बूढ़े चौकीदार और जवान बहुरानी – 1
Chaukidar aur bahu ki chudai kahani:- ठाकुर बलराज सिंह की मृत्यु होने के बाद उनके एक लौटे बेटे ठाकुर भैरव सिंह अपनी पिता की जमींदारी अपनी सर पर ले लेते हैं। पर जब उनका भी मौत हुआ फिर उनके बेटे अनिल सिंह अपनी हवेली अमेरिका से पढ़ाई खत्म करके लौट आते हैं और अपनी पिता की कारोबार संभालते हैं। दुर्गापुर में अनिल सिंह साहब का जमींदारी चलती थी। बहुत बड़ी हवेली थी उनके परिवार का। अनिल सिंह इस जमाने के नौजवान और मॉडर्न लड़का था। उनका उम्र 35 था, जब उसकी शादी हुई थी।
हवेली में उनकी माँ, उनकी एक बहन और एक फूफी और उनके बच्चे लोग रहते थे। और बाहर में हमेशा गेट के पास एक चौकीदार पहरा देता था। वो चौकीदार अनिल सिंह के पिता के समय से यहाँ चौकीदारी कर रहे थे। उनका नाम था गोपी लाल। गोपी लाल का उम्र तकरीबन 60 के ऊपर होगा। लेकिन अभी भी ये घर के काम करने में माहिर थे। और बहुत चालाक किस्म के थे। शादी से पहले ये रंडी के अड्डे में जाके रंडी चुदते। ये लड़कियाँ और औरतों के मामले में बहुत ही कामुक थे। हालाँकि घर में घर की महिला सदस्यों को किसी को कभी भी बुरी नजर में नहीं देखा। सिर्फ शैतानी बाहर जाकर करते थे। अंदर शरीफ बनकर रहते थे।
Chaukidar aur ghar ki bahu ki chudai kahani
ठाकुर अनिल सिंह के पापा जब जिंदा थे तब गोपी लाल के साथ एक औरत की शादी ठीक कर दी थी। लेकिन वो औरत को शादी करके खुश नहीं था गोपी लाल। क्योंकि उसकी बीवी उतनी सुंदर नहीं थी। ये तो था आगे की बात। अब गोपी लाल के परिवार में वो है और उसका एक बेटा। उसका बेटा भी अच्छा नहीं था। पढ़ाई में ध्यान नहीं था तो उसको गाँव से शहर एक काम दिला दिया था अनिल सिंह ने। इसलिए गोपी लाल यहाँ अकेले एक कमरे में रहता है। उसकी बीवी मर चुकी थी। 10 बरस हो चुका था। गोपी लाल काम के बारे में वफादार थे। इसलिए अनिल जी और उनके परिवार उन पर खुश थे।
अनिल साहब जब हवेली में लौट आए तब से दो साल बाद अनिल साहब का शादी हो जाती है। अनिल जी की माता का नाम था शारदा देवी और एक बहन का नाम कौशल्या थी। बहुत धूम-धाम से जमींदार अनिल सिंह की शादी हो चुका था। अनिल सिंह अब 35 साल के थे और उनकी बीवी थी बंगाली गर्ल श्रेया साहा जो कलकत्ता से बिलॉंग करती है। श्रेया की बात जितना भी बोलूँ उतना ही कम होगा। एक बेहद खूबसूरती की मिसाइल है अनिल साहब की पत्नी। उनके साथ उनकी पत्नी का उम्र डिफरेंस कुछ ज्यादा ही था। कुछ 10 साल की तरह।
यानी श्रेया की उम्र 25 या 26 होगी। दिखने में सिर्फ खूबसूरती ही नहीं एकदम हॉट माल थी श्रेया। पूरा ही भरा हुआ जिस्म की मालकिन थी। जो भी उसे देखता था अपनी आँखें हटा नहीं पाता था। जवान से लेकर बुड्ढे लोगों की भी नजर से नहीं बच सकती थी श्रेया। अनिल एक बार जमींदारी काम के सिलसिले में कलकत्ता जाते हैं तो वहाँ पर एक फंक्शन में श्रेया को देखा था और उसे बहुत अच्छा लगा और शादी के लिए प्रपोज किया था श्रेया के परिवार को। श्रेया ना भी नहीं कह सकती थी क्योंकि बचपन से वो बहुत ओबेडिएंट थी अपने माँ-बाप के साथ।
