मुझे अंकल ने चोदा – 3
Uncle se meri chudai ki story:- जैसा कि आपने पिछले पार्ट में पढ़ा था, फलक ने अंकल को डिनर पर इनवाइट किया था। कैंडल डिनर के दौरान अंकल ने उसके बूब्स और जिस्म की खुली तारीफ की, उसके शोल्डर और गाल सहलाए। फलक आँखें बंद किए बैठी रही। तभी उसके हस्बैंड समीर की कॉल आ गई। अब पढिए आगे ..
पिछला पार्ट यहाँ पढ़ें ==> मुझे अंकल ने चोदा – 2
अचानक से मेरा फोन रिंग हुआ तो मैं फ्लस्टर्ड होकर खड़ी हुई और एक बार अंकल की तरफ देखा।
(जैसे अंकल को कह रही हूँ कि इस फोन को भी अभी रिंग होना था।)
फिर मैंने फोन उठाया तो देखा कि हस्बैंड की कॉल आ रही है।
अब अंकल भी सोफे पर जाकर बैठ चुके थे जहाँ वो पहले बैठे थे।
मैंने कॉल रिसीव की तो हस्बैंड बोले…..
हस्बैंड: हाय!!!! कहाँ हो यार? कब से फोन कर रहा हूँ? उठा क्यों नहीं रही हो कॉल?
Uncle se meri chudai ki sex story
(ये सुनकर मुझे बहुत गुस्सा आया। एक तो गलत टाइम पे फोन किया है और दूसरा किस टोन में बात कर रहे हैं मुझसे? आज ये पहली बार था कि मुझे अपने हस्बैंड पर गुस्सा आया था।)
मैं: किचन में थी। चाय बना रही थी अंकल के लिए और फोन हॉल में रखा था इसलिए टाइम लग गया कॉल उठाने में।
(मैंने भी उसी टोन में जवाब दिया उन्हें जिस टोन में उन्होंने मुझसे बात की। और आज मैं पहली बार हस्बैंड से झूठ भी बोली कि मैं किचन में थी।)
हस्बैंड: अच्छा बाबा गुस्सा तो मत हो। मैं तो इसलिए पूछा कि बहुत देर में कॉल उठाया है। और अंकल आज इस टाइम हमारे घर पे कैसे? इस टाइम तो वो आते ही नहीं थे।
मैं: चाय पीने आए हैं।
हस्बैंड: इस टाइम चाय पीने आए हैं? 11 बज रहे हैं रात के।
(मुझे टाइम का बिल्कुल भी पता नहीं चला कब 11 बज गए थे।)
मैं: हाँ। बोल रहे हैं चाय पीने का दिल कर रहा था तो आ गया।
हस्बैंड: अच्छा? कहाँ?? यहीं बैठे हैं क्या अंकल?
मैं: हाँ यहीं बैठे हैं।
हस्बैंड: अच्छा? बात कराना उनसे।
मैंने फोन अंकल को दिया और खुद वहीं खड़ी रही। अंकल ने मुझसे फोन लेकर समीर से बात करना शुरू की।
अंकल: हाँ? हेलो बेटा कैसे हो? ठीक-ठाक पहुँच गए थे?
हस्बैंड: जी अंकल ठीक हूँ। आप कैसे हैं? जी ठीक से पहुँच गया था।
अंकल: अच्छा? चलो ठीक है। और काम-वाम ठीक चल रहा?
हस्बैंड: जी काम भी ठीक चल रहा है। और आप बताइए। सुबह कहाँ थे? फलक बता रही थी आज सुबह आप चाय पीने नहीं आए।
अंकल: अरे बेटा ऐसे रोज़-रोज़ आना अच्छा नहीं लगता। अब तुम भी यहाँ नहीं हो। जब तुम थे तो तुम्हारे साथ आ जाता था।
हस्बैंड: अरे अंकल कैसी बात कर रहे हो? आप ही घर तो है ये भी। जब आपका दिल करे तब आ जाया करो। और मैं वहाँ नहीं हूँ तो क्या हुआ? फलक तो है वहीं पे।
अंकल: हाँ। हाँ फलक तो है यहीं पे।
हस्बैंड: अच्छे से ख्याल रख रही है ना वो आपका?
अंकल: हाँ बहुत अच्छे से ख्याल रख रही है अब तो।
(ये बात अंकल ने मेरी तरफ आँख मारकर बोली थी।)
हस्बैंड: चलो तो ये तो बहुत अच्छी बात है। और अगर आपका अच्छे से ख्याल ना रखे तो आप मुझे बता देना।
अंकल: अरे नहीं। अब तुम्हें बताने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अब तो फलक मेरा अच्छे से ख्याल रखेगी। क्यों फलक रखोगी ना?
