मेरी दीदी बनी देसी रंडी – 3

Didi ki mochi se chudai ki story:- पिछले पार्ट में दीदी और अकरम के बीच किचन में शारीरिक नजदीकी बढ़ गई थी। अकरम ने दीदी की गाँड पर अपना लंड रगड़ा था और दोनों की बातचीत काफी गंदी हो गई थी। राहुल बाहर से सब देख रहा था।

Part 2 ==> मेरी दीदी बनी देसी रंडी – 2

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Didi ki mochi se chudai ki story

रात के 11:00 बजे दीदी अपने रूम में सो रही थीं और मैं अपने रूम में रात को अपने फोन में ऐसे ही कुछ देख रहा था। एकदम से दीदी के फोन पर अकरम अंकल का मैसेज आया जिसे देखकर मैं शॉक हो गया। इतनी रात को अकरम अंकल मैसेज क्यों कर रहे हैं, वो भी दीदी को। फिर दीदी ने मैसेज सीन किया और रिप्लाई किया।

दीदी और अकरम की चैट

अकरम: हेलो

दीदी: कौन

अकरम: बेटा मैं अकरम

दीदी: अच्छा अंकल जी आप हैं, क्या हो गया अंकल जी इतनी रात को मैसेज कर रहे हैं

अकरम: बेटा कुछ नहीं। घर पर अकेला बोर हो रहा था तो सोचा तुमसे ही बात करूँ

दीदी: अच्छा अंकल जी

अकरम: हाँ बेटा, जब तुम साथ रहती हो तो मुझे अच्छा लगता है। इसलिए तुमसे बात करने का मन किया तो मैसेज कर दिया

अकरम कोई गँवार नहीं था। अकरम ने 10वीं क्लास तक पढ़ाई की थी।

अकरम: बेटा क्या कर रही हो

दीदी: कुछ नहीं, सोने जा रही थी

फिर अकरम और दीदी में ऐसे ही नॉर्मल बातें हुईं और सुबह हो गई।

दीदी सुबह नाश्ता बना रही थीं। मैं सोकर उठा और नहाकर दीदी के पास गया। दीदी को गुड मॉर्निंग बोला और नाश्ते के लिए बैठ गया। दीदी ने नाश्ता लगाया और दीदी और मैंने नाश्ता करने लगे।

दीदी ने आज जो साड़ी पहनी थी उसमें दीदी एकदम रंडी की तरह लग रही थीं। दीदी के क्लीवेज आज बाकी के दिनों से कुछ ज्यादा ही दिख रहे थे। ऊपर से दीदी का नेवल भी दिख रहा था। दीदी को देखकर मेरा मन दीदी को चोदने का करने लगा लेकिन मैंने अपने आप को कंट्रोल किया। वैसे भी मैं दीदी के साथ कुछ कर भी नहीं सकता था। फिर दीदी मुझसे बोलीं—

दीदी: तेरे कॉलेज कब से स्टार्ट हो रहे हैं

मैं: दीदी बस कुछ दिनों में होने ही वाले हैं

दीदी: अच्छा तो आज क्या करने का प्लान है कि दिन भर घूमता ही रहेगा

मैं: दीदी कुछ नहीं। थोड़ी देर बाद अपने दोस्त के घर जाऊँगा। उसके घर पर जाकर बीजीएमआई खेलूँगा

दीदी: तू यही करता रहियो पूरे दिन और कोई काम तो है नहीं तेरा

मैंने कुछ नहीं बोला और नाश्ता करके थोड़ी देर के लिए अपने रूम में चला गया। दीदी टीवी देखने लगीं।

11:00 बजे मैं दीदी को बोलकर अपने दोस्त राजू के घर चला गया। मेरे से पहले राजू के घर पर शिवम और कुलदीप भी आ रखे थे। फिर हम सारे राजू के रूम में गए और गेम खेलने लगे। ऐसे ही हम सब गेम खेल रहे थे। गेम खेलते टाइम मेरे फोन पर मैसेज आया अकरम का।

