भाभी ने दिलाई मम्मी की चूत 6
Bete ne chodi maa ki chut hindi kahani:- हेलो दोस्तो, मैं हाजिर हूँ। आपके लिए इस सेक्सी स्टोरी का नेक्स्ट पार्ट लेकर। पढ़िए और मुझे कमेन्ट करना मत भूलना। हम दोनों लगभग 5 मिनट तक एक-दूसरे के होठों को चूसते रहे। फिर मम्मी ने मेरे होठों को छोड़ दिया। मैं बैठक में आ गया।
Part 5==> भाभी ने दिलाई मम्मी की चूत 5
और मम्मी भी मेरे पीछे बैठक में आ गईं।
मैं: मम्मी आपकी चाय कहाँ है?
मम्मी: बेटा अब चाय की क्या जरूरत है। तूने मेरा मुँह वैसे ही मीठा कर दिया है।
मम्मी की बात सुनके मुझे हँसी आ गई। और हम दोनों हँसने लगे। फिर हम सबने खाना खाया। और मम्मी अपने सीरियल देखने लगीं।
कुछ देर बाद जब भाभी अपने कमरे में चली गईं। तब मम्मी भी मेरे पास आ गईं। मैं बेड पर सिर्फ अंडरवियर में लेटा हुआ था। और मेरा हाथ अंडरवियर के अंदर लंड सहला रहा था।
मम्मी ने दरवाजा बंद कर दिया। और कुंडी लगा दी। जबकि रोज मम्मी सिर्फ दरवाजा बंद करती थीं। मगर कभी कुंडी नहीं लगाती थीं। मम्मी मुझे देखते हुए अपनी साड़ी खोलने लगीं।
साड़ी अलग होते ही मम्मी की नाभि और बड़े-बड़े दूध ब्लाउज में दिखने लगे। मैं बेड से उठके मम्मी के पास गया। और उनके होठों को चूमने लगा।
मम्मी भी मेरे होठों को चूसने लगीं। और मैं मम्मी की गाँड दबाने लगा। मम्मी का हाथ भी अब मेरे अंडरवियर के अंदर था। और वो मेरे लंड को सहला रही थीं।
मैं मम्मी को किस करते हुए बेड पर ले आया। और उन्हें लिटाके उनके ऊपर लेट गया। मम्मी बहुत प्यार से मेरे होठों को चूस रही थीं। और मैं उनके पेटीकोट का नाड़ा खोल रहा था।
मगर नाड़ा खोलते हुए उनके पेटीकोट में गाँठ लग गई। मैंने नीचे देखा तो मम्मी भी देखकर हँसने लगीं। मम्मी बेड से उठ गईं।
और उन्होंने पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया। नाड़ा खुलते ही पेटीकोट नीचे गिर गया। मगर मैं मम्मी की आँखों में देख रहा था।
मैंने मम्मी का बालों का जूड़ा खोल दिया। और अब उनके बाल खुलके और भी ज्यादा अच्छे लग रहे थे। मैंने अपना बैग खोला और मम्मी को एक गिफ्ट दिया।
मम्मी के हाथ में गिफ्ट था। और मैं मम्मी का ब्लाउज खोल रहा था। अब मम्मी मेरे सामने बिल्कुल नंगी खड़ी थीं। मम्मी ने अपना गिफ्ट खोला।
उसमें एक ब्लैक नाइटी थी। बिल्कुल ट्रांसपेरेंट जिसमें से सब कुछ दिख सकता था। मैं अपना मुँह मम्मी के पास ले गया।
मैं: मम्मी मैं ये आपके लिए लेकर आया हूँ। आप बाथरूम में जाओ। और इसे पहनके दिखाओ।
मम्मी एक वाइफ की तरह मेरी बातें मान रही थीं। मम्मी वो नाइटी लेकर बाथरूम में चली गईं। और मैं बेड पर लेट गया।
10 मिनट बाद मम्मी कमरे में आईं।
मम्मी देखने में एक जन्नत की अप्सरा लग रही थीं। नाइटी मम्मी की चूत तक आ रही थी। उसमें से मम्मी की चूत का चीरा साफ दिख रहा था।
