ससुरजी और उनके दोस्त से चुद गई 2

Sasurji se chudai ki hindi kahani:- रात को करीब 8 बजे वो लोग वापस घर आए। जब तक मैंने खाना वगैरह की पूरी तैयारी कर रखी थी। घर आते ही योगेश बोला—

योगेश: पुन्नो, खाना नहीं बनाया है ना?

इस कहानी का पिछला पार्ट नहीं पढ़ा तो यहाँ पढ़ें ==> ससुरजी और उनके दोस्त से चुद गई 1

Sasurji se chudai ki hindi sex kahani

मैं: नहीं।

तो वो बोले—

योगेश: रहने दो, अंकल बोल रहे हैं कि आज बाहर चलकर खाना खाएँगे। तुम फटाफट तैयार हो जाओ।

मैंने अंकल की तरफ देखा तो वो मुस्कुरा रहे थे और मुझे बोला—

अंकल: चलो-चलो, फटाफट तैयार हो जाओ।

मैं अपने कमरे में आई और टॉवल लेकर बाथरूम में घुस गई। नहाके मैंने कपड़े निकाले, पर पता नहीं क्या सोचकर मैंने मेरी दूसरी ड्रेस—लंबी स्कर्ट और एक काफी भड़काऊ किस्म का शर्ट निकाला और पहन लिया। और बढ़िया सा मेकअप किया। आज ना जाने मुझे क्या हो गया था।

तैयार होकर मैं बाहर निकली तो योगेश बोला—

योगेश: अरे ये क्या पहन रखा है?

तभी अंकल बोले—

अंकल: रहने दो योगेश, बहुत बढ़िया तो लग रही है ना।

चाहते हुए भी योगेश बोला—

योगेश: ओके।

हम लोग करीब 9:30 बजे एक बढ़िया से रेस्टोरेंट में पहुँचे। वहाँ काफी सेक्सी माहौल था—डिम लाइट्स, हल्का-हल्का इंस्ट्रूमेंटल म्यूजिक। हम लोगों ने एक कोने की टेबल पकड़ ली। वहाँ बैठते ही वेटर आ गया। अंकल और उनके फ्रेंड ने बीयर मँगवा ली और मुझे और योगेश को पूछा—

अंकल: क्या पीओगे?

योगेश बोला—

योगेश: कोका कोला।

मैं कुछ बोल पाती, उससे पहले अंकल ने बोला—

अंकल: आई थिंक यू लाइक ब्लू हेवन… दैट इज़ मॉक टेल।

मैं: ओके।

खाना खाते वक्त भी मुझे अंकल देखे जा रहे थे। मैं भी बार-बार नज़रें चुराके उनकी तरफ देख लेती थी और उन्हें मेरी तरफ देखते हुए पाके अपनी नज़रें चुरा लेती थी… कभी मुस्कुरा देती थी। हमारा खाना करीब 11:30 बजे तक चला। उसके बाद हम लोग घर आ गए। घर पहुँचते-पहुँचते हमें 12:30 बज गए थे। घर आते ही हम लोग सोने के लिए अपने-अपने कमरों में चले गए।

मैं कपड़े बदलकर बेड पर लेट गई, पर मेरी आँखों में नींद नहीं थी। मैं चाहती हुई भी बार-बार अंकल के बारे में सोचने लगती थी। कितने बढ़िया नेचर के थे अंकल… हर बात समझाते थे… कितने मैनर्स वाले… और मुझे रह-रहकर उनका मुझे देखना याद आ रहा था। क्योंकि ना जाने क्यों मुझे उनका बार-बार मुझे देखना बहुत अच्छा लगा था। आज मैंने जो ड्रेस पहनी थी, ये भी उन्हीं को पसंद आने वाली पहनी थी। यही सब सोचते-सोचते मुझे ना जाने कब नींद आ गई।

सुबह करीब 5 बजे मुझे योगेश ने उठाया और बोला—

योगेश: मैं जा रहा हूँ। घर का ध्यान रखना… और अंकल और उनके फ्रेंड का भी।

मैंने उन्हें कहा—

मैं: आप चिंता ना करें।

और उन्हें घर के दरवाज़े तक भी छोड़ने गई। छोड़के मैंने दरवाज़ा बंद किया और किचन की तरफ चल पड़ी। किचन में पहुँचकर मैंने थोड़ा पानी पिया और अपने लिए कॉफी बनाने लगी। उस वक्त मैंने नाइटी पहन रखी थी… उस पर एक पतला सा गाउन डाल रखा था। मेरे बाल भी पूरे खुले थे… जैसे मैंने रात को खुले छोड़कर रेस्टोरेंट गई थी।

मैं एक ज़ोर से अंगड़ाई ली… तभी मेरी नज़र पीछे खड़े अंकल पर पड़ी। मैं हड़बड़ा गई। अंकल मुझे देखकर मुस्कुरा रहे थे। मुझे हड़बड़ाता देखकर अंकल बोले—

अंकल: कॉफी बनाई जा रही है ना?