अकरम: बेटा तुम्हारी सेंडल ठीक हो गई है

फिर थोड़ी देर बाद दीदी ने रिप्लाई किया—

दीदी: ओके अंकल, मैं आ रही हूँ लेने

मुझे लगा आज भी कुछ न कुछ होने वाला है। मैं भी चलता हूँ।

मैंने अपने दोस्तों से बोला कि मैं घर जा रहा हूँ लेकिन उन्होंने जाने नहीं दिया। और ऐसे ही 30 मिनट निकल गए। उसके बाद मैं अपने दोस्त के घर से निकला। उस टाइम 12:30 हो रहे थे।

जब मैं अकरम की दुकान के पास पहुँचा और उसके घर देखा तो उसका दरवाजा बाहर से बंद था। मैंने सोचा अकरम भी घर पर नहीं है और दीदी भी नहीं हैं तो दोनों गए कहाँ। मेरे दिमाग में गंदे-गंदे आइडिया आने लगे कि अकरम दीदी को कहीं ले जाकर चोद रहा होगा।

ऐसे ही फिर मैं वापस से अपने दोस्त के घर जा रहा था तो मैंने दीदी और अकरम को देखा। दीदी और अकरम के हाथ में सामान था। मुझे लगा दीदी सामान खरीदने गई होंगी। फिर मैं उनको चुपके से देखने लगा।

दीदी: अंकल जी आज गर्मी कुछ ज्यादा ही है ना

अकरम: हाँ वो तो दिख रहा है नीतू बेटा। तुम्हारे पसीने से साड़ी गीली हो रही है

दीदी इस पर मुस्कुराने लगीं।

फिर अकरम बोला—

अकरम: बेटा आइसक्रीम खाओगी

दीदी: चलो अंकल जी। गर्मी में उसे खाकर ही अच्छा लगेगा

अकरम मन में सोच रहा था— तेरी गर्मी तो मैं अपनी आइसक्रीम से निकालूँगा रंडी। एक बार बस हाथ आ जा मेरे।

फिर दीदी और अकरम ने एक-एक आइसक्रीम ले ली। फिर दीदी और अकरम आइसक्रीम खाने लगे।

अकरम: बेटा आइस को हमने पहले चाटते हैं उसके बाद मुँह में लेकर चूसते हैं। वैसे खाओ तुमको और भी मजा आएगा

दीदी: अच्छा अंकल जी

फिर दीदी वैसे ही आइसक्रीम खाने लगीं और अकरम दीदी को देख रहा था खाते हुए।

अकरम: बेटा तुम्हारे होंठ कितने गुलाबी हैं। एकदम मेरी बेगम की तरह

दीदी: क्या अंकल जी आप हमेशा मुझको अपनी बेगम की तरह ही लग रही हूँ कहते हो। मैं आपकी बेगम की तरह लगती हूँ क्या

अकरम: हाँ बेटा तुम एकदम उसकी जैसी हो

दीदी: अच्छा बताओ किस तरह मैं आपकी बेगम लगती हूँ

अकरम: बेटा बुरा मत मानना

दीदी: बोलो अंकल जी। नहीं मानूँगी

अकरम: तुम्हारे ही होंठ, तुम्हारी कमर और तुम्हारी बड़ी सी गाँड एकदम मेरी बेगम की तरह है

दीदी: क्या अंकल जी कोई ऐसा बोलता है क्या

अकरम: बेटा मैंने कहा था तुम बुरा मान जाओगी

दीदी: नहीं अंकल जी लेकिन आपको ऐसा वर्ड यूज नहीं करना चाहिए था

अकरम: बेटा मुझे क्या पता उसको और क्या बोलते हैं। वैसे तुम्हारी एक चीज मेरी बेगम जैसी नहीं है

दीदी: क्या अंकल जी

अकरम: बताऊँ। तुम्हारे चूचे मेरी बेगम से छोटे हैं। इसमें और मेहनत करनी पड़ेगी

अंकल के बोलने पर दीदी एकदम से शर्मा गईं और बोलीं—

दीदी: अंकल जी आप फिर से

अकरम: सही में तुम्हारे मेरी बेगम से छोटे हैं

अंकल और दीदी की बात सुनते-सुनते मेरा तो लंड पागल सा हो रहा था। और अंकल और दीदी बात करते-करते कब घर आ गए पता ही नहीं चला।

