माँ बनी क्लाससमेट 8

Pub me mom ki chudai ki kahani:- ‘Pipes Pub’ के पार्किंग लॉट में अँधेरा और नियॉन लाइट्स का मिला-जुला साया था। त्रुप्ति ने अपनी कार एक कॉर्नर में पार्क की। इंजन बंद होते ही उसने एक गहरी साँस ली और मिरर में अपना चेहरा देखा। उसका काजल, उसकी लिपस्टिक और उसके खुले बाल—सब कुछ परफेक्ट था। आज वो एक माँ नहीं, बल्कि कॉलेज की सबसे हॉट लड़की बनकर आई थी।

जैसे ही त्रुप्ति कार से बाहर निकली, उसके ब्लैक शोल्डर-लेस गाउन ने उसके दूधिया सफ़ेद जिस्म को हाइलाइट कर दिया। ठंडी हवा ने जब उसके नंगे कंधों और नंगे पैरों को छुआ, तो त्रुप्ति के जिस्म में एक सिहरन दौड़ गई। कृति भी दूसरी तरफ से निकली।

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Pub me mom ki chudai ki hindi sex story

वहीं पार्किंग के अँधेरे कोने में दो आवारा लड़के, रवि और सचिन, सिगरेट पी रहे थे। उनकी नीयत पहले से ही खराब थी, और जब उनकी नज़र त्रुप्ति पर पड़ी, तो उनके मुँह से सिगरेट गिरने को हो गई।

रवि: (आँखें फाड़कर) “ओये सचिन! भाई, देख तो सही क्या चीज़ उतरी है कार से! कसम से, आज तक इस पब में ऐसा माल नहीं देखा।”

सचिन: (होंठों पर जीभ फेरते हुए) “हाय मैं मर जावाँ! भाई, इसके बूब्स देख! ऐसा लग रहा है गाउन फाड़कर बाहर आ जाएँगे। दिल कर रहा है अभी भागकर जाऊँ और उन्हें दोनों हाथों से मसल-मसल कर सारा रस निचोड़ लूँ।”

रवि: (त्रुप्ति के पीछे घूमते हुए) “अबे बूब्स छोड़, उसकी गाँड देख! क्या मस्त गोलाई है यार। ये गाउन तो बस नाम का है, इसकी गाँड की हर मूवमेंट साफ़ दिख रही है। दिल कर रहा है साली को यहीं बॉनेट पर झुकाकर, कपड़े के ऊपर से ही लंड पेल दूँ।”

सचिन: “और इसके गुलाबी होंठ! भाई, अगर ये एक बार किस कर ले ना, तो बंदा वहीं ढेर हो जाए। चल, आज किस्मत आज़माते हैं। इनके साथ कोई मर्द नहीं है।”

त्रुप्ति और कृति बेखबर होकर पब के एंट्रेंस की तरफ बढ़ने लगीं। त्रुप्ति की हाई हील्स की ‘टक-टक’ आवाज़ सन्नाटे में गूँज रही थी, और उसकी गाँड हर कदम पर लेफ्ट-राइट मटक रही थी। रवि और सचिन से रहा नहीं गया, वो लपककर उनके रास्ते में आ गए।

रवि: (रास्ता रोकते हुए) “एक्सक्यूज़ मी, मैडम!”

त्रुप्ति और कृति अचानक रुक गईं। त्रुप्ति ने रवि को ऊपर से नीचे तक देखा, उसकी आँखों में थरकीपन साफ़ दिख रहा था।

त्रुप्ति: (सख्ती से) “जी बोलिए? आप मुझसे बात कर रहे हैं?”

सचिन: (त्रुप्ति के क्लीवेज को घूरते हुए) “हाँ मैडम, आप ही से बोल रहे हैं। वैसे आप अकेले कहाँ जा रही हैं? इतना भारी बदन लेकर अकेले चलना ठीक नहीं है।”

त्रुप्ति: “हम पब जा रहे हैं। और हमें किसी की कंपनी की ज़रूरत नहीं है। साइड हटो।”

रवि और सचिन ने त्रुप्ति के पूरे शरीर को स्कैन किया—उसके नंगे पैरों से लेकर उसके उभरे हुए सीने तक। त्रुप्ति को उनकी नज़रें अपने जिस्म पर रेंगती हुई महसूस हो रही थीं।