श्रेया थोड़ी सी हेल्दी थी और अनिल साहब यही पसंद करते थे क्योंकि फैटी लड़कियाँ और औरतें बहुत सेक्सी होती हैं। श्रेया बंगाली होने के कारण ज्यादा समय साड़ी पहनती थी। सिर्फ यही नहीं स्लीवलेस ब्लाउज पहनना उसे पसंद था। वो जानती थी कि ये सब पहन लेने से उसे और भी ज्यादा हॉट लगती है लेकिन वो किसी को भी परवाह नहीं करती थी। यानी कि किसी को भाव नहीं देती थी।
जब पहली बार अनिल साहब की हवेली में पाँव रखा श्रेया तब घर के सभी नौकर-रसोई के लोग उसे बहुरानी कहकर पूजते हैं और स्वागत करते हैं। इन लोगों में से सबसे कामुक था गोपी लाल यानी चौकीदार। जब पहली बार श्रेया ने कदम रखा हवेली के गेट के पास कोई चौकीदार नहीं थे क्योंकि उस दिन गोपी लाल बीमार पड़े थे अपने कमरे में। दो दिन बीत जाने के बाद अनिल साहब की माता शारदा देवी गोपी लाल जब आए तो हाल-चाल पूछ रही थीं।
शारदा देवी: क्या गोपी लाल? शादी के माहौल हैं और तुम नहीं हो यहाँ। जाओ रसोई में जाके खा लो।
तब तक सब लोगों ने श्रेया बहुरानी के साथ मिल चुका था सिवाय चौकीदार गोपी लाल के।
एक नौकर था भीम। उम्र 23 होगा। वो कहने लगा।
भीम: आई ये गोपी काका अब कैसा हाल है?
गोपी: हाँ ठीक हूँ अब। तुम लोग ठीक हो ना?
भीम: हाँ ठीक है।
गोपी: बहुरानी कहाँ हैं?
भीम: बहुरानी अपने कमरे में हैं। जब नीचे आएगी बातचीत कर लेना।
गोपी: कैसी है हमारी बहुरानी देखने में?
भीम: क्या बोलूँ। तुमने सुना नहीं? हवेली के सभी लोग कहते हैं श्रेया बहुरानी बहुत अच्छी हैं। सिर्फ अच्छी ही नहीं देखने में भी बहुत हसीन खूबसूरत हैं। एक अप्सरा की तरह हैं। हमारे ठाकुर साहब बहुत खुशनसीब हैं।
गोपी: ओह क्या कहते हो? सच?
भीम: हाँ।
फिर कुछ समय बाद श्रेया चलके नीचे आती हैं इस हवेली की अप्सरा। और आते ही सीधे गोपी लाल जी के सामने-सामने पड़ती हैं। एक रेड साड़ी और स्लीवलेस ब्लाउज में श्रेया को कमाल लग रही थी। वो साड़ी भी ट्रांसपेरेंट साड़ी थी जिसके वजह से श्रेया की पेट भी दिखाई देता था। साड़ी नाभि के नीचे पहनी थी तो गोरा पेट के मिडिल में थी गहरी नाभि जो कि काफी हद तक सेक्सी लग रही थी। गोपी लाल के सामने आते ही गोपी लाल एक झलक श्रेया को नीचे से लेकर ऊपर तक अपनी आँखों से डूरेंट स्कैन कर लेते हैं।
गोपी: वाहhhhh ये मैंने क्या देख रहा हूँ। सच में अप्सरा है ये। आहhhh। ऐसा नजारा सामने-सामने कभी भी नहीं देखा।
मन में कहकर बोलते हैं।
गोपी: नमस्ते बहुरानी। मेरा नाम गोपी लाल है। मैं हवेली का चौकीदार हूँ।
श्रेया: नमस्ते काका। अब आप कैसे हैं? भीम ने मुझे आपके बारे में बताया था।
