हुमा एक हाउस वाइफ और मिश्रा पान वाला – 14
Husband ke dost se chudai ki kahani:- पिछले पार्ट मे आपने पढ़ा कि हुमा मिश्रा से चुदने के लिए उसकी पान की दुकान पर जाती है। वहाँ पर दोनों एक दूसरे को चूमने चाटने ही लगे थे कि पान की दुकान पर कस्टमर आ जाता है। मिश्रा जैसे तैसे उसको निपटाता है और फिर से हुमा के पास जाता है। फिर दोनों एक दूसरे मे खो जाते है। और चुदाई की तड़प दोनों तरफ बढ़ जाती है । अब पढिए आगे …
पिछला पार्ट यहाँ पढ़ें ==>हुमा एक हाउस वाइफ और मिश्रा पान वाला – 13
हुमा ने भी देखा, मिश्रा आँखें बंद किए हुए कुछ सोच रहा है… तभी मिश्रा ने आँखें खोलीं तो नज़र हुमा से मिली और मिश्रा मुस्कुरा दिया। हुमा भी मुस्कुरा दी, मगर उसकी मुस्कान कुछ देर की थी। अगले पल मिश्रा ने धक्का लगा दिया। मिश्रा आधा लंड बाहर खींच कर अंदर डाल दिया। हुमा का मुस्कुराता चेहरा अब हल्के से दर्द भरी सिसकारी में बदल गया।
Husband ke dost se chudai ki kahani
हुमा: सsssssshhhhhhh
मिश्रा धक्के लगाने लगा। उसके हल्के-हल्के धक्कों से हुमा भी हिलने लगी। उसकी ब्रा उसके गले में थी। मिश्रा ने सूखो ब्रा नहीं उतारी थी। उसके बूब्स उसकी ब्रा, जो गले में थी, उससे टकराकर वापस आ रहे थे। मिश्रा का काला-कलूटा वासना से भरा चेहरा यह नज़ारा देखकर और पागल हो रहा था। मिश्रा के धक्के बढ़ने लगे…
हुमा अपनी दबी आवाज़ में सिसकारियाँ लिए जा रही थी…
हुमा: सsshhhhh सsshhhhhhh सsshhhhhhhh
हुमा को पता था कि वह पान की दुकान की पिछली साइड है तो आवाज़ बाहर जा सकती है, इसलिए वह अपने मुँह पर हाथ रखे हुए चुद रही थी। मिश्रा बहुत खुश था। उसकी मेहनत जो रंग लाई थी। हुमा को चोदने के लिए उसने बहुत पैसे और वक्त खर्च किए थे। वैसे वह दो बार पहले भी हुमा को चोद चुका था, मगर आज की बात कुछ और थी क्योंकि आज हुमा भी उसका साथ दे रही थी…
हुमा की गोरी मोटी टाँगों के बीच काला-कलूटा मिश्रा धक्के लगाए जा रहा था। मिश्रा की पीठ से लेकर गाँड तक बहुत बाल थे, वहीं हुमा के जिस्म पर एक बाल नहीं था। दूध जैसा चिकना बदन था उसका…
मिश्रा धक्के लगाकर स्वर्गीय आनंद लूट रहा था…
मिश्रा बोलना तो बहुत कुछ चाहता था, मगर ऐसे खूबसूरत भरे जिस्म की औरत को चोदने की खुशी में उसकी आवाज़ नहीं निकल पा रही थी…
तभी उन दोनों को एक आवाज़ आई…
बाहर वाला: मिश्रा जी… ओह्ह्ह्ह मिश्रा जी कहाँ हो भाई
मिश्रा धक्के लगाते हुए रुक गया…
तभी फिर आवाज़ आई…
बाहर वाला: मिश्रा भाई कहाँ हो…
मिश्रा को गुस्सा आ गया। वह समझ गया यह उसका ही customer है। उसने भी आवाज़ लगा दी।