(अंकल ने ये बात मेरी तरफ देखते हुए और अपना लंड सहलाते हुए बोली थी।)
मैं: जी। (इतना कहकर मैंने शर्म की वजह से मुँह नीचे कर लिया।)
हस्बैंड: चलो ठीक है अंकल। जैसा आपको सही लगे।
फिर अंकल ने फोन मुझे दे दिया। हस्बैंड अभी भी कॉल पर ही थे।
मैं: जी। (मैंने बहुत हल्की सी आवाज में बोला।)
हस्बैंड: और बताओ खाना-वाना खा लिया?
मैं: जी खा लिया। और आपने?
हस्बैंड: हाँ मैंने भी खा लिया।
फिर हम ऐसे ही काफी देर तक बातें करते रहे। अंकल को भी सुबह ड्यूटी जाना था तो वो भी गुड नाइट बोलकर चले गए थे।
(मेरा मन तो नहीं था कि अंकल यहाँ से जाएँ लेकिन कर भी क्या सकती थी मैं? अंकल को सुबह ड्यूटी जो जानी थी।)
फोन रखने के बाद मैंने कपड़े चेंज किए और बेड पर आकर लेट गई सोने के लिए।
लेकिन आँखों में नींद ही कहाँ थी? जो नींद आती? बार-बार बस अंकल के हाथों का वो मुझे छूना याद आ रहा था।
और तब से ही मेरी चूत में एक सी जल रही थी। समझ में नहीं आ रहा था कि इस आग को कैसे बुझाऊँ।
फिर मेरे याद आया कि क्यों न उस लिंक पर कोई अच्छी सी स्टोरी पढ़ी जाए।
ये सोचकर मैंने फोन उठाया और वो लिंक ओपन किया। और ढूँढने लगी एक अच्छी सी स्टोरी।
बहुत देर बाद एक अच्छी स्टोरी मिली। और वो स्टोरी थी कि कैसे एक बहुत बड़ी कंपनी का मालिक जिसकी उम्र 70-75 थी, अपने एक एम्प्लॉयर को सेड्यूस करके उसकी खूबसूरत वाइफ को अपने लंबे और मोटे लंड से बेरहमी से चोदता है।
उस स्टोरी को पढ़कर तो मैं पागल सी हो गई थी। उस टाइम मेरे मन कर रहा था कि कोई ऐसे ही लंबे और मोटे लंड वाला अंकल मुझे भी ऐसे ही बेरहमी से चोद दे। पर मेरी किस्मत ऐसी कहाँ थी?
खैर। गरम तो मैं उस टाइम पूरी थी ही तो मैंने स्टोरी पढ़ते-पढ़ते फिंगरिंग करना स्टार्ट कर दी। लेकिन फिंगरिंग में वो मजा कहाँ था जो मजा लंड से चुदवाने में आता? अंकल भी मुझे गरम करके छोड़के चले गए थे। जैसे-तैसे मैंने फिंगरिंग करके खुद को शांत किया और सो गई।
सुबह मेरी आँख 6 बजे खुली। सबसे पहले उठकर मैं नहाई। उसके बाद मैंने किचन में जाके चाय बनाई। 7 बजे अंकल भी आ गए थे चाय पीने के लिए। फिर हमने मिलकर चाय पी और मैं अंकल से बोली कि आज आप ड्यूटी से किस टाइम तक आएँगे?
(क्योंकि आज शनिवार था तो शायद गवर्नमेंट जॉब वालों की शनिवार को ड्यूटी ऑफ जल्दी हो जाती है इसलिए मैंने पूछा।)
अंकल: क्यों? आज कुछ स्पेशल प्रोग्राम है क्या?
