मेरी दीदी बनी देसी रंडी – 2

Didi ki chudai ki hindi sex story:- पिछले पार्ट में राहुल अपनी दीदी नीतू के साथ सबजी लेने गया था। दीदी अकरम अंकल की दुकान पर पहुँचीं जहाँ अकरम धोती-बनियान में था। दीदी का बैकलेस ब्लाउज और क्लीवेज देखकर अकरम का लंड खड़ा हो गया। उसने दीदी को अंदर बुलाया, पेटिकोट दिया (जिस पर रात भर मुठ मारी थी), और दीदी की गाँड पर मिट्टी का बहाना बनाकर हाथ लगाया। दीदी शॉक हुईं लेकिन माफ कर दिया। राहुल बाहर से सब देख रहा था। अकरम ने दीदी का नंबर ले लिया। रात को अकरम ने मैसेज किया।

Part 1 ==> मेरी दीदी बनी देसी रंडी – 1

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Didi ki chudai ki hindi sex story

उस समय अकरम धोती और बनियान में था।

और दीदी को देखकर उसका लंड जैसे जान सी आ गई क्योंकि दीदी का ब्लाउज बैकलेस था। ऊपर से दीदी का क्लीवेज बहुत ज्यादा दिख रहा था जिसे देखकर अकरम अपने आपको कंट्रोल नहीं कर पा रहा था। लेकिन कैसे-कैसे उसने अपने आपको कंट्रोल किया और दीदी से बोला।

अकरम: नीतू बेटा खड़ी क्यों हो। चारपाई पर बैठ जाओ।

दीदी: ठीक है अंकल जी। अंकल जी सैंडल में कितना टाइम लगेगा?

अकरम: बेटा उसमें अभी तो टाइम लगेगा। धूप कम होते ही मैं ठीक कर दूँगा। तुम ये बताओ तुमको कुछ चाहिए?

दीदी: नहीं अंकल जी मैं ठीक हूँ। मेरे को कुछ नहीं चाहिए।

अकरम: बेटा कल तुम ठीक से तो घर पहुँच गई थीं ना?

दीदी: हाँ अकरम जी मैं कल ठीक से पहुँच गई थी।

अकरम दीदी से बात करते टाइम भी दीदी के क्लीवेज देख रहा था और अपना लंड मसल रहा था जो कि दीदी ने नहीं देखा था।

दीदी: आप बस मेरे बारे में ही पूछते रहेंगे क्या? कि मैं भी आपसे पूछूँ क्यों?

(दीदी ने ये मजाकिया तोर में कहा)

अकरम: अरे बेटा पूछो पूछो।

दीदी: आप बताइए आप कैसे हैं?

अकरम: (थोड़ा उदास होकर) क्या बताऊँ बेटा। अपनी बेगम के बिना बड़ी मुश्किल से रह पा रहा हूँ। दिन-रात उसकी ही याद आती है।

दीदी अकरम को दुखी ना होने के लिए बोलती है जिससे अकरम थोड़ा ठीक होता है।

दीदी: वैसे अंकल जी आंटी जी इतनी सुंदर थीं क्या?

अकरम: बेटा रुखसार बेगम तुम्हारी तरह ही थीं। एकदम तुम्हारी तरह।

दीदी: अच्छा मेरी तरह।

(और दीदी मुस्कुराने लगी)

अकरम: पता है बेटा जब भी तुम्हें देखता हूँ तो रुखसार बेगम की याद आ जाती है।

दीदी: अच्छा अंकल जी मेरे कपड़े!

अकरम: रुको बेटा मैं तुम्हें लाकर देता हूँ।

ये वही पेटिकोट था जिस पर अकरम ने रात भर मुठ मारी थी।

अकरम: ये लो बेटा।

दीदी उसको लेने के लिए खड़ी हुईं और लेकर अपने पास रख लिया। जब दीदी वापस से बैठने जा रही थीं तो अकरम ने देखा दीदी के गाँड के पास कुछ लगा हुआ है साड़ी के ऊपर। अकरम देखकर बोला।

अकरम: बेटा तुम्हारे पीछे कुछ लगा है।

दीदी: मेरे पीछे? क्या लगा है अंकल जी?

अकरम: हाँ बेटा तुम्हारे पीछे।

फिर दीदी उसको साफ करने लगीं। फिर अंकल से बोलीं।

दीदी: अंकल जी साफ हो गया।

अकरम: नहीं बेटा अभी भी लगा है।

दीदी वापस से साफ करीं लेकिन साफ नहीं हुआ था। दीदी वापस से बोलीं।

दीदी: अब अंकल जी?