दीदी: ये लो अंकल जी। पता ही नहीं चला कब हम घर आ गए

अकरम: अच्छा ये है तुम्हारा घर। चलो फिर मैं चलता हूँ

दीदी: अरे अंकल आप पहली बार मेरे घर आए हो। कुछ खा-पीकर जाना। वैसे भी अभी धूप है

अकरम: अच्छा बेटा

फिर दीदी और अकरम घर गए और मैं भी उनके पीछे-पीछे गया और बाहर खिड़की से अंदर देखने लगा।

दीदी ने सारा सामान घर में रख दिया। अंकल सोफे पर बैठ गए और दीदी अंकल के लिए पानी लेकर आईं। जैसे ही दीदी पानी देने के लिए गईं दीदी के हाथ से पानी अकरम के धोती पर गिर गया और उसका लंड धोती में एकदम शेप में दिखने लगा।

दीदी: सॉरी अंकल जी। गलती से गिर गया

अकरम: कोई नहीं बेटा

दीदी: आप अपनी धोती मुझको दे दो। मैं धूप में डालकर आती हूँ

अकरम: अच्छा बेटा

फिर दीदी अंदर से एक टॉवल लेकर आईं और अकरम को दे दिया। अकरम ने टॉवल को लपेट लिया और धोती दीदी को दे दी। दीदी धूप में डालकर आ गईं।

दीदी नीचे आईं और बोलीं—

दीदी: अंकल जी मैं चाय बनाकर आऊँ

अकरम: बेटा तो मैं इधर क्या करूँगा। चलो मैं भी तुम्हारी हेल्प कर देता हूँ चाय बनाने में

दीदी चाय बनाने के स्लैब के पास गईं और अकरम दीदी के पीछे खड़ा होकर दीदी की बड़ी गाँड देख रहा था।

अकरम: नीतू बेटा तुम हो बड़ी खूबसूरत

दीदी मुस्कुराने लगीं। दीदी ऊपर डोरे में से सामान निकाल रही थीं लेकिन दीदी का हाथ नहीं पहुँच रहा था। तो अंकल एक से पीछे गए और सामान उतारने के बहाने दीदी की गाँड के दरार में अपना लंड रगड़ने लगे जिससे दीदी को एक बहुत बड़ा वाला शॉक लगा। दीदी ने इस चीज की कल्पना नहीं की थी कि अंकल ऐसा करेंगे। दीदी अंकल से हटने की कोशिश करने लगीं लेकिन अंकल पीछे खड़े थे जिससे दीदी हट नहीं सकीं और अंकल भी फायदा उठाकर दीदी की गाँड में धक्का देने लगे। एक हाथ से दीदी की गाँड पकड़ ली और एक हाथ से सामान उतारने लगे।

दीदी: अंकल जी क्या कर रहे हैं आप

अकरम: बेटा सामान उतार रहा हूँ

दीदी: मेरे पीछे आपका कुछ चुभ रहा है

अकरम: (मुस्कुराकर) बेटा क्या चुभ रहा है

दीदी: वो……

अकरम: वो क्या नाम बताओ

दीदी: (शर्माते हुए) आपका हथियार

दीदी गरम सी होने लगीं और शर्माने लगीं। दीदी ने ऐसा कहीं नहीं सोचा था कि कोई ऐसा करेगा।

अकरम: मेरा कौन सा हथियार

दीदी: आपका जो मेरे पीछे चुभ रहा है

अंकल ने दीदी को सामान उतारकर दे दिया लेकिन दूर नहीं हटे और दीदी की गाँड एक साथ से बढ़ाते रहे। एक हाथ से दीदी की कमर को पकड़ रखा था।

अकरम: क्या चुभ रहा है बेटा। ठीक से बोलो और कहाँ चुभ रहा है

दीदी: (बहुत धीरे) आपका लंड मेरी गाँड पर चुभ रहा है

दीदी अकरम से थोड़ा खुलने लगी थीं।

अकरम: (मुस्कुराकर) अच्छा बेटा लेकिन मैं क्या कर सकता हूँ। मैं तो तुम्हारी मदद कर रहा था