रवि: (बेशर्मी से) “अरे गुस्सा क्यों होती हो जानमैन? क्या आप दोनों हमारी पार्टनर्स बनना चाहोगी? अंदर कपल एंट्री फ्री है, और हम तुम्हें बहुत ख़ुश रखेंगे।”

त्रुप्ति: “नो थैंक्स! हम अकेले ही काफ़ी हैं।”

सचिन: (थोड़ा आगे बढ़ते हुए) “अरे बन जाओ ना मैडम! आपको तो बहुत मज़े कराएँगे हम। सुना है मेच्योर माल में गर्मी ज़्यादा होती है।”

रवि: “हाँ यार, मान भी जाओ। क्यों नखरे कर रही हो? तेरी ये गाँड और बूब्स बहुत मसलेंगे हम, तुझे भी मज़ा आएगा और हमें भी। और हाँ… रात भर खूब चोदेंगे भी तुम्हें। सुबह तक चलने लायक नहीं छोड़ेंगे।”

ये गंदी बातें सुनकर त्रुप्ति का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि लोग उसे सड़क पर खड़े होकर ‘चोदने’ की बात कर रहे हैं।

त्रुप्ति: (चिल्लाते हुए) “इडियट्स! रस्कल्स! हिम्मत कैसे हुई तुम्हारी? हटो यहाँ से!”

कृति: (त्रुप्ति का हाथ पकड़कर) “चल त्रुप्ति, इन कुत्तों के मुँह मत लग। ये सड़क छाप हैं।”

त्रुप्ति और कृति तेज़ी से वहाँ से निकलीं और पब के गेट की तरफ बढ़ीं। उनकी चाल में गुस्सा था, जिस वजह से त्रुप्ति की गाँड और भी ज़्यादा ज़ोर से मटक रही थी। रवि और सचिन उनके पीछे-पीछे चल पड़े, उनकी भूख अब और बढ़ गई थी।

रवि: (पीछे से आवाज़ लगाते हुए) “अरे मैडम! बन जाओ ना हमारी कुतिया! एक बार मौका तो दो… हमारे लंड शांत कर दो, तुम्हें वो मज़ा देंगे जो तुम्हारे पति ने भी नहीं दिया होगा!”

त्रुप्ति ने उनकी बातों को अनसुना किया और बाउंसर्स के पास से होती हुई पब के अंदर दाखिल हो गई। जैसे ही वो अंदर गई, तेज़ म्यूज़िक और धुएँ का गुबार उसके चेहरे से टकराया।

लेकिन कहानी यहाँ खत्म नहीं हुई थी। पब के अंदर के अँधेरे कोने में, विक्की और राहुल पहले से बैठे थे। विक्की की नज़र सीधा त्रुप्ति पर पड़ी जो उस ब्लैक गाउन में क़यामत लग रही थी।

विक्की: (राहुल को कोहनी मारते हुए) “देख राहुल… आ गई तेरी आइटम। भाई साहब! क्या लग रही है आज ये! आज तो इसकी चीखें सुनने का अलग ही मज़ा आएगा।”

राहुल ने देखा कि त्रुप्ति के पीछे वो दो सड़क-छाप लड़के (रवि और सचिन) भी अंदर घुस रहे हैं और त्रुप्ति को घूर रहे हैं। राहुल की मुट्ठियाँ भिंच गईं। उसकी माँ को कोई और घूरे, ये उसे बरदाश्त नहीं था—भले ही वो खुद उसे विक्की के हवाले करने आया हो।

राहुल: (दाँत पीसते हुए) “वो दो कुत्ते कौन हैं जो उसके पीछे आ रहे हैं?”

विक्की: “छोड़ ना, कोई होंगे थरकी। तू बस प्लान पर फोकस कर। शीतल को इशारा कर दिया है मैंने। बस कुछ ही देर में त्रुप्ति की ड्रिंक में ‘जादू’ मिलने वाला है। फिर ये रवि और सचिन क्या… त्रुप्ति खुद तेरे और मेरे लंड पर नाचेगी।”