मैं: नहीं। मैं तो ऐसे ही पूछ रही थी। सोच रही हूँ कि शाम को डिनर साथ में करें? इसलिए पूछ रही हूँ।
अंकल: हम्मम। आ जाऊँगा 2-3 बजे तक।
मैं: ओके। तो आपको खाने में क्या पसंद है? मैं डिनर में आपकी पसंद की चीज बनाऊँगी।
अंकल: तुम??? आई मीन तुम जो भी बना लो।
(अंकल की ये बात सुनकर मैं शर्मा गई थी।)
फिर अंकल ड्यूटी के लिए निकल गए और मैं घर के कामों में बिजी हो गई। फ्री होकर मैं बेडरूम में आकर रेस्ट करने लगी और सोचने लगी कि डिनर में क्या बनाऊँ। काफी सोच-विचार करने के बाद मैंने डिसाइड किया कि चिकन बना लेती हूँ। तो मैंने हस्बैंड को कॉल करके बोला कि डिनर के लिए घर पर चिकन भिजवा दो। चिकन शॉप वाला हस्बैंड का फ्रेंड था तो मैंने इसलिए हस्बैंड को बोला था।
फिर मैंने अपने लिए लंच बनाया और खाया। उसके बाद मैं थोड़ी देर सोना चाहती थी तो मैं रूम में आकर सो गई।
शाम को 5 बजे मेरी आँख खुली डोरबेल की आवाज से। मैंने सोचा अंकल होंगे शायद और मैं डोर ओपन करने के लिए चली।
(क्योंकि अंकल ने बोला था कि 2-3 बजे तक ड्यूटी से आ जाएँगे।)
पता नहीं क्यों अब हर वक्त मेरे दिमाग में बस अंकल ही रहते थे।
मैंने डोर ओपन किया तो सामने चिकन शॉप वाला खड़ा था हाथ में चिकन लिए हुए।
(मैं तो डोर ओपन करने खुशी-खुशी आई थी कि अंकल होंगे लेकिन ये तो चिकन शॉप वाला निकला। उसको देखकर मैं एकदम से आसमान से जमीन पर आ गिरी।)
मैंने उससे चिकन लिया और पैसे पूछे कि कितने पैसे हुए। उसके पैसे बताने के बाद मैं किचन में गई चिकन रखने। फिर रूम में गई पैसे लेने। चिकन शॉप वाले को मैंने पैसे दिए और वो चला गया। उसके जाने के बाद मैं अंकल के फ्लैट की तरफ देखने लगी कि अंकल आए हैं या नहीं अभी तक।
अंकल अभी तक नहीं आए थे तो मैं वापस आकर किचन में गई और डिनर की तैयारी करने लगी। डिनर रेडी करते-करते मुझे 9 बज गए थे लेकिन अंकल अभी तक नहीं आए थे। पता नहीं कहाँ रह गए थे।
(पता नहीं क्यों मेरा मन नहीं लग रहा था। बार-बार बस डोर की तरफ देख रही थी कि कब अंकल आएँगे।)
डिनर रेडी करने के बाद मैंने सोचा क्यों न मैं भी शावर ले लेती हूँ और अच्छे से रेडी हो जाती हूँ। तो मैंने शावर लिया और अच्छे से रेडी भी हो गई। ताकि जब अंकल मुझे देखें तो उनके होश उड़ जाएँ।
अंकल का वेट करते-करते रात के 11 बज गए थे। लेकिन अंकल का कुछ पता नहीं था वो कहाँ हैं और क्यों नहीं आए अभी तक। मेरे पास अंकल का मोबाइल नंबर भी नहीं था जो कॉल करके पूछ लेती।
वेट करने की अब हद पार हो चुकी थी। मैंने अभी तक खाना भी नहीं खाया था। मुझे बहुत जोरों की भूख लगी थी। लेकिन मैं अंकल का वेट कर रही थी। अंकल आएँगे तो दोनों साथ में खाना खाएँगे। लेकिन अंकल नहीं आए।
मेरा मूड अब बहुत खराब हो चुका था वेट करते-करते। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ।
इतनी मेहनत से मैंने अंकल के लिए खाना बनाया था और अच्छे से रेडी भी हुई थी उनके लिए। लेकिन अंकल ने सारा मूड ऑफ कर दिया था आज घर पर ना आकर।
(इतना वेट तो कभी मैंने अपने हस्बैंड का भी नहीं किया था। जितनी बेसब्री से आज अंकल का कर रही थी। पता नहीं क्यों।)
जब 11:30 बज गए तो अब मुझसे रहा नहीं गया और मैंने अकेले ही डिनर स्टार्ट किया। मुझे आज अंकल पर बहुत गुस्सा भी आ रहा था और मेरी आँखों से आँसू भी आ रहे थे। पता नहीं ये मेरे साथ क्या हो रहा था और क्यों।