मिश्रा: अरे लल्लनवा मैं अंदर हूँ, साफ-सफाई कर रहा हूँ। बाद में आना।
मिश्रा जब बात कर रहा था, हुमा की चूत में उसका लंड था…
हुमा बहुत ज़्यादा डर गई थी। वह जितनी गरम हुई थी उतनी ठंडी पड़ गई थी। जो भी था बाहर था, मगर उसकी आवाज़ हुमा साफ सुन रही थी। वह बहुत घबरा गई। उसने मिश्रा को इशारे में पूछा कौन है ये…
मिश्रा ने फुसफुसाते हुए कहा…
मिश्रा: कोई नहीं, ग्राहक है।
मिश्रा मन ही मन: मादरचोद को भी अभी आना था।
हुमा तो इतनी डर गई जैसे उसकी चोरी पकड़ी गई हो…
मिश्रा: अरे भाई बाद में आना, अभी सफाई कर रहा हूँ…
मिश्रा ने चिल्लाकर कहा।
बाहर खड़ा शख्स: अरे मिश्रा जी बहुत तलफ लगी है। एक 120/300 बनारसी पान लगा दो भाई और दो पैक कर देना…
मिश्रा को बहुत गुस्सा आ रहा था। अब भी मिश्रा अपना लंड हुमा की चूत में डाले हुए बातें कर रहा था। हुमा भी अपने पैरों को फैलाए लेटी थी…
हुमा फुसफुसाते हुए: आप जाइए नहीं तो वो न आ जाए अंदर।
मिश्रा भी फुसफुसाते हुए कहता है…
मिश्रा: नहीं नहीं, वो अंदर नहीं आएगा।
हुमा: मगर आप जाओ बाहर…
मिश्रा आखिर मजबूर होकर अपना लंड बाहर निकालता है। उसका लंड हुमा की चूत के पानी से गीला होकर चमक रहा था…
मिश्रा ने गुस्से में धोती उठाई और पहन ली। अंडरवेयर नहीं पहना। हुमा मिश्रा को देख रही थी। मिश्रा के चेहरे पर साफ गुस्सा दिखाई दे रहा था…
मिश्रा वैसे ही धोती पहनकर बाहर निकलने लगा तो हुमा से उसका बनियान उसकी तरफ फेंका, मगर कहा कुछ नहीं। मिश्रा समझ गया कि हुमा क्या कहना चाह रही है कि कम से कम बनियान तो पहनकर बाहर जाओ…
मिश्रा ने वो बनियान लिया और पहनकर उस छोटे से दरवाज़े से होकर पान की दुकान में घुस गया। सामने वो शख्स खड़ा था।
शख्स: क्या मिश्रा जी आज साफ-सफाई के लिए वक्त निकाल लिया…
मिश्रा का मूड ऑफ था। उसने कुछ नहीं कहा।
मिश्रा पान बनाने लगा। मिश्रा बहुत जल्दी-जल्दी पान बना रहा था। उसको हुमा को चोदने की जल्दी जो थी।
शख्स: मिश्रा भाई आपके बाल बहुत बिखरे हैं। क्या साफ कर रहे थे?
मिश्रा को याद आया कि हुमा की चुचियाँ चूस रहा था तो हुमा ने बालों को बिखरा दिया था अपनी मुट्ठी में लेकर…
मिश्रा: भाई तू पान लेने आया है, लेकर जाना। क्यों फालतू का टाइम खोटा करता है…
मिश्रा ने गुस्से में कहा।
शख्स उसको देख रहा था। मिश्रा ने पान बनाया और उस शख्स को दिया, पैसे लिए और जब तक वो शख्स नहीं गया वहाँ रुका रहा। शख्स गया तो फिर वो पान की दुकान से रूम में एंटर हुआ…
अंदर जाते ही देखा कि हुमा उसकी सलवार का नाड़ा बाँध रही थी। मिश्रा चौंक कर…
मिश्रा: अरे ये क्या?
