मुझे अंकल ने चोदा – 4

Uncle se meri palangtod chudai story:- पिछले पार्ट में फलक ने अंकल (हरिओम) को डिनर पर बुलाया था। कैंडल लाइट में बातें हुईं, अंकल ने फलक की तारीफ की, उसके शरीर को छुआ और चूमा। फलक भी धीरे-धीरे उनके करीब आ रही थी। हस्बैंड की कॉल आई, अंकल ने बात की और चले गए। फलक रात भर बेचैन रही, स्टोरी पढ़कर फिंगरिंग की। अगले दिन अंकल आए, डिनर प्लान बना। लेकिन अंकल नहीं आए क्योंकि उनके बेटे का एक्सीडेंट हो गया था। एक हफ्ते बाद नंबर मिलने पर फलक ने कॉल की, दोनों ने याद की बात कही। अंकल शनिवार को लौटने वाले थे। फलक पूरे जोश में तैयार हो रही थी। अब पढिए आगे …

Part 3 ==> मुझे अंकल ने चोदा – 3

Uncle se meri palangtod chudai story

मैं नहाकर अच्छे से रेडी हो गई थी और अंकल का वेट कर रही थी। लेकिन समय जैसे रुक सा गया था।

रात 8 बजे डोरबेल बजी तो मेरा दिल जोरों से धक-धक करने लगा। डोरबेल की आवाज सुनते ही मैं डोर की तरफ भागी। डोर ओपन किया तो सामने अंकल खड़े थे।

उनको देखकर मेरी आँखों में आँसू आ गए थे।

(खुशी के आँसू)

वो भी मुझे देखके खुश हुए। उनके हाथ में गुलदस्ता भी था जो उन्होंने मुझे दिया।

फिर मैंने उनको अंदर आने को बोला तो वो बोले थोड़ी देर में आता हूँ फ्रेश होकर।

तो मैं बोली कि डिनर रेडी है। इधर ही आ जाना। डिनर साथ में ही करेंगे। तो वो ओके बोलकर अपने फ्लैट में चले गए फ्रेश होने।

और मैं वो गुलदस्ता लेकर वापस अंदर आ गई। फिर मैंने अपने बेड को अच्छे से सेट किया और अंकल का वेट करने लगी।

30-40 मिनट बाद डोरबेल बजी तो मैं समझ गई कि अंकल ही होंगे तो मैं जल्दी-जल्दी डोर की तरफ भागी डोर ओपन करने। डोर ओपन किया तो सामने अंकल ही थे। मैंने उनको अंदर आने का रास्ता दिया तो वो अंदर आ गए और मैंने डोर लॉक कर दिया।

मैं अंकल को सोफे पे बैठने का बोलके किचन में गई और एक पानी की बोतल और गिलास लेकर वापस आई तो देखा टेबल पर एक शराब की बोतल रखी है।

मैं उस बोतल को देखकर बोली।

मैं: ये क्या है?

अंकल: दारू है।

मैं: क्यों लाए इसको?

अंकल: अपने पीने के लिए लाया हूँ तुम्हें पिलाने के लिए नहीं।

मैं: मैं पीती भी नहीं ऐसी गंदी चीज।

अंकल: आज थोड़ी सी मेरे साथ पीकर देखो। मजा आ जाएगा जिंदगी का।

मैं: ना बाबा ना। मुझे नहीं पीनी ऐसी गंदी चीज।

(अंकल हँसने लगे)

अंकल: ठीक है। लाओ मुझे गिलास और पानी की बोतल दो।

फिर अंकल ने गिलास में थोड़ी सी शराब और उसमें बहुत सारा पानी मिलाया और मुझे बोले कि कुछ नमकीन-वमकीन है घर में? तो मैं बोली कि हाँ है तो अंकल बोले कि लेकर आओ।

मैं किचन में नमकीन और कुछ स्नैक्स लेने गई और आकर देखा तो गिलास खाली था। मैंने नमकीन और स्नैक्स प्लेट में करके अंकल को दिए।

और अंकल उन्हें खाने लगे। मैं अंकल के सामने वाले सोफे पर बैठ गई।

अंकल स्नैक्स खाते हुए बोले।

अंकल: आज तो तुम कुछ ज्यादा ही खूबसूरत लग रही हो।

(मुझे ये सुनकर शर्म आ गई)

अंकल: सच में? इस ड्रेस में बहुत ही खूबसूरत लग रही हो।

मैं: थैंक यू।

अंकल: अच्छा ये बताओ। तुम मुझसे नाराज तो नहीं हो?

मैं: क्यों?

