बहन को पत्नी बनाया

Bahan ki chut chodkar patni banaya:- ये कहानी मेरे एक पाठक ने भेजी है जिसका अगला भाग जल्द ही पढ़ने को मिलेगा। पाठक का कहना है कि कहानी सच्ची है और वो आज भी अपनी बहन को पत्नी के रूप में लेकर जिंदगी व्यतीत कर रहा है।

मैं गोपी, उम्र 23 साल, कद 5 फीट 9 इंच, रंग साँवला, एक फोटोग्राफर हूँ। मेरे पिताजी गौरी शंकर का देहांत आज से 3 साल पहले हो गया था। घर में माँ कामिनी और बहन नीरजा। माँ की उम्र 40 साल की है। माँ बहुत गोरी, मांसल जिस्म वाली औरत है। उसकी चूचियाँ बड़ी-बड़ी हैं और चुत्तर भरी हैं। माँ हमेशा साड़ी पहनती है और ब्लाउज में से उसकी चूची की झलक देखकर मेरा लंड खड़ा हो जाता है।

Bahan ki chut chodkar patni banaya hindi sex story

मुझे मालूम है कि माँ को अभी लंड की कमी महसूस होती है लेकिन लाज-शर्म की मजबूरी के कारण मेरी माँ कुछ कर नहीं पाती। कई बार मुझे माँ के कमरे से कामुक सिसकारियाँ सुनाई देती हैं। शायद कामिनी अपनी चूत में उँगली करके अपनी प्यासी चूत की प्यास शांत करती है।

मेरी बहन नीरजा भी जवान हो चुकी है और उसके रिश्ते की बात चल रही है। नीरजा की उम्र कोई 20 साल की हो चुकी है। मेरी बहन बहुत सुंदर और सेक्सी है। पढ़ाई पूरी नहीं कर सकी क्योंकि उसका चक्कर उसके एक टीचर के साथ चल रहा था और दोनों शादी भी करने वाले थे लेकिन उसका आशिक उसको धोखा देकर भाग गया। नीरजा मेरी माँ का जवानी का रूप है, गोरी-चिट्टी, मस्त जवानी है उसकी। बस स्लिम है और बहुत ही कसा हुआ बदन है उसका।

मेरा प्लान मुंबई में जाकर एक घर लेना है और वहीं पर बिजनेस करना है। वहाँ फोटोग्राफर का काम बहुत है। नीरजा बेशक मेरी सगी बहन है, लेकिन उसके हुस्न ने मुझ पर जादू कर रखा है।

एक दिन मैंने अपनी बहन को नहाते हुए देखा था। क्या जालिम हुस्न है मेरी बहन का! गोरे बदन पर जब वो साबुन मलकर नहा रही थी तो मेरा लंड काबू में नहीं रहा। उसके हाथ कभी उसकी मस्त चूची पर और कभी उसकी मस्त गोरी गोल गाँड पर चलते और मेरे दिल की धड़कन तेज होती रही। मैं बाथरूम के दरवाजे के छेद से सारा नजारा देख रहा था और अपनी पैंट की जिप खोलकर लंड की मुठ मार रहा था। मेरा हाल बुरा हो रहा था। उधर मेरा लंड छूट जाने के नजदीक था। मैं अपने हाथ से लंड को ऊपर-नीचे करता हुआ झड़ गया। लेकिन मेरी बहन नीरजा के नंगे जिस्म की तस्वीर मेरी आँखों से ओझल न हो पाई। उस दिन मैंने फैसला कर लिया कि नीरजा को अपनी पत्नी बनाकर ही दम लूँगा।

नीरजा के लिए जो भी रिश्ता आता मैं उसको ना में बदल देता। जो लड़का भी शादी के लिए होता मैं उसको बदचलन और निकम्मा कहकर रिश्ता तोड़ देता।

कामिनी: हे भगवान, सभी लड़के किसी काम के नहीं हैं! ना जाने कब कोई अच्छा लड़का मिलेगा मेरी बेटी को! अब सारी उम्र तो अपनी बेटी को घर में बिठाकर तो नहीं रख सकती, गोपी।

मेरी माँ ने एक दिन तंग आकर मुझसे कहा। लेकिन मेरी आँखें तो अपनी बहन के नंगे जिस्म की तस्वीर देखकर उसको चोद रही थीं।

मै: माँ मैं मुंबई जाकर कोई लड़का देखता हूँ। तुम कोई फिक्र मत करो।

मैं मुंबई चला गया और मेरा काम चल पड़ा। दो महीने के बाद माँ का फोन आया—

कामिनी: गोपी बेटा, कोई लड़का मिला क्या? मुझे चिंता सता रही है कि तेरी बहन जवान हो चुकी है और अगर किसी लड़के के साथ कुछ कर बैठी तो हमारी बहुत बदनामी हो जाएगी। मैं जानती हूँ कि जवानी का एक-एक दिन कितना व्याकुल करता है लड़की को। नीरजा जैसी लड़की को कोई भी लूट लेना चाहेगा। तुम जल्दी कुछ करो।

मैं तो खुद कुछ करना चाहता था कि मैं नीरजा को अपना बना सकूँ।

मै: माँ तुम उसको मेरे पास भेज दो। उसका मन भी लग जाएगा और शायद कोई लड़का भी उसको पसंद कर ले।