दीदी: अब तो आप थोड़ा पीछे हटिए

अकरम: बेटा मैं तो बस देख रहा हूँ

दीदी: थोड़ा पीछे होकर देखिए अंकल जी। आपका हाथ और आपका हथियार चुभ रहा है

अकरम: बेटा पीछे से ठीक से नहीं देखेगा

दीदी: अंकल जी आप तो मुझको अपनी बेगम ही समझने लगे

अंकल मुस्कुराने लगा और दीदी की गाँड पर धक्का मारने लगा। मैं ये सब बाहर से देख रहा था। मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ और मैंने अपना लंड निकाला और मुठ मारने लगा और अंदर देखने लगा।

अकरम: क्या करूँ बेटा तुम मुझे मेरी बेगम लगती हो

दीदी: लगती हूँ अंकल जी। हूँ नहीं। अब हटिए। चाय बन गई

अकरम: अच्छा

फिर अकरम दीदी से दूर हुआ और दोनों बाहर जाकर चाय पीने लगे। उसके बाद अकरम बोला—

अकरम: बेटा तुम्हारे तरबूज बड़े ही बड़े हैं

दीदी: क्या? कुछ समझ में नहीं आया। क्या-क्या तरबूज

अकरम: बेटा तुम्हारी गाँड एकदम मेरी बेगम की तरह

दीदी मुस्कुराने लगीं।

अकरम: पता है बेटा मैं रोज उनको रगड़ा करता था

दीदी को शर्म आने लगी और साथ-साथ दीदी गरम भी होने लगीं। दोनों ऐसे ही बातें करते रहे और 4 बज गए। उसके बाद अंकल अपने घर चले गए और मैं भी थोड़ी देर बाद घर आ गया।

आज दीदी कुछ खुश सी लग रही थीं। ऐसे ही रात हो गई। हमने डिनर किया। उसके बाद 10 बजे सोने चले गए।

दीदी और मैं सोने चले गए थे। मैं अपने रूम में जाकर आज जो हुआ सोचकर दीदी के नाम की हिलाने लगा। हिलाते हुए मेरे फोन पर एक मैसेज आया। वो मैसेज किसी और का नहीं अकरम अंकल का था।

अकरम: हेलो

दीदी ने मैसेज सीन किया और रिप्लाई किया—

दीदी: हेलो अंकल जी

अकरम: बेटा क्या कर रही हो

दीदी: कुछ नहीं बस लेटी हुई हूँ

अकरम: अकेली या किसी के साथ

दीदी: अकेली ही हूँ। और किसके साथ सोऊँगी

अकरम: मैं हूँ ना सोने के लिए (हँसने वाला इमोजी भेज दिया)

दीदी: आपने तो मुझको असली में ही अपनी बेगम मान लिया है

अकरम: तो बन जाओ ना नीतू बेटा

दीदी: अंकल जी दिन पर दिन आप कुछ ज्यादा शरारती हो गए हो। आज आपने किचन में वो सब जानबूझकर किया था ना

अकरम: (हँसने वाला इमोजी)

अकरम: क्या करूँ बेटा तुम्हारे तरबूज देखकर कंट्रोल ही नहीं हुआ

दीदी ने मैसेज सीन करके कुछ रिप्लाई नहीं दिया और शर्माने लगीं।

अकरम: कहाँ चली गई

दीदी: कहीं नहीं

अकरम: बेटा एक बात पूछूँ

दीदी: हाँ पूछिए

अकरम: बेटा तुमने अभी क्या पहना है

दीदी: क्यों अंकल जी

अकरम: बताओ ना बेटा

दीदी: नाइट सूट पहना है

अकरम: बेटा अपनी एक फोटो भेजो ना

दीदी: क्यों

अकरम: बेटा बेगम की याद आ रही है। तुम्हें देखकर याद नहीं आएगी

दीदी: ठीक है अंकल जी

दीदी ने अंकल को अपनी एक वीडियो भेजी जिसमें दीदी बहुत सेक्सी लग रही थीं।

अकरम: आह! बेटा तुम कितनी सुंदर हो

दीदी: आप बस मेरी तारीफ ही करते रहते हो

अकरम: बेटा अभी मौका दो और कुछ भी कर दूँगा (हँसने वाला इमोजी)