अकरम: नहीं बेटा।

दीदी: अंकल जी आप अच्छे से बताइए कहाँ लगा है।

अकरम: बेटा तुम्हारे गाँड पर कुछ लगा है।

दीदी गाँड सुनते ही शॉक हो गईं।

और बोलीं।

दीदी: अंकल जी ऐसे कोई बोलता है क्या?

अकरम: बेटा तुमने ही तो बोला था ठीक से बोलने के लिए। तो बता दिया।

दीदी: फिर भी अंकल जी आप उसको कुछ और भी बोल देते।

अकरम: बेटा अब गाँड को गाँड ही तो बोलूँगा। तो क्या बोलूँ?

दीदी वापस से शॉक हो गईं। दीदी मन में अब क्या ही बोलूँ इनको। और दीदी साफ करने लगीं।

लेकिन साफ नहीं हुआ। अभी भी थोड़ी-बहुत मिट्टी लगी हुई थी।

दीदी: अब साफ हो गया ना?

अकरम: नहीं बेटा अभी भी लगा है। रुको एक मिनट।

बोलकर दीदी के पास गया और अपने हाथ से दीदी की गाँड को साड़ी के ऊपर छुआ और साफ करने लग गया।

जैसे ही अकरम ने दीदी की गाँड छुई दीदी शॉक हो गईं और दूर हट गईं।

अकरम को मजे ही आ रहे थे। दीदी की गाँड इतनी मुलायम थी जिसका मजा वो ले ही रहा था लेकिन दीदी दूर हो गईं और बोलीं।

दीदी: क्या कर रहे हो आप?

अकरम: बेटा साफ कर रहा था।

दीदी: मैं खुद कर लूँगी अंकल जी।

और दीदी साफ करने लगीं लेकिन अभी भी ठीक से साफ नहीं हुआ था तो अंकल बोले।

अकरम: बेटा अभी भी साफ नहीं हुए। लाओ मैं कर देता हूँ। तुम ऐसे ही घर जाओगी क्या? करने दो।

दीदी: नहीं अंकल जी।

अकरम: बात मानो बेटा।

दीदी मन में सोची छोड़ो करवा लेती हूँ। ऐसे घर थोड़ी जाऊँगी।

दीदी: ठीक है अंकल जी।

फिर दीदी अंकल की तरफ अपनी पीठ कर दी।

फिर अंकल ने अपना हाथ दीदी के मुलायम गाँड पर रखा और दीदी की गाँड महसूस करने लगे और साफ करते-करते अकरम से कंट्रोल नहीं हुआ और उन्होंने दीदी की गाँड दबा दी। दीदी की सिसकी निकल गई।

दीदी: आआह्ह्ह!! अंकल जी क्या कर रहे हो?

अकरम: बेटा साफ कर रहा हूँ। बस साफ होने वाला है।

फिर अकरम दीदी की गाँड देखकर पागल सा हो गया था और वो भूल गया हो क्या कर रहा है और दीदी की गाँड पर अपना मुँह लगाकर सूँघने लगा। दीदी एकदम से शॉक हो गईं अंकल को इस तरह से करने से और अंकल को दूर करने लगीं लेकिन अंकल पागल हो गया था दीदी की गाँड देखकर। दीदी उससे दूर होने की कोशिश करने लगीं लेकिन अकरम ने दीदी की गाँड बिल्कुल टाइट पकड़ रखा था और अपना सिर दीदी की गाँड में रगड़ने लगा।

और बोलने लगा लेकिन दीदी कैसे-कैसे अंकल से दूर हुईं और अंकल से बोलीं।

दीदी: अंकल जी क्या कर रहे थे आप? आपको बिल्कुल भी शर्म नहीं आई ये सब करते हुए?

अकरम: बेटा माफ कर दो। तुम्हारी गाँड देखकर मेरे को अपनी बेगम की गाँड याद आ गई थी और मेरे को लगा जैसे मेरी बेगम हो तुम। माफ कर दो बेटी।

दीदी: अंकल जी अब आप बहाने मत बनाइए और मेरी सैंडल दीजिए। मैं जा रही हूँ।

अकरम: बेटा सच में मेरे को तुम मेरी बेगम लगी थीं। प्लीज बेटा माफ कर दो। मत जाओ ऐसे प्लीज बेटा।

और रोने की एक्टिंग करने लगा।

दीदी अकरम को रोता हुआ देख अकरम को चुप कराने लगीं और बोलीं।

दीदी: अंकल जी मैं इस बार तो आपको माफ कर रही हूँ लेकिन अगली बार ऐसा कभी मत करना। ठीक है?

