एक परिवार की मस्त सेक्स कहानी 3
Family me chudai ki mast kamukta story:- मैं विनोद, अपनी आगे की कहानी लेकर हाज़िर हूँ। बचपन से एक बात सुनता आ रहा हूँ कि “भगवान जब देता है तो छप्पर फाड़कर देता है और जब लेता है तो गाँड मारकर लेता है।”
18 साल तक गरीबी में रहने के बाद जब भगवान ने देना शुरू किया तो छप्पर फाड़कर दे ही रहा है। खास कर सेक्स के मामले में भगवान मुझ पर बहुत मेहरबान रहा है। 18-19 साल की उम्र से अब तक मुझे एक से एक बढ़िया माल चोदने के लिए मिलती गई।
Is kahani ka pichla part yaha padhen ==> एक परिवार की मस्त सेक्स कहानी 2
Family me chudai ki mast kamukta story
मेरी बेटी को बाप के साथ की चुदाई इतनी पसंद आई कि उसने अपने पहले प्रेमी देबू के साथ चुदवाने से मना कर दिया। लेकिन मेरे बहुत समझाने पर वो तैयार हुई और मैं खुद अपनी बेटी को देबू के घर के पास छोड़ आया। लेकिन करीब एक घंटा बाद ही दोनों माँ-बेटी एक साथ वापस आ गईं।
रात को मैंने बीवी को नींद की गोली खिलाकर सुला दिया और बेटी के रूम में गया। मुझे देखते ही बेटी ने लाउडली कहा—
अंजलि: आपकी घरवाली, मेरी माँ रंडी है, अपनी बेटी के यार से चुदवाती है।
जैसा मैं चाहता था, बेटी ने माँ को रंगे हाथ पकड़ लिया था।
अब आगे।
माँ की रंडीपना, वो भी बेटी के यार के ही साथ देखकर मेरी बेटी अंजलि बहुत गुस्से में थी। वो चुदाई के लिए तैयार नहीं हो रही थी लेकिन मेरे ओरल के सामने अपने को कितनी देर सँभाले। खुद ही लौड़ा को बुर के अंदर ले लिया और बाप से मस्ती से चुदवाते हुए बोली।
अंजलि: मुझे घर में घुसते देख देबू की भाभी और दोनों बहनें बहुत ख़ुश हुईं। लेकिन देबू की माँ का चेहरा पीला पड़ गया। मैंने देबू के बारे में पूछा तो उसकी माँ ने स्टैमर करते हुए कहा कि वो अपने बाप के साथ गया है।
लेकिन उसकी भाभी गुस्से में बोली—
भाभी: नहीं अंजू, वो कहीं बाहर नहीं गया है, उस रूम में अपनी माँ को चोद रहा है।
बाप का धक्का का मज़ा लेती हुई बेटी बोलती रही—
अंजलि: भाभी ने एक रूम की तरफ़ इशारा किया जो अंदर से बंद था। भाभी ने कहा कि मेरे कॉलेज जाने के बाद 3-4 दिन देबू बहुत उदास रहा। और चौथी रात बिना बताए घर से बाहर रहा। लेकिन सुबह-सुबह ही आ गया।
उसी दिन दोपहर में करीब 4 बजे 40-41 साल की एक बहुत ख़ूबसूरत औरत हमारे घर आई। वे दोनों 2 घंटे से ज़्यादा रूम में बंद रहे। उसके बाद वो औरत रेगुलरली आने लगी। भाभी ने बताया कि माँ करीब-करीब डेली ही 2-3 घंटे से ज़्यादा वहाँ रहती है। 2 हफ़्ते के बाद 6 दिन नहीं आती थी लेकिन फिर लगातार 15 दिन चुदवाने आती रही।
ज़ोरदार धक्का मारते हुए चूचियों को बेदर्दी से मसलते हुए मैंने बेटी से कहा—
मैं: समझ गया, जब मैं मॉर्निंग शिफ्ट में रहता था तब वो नहीं जाती थी। रानी, तेरी माँ हमेशा मुझसे झूठ बोलकर जाती थी कि किसी अपने कलीग के घर जा रही है या फिर ट्यूशन देने जाती थी।
बेटी को दना-दन पेलते हुए बोलता रहा—