जाने मुझे उनका मुझे देखना बहुत अच्छा लग रहा था। पर मैंने—

मैं: हाँ… आप पिएँगे?

तो वो बोले—

अंकल: हाँ… पर एक शर्त पर… कि कॉफी मैं बनाऊँगा।

मैं: आप क्यों परेशान हो रहे?

तो अंकल बोले—

अंकल: इसमें परेशानी की क्या बात है। जो आपको अच्छा लगता है, उसके लिए कुछ भी करने में खुशी होती है।

उनकी ये बात मुझे बहुत अच्छी लगी। मैंने उनकी आँखों में देखा तो उनकी आँखों में काफी शरारत थी। उन्होंने फिर बहुत बढ़िया कॉफी बनाई और हम लोग कॉफी लेकर बालकनी में आकर बैठ गए।

सुबह-सुबह का वक्त बहुत सुहाना था। अंकल और मैं इधर-उधर की बातें करते-करते कॉफी पी रहे थे। पर मेरी नज़र अंकल पर ही गड़ी थी और उनकी आँखें मुझे निहारे जा रही थीं। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। हालाँकि मैं नाइटी में ही थी… नीचे ना तो पैंटी पहनी थी और ना ही ब्रा… पर ना जाने क्यों मुझे सब कुछ नॉर्मल लग रहा था। उनका मेरे बूब्स देखना… मेरी गाँड देखना… सब कुछ अच्छा लग रहा था।

तभी मेरी नज़र अंदर लगी घड़ी पर गई तो देखा कि सुबह के 8 बजने वाले हैं। ना जाने कब इतना वक्त बीत गया, पता ही नहीं चला। मैं अंकल को बोली—

मैं: अच्छा अब आप नहा-धो लीजिए। मैं आपके लिए नाश्ता बना देती हूँ।

तो अंकल बोले—

अंकल: नहीं… पहले तुम नहा लो। नाश्ता आज मैं बनाऊँगा। तुम तो रोज़ ही बनाती होगी… आज मैं बनाऊँगा।

मैंने—

मैं: नहीं-नहीं…

पर वो नहीं माने।

मैं नहाके बाहर निकली तो देखा अंकल और उनके फ्रेंड ने बढ़िया नाश्ता तैयार किया है और टेबल पर लगाके मेरा इंतज़ार कर रहे थे। मैंने एक पंजाबी सलवार और उस पर छोटी और टाइट सलवार पहन रखी थी। अभी भी मैंने ना तो पैंटी पहनी थी और ना ही ब्रा। मुझे देखते ही अंकल बोले—

अंकल: वाह… कितनी खूबसूरत लग रही हो इन कपड़ों में।

उनके फ्रेंड की आँखों में भी मेरी तारीफ भरी पड़ी थी जो मुझे साफ दिख रही थी। मुझे अंकल का तारीफ करना बहुत अच्छा लगा। मैं भी मुस्कुरा दी और इतराती हुई डाइनिंग टेबल पर बैठ गई। उन दोनों ने मुझे मेरे सामने बैठकर नाश्ता कराया।

मैंने मुस्कुराते हुए बोला—

मैं: ऐसा लग रहा है जैसे मैं आपकी मेहमान हूँ और आप लोग मेरी सेवा कर रहे हैं।

इतने में अंकल बोले—

अंकल: हम तो तुम्हारी पूरी सेवा कर सकते हैं। जब मेहमान इतनी खूबसूरत हो तो मेज़बान पूरी सेवा कर सकता है।