अकरम: बेटा मैं क्या करूँ। तुम्हें देखकर बेगम याद आ गई और कंट्रोल नहीं हुआ। माफ कर दो।

मैं ये सब बाहर खड़ा होकर देख रहा था जिसे देखकर मैं पागल सा हो गया और मेरा लंड खड़ा हो गया और मैं अपने लंड को कंट्रोल करके कैसे-कैसे अंदर देखने लगा।

दीदी: मैं आपकी बेगम थोड़ी हूँ जो आप ये सब करने लगे।

अकरम: बेटा फिर बन जाओ ना।

दीदी: अंकल जी आप फिर से?

अकरम: अरे बेटा मजाक कर रहा था।

(और हँसने लगा)

जिसे देखकर दीदी भी हँसने लगीं।

ऐसे ही फिर दोनों हँसी-मजाक करने लगे।

फिर दीदी बोलीं।

दीदी: अंकल जी मैं घर जा रही हूँ। आप सैंडल में करो। कल दे देना। मैं बहुत देर से इधर हूँ।

अकरम: बेटा थोड़ी देर रुको। मैं अभी ठीक कर देता हूँ।

दीदी: अंकल जी नहीं। मेरे लेट हो रहा है।

अकरम: अच्छा बेटा एक काम करो। अपना नंबर मेरे को दे दो। मैं जब ठीक कर दूँगा तो मैं तुमको बता दूँगा।

दीदी: अच्छा ठीक है।

और नंबर बताने लगीं।

अकरम दीदी का नंबर अपने स्मार्टफोन में नोट करने लगा और व्हाट्सऐप पर ऐड कर लिया।

फिर दीदी निकलने ही वाली थीं कि मैं उधर से जल्दी भागकर छुप गया। फिर दीदी अपने घर चली गईं।

और मैं भी थोड़ी देर बाद घर पहुँच गया।

दीदी: कहाँ था इतने देर से?

मैं: कहीं नहीं।

दीदी: जा जल्दी से हाथ-पैर धो ले। जब तक मैं खाना बना रही हूँ।

उसके बाद कुछ नहीं हुआ। दीदी खाना बनाने लगीं और मैं वो सारी बातें सोचकर पागल सा हो रहा था। फिर मेरे को याद आया उसने दीदी का नंबर लिया है। दीदी का फोन रूम में था। मैं जल्दी से दीदी का फोन लिया और दीदी का व्हाट्सऐप को अपने फोन में भी लॉगिन कर लिया और दीदी के फोन में एक ऐप डाउनलोड कर दी जिससे दीदी की सारी कॉल मेरे पास आएगी और ऐप हाइड कर दी।

मेरे को लगा आज जो भी हुआ है उसके बाद अकरम कुछ ना कुछ जरूर करेगा। उसके बाद मैं फोन रखकर अपने रूम में गया और फोन चलाने लगा। 9:00 बजे दीदी ने मेरे को बुलाया और हमने खाना खाया। उसके बाद हमने टीवी देखा और मम्मी-पापा से बात की और फिर हम 10:00 बजे के बाद सोने चले गए।

रात के 11:00 बजे दीदी अपने रूम में सो रही थीं और मैं अपने रूम में रात को अपने फोन में ऐसे ही कुछ देख रहा था। एकदम से दीदी के फोन पर अकरम अंकल का मैसेज आया जिसे देखकर मैं शॉक हो गया। इतनी रात को अकरम अंकल मैसेज क्यों कर रहे हैं? वो भी दीदी को। फिर दीदी ने मैसेज सीन किया और रिप्लाई किया।

दीदी और अकरम की चैट

अकरम: हेलो

दीदी: कौन?

अकरम: बेटा मैं अकरम।

दीदी: अच्छा अंकल जी आप हैं। क्या हो गया अंकल जी इतनी रात को मैसेज कर रहे हैं?

