मुझे आपका लंड चाहिए बाबूजी भाग-1
Sasur ne bahu ko pela sex story:- दोस्तों मै आपकी दोस्त नैना आपके लिए एक और कहानी लेकर आई हूँ। यह कहानी है सुमन और उसके ससुर किशोरीलाल की. इस कहानी मे आप ससुर और बहू की चुदाई का मज़ा लेंगे। दोस्तों ये कहानी काफी लंबी है और कम से कम 2 से 3 भाग मे पूरी होगी। इस कहानी को पढ़कर आपको मज़ा ना आए तो आप मुझे जो चाहे मुझे बोलना। तो इस ससुर बहू की सेक्स स्टोरी को पढ़के आपको कैसा लगा नीचे कमेंट मे ज़रूर बताना। तो चलिये अब स्टोरी स्टार्ट करते है।
Sasur ne bahu ko pela sex story
मै सबसे पहले सुमन के बारे में आपको बता दूँ – सुमन कानपुर की रहने वाली थी. बरहवीं तक पढ़ी थी वह, पर उसके पिताजी ने आगे पढ़ाई नहीं कराई. बिज़नेस था उनका और काफी पैसा भी उनके पास था. सुमन वैसे भी पढ़ाई की तरफ आकर्षित नहीं थी. नौकरी का तो घरवालों ने सोचा भी नहीं थी और ना ही सुमन कोई ज़िद्द करने वाली थी. 23 उम्र में सुमन का बदन भरा हुआ था. 36 की 26 की कमर और 38 की गांड हो गयी थी. काफी नखरों में पली थी सुमन. उसका व्यवहार भी सुमन ही था. उसके पिता किशोरीलाल ने अपने बचपन के दोस्त किशोरीलाल के बेटे से बात चलाई.
किशोरीलाल कानपूर के आउटलेट पे रहते थे उनका बेटा उमेश मुंबई में पिता का कारोबार संभालता था. किशोरीलाल की पत्नी और उमेश की माँ मर चुकी थी. किशोरीलाल ने ही उमेश को पाला बड़ा किया था. किशोरीलाल बिज़नेस मैन हैं कानपूर के पर अब सब उमेश ही संभालता है। नंदलाल फ्री विचारों के वेल बिल्ट मेल है 48 की उम्र में भी वह जवान है. शादी जल्दी हो गयी थी और पत्नी की मौत समय से पहले तो किशोरीलाल के काफी सपने अधूरे रह गए थे जो शायद अब पूरे होने वाले थे.
रामवती (35 साल) नंदलाल की काम वाली, पकाने वाली, मालिश करने वाली और हाउसकीपर भी. दो साल पहले ही किशोरीलाल के घर का हिस्सा बनी और किशोरीलाल के बैडरूम का भी.
मनु 36 साल नंदलाल का ड्राइवर यह पांच साल से किशोरीलाल के साथ है. यह सब जानता है और जैसे जैसे कहानी आगे बढ़ेगी आप जान जाएंगे यह कैसा मनचला फ्री माइंडेड और रंगीला इंसान है.
जमुना 40 साल नंदलाल की बहन यह भी कानपूर में अपने पति के साथ रहती है. किशोरीलाल और इसकी कहानी भी बड़ी दिलचस्प है.
अब आगे बढ़ते है –सुमन को उमेश के घर आये हुए एक साल हुआ था. उमेश कारोबार संभालता और कानपुर और मुंबई में शफल करता। सुमन रामवती के साथ घर का काम संभालती और किशोरीलाल थोड़ा बहुत हिसाब किताब देख लेता, कभी क्लब चला जाता, कभी घर में ही रहता. एक्सरसाइज का बड़ा शौक था और एक जिम घर में भी बना लिया था. सुमन भी वहाँ कभी कभी लाइट एक्सरसाइज कर लेती. सुमन घर में कभी शलवार कमीज तो कभी साडी पहनती और रात को मैक्सी. पल्लू शादी कुछ महीने बाद ही छूट गया था, जब किशोरीलाल ने उसे मना किया था.