और ऊपर से नाइटी में आधे दूध बाहर निकल रहे थे। और बाकी दूध अंदर से भी साफ दिख रहे थे। मम्मी मेरे पास आ गईं।
मैंने मम्मी को लिटा दिया। मम्मी के लेटते ही नाइटी ऊपर हो गई। और मम्मी की चूत और गाँड खुल गई। मम्मी ने खुद अपनी टाँगें फैला लीं। और मैंने अपना मुँह मम्मी की चूत पर लगा दिया।
मैं मम्मी की चूत चाट रहा था। और मैंने ऊपर से मम्मी के दूध बाहर निकाल लिए। मम्मी के दूध दबाते हुए मैं उनकी चूत चाट रहा था।
मम्मी को मजा आ रहा था। और इस बार वो मेरा सिर अपनी चूत पर दबा रही थीं। कुछ देर मैं मम्मी की चूत चाटता रहा। फिर मैंने अपनी एक उँगली मम्मी की गाँड में डाल दी।
मम्मी को दर्द हुआ। क्योंकि मुझे भी उनकी गाँड टाइट लगी।
मम्मी: बेटा वहाँ मत कर। बहुत दर्द होता है।
थोड़ी देर चूत चाटने के बाद मैं मम्मी के बगल में लेट गया। अब मम्मी उठके मेरे लंड के पास बैठ गईं। और उन्होंने मेरा अंडरवियर निकालके साइड में फेंक दिया।
मम्मी ने मेरा लंड हाथ में पकड़ लिया। मम्मी ने मेरे लंड की खाल नीचे की। जिससे मेरा सुपाड़ा बाहर निकल आया। मेरा गुलाबी सुपाड़ा गीला हो रहा था।
मैंने मम्मी को तकिया के नीचे से कंडोम निकालके दिया।
मैं: मम्मी मैं ये कंडोम लाया था। ये आम के स्वाद का है। इसे लगा दो।
मम्मी ने कंडोम हाथ में लिया। मगर उसे बेड के दूसरी तरफ रख दिया। और अगले ही पल उन्होंने मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया। मुझे इस बात का बिल्कुल अहसास नहीं था।
कि मम्मी मेरा लंड चूस सकती हैं। मगर वो मेरा आधे से ज्यादा लंड मुँह में ले चुकी थीं। और एक माहिर खिलाड़ी की तरह मेरा लंड चूस रही थीं।
मुझे मम्मी से लंड चुसवाने में बहुत मजा आ रहा था। मैं बार-बार उनके दूध दबा रहा था। और मम्मी मेरे सुपाड़े पर जीभ फिरा रही थीं।
भाभी की चुदाई करके मैं एक्सपर्ट बन गया था। मैं खुद के पानी को कंट्रोल कर सकता था। और आज वही मेरे काम आ रहा था।
मम्मी से जब रहा नहीं गया। तो उन्होंने मेरा लंड मुँह से निकाला। और मेरे ऊपर आ गईं। मम्मी ने मेरा लंड पकड़ा। और उसे अपनी चूत में डाल लिया।
अब मम्मी मेरे लंड पर बैठी हुई थीं। मम्मी ने नाइटी निकालके बेड पर रख दी। अब मम्मी और मैं बिल्कुल नंगे थे। मैंने अपने हाथ मम्मी के दूध पर रख दिए।
और मम्मी अपनी कमर चलाने लगीं। मम्मी की चूत मुझे भाभी से भी ज्यादा अच्छी लग रही थी। और मम्मी की चूत की गर्मी भाभी से भी ज्यादा थी।
मम्मी ऊपर-नीचे होने लगीं। और मेरे लंड को एक परम आनंद मिलने लगा। मम्मी के दूध जोर-जोर से उछल रहे थे। और जब मम्मी थक जातीं। तो वो अपनी कमर चलाके चुदाई करने लगतीं।
कुछ देर बाद जब मम्मी के पैरों में दर्द हो गया। तो वो मेरे लंड से उतर गईं। मम्मी को मुझे कुछ कहना नहीं पड़ा। वो खुद मेरे सामने डॉगी स्टाइल में आ गईं।
