मम्मी के बाद बहन को भी चोद दिया 1
Maa beta ki sexy chudai kahani:- मैंने अपनी मम्मी को पहले से ही नोटिस किया था कि उनकी बॉडी में दर्द रहता है। घर में वे हमेशा साड़ी पहनती थीं, पल्लू सीने पर रखती थीं, लेकिन जब वे झाड़ू लगातीं या बर्तन धोतीं, उनकी बॉडी का शेप साड़ी में दिखता रहता था।
Maa beta bhai bahan family sexy chudai kahani
एक दिन शाम को वे थककर लेट गई थीं। मैंने कहा—
मैं: मम्मी, आप थक गई हो, मैं आपकी मालिश कर देता हूँ।
पहले तो उन्होंने मना किया, लेकिन फिर हाँ कर दी।
मैं उनके पास बैठा और उनके कंधे से शुरू किया। उनकी साड़ी का पल्लू थोड़ा हट गया था। उनके कंधे नंगे थे और मैं उन पर तेल लगाकर धीरे-धीरे उनकी स्किन को दबाता गया।
मम्मी की साँस तेज़ होने लगी।
मैं: मम्मी, अगर आप साड़ी उतार दें तो मालिश अच्छे से हो जाएगी।
उन्होंने शर्माकर कहा—
मम्मी: बेटा, ये क्या बात कर रहा है।
लेकिन मैंने उनके हाथ पकड़कर कहा—
मैं: मम्मी, घर में तो हम दोनों ही हैं, कोई नहीं देखेगा।
मम्मी ने धीरे-धीरे अपनी साड़ी का पल्लू हटाया और ब्लाउज के हुक खोल दिए। उनकी बड़ी-बड़ी चूचियाँ ब्रा में बंधी थीं। मैंने उनकी ब्रा भी उतार दी और उनकी चूचियों को हाथों में ले लिया।
उनकी चूचियाँ इतनी बड़ी थीं कि दोनों हाथों से भी नहीं पकड़ पाता था। उनके निप्पल काले और मोटे थे। मैंने उन पर तेल लगाया और उन्हें मसलने लगा।
मम्मी की आवाज़ निकल रही थी—
मम्मी: बेटा… आआह्ह… धीरे से…
मैंने उनकी साड़ी का पेटीकोट भी उतार दिया। अब वे सिर्फ पैंटी में थीं। उनकी जाँघों पर भी तेल लगाया और उन्हें मसलता गया। उनकी पैंटी गीली हो चुकी थी। मैंने उनकी पैंटी भी उतार दी।
उनकी चूत के बाल थोड़े-थोड़े थे और उनकी चूत के होंठ मोटे थे। मैंने उनकी चूत पर तेल लगाया और उनकी क्लिट को उंगली से रगड़ने लगा। मम्मी की बॉडी काँप रही थी। उन्होंने अपनी टाँगें खोल दीं और कहा—
मम्मी: बेटा, अब मत रुक, मुझे और कर।
मैंने अपने कपड़े उतारे और अपना लंड उनके मुँह के पास ले गया। मम्मी ने अपनी जीभ निकालकर मेरे लंड को चाटना शुरू कर दिया। उन्होंने मेरा लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगीं। उनकी जीभ मेरे लंड के नीचे लग रही थी और वे धीरे-धीरे मेरा पूरा लंड मुँह में ले रही थीं।
मैं उनके सर को पकड़कर उनके मुँह में अपना लंड अंदर-बाहर कर रहा था। मम्मी की आँखों से पानी आ रहा था लेकिन वे रुक नहीं रही थीं।
फिर मैंने उन्हें लिटाया और उनकी टाँगें खोलकर उनकी चूत में अपना लंड डाल दिया। मम्मी की चूत टाइट थी। मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाए और पूरा लंड अंदर तक डाल दिया।
मम्मी चिल्लाईं—