वह नए ज़माने की औरत थी और किशोरीलाल यह समझता था. उमेश इन दिनों घर पे ही था. अभी मुंबई का प्रोग्राम बना नहीं था. दोनों बाप बेटे काफी करीब थे दोस्त जैसे. किशोरीलाल ने अभी अभी नाश्ता किया था जो रामवती ने परोसा था। एक दम से किशोरीलाल को कुछ सुनाई दिया सुमन और उमेश के कमरे से. आवाज़ें बाहर तक आ रही थी, जो किशोरीलाल और रामवती सुन रहे थे. Sasur ne bahu ko pela sex story
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सुमन – इसीलिए तो मुंबई में ज़्यादा समय बिताते हो. ऐसा ही था तो शादी क्यों की. ?
उमेश – दोस्त हैं हम दोनों, इससे आगे सोचने की ज़रुरत नहीं.
सुमन – यह ऐसी तसवीरें निकालते है दोस्त.
उमेश – हाँ एक दोस्त की पार्टी में खींची गयी थी.
सुमन – ठीक है मनाओ पार्टी मुंबई में. अब की बार आने की जल्दी नहीं करना. हम रह लेंगे.
किशोरीलाल ने रामवती का चेहरा देखा इतने में उमेश भी नाश्ता करने आ गया और किशोरीलाल के सामने बैठा. किशोरीलाल ने रामवती को नाश्ता परोसने को बोल दिया उमेश को और उसे इशारे से वहाँ से जाने को कहा.
किशोरीलाल – सब ठीक?
उमेश – हाँ बाबूजी! बस वह राधिका के बारे में! आप जानते हैं न उसे! सिंह साब की बेटी! फ्री है थोड़ी सी! सुमन यूँ ही।
किशोरीलाल – बहु को मना उमेश. राधिका का छोड़! वह भी तो शादी शुदा है! तू अपनी शादी संभाल. अगर तुझे ठीक लगे तो सुमन को वहीँ ले जा मुंबई.
उमेश – बाबूजी आपको पता है मैं कभी मुंबई कभी पौंआ, कभी गुजरात, ट्रेवल करता हूँ. एक जगह नहीं रहता. सुमन को कैसे.
किशोरीलाल – भाई तू जान और तेरी पत्नी. मैंने भी बहुत ट्रेवल किया है. पर तेरी माँ को शिकायत का मौका कभी नहीं दिया.
उमेश – कैसे बाबूजी. आप ने यह सब कैसे मैनेज किया. ?
किशोरीलाल – खुली किताब बन के, किसी दिन तुझे समझाऊंगा. अगर समझ के मेरी बात हैंडल कर पाया तो ज़िन्दगी में मज़ा आएगा.
उमेश – मैं समझा नहीं बाबूजी.
किशोरीलाल – तू नाश्ता कर के दूकान पे जा. रात को एक एक पैक लगाके बात करेंगे.
उमेश – पिलायेंगे और क्लास भी लेंगे मेरी.
किशोरीलाल – ऐसे ही समझ, पर मेरा फार्मूला कामयाब हुआ था. देखते है तेरा क्या होता है.
उमेश – ठीक है. रात को फिर क्लास में मिलते हैं.
किशोरीलाल और उमेश मुस्कुराये. उमेश चला गया किशोरीलाल बंगले के बरामदे में पेपर पढ़ने आ गए. कुछ देर बाद सुमन वहाँ आयी चुप सी थी. किशोरीलाल ने उसकी तरफ देखा.
सुमन – बाबूजी कुछ दिन के लिए मैं मायके जाना चाहती हूँ.
किशोरीलाल ने पेपर नीचे रखा और उसे देख के मुस्कुराये.
किशोरीलाल – उससे कुछ ठीक नहीं होगा.
सुमन – मैं समझी नहीं बाबूजी.
किशोरीलाल – बैठ! मैं समझाता हूँ.
सुमन उनकी बगल वाली कुर्सी पे बैठ गयी.
किशोरीलाल – देख मैंने सब सुन लिया.
सुमन थोड़ी सी ऐम्बर्रेस्सेड थी वह नीचे देखने लगी.
किशोरीलाल – देख पति पत्नी में ऐसा होना चाहिए, पर ज़्यादा नहीं. जब मैं उमेश की उम्र का था मैं भी काफी बाहर रहता था. लोगों से मिलता था और लड़कियों से भी.
सुमन अचानक से उनके चेहरे को देखती है.
किशोरीलाल – खुला छोड़ दे अपने पति को.
सुमन उनकी बात समझ नहीं पायी.
किशोरीलाल – उसे बाँध के रखेगी तो वह गलती करेगा अगर बांधना है तो अपने प्यार से बाँध फिर वह बंधा रहेगा.