अंकल: क्योंकि पहले मैं तुम्हें बिना कुछ बताए चला गया था।

मैं: नहीं हूँ।

अंकल ने दोबारा फिर से गिलास में शराब और पानी डाला और एक घूँट में ही पूरा गिलास पी गए।

अंकल: खाने में क्या बनाया है?

मैं: चिकन।

अंकल: तो फिर ले आओ खाना साथ में खाते हैं।

मैं: ओके।

मैं किचन में गई और सब कुछ रेडी करके टेबल पर लाकर रख दिया। एक प्लेट में अंकल को दिया और एक में मैंने लिया।

अंकल कभी शराब पीते कभी खाना खाते।

अंकल: उम्म्मम? खाना तो बहुत टेस्टी है। तुमने बनाया है या बाहर से मँगवाया है?

मैं: मैंने खुद बनाया है। अच्छा लगा आपको?

अंकल: बहुत ही अच्छा है। बिल्कुल तुम्हारी तरह।

(मैं शर्मा गई)

अंकल: समीर की याद नहीं आती तुम्हें? इतने दिन हो गए उसको वहाँ गए हुए।

मैं: फोन पर बात हो जाती है उनसे।

अंकल: फोन पर तो सिर्फ बातें ही हो सकती हैं। और कुछ तो नहीं हो सकता ना।

मैं: मतलब?

अंकल: मतलब कि प्यार मोहब्बत और…………..

मैं: और क्या?

अंकल: रोमांस।

(मुझे बहुत शर्म आ रही थी और मजा भी)

मैं: जब वो यहाँ है नहीं तो रोमांस किसके साथ करूँ।

(अब मैं भी थोड़ा खुलकर बात करने लगी थी)

अंकल: मेरे साथ।

मैं: आपके साथ? आपकी उम्र और मेरी उम्र देखी है आपने?

(अब मैं उनके मजे लेना चाहती थी थोड़े से)

अंकल: क्यों भाई मेरी उम्र को क्या हुआ? अभी तो मैं जवान हूँ।

मैं: मुझे तो ऐसा नहीं लगता कि आप जवान हैं।

अंकल: अच्छा? एक बार मौका देकर देखो। ना समीर को भूल जाओगी।

मैं: अच्छा जी? बस बस रहने दो।

फिर हमने खाना खत्म किया और मैंने सब कुछ ले जाकर किचन में रख दिया। किचन में सब कुछ रखकर मैं फिर अंकल के पास वापस आई और उनके सामने वाले सोफे पर ही बैठ गई। अंकल अब नशे में थे।

अंकल बोले…….

अंकल: तुम ना बहुत खूबसूरत हो फलक। मैंने आज तक तुम्हारे जैसी लड़की नहीं देखी। तुम्हारा फिगर ना बहुत ही गजब का है।

(अंकल अब नशे में बोल रहे थे। लेकिन मुझे ये सुनकर अच्छा लग रहा था। पता नहीं क्यों)

अंकल: तुम्हारे होठ गुलाब के फूल की तरह गुलाबी हैं। और तुम्हारी गर्दन जैसे सुराही और तुम्हारी ब्रेस्ट का तो क्या ही कहना एकदम जैसे रसीले आम हों।

फिर अंकल उठकर मेरी बैक साइड पर आकर खड़े हो गए और अपने दोनों हाथ मेरे दोनों शोल्डर पर रख दिए।

मेरी आँखें अपने आप बंद हो गई थीं जब अंकल ने मेरे शोल्डर पर अपने हाथ रखे और मेरी साँसें अब बहुत तेज-तेज चलने लगी थीं।

अंकल: तुम्हारा हुस्न ऐसा है जैसे अँधेरे में कोई चमकती हुई रोशनी।

अब उनके हाथ धीरे-धीरे मेरी गर्दन को सहलाने लगे थे।

(मेरे मुँह से तो अब कुछ बोलने को निकल ही नहीं रहा था। मैं तो ऐसी हो गई थी जैसे पत्थर की मूर्ति हूँ)

अंकल: जी चाहता है तुम्हारा ये हुस्न मैं पी जाऊँ।

अंकल ने पीछे से झुककर मेरी गर्दन पर एक किस की और मेरे कान में बोले।

अंकल: तुम मुझे बहुत ही हॉट और सेक्सी लगती हो।

(ये सब सुनकर अब मेरी चूत में पानी आ गया था)

अंकल: जिस दिन से तुम्हें देखा है उस दिन से तुम्हें अपने सपनों में रोज़ देखता हूँ।