मम्मी: बेटा… बहुत बड़ा है तेरा… धीरे से कर…
लेकिन मैं रुक नहीं रहा था। उनकी चूत से आवाज़ आ रही थी— “छप… छप…”
मैं उनकी चूचियों को दबाता हुआ उनकी चूत चोद रहा था। मम्मी की टाँगें मेरी कमर के आसपास लिपट गई थीं और वे मुझे और अंदर खींच रही थीं।
मैंने उनको डॉगी स्टाइल में करने के लिए कहा। वे घुटनों के बल बैठ गईं और मैंने पीछे से उनकी चूत में लंड डाल दिया। उनकी गाँड बड़ी थी और मैं उनकी गाँड को पकड़कर ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगा रहा था। मम्मी की सारी बॉडी हिल रही थी। उनके बूब्स नीचे लटक रहे थे और मैं उन्हें पकड़कर मसलता जा रहा था।
मम्मी की आवाज़ निकल रही थी—
मम्मी: बेटा… और ज़ोर से… मुझे और मार…
मैंने उनको उठाकर अपनी गोद में बैठा लिया और उनकी चूत में लंड डालकर उन्हें ऊपर-नीचे करने लगा। मम्मी की चूचियाँ मेरे मुँह के सामने थीं और मैं उनके निप्पल चूस रहा था। उनकी चूत से पानी निकल रहा था और वो मेरे लंड पर बह रहा था।
मम्मी ने मेरा मुँह पकड़कर अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी और हम दोनों एक-दूसरे को चूमने लगे। मैं उनकी गाँड को पकड़कर उन्हें ऊपर-नीचे कर रहा था।
फिर मैंने उनको वॉल के सामने खड़ा किया और पीछे से उनकी चूत में लंड डाल दिया। मम्मी के हाथ वॉल पर थे और मैं उनकी कमर पकड़कर ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगा रहा था। उनकी चूत से आवाज़ आ रही थी और वे चिल्ला रही थीं—
मम्मी: बेटा… मैं झड़ने वाली हूँ…
मैंने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी और उनकी चूत में झड़ गया। मेरा गरम-गरम कम उनकी चूत में भर गया और कुछ बाहर निकलकर उनकी जाँघों पर बहने लगा।
मम्मी थककर ज़मीन पर बैठ गईं। उनकी साँस तेज़ चल रही थी और उनकी चूत से मेरा कम निकल रहा था। मैंने उनके पास बैठकर उनकी चूचियों को छुआ और कहा—
मैं: मम्मी, आपकी मालिश हो गई?
मम्मी ने शर्माकर कहा—
मम्मी: हाँ बेटा, बहुत अच्छे से हो गई।
उस दिन के बाद हम दोनों रोज़ ऐसे ही करते थे। घर में मम्मी हमेशा साड़ी पहनती थीं लेकिन जब हम दोनों अकेले होते थे तो वे अपनी साड़ी उतार देती थीं और मैं उनकी चूत चोदता था। कभी-कभी वे खुद मेरे पास आती थीं और मेरा लंड पकड़कर मुँह में ले लेती थीं।
हम दोनों का रिश्ता अब सिर्फ मम्मी-बेटा नहीं था, अब हम दोनों एक-दूसरे के लिए लवर बन चुके थे।
मम्मी अभी भी नंगी ज़मीन पर बैठी थीं, उनकी चूचियाँ धीरे-धीरे साँस के साथ ऊपर-नीचे हो रही थीं। उनकी जाँघों पर मेरा गरम कम अभी भी चमक रहा था। मैंने उनके पास जाकर उनकी नंगी कमर को हाथ से सहलाते हुए धीरे से पूछा—
मैं: मम्मी… आप पापा के अलावा किसी और के साथ भी चुद चुकी हो?