सुमन – बाबूजी आप ने वह तसवीरें देखी नहीं है. इसीलिए आप.
किशोरीलाल – बहु! देखने की ज़रुरत नहीं है. पर तुझे मेरी बात समझना होगी.
सुमन – कहिये बाबूजी.
किशोरीलाल – बेटी एक बात तू ध्यान से सुन ले, तेरी शादी इस घर में हुई है तेरा अच्छा बुरा मैं देखूंगा, तेरे पिताजी नहीं. तू फिर से मायके जाने की बात नहीं करेगी.
सुमन ने हाँ में सर हिला दिया.
किशोरीलाल – चल अच्छा है यह बात तो समझ गयी. अब दूसरी बात! और देख अब हम दोस्त की तरह बात कर रहे हैं. ससुर और बहु नहीं! ठीक?
सुमन ने फिर हाँ में सर हिला दिया.
किशोरीलाल – अब सोच तू उमेश है और मैं सुमन! ठीक?
सुमन ने सवालिया नज़रों से देखा उनको.
किशोरीलाल – मैं समझाता हूँ इतना टेंशन मत ले. देख अगर बोल रहा हूँ और एक दोस्त की तरह समझा रहा हूँ. मेरी बात का बुरा नहीं मानना.
सुमन – नहीं मानूंगी बाबूजी. आज आप से बात करके दिल हल्का हो रहा है.
किशोरीलाल – देख कुछ बातें दिमाग को खुला रख के सुनी और समझी जाती हैं. ठीक?
सुमन हाँ में सर हिला दी.
किशोरीलाल – अगर मैं सुमन हूँ और तू उमेश और तुझसे कोई गलती हो जाती है राधिका वाले मामले में. सोच के कुछ ऐसी सिचुएशन बनती है मुंबई मे और तुझे राधिका के साथ सोना पड़ता है.
सुमन एक दम से सकपका गयी, शर्मा भी रही थी और दंग भी थी, के किशोरीलाल उससे ऐसी बातें कर रहा है. ऐसा पहले तो नहीं हुआ था.
किशोरीलाल – चौंक गयी?
सुमन ने हाँ में सर हिला दिया.
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किशोरीलाल – और तू सो गयी राधिका के साथ और मुझे मैं सुमन हूँ यह बात मालूम पड़ती है मेरा तुझसे क्या सवाल रहना चाहिए? तू बता.
सुमन – मै. मैं. मैं बाबूजी क्या पूछूँगी? मर जाउंगी मैं तो.
किशोरीलाल – नहीं जानती है तेरी सास ने क्या पूछा था मुझसे? जब मुझसे यह गलती हुई थी. ?
सुमन ने ना में सर हिला दिया.
किशोरीलाल मुस्कुराये.
किशोरीलाल – उसने पूछा कैसा लगा किसी और के साथ? और तेरी सास यह अच्छे से पूछ रही थी गुस्से में नहीं.
सुमन – उन्होंने ऐसे कहा?
किशोरीलाल – हाँ! और मैं सकपका के रह गया. कुछ न कह सका. मैं सोचता रहा के उसने ऐसे क्यों पूछा. और फिर दो दिन बाद उसने असली बम गिराया.
सुमन – क्या बाबूजी! मैं समझी नहीं.
किशोरीलाल – उसने कहा अगर उससे कोई गलती हो जाती है तो मुझे भी वही सवाल करना पड़ेगा जो उसने मुझसे किया था.
सुमन दंग रहके उनका चेहरा देखने लगी.
किशोरीलाल – उसके बाद मेरी ऐसी मजाल कभी नहीं हुई. मैं उसे सब कुछ बताने लगा एक खुली किताब बन गया और हम एक दूसरे के और करीब आ गए. उसके बाद हमने सिर्फ एन्जॉय किया अपनी लाइफ में. यह समझ कर के हम हमेशा से एक दूसरे के ही रहेंगे चाहे कितने लोग हमारी ज़िन्दगी में क्यों न आएं हम साथ ही रहेंगे खुश. एक दूसरे के साथ.
सुमन – तो आपका मतलब है मैं भी उमेश को वह गलती करने दूँ. ?