और अपना मुँह नीचे करके गाँड ऊपर उठा ली। मम्मी ने अपनी टाँगें काफी चौड़ी कर रखी थीं। जिससे उनकी चूत का छेद बिल्कुल खुलके दिख रहा था।
मैं मम्मी के पीछे गया। और उनका हाथ पकड़के अपने लंड पर रख दिया। मम्मी ने पीछे मुड़के देखा। और एक हल्की सी मुस्कान दी। उन्होंने मेरा लंड पकड़ा और उसे अंदर डाल दिया।
मैं मम्मी की गाँड पकड़के धक्के लगाने लगा। लंड आराम से अंदर-बाहर हो रहा था। इसीलिए मैं बीच-बीच में तेज धक्के लगा रहा था। जिससे थप-थप की काफी आवाज हो रही थी।
मम्मी: बेटा धक्के आआह्ह आराम से लगा। आवाज बहुत आआह्ह्ह बहुत हो रही है। ओह्ह्ह माँ उम्म म्मम्म कहीं बहू सुन न ले।
मैंने धक्के थोड़े धीमे कर दिए। मम्मी की चुदाई करने में बहुत मजा आ रहा था। और मम्मी भी आआह्ह उम्म म्मम्म करके बहुत मजे ले रही थीं।
मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया। और मम्मी खुद ही सीधी हो गईं। उन्होंने एक तकिया लिया। और खुद अपने नीचे लगा लिया। मम्मी की फूली हुई चूत ऊपर उठ गई।
मम्मी को कुछ भी बताने की जरूरत नहीं पड़ रही थी। वो मेरे मन की बात पहले ही जान लेती थीं। इस बार मम्मी ने खुद मेरा लंड पकड़के अंदर डाल लिया।
मेरा लंड मम्मी की चूत में घुसा हुआ था। और मैंने मम्मी के पैर पकड़े। और उनके पैर की उँगलियाँ मुँह में लेकर चूसने लगा।
मम्मी के चेहरे के भाव बदलने लगे। उन्हें ऐसा करवाने में बहुत मजा आ रहा था। साथ के साथ मैं धक्के भी लगा रहा था।
अब मम्मी ने मुझे अपने आप से चिपका लिया। और हम दोनों के जिस्म रगड़ खाने लगे। मैं लंड अंदर-बाहर कर रहा था। और मम्मी ने मेरी गाँड पर हाथ रखा।
और उसे अपनी चूत की तरफ धक्के देने लगीं। मम्मी खुलके मेरे साथ मजा कर रही थीं। हम दोनों की चुदाई करते हुए काफी टाइम हो गया था।
मैं अपना पानी मम्मी की नाभि में डालना चाहता था। मगर मम्मी ने अपनी टाँगें मेरी कमर में जकड़ रखी थीं। मैं धक्के लगाता रहा।
और कुछ ही देर में मम्मी की चूत में ही झड़ गया। मैं और मम्मी पसीने-पसीने हो गए। मम्मी आँखें बंद किए। तेज-तेज साँसें ले रही थीं।
और मैं उनके दूध के ऊपर लेटा हुआ था। जब मैंने अपना लंड निकाला। तो मम्मी की चूत से एक सफेद झरना बहने लगा। और बिस्तर को गीला करने लगा।
मैं मम्मी के बगल में लेट गया। और उन्हें देखने लगा। मम्मी भी मेरी तरफ देख रही थीं। फिर मैंने मम्मी को पकड़ लिया। और उन्होंने भी मुझे खुद से चिपका लिया।
मैं: थैंक यू मम्मी मुझे वो खुशी देने के लिए। जिसके लिए मैं तरस रहा था।
मम्मी: बेटा इस खुशी ने अब हमारा रिश्ता बदल दिया है। एक माँ-बेटे के जिस्मानी संबंध ये दुनिया कभी बर्दाश्त नहीं करती है।
मैं: मम्मी हमारा रिश्ता वही है। बस इस कमरे के अंदर मैं और आप एक-दूसरे को कुछ खुशी के पल देते हैं। क्या आपको ये गलत लगता है?