मैं: एक महीना पहले अगर मैंने तेरे यार को दिन-दहाड़े तेरी माँ के चूतरों को मसलते हुए नहीं देखा तो मुझे कोई डाउट नहीं होता। और उसके बाद से ये बहाना बनाकर जाती है कि उसे किसी बड़े गवर्नमेंट ऑफिसर की बेटी को ट्यूशन देना है।
अंजलि ने चूतरों को उचकाते हुए कहा—
अंजलि: किसी को ट्यूशन देने नहीं उस मादरचोद के लौड़े से ट्यूशन लेने जाती है। ना तो उस हरामी की पर्सनैलिटी आप जैसा है ना ही उसका लौड़ा आपके लौड़े जैसा लंबा और मोटा है ना ही उसने चुदाई का वो मज़ा कभी दिया जो आप दे रहे हैं। तीन दिन लगातार चुदवाया लेकिन मादरचोद ने कभी लौड़ा ही चुसवाया ना ही बुर को एक बार भी चूमा। फिर भी कुतिया उस कुत्ते से चुदवाने क्यों जाती है? पापा, मैंने डिसाइड कर लिया है कि शादी के पहले और शादी के बाद भी ज़िंदगी भर आप से ही चुदवाती रहूँगी। और शादी भी 5-6 साल के बाद ही करूँगी।
बेटी की बात सुन मैं बहुत ख़ुश हुआ कि बेटी को बाप की चुदाई पसंद है। मैंने कहा कि दोनों एक-दूसरे से बहुत प्यार करते होंगे।
बेटी ने कहा—
अंजलि: हाँ पापा, उस मादरचोद की माँ ने भी यही कहा। उसके घरवालों ने सोचा कि औरत कुछ दिन देबू से चुदवाकर आना बंद कर देगी। लेकिन जब मेरी माँ लगातार चुदवाने जाती रही तो घर के सभी ने, उसके बाप ने भी देबू और आपकी घरवाली को बहुत समझाया।
लेकिन दोनों ने कह दिया कि अगर कोई उन्हें अलग करने की कोशिश करेगा तो दोनों वहीं घर में ज़हर खाकर मर जाएँगे। औरत ने बताया कि देबू के बाप ने आपकी घरवाली को पहले बहुत डराया। बदनामी का डर दिखाया। देबू ने कहा कि अगर किसी ने अनु मैडम को बदनाम करने की, उन्हें तकलीफ़ पहुँचाने की कोशिश भी करेगा तो घर के सभी लोगों का मर्डर कर देगा।
बाद में उसके बाप ने माँ के सामने लाखों रुपया भी रखा और कहा कि उनके बेटे को अपनी जादू से अलग कर दे। लेकिन माँ ने पैसा को हाथ भी नहीं लगाया। फिर सबने दोनों को रोकना-टोकना छोड़ दिया और माँ लगातार उससे चुदवाने जाती रही।
दोनों की दोस्ती करीब 5 महीना पुरानी है और अब जल्दी दोनों साथ विदेश जाने वाले हैं। देबू की भाभी ने कहा कि ये औरत भी अपना घर-बार छोड़ देबू के साथ करने को तैयार है। उषा भाभी ने यहाँ तक बताया कि 15 दिन पहले एक मंदिर में दोनों ने शादी भी कर ली है।
बेटी ने उसके घर की बातें बताकर कहा कि देबू किसी दूसरे को चोदता है उससे उसे कोई तकलीफ़ या दुख नहीं हुआ।
अंजलि: वो हरामी किसी को चोदे मेरी बला से। लेकिन मैं उस औरत को एक बार देखना चाहती थी इसलिए बैठी रही।
मेरे वहाँ पहुँचने के 35-40 मिनट बाद रूम का दरवाज़ा खुला और एक-दूसरे का हाथ पकड़े हुए दोनों बाहर निकले। माँ को देबू के साथ कमरे से निकलते देख एक मिनट के लिए मेरी आँखों के सामने अँधेरा छा गया। लेकिन मैंने अपने को सँभाला। सबके सामने मैंने दोनों के गाल पर 2-2 थप्पड़ मारा और बिना कुछ बोले मैं घर से बाहर निकल गई और रोड के किनारे खड़ी हो गई। थोड़ी ही देर बाद माँ भी अपने स्कूटर से आई और मेरे पास रुक गई। मैं बिना कुछ बोले उनके पीछे बैठकर घर आ गई। पापा, सुना था कि प्यार अंधा होता है लेकिन आज देख भी लिया।
चुदवाने के साथ-साथ अंजलि बोलती भी रही—