मैं अंकल की तरफ देख रही थी। उन्होंने ये बात मेरी आँखों में देखते हुए कही थी। मैं एकदम हड़बड़ा गई और अंकल से नज़रें चुराने लगी। मेरे तन-बदन में आग लग गई थी अंकल की बात सुनकर। मैंने जैसे-तैसे नाश्ता खत्म करके किचन में चली गई। पर मेरी हालत बहुत खराब हो गई थी। मेरी चुत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया और उसमें मीठा-मीठा दर्द होने लगा।

मैं सिंक में बर्तन साफ करने लगी, पर मेरा सारा ध्यान मेरी चुत में घुसा हुआ था। बहुत परेशान कर रही थी मेरी चुत। मुझे इतने में अंकल मेरे एकदम पीछे आकर खड़े हो गए। मुझे पता ही नहीं चला। अंकल ने मेरे कंधे पर हाथ रखा। मैं एकदम पीछे घूमी तो अंकल से टकरा गई और एकदम अंकल पर गिर पड़ी। अंकल ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और कसके चिपका लिया। इतनी देर में उनके दोनों हाथ मेरी गाँड पर फिरने लगे और आगे उनका तगड़ा लंड मेरी चुत पर टच होने लगा था।

एक सेकंड में ही मैं अंकल से अलग हो गई और शर्माकर अंकल से सॉरी बोला। अंकल बोले—

अंकल: अरे कोई बात नहीं।

फिर मैं वापस सिंक में बर्तन साफ करने के लिए घूम गई और अंकल मेरे और पास आ गए। तभी सिंक के ऊपर से मुझे बर्तन साफ करने का पाउडर उतारना था। मैंने जैसे ही हाथ ऊपर उठाया तो अंकल ने आगे बढ़कर पाउडर उतारने लगे। इस वजह से उनका तगड़ा लंड जोकि बिल्कुल खड़ा था, मेरी गाँड के बीचोबीच फिट हो गया। अंकल ने जानबूझकर पाउडर उतारने में थोड़ी देर लगा दी ताकि लंड काफी देर तक मेरी गाँड में सटा रहे।

उधर मेरी हालत बहुत खराब हो गई। इतनी देर में मेरी चुत ने और थोड़ा सा पानी छोड़ दिया जिससे मेरी दोनों थाईज़ आपस में चिपकने लगीं। फिर अंकल मेरे पीछे से हट गए और मेरे बराबर में आकर खड़े हो गए और मुझे देखकर मुस्कुराने लगे। पर मैं उनसे नज़रें नहीं मिला पा रही थी। जैसे-तैसे मैंने बर्तन साफ किए और जल्दी-जल्दी अपने कमरे में चली आई।

मैंने नीचे देखा तो मेरी सलवार जो पीले कलर की थी, मेरी चुत से थोड़ा नीचे से होती हुई घुटनों तक गीली लकीर उभर आई थी। मैंने फटाफट कपड़े उतारे तो मेरा ध्यान मेरी निप्पल्स पर गया जो पूरी तरह से खड़ी थीं… और चुत का हाल तो और भी बुरा था। चुत एकदम फूल गई थी उत्तेजना के कारण… ऐसा लग रहा था कि चुत पर सूजन आ गई हो। मैंने अपने कपड़े बदल लिए। अबकी बार मैंने लॉन्ग स्कर्ट पहन लिया और ऊपर एक शर्ट पहन लिया। बाकी कुछ नहीं… ना तो पैंटी और ना ही ब्रा।

फिर वापस किचन में आ गई। अंकल अभी तक किचन में ही थे। इस बार उनके दोस्त भी उनके साथ थे। अंकल काफी टेंस्ड लग रहे थे। मुझे देखकर जबरन मुस्कुराते हुए बोले—

अंकल: अरे तुमने कपड़े क्यों बदल लिए?

मैंने जल्दी से बोला—

मैं: वो क्या है कि कुछ लग गया था कपड़ों पर… इसलिए।

मैंने मुस्कुराते हुए पूछा—

मैं: अच्छा बताइए आप क्या खाएँगे?