गोपी: ओह सच जी। मैं अब ठीक हूँ बहुरानी। शुक्रिया आपका बहुत-बहुत। मैं अब चलता हूँ। फिर मुलाकात होंगे।
श्रेया: जी जरूर काका। आप अपना काम कीजिए जाके।
गोपी काका उस रात सो नहीं पाए। बार-बार श्रेया की याद आने लगती है।
गोपी काका: हाय क्या माल थी वो। आहhhh ऐसी लड़की को जो भी चोदेगा वो धन्य हो जाएगा। आहhhh।
ऐसी गंदी-गंदी कल्पनाएँ उसकी दिमाग में आती हैं और ये सब चिंता करके अपनी लंड को सहलाने लगते हैं।
गोपी: आहhhh बड़ा ही मजा आ रहा है।
सुबह जब हुआ चौकीदार गोपी ने अपनी बड़ी मालकिन के कहने पर माली की तरह हवेली के छत पर जाके छोटे-छोटे पेड़ों के ऊपर पानी डाल रहे थे तो उसी समय श्रेया ने छत पर आ जाती हैं।
गोपी: अरे-अरे बहुरानी आप क्यों इतना तकलीफ किया। हम आ बुलाते लेते। हम आ जाते आपकी सेवा करने। आपको कुछ चाहिए?
श्रेया: नहीं काका। मैं सुबह-सुबह फ्रेश एयर यानी ताजी हवा के लिए छत पर आना पसंद करती हूँ। छत पर कुछ देर तक जॉगिंग करना मुझे पसंद है। अगर मुझे कुछ लेना था तो मैं आपको बता देती।
गोपी काका: ठीक है बहुरानी।
श्रेया: गोपी काका आप इतना काम कैसे कर लेते हैं? इतना दौड़-झप कैसे कर लेते हो इस उम्र में?
गोपी काका: मेरी उम्र जितनी भी हो मैं अपने आपको कभी भी कमजोर नहीं समझता और मैं अंदर से बहुत शक्तिशाली हूँ।
श्रेया: मतलब?
गोपी: मतलब मेरा हौसला है बहुत और मेरी मानसिक ताकत प्रखर है इसलिए मैं कमजोर नहीं हूँ।
श्रेया: हम्म। आप काम कीजिए। मैं वहाँ जरा घूमकर आती हूँ।
गोपी: ठीक है बहुरानी।
गोपी: बड़े साहब सो रहे हैं क्या?
श्रेया: नहीं। उनको आज पुणे जाना है। दो दिन वहाँ रुकने वाले हैं काम के सिलसिले में। तो नाश्ता करके ही रवाना होंगे।
गोपी: जी अच्छा।
ये कहके गोपी मुस्कान देकर अपने काम में व्यस्त होने का नाटक किया।
गोपी ने देखा कि श्रेया साड़ी में हैं और उसे बहुत ही सेक्सी लग रही थी। जब बातें कर रही थीं चोरी-चोरी चुपके नजरों से श्रेया के अंगों को गोपी देख रहा था। एक पल के लिए गोपी काका ने देख पाया कि आज भी साड़ी नाभि के नीचे पहनी रखी है श्रेया ने।
गोपी काका की किस्मत खुल जाती है जब उसे श्रेया की बैकसाइड बहुत अच्छे तरह से दिखाई देता है। श्रेया जब जा रही थीं तब गोपी ने अपना काम छोड़कर श्रेया की गाँड को माप रहे थे। मचलती गाँड इतना बड़ा लग रही थी कि तरबूज की तरह लग रही थी।
गोपी काका: आहhhh क्या गाँड है।
बुड्ढे गोपी ने आँखें फाड़-फाड़कर हिलती हुई गाँड की तरह देख रहे थे।
गोपी को श्रेया के पास जाके उसकी बैकसाइड को सहलाने को दिल करता है। वो गंदे-गंदे ख्यालों में डूब जाते हैं और लंड को हाथ से सहलाने लगता है।
यूँ ही कुछ दिन बीत गए। चौकीदार गोपी ने जब भी अपनी बहुरानी के सामने जाता था बहुत ही गौर से उसके शरीर को निहार करता था। और श्रेया भी एक-दो बार ये नोटिस किया कि इतने सारे काम करने वालों से एक गोपी काका ही हैं जो उसको हवस भरी नजरों से देखते हैं और वो ये सोचके कुछ शॉक्ड भी होती है।