दीदी अंकल से बात करके गरम हो रही थीं। ऐसे ही दोनों की बातें हुईं फिर दीदी सो गईं और मैं भी दीदी के नाम की मुठ मारके सो गया।

सुबह जब सोकर उठा दीदी को गुड मॉर्निंग बोला और जब दीदी को देखा तो आँखें फटी की फटी रह गईं। दीदी ने आज इतनी सेक्सी साड़ी पहनी थी जिसमें दीदी की क्लीवेज कुछ ज्यादा ही दिख रही थी। साथ में दीदी ने आज अपनी साड़ी अपने नेवल के कुछ ज्यादा ही नीचे पहन रखा था। दीदी आज बहुत ही सेक्सी लग रही थीं। दीदी को देखकर मुझे कंट्रोल नहीं हुआ और बाथरूम में जाकर मुठ मारने लगा और फिर फ्रेश होकर आया।

दीदी: चल आ जा बैठ जा। नाश्ता लगा दिया है

मैं: ठीक है

फिर दीदी और मैं नाश्ता खाने लगे। उसके बाद मैं और दीदी कुछ बातें करने लगे।

दीदी: आज का क्या प्लान है

मैं: कुछ नहीं। आज घर पर रहूँगा। मेरा दोस्त आज कहीं गया है

दीदी: अच्छा

उसके बाद मैं अपने रूम में चला गया और सेक्स स्टोरीज पढ़ने लगा जिसमें बहन किसी दूसरे से चुदती है और भाई वो देखता है चुपके। और स्टोरी पढ़ते टाइम मैं दीदी को इमेजिन करने लगा और हिलाकर सो गया। जब मेरी आँखें खुलीं तो 4 बज रहे थे। मैंने जब अपना फोन चेक किया तो मैं पागल सा हो गया। दीदी और अकरम ने आज ऐसी बातें की थीं जिसकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी।

अकरम: गुड मॉर्निंग

दीदी: गुड मॉर्निंग

अकरम: क्या कर रही हो बेगम जी

दीदी: अरे वाह! अंकल जी आज बेटा से सीधा बेगम। आप कुछ ज्यादा ही आगे बढ़ रहे हो

अकरम: (हँसने वाला इमोजी)

दीदी: कुछ नहीं अंकल जी बस टीवी देख रही थी

अकरम: अच्छा बेटा आज मार्केट नहीं आओगी। तुम्हें देखने का मन कर रहा है

दीदी: नहीं अंकल जी आज नहीं आऊँगी

अकरम: नीतू बेटा बेगम बनोगी मेरी (हँसने वाला इमोजी)

दीदी: कैसी बात कर रहे हो अंकल जी

अकरम: प्लीज बन जाओ

दीदी: ओके अंकल जी लेकिन हम बस एक्टिंग करेंगे। ठीक है

अकरम: ठीक है बेगम साहिबा

अकरम: बेटा मुझे आज से अंकल मत बोलना। मुझे अब नाम से बुलाना। तुम अब मेरी बेगम हो (हँसने वाला इमोजी)

दीदी: हम तो बस एक्टिंग ही तो कर रहे हैं अंकल जी

अकरम: फिर से अंकल

दीदी: ओह सॉरी अकरम जी

अकरम: और मैं तुमको नीतू बोलूँगा। ठीक है बेगम साहिबा

दीदी: (शर्माकर) ठीक है अकरम जी

अकरम: बेगम क्या पहना है आज तुमने

दीदी: साड़ी पहनी है अकरम जी

अकरम: एक फोटो भेजो ना

दीदी ने फिर अकरम को एक फोटो भेजी।

अकरम: अरे वाह मेरी बेगम तुम तो मुझे मार ही डालोगी

दीदी शर्माने लगीं।

अकरम: बेगम एक अपनी वीडियो बनाकर भेजो ना जिसमें तुम्हारे आम भी दिखें

दीदी: आम?