मम्मी: बेटा अब सही और गलत कुछ भी नहीं है। क्योंकि हम दोनों ने ही इस रिश्ते को जन्म दिया है।
मैं: मम्मी मायने हम दोनों की खुशी रखती है। अगर आप मेरे साथ कमरे में खुश हो। तो आपने कुछ गलत नहीं किया है।
मम्मी: बेटा तुम कह तो सही रहे हो। हमारा रिश्ता इस कमरे के अंदर कुछ और है। मगर बाहर तो हम दोनों माँ-बेटे ही हैं।
मैं: वैसे मम्मी पापा के जाने के बाद आपने चुदाई नहीं करवाई। मगर फिर भी आपकी चूत खुली हुई है।
मम्मी मेरी बात सुनके हँसने लगीं।
मैं: बताओ ना मम्मी आपकी चूत खुली हुई कैसे है। जबकि भाभी बता रही थीं। कि अगर औरत चुदाई न करवाए। तो उसकी चूत सिकुड़ जाती है। मगर आपकी चूत तो बिल्कुल टाइट नहीं है।
मम्मी: वो इसीलिए कि मैं चूत में कुछ डालती हूँ।
मैं: मम्मी आप भी भाभी की तरह उँगली करती हो क्या?
मम्मी: नहीं बेटा उँगली नहीं। वो तेल की बोतल है। वो अंदर डालती हूँ।
मैं: मम्मी आप सच में तेल की बोतल डालती हो। वो तो काफी बड़ी और मोटी है। आप कैसे उसे डाल लेती हो।
मम्मी: हाँ थोड़ी मोटी तो है। मगर तेरे इस शैतान जैसे ही है। तेरी इसी शैतान की वजह से मेरे अंदर चुदाई की भावना दोबारा आ गई।
मैं: मम्मी मेरे लंड ने ऐसा कर दिया?
मम्मी: बेटा जब तेरे पापा हमें छोड़के चले गए। तब से तू मेरे साथ सो रहा है।
शुरू-शुरू में मेरे मन में भी कोई भी गंदे विचार नहीं थे। मगर जब मुझे भी सेक्स की जरूरत पड़ने लगी। तभी मेरी पहली नजर तेरे लंड पर पड़ी।
तू सुबह सोता रहता था। और तेरा लंड तेरे कच्छे में साफ खड़ा दिखता था। मैं कई साल तक तेरे लंड का सिर्फ उभार देखती थी। और तेरे लंड का उभार देखकर मैं अंदाजा लगा सकती थी।
कि अंदर से तेरा लंड कितना बड़ा होगा। मैं रोज खुद को समझाती थी। कि जिस लंड को मैं देख रही हूँ। वो मेरे बेटे का लंड है। मेरा मन तो समझ जाता था।
मगर इस चूत का क्या करती। जो रोज तेरे पापा चोदते थे। और मुझे भी चुदाई का आदी बना दिया था।
मैं: मम्मी आप इतने टाइम से मेरा लंड देख रही थीं। मुझे तो ये बात मालूम ही नहीं थी। क्या आपने कभी सोते हुए मेरा लंड पकड़ा था?