अब अंकल ने मेरे कान पर किस किया तो मेरी हल्की सी आआह्ह्ह्ह निकल गई मजे में।

फिर अंकल ने दोनों हाथ मेरे बूब्स के ऊपर रख दिए और मेरे बूब्स को हल्के-हल्के से सहलाने और दबाने लगे।

अंकल: आआह्ह्ह्ह? तुम्हारे बूब्स कितने सॉफ्ट हैं।

अब अंकल ने मेरी गर्दन पे और पीछे की साइड पर कंटिन्यू किस करना शुरू कर दिया था और अपने दोनों हाथों से मेरे दोनों बूब्स को धीरे-धीरे मसलना।

मेरे हाथ भी अपने आप ही अंकल के हाथों के ऊपर आकर रखे गए थे।

अब अंकल ने एक हाथ से मेरा मुँह पकड़कर पीछे को अपनी तरफ घुमाया और मेरे लिप्स पर लिप टू लिप किस करना शुरू किया।

पहले तो अंकल ने बड़े आराम-आराम से किस की। थोड़ी देर बाद अंकल ने मेरा नीचे वाला लिप अपने दाँतों में पकड़कर कभी खींचते कभी छोड़ते।

(समीर ने मुझे कभी इस तरह किस नहीं किया था)

फिर अंकल ने मुझे छोड़ा और मेरे पीछे की साइड से आगे आ गए और मेरी बराबर में आकर उसी सोफे पर बैठ गए जिस पर मैं बैठी थी।

मेरे पास बैठकर उन्होंने मेरा चेहरा अपने दोनों हाथों में थामा और बोले……..

अंकल: आई लव यू फलक।

मेरी आँखें बंद थीं।

और दोबारा से मुझे लिप टू लिप किस करना शुरू कर दिया।

मुझे अंकल के मुँह से शराब की बहुत ज्यादा स्मेल आ रही थी।

जो मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रही थी। पर मैं उन्हें रोकना भी नहीं चाहती थी। इसलिए मैं हिम्मत करके उनका किसिंग में साथ देती रही।

(मेरे हस्बैंड शराब नहीं पीते हैं तो मुझे इसकी आदत नहीं थी। पर आज एक अलग ही एक्सपीरियंस हो रहा था)

थोड़ी देर बाद जब मुझे साँस लेने में परेशानी होने लगी तब अंकल ने मुझे किस करना छोड़ा।

मैं अपनी आँखें बंद किए अपनी साँसों को काबू करने की कोशिश कर रही थी।

अंकल शायद फिर से शराब पी रहे थे। पीने के बाद बोले…..

अंकल: फलक? तुम ठीक हो?

मैं: हम्मम…..

अंकल: लो थोड़ा पानी पी लो।

मुझे अंकल ने गिलास में पानी दिया। मैंने उनके हाथ से गिलास लिया और पानी पीने लगी। लेकिन पता नहीं क्यों वो पानी मुझे कड़वा लगा।

मैं अंकल से पूछना चाहती थी लेकिन पूछ नहीं पाई। क्योंकि मेरी उस वक्त हालत ही ऐसी थी। शायद शर्म की वजह से। मैंने पानी पीकर गिलास वापस टेबल पर रख दिया और सर को झुकाए बस नीचे को देख रही थी।

मेरी हिम्मत ही नहीं हो रही थी अंकल से नजरें मिलाने की। फिर अंकल ने मेरे गले से दुपट्टा निकालके टेबल पर रखा और अपना राइट हाथ मेरे लेफ्ट वाले गाल पर रखा और राइट वाले गाल पर अपने लिप्स।

और मेरे गाल को किस करना शुरू कर दिया। थोड़ी देर वहाँ किस करने के बाद अंकल ने मेरा चेहरा अपनी तरफ घुमाया और मेरे लिप्स पर किस करने लगे। लिप टू लिप।

किस करते-करते उनका राइट हैंड मेरे राइट बूब्स पर आ गया और अब अंकल मेरे राइट बूब्स को सहलाने लगे थे ऊपर से ही।

मेरा लेफ्ट हैंड भी अपने आप ही अंकल के सर के ऊपर चला गया और मैं उनके सर के बालों को सहलाने लगी।

फिर अंकल का राइट हैंड मेरे बूब्स से हटकर मेरे पेट पर आ गया और अब वो मेरे सूट को थोड़ा-थोड़ा करके मेरे पेट हटाने लगे थे।

अब अंकल का हाथ डायरेक्ट मेरे पेट को टच कर रहा था। थोड़ी देर उन्होंने मेरे पेट पर इधर-उधर हाथ फेरा फिर मेरी नेवल में अपनी एक उँगली देकर घुमाने लगे।