अंकल: तुम प्यार से जो भी खिलाओगी वो खा लेंगे।

वो ये कहते हुए बिल्कुल मेरे पास आ गए। मैं जल्दी से गैस स्टोव की तरफ घूम गई और वो दोनों मेरे अगल-बगल आकर खड़े हो गए। कोई कुछ नहीं बोल रहा था… पर मेरी साँसें तेज़ी से चलने लगी थीं। इतने में अंकल थोड़ा आगे झुके जिससे उनका चेहरा मेरे सामने आ गया। मैंने उनको देखा… पर मैं मुस्कुरा नहीं पा रही थी। इतने में अंकल ने अपने हाथ की हथेली को पूरा खोलके मेरे एक कूल्हे को हल्के-हल्के बहुत प्यार से मसलना शुरू कर दिया। मैंने अंकल की तरफ देखा… वो मुस्कुरा रहे थे।

इस पर मैंने अपना चेहरा नीचे कर लिया। इतने में उनके फ्रेंड ने भी अपनी एक हथेली से मेरे दूसरे कूल्हे को मसलना शुरू कर दिया। अब तो मेरी हालत बहुत बिगड़ गई। मेरी आँखें बंद हो गईं और दोनों मुट्ठियाँ भिंच गईं। अगले 1 मिनट के बाद मेरी चुत ने फिर पानी छोड़ दिया। अब मुझसे बिल्कुल नहीं रहा जा रहा था तो मैंने अपनी पीठ अंकल से चिपका दी। अंकल ने भी मुझे अपनी बाहों में भरके अपने दोनों हाथों से मेरी चुत को स्कर्ट के ऊपर से ही मसलने लगे।

इधर उनके दोस्त ने अपने ट्रैक के अंदर से अपना लंबा और तगड़ा लंड निकालकर मेरे एक हाथ में थामा दिया। जैसे ही लंड मेरे हाथ में आया, मेरे शरीर में बिजलियाँ दौड़ने लगीं और मेरी गर्दन ऊपर की ओर उठ गई। अंकल ने अपना एक हाथ मेरी चुत से हटाया और मेरे गाल पर रखकर मेरी गर्दन को पीछे घुमाया और मेरे खुले होठों पर अपने होठ खोलकर रख दिए… और अपनी लंबी गरम ज़ुबान मेरे मुँह में डाल दी। मैं भी उनकी ज़ुबान बुरी तरह से चूसने लगी।

उधर उनके दोस्त ने मेरे शर्ट की सारे बटन खोलके मेरी शर्ट उतार दी और मेरी उत्तेजना से एकदम खड़ी निप्पल्स को मसलते हुए बोला—

बॉब: वाओ… व्हाट अ पीस!

फिर उसने अपना मुँह खोलके मेरी एक साइड की खड़ी निप्पल को अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसने लगा। मैं तो मानो बिल्कुल पागल हो गई। अंकल के फ्रेंड ने अपने दोनों हाथों से मेरी स्कर्ट के ऊपर का बटन खोला और मेरी स्कर्ट नीचे उतार दी… और अपने एक हाथ से मेरी नंगी उत्तेजना से फूली हुई चुत को सहलाने लगा। उसके सहलाने से मेरी टाँगें चौड़ी होने लगीं और चुत ने फिर से पानी छोड़ दिया।

पीछे खड़े अंकल ने अपने एक हाथ से मेरी नंगी उभरी हुई एकदम मुलायम मांसल गाँड की मालिश करने लगे। उन दोनों ने मुझे किचन में ही पूरा नंगा कर दिया था। मैंने अंकल के मुँह से अपना मुँह हटाया और मैं ज़ोर-ज़ोर से—

मैं: आाह्ह! इस्स्स! आाह्ह!

करने लगी।

अंकल मेरे पीछे से आगे आ गए और उनका दोस्त मेरे पीछे आ गया और नीचे अपने घुटनों के बल बैठ गया। अंकल भी मेरे आगे नीचे अपने घुटनों के बल बैठ गए। इधर बॉब मेरे नरम मुलायम मांसल कूल्हों को चाटने लगा और अंकल मेरी थाईज़ को, जो मेरी चुत के चिपचिपे पानी से चुत के आसपास से भीग गई थीं, चाटने लगे। चाटते-चाटते अंकल मेरी चुत पर चुंबन लेने लगे और मेरी चुत बार-बार उनके चुंबन के जवाब में पानी छोड़ने लगी।

मेरा एक हाथ अंकल के सर के बालों को पकड़ रखा था और दूसरा हाथ उनके फ्रेंड के गंजे सर को पीछे से पकड़कर उसका मुँह मेरी गाँड पर चिपका रखा था। कोई 5 मिनटों के बाद अंकल का दोस्त खड़ा हो गया और अंकल भी खड़े हो गए। उन दोनों ने मुझे आधा-आधा अपनी गोदी में उठा लिया और जल्दी-जल्दी अपने बेडरूम में ले जाने लगे। मेरी आँखें बंद थीं और मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थीं। उन दोनों का एक-एक हाथ मेरी उत्तेजना से बेहद फूली हुई चुत पर था और चुत की मालिश कर रहा था। बदले में मेरी चुत उन्हें प्रसाद दे रही थी।