खाना खाने के बाद मैं रूम में आकर लेट गई। लेकिन आज मेरा दिल मेरे बस में नहीं था। बार-बार अंकल के बारे में सोच रहा था। पता नहीं क्यों नहीं आए। कहाँ रह गए। क्या हुआ है।
मैं ऐसे ही सोचते-सोचते करवटें बदलती रही। नींद ही नहीं आ रही थी। (ऐसा लाइफ में पहली बार हो रहा था मेरे साथ।)
पता नहीं कब नींद आई होगी। सुबह मेरी आँख डोरबेल की आवाज से खुली। डोर पे जाकर देखा तो दूध वाला था। मैंने दूध लिया और एक नजर अंकल के फ्लैट की तरफ डाली लेकिन फ्लैट अभी भी बंद था।
मतलब अंकल अभी भी नहीं आए थे। अब मुझे डर लगने लगा था कि कहीं कुछ हो तो नहीं गया अंकल के साथ। मैंने किचन में आकर चाय बनाई अंकल के बारे में सोचते-सोचते।
चाय पीने के बाद मैं फिर से बेड पर आकर लेट गई। आज मेरा दिल कुछ भी काम करने का नहीं हो रहा था। कब 10 बज गए पता ही नहीं चला। हस्बैंड से भी आज मैंने ज्यादा बात नहीं की थी। क्योंकि आज बात करने का मन ही नहीं कर रहा था। आज मुझे कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था। बस एक अजीब सी दिल में बेचैनी थी।
लंच का टाइम हुआ तो सोचा कुछ बना लूँ लेकिन मेरा मन ना तो कुछ बनाने का कर रहा था और ना ही खाने का।
ऐसे ही पूरा दिन निकल गया और शाम हो गई थी। लेकिन अभी तक ना तो अंकल घर आए थे और ना उनकी कुछ खबर।
खैर। मैंने डिनर बनाया। क्योंकि पूरे दिन आज मैंने कुछ खाया नहीं था तो भूख लगी थी। खाना खाने के बाद मैं एक बार फिर अंकल को देखने के लिए गई। आए हैं या नहीं अभी तक। लेकिन वो अभी तक भी नहीं आए थे।
मैं वापस रूम में आकर लेट गई और सोचने लगी कि आखिर अंकल गए कहाँ। ना कुछ बताया ना कोई खबर। आखिर हैं कहाँ वो।
ऐसे ही 1 हफ्ता निकल गया। अब मेरी भी नॉर्मल लाइफ हो चुकी थी। अब मैं अंकल के बारे में ज्यादा नहीं सोचती थी। पर अभी भी कभी-कभी अंकल को याद करके चूत में खुजली सी होती थी। अगर उस रात अंकल आ जाते तो शायद उस रात मैं अपनी चूत की खुजली अंकल से मिटवा लेती पर वो नहीं आए थे।
एक दिन मैं शॉपिंग करने बाजार गई तो मुझे वहाँ एक 25-26 साल के लड़के ने आवाज देकर मुझे रुकने को बोला। तो वो मेरे पास आया और बोला आप वहाँ (————-) रहती हैं ना तो मैं बोली कि हाँ वहीं रहती हूँ। फिर मैंने उससे पूछा कि आप कौन हैं और मुझसे ये सब क्यों पूछ रहे हो? तब वो बोला______
लड़का: आपका नाम फलक है ना?
मैं: हाँ। पर तुम्हें मेरा नाम कैसे पता?
लड़का: हरिओम अंकल ने आपकी फोटो दिखाकर बताया था।
(अंकल का रियल नेम हरिओम है।)
मैं: ओके। लेकिन अंकल कहाँ हैं?
(मेरे मुँह से सबसे पहला सवाल यही निकला।)
लड़का: अंकल अपने गाँव गए हैं। उनके बेटे का एक्सीडेंट हो गया था। उन्होंने मुझे आपको बताने के लिए बोला था। पर मैं भी एक शादी में गया हुआ था सिटी से बाहर इसलिए आपको पहले बता नहीं पाया।
(मुझे मेरे सारे सवालों के जवाब मिल गए थे कि अंकल क्यों नहीं आए थे उस रात।)
मैं: इट्स ओके। अब उनका बेटा कैसा है और अंकल कब वापस आएँगे?
लड़का: ये तो मुझे नहीं पता कब आएँगे वापस क्योंकि मेरी बात नहीं हुई उनसे।
मैं: अंकल का नंबर है तुम्हारे पास?
लड़का: हाँ है।
मैं: ओके। उनका नंबर दे दो मुझे। मैं खुद बात कर लूँगी उनसे।
फिर उस लड़के ने मुझे अंकल का नंबर दिया और चला गया। मेरी भी शॉपिंग हो गई थी तो मैं भी घर आ गई। घर आकर मैंने सबसे पहला काम जो किया वो था अंकल को कॉल।
अंकल: हेलो?? कौन?
मैं: मैं बोल रही हूँ फलक।
अंकल: कैसी हो तुम?