किशोरीलाल – नहीं बहु! पर तू उसे रोक भी तो नहीं पाएगी. ज़िन्दगी का क्या भरोसा. मेरी बात तू समझी नहीं. देख अगर तुझे पता चला तो तू उससे पूछेगी न अगर पता ही नहीं चला तो क्या करेगी. Sasur ne bahu ko pela sex story
सुमन – मैं कंफ्यूज हूँ बाबूजी.
किशोरीलाल – मेरे यह कहने का मतलब है के जब आग नहीं लगी है तो पानी की बाल्टी क्यों भरना. वह जो करता है करे! तू क्यों टेंशन लेती है फ़ालतू में. तेरा इतना बड़ा घर है तेरे बाबूजी हैं तू जो चाहती है वैसे ही होता है इस घर में तो तू खुश रह न. क्यों टेंशन लेना फ़ालतू का? जब कुछ होगा और तुझे मालूम पड़ा तब देखेंगे क्या करना है. तब तक तो तू आराम से अपनी लाइफ एन्जॉय कर, खा पी, शॉपिंग कर दिल बहलाये रख.
सुमन – बाबूजी एक बात पूछूं अगर बुरा नहीं लगे तो. ?
किशोरीलाल – मैंने पहले ही कहा था हम दोस्त जैसे बात कर रहे हैं! है ना?
सुमन – बाबूजी अगर माँ जी भटक जाती तो, क्या आप उन्हें माफ़ करते. ?
किशोरीलाल ज़ोर ज़ोर से हंसने लगा सुमन उसके यह रिस्पांस से चौंक गयी किशोरीलाल ने हंसना बंद किया.
किशोरीलाल – मैंने कहा ना के हम और करीब आ गए और लाइफ एन्जॉय करने लगे. तूने पूछा नहीं कैसे.
सुमन – मैं पूछने वाली थी पर डर गयी.
किशोरीलाल – तू डर गयी और यहां मैं दोस्त की तरह तुझसे बात कर रहा हूँ! बात करू या नहीं?
सुमन – सॉरी बाबूजी.
किशोरीलाल – दोस्ती में नो सॉरी नो थैंक यू. चल बताता हूँ. तेरी सासु माँ मुझसे पूरा खुल गयी और मैं उससे. हम एक दूसरे से कुछ भी बात करते मेरा मतलब है पति पत्नी के सम्बन्ध को लेके.
सुमन थोड़ा शर्मायी.
किशोरीलाल – देख शर्मा मत. अब तू भी शादी शुदा है. यह सब समझ सकती है! है ना?
सुमन ने हाँ में सर हिला दिया.
किशोरीलाल – देख जब नयी नयी शादी होती है ना तो पहले एक साल बहुत अट्रैक्शन रहता है, फिर धीरे धीरे बच्चे होते हैं और फिर इतनी ज़िम्मेदारियाँ बढ़ जाती है के पति पत्नी बस अपने अपने किरदार निभाते हैं. रिश्ते में बदलाव आता है जो पति पत्नी एक दूसरे के बदन के दीवाने थे कुछ साल बाद एक दूसरे को हाथ तक नहीं लगाते. तूने भी देखा होगा यह.
सुमन – हाँ.
किशोरीलाल – कहाँ?
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सुमन – अपने ही घर में बाबूजी. पिताजी हमेशा माँ को डांटते ही रहतें हैं और माँ भी उनसे हमेशा नाराज़ रहती है.
किशोरीलाल – देखा तू ने यह सब इतने करीब से देखा और तू ही नहीं समझ पा रही है.
सुमन – बाबूजी प्लीज खुल के बताईये ना आप और माँजी ने क्या किया.
किशोरीलाल मुस्कुराये और सुमन की तरफ देखा.
किशोरीलाल – सुन पाएगी?
सुमन – आप ने ही कहा हम दोस्त हैं.
किशोरीलाल मुस्कुराये फिर से उसकी बात पे.
किशोरीलाल – हम ने हमारी सेक्स लाइफ खोल दी.
सुमन – मतलब?
किशोरीलाल – मतलब तेरी सास ने मुझे छूट दे दी और मैंने उसे.
सुमन – बाबूजी. यह! यह! आप क्या कह रहे हैं. ?
किशोरीलाल – सच बता रहा हूँ बहु! जब एक पति पत्नी यह मान के चलते हैं के उन्हें कुछ बाँध रहा नहीं है तो वह एक दूसरे के और करीब आ जातें हैं. मैंने और तेरी सास ने ऐसा ही किया. Sasur ne bahu ko pela sex story
सुमन – मलतब आप दोनों किसी और के साथ.