अकरम: बेटा कुछ नहीं। घर पर अकेला बोर हो रहा था तो सोचा तुमसे ही बात करूँ।

दीदी: अच्छा अंकल जी।

अकरम: हाँ बेटा। जब तुम साथ रहती हो तो मेरे को अच्छा लगता है। इसलिए तुमसे बात करने का मन किया तो मैसेज कर दिया।

अकरम कोई गँवार नहीं था। अकरम 10वीं क्लास तक पढ़ाई किया।

अकरम: बेटा क्या कर रही?

दीदी: कुछ नहीं। सोने जा रही थी।

फिर अकरम और दीदी में ऐसे ही नॉर्मल बातें हुईं और सुबह हो गई।

दीदी सुबह नाश्ता बना रही थीं।

और मैं सोकर उठा और नहाकर दीदी के पास गया। दीदी को गुड मॉर्निंग बोला और नाश्ते के लिए बैठ गया। दीदी ने नाश्ता लगाया और दीदी और मैंने नाश्ता करने लगे।

दीदी ने आज जो साड़ी पहनी थी उसमें दीदी एकदम रंडी की तरह लग रही थीं। दीदी के क्लीवेज आज बाकी के दिनों से कुछ ज्यादा ही दिख रहे थे। ऊपर से दीदी का नाभि भी दिख रहा था। दीदी को देखकर मेरा मन दीदी को चोदने का करने लगा लेकिन मैंने अपने आपको कंट्रोल किया। वैसे भी मैं दीदी के साथ कुछ कर भी नहीं सकता था। फिर दीदी मुझसे बोलीं।

दीदी: तेरे कॉलेज कब से स्टार्ट हो रहे हैं?

मैं: दीदी बस कुछ दिनों में होने ही वाले हैं।

दीदी: अच्छा तो आज क्या करने का प्लान है? कि दिन भर घूमता ही रहेगा?

मैं: दीदी कुछ नहीं। थोड़ी देर बाद अपने दोस्त के घर जाऊँगा। उसके घर पर जाकर बीजीएमआई खेलूँगा।

दीदी: तू यही करता रहियो पूरे दिन। और कोई काम तो है नहीं तेरे को।

मैंने कुछ नहीं बोला और नाश्ता करके थोड़ी देर के लिए अपने रूम में चला गया और दीदी टीवी देखने लगीं।

11:00 बजे मैं दीदी को बोलकर अपने दोस्त राजू के घर चला गया।

मेरे से पहले राजू के घर पर शिवम और कुलदीप भी आ रखे थे। फिर हम सारे राजू के रूम में गए और गेम खेलने लगे। ऐसे ही हम सब गेम खेल रहे थे। गेम खेलते टाइम मेरे फोन पर मैसेज आया अकरम का।

अकरम ने मैसेज किया था: बेटा तुम्हारी सैंडल ठीक हो गई है।

फिर थोड़ी देर बाद दीदी ने रिप्लाई किया: ओके अंकल। मैं आ रही हूँ लेने।

मेरे को लगा आज भी कुछ ना कुछ होने वाला है। मैं भी चलता हूँ।

मैंने अपने दोस्तों से बोला कि मैं घर जा रहा हूँ लेकिन उन्होंने जाने नहीं दिया।

और ऐसे ही 30 मिनट निकल गए। उसके बाद मैं अपने दोस्त के घर से निकला। उस टाइम 12:30 हो रहे थे।

जब मैं अकरम की दुकान के पास पहुँचा और उसके घर देखा तो उसका दरवाजा बाहर से बंद था। मैंने सोचा अकरम भी घर पर नहीं है और दीदी भी नहीं है तो दोनों गए कहाँ?

मेरे दिमाग में गंदे-गंदे आइडिया आने लगे कि अकरम दीदी को कहीं ले जाकर चोद रहा होगा।

ऐसे ही फिर मैं वापस से अपने दोस्त के घर जा रहा था तो मैंने दीदी और अकरम को देखा। दीदी और अकरम के हाथ में सामान था। मेरे को लगा दीदी सामान खरीदने गई होगी। फिर मैं उनको चुपके से देखने लगा।

दीदी: अंकल जी आज गर्मी कुछ ज्यादा ही है ना?

अकरम: हाँ वो तो दिख रहा है नीतू बेटा। तुम्हारे पसीने से साड़ी गीली हो रही है।

दीदी इस पर मुस्कुराने लगीं।

फिर अकरम बोला।

अकरम: बेटा आइसक्रीम खाओगी?