अंजलि: बहुत से किस्से सुने हैं, अपनी आँखों देखे हैं कि कॉलेज की लड़कियाँ अपने बाप से भी ज़्यादा उम्र के लोगों के साथ चुदवाकर ख़ुश रहती हैं। बहुत सी लेडी टीचर भी अपने स्टूडेंट से चुदवाती हैं लेकिन ये पहला मौक़ा है कि किसी औरत को अपनी बेटी की उम्र के लड़के से इस तरह प्यार करते-चुदवाते देखा है।
अंजलि अपनी माँ की चुदाई के कुछ और किस्से जानती है जो उसने पापा को नहीं बताया। अनु को भी नहीं मालूम कि अंजलि ने उसे दूसरों के साथ भी चुदवाते देखा है। माँ को दूसरे से चुदवाते देख अंजलि बिल्कुल नाराज़ नहीं थी। उसे गुस्सा था कि उसकी माँ ने उसके पहले प्रेमी से चुदवाना शुरू कर दिया है।
मैंने ज़ोरदार धक्का मारते हुए कहा—
मैं: बेटी, मेरी पहली औरत, मेरी पहली माल मुझसे 30-32 साल बड़ी थी। हम दोनों ने एक-दो बार नहीं अगले 11 साल तक चुदाई की।
बेटी ने डिटेल्स से मेरी कहानी सुननी चाही। मैंने कहा कि उसे सब बताऊँगा लेकिन अभी मुझे अपनी बेटी को प्यार करने दे। और उस रात हम दोनों ने किसी को एक मिनट भी सोने नहीं दिया। पहले स्ट्रेट, फिर बेटी को कुतिया बनाकर चोदा और लास्ट में बेटी को अपने ऊपर बैठकर चोदना सिखाया।
अंजलि इतनी ख़ुश हो गई कि जब हमने चुदाई ख़त्म की तो उसने कहा—
अंजलि: पापा, मैं 2 प्रेमी के प्यार के बीच नहीं आऊँगी। माँ को बोलूँगी कि वो जैसे पहले करती थी डेली देबू के घर जाकर चुदवाती रहे। आप भी मत रोकिए, आपको अनुपमा रंडी से ज़्यादा मस्ती ये आपकी बेटी, आपकी रखैल देगी।
मैंने कोई जवाब नहीं दिया।
अगले दिन संडे था। पिछली रात अंजलि ने अपनी माँ से कोई बात नहीं की थी। लेकिन सुबह नॉर्मली खूब प्यार से माँ से बातें करने लगी। मैंने भी अनु के साथ नॉर्मली बिहेव किया।
पिछली शाम को अंजलि ने माँ और देबू को रंगे हाथ पकड़ लिया था इसलिए जैसा एक्सपेक्टेड था देबू अपना लॉरी लेकर नहीं आया। उसी दिन नहीं, देबू फिर कभी सब्ज़ी का ठेला लेकर नहीं आया।
ब्रेकफ़ास्ट के समय अंजलि ने देबू के बारे में माँ से कोई बात नहीं की। लेकिन लंच के समय अंजलि ने कहा—
अंजलि: माँ, मैंने बहुत सोचा, रात भर तुम्हारे बारे में ही सोचती रही और एक मिनट भी नहीं सो पाई। मैंने तुम्हारे नए हसबैंड से 5 महीना पहले चुदवाया था।
लगातार तीन दिन 2-2 बार चुदवाया था, वही मेरा पहला मर्द है। कल भी मैं देबू से ही चुदवाने गई थी। लेकिन उसकी भाभी और माँ ने तुम दोनों के पागलपन के बारे में बताया। तुम उससे जितना प्यार करती हो मैं वैसा प्यार किसी के साथ नहीं कर सकती।
सच तो यह है कि मुझे देबू से प्यार हुआ ही नहीं। मैं सिर्फ़ उससे चुदवाने ही जाती थी। वो ज़रूर बढ़िया चोदता था तभी मैं लगातार तीन दिन उसके घर गई, 2-2 बार चुदवाया। लेकिन अब मुझे एक असल मर्द चोदता है। देबू 20-25 मिनट में सब काम कर लेता था और मेरा आदमी एक चुदाई में डेढ़-दो घंटा लगाता है। मैंने पापा को सब बता दिया है और पापा ने भी कहा और मैं भी कह रही हूँ। तुम जब तक चाहो देबू के घर जाकर या कहीं और जाकर चुदाई करो, पापा भी तुम्हें नहीं रोकेंगे। लेकिन तुम लोगों की दोस्ती, चुदाई शुरू कैसे हुई?