मैं: मैं तो ठीक हूँ। आप बताइए आप कैसे हैं और आपका बेटा अब कैसा है?
अंकल: मैं भी ठीक हूँ। और बेटा अभी हॉस्पिटल में ही है।
मैं: कुछ ज्यादा सीरियस बात तो नहीं है?
अंकल: नहीं। अब तो पहले से ठीक है। 2-4 दिन में हॉस्पिटल से छुट्टी हो जाएगी।
मैं: मैं तो बहुत डर गई थी जब उस लड़के ने आज मुझे बताया।
अंकल: उस साले ने आज बताया है तुम्हें? मैं तो उसको तभी बोला था कि आज ही बता देना। नहीं तो तुम मेरा डिनर पर इंतजार करोगी।
मैं: हाँ। इंतजार तो किया था पूरी रात।
अंकल: सॉरी। मुझे इतना टाइम ही नहीं मिला कि तुमसे मिलकर आ सकूँ। जैसे ही मुझे पता चला कि बेटे का एक्सीडेंट हुआ है तो मैं तो बस जल्द से जल्द यहाँ पहुँचा।
मैं: कोई बात नहीं। वहाँ जाना भी जरूरी था।
अंकल: और बताओ तुम कैसी हो? नाराज तो नहीं हो मुझसे?
मैं: अब नहीं।
अंकल: मतलब पहले नाराज थी?
मैं: आप बिना कुछ बताए ऐसे गायब हो गए थे तो क्या मैं नाराज भी ना हूँ?
अंकल: हाँ। नाराज होना तो बनता है तुम्हारा। तुमने मुझे इनवाइट किया और मैं आ नहीं सका।
मैं: हम्म। अब कब आओगे वापस?
अंकल: क्यों? मेरी याद ज्यादा आ रही है क्या?
मैं: नहीं तो। मैं तो बस ऐसे ही पूछ रही हूँ।
अंकल: अच्छा??? जब तुम्हें मेरी याद नहीं आ रही है तो मैं नहीं आ रहा वापस।
मैं: ऐसे मत बोलो।
अंकल: कैसे?
मैं: वापस नहीं आऊँगा।
अंकल: जब तुम्हें मेरी याद नहीं आ रही है तो क्या करूँ आकर?
मैं: आ रही है। (मैं बिना कुछ सोचे-समझे बोली।)
अंकल: क्या आ रही है?
मैं: आपकी याद। (शर्माते हुए बोली।)
अंकल: सच में? कितनी…….
मैं: बहुत।
अंकल: ठीक है। जब मेरी जान को मेरी इतनी याद आ रही है तो बहुत जल्दी आऊँगा।
(मुझे आज बुरा नहीं लगा जब अंकल ने मुझे जान कहा। मेरे दिल को खुशी हुई ये सुनकर।)
मैं: ठीक है। जल्दी आना।
थोड़ी देर और बात करके हमने कॉल डिस्कनेक्ट कर दी। आज मैं बहुत खुश थी। इतना कि अल्फाजों में बता नहीं सकती।
4-5 दिन तक हम ऐसे ही फोन पे बातें करते रहे। थर्सडे को अंकल ने बताया कि वो सैटरडे को दिल्ली आ जाएँगे। मैं ये सुनकर बहुत खुश हुई।
आखिर सैटरडे भी आ गया और उस दिन मैं सुबह से ही हवाओं में उड़ रही थी। मेरे पैर जैसे जमीन पर टिक ही नहीं रहे थे उस दिन। सब काम जल्दी-जल्दी खत्म करके मैं अच्छे से तैयार होना चाहती थी।
शाम को 5 बजे अंकल का कॉल आया और उन्होंने बताया कि 1 घंटे में वो दिल्ली पहुँच जाएँगे। मैंने जल्दी-जल्दी अच्छा सा डिनर बनाया। उसके बाद मैं शावर लेने के लिए चली गई। बाथरूम में जाकर मैंने अपने कपड़े निकाले और मिरर के सामने खड़े होकर खुद को देखने लगी।
खुद को ऐसे मिरर में देखकर मुझे शर्म आ रही थी। फिर मैंने शेव की चूत और आर्मपिट की। आज मैं हर तरह से रेडी थी। अंकल जो चाहे करें मेरे साथ। आज मैं उन्हें नहीं रोकूँगी। आखिर इतने दिनों से मैं सब्र जो कर रही थी। हस्बैंड भी तो नहीं थे यहाँ जो उनसे अपनी हवस की प्यास बुझा लेती।
आगे क्या हुआ पढ़ें नेक्स्ट पार्ट में।
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