‘Pipes Pub’ के अंदर का माहौल किसी उबलते हुए ज्वालामुखी जैसा था। तेज़ म्यूज़िक दिलों की धड़कनों को बढ़ा रहा था और डिस्को लाइट्स के बीच जिस्मों की गर्मी हवा में घुली हुई थी। अभय, शीतल और उनका ग्रुप पहले से ही वहाँ मौजूद था। अभय की नज़रें दरवाज़े पर गड़ी हुई थीं, जैसे कोई शिकारी अपने शिकार का इंतज़ार कर रहा हो।

जैसे ही त्रुप्ति और कृति ने अंदर कदम रखा, अभय के हाथ में पकड़ा ड्रिंक का ग्लास हिल गया। उसने त्रुप्ति को उस ब्लैक शोल्डर-लेस गाउन में देखा तो उसकी साँसें अटक गईं। त्रुप्ति के गोरे नंगे कंधे और उस गाउन में क़ैद उसके भरे हुए बूब्स डिस्को लाइट्स में किसी हीरे की तरह चमक रहे थे।

अभय: (मन में) “वाव यार! त्रुप्ति की ख़ूबसूरती तो दिन-ब-दिन निखरती जा रही है। क्या लग रही है आज ये! बस जल्दी से जल्दी ये मेरी बाहों में हो, और मैं इस गाउन को फाड़कर इस नंगी देवी को अपने लंड पर सवार कर सकूँ।”

त्रुप्ति और कृति अपने दूसरे फ्रेंड्स से मिलने लगीं। उधर बार काउंटर पर खड़े रवि और सचिन अभी भी बेशर्मी से त्रुप्ति के क्लीवेज और गाँड को घूर रहे थे। अभय से रहा नहीं गया, वो सीधा त्रुप्ति के पास पहुँचा।

अभय: (एक मैग्नेटिक स्माइल के साथ) “हाय त्रुप्ति!”

त्रुप्ति: (थोड़ा हिचकिचाते हुए) “हाय अभय।”

अभय: “आज तुम बहुत ख़ूबसूरत लग रही हो। इतनी कि पूरे पब की रोशनी फीकी पड़ गई है तुम्हारे आगे।”

त्रुप्ति के गालों पर सुर्खी आ गई, पर वो अभय से ज़्यादा बात करके राहुल को नाराज़ नहीं करना चाहती थी।

त्रुप्ति: “थैंक यू अभय। चल कृति, डांस करते हैं।”

त्रुप्ति ने अभय को वहीं छोड़ दिया और कृति का हाथ पकड़कर डांस फ्लोर की तरफ भाग गई। अभय वहीं खड़ा मुस्कुराता रहा, उसे पता था कि शिकार जाल में आएगा, बस सब्र की ज़रूरत है।

डांस फ्लोर पर त्रुप्ति ने आग लगा दी थी। तेज़ बीट्स पर जब वो अपनी कमर मटका रही थी, तो उसका गाउन उसके कर्व्स पर फिसल रहा था। उसकी छाती (बूब्स) हर जंप के साथ उछल रही थी, जिसे देखकर वहाँ मौजूद हर मर्द का गला सूख रहा था।

कृति: (नाचते हुए त्रुप्ति के कान में) “तू अभय को इतना नेगलेक्ट क्यों करती है यार? बंदा तेरे लिए पागल है।”

त्रुप्ति: (ज़ोर से) “क्योंकि मैं उससे प्यार नहीं करती! तू बस डांस कर।”

कृति थोड़ा साइड हो गई और किसी और लड़के के साथ डांस करने लगी। त्रुप्ति अकेली मस्त होकर नाच रही थी, अपनी आँखें बंद करके म्यूज़िक को फील कर रही थी। तभी, पीछे से रवि ने मौका देखा।

रवि ने अचानक त्रुप्ति को पीछे से कमर से पकड़ लिया और अपने लंड को त्रुप्ति की गाँड से सटा दिया। त्रुप्ति हड़बड़ा गई।

रवि: “क्या नाचती हो बेबी…”

इससे पहले कि त्रुप्ति कुछ समझ पाती, रवि ने उसके नंगे कंधे पर किस कर दी। त्रुप्ति घबराकर पलटी, तो सामने सचिन आ गया। सचिन ने त्रुप्ति को सामने से घेर लिया और उसके क़रीब आते हुए बोला—

सचिन: “एक किस तो बनती है रानी!”