मैंने भी पूछा लेकिन खाना छोड़कर बहुत देर तक अनु चुप बैठी रहीं। हमारे बहुत पूछने पर और बेटी ने धमकी दी कि वो अगर सारी बात नहीं बताएगी तो पापा उसे डिवोर्स दे देंगे।
इस बात पर अनु ने मेरी ओर देखा और बोलने लगीं—
अनु: विनोद, तुम अगर मुझे तलाक़ देना चाहो तो मुझे छोड़ दो। मैं बिल्कुल अपोज़ नहीं करूँगी। लेकिन अब मैं देबू को नहीं छोड़ सकती। बेटी, मुझे अगर थोड़ी भी भनक होती कि उसने तुम्हें चोदा है तो मैं उसे कभी अपने पास नहीं आने देती।
उसकी भाभी और माँ ने यह ज़रूर बताया कि मुझसे पहले एक जवान ख़ूबसूरत लड़की लगातार तीन दिन आई थी और देबू से चुदवाकर गई। अगर कल तुमने नहीं बताया होगा तो उन्हें अब भी नहीं मालूम होगा कि देबू ने दोनों माँ-बेटी को चोदा है।
माँ की बात सुन अंजलि ने कहा—
अंजलि: लेकिन तेरे यार को मालूम है कि मैं इस घर में ही रहती हूँ। तीसरे चुदवाने के बाद वही मुझे घर छोड़कर गया था।
अनु ने जवाब दिया—
अनु: नहीं बेटी, अगर देबू को मालूम भी होगा तो उसने मुझसे कभी नहीं कहा कि वो मेरी बेटी, तुम्हें जानता है। तुम्हारे कॉलेज जाने के चौथी नाइट मैं घर में अकेली थी। तुम्हारे पापा का नाइट शिफ्ट था।
मुझे याद है कि वो थर्सडे नाइट थी। करीब 11 बजे डोर पर नॉक हुआ। मैंने सोचा कि कोई अगली वाली पड़ोसन होगी इसलिए डोर खोल दिया। हम दोनों बहुत देर तक एक-दूसरे को देखते रहे।
फिर उसने कहा—
देबू: मैडम, मुझे नहीं मालूम कि मैं यहाँ क्यों और कैसे आया। लेकिन मेरा भगवान मेरे ऊपर बहुत मेहरबान है तभी मुझे अपनी ज़िंदगी को देखने और उससे बातें करने का मौक़ा मिला। मैडम, आप दुनिया की सबसे ख़ूबसूरत औरत हैं।
अनु बोलती रहीं—
अनु: विनोद, जब मैं 11-12 साल की थी तभी तुम्हें पहली बार देखा था। पहली बार देखते ही मैंने फ़ैसला कर लिया था कि जैसे भी हो तुमसे ही शादी करूँगी। मैंने माँ से भी कह दिया था। शादी के पहले और बाद में भी कई लोगों ने मुझे चुदाई का ऑफ़र दिया।