मम्मी ने शर्माते हुए अपनी आँखें नीचे कीं, लेकिन फिर धीरे से सर उठाकर मुझे देखा। उनकी साँस अभी भी तेज़ थी। वे बोलीं—
मम्मी: हाँ बेटा… मैंने तुम्हारे पापा के अलावा भी किसी के साथ चुदाई की है।
मैंने उनकी चूचियों को हाथ में लेते हुए पूछा—
मैं: कौन था मम्मी?
मम्मी ने एक गहरी साँस ली और कहा—
मम्मी: तुम्हारे पापा के दोस्त… संजय भैया। उन्होंने मुझे चोदा… और वो भी तुम्हारे पापा और उनकी वाइफ के सामने।
मैंने हैरान होकर पूछा—
मैं: पापा के सामने?
मम्मी ने सर हिलाकर हाँ कहा और उठकर कपबोर्ड से एक पुराना लैपटॉप निकाल लाईं। वे नंगी ही बैठ गईं और लैपटॉप खोलकर एक वीडियो फाइल चला दी।
स्क्रीन पर संजय अंकल मम्मी के सामने खड़े थे। पापा एक कुर्सी पर बैठकर देख रहे थे और संजय अंकल की वाइफ भी एक तरफ बैठी हुई थीं। वीडियो में पहले संजय अंकल ने मम्मी को अपनी तरफ खींच लिया और उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। मम्मी की आँखें बंद हो गई थीं और वे धीरे-धीरे उनके किस का जवाब दे रही थीं।
संजय अंकल ने मम्मी के होंठों को चूसते हुए उनके ब्लाउज के ऊपर से उनकी बड़ी चूचियों को मसलना शुरू कर दिया। उनके हाथ ब्लाउज के कपड़े को दबाते हुए मम्मी की चूचियों को निचोड़ रहे थे। मम्मी की साँस तेज़ हो रही थी और वे धीरे से आवाज़ निकाल रही थीं—
मम्मी: संजय जी… आआह्ह…
फिर संजय अंकल ने मम्मी के ब्लाउज के हुक खोल दिए और उसे उतार दिया। अब मम्मी सिर्फ ब्रा में थीं। उनकी बड़ी चूचियाँ ब्रा के अंदर दब रही थीं। संजय अंकल ने ब्रा के हुक भी खोल दिए और मम्मी की दोनों चूचियों को हाथों में ले लिया। उनके काले और मोटे निप्पल अब साफ दिखाई दे रहे थे।
संजय अंकल ने मम्मी की एक चूची को मुँह में ले लिया और ज़ोर से चूसने लगे। मम्मी की टाँगें काँप रही थीं और वे उनके सर को अपने हाथों से पकड़कर अपनी चूची उनके मुँह में और अंदर दबा रही थीं। संजय अंकल एक चूची चूसकर दूसरी चूची पर आ गए और उसे भी ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगे।
मम्मी की आवाज़ निकल रही थी—
मम्मी: संजय जी… आप बहुत ज़ोर से चूस रहे हो… आआह्ह…
फिर संजय अंकल ने मम्मी की साड़ी का पल्लू हटाया और पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया। साड़ी और पेटीकोट दोनों ज़मीन पर गिर गए। अब मम्मी सिर्फ पैंटी में खड़ी थीं। संजय अंकल ने मम्मी की जाँघों को हाथों से सहलाते हुए उनकी पैंटी के अंदर हाथ डाल दिया और उनकी चूत को उंगली से रगड़ने लगे।
मम्मी की बॉडी काँप रही थी।
संजय अंकल: भाभी, आपकी चूत बहुत गीली हो गई है।
मम्मी ने शर्माते हुए कहा—
मम्मी: संजय जी… आप ऐसे मत कीजिए…