हुमा: बहुत देर हो रही है, मुझे जाना होगा।
मिश्रा: मगर हमारा हुआ कहाँ? रुको ना।
हुमा: नहीं, मुझे डर भी लग रहा है।
मिश्रा: डरना कैसा? मैं हूँ ना।
मिश्रा आगे बढ़ा और हुमा के हाथों पर हाथ रख दिया जिससे वो नाड़ा बाँध रही थी, उसको पकड़ कर और नाड़ा खींच लिया…
हुमा ने ब्रा ठीक करके सिर्फ सलवार पहनी थी। जैसे नाड़ा खींचा सलवार नीचे गिर गई। मिश्रा नीचे घुटनों के बल बैठ गया और पैंटी को भी खींच लिया। पैंटी जैसे नीचे गोरी जाँघों के बीच कुछ हल्के से बाल के नीचे हुमा की चूत का कुछ हिस्सा उसको दिखाई दिया। मिश्रा उस पर टूट पड़ा…
हुमा: सsssssssssshhhhhhhhh
मिश्रा घुटनों के बल बैठकर हुमा की चूत चाटने लगा।
हुमा: सsshhhhh आаааhhhhhhh
मिश्रा अपने काले हाथों को पीछे ले गया और हुमा की बड़ी गाँड की गोलइयों को सहलाने लगा। गाँड की गोलइयों की साइज़ बड़ी थी। मिश्रा के सख्त बड़े हाथों में वो समा नहीं रहे थे।
हुमा फिर से बहुत गरम हो गई थी। सच तो ये था कि जाना वो भी नहीं चाहती थी, मगर वो बाहर आए हुए शख्स की वजह से वो डर गई थी…
मिश्रा ने हुमा को घुमा दिया। उसकी बड़ी गाँड उसके सामने आ गई। मिश्रा की आँखें बड़ी हो गईं।
मिश्रा: वाह क्या मस्त गाँड है! कपड़ों में इतनी बड़ी लगती नहीं है। कितनी गोरी है, एक भी निशान नहीं। आаааhhhhh मज़ा आ गया ऐसा…
मिश्रा हुमा की गोरी बड़ी गाँड को अपने काले हाथों से सहला रहा था। मिश्रा ने अपना चेहरा आगे करके हुमा की गाँड की एक गोलई को चूम लिया…
हुमा: सsshhhhh
मिश्रा: क्या नरम और चिकनी गाँड है तुम्हारी।
मिश्रा हुमा की गाँड की गोलइयों पर टूट पड़ा। कभी उनको चूमता, कभी चाटता तो कभी दाँतों से हल्का काट लेता…
हुमा: सsshhhh आаааhhhhh काटिए मत। निशान आ जाएँगे तो क्या जवाब दूँगी उनको…
मिश्रा ने अपने थूक से हुमा की गोरी गाँड को गीला कर दिया था। उसकी गाँड का कलर भी लाल कर दिया था। मिश्रा ने हुमा की गाँड की गोलइयों को फैलाकर पीछे से उसकी चूत चाटना शुरू किया।
हुमा: सsshhhhh आаааhhhhh नहीं…
करते हुए पीछे हाथ करके मिश्रा के सिर को पकड़ने की नाकाम कोशिश कर रही थी…
मिश्रा ने अपनी धोती निकाल फेंकी और खड़ा हो गया। अगर मिश्रा कुछ देर और चूत चाटता तो हुमा झड़ गई होती। तभी मिश्रा उठा और हुमा के कंधे पकड़ कर उसको झुकाने लगा। हुमा भी ना-नुकर करते हुए सामने की दीवार को पकड़ कर झुक गई…
मिश्रा ने फिर हुमा की गाँड की गोलइयों को फैलाया और अपना काला तना हुआ लंड पीछे से चूत पर सेट करने लगा। जैसे चूत पर लंड सेट हुआ मिश्रा ने धक्का लगा दिया…
हुमा की गीली चूत में मिश्रा का काला लंड समा गया…
हुमा ने लिप्स को आपस में दबाकर एक ज़ोर की सिसकारी ली…
हुमा: सssssssssssssshhhhhhhh
मिश्रा पीछे से चूत में लंड घुसा कर रुक गया और स्वर्गीय आनंद का मज़ा लेते हुए हुमा की गाँड की नरम गोलइयों को सहलाते हुए सोचने लगा…