कुछ लोग बहुत ज़्यादा क़ीमत देकर मुझे चोदना चाहते थे। लेकिन मैंने अपना कंट्रोल नहीं छोड़ा। लेकिन देबू के प्रेजेंस ने मुझे हिप्नोटाइज़ कर दिया। 10 मिनट भी नहीं गुज़रा था और देबू मेरे अंदर था। उसने कैसी चुदाई की मुझे याद नहीं।
11 बजे से लेकर 5.30 तक मेरे साथ रहा, हम बस चुदाई ही करते रहे, शायद चार बार चुदाई की और चुदाई के साथ पूरी रात हम ऐसे बातें करते रहे जैसा मैंने तुम्हारे साथ कभी नहीं किया।
हम दोनों बाप-बेटी उसकी बात ध्यान से सुन रहे थे। अनु बोलती रहीं—
अनु: उसने मुझे अपने बारे में सब कुछ बताया। मैंने भी पहली ही मुलाक़ात में अपने बारे में सब कुछ बता दिया। बेटी, तुम्हारे बारे में भी बताया फिर भी उसने नहीं कहा कि वो तुम्हें जानता है, उसने तुम्हें चोदा है।
सुबह कॉलेज गई लेकिन देबू एक सेकंड के लिए भी दिमाग़ से नहीं निकला। मुझे लगा कि देबू मुझे बहुत प्यार से बुला रहा है और मैं चार बजे उसके घर पहुँच गई। उसने मुझे अपनी माँ, भाभी और दोनों बहनों से मिलाया।
उन सबने मुझसे कहा कि 4 दिन पहले तक एक जवान लड़की लगातार तीन दिन देबू से चुदवाकर गई। लेकिन देबू ने नहीं कहा कि उसने मेरी बेटी को ही चोदा है।
मेरे सामने देबू ने सबसे कहा था—
देबू: माँ, भाभी वो लड़की मेरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी गलती थी। अब मुझे अनु मैडम के अलावा कभी किसी दूसरी लड़की-औरत से कोई मतलब नहीं है।
वो मुझे दुनिया की हर चीज़ से, हर किसी से ज़्यादा प्यार करता है। हम फिर 2 घंटे से ज़्यादा साथ रहे लेकिन उस दिन सिर्फ़ एक बार 20-25 मिनट की चुदाई और हम फिर प्यार भरी बातें करते रहे।
फिर जब भी उसके पास गई हम 2-3 घंटे साथ रहे और कल तक कभी हमने 2 बार चुदाई नहीं की।
अनु के एक-एक वर्ड्स से उस देबू के लिए प्यार छलक रहा था। अनु ने आगे कहा—
अनु: बेटी, तुम्हारे पापा से एक बार चुदवाने के बाद कोई भी लड़की, औरत को किसी दूसरे मर्द के साथ चुदाई में कोई मज़ा नहीं आएगा। तुम्हारे पापा जैसा औरत को कोई दूसरा ख़ुश नहीं कर सकता।
माँ की बात सुन बेटी ने इरिटेटेड होकर कहा—
अंजलि: जब मेरे पापा इतना बढ़िया चोदते हैं तो रंडी तू दूसरे से चुदवाने क्यों जाती है?