लेकिन संजय अंकल ने उनकी पैंटी को नीचे खींचकर उतार दिया। अब मम्मी बिल्कुल नंगी हो चुकी थीं। संजय अंकल ने मम्मी को बेड पर लिटा दिया और उनकी टाँगें खोलकर उनकी चूत पर अपना मुँह रख दिया। उन्होंने मम्मी की चूत के होंठों को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया और फिर उनकी क्लिट को मुँह में लेकर चूसने लगे।
मम्मी की आवाज़ निकल रही थी—
मम्मी: संजय जी… आआह्ह… आपकी जीभ… बहुत अच्छा लग रहा है…
संजय अंकल मम्मी की चूत को ज़ोर-ज़ोर से चूस रहे थे और उनकी जीभ अंदर-बाहर कर रहे थे। मम्मी की टाँगें काँप रही थीं और वे अपनी चूत को संजय अंकल के मुँह पर दबा रही थीं।
फिर संजय अंकल ने खड़े होकर अपने पैंट और अंडरवियर उतार दिए। उनका मोटा लंड बाहर आ गया। मम्मी ने अपने घुटनों के बल बैठकर उनका लंड हाथों में ले लिया और अपनी जीभ निकालकर उसे चाटना शुरू कर दिया। संजय अंकल की साँस तेज़ हो रही थी। मम्मी ने उनका पूरा लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगीं। उनकी जीभ लंड के नीचे लग रही थी और वे धीरे-धीरे उनका लंड अंदर-बाहर कर रही थीं।
संजय अंकल ने मम्मी के सर को पकड़कर उनके मुँह में अपना लंड अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। मम्मी की आँखों से पानी आ रहा था लेकिन वे रुक नहीं रही थीं।
संजय अंकल: भाभी… आप बहुत अच्छा चूसती हो…
फिर संजय अंकल ने मम्मी को उठाकर बेड पर लिटा दिया और उनकी टाँगें खोलकर उनकी चूत में अपना लंड डाल दिया।
मम्मी चिल्लाईं—
मम्मी: संजय जी… बहुत बड़ा है… धीरे से…
लेकिन संजय अंकल ने धीरे-धीरे धक्के लगाकर पूरा लंड अंदर तक डाल दिया और फिर ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने लगे।
मम्मी की चूत से आवाज़ आ रही थी— “छप… छप…”
संजय अंकल उनकी चूचियों को दबाते हुए उनकी चूत चोद रहे थे। मम्मी की टाँगें उनकी कमर के आसपास लिपट गई थीं और वे उन्हें और अंदर खींच रही थीं।
फिर संजय अंकल ने मम्मी को डॉगी स्टाइल में करने के लिए कहा। मम्मी घुटनों के बल बैठ गईं और संजय अंकल ने पीछे से उनकी चूत में लंड डाल दिया। उनकी गाँड को पकड़कर ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगा रहे थे। मम्मी की सारी बॉडी हिल रही थी। उनके बूब्स नीचे लटक रहे थे और संजय अंकल उन्हें पकड़कर मसल रहे थे।
संजय अंकल: भाभी… आपकी गाँड बहुत बड़ी है…
मम्मी: संजय जी… आप और ज़ोर से मारो… मुझे और चोदो…
वीडियो में मम्मी की आवाज़ आ रही थी—
मम्मी: संजय जी… मैं झड़ने वाली हूँ…
संजय अंकल ने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी और मम्मी की चूत में झड़ गए। उनका गरम-गरम कम उनकी चूत में भर गया और कुछ बाहर निकलकर उनकी जाँघों पर बहने लगा।
वीडियो खत्म होने के बाद मम्मी ने लैपटॉप बंद कर दिया और मुझे देखा। उनकी आँखों में शर्म और उत्तेजना दोनों थी। मैंने उनके नंगे जिस्म को हाथों से सहलाते हुए कहा—