किशोरीलाल – किसी और के साथ नहीं बहुतों के साथ किया.
सुमन – बाबूजी? पर इससे आप दोनों करीब कैसे आये.
किशोरीलाल – करीब भी आये और एन्जॉय भी करने लगे के हम दूसरों की तरह एक खुशहाल शादी का ढोंग नहीं करते. सही में खुश रहतें हैं. देख बेटा जब तक एक इंसान का बदन खुश है न उसका दिमाग खुश रहता है. जिस दिन शादी में सेक्स बंद हो गया समझ लेना शादी ख़तम. और एक इंसान के साथ तुम कितने साल सेक्स एन्जॉय कर सकते हो. एक! दो! पता नहीं कितने.
सुमन – बाबूजी मुझे यकीन ही नहीं हो रहा है.
किशोरीलाल – अब उसका कोई इलाज नहीं है बहु मेरे पास.
सुमन – पर मैं क्या करू बाबूजी. मेरा प्रॉब्लम हल कैसे होगा.
किशोरीलाल – तेरे टेंशन ना लेने से. उमेश तुझे खुश रखता है न.
सुमन ने हाँ में सर हिला दिया.
किशोरीलाल – तो अच्छा है और जब तक खुश रखता है तू रह, और नहीं रख पाया तो भी उदास मत हो, यह मत कह के मैं मायके जाना चाहती हूँ, उससे कुछ हल नहीं होता. तू बात कर उमेश से अगर बात वहाँ तक पहुंची तो. उसे पूछ के वह बाहर एन्जॉय करना चाहता है तो उसे छूट दे. और अगर तुझे प्रॉब्लम नहीं है तो तब ही कर. या फिर मेरे और तेरे सास जैसे दोनों एन्जॉय करो साथ में किसी और के साथ. पर हर हालत में टेंशन न लो और अपने बदन को संतुष्ट रखो! दिमाग ठीक रहेगा.
सुमन – बाबूजी! आप को लगता है उमेश इसके लिए.
किशोरीलाल – अरे वह तो खुश हो जाएगा! पर देख बहु यह उन लोगों के लिए है जो इसे हैंडल कर सकतें हैं सब के लिए नहीं. इसमें डर भी रहता है.
सुमन – मैं जानती हूँ बाबूजी! दो धारी तलवार है.
किशोरीलाल – अब की न समझदारी वाली बात. देख अभी तू उमेश से झगड़ मत. अगर वह मुंबई जा रहा है तो अच्छे से मुस्कुराके भेज उसे और उसके आने के बाद भी कुछ पूछ मत. सवाल शादी के लिए अच्छे नहीं होते. और सच छुपता नहीं है. तू औरत है तू आसानी से पकड़ लेगी अगर कुछ गड़बड़ है तो.
सुमन उसकी बातें ध्यान से सुन रही थी.
किशोरीलाल – और उमेश मेरा बेटा है! कॉलेज में उसकी कोई गर्ल फ्रेंड नहीं थी. वह जान बूझ के अपनी शादी को खराब नहीं करेगा और मैंने मुंबई को करीब से देखा है वहाँ ना चाहते हुए भी कुछ ऐसी बातें करना पड़ती है. वह किसी से प्यार नहीं करेगा प्यार तो तुझसे ही करेगा. मेरा यकीन कर. और तू अपने आप को कम मत समझ. मुंबई की किसी लड़की से तू कम नहीं है.
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सुमन हल्का सा मुस्कुरा देती है.
सुमन – आपने पहले मुझसे बात क्यों नहीं की बाबूजी. आज आपसे बात करके ज़िन्दगी आसान लगने लगी है.
किशोरीलाल – ज़िन्दगी को भाव मत दे बहु. उसे अपनी जगह पे रख. तब मज़ा आएगा. समझी.
सुमन ने मुस्कुराके हाँ में सर हिला दिया.
किशोरीलाल – अब चाय पीने का बड़ा मन कर रहा है.
सुमन – मुझे भी! मैं बनाती हूँ! अभी लायी.