त्रुप्ति डर गई। वो छूटने की कोशिश कर रही थी, पर चारों तरफ भीड़ थी और म्यूज़िक इतना तेज़ था कि उसकी आवाज़ दब रही थी। सचिन ज़बरदस्ती अपना मुँह त्रुप्ति के होंठों की तरफ बढ़ा रहा था।

तभी एक तूफ़ान आया। अभय, जो बाज़ की नज़र रखे हुए था, भीड़ को चीरते हुए वहाँ पहुँचा। उसने आते ही रवि को कॉलर से पकड़ा और एक झटके में दूर फेंक दिया।

अभय: (दहाड़ते हुए) “तुम लोगों की हिम्मत कैसे हुई इसे छूने की?”

रवि गिरते-पड़ते उठा, नशे में धुत था।

रवि: “तेरी क्या बहन लगती है बे जो तू इतना भड़क रहा है? हम तो बस मज़े ले रहे थे।”

ये सुनते ही अभय का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। उसने रवि के चेहरे पर एक ज़ोर का मुक्का मारा।

अभय: (गुस्से में) “बहन होगी तेरी साले! मेरी गर्लफ्रेंड है वो! अगर किसी ने दोबारा इसकी तरफ आँख उठाकर भी देखा, तो आँखें निकाल लूँगा।”

‘मेरी गर्लफ्रेंड है’—ये शब्द त्रुप्ति के कानों में गूँज गए। उसने हैरानी से अभय को देखा। राहुल कहीं नहीं था, पर अभय उसके लिए लड़ रहा था।

बाउंसर्स तुरंत आ गए और रवि-सचिन को घसीट कर पब से बाहर फेंक दिया। माहौल शांत हुआ। अभय की साँसें तेज़ थीं। उसने त्रुप्ति की तरफ देखा, उसकी आँखों में जुनून था। उसने त्रुप्ति की कमर को हाथ से पकड़ा और उसे अपने सीने से सटा लिया।

अभय: (गहरी आवाज़ में) “त्रुप्ति… तुम मेरे प्यार को कभी समझ नहीं पाओगी। मैं तुम्हें किसी को छूने नहीं दूँगा।”

अभय ने त्रुप्ति को वहीं छोड़ा और बिना कोई जवाब माँगे, दुखी हीरो की तरह बार काउंटर की तरफ चला गया। त्रुप्ति वहीं खड़ी रह गई, उसका दिल ज़ोर से धड़क रहा था। उसने पहली बार अभय के अंदर वो प्रोटेक्टिव मर्द देखा जो उसे राहुल में कभी नहीं दिखा। उसके दिल के किसी कोने में अभय के लिए जगह बनने लगी थी।

कुछ देर बाद, त्रुप्ति खुद चलकर बार काउंटर पर गई जहाँ अभय अकेला बैठा ड्रिंक पी रहा था। त्रुप्ति ने उसके बगल वाली चेयर खींची और बैठ गई।

त्रुप्ति: (नरम आवाज़ में) “थैंक यू, अभय। आज तुम नहीं होते तो…”

अभय: (मुस्कुराते हुए) “दोस्ती में नो सॉरी, नो थैंक यू। मैं हमेशा तुम्हारे लिए खड़ा रहूँगा, चाहे तुम मुझे अपना मानो या न मानो।”

त्रुप्ति मुस्कुरा दी। दोनों के बीच बातें शुरू हो गईं। अभय उसे हँसा रहा था, उसकी तारीफ़ कर रहा था। त्रुप्ति भी खुलकर हँस रही थी, उसके हाथ अभय के हाथों से टकरा रहे थे। वो फ्लर्ट कर रही थी, अनजाने में ही सही।

पब के अँधेरे कोने में, राहुल और विक्की ये सब देख रहे थे।

राहुल: (दाँत पीसते हुए) “देख रहा है विक्की? साला अभय अपनी चाल चल रहा है। कैसे चिपक के बैठा है मेरी माँ से! और वो भी देखो… कैसे हँस-हँस के बात कर रही है, जैसे मैं तो हूँ ही नहीं।”

विक्की: (जलती हुई आग में घी डालते हुए) “मैंने कहा था ना राहुल? अभय बहुत तेज़ है। वो ‘इमोशनल कार्ड’ खेल गया। अभी वो हीरो बना है, थोड़ी देर में वो त्रुप्ति को बिस्तर पर ले जाएगा। अगर हमने अभी अपना प्लान एग्ज़ीक्यूट नहीं किया, तो आज रात त्रुप्ति अभय की कीप बन जाएगी, और तू देखता रह जाएगा।”