दीदी: चलो अंकल जी। गर्मी में उसे खाकर ही अच्छा लगेगा।

अकरम मन में: तेरी गर्मी तो मैं अपने आइसक्रीम से निकालूँगा रंडी। एक बार बस हाथ आ जा मेरे।

फिर दीदी और अकरम ने एक-एक आइसक्रीम ले ली।

फिर दीदी और अकरम आइसक्रीम खाने लगे।

अकरम: बेटा आइस को हमने पहले चाटते हैं उसके बाद मुँह में लेकर चूसते हैं। वैसे खाओ तुमको और भी मजा आएगा।

दीदी: अच्छा अंकल जी।

फिर दीदी वैसे ही आइसक्रीम खाने लगीं और अकरम दीदी को देख रहा था खाते हुए।

अकरम: बेटा तुम्हारे होठ कितने गुलाबी हैं। एकदम मेरी बेगम की तरह।

दीदी: क्या अंकल जी। आप हमेशा मेरे को अपनी बेगम की तरह ही लग रही हो कहते हो। मैं आपकी बेगम की तरह लगती हूँ क्या?

अकरम: हाँ बेटा तुम एकदम उसकी जैसी हो।

दीदी: अच्छा बताओ किस तरह मैं आपकी बेगम लगती हूँ।

अकरम: बेटा बुरा मत मान।

दीदी: बोलो अंकल जी। नहीं मानूँगी।

अकरम: तुम्हारे ही होठ, तुम्हारी कमर और तुम्हारी बड़ी सी गाँड एकदम मेरी बेगम की तरह है।

दीदी: क्या अंकल जी। कोई ऐसा बोलता है क्या?

अकरम: बेटा मैंने कहा था तुम बुरा मान जाओगी।

दीदी: नहीं अंकल जी लेकिन आपको ऐसा वर्ड यूज नहीं करना चाहिए था।

अकरम: बेटा मुझे क्या पता उसको और क्या बोलते हैं। वैसे तुम्हारी एक चीज मेरी बेगम जैसे नहीं है।

दीदी: क्या अंकल जी?

अकरम: बताऊँ। तुम्हारे चूचे मेरी बेगम से छोटे हैं। इसमें और मेहनत करनी पड़ेगी।

अंकल के बोलने पर दीदी एकदम से शर्मा गईं और बोलीं।

दीदी: अंकल जी आप फिर से!

अकरम: सही में। तुम्हारे मेरी बेगम से छोटे हैं।

अंकल और दीदी की बात सुनते-सुनते मेरा तो लंड पागल सा हो रहा था।

और अंकल और दीदी बात करते-करते कब घर आ गए पता ही नहीं चला।

दीदी: ये लो अंकल जी। पता ही नहीं चला कब हम घर आ गए।

अकरम: अच्छा ये है तुम्हारा घर।

चलो फिर मैं चलता हूँ।

दीदी: अरे अंकल आप पहली बार मेरे घर आए हो। कुछ खा-पीकर जाना। वैसे भी अभी धूप है।

अकरम: अच्छा बेटा।

फिर दीदी और अकरम घर गए और मैं भी उनके पीछे-पीछे गया और बाहर खिड़की से अंदर देखने लगा।

दीदी ने सारा सामान घर में रख दिया। अंकल सोफे पर बैठ गए और दीदी अंकल के लिए पानी लेकर आईं और जैसे ही दीदी पानी देने के लिए गईं दीदी के हाथ से पानी अकरम के धोती पर गिर गया।

और उसका लंड धोती में एकदम शेप में दिखने लगा।

दीदी: सॉरी अंकल जी। गलती से गिर गया।

अकरम: कोई नहीं बेटा।

दीदी: आप अपनी धोती मेरे को दे दो। मैं धूप में डालकर आती हूँ।

अकरम: अच्छा बेटा।

फिर दीदी अंदर से एक टॉवल लेकर आईं और अकरम को दे दिया। अकरम ने टॉवल को लपेट लिया और धोती दीदी को दे दी। दीदी धूप में डालकर आ गईं।

दीदी नीचे आईं और बोलीं।

दीदी: अंकल जी मैं चाय बनाकर आऊँ।

अकरम: बेटा तो मैं इधर क्या करूँगा। चलो मैं भी तुम्हारी हेल्प कर देता हूँ चाय बनाने में।

दीदी चाय बनाने के स्लैब के पास गईं और अकरम दीदी के पीछे खड़ा होकर दीदी की बड़ी गाँड देख रहा होता है।