अकरम: अरे बेगम तुम्हारा चोचा

दीदी: नहीं अकरम जी मैं वैसा नहीं भेज सकती। आप किसी को दिखा दोगे तो

अकरम: नहीं दिखाऊँगा बेगम। भेजो तो

फिर दीदी ने 5 मिनट के बाद एक ऐसी वीडियो भेजी जिसे देखकर मेरा लंड पागल हो गया और उधर अकरम का भी।

अकरम: अरे नीतू तुमने तो पागल कर दिया एक मेरे लंड को

दीदी: कैसी बात कर रहे हो अकरम जी

अकरम: अब अपनी बेगम से कैसे बात की जाती है

दीदी: हम तो बस एक्टिंग कर रहे हैं ना

अकरम: अरे नीतू डार्लिंग तुम मेरा लंड देखोगी

दीदी: नहीं अकरम जी

अकरम ने दीदी को अपने लंड की फोटो भेज दी। उसका लंड 11 इंच का था बहुत मोटा। जिसे देखकर दीदी अकरम को बोलीं—

दीदी: क्या है अंकल जी ये। मैंने आपको मना किया था फिर क्यों भेजा। बात मत करना मुझसे

और दीदी ऑफलाइन हो गईं।

अकरम ने उसके बाद माफी भी माँगी लेकिन दीदी ने कोई रिप्लाई नहीं दिया। और फिर मैं 5 बजे थोड़ी देर घर से बाहर चला गया और रात को डिनर के टाइम में आया। हमने डिनर कर लिया। उसके बाद हम टीवी देख रहे थे तो दीदी के फोन पर अकरम का फोन आया और मेरे फोन पर भी। जिसे मैंने दीदी से पूछा तो दीदी हड़बड़ाकर बोलीं—

दीदी: तेरे जीजा का फोन है। मैं जा रही हूँ सोने

बोलकर दीदी अपने रूम में चली गईं। दीदी ने मुझसे झूठ बोला कि जीजा का फोन है लेकिन फोन अकरम का था।

दीदी रूम में जाकर कॉल उठाया और बोलीं—

दीदी: आपने मुझको कॉल क्यों किया। मेरा भाई भी था मेरे साथ। उसको तो मैं झूठ बोलकर आज बच गई

अकरम: नीतू जी मैंने आज दिन के लिए माफी माँगने के लिए कॉल किया था। क्या झूठ बोला आपने अपने भाई से

दीदी: (शर्माकर) कि तेरे जीजा का फोन आया है

अकरम: (खुश होकर) तो आपने क्या झूठ बोला। मैं जीजा ही तो हूँ आपके भाई का बेगम साहिबा

दीदी ये सुनकर खिलखिलाकर हँसने लगीं और बोलीं—

दीदी: अकरम जी आप और आपकी बातें दोनों मजाकिया हैं

अकरम: माफ कर दिया ना मुझे

दीदी: हाँ माफ कर दिया

अकरम: एक बार पूछूँ बुरा नहीं मानोगी

दीदी: पूछो

अकरम: कैसे लगा आपको मेरा लंड

दीदी सरप्राइज हो गईं।

दीदी: क्या बोल रहे हो आप

अकरम: मैंने बोला था बुरा मान जाओगे। बताओ ना कैसे लगा

दीदी: (धीरे से) बड़ा है आपका

अकरम: आपके हस्बैंड से भी बड़ा

दीदी: (शर्माकर) हाँ बहुत बड़ा है आपका

अकरम: क्या बड़ा है। ठीक से बोलो

दीदी: आपका लंड

अकरम ने दीदी को गरम कर दिया था।

अकरम: आपने कभी मुँह में लिया है

दीदी: कैसी बात कर रहे हो। मैं नहीं करती गंदी चीजें

अकरम: मेरी बेगम तो रोज मेरा मुँह में लेती थी

दीदी: मैं आपकी सच्ची बेगम थोड़ी हूँ

अकरम: तो क्या हुआ। बन जाओगी। मौका दो कभी

दीदी: आप भी ना अकरम जी

अकरम: अपनी एक ब्रा-पैंटी की फोटो भेजो ना

दीदी: नहीं अकरम जी

अकरम: बेगम साहिबा ठीक है। बात मत करो मुझसे

और अकरम नाटक करने लगा बात न करने का।

दीदी: अरे बुरा मत मानो अकरम जी। मैं ब्रा-पैंटी में नहीं भेज सकती लेकिन साड़ी में भेज सकती हूँ