राहुल: “नहीं! ऐसा नहीं होने दूँगा मैं।”

विक्की: “तो फिर शीतल को सिग्नल दे रहा हूँ। अभी त्रुप्ति मस्ती में है, यही मौका है ब्लू पिल देने का। अगले 15 मिनट में त्रुप्ति की ये हँसी सेक्स की तड़प में बदल जाएगी। फिर देखना, कैसे वो खुद आएगी हमारे पास।”

राहुल ने मज़बूरी में हाँ कर दी, पर उसकी नज़रें त्रुप्ति और अभय पर ही टिकी थीं, जहाँ उसका ‘मैचो राइवल’ उसकी ‘माँ’ को धीरे-धीरे जीत रहा था।

पब के अँधेरे कोने में बैठे विक्की ने अपनी जेब से मोबाइल निकाला और टेबल के नीचे से शीतल को मैसेज किया: “NOW.”

बार काउंटर पर खड़ी शीतल ने मैसेज पढ़ा और तुरंत हरकत में आ गई। जब त्रुप्ति और अभय बातों में मशगूल थे, शीतल ने मौका देखा और चुपके से त्रुप्ति के ग्लास में वो ‘ब्लू पिल’ (वियाग्रा पाउडर) मिला दी। पाउडर ड्रिंक में घुलते ही ग़ायब हो गया। शीतल ने एक प्यारी सी मुस्कान के साथ ग्लास उठाया और त्रुप्ति की तरफ बढ़ी।

शीतल: “गाइज़! इतना सीरियस डिस्कशन क्यों? चलो, चीयर्स करते हैं आज की रात के नाम!”

त्रुप्ति ने बिना किसी शक के ग्लास उठाया। अभय की आँखों में देखते हुए उसने वो ज़हरीला जाम अपने रसीले होंठों से लगाया और एक ही साँस में आधा ग्लास खाली कर दिया। विक्की और राहुल दूर से ये सब देख रहे थे।

राहुल अपनी सीट से उठने ही वाला था कि त्रुप्ति को ले आए, पर विक्की ने उसका हाथ पकड़कर उसे वापस सीट पर बिठा दिया।

विक्की: (धीरे से) “पागल है क्या? अभी रुक जा। वो दवाई कोई मामूली नहीं है। कम से कम 15-20 मिनट लगेंगे नशा चढ़ने में। जब उसके अंदर की आग भड़केगी, तब तू एंट्री मारना। अभी तमाशा देख।”

ड्रिंक खत्म होते ही अभय ने अपना हाथ आगे बढ़ाया।

अभय: “त्रुप्ति… क्या एक डांस का मौका मिलेगा? सिर्फ़ एक दोस्त के नाते?”

त्रुप्ति ने इनकार नहीं किया। उसने मुस्कुराते हुए अपना नरम हाथ अभय के मज़बूत हाथ में दे दिया। दोनों डांस फ्लोर पर गए। किस्मत से डीजे ने फास्ट म्यूज़िक बंद करके एक रोमांटिक बॉलीवुड ट्रैक चला दिया।

अभय ने त्रुप्ति की पतली कमर पर अपना हाथ रखा और उसे धीरे से अपनी तरफ खींचा। त्रुप्ति का ब्लैक शोल्डर-लेस गाउन अभय के कपड़ों से रगड़ खाने लगा। शुरुआत में त्रुप्ति ने थोड़ा गैप बनाए रखा, पर वो दवाई अब अपना असर दिखाना शुरू कर रही थी।

त्रुप्ति को अचानक अपने पेट के निचले हिस्से में एक अजीब सी गर्मी महसूस हुई। ऐसा लगा जैसे उसके खून की रफ़्तार तेज़ हो गई हो। उसकी नंगी पीठ पर अभय की उँगलियों का स्पर्श उसे किसी करंट की तरह लग रहा था। उसे एक लस्टी फीलिंग आने लगी, जिसमें वो खुद को रोक नहीं पा रही थी।

त्रुप्ति: (अभय की आँखों में देखते हुए) “अभय… थैंक यू। सच में, अगर आज तुम नहीं होते तो वो लड़के पता नहीं क्या कर देते। तुमने मुझे बचा लिया।”