मिश्रा (मन में): आаааhhhhh यही वो बड़ी सी गाँड है जिसको मैंने पहली बार 3 महीने पहले देखा था सलवार-कमीज़ पर। यकीन नहीं हो रहा है आज मैं इस बड़ी गोरी गाँड का पूरा मज़ा लेने वाला हूँ।
इतना सोचते हुए मिश्रा ने लंड बाहर खींच कर धक्का लगा दिया…
हुमा: सsshhhhh आаааhhhhh
मिश्रा ने आधा काला लंड अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। हुमा को भी मज़ा आने लगा था मगर वो ज़ाहिर नहीं कर पा रही थी। बस मीठी-मीठी सिसकारियाँ ले रही थी। उसकी सिसकारियाँ सुनकर मिश्रा का जोश बढ़ता जा रहा था। उसके धक्कों की स्पीड अब बढ़ने लगी थी…
हुमा सिसकारते हुए आगे-पीछे होने लगी थी। उसने अब सामने की दीवार को और ज़ोर से पकड़ लिया था। अब धक्कों की स्पीड इस कदर बढ़ गई कि हुमा की गोरी गाँड की गोलइयाँ थरथरा ने लगीं…
यह नज़ारा देख मिश्रा का पानी निकाले ही वाला था कि उसने अपना लंड बाहर खींच कर हुमा के कंधे पर हाथ रखा, नीचे बैठने को बोला। हुमा मिश्रा की तरफ पीछे करके बैठ गई कि मिश्रा ने हुमा को घुमा कर लिटा दिया…
हुमा भी लेट गई। हुमा के लेटते ही मिश्रा ने उसके पैरों को फैला दिया और उसकी मोटी जाँघों के बीच आकर अपना काला लंड उसकी चूत में सेट करके धक्का लगा दिया।
हुमा आँखें बंद करके सिसकारी निकाल कर रह गई…
लंड एक ही धक्के में अंदर जा घुसा। हुमा अपने दोनों हाथों की मुट्ठियों से पिलो को दबाकर सिसकारने लगी और उसकी सेक्सी सिसकारी सुनते हुए मिश्रा हुमा के चेहरे की तरफ देखते हुए धक्के लगाने लगा…
हुमा: सsshhhhhhhhhh
मिश्रा पागलों की तरह हुमा को चोदे जा रहा था। अब हर धक्के में हुमा के गोरे बूब्स यहाँ-वहाँ हिल रहे थे। अब दोनों चरम सीमा पर आ गए थे। हुमा ने अपने हाथों को पिलो से हटा कर मिश्रा की सीने पर रख कर उसकी बनियान को मुट्ठी में पकड़ लिया… मिश्रा ने जो बनियान अभी-अभी पहना था जब बाहर कustomर आया था। हुमा बनियान को मरोड़े जा रही थी…
हुमा: आаааhhhhhh माаа उfffffff सsssssssssshhhhh
करते हुए झड़ने लगी।
मिश्रा भी लास्ट स्टेज पर था। उसने लंड बाहर खींच लिया और हुमा की लेफ्ट साइड की गोरी जाँघ पर लंड के पानी की पिचकारी मार दी…
और हाँफते हुए हुमा के बगल में लेट गया। हुमा भी हाँफ रही थी। एक वासना से भरा तूफान आकर चला गया था…
हुमा बहुत हल्का महसूस कर रही थी, वहीं मिश्रा की खुशी का ठिकाना नहीं था…
मिश्रा आखिर शांता की मदद से अपने मिशन कामयाब जो हुआ था…
हुमा का सेक्स तूफान खत्म होते ही उसको एहसास हुआ कि वो कहाँ और कैसे है। वो जल्दी से उठ कर अपनी पैंटी ढूँढ़ने लगी कि तभी मिश्रा का ध्यान गया उसकी जाँघों पर बहते उसके पानी पर। उसने यहाँ-वहाँ देखा। वो कुछ ढूँढ़ रहा था। उसको पोंछने को कुछ मिला नहीं… उसका ध्यान पास में पड़ी एक पान की बास्केट पर गया। उसने उसमें से एक-दो पान निकाले और उन पानों से हुमा की जाँघ को साफ करने लगा…
हुमा को अजीब लगा मगर उसने कुछ कहा नहीं। हुमा ने जल्दी-जल्दी अपने कपड़े पहने और जाने के लिए रेडी हो गई। उसने सलवार-कमीज़ भी पहन ली थी तभी मिश्रा ने कहा…
मिश्रा: जा रही हो?