बेटी ने माँ को रंडी कहा फिर भी अनु नाराज़ नहीं हुईं, कैल्मली बोलती रहीं—
अनु: बेटी मुझे बढ़िया से मालूम है इस जगह पर तुम्हारे बाबूजी की सैकड़ों प्रेमिकाएँ हैं। हमारी शादी के पहले भी उन्होंने बहुतों को चोदा और शादी के बाद भी चोदते हैं।
मैं तेरे पापा की सभी माल को बढ़िया से जानती हूँ। लेकिन मुझे कभी किसी से कोई जलन नहीं हुई। मैं बढ़िया से जानती हूँ कि अगर तेरे पापा दूसरी रंडियों पर अपनी ताक़त, अपनी गर्मी नहीं उतारते तो तेरे पापा से अकेले चुदवाते-चुदवाते मैं कब की मर गई होती।
भगवान बढ़िया से जानता है कि पहली रात की चार चुदाई के बाद मैं तेरे यार देबू के पास कभी चुदाई के लिए नहीं गई। मैं सिर्फ़ उसके प्यार के लिए वहाँ जाती हूँ लेकिन जब दोनों नंगे रहते हैं तो चुदाई हो ही जाती है, जैसा प्यार देबू मुझे करता है वैसा प्यार मेरे साथ किसी ने नहीं किया। मैं देबू से अलग नहीं रह सकती।
इतना बोलकर वो फूट-फूटकर रोने लगीं। मुझे उसकी पागलपन पर गुस्सा नहीं, दुख हुआ।
लेकिन बेटी ने डाँट कर कहा—
अंजलि: रंडी रो क्यों रही है। हम तो खुद तुझे अपने देबू के पास जाने कह रहे हैं। रोज़ के जैसा आज भी जाओ लेकिन वहाँ से अकेली वापस मत आना।
उस घर में तीन बढ़िया माल हैं, उसकी भाभी और दोनों बहन। अपने साथ किसी एक को लेकर ज़रूर आना। तुमने मेरे अच्छे पापा को बहुत दुख दिया है उसकी क़ीमत तुम्हें देनी पड़ेगी। और क़ीमत है तेरे प्रेमी के घर की कोई माल जो पापा के साथ रात भर चुदवाएगी, वो भी तेरे सामने।
अनु अपनी बेटी को देखती रहीं। और बेटी ने धमकी दी कि अगर वो देबू के साथ रिश्ता रखना चाहती है तो उसे उन दोनों ही देबू की बहनों या भाभी में से एक को लेकर आना होगा।
बेटी ने फ़ाइनली कहा—
अंजलि: माँ, याद रखो, अगर तुम अकेली आओगी तो कल सुबह ही तुम्हारे कॉलेज और अड़ोस-पड़ोस, तुम्हारे माँ-बाबूजी और भाई-भाभी को तुम्हारी रंडीपना के बारे में मालूम हो जाएगा। और सोच लो, अगर ममता बुआ को यह बात मालूम हुई तो वो क्या करेंगी? तुम्हारी बुर में लोहे का रॉड गरम कर घुसा देगी, बीच बाज़ार में गली के कुत्तों से चुदवा देगी।
सभी को मालूम था कि मेरी जुड़वाँ बहन ममता इस मामले में कितनी स्ट्रिक्ट थी। अगर उसे पता चल जाए कि मैंने अपनी बेटी को चोदा है तो वो हम दोनों बाप-बेटी की जान ले लेगी। अपनी भाभी ममता का नाम सुन अनु सच में डर गईं। उन्होंने कहा कि वो किसी को लेकर आएंगी।
ख़ैर अनु और देबू के रिलेशनशिप के लिए जो क्यूरिऑसिटी थी वो ख़त्म हो गया था। मुझे यह जान ज़रूर दुख हुआ कि वो खुद मानती थीं कि मेरे जैसा कोई नहीं चोद सकता, फिर भी वो दूसरे से चुदवा रही हैं। लेकिन एक तरफ़ पड़ोसन संगिता और दूसरी तरफ़ अपनी बेटी अंजलि की जवानी ने मुझे बहुत ख़ुश रखा था।
समय गुज़रा और 4 बजे के पहले अनु खूब बढ़िया से तैयार होकर, सज-धज कर अपने यार से मिलने चली गईं। मैं बेटी को एक बार चोदना चाहता था लेकिन अनु के जाते ही संगिता अंदर घुसी और लाउडली बोली—