अभय: (त्रुप्ति को और क़रीब लाते हुए) “मैंने कहा था ना त्रुप्ति, मैं तुम्हारे लिए किसी से भी लड़ सकता हूँ। तुम्हारी इज़्ज़त मेरी इज़्ज़त है।”

त्रुप्ति का दिल पिघलने लगा। उस दवाई के नशे ने उसके दिमाग के ‘गिल्ट’ वाले हिस्से को सुन्न कर दिया था। वो सोचने लगी, ‘कितना केयरिंग और प्यारा लड़का है ये। कितना प्रोटेक्टिव है। अगर मैं शादीशुदा न होती, और अगर राहुल बीच में न होता… तो शायद मैं इसके प्यार में गिर जाती।’

त्रुप्ति की आँखें अब नशीली हो चुकी थीं। वो हल्का सा लड़खड़ाई, और अभय ने उसे सँभालने के लिए अपनी दोनों बाँहें उसके गिर्द कस लीं। अब उनके बीच हवा गुज़रने की भी जगह नहीं थी। त्रुप्ति के उभरे हुए बूब्स अभय के सीने से दब गए।

त्रुप्ति: (फ्लर्ट करते हुए, हँसते हुए) “अभय… तुम भूल रहे हो मैं राहुल की गर्लफ्रेंड हूँ। ऐसे चिपकना अलाउ्ड नहीं है।”

अभय: (मुस्कुराते हुए, उसकी आँखों में झाँकते हुए) “जानता हूँ… पर अभी के लिए तुम सिर्फ़ मेरी हो। इस पल में कोई राहुल नहीं है, सिर्फ़ तुम और मैं।”

दोनों हँस पड़े। त्रुप्ति की हँसी में एक खनक थी जो दवाई की वजह से और भी सेडक्टिव लग रही थी। वो नशे में अभय के कंधे पर अपना सर रखने लगी।

म्यूज़िक और भी स्लो और इंटेंस हो गया। अभय ने त्रुप्ति का चेहरा अपने हाथों में लिया। त्रुप्ति की साँसें गरम थीं, जो अभय के चेहरे पर पड़ रही थीं।

अभय: (व्हिस्पर करते हुए) “त्रुप्ति… तुम्हें वो दिन याद है? थिएटर वाला? जब मैंने तुम्हें किस किया था?”

त्रुप्ति का जिस्म काँप उठा। उस दवाई ने उस याद को एक इरोटिक मेमोरी बना दिया था।

अभय: “सच बताना… क्या तुम्हें वो बुरा लगा था? क्या तुम्हें मुझसे घिन आई थी?”

त्रुप्ति ने अपनी नशीली आँखें उठाकर अभय को देखा। उस वक्त उसे सिर्फ़ अभय के होंठ दिख रहे थे।

त्रुप्ति: (ना में सर हिलाते हुए) “नहीं अभय… ऐसा नहीं था। मुझे बुरा नहीं लगा था। बस… बस थोड़ा गिल्ट था। पर उस किस में… उस किस में सच्चाई थी।”

ये सुनते ही अभय की आँखों में एक उम्मीद की किरण जाग उठी। उसने देखा कि त्रुप्ति अब विरोध नहीं कर रही। वियाग्रा की हीट अब त्रुप्ति के पूरे बदन में फैल चुकी थी। उसकी जाँघें (थाइज़) आपस में रगड़ खा रही थीं, और उसे सख्त ज़रूरत थी कि कोई उसे कसके दबोच ले।

अभय का चेहरा त्रुप्ति के चेहरे के पास आने लगा। त्रुप्ति ने अपनी आँखें बंद नहीं कीं, वो बस अभय की आँखों में वो बेपनाह प्यार देख रही थी जो राहुल की आँखों में कभी नहीं दिखा। अभय की नज़रें त्रुप्ति के गुलाबी और रसीले होंठों पर अटकी थीं।

दोनों के होंठ एक-दूसरे से बस एक इंच की दूरी पर थे। साँसें एक-दूसरे में घुल रही थीं। त्रुप्ति का मुँह हल्का सा खुल गया, जैसे वो खुद अभय को इनवाइट कर रही हो।

दूर बैठे राहुल का दिल मुँह को आ गया। उसने सोचा, ‘अगर आज अभय ने इसे किस कर लिया, तो ये मेरी नहीं रहेगी।’ लेकिन विक्की ने उसे पकड़ रखा था।