अकरम: अच्छा भेजो

दीदी ने 5 मिनट के बाद एक सेक्सी सी वीडियो भेजी। अकरम को उसे देखकर अकरम ने दीदी को अपनी मुठ मारने की वीडियो भेज दी।

अकरम: देखो क्या हाल हो गया मेरे लंड का

दीदी शर्माकर हँसने लगीं।

अकरम: नीतू जी अगर मैं आपको अपना लंड चूसने के लिए बोलूँ तो आप चूसोगी

दीदी अकरम से बात करके कुछ ज्यादा ही गरम हो गई थीं। दीदी बात करते-करते अपनी चूत में उँगली कर रही थीं।

दीदी: मैंने कभी ट्राई नहीं किया

अकरम: जी तो मेरा कर लेना

दीदी: अच्छा आप मुझको लंड चूसवाओगे

अकरम: मौका तो दो। मैं तुम्हारी भी मार लेता हूँ

दीदी इतनी गरम हो गई थीं कि क्या उनको पता ही नहीं था कि वो क्या बात कर रही हैं अकरम से। और दीदी एकदम से झड़ गईं और अकरम का कुछ भी रिप्लाई नहीं दिया और सो गईं।

दीदी मन में सोचने लगीं— ये मैं क्या कर रही थी। मैं इतनी गंदी कैसे हो गई। मैं धोखा नहीं दे सकती अपने हस्बैंड को। दीदी ये सोचकर सो गईं। इधर मैं आज जो हुआ लंड हिला-हिलाकर सो गया।

सुबह मैं 10 बजे उठा। दीदी आज एक सेक्सी साड़ी पहनी थीं।

दीदी: आज इतनी लेट क्यों उठा है

मैं: दीदी सर में दर्द हो रहा था

दीदी: अच्छा। चल जा जल्दी फ्रेश होकर आ

मैं फ्रेश होकर आया। दीदी ने नाश्ता लगा दिया और हमने खाना खाया और मैं दीदी से बोलकर चला गया कि मैं आराम करने जा रहा हूँ। मैं थोड़ी देर आराम किया और 2 बजे उठा और फोन चलने लगा।

2:30 बजे अकरम का मैसेज आया।

अकरम: कैसी हो नीतू जी

दीदी: ठीक हूँ

अकरम: आज आओगी

दीदी: नहीं

अकरम: तुम्हें देखने का मन कर रहा है

अकरम: तुम अकेली हो क्या

दीदी: नहीं। राहुल दूसरे कमरे में सो रहा है

अकरम: ठीक है। मैं घर आ रहा हूँ तुम्हारे

दीदी: पागल हो क्या। राहुल ने देख लिया तो बवाल हो जाएगा

अकरम: कुछ नहीं होगा

बोलकर ऑफलाइन हो गया।

10 मिनट बाद अकरम घर आया और दीदी को मैसेज किया—

अकरम: गेट खोलो

दीदी: पागल हो क्या

अकरम: खोलो बेगम साहिबा। थोड़ी देर में चला जाऊँगा

दीदी ने फिर गेट खोला।

दीदी: जल्दी चलो मेरे साथ

और दीदी ने अकरम को अपने रूम में लेकर चली गईं। मैं ये सब चुपके से देखने लगा।

दीदी: क्या करने आए हो अकरम जी

अकरम: अपनी बेगम से प्यार करने आया हूँ

दीदी: अगर राहुल ने देख लिया तो गड़बड़ हो जाएगा। प्लीज चले जाइए

आगे क्या हुआ पढ़ें नेक्स्ट पार्ट में।

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2 Comments

  1. Madarchod Tereko bahan chodwane ke liye mulla mila namard mere pass bhej tere Randi bahan chut bhar tunga lawde bhej randi kutiya ko

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