कुछ देर बाद उनका हाथ अब थोड़ा-थोड़ा ऊपर को आने लगा मेरे बूब्स की तरफ। अब वो मेरी गर्दन पे किस कर रहे थे और अपना हाथ मेरी ब्रा के ऊपर रखकर मेरे बूब्स को सहला रहे थे।

कभी राइट वाला बूब्स तो कभी लेफ्ट वाला। फिर वो गर्दन पर किस करते-करते थोड़ा नीचे को होकर मेरे क्लीवेज पर किस करने लगे। अब उन्होंने मेरे सूट को मेरे बूब्स के ऊपर करना चाहा तो वो हो नहीं रहा था।

क्योंकि सूट मेरी कमर के नीचे दबा हुआ था। तो मैंने आगे को होकर अपना सूट अंकल को ऊपर करने में हेल्प करी। फिर वो मेरा सूट बूब्स के ऊपर करके मेरे बूब्स पर हल्के-हल्के से किस करने लगे। ब्रा के ऊपर से ही।

अंकल: वाह?? कितने रसीले आम हैं तुम्हारे।

(मुझे ये सुनकर बहुत शर्म आई)

अंकल: ऐसे आम मैंने पहले कभी नहीं चूसे।

मैंने भी अपना राइट हैंड उनके सर पर रखकर उनका मुँह अपने बूब्स की तरफ दबाया ताकि अच्छे से चूस सकें।

और मेरी चूत की हालत बहुत खराब थी। वो कंटिन्यू पानी छोड़े जा रही थी।

फिर अंकल ने मुझे वहीं सोफे पे लिटाया और मेरे बूब्स के बराबर वाली साइड में आकर बैठ गए।

(वो सोफा लॉन्ग था तो मैं आराम से लेट गई थी)

अब उन्होंने जो हरकत की उससे मेरी आआह्ह्ह्ह निकल गई। उन्होंने मेरे बूब्स पे से ब्रा हटाकर मेरे निप्पल को अपने मुँह में लेकर सक करने लगे।

मैं: आआह्ह्ह्ह सीईईईईईईई उम्मममम

मैं अब उनका सर पकड़ बहुत जोरों से अपने बूब्स पर दबाने लगी। मुझे बहुत मजा आ रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे मैं जन्नत में उड़ रही हूँ।

अब अंकल मेरे दोनों बूब्स को अपने हाथों से पकड़कर मसल भी रहे थे और बारी-बारी से चूस भी रहे थे। और मेरे मुँह से बस यही निकल रहा था।

मैं: आआह्ह्ह्ह इस्स्स्ह्ह्ह्ह्ह उम्मममम

अंकल ने मेरे बूब्स चूस-चूसकर रेड कर दिए थे।

फिर उनका एक हाथ मेरे बूब्स से हटकर नीचे को जाने लगा। मेरी सलवार की तरफ।

अंकल ने अपना हाथ सीधा मेरी चूत के ऊपर ले जाकर रखा। सलवार के ऊपर से ही।

मेरी सलवार चूत के पानी से बहुत गीली हो चुकी थी। तो अंकल मेरे कान में हल्के से बोले……

अंकल: तुम्हारी चूत तो बहुत ज्यादा पानी छोड़ रही है?

मैं कुछ नहीं बोली। मैं बोलने की हालत में भी नहीं थी।

फिर अंकल ने सलवार के ऊपर से ही मेरी चूत पर हाथ फेरना शुरू कर दिया। और मेरी अंगड़ाई सी टूटने लगी थी। और मेरे मुँह से बस यही निकला।

मैं: आआह्ह्ह्ह अंकल उम्मममम

अब अंकल मुझ पर दोहरा वार कर रहे थे। मेरे बूब्स भी चूस रहे थे और चूत की लकीर में धीरे-धीरे ऊपर से नीचे। नीचे से ऊपर को उँगली फेर रहे थे।

मुझे ऐसा लग रहा था कि मेरी चूत से पानी अब निकला अब निकला।

(ऐसा तो मुझे कभी अपने हस्बैंड के साथ भी फील नहीं हुआ था)

फिर अंकल ने अपना हाथ धीरे-धीरे मेरी सलवार के अंदर डालना शुरू किया। (मैंने इलास्टिक वाली सलवार पहनी थी)

अब उनका हाथ मेरी चूत पर डायरेक्ट फील हो रहा था।

वो अपने थंब से मेरे चूत के दाने को मसलने लगे और एक उँगली को चूत की लकीर में फेरने लगे।

और मेरे मुँह से लज्जत भरी आहें निकलने लगीं।

मैं: आआह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह उम्ममम उम्मममम? ओओह्ह्ह अंकल मैं गई?