सुमन उठी और पलटी पहली बार किशोरीलाल ने उसकी कमर और उसका बदन इतने गौर से देखा था उसे अच्छा लगा. तीन दिन बीत गए उस दिन की बात को उमेश मुंबई चला गया सुमन के स्वभाव में बदलाव आने लगा वह किशोरीलाल के साथ ज़्यादा बात करने लगी। उमेश से भी फ़ोन पे बात करती पर सवाल नहीं करती। मुस्कुराती और खुश रहती घर के काम में बिजी रहती. आज सैटरडे था और हर सैटरडे की तरह किशोरीलाल क्लब जाने की तैयारी कर रहे थे। शाम के छह बज रहे थे और सुमन उनके कमरे में चाय देने आयी. Sasur ne bahu ko pela sex story
किशोरीलाल – उमेश का कोई फ़ोन आया?
सुमन – कल आया था बाबूजी! वह अहमदाबाद के लिए निकल रहे थे, राधिका साथ थी.
किशोरीलाल – बिज़नेस पार्टनर की बेटी है.
किशोरीलाल सुमन के सामने आये और उसके कंधे पे हाथ रख दिया.
किशोरीलाल – बुरा लग रहा है.
सुमन – नहीं बाबूजी. वह जो भी करें अगर बोल के करें तो अच्छा लगेगा.
किशोरीलाल – और अगर वह आगे बढ़ गया तो राधिका के साथ.?
सुमन – बोलेंगे तो अच्छा रहेगा! मैं मना कर नहीं सकती हूँ और करुँगी भी नहीं! आप की बातें मान के, बस टेंशन नहीं लूंगी.
किशोरीलाल – उसकी याद आती है?
सुमन – क्यों नहीं आएगी बाबूजी.
किशोरीलाल – वैसे नहीं.
सुमन – मैं समझ गयी आपका कहना बाबूजी.
वैसे भी आती है! बूढी तो नहीं हूँ ना.
किशोरीलाल – बिलकुल नहीं है! पता है जब दिल भारी हो तो क्या करना चाहिए?
सुमन – क्या बाबूजी?
किशोरीलाल – अपने बाबूजी के साथ बैठ के बातें करना चाहिए. यह अभी कायदा बनाया है.
सुमन मुस्कुराती है.
सुमन – करना तो मैं भी चाहती हूँ बाबूजी. पर आप तो क्लब जा रहे हैं.
किशोरीलाल – तो चल नहीं जाता. आज रामवती और मनु भी नहीं हैं हम दोनों खूब बातें करेंगे.
सुमन – सच! आप क्लब नहीं जाएंगे?
किशोरीलाल – कह दिया बहु! पर आज सुबह लेट उठा था. एक्सरसाइज नहीं कर पाया. वहीँ जिम में चलते हैं उधर मैं एक्सरसाइज करूँगा और तू बातें.
सुमन – क्या बाबूजी! यह ठीक थोड़ी है, आप एक्सरसाइज करेंगे और मैं बातें?
किशोरीलाल – तो तब ही एक्सरसाइज कर ले मेरे साथ, अच्छा ही है घर में बैठे रहने से मोटापा आ जाएगा.
सुमन – तो अब मैं आपको मोटी दिखती हूँ.
किशोरीलाल – अरे नहीं बहु! पर हो तो सकती है. अभी आदत लगेगी एक्सरसाइज की तो मोटापा छुएगा तक नहीं.
सुमन – पर कपडे नहीं हैं मेरे पास जिम में पहनने के लिए.
किशोरीलाल – मैं देता हूँ, तेरी सास के हैं, टी-शर्ट और ट्रैक पैंट! देख!
किशोरीलाल कप्बोर्ड के पास गए और खोल दिया नीचे कैबिनेट से एक काला पतला टी-शर्ट निकाला और पतली पैन्ट्स उन्होनें सुमन को दिखाया.
सुमन – बाबूजी यह काफी पतले और छोटे लगते हैं. मैं आपके सामने इन में?
किशोरीलाल फिर अपने हाथ सुमन के कंधे पे रखतें हैं.
किशोरीलाल – मुझे अच्छा लगेगा! अगर तू अपनी सास के कपडे पहनेगी तो.
सुमन – फिर छोटे ही सही बाबूजी! मैं पहनूंगी।
किशोरीलाल – जा पहन ले और जिम में आ जा मैं भी चेंज करके वहीँ आता हूँ।
सुमन – ठीक है बाबूजी!
कुछ देर बाद किशोरीलाल अपनी लंगोट में जिम पहुँच गए उन्होनें डम्बल्स उठाना शुरू कर दिए। दो मिनट बाद सुमन पहुंची, पर अंदर आने से शर्मा रही थी, किशोरीलाल उसके पास दरवाज़े तक गए। सुमन अपने हाथों से अपना सीना छुपा रही थी.