संगिता: अंकल आप एक-दो घंटे के लिए बाहर जाइए, मुझे और अंजलि को बहुत खास, प्राइवेट बात करनी है।
मैं नहीं जाना चाहता था। लेकिन सिर्फ़ संगिता ने ही नहीं, बेटी ने भी मुझे बाहर जाने के लिए कहा। और उस दिन करीब एक महीना बाद अपनी एक खास माल श्यामला के घर पहुँचा। उसका हसबैंड हमारी फ़ैक्टरी में जनरल मैनेजर था।
हसबैंड घर में था ही फिर भी श्यामला ने मुझ पर गुस्सा किया। नखरा किया कि मैं इतने दिनों बाद क्यों आया। उसे मनाया और हसबैंड के घर में रहते हुए भी खूब प्यार से उसे चोदा। करीब 2 घंटे उसके साथ रहा। उसने वादा लिया कि हफ़्ते में कम से कम एक बार आकर उसे ज़रूर चोदूँ।
मैंने भी प्रॉमिस किया। वहाँ से अपनी एक खास दुकान पर आया और ब्रज से कुछ स्पेशल गोलियाँ लीं। ब्रज मुझे और मेरी फ़ैमिली को बढ़िया से जानते थे और उन्होंने सबके बारे में पूछा। जब मैं चलने लगा तो उसने सबके लिए एक-एक पान दिया।
उसने धीरे से बोला—
ब्रज: अनु बिटिया हर रात अगर 2 बार चुदवाती है तो यह पान खाकर रात भर चुदवाएगी। विनोद भाई, अपनी बेटी को यह पान मत खिलाना नहीं तो मेरी तरफ़ तुम भी बेटीचोद बन जाओगे। विभा ससुराल से आई है, तुम्हारे लिए पूछ रही थी।
विभा ब्रज की बड़ी बेटी थी जिसकी सील मैंने ही तोड़ी थी। और एक बार कैसे-ना-कैसे विभा ने वो पान खा लिया था। और उस रात उस 19-20 साल की लड़की ने मुझसे और अपने बाप से रात भर चुदवाया।
मैंने उससे पान लेकर कहा—
मैं: दोस्त, आप अपने ही हाथों से मेरी बेटी को यह पान खिलाओ। फ़िट देखना वो भी अपनी विभा जैसी हम दोनों को मार डालेगी या ज़िंदा रहने देगी।
ब्रज ने कहा—
ब्रज: अंजलि बिटिया को तो नहीं लेकिन आपकी घरवाली अनु को रात भर चोदना चाहता हूँ। जब भी देखता हूँ साली पहले से ज़्यादा जवान दिखती है।
और मैंने ऑफ़र दिया—
मैं: ब्रज भैया, आप अपनी विभा और छोटी करिश्मा को लेकर मेरे घर आओ। बहुतों को चोदा। लेकिन जिस प्यार से, मस्ती से तुम्हारी बेटी विभा चुदवाती है, कोई और नहीं चुदवाती। मेरे घर में माँ-बेटी दोनों रहेंगी। हम चारों को नंगा नचवाएँगे और रात भर चोदेंगे।
अपनी घरवाली का देबू के लिए प्यार देख अब मुझे उसमें कोई इंटरेस्ट नहीं रह गया था। वैसे भी मैं उसे 23-24 साल से चोद रहा था। और अंजलि तो बेटी थी, दूसरे मर्दों से भी चुदवाएगी। मैं खुद उसे दूसरे से चुदवाते देखना चाहता था।
लेकिन ब्रज को मेरी जवान बेटी में कोई इंटरेस्ट नहीं था। वो अपने से 14-15 साल छोटी मेरी बीवी को ही पेलना चाहता था।
उसने कहा—
ब्रज: विनोद भाई, वो तो तुम्हारे चक्कर में अपनी बेटी विभा को चोद लिया।
मुझे जवान लड़कियों को चोदने में कोई इंटरेस्ट नहीं है।
हाँ आपकी बेटी अंजलि 2-3 बच्चे पैदा कर ले तब शायद उसकी बुर में घुसने के लिए लौड़ा तैयार हो जाए। अभी तो अनु को रगड़ना है। जैसे पूरे रात भर मंजू (मेरी बड़ी बहन) को रगड़ता था वैसे ही तुम्हारी घरवाली को कई रात अकेले चोदना है।