इतना कहकर मैं झड़ने लगी। आज मैं पहली बार बिना सेक्स किए ही झड़ी थी। हस्बैंड के साथ तो मैं कभी-कभी सेक्स करके भी नहीं झड़ती थी। आज ये मेरा अलग ही एक्सपीरियंस था।

अंकल मुझे ऐसे ही सोफे पे लिटा हुआ छोड़के शायद टॉयलेट चले गए थे। और मैं लेटे-लेटे अपनी साँसों को काबू करने में लगी थी। मेरी साँसें और धड़कन बहुत ही तेज-तेज चल रही थीं।

अंकल टॉयलेट से वापस आकर मेरे सर के पास बैठ गए और मेरे बालों को मेरे चेहरे से हटाकर बोले।

अंकल: फलक?? मेरी जान? क्या तुम ठीक हो?

मैं: हम्ममम

अंकल अब मेरा सर हल्के-हल्के से सहलाने लगे थे। जो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। फिर अंकल बोले…

अंकल: कुछ खाओगी?

मैं: नहीं। (हल्की सी आवाज में)

अंकल: पानी दूँ?

मैं: हम्मम

फिर उन्होंने एक गिलास में मुझे पानी दिया। मैं अभी भी ऊपर से नंगी ही थी। मतलब मेरे बूब्स अभी भी ऐसे ही खुले हुए थे जैसे अंकल ने खुले छोड़े थे।

अंकल ने मेरे सर के पीछे अपना हाथ डालकर मुझे बैठने में हेल्प की। मेरे बैठने से मेरा सूट जो गले के पास था वो मेरे बूब्स पर आ गिरा। जिससे मेरे बूब्स ढक गए।

फिर मैंने अंकल के हाथ से गिलास लिया और पानी पीने लगी। मुझे पहले की तरह इस बार भी पानी थोड़ा-थोड़ा कड़वा लगा। मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि पानी क्यों कड़वा लग रहा है। अंकल से मैं पूछ नहीं सकती थी।

क्योंकि मुझे बहुत शर्म आ रही थी तो मैंने चुप रहना ही ठीक समझा। फिर मैं गिलास टेबल पर रखकर खड़ी होने लगी तो अंकल बोले।

अंकल: क्या हुआ?

मैं: टॉयलेट। (मैं बस इतना ही बोल पाई)

अंकल: मैं चलूँ लेकर।

(क्योंकि खड़े होने पर मेरी टाँगें काँप सी रही थीं और मेरा सर भी घूम रहा था)

मैं: नहीं। चली जाऊँगी।

मैं नजरें नीचे झुकाए टॉयलेट की तरफ चल दी धीरे-धीरे से। और अंकल शायद फिर से शराब पीने लगे थे। मैंने बाथरूम में जाकर अपनी हालत देखी तो मुझे खुद पर शर्म आ गई।

मैं टॉयलेट सीट पर बैठने के लिए जैसे ही सलवार को नीचे करने लगी तो मैंने देखा कि मेरी सलवार ऐसे भीगी हुई है जैसे मैंने सलवार में ही पेशाब कर दिया हो।

उसको देखकर मुझे इतनी शर्म आई कि मैं बता भी नहीं सकती। फिर मैं वो सलवार पूरी ही निकालकर टॉयलेट सीट पर बैठकर पेशाब करने लगी।

पेशाब करने के बाद मैंने अपनी चूत को पानी से अच्छी तरह साफ किया। साफ करने के बाद मैं बेडरूम में आई। नंगी ही। और वार्डरोब से नाइटी निकालकर वो पहनी।

मेरा सर बहुत चकरा रहा था पता नहीं क्यों।

मैं नाइटी पहनकर सोचने लगी कि अब बाहर कैसे जाऊँ। क्योंकि मुझे शर्म लग रही थी अब बाहर जाने में और सर भी घूम रहा था।

जब मुझे बेडरूम में बैठे-बैठे बहुत देर हो गई तो अंकल की आवाज आई।

अंकल: डार्लिंग? कहाँ रह गई? आ जाओ जल्दी यार।

मैं कुछ नहीं बोली।

अंकल: क्या हुआ सब ठीक तो है ना?

मैं: मेरा सर घूम रहा है।

फिर अंकल बाहर से उठकर रूम में आ गए मेरे पास और बोले…..

अंकल: क्यों? क्या हुआ है?? सर क्यों घूम रहा है?

मैं: पता नहीं।

अंकल: हो सकता है आज तुम्हारा पानी कुछ ज्यादा ही निकला है तो उसकी वजह से घूम रहा हो।

मैं: शायद।

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