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किशोरीलाल – बहु अगर ज़्यादा ही अनकम्फ़र्ट हो, तो कुछ और पहन लो, तुम्हारी मर्ज़ी का.
सुमन – नहीं बाबूजी ठीक है! मैं अपने हाथ हटाती हूँ.
जैसे ही सुमन ने अपने हाथ हटाए किशोरीलाल का दिमाग खराब हो गया, उसकी आधी चूचियां बाहर थी, चूत के पास की जगह ट्रैक में कसी हुई थी कपडा बदन से चिपक गया था बदन और कपडे में ज़्यादा अंतर नहीं था.
किशोरीलाल – बहु मैं फिर कहता हूँ अगर अनकंफर्ट हो तो चेंज कर लो.
सुमन – नहीं बाबूजी. आज से इसी में आपके साथ एक्सरसाइज करुँगी और इसमें परफेक्ट बैठ के बताउंगी.
किशोरीलाल – यह हुई न बात. चल आजा. तुझे थोड़े फ्री हैंड कसरतें बताऊँ.
किशोरीलाल सुमन को अंदर ले जाता है सुमन उसके लंगोट को गौर से देखती है ऊपर से किशोरीलाल कुछ नहीं पहने थे. अंदर पहुँच के बहुत सारा इक्विपमेंट देख रही थी. सुमन ने किशोरीलाल ने उसे इशारा किया.
किशोरीलाल – यह सब मत देखो बहु! तुम्हारे काम का बस वॉकर है, पर उससे भी पहले तुम्हारी बॉडी फ्री करनी होगी फ्री हैंड एक्सरसाइज से. उसके बाद वॉकर! ठीक है?
सुमन – जैसे आप कहें.
किशोरीलाल – तो अब मुझे फॉलो करो ऐसे दोनों हाथ ऊपर फिर नीचे फिर ऊपर फिर नीचे.
सुमन – ऐसे?
किशोरीलाल – बिलकुल सांस अंदर और बाहर एक ले से लो.
ऐसे.किशोरीलाल सुमन को गाइड करते हुए खुद भी कर रहा था। कुछ देर बाद सुमन का पसीना छूटने लगा, किशोरीलाल ने उसे रोका.
किशोरीलाल – चलो अभी चेंज करते हैं.
किशोरीलाल अब झुकते हैं और अपने घुटने अपने हथेली से छूते हैं.
किशोरीलाल – अब कुछ देर यह करो. सुमन जैसे झुकी किशोरीलाल के सामने उसकी अब आधे से भी ज़्यादा बाहर आती चूचियां दिखने लगी. सुमन ने उनकी नज़रों को देखा पर रुकी नहीं, किशोरीलाल भी करते रहे, अब सुमन रुक गयी.
सुमन – बाबूजी नहीं हो रहा है बदन दर्द कर रहा है.
किशोरीलाल – तो बस कर दो बहु. पहला दिन है. आज के लिए इतना ही काफी है. कल देखेंगे.
सुमन – थैंक्स बाबूजी. मैं थोड़ा स्नान कर लेती हूँ. पसीना आ गया है.
किशोरीलाल – हाँ बहु! मैं भी आता हूँ थोड़ी देर में. फिर बैठते हैं साथ.
सुमन नीचे चली जाती है किशोरीलाल उसके नितम्ब को घूरते रहतें हैं फिर कसरत करने लगते हैं. आधे घंटे बाद किशोरीलाल नहा के और चेंज करके कुर्ते पयजामे में नीचे आतें हैं, सुमन चाय लेके आती है आँगन में, शलवार कमीज में. Sasur ne bahu ko pela sex story
सुमन – पहली चाय तो पी नहीं आपने इसीलिए और बना लायी.
किशोरीलाल – तुझे कुछ कहना नहीं पड़ता है बहु. समझ जाती है तू.
सुमन मुस्कुराके उनके हाथ एक चाय का प्याला दी और उनके सामने कुर्सी पे बैठके खुद एक कप ले ली. दो चुस्कियों के बाद उसने किशोरीलाल का चेहरा देखा.
सुमन – बाबूजी. आप से एक बात पूछूं?
किशोरीलाल – अरे पूछ ना, हर बात के लिए परमिशन चाहिए क्या. ?