मम्मी: नहीं बेटा मैंने तेरा लंड नहीं पकड़ा था। क्योंकि अगर मैं तेरा लंड छू लेती। तो तू जाग जाता। और मैं तो शर्म से मर जाती। इसीलिए मैं बस देखती थी।
फिर मेरी प्यास मिटाने का रास्ता मुझे इस तेल की बोतल से मिल गया। जब भी बाथरूम जाती थी। वहीं इसे अंदर कर लेती थी। सब सही चल रहा था। मगर फिर वो हुआ जिसका अंदाजा किसी को नहीं था।
मैंने तुझे और बहू को नंगा देखा। उस दिन मैंने पहली बार तेरा लंड देखा था। तेरा लंड बिल्कुल तेरे पापा जैसा है। उस दिन मैं बहुत गुस्सा थी। मगर बार-बार तेरा लंड मेरे दिमाग में आ रहा था।
मैं तेरे लंड को दिमाग से निकालना चाहती थी। और हल्के-हल्के सब ठीक हो रहा था। मगर फिर एक सुबह मैंने देखा। तेरा लंड तेरे अंडरवियर के छेद से बाहर निकल आया था।
बिल्कुल सीधा खड़ा लंड और उसका गुलाबी सुपाड़ा देखकर मैं अंदर तक हिल गई थी। उस दिन मुझे ऐसा लगा। जैसे बगल में मेरा बेटा नहीं मेरा पति लेटा हो।
मैंने खुद को सँभाला। और बाथरूम में चली गई। और वहाँ जाके खुद की चूत को शांत कर लिया। मगर फिर ऐसा हर दूसरे-तीसरे दिन होने लगा।
और फाइनली तूने मेरी नाभि को चाटके मुझे चरम सुख दिया। उसके बाद तूने रात में मेरी चुदाई कर दी। अब तो मुझे भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था। इसीलिए मैं भी खुद को रोक नहीं पाई।
और आज तुझसे चुदाई करवाके मुझे बरसों बाद शांति मिली है। जैसे तेरे पापा मुझे हमेशा देते थे।
मैं: मम्मी पापा आपकी बहुत चुदाई करते थे?
मम्मी: हाँ बेटा तेरे पापा हफ्ते में 3 से 4 बार चुदाई करते थे। और तेरा लंड देखकर मैं समझ गई थी। कि क्यों बाबू तुझसे अपनी चूत को ठंडा करवाती है। ऐसा लंड तो हर औरत लेना चाहती है।
मैं: मम्मी भाभी भी ऐसा ही कहती हैं। वैसे मुझे नहीं मालूम था। मेरी मम्मी इतनी खुलके बातें कर सकती हैं।
मम्मी: बेटा हर रिश्ते का कुछ दायरा होता है। एक औरत सब बातें जानती है। मगर उसे उस रिश्ते का लिहाज करना पड़ता है। तेरे पापा के साथ मैं ऐसी ही बातें करती थी। मगर अब तेरे-मेरे बीच कोई पर्दा नहीं रहा है।
मैं: मम्मी मैं भी यही चाहता हूँ। कि मेरी मम्मी बिना कोई पर्दा किए। मेरे सामने रहे।
मम्मी: देख ले बेटा बिना कोई पर्दा किए। नंगी तेरे साथ बिस्तर पर लेटी हूँ। और अभी-अभी एक जोरदार चुदाई करवाके हटी हूँ।
मम्मी से बात करके मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया। और उन्होंने मेरा लंड पकड़ लिया। हम दोनों ने फिर से चुदाई करी। और फिर मैं और मम्मी सो गए।
सुबह मैं मम्मी से पहले उठ गया। मेरी घड़ी के वाइब्रेशन से। मैंने देखा मम्मी सो रही हैं। मैं चुपचाप उठा। और मम्मी की चूत के पास चला गया।
और मम्मी की चूत पर मुँह लगा दिया। मम्मी तुरंत उठ गईं। और मुझे चूत चाटते हुए देखकर मेरा सिर अपनी चूत पर दबाने लगीं।
मैं भी मम्मी की चूत चाट रहा था। कुछ देर चूत चाटने के बाद मम्मी बोलीं—
मम्मी: बेटा हट। मैं टॉयलेट करके आती हूँ।
मम्मी नंगी ही टॉयलेट करने चली गईं। और मैं भी तुरंत मम्मी के पीछे चला गया। मम्मी नीचे बैठी टॉयलेट करने ही वाली थीं। तभी मैं अंदर चला गया।
मम्मी: बेटा तू यहाँ क्या कर रहा है। तू कमरे में चल। मैं आ रही हूँ।
मैं: मम्मी मुझे आपको पेशाब करते हुए देखना है।