अनिल और श्रेया का सेक्स लाइफ शुरू तक भले ही चल रहा था लेकिन दिन-ब-दिन अनिल कारोबार संभालने में बिजी हो जा रहे थे। एक दिन हवेली में तो हफ्ते में दो-तीन दिन बाहर रहने को पड़ता है। अनिल बड़े घर का बेटा था। उसका सब कुछ है लेकिन एक चीज नहीं था। वो है लंड। यानी लंड होने से भी ना होने के बराबर। क्योंकि लंड उतना बड़ा नहीं था और सेक्स करते समय बहुत ही कम समय में अनिल अपना रस श्रेया की चूत में डाल देता था। अनिल तो खुश था श्रेया को पाकर लेकिन यहाँ श्रेया खुश नहीं थी। और अनिल ने कभी पूछा भी नहीं था और श्रेया भी चुपचाप थी। अपनी नसीब को बुरा मानके चुप थी। ऐसे दिन जा रहे थे।
गोपी चौकीदार अपने कमरे जाके हर रात सोते वक्त अपनी बहुरानी को याद करके लंड सहलाता था और फिर सो जाता था।
गोपी: आहhhh मेरी रानी तुझे तो कभी पाऊँगा नहीं। छू भी नहीं सकूँगा। सिर्फ दर्शन ही कर लूँगा। इतना भी कम नहीं है।
एक दिन सुबह शारदा देवी सब नौकरों को इकट्ठा करके बोलती हैं।
शारदा: सुनो तुम सब। मेरे पास कल एक बुढ़िया आई थी। बाहर मुलाकात की थी। मैं वो भीख माँग रही थी मुझसे जब मैं गाड़ी से निकल रही थी। मैंने पूछा आप भीख क्यों माँगते हो?
भिखारी बुढ़िया: मेरा इस दुनिया में कोई नहीं है सिवाय मेरे एक लौटे बेटे के।
शारदा: उन पर तरस आती है और पूछती है तुम्हारा बेटा कहाँ है? क्या करता है?
भिखारी बुढ़िया: वो आवारा लड़का है। अब उसका 35 साल होगा। फिर भी कुछ नहीं करते। सिर्फ मेरे साथ झगड़े करते हैं। और शराब पीकर हर रात घर को लौटते हैं।
शारदा: मैं तुम्हारी एक मदद कर सकती हूँ। अगर तुम्हारा बेटा मेरे घर में ठीक से काम करे तो मैं उसे अच्छा तनख्वाह दूँगी। लेकिन कोई बदतमीजी आवारापन नहीं चलेगा। मैं उसे चौकीदार का काम दूँगी।
बुढ़िया ये सुनके बहुत ही खुश होती है और कहती है।
बुढ़िया: भगवान तुम्हारी भलाई करे मेमसाहब।
शारदा: ठीक है। कल उसे भेज देना शाम के समय। और हाँ उसका नाम क्या है?
बुढ़िया: जी जग्गू है।
शारदा: ठीक है जाओ और भेज देना जग्गू को।
ये कहानी सारे सर्वेन्ट को सुनाती हैं। कहती हैं।
शारदा: गोपी तुमको अब और चौकीदारी नहीं करनी पड़ेगी। हम जग्गू को ठीक किया है चौकीदार काम करने के लिए। तुम अब घर में ही काम करोगे। घर के छोटे-मोटे काम तुम देख लेना। सब लोग ठीक से काम कर रहे हैं कि नहीं ये ही देखना।
गोपी काका ये सुनके अंदर ही अंदर खुश होते हैं।
गोपी: वाह ये तो बहुत अच्छा हुआ। घर में 24 घंटे यहाँ घूमने-फिरने का मौका मिला है। यानी श्रेया को आसपास ही रह पाऊँगा मैं। आह ये तो अच्छा ही हुआ। अब तो बड़ा मजा आने वाला है।
आगे क्या हुआ पढ़िए अगले पार्ट में।
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