बॉब: शी इज़ सो हॉर्नी एंड हॉट।

अंकल: येह… शी इज़ रेडी टू बी फक हार्ड एंड हार्डर।

इतनी देर में हम लोग उनके बेडरूम में आ गए। एसी फुल ऑन था और कमरा बेहद ठंडा था… पर मुझे गर्मी लग रही थी।

इधर उन दोनों ने मुझे बिस्तर पर सीधा लिटा दिया और अंकल ने मेरी दोनों टाँगें चौड़ी कर दीं। मैं लगातार सिसकारियाँ ले रही थी। मेरी दोनों मुट्ठियाँ भिंच हुई थीं… आँखें बंद थीं… और मैं लगभग उछल-उछलकर अपनी चुत को झटके मार रही थी। तभी अंकल ने बॉब को बोला—

अंकल: आई एम गोइंग टू लिक हर पसी विथ माई टंग… अदरवाइज़ शी विल गो मैड।

बॉब: येह… दैट्स राइट।

कहकर वो सर की तरफ आ गया और अंकल ने मेरी दोनों टाँगें पूरी चौड़ी करके टाँगों को मेरी छाती की तरफ दबाईं… जिससे मेरी फूली हुई चुत और ज़्यादा फूलके ऊपर उठ गई… और मेरी सिसकारी और तेज़ हो गई। पीछे से अंकल के दोस्त ने मेरी दोनों टाँगें पकड़कर बिस्तर पर चिपका दीं।

उधर अंकल ने मेरी चुत पर एक चुंबन लिया। मेरी चुत ने और पानी छोड़ा। अंकल ने वो पानी चाट लिया। फिर उन्होंने अपनी लंबी एकदम गरम ज़ुबान से मेरी क्लिटोरिस को चाटना शुरू किया। मैं—

मैं: आाह्ह! आाह्ह! आाह्ह!

करने लगी। अंकल ने अपने दोनों हाथों को मेरे कूल्हों पर चिपका दिया था और हथेलियों से मेरे कूल्हे सहला रहे थे। मुझे लगा मैं मर जाऊँगी। मेरी टाँगें टाइट होने लगीं और अकड़कर ऊपर उठने लगीं। बॉब को मेरी टाँगें दबाने में और ताकत लगानी पड़ रही थी।

तभी अंकल ने अपनी ज़ुबान मेरी चुत के अंदर डाल दी और पूरी चुत को अपने मुँह में भर लिया और चुत चूसने लगे… और अपनी ज़ुबान चुत के अंदर आगे-पीछे करने लगे। मेरी हालत बहुत खराब थी। मैं लगभग चिल्ला-चिल्लाकर सिसकारियाँ ले रही थी… और ना जाने मेरे मुँह से क्या-क्या निकल रहा था—

मैं: खा जाओ… फाड़ दो जान… मुझे चोदो… मुझे जमके चोदो…

ये सब करीब-करीब 5 मिनटों तक चलता रहा। फिर टाँगें और अकड़ने लगीं… और मैंने अपने दोनों हाथ अंकल के सर पर रखकर उनके बाल ज़ोर से पकड़ लिए… और उनका सर अपनी चुत पर खींचकर चिपका लिया। अंकल ने भी अपना मुँह का पूरा ज़ोर मेरी चुत पर डाल दिया। तभी अचानक मैं ज़ोर से चिल्लाई और मेरी चुत का बाँध टूट गया… और चुत का कामरस उबल-उबलकर बाहर आने लगा… और सीधा अंकल के मुँह में जाने लगा।

अंकल भी मेरे कामरस को जी-जान से पीने लगे। करीब-करीब 10 मिनटों तक मेरा कामरस मेरे देवता की प्यास बुझाता रहा। फिर धीरे-धीरे कम होता गया। मेरी टाँगों की अकड़न भी कम हो गई… पर अंकल अपनी ज़ुबान से मेरी चुत खोद-खोदकर मेरा कामरस पी रहे थे। पूरा कामरस खत्म होने पर अंकल मेरी चुत से हट गए।