मम्मी: हे भगवान मैं क्या करूँ इस लड़के का। ये भी कोई देखने वाली चीज है।
मैं: मम्मी प्लीज। मैंने आज तक किसी औरत को पेशाब करते नहीं देखा है।
मम्मी मेरी बात मान गईं। और पेशाब करने लगीं। एक मोटी सी धार मम्मी की खुली हुई चूत से निकलने लगी। मुझे ऐसा देखने में बहुत मजा आ रहा था।
कुछ देर बाद जब मम्मी का पेशाब बंद हुआ। तो मैं उन्हें उठाके बेडरूम में ले गया।
मम्मी: बेटा साफ तो करने दे।
मगर मैंने उन्हें बेड पर जाके लिटा दिया। और उनकी टाँगें खोलके चूत पर मुँह लगा दिया।
मम्मी: बेटा ये क्या कर रहा है। अभी भी वहाँ मेरा पेशाब लगा हुआ है। मत चाट उसे।
मगर मुझे तो पेशाब से भरी चूत बहुत अच्छी लग रही थी। जब मैं हटा नहीं तो मम्मी समझ गईं। मैं नहीं मानूँगा इसीलिए अब वो भी चूत चटवाने का मजा लेने लगीं।
और कुछ ही देर में मम्मी की चूत चाटके साफ भी कर दी। और अंदर से पूरी गीली भी कर दी।
मम्मी ने मुझे देखा। और अपनी बाँहें फैलाके मुझे अपने पास बुला लिया। मैं मम्मी के ऊपर लेट गया। हम दोनों का जिस्म बहुत गरम हो रहा था।
मम्मी: बेटा तू तो बिल्कुल पागल है। तूने मेरा पेशाब भी चाट लिया। मैंने तो कभी सोचा भी नहीं था। कि कोई किसी के साथ ऐसा भी करता है।
मैं: मम्मी मुझे तो बहुत मजा आया। आपकी चूत से आपके पेशाब को चाटके। मुझे लगता है पापा ने कभी आपको ये मजा नहीं दिया है।
मम्मी: नहीं बेटा तेरे पापा ऐसा कुछ नहीं करते थे। मगर जब तूने उस दिन पहली बार मेरे नीचे मुँह लगाया। तो मैं अंदर तक हिल गई थी। इतना मजा मुझे कभी नहीं मिला था।
मैं: वैसे मम्मी वो आम फ्लेवर का कंडोम मैं इसलिए लाया था। ताकि आप मेरा लंड चूसो। मगर आपने तो बिना कंडोम के लंड चूसके। मुझे जन्नत की सैर करा दी। लगता है पापा ने आपको ये सब सिखाया था।
मम्मी: बेटा जब कभी तुम लोग नहीं होते थे। तो तेरे पापा वो चुदाई वाली मूवी दिखाते थे। और मुझे भी वैसा करने को कहते थे। खुद तो मेरे नीचे कभी नहीं चाटते थे। मगर मेरे मुँह में खुद का लंड जरूर डालते थे।
मैं: तो मम्मी आपको पापा का लंड चूसने में मजा आता था?
मम्मी: नहीं बेटा पहले तो मजा नहीं आया था। मगर उनकी खुशी के लिए कर देती थी। फिर हल्के-हल्के मुझे भी अच्छा लगने लगा। और जब तूने मुझे नीचे चाटके मजा दिया। तो मैंने सोचा मैं भी तुझे वो मजा दे सकती हूँ। देख तेरा लंड कैसे चुभ रहा है मुझे।
मम्मी ने मुझे साइड में लिटा दिया। मम्मी मेरे पैरों के बीच आ गईं। और मेरा लंड चूसने लगीं। मम्मी की लंड चुसाई वाकई कमाल थी।
कुछ देर लंड चूसने के बाद मम्मी बोलीं—
मम्मी: बेटा जल्दी कर ले। बहू भी उठने वाली होगी।
फिर मम्मी मेरे लंड पर बैठ गईं। और हम दोनों में चुदाई शुरू हो गई। पूरे 20 मिनट मम्मी को चोदने के बाद मैंने अपना पानी मम्मी की नाभि में भर दिया।
मम्मी: तुझे नाभि में पानी निकालना इतना पसंद है। उस दिन भी तूने बहू की नाभि में पानी निकाला था।
मैं: हाँ मम्मी मुझे गहरी नाभि वाली औरतें ही पसंद आती हैं। जब भी किसी की नाभि देखता हूँ। तो मेरा लंड खड़ा हो जाता है।
मम्मी: वो तो मैं जानती हूँ बेटा। मैंने कई बार तुझे मेरी नाभि को घूरते देखा था। और तभी तेरा लंड भी झटके मारने लगता था। चल अब तू हट। मैं नहा के आती हूँ।
मैं: मम्मी मैं भी चलूँ आपके साथ नहाने?