मैं: मम्मी… आप संजय अंकल के साथ बहुत मज़ेदार लग रही थीं।
मम्मी ने शर्माते हुए कहा—
मम्मी: बेटा… वो दिन बहुत अलग था। अब तू ही मुझे चोदा कर।
मैंने उनको उठाकर बेड पर लिटा दिया और फिर से उनकी चूत में अपना लंड डाल दिया। अब हम दोनों एक-दूसरे के लिए और भी खुलकर चुदाई करते थे।
अगला दिन जब मैं सुबह उठा तो मम्मी नंगी ही मेरे पास लेटी हुई थीं। उनकी चूचियाँ मेरे सीने से चिपकी हुई थीं और उनकी टाँग मेरी टाँगों के बीच थी। मैंने धीरे से उनके निप्पल को उंगली से छुआ और मम्मी की आँखें खुल गईं। वे मुस्कुराईं और मुझे किस किया।
मम्मी: बेटा, आज तेरी दीदी आने वाली है ससुराल से। कुछ दिन यहाँ रहेंगी।
शाम को जब दरवाज़े की घंटी बजी, मैंने जल्दी से कपड़े पहने और दरवाज़ा खोला। दीदी खड़ी थीं, उनका चेहरा थकावट से भरा हुआ था लेकिन उनकी बड़ी चूचियाँ और मोटी गाँड अभी भी बहुत सेक्सी लग रही थीं। उन्होंने एक पतला सा सलवार सूट पहना हुआ था जिसमें उनकी चूचियाँ साफ दिखाई दे रही थीं।
दीदी: अरे भैया, कैसे हो?
दीदी ने मुझे गले लगाया। उनकी चूचियाँ मेरे सीने से रगड़ रही थीं।
मैं: मैं ठीक हूँ दीदी। आप आई हैं तो घर में खुशबू आ गई।
दीदी हँस पड़ीं। मम्मी ने उन्हें अंदर बुलाया और चाय बनाने लगीं। मैं दीदी के साथ बैठ गया। दीदी अपनी टाँगें फैलाकर बैठी थीं और उनकी चूत की शेप सलवार में साफ दिखाई दे रही थी।
रात के खाने के बाद मम्मी ने कहा—
मम्मी: बेटा, तू दीदी को उनके कमरे में ले जा। मैं थक गई हूँ।
मैं दीदी को उनके कमरे में ले गया। कमरा थोड़ा छोटा था और सिर्फ एक ही बेड था।
दीदी: भैया, मैं यहाँ अकेली कैसे सोऊँगी?
मैंने मुस्कुराते हुए कहा—
मैं: दीदी, अगर आपको कोई प्रॉब्लम न हो तो मैं भी यहीं सो सकता हूँ। बेड बड़ा है।
दीदी शर्मा गईं लेकिन कुछ नहीं बोलीं। वे बाथरूम में गईं कपड़े बदलने। जब वे बाहर आईं तो सिर्फ एक पतली सी नाइटी पहने हुई थीं। नाइटी इतनी पतली थी कि उनकी ब्रा और पैंटी साफ दिखाई दे रही थीं। उनकी बड़ी चूचियाँ नाइटी के अंदर हिल रही थीं।
मैं भी सिर्फ अंडरवियर में लेट गया। दीदी बेड पर आईं और मेरे पास लेट गईं। उनकी साँस की गरम हवा मेरे चेहरे पर पड़ रही थी।
दीदी: भैया… आप बहुत बड़े हो गए हो।
मैं: दीदी, आप भी बहुत सुंदर हो।
मैंने उनके हाथ को पकड़ लिया। दीदी ने हाथ नहीं छुड़ाया। मैंने उनके हाथ को अपने लंड पर रख दिया जो अब तकड़ा हो चुका था।
दीदी: भैया… ये क्या कर रहे हो?
दीदी ने पूछा लेकिन उनका हाथ मेरे लंड पर ही रहा।
मैं: दीदी, आप भी तो चाहती हैं।
दीदी ने कोई जवाब नहीं दिया। मैंने उनकी नाइटी को ऊपर किया और उनकी ब्रा के ऊपर से उनकी चूचियों को मसलना शुरू कर दिया। दीदी की साँस तेज़ हो गई।

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