बॉब ने मेरी टाँगें छोड़ दीं और दोनों मेरे अगल-बगल में आकर लेट गए… और मेरे बूब्स को सहलाने लगे। मेरी आँखें बंद थीं। अंकल और बॉब ने मेरी एक-एक निप्पल को अपने मुँह में ले लिया और बाइट करने लगे… और अपने एक-एक टाँग मेरी दोनों टाँगों में फँसाकर मेरी टाँगें फिर से चौड़ी कर दीं… और अपने हाथ से मेरी चुत को सहलाने लगे।

करीब 2 मिनटों के बाद मैं फिर भड़कने लगी। तभी उन्होंने मुझे छोड़ दिया और मुझसे अलग होकर बेड के नीचे खड़े हो गए। मैंने हड़बड़ाकर आँखें खोलके देखा तो अंकल और बॉब अपने कपड़े उतार रहे थे। मेरी नज़र उन दोनों के लंड पर पड़ी। क्या शानदार लंड थे दोनों के… करीब-करीब 11-12 इंच लंबे और 3-3.5 इंच मोटे। मोटे लंड देखकर मेरी चुत के मुँह में पानी आ गया।

तभी अंकल ने मुझे अपने घुटनों के बल बेड पर बैठने को कहा। मैं फौरन वैसे ही बैठ गई। उधर बॉब मेरे पीछे से आकर सीधा होकर मेरी दोनों थाईज़ के बीच में सर डालकर लेट गया… और अपनी लंबी ज़ुबान निकालकर मेरी चुत चाटने लगा… और अपने दोनों हाथों से मेरी निप्पल्स को मसलने लगा। बॉब के ऐसे करने से मुझे बहुत अच्छा लगने लगा। मेरी आँखें बंद होने लगीं… मैं सिसकारियाँ लेने लगी… मेरा मुँह खुलके ऊपर उठ गया।

फिर अंकल ने अपना लंड मेरे एक हाथ में थामा दिया… और अपने दोनों हाथों से मेरा चेहरा पकड़ लिया… और मेरे खुले मुँह में अपनी लंबी गरम ज़ुबान डाल दी। मैं उनकी ज़ुबान बुरी तरह से चूसने लगी। फिर अंकल ने अपना एक हाथ मेरी पीठ पर फिराने लगे… और धीरे-धीरे अपने हाथ को नीचे ले जाने लगे… और मेरी मखमली गाँड के छेद पर अपनी एक उँगली से सहलाने लगे… और फिर धीरे-धीरे अपना दूसरा हाथ भी मेरी गाँड पर मसलने लगे। फिर अपने दोनों हाथों से मेरी गाँड चौड़ी करी… और अपनी एक उँगली गाँड के छेद में डाल दी… और धीरे-धीरे आगे-पीछे करने लगे।

मेरी हालत लगातार खराब होती जा रही थी। करीब-करीब 5-7 मिनटों के बाद मेरे हाथ-पैर फिर अकड़ने लगे… और मैंने अपनी पूरी चुत बॉब के मुँह पर रख दी। बॉब ने भी अपनी पूरी ज़ुबान मेरी चुत के अंदर डाल दी… और मेरे बूब्स छोड़कर अपने दोनों हाथों की एक-एक उँगली से मेरी क्लिटोरिस को सहलाने लगा। जब मेरी हालत ज़्यादा खराब हुई तो मैंने अपने दोनों हाथों से बॉब को पीछे से पकड़ लिया… और ऊपर की ओर खींचने लगी… जिसके कारण बॉब का मुँह मेरी चुत पर और ज़ोर से चिपक गया… और मैं अपनी चुत बॉब के मुँह पर झटकने लगी।

अंकल ने मेरा मुँह छोड़ दिया… और गाँड के छेद से उँगली निकालकर अपने दोनों हाथों से मुझे कसके चारों ओर से पकड़ लिया… और अपना मुँह मेरे एक बूब्स पर चिपका दिया… और निप्पल को ज़ुबान से छेदने लगे। मेरी आँखें बंद थीं… मुझे स्वर्ग सा आनंद आने लगा। करीब 2 मिनटों के बाद मेरे मुँह से एक ज़ोरदार कामुक सिसकारी निकली… और मैं बॉब के मुँह पर ही झरने लगी… और बॉब मेरे प्रसाद को खूब जमके पीने लगा।