मम्मी: ना बाबा ना। तू नहाने नहीं जाएगा। बल्कि वहाँ भी मेरे साथ चुदाई ही करेगा। और अब थोड़ा सब्र कर। सब उठने वाले हैं।
मम्मी नहाने चली गईं। और मैं नंगा लेटा रहा। कुछ देर बाद मम्मी नंगी ही बाहर आ गईं। और कपड़े पहनने लगीं।
मैं: मम्मी आप कभी ब्रा-पैंटी क्यों नहीं पहनती हो? अगर आप कहो तो मैं आपके लिए लेकर आऊँ।
मम्मी: नहीं बेटा बस घर में नहीं पहनती हूँ। वैसे मेरे पास ब्रा-पैंटी दोनों हैं। तुझे लाने की जरूरत नहीं है। पता नहीं कैसे ब्रा-पैंटी लेकर आएगा। कल नाइटी लाया था। जो पहनो या न पहनो एक बराबर है।
मैं: वैसे मम्मी आप उस नाइटी में एकदम हीरोइन लग रही थीं।
मम्मी: बेटा वो तो ठीक से नीचे भी नहीं हो रही थी। नीचे से सब दिख रहा था।
मैं: मम्मी आप सिर्फ दिखा भी तो मुझे ही रही थीं। इसीलिए आपके लिए ही लेकर आया था।
फिर मम्मी बाहर काम करने लगीं। और थोड़ी देर बाद मैं भी काम में लग गया। दोपहर में जब वापस आया। तब ऊपर काम करने चला गया।
भाभी नीचे खाना बना रही थीं। तभी मम्मी चाय लेकर ऊपर आ गईं। मैंने मम्मी की तरफ देखा। तो उन्होंने अपनी नाभि बिल्कुल मेरे सामने कर दी थी।
मम्मी ने चाय रखी और मुझे अपना पेटीकोट ऊपर करके दिखाया। नीचे मम्मी ने एक काली पैंटी पहनी हुई थी। और फिर उन्होंने अपने ब्लाउज के नीचे के 2 हुक खोल दिए।
और ब्लाउज ऊपर करके अपनी काली ब्रा दिखाई। मम्मी ब्रा-पैंटी में एकदम माल लग रही थीं। मेरा लंड उन्हें देखते ही खड़ा हो गया।
मम्मी: कैसे लगी मेरी ब्रा-पैंटी?
मैं: मम्मी बहुत अच्छी लग रही हो आप। आपके पास इतनी अच्छी ब्रा-पैंटी है और आप पहनते नहीं हो।
मम्मी: बेटा ये मुझे तेरे पापा ने लाके दी थी। उनके जाने के बाद से मैंने इसे कभी नहीं पहना है। मगर आज तुझे पहनके दिखाया है।
मैंने मम्मी की पैंटी साइड की और उँगली करने लगा। मम्मी भी मजे लेने लगीं। और फिर वो खुद मेरे लंड पर बैठ गईं। और मैं कुर्सी पर बैठे-बैठे उनकी चुदाई करने लगा।
मम्मी गेट के पास झुकके खड़ी हो जाती थीं। और बाहर नजर ताकती थीं। और मैं पीछे से उनकी चुदाई करता रहता था।
अब मम्मी बिल्कुल खुल चुकी थीं। हम दोनों किसी भी जगह चुदाई शुरू कर देते थे। और मम्मी खुद मेरे लंड को अपनी चूत में डाल लेती थीं।
मेरा और मम्मी का चुदाई का खेल चलता रहा।

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