रम: फिर तो आपका फिगर और आपकी नाभि देखकर लोगों के लंड खड़े हो जाते होंगे।
मैं: हाँ लोग घूरते तो हैं। मगर मैं किसी को भाव नहीं देती हूँ।
विक्रम: वैसे आंटी आपकी नाभि दिखने में कैसे है?
मैं: तुम्हारी मम्मी जैसी ही है।
विक्रम: वाओ आंटी, क्या आपके पति ने कभी आपकी नाभि चाटी है?
मैं: नहीं सिर्फ किस किया है। मगर तुम्हारी तरह उन्होंने मेरी नाभि को कभी नहीं चाटा।
विक्रम: वैसे सच कहूँ आंटी। आपसे बात करके और आपकी नाभि के बारे में सोचकर। मेरा लंड पूरा पत्थर की तरह टाइट हो गया है।
मैं: हाँ वो तो मैंने फोटो में देखा था। वैसे तुमने लास्ट टाइम चुदाई कब की थी?
विक्रम: संडे को की थी। उस दिन मैंने 3 बार अपना पानी निकाला था। आज उसी चुदाई की वीडियो बेचने के लिए तो स्टोरी लगाई थी।
मैं: चुदाई वैसे ही ना, जैसे मुझे वीडियो में भेजी थी?
विक्रम: नहीं नहीं आंटी, वो वीडियो तो तब की है। जब मैंने ये सब करना शुरू किया था। अब तो मैं पूरी चुदाई करता हूँ। आप देखना चाहोगे वो वीडियो?
मैं: हाँ हाँ क्यों नहीं?
विक्रम: वैसे तो मैं ये वीडियो पैसे में बेचता हूँ। मगर आपको तो फ्री में दिखाई ही सकता हूँ। वैसे आंटी आपसे एक रिक्वेस्ट है। क्या आप मेरी रिक्वेस्ट पूरी करोगे प्लीज?
मैं: कैसे रिक्वेस्ट?
विक्रम: क्या आप मुझे अपनी नाभि की फोटो भेज सकती हो? जब से आपने मुझे अपनी नाभि के बारे में बताया है। तब से मैं सोच-सोच के पागल हो रहा हूँ कि आपकी नाभि कैसे दिखती होगी।
मैं: अगर मैं अभी की जगह सुबह अपनी नाभि दिखाऊँ। तो कोई दिक्कत तो नहीं?
विक्रम: क्यों आंटी अभी क्या हुआ?
मैं: अभी मैंने मैक्सी पहनी हुई है। और कमरे में अंधेरा भी है। बस इसीलिए कह रही थी।
विक्रम: आंटी इस वक्त मेरा लंड पूरा पत्थर बना हुआ है। मैं आपकी नाभि देखकर अपना पानी निकालना चाहता हूँ। आप बस अपनी नाभि ही दिखाना। बाकी मुझे कुछ मत दिखाना। प्लीज आंटी प्लीज।
विक्रम मेरी नाभि देखकर अपना पानी निकालना चाहता था। मैं उसकी और उसकी मम्मी की चुदाई वाली वीडियो देखना चाहती थी। और ऐसे फोटो भेजना मेरे लिए इतनी बड़ी बात भी नहीं थी। क्योंकि ऐसे कई फोटो मैं अपने पति को भेजती थी।
जब शुरू-शुरू में वो दूसरे शहर रहने लगे थे। फिर यही सब सोचते हुए मैंने अपनी मैक्सी को ऊपर किया। और बैक कैमरे से एक फोटो ले ली। जिससे फ्लैश की वजह से अंधेरे में भी फोटो अच्छी आई।
फोटो लेने के बाद मैं अपनी फोटो देखने लगी। जिसमें मेरा पूरा पेट खुला हुआ दिख रहा था। और मेरी नाभि साफ-साफ दिख रही थी। मैंने फोटो विक्रम को भेज दी। और मेरी फोटो देखते ही विक्रम पागल हो गया।
विक्रम: वाओ आंटी आपकी नाभि तो बहुत गहरी है। बिल्कुल मेरी मम्मी जैसी।
मैं: पसंद आई तुम्हें?
विक्रम: हाँ आंटी बहुत। अगर मैं अभी वहाँ होता। तो आपकी नाभि चाट-चाट के आपका पानी निकाल देता। वैसे आपकी नाभि देखकर मुझसे रुका नहीं जा रहा है। आप मेरी और मम्मी की वीडियो देखो। तब तक मैं आपकी नाभि देखकर अपना पानी निकाल देता हूँ।
फिर विक्रम ने मुझे अपनी वीडियो भेज दी। मैं उसकी वीडियो देखकर अपनी चूत को रगड़ने लगी। इस वक्त मेरी चूत पूरी गीली हो गई थी। और वो भाती की तरह गरम हो रही थी।
वीडियो के शुरू होते ही विक्रम की मम्मी मैक्सी पहने हुए लेटी होती हैं। विक्रम उनकी मैक्सी ऊपर करके। उनकी टाँगें फैला देता है। जिससे विक्रम की मम्मी की चूत दिखने लगती है। फिर विक्रम अपनी मम्मी की चूत चाटने लगता है।