करीब 5 मिनटों के बाद मैं थोड़ी शांत हुई। अब मैं दो बार झर चुकी थी… और मेरा पूरा कामरस उन दोनों ने जमके पिया था। अब बॉब मेरे नीचे से निकलकर अंकल से बोला—

बॉब: शी इज़ डैम हॉट… शी स्क्वर्ट लाइक एनीथिंग… हर लिक्विड इज़ ऑल्सो डैम हॉट एंड टेस्टी… आई लव हर।

ये कहते हुए बॉब अंकल के साथ आकर खड़ा हो गया। अब तक उन दोनों ने मुझे जमके खुश किया था।

अब मेरी बारी थी उन्हें खुश करने की। मैंने उन दोनों के ज़बरदस्त, कड़क और खड़े लंड को अपने दोनों हाथों से पकड़ा… और बारी-बारी उन्हें चूसना शुरू कर दिया। वो दोनों भी मेरे बूब्स को मसलने लगे… और अपने दूसरे हाथ से मेरा सर पीछे से पकड़कर अपने लंड को मेरे मुँह में आगे-पीछे करने लगे।

करीब 5 मिनटों के बाद अंकल ने बॉब से कहा—

अंकल: यू फर्स्ट।

और अपना लंड मेरे मुँह से निकालके अपनी ड्रेसिंग टेबल पर पड़ी एक क्रीम उठाके लाए… और मेरे हाथ में दे दी। फिर मैंने बॉब का लंड अपने मुँह से निकाला… और उस पर क्रीम को अच्छे से लगाने लगी। फिर बॉब ने मुझे बेड पर सीधा लिटा दिया… और मेरी दोनों टाँगें चौड़ी कर दीं। अंकल मेरे सर के पास लेट गए… और मेरे सर को अपने कंधे पर रख लिया… और अपने एक हाथ से मेरे निप्पल्स को मसलने लगे… और मेरी ज़ुबान को चूसने लगे।

उधर बॉब मेरी क्लिटोरिस को अपनी लंबी गरम और रफ ज़ुबान से जल्दी-जल्दी पर हल्के-हल्के चाटने लगा… और अपनी उँगली में क्रीम लेकर मेरी चुत में डालकर गोल-गोल घुमाने लगा। करीब 5 मिनटों के बाद मैं फिर गरम हो गई… और मेरी चुत ने पानी छोड़ दिया। बॉब शायद यही चाहता था। फिर वो सीधा हुआ… और अपने लंड के अगले हिस्से को मेरी चुत के मुँह पर रख दिया।

जब तक अंकल मेरे सर के पीछे आकर बैठ गए… और बॉब ने मेरी टाँगें उठाके अंकल को पकड़ा दीं। अंकल ने मेरी टाँगें फुल चौड़ी कर दीं… और पीछे की तरफ मोड़ लीं… जिससे मेरी गरम उत्तेजना से फूली हुई एकदम टाइट चुत और ऊपर उठ गई। मैं समझ गई… अब मुझे वो चुदाई मिलेगी जिसकी मैंने कल्पना ही की थी।

बॉब ने अपने लंड को थोड़ा मेरी चुत पर दबाया… और उसके लंड का अगला हिस्सा मेरी चुत में घुस गया। एक तो लंड और चुत पर क्रीम लगी थी… दूसरा मेरी चुत पानी छोड़ने के कारण काफी लुब्रिकेटिव हो गई थी। लंड घुसाने के बाद मुझे थोड़ा दर्द हुआ… जो जल्दी ही खत्म हो गया। फिर बॉब को मैंने हाँ में इशारा किया। तब बॉब ने अपने लंड का दबाव और बढ़ाया… और एक झटका मारा। उसका करीब आधा लंड मेरी चुत में घुस गया।

दर्द के मारे मेरी टाँगें अकड़ने लगीं। अंकल ने मेरी टाँगें छोड़ दीं। मेरी टाँगें अपने-आप बॉब की कमर पर बुरी तरह से लिपट गईं। बॉब वहीं रुक गया। मैं लगभग चिल्लाने लगी। मुझे बहुत तेज़ दर्द हो रहा था। अंकल ने मुझे कहा—

अंकल: अरे जानू… कुछ नहीं होगा। तुम थोड़ा सा सहन कर लो… बाद में बहुत मज़ा आएगा। लंबी-लंबी साँसें लो।

आगे क्या हुआ पढ़ें अगले पार्ट में।

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