अकरम: नीतू बेटा तुम हो बड़ी खूबसूरत।

दीदी मुस्कुराने लगीं।

दीदी ऊपर डोरे में से सामान निकाल रही थीं लेकिन दीदी का हाथ नहीं पहुँच रहा था तो अंकल एक से पीछे गए और सामान उतारने के बहाने दीदी की गाँड के दरार में अपना लंड रगड़ने लगे जिससे दीदी को एक बहुत बड़ा वाला शॉक लगा। दीदी ने इस चीज की कल्पना नहीं की थी कि अंकल ऐसा करेंगे। दीदी अंकल से हटने का ट्राई करने लगीं लेकिन अंकल पीछे खड़े थे जिससे दीदी हट नहीं सकीं और अंकल भी फायदा उठाकर दीदी की गाँड में धक्का देने लगे और एक हाथ से दीदी की गाँड पकड़ ली और एक हाथ से सामान उतारने लगे। दीदी बोलीं।

दीदी: अंकल जी क्या कर रहे हो आप?

अकरम: बेटा सामान उतार रहा हूँ।

दीदी: मेरे पीछे आपका कुछ चुभ रहा है।

अकरम: (मुस्कुराकर) बेटा क्या चुभ रहा है?

दीदी: वो…….

अकरम: वो क्या? नाम बताओ।

दीदी: (शर्माते हुए) आपका हथियार।

दीदी गरम सी होने लगीं और शर्माने लगीं। दीदी ने ऐसा कहीं नहीं सोचा था कि कोई ऐसा करेगा।

अकरम: मेरा कौन सा हथियार?

दीदी: आपका जो मेरे पीछे चुभ रहा है।

अंकल ने दीदी को सामान उतारकर दे दिया लेकिन दूर नहीं हटा और दीदी की गाँड एक हाथ से दबाते रहा और एक हाथ से दीदी की कमर को पकड़ रखा था।

अकरम: क्या चुभ रहा है बेटा? ठीक से बोलो और कहाँ चुभ रहा है।

दीदी: (बहुत धीरे बोलीं) आपका लंड मेरी गाँड पर चुभ रहा है।

दीदी अकरम से थोड़ा खुलने लगी थीं।

अकरम मुस्कुराने लगा और बोला।

अकरम: अच्छा बेटा लेकिन मैं क्या कर सकता हूँ। मैं तो तुम्हारी मदद कर रहा था।

दीदी: अब तो आप थोड़ा पीछे हटिए।

अकरम: बेटा मैं तो बस देख रहा हूँ।

दीदी: थोड़ा पीछे होकर देखिए अंकल जी। आपका हाथ और आपका हथियार चुभ रहा है।

अकरम: बेटा पीछे से ठीक से नहीं देखेगा।

दीदी: अंकल जी आप तो मेरे को अपनी बेगम ही समझने लगे।

अंकल मुस्कुराने लगा और दीदी की गाँड पर धक्का मारने लगा।

मैं ये सब बाहर से देख रहा था। मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ और मैंने अपना लंड निकाला और मुठ मारने लगा और अंदर देखने लगा।

अकरम: क्या करूँ बेटा। तुम मुझे मेरी बेगम लगती हो।

दीदी: लगती हूँ अंकल जी। हूँ नहीं। अब हटिए। चाय बन गई।

अकरम: अच्छा।

फिर अकरम दीदी से दूर हुआ और दोनों बाहर जाकर चाय पीने लगे। उसके बाद अकरम बोला।

अकरम: बेटा तुम्हारे तरबूज बड़े ही बड़े हैं।

दीदी: क्या? कुछ समझ में नहीं आया। क्या तरबूज?

अकरम: बेटा तुम्हारी गाँड एकदम मेरी बेगम की तरह।

दीदी मुस्कुराने लगीं।

अकरम: पता है बेटा मैं रोज़ उनको रगड़ा करता था।

दीदी को शर्म आने लगी और साथ-साथ दीदी गरम भी होने लगीं। दोनों ऐसे ही बातें करते रहे और 4 बज गए। उसके बाद अंकल अपने घर चले गए।

और मैं भी थोड़ी देर बाद घर आ गया।

आज दीदी कुछ खुश सी लग रही थीं।

ऐसे ही रात हो गई। हमने डिनर किया। उसके बाद 10 बजे सोने चले गए।

आगे क्या हुआ पढ़िए अगले पार्ट में।

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