सुमन हंस दी. सुमन – बाबूजी! आप और माँ किस किस के साथ.
किशोरीलाल मुस्कुराये और उसका चेहरा देखे.
किशोरीलाल – वह सब तू सुन के क्या करेगी बहु? और वह सब डिटेल्स देने में मैं भी कतराऊंगा.
सुमन – अच्छा! तो अब हम दोस्त नहीं है न?
किशोरीलाल – बहु! ऐसी बात नहीं है!
सुमन – तो खुल के बताईये न बाबूजी! आज तो यहां कोई सुनने वाला भी नहीं है.
किशोरीलाल – बहु तू बहुत ज़िद्दी है. शर्मा जायेगी तू.
सुमन – ट्रैक सूट में तो नहीं शर्मायी ना! तो अब क्यों शर्माउंगी?
किशोरीलाल – ठीक है. जब कुछ ज़्यादा हो रहा होगा तेरे लिए तो रोक देना.
सुमन – ठीक है.
किशोरीलाल – तो सुन. तू सच में सुन्ना चाहती है.
सुमन – बाबूजी. कहिये न! अब आप शर्मा रहे हैं.
किशोरीलाल – अच्छा बाबा. अब नहीं शर्माता बस. सुन. तेरी सास और मैं एक दूसरे से काफी कुछ डिसकस करते थे. खुलके बात करते थे.
सुमन – बाबूजी मेन मुद्दे पे आईये न. यह सब तो आप कह चुके हैं पहले भी.
किशोरीलाल – तू है न बड़ी खराब है. अपने बाबूजी को सता रही है.
सुमन – सताऊँगी नहीं तो आप नहीं बताएँगे. दोस्त! याद है न.
किशोरीलाल – हाँ हाँ याद है. ठीक है. तेरी सास अदला बदली के लिए राज़ी थी.
सुमन – क्या? अदला बदली?
किशोरीलाल – देख अब तू रोक रही है.
सुमन – अच्छा अच्छा सॉरी. कहिये.
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किशोरीलाल – तो हम मिले मेरे अच्छे दोस्त और उसकी बीवी से. फिर क्या था. अदला बदली हो गयी.
सुमन – बाबूजी. यह गलत हैं हाँ. आप कुछ नहीं बता रहे.
किशोरीलाल – तो तू क्या कमरे के डिटेल्स भी लेगी. समझ जा न के कमरे में क्या हुआ होगा.
सुमन – ठीक है बाबूजी. आप को नहीं बताना है तो छोड़िये. मैं भी कहाँ आपको दोस्त बना बैठी थी.
किशोरीलाल – अरे तू तो नाराज़ हो रही है. चल तुझे जो डिटेल्स चाहिए न वह तस्वीरों में बताता हूँ.
सुमन – मतलब. – आप ने तसवीरें खींची.
किशोरीलाल – हाँ! हम एक दूसरे के साथ फ्री थे.
सुमन – तो कहाँ है तसवीरें. ?
किशोरीलाल – कुछ मोबाइल में है कुछ सीडी में कुछ असली फोटो हैं.
सुमन – बाप रे. आप और माँ तो.
किशोरीलाल – काफी एन्जॉय किये. अब तुझे दिखाऊं की न दिखाऊं यह सोच में पड़ा हूँ.
सुमन – अगर आपने नहीं दिखाया तो मैं आपसे बात नहीं करुँगी.
किशोरीलाल – नंगी तसवीरें हैं बहु. कैसे दिखाऊं. ?
सुमन – जैसे एक दोस्त दूसरे दोस्त को दिखाता है.
किशोरीलाल – तुझे प्रॉब्लम नहीं होगा. ?
सुमन – नहीं होगा बाबूजी. आप के कहने पे मैंने ट्रैक सूट पहन लिया. तो अब इससे आगे शर्माने की बात क्या. ?
इतना सुनके किशोरीलाल खड़े हो गए सुमन जैसे ही खड़ी होने वाली थी, उसकी कमर में हल्का सा दर्द आया, किशोरीलाल ने झटके में उसकी कमर संभाल ली और उसे सहारा दिया.
आगे की कहानी अगले भाग मे, कहानी पसंद हो तो नीचे कमेंट मे ज़रूर बताना। इस कहानी का दूसरा भाग आप यहाँ पढ़ सकते है ==> मुझे आपका लंड चाहिए बाबूजी भाग-2