अभय ने त्रुप्ति की कमर को इतनी ज़ोर से मसला कि त्रुप्ति के मुँह से एक हल्की “आह्ह्ह…” निकल गई, और ये सिसकारी सीधा अभय के होंठों में समा जाने वाली थी…

अभय और त्रुप्ति के होंठ एक-दूसरे से बस कुछ मिलीमीटर की दूरी पर थे। त्रुप्ति की साँसें अभय के होंठों से टकरा रही थीं, और वियाग्रा की गर्मी उसे मजबूर कर रही थी कि वो अभय को किस कर ले। पर ठीक उसी पल, एक ज़ोर की आवाज़ ने उस मदहोशी को तोड़ दिया।

राहुल: (गुस्से और हक से चिल्लाते हुए) “त्रुप्ति!”

त्रुप्ति हड़बड़ाकर पीछे हट गई। उसने अपनी धुँधली आँखों से देखा, सामने राहुल खड़ा था, उसका चेहरा गुस्से से लाल था। अभय की मुट्ठियाँ भिंच गईं, उसका बना-बनाया खेल बिगड़ गया था।

अभय: (त्रुप्ति का हाथ पकड़ते हुए) “त्रुप्ति… मत जाओ। ये तुम्हें वो ख़ुशी नहीं दे सकता जो मैं दे सकता हूँ।”

त्रुप्ति का दिमाग चकरा रहा था, पर ड्रग के असर और ‘गर्लफ्रेंड’ वाले रोल ने उसे राहुल की तरफ खींचा।

त्रुप्ति: (लड़खड़ाते हुए) “छोड़ो मुझे अभय… वो… वो मेरा बॉयफ्रेंड है।”

त्रुप्ति ने अभय का हाथ झटक दिया और लड़खड़ाते क़दमों से राहुल के पास चली गई। अभय वहीं खड़ा रह गया, ज़िल्लत और गुस्से की आग में जलता हुआ। उसने एक आख़िरी बार त्रुप्ति को देखा और पैर पटकते हुए डांस फ्लोर से बाहर निकल गया। उसने सोच लिया था कि इसका बदला वो जल्द लेगा।

राहुल ने त्रुप्ति की कमर में हाथ डाला और उसे भीड़ से दूर एक अँधेरे कोने (कॉर्नर) में ले गया। डिस्को लाइट्स की चमक और लाउड म्यूज़िक के शोर में वो दुनिया से कट गए थे।

राहुल ने त्रुप्ति को दीवार से सटाया। त्रुप्ति की आँखें नशीली हो चुकी थीं, उसका चेहरा तमतमा रहा था। राहुल ने उसके कान के पास झुककर कहा:

राहुल: (हस्की वॉइस में) “यू लुक रियली हॉट टुडे बेबी… आज तो तुमने मुझे पागल कर दिया है।”

त्रुप्ति शर्माकर मुस्कुराई, पर ये शर्म अब हवस में बदल चुकी थी। “राहुल…” उसने बस इतना ही कहा था कि राहुल ने टूटकर उसके होंठों पर हमला कर दिया।

राहुल ने त्रुप्ति के होंठों को अपने मुँह में भर लिया और वाइल्ड तरीके से किस करने लगा। इस बार त्रुप्ति ने कोई विरोध नहीं किया। शीतल की मिलाई हुई ‘ब्लू पिल’ अब अपना पूरा असर दिखा रही थी। त्रुप्ति को अपने जिस्म में एक ऐसी आग महसूस हो रही थी जो सिर्फ़ रगड़ और छुअन से शांत हो सकती थी। वो अपना होश खो रही थी।

राहुल त्रुप्ति के निचले होंठ को बाइट (काट) रहा था और त्रुप्ति जवाब में अपनी ज़बान राहुल के मुँह में डालकर उसे चूस रही थी। राहुल के हाथ त्रुप्ति के ब्लैक गाउन के ऊपर से उसकी भरी हुई गाँड को दबोच रहे थे। वो उसके सॉफ्ट बटॉक्स को बुरी तरह मसल रहा था।

त्रुप्ति: (किस तोड़ते हुए, हाँफते हुए) “आह्ह्ह… राहुल… मुझे कुछ हो रहा है… बहुत गर्मी लग रही है… म्मम…”

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