हुमा: जी।
मिश्रा: रुक जाओ ना कुछ देर।
हुमा: नहीं, देर हो रही है।
मिश्रा अब तक नंगा ही था, सिर्फ बनियान पहना था उसने।
मिश्रा: सुनो ना।
हुमा: क्या?
मिश्रा: जाते-जाते एक चुम्मा देकर जाओ ना।
हुमा ने अपने हाथ की घड़ी की तरफ देखा। उसको इस रूम में आकर 1 घंटे से ज़्यादा का वक्त हो गया था। वो हल्की सी शॉक हुई। सोचने लगी कि मिश्रा जी 1 घंटे से मेरे साथ कर रहे थे… उfffff इस उम्र में इतना जोश है और अभी इनको किस भी चाहिए…
हुमा नीचे देख कर कहती है…
हुमा: ले लीजिए।
मिश्रा खुश होता है और हुमा का चेहरा हाथ में थाम कर अपने काले लिप्स हुमा के गुलाबी लिप्स पर रख कर एक ज़ोरदार किस करता है। किस करते वक्त वो हुमा की गाँड को सलवार-कमीज़ के ऊपर से ही दबाता है और सहलाता है…
मिश्रा बारी-बारी हुमा के लिप्स को चूसे जा रहा था। कभी ऊपर के लिप्स को, कभी नीचे के लिप्स को। हुमा भी उसका पूरा साथ दे रही थी। हुमा के दोनों हाथ मिश्रा के कंधों पर थे…
कुछ देर की किस के बाद मिश्रा हुमा के लिप्स को आज़ाद कर देता है… हुमा हाँफते हुए मिश्रा को देखती है। मिश्रा मुस्कुरा रहा था। वो शर्मा कर नीचे देखती है तो दंग रह जाती है। मिश्रा का लंड फिर खड़ा हो गया था…
हुमा के लिप्स के इर्द-गिर्द मिश्रा का थूक लग गया था, जिसको वो पोंछते हुए बाहर जाने का इशारा मिश्रा को करती है। मिश्रा सोच रहा था कि दूसरा राउंड लगा लिया जाए, मगर उसने जल्दबाज़ी नहीं की। आखिर उसको पता था अब हुमा कहाँ जाने वाली है…
मिश्रा: रुको, मैं आगे जाता हूँ…
मिश्रा ने उसकी बड़ी सी अंडरवेयर पहनी और उस पर धोती पहन ली। कुर्ता भी पहनकर हुमा के आगे गया और स्टोर के शटर का लॉक ओपन करके शटर ऊपर कर दिया और मिश्रा बाहर का जायज़ा लेने लगा। दोपहर का वक्त होने के कारण अब भी कोई नहीं था। उसने हुमा को इशारा किया बाहर आने के लिए। हुमा बाहर आ गई और मिश्रा की तरफ न देखते हुए सीधा अपने घर की तरफ निकल पड़ी…
मिश्रा देखता रह गया…
हुमा एक हाउस वाइफ और मिश्रा पान वाला – 15