2-3 घंटे पहले ही अनु को बाज़ार में देखा। उससे बात भी की लेकिन मत पूछो यार जब से उसे देखा है रंडी ने हालत खराब कर दी है। उफ़ क्या गज़ब की माल हो गई है। अंजलि बेटी के कॉलेज वापस जाते ही मुझे बताओ, मैं विभा के साथ अपनी छोटी बहू करिश्मा को भी लेकर आऊँगा। तुम उन दोनों से मस्ती लेना और मैं अनु को अपनी रंडी बनाऊँगा।
मैंने उससे कहा कि अंजलि के कॉलेज जाते ही उसे ख़बर करूँगा। इस ब्रज ने अपने घर की कई माल को मुझसे चुदवाया ही था। इसने और भी कई बढ़िया माल को मुझसे चुदवाया था। मैंने इसका लाखों का फ़ायदा करवाया था।
इसने अभी जिस जगह पर अपना मकान और दुकान बसाया था। वो लाखों की ज़मीन मैंने इसे मुफ़्त में दिलवाया था। हम दोनों ने कई माल को। उसकी घरवाली और बेटी विभा को भी हमने साथ-साथ लूटा था।
लेकिन अपनी 27 साल की दोस्ती में तब तक उसने सिर्फ़ मेरी बड़ी बहन मंजू को कई रात अपने साथ रखकर चोद-चोदकर पागल कर दिया था। मंजू ने उसके बेटे को ही जन्म दिया था।
मैंने उसके लिए एक बड़े प्लॉट का अरेंजमेंट किया था। उसके बदले ब्रज मेरे लिए कुछ भी करने को तैयार था। वैसे भी उसकी दोनों बेटियाँ और घरवाली भी मुझसे चुदवाने के लिए हमेशा तैयार थीं। इतने सालों में यह पहला मौक़ा था कि वो मेरी घरवाली को चोदने की बात की थी।
अब मैं खुद ही अनु को उसके यार देबू और अब ब्रज से चुदवाते देखना चाहता था। पान और गोलियाँ लेकर जब घर वापस आया तो रात के 8 बज गए थे।
अंजलि ने देखते ही कहा—
अंजलि: क्या पापा, आपको एक-दो घंटे के लिए बाहर जाने कहा था। 4 घंटे आपने कहाँ गुज़ारे, किस हरामज़ादी की बुर ने आपको अरेस्ट कर रखा था।
अंजलि के साथ एक जवान क़मसीन लड़की बैठी थी जिसे मैंने पहले कभी नहीं देखा था। उसने कहा—
दीपा: अंजू, छी दीदी, पापा से कोई ऐसी बात करता है?
अंजलि ने उसके गालों को पिंच करते हुए कहा—
अंजलि: तू नहीं जानती दीपा, मेरा बाप एक नंबर का चुद्दक्कड़ है। हर रोज़ नई-नई माल की बुर में लौड़ा पेलता है, माँ-बेटी, सास-बहू को अगल-बगल लिटाकर एक-दूसरे के सामने चोदता है।
और उस लड़की दीपा ने कहा—
दीपा: तुम्हारे पापा की कोई गलती नहीं। कोई भी लड़की, औरत ऐसे ख़ूबसूरत, जवान, स्ट्रॉन्ग आदमी के लिए अपने कपड़े खोल देगी। फिर भी अपने माँ-बाप के सामने ऐसी गंदी बातें नहीं करनी चाहिए।
अंजलि ने लाउडली कहा—
अंजलि: चुप साली, ज़्यादा ज्ञान मत बाँट। जब हम चुदाई करने में नहीं शरमाते तो फिर चुदाई की बात करने में क्यों शरमाना, है ना माँ!
अनु चुप रहीं लेकिन मैंने बेटी का कान पकड़कर कहा—
मैं: बहुत बोलने लगी है। ये ठीक कहती है, ऐसी गंदी बातें नहीं करनी चाहिए। कौन है ये, मिलाएगी नहीं?
अंजलि ने फिर लड़की के गालों को मसलते हुए कहा—
अंजलि: ये मेरे यार देबू की छोटी बहन दीपा है, आज रात हमारे साथ ही रहेगी।