मैंने लंड मसलते हुए कहा।

कामिनी: ठीक है मैं कल तेरी बहन को भेज रही हूँ, अपना ख्याल रखना।

मेरा दिल बाग-बाग हो गया।

अपने घर में मेरे दो कमरे हैं। एक को मैंने अपनी नीरजा के लिए तैयार किया। कमरा सजाया, और उसमें वेब कैम फिट किया जो कि उसके कमरे की सारी फिल्म बनाकर रिकॉर्डिंग करे। उस कैमरे का कनेक्शन अपने स्टूडियो से जोड़ दिया। मुझे पता तो चले कि मेरी बहना रानी कितनी उतावली हो रही है बिना किसी मर्द के लंड के? अपने रूम में मैंने वीसीआर और कुछ ब्लू फिल्म्स रख डालीं और कुछ मस्ट्रम की किताबें अलमारी में रखीं। मैं अपनी बहन को पटाकर चोद देने की ताक में था।

अगले दिन शनिवार को नीरजा को मैं स्टेशन से लेने गया। नीरजा ने ब्लैक जीन्स और येलो टीशर्ट पहनी हुई थी और उसके बाल छोटे कटे हुए थे। उसके सीने का उभार देखकर मेरे दिल की धड़कन तेज हो गई। नीरजा बिल्कुल उर्मिला मातोंडकर दिख रही थी। उसकी चूचियाँ किसी पहाड़ी की चोटी की माफिक कड़ी थीं। लोग उसको घूर रहे थे। जब नीरजा ने मुझे देखा तो दौड़कर मेरी बाहों में आ गई। आलिंगन में लेते ही मुझे उसके जिस्म की मदक सुगंध महसूस हुई और उसकी चूची मेरे सीने के अंदर घुसने को व्याकुल थी।

मै: कैसी हो, नीरजा? कब से तेरी राह देख रहा था। वाह, मेरी बहना तू तो और भी सुंदर हो गई हो! बहुत प्यारी लग रही हो मेरी बहना!

नीरजा: सच भैया? मैं तो सोच रही थी कि तुम मेरी राह कम देख रहे थे और कुछ और अधिक देख रहे थे। भैया लड़कियाँ मर्दों की नजर पहचान लेती हैं। वैसे तुम भी बहुत सेक्सी दिख रहे हो! लगता है मुंबई का असर है।

मुझे लगा कि नीरजा ने मुझे उसकी चूची को घूरते हुए देख लिया था। मैं शर्म के मारे चुप रहा। रास्ते में मोटरसाइकिल पर जब मैं ब्रेक मारता तो नीरजा का सीना मेरी पीठ से जा टकराता और मेरी पैंट में तंबू बन जाता। मुझे महसूस हो रहा था कि नीरजा शरारती ढंग से मुस्कुरा रही थी।

मै: मुझे अच्छी तरह से पकड़कर रखो, कहीं गिर न जाना!

तो नीरजा ने मुझे कमर से कसके पकड़ लिया और उसका हाथ मेरे लंड से कोई अधिक दूर नहीं था। उसकी साँस मेरी गर्दन से टकरा रही थी। उत्तेजना की हालत में हम घर पहुँच गए।

नीरजा: भैया रसोई कहाँ है? मैं कुछ खाना बना देती हूँ।

घर जाकर नीरजा ने कहा। रसोई तो मैंने खोली भी नहीं थी।

मै: रसोई तो बंद है, मेरी बहना, खाना तो बाजार से लाता हूँ। मैं खाना बनाना नहीं जानता, ये तो तुम जानती ही हो।

तो नीरजा मुझसे लिपटकर बोली—

नीरजा: भैया, बिना औरत के घर घर नहीं होता। अब मैं आ गई हूँ तो आपके मकान को घर में बदल दूँगी। आप जाकर सब्जी वगैरह ले आएँ फिर देखना मेरा कमाल।

मैं अपनी बहन को आलिंगन में लेकर खड़ा रहा और प्यार से उसकी गाँड पर हाथ फेरने लगा और वो भी मेरे लंड पर अपनी चूत को रगड़ने लगी। मुझे पता ही नहीं चला जब मेरे होंठ नीरजा के होंठों से जा टकराए तो वो अलग होती हुई बोली—

नीरजा: भैया, बस करो अब। अपनी बहन को प्यार दिखाने का बहुत वक्त है, आप बाजार जाएँ और सामान ले आएँ।

खड़े लंड को जबरदस्ती बिठाते हुए मैं बाजार चला गया। सामान खरीदा और वापस आने ही वाला था कि सेल फोन बज उठा। फोन नीरजा का था—

नीरजा: भैया मेरे लिए एक ओडोमॉस लेते आना, यहाँ मच्छर बहुत हैं।

मैं केमिस्ट की दुकान पर चला गया। वहाँ मुझे एक बोतल ऐसी मेडिसिन की भी मिली जिसको पिलाने से औरत पर वो असर होता है जो मर्द पर वियाग्रा का होता है। घर आया तो नीरजा मेरे कमरे में बैठी मस्ट्रम की किताब पढ़ रही थी। मेरा अंदाजा ठीक निकला। ऐसी किताब पढ़ने से मेरी बहन के बदन में बिजली जरूर भड़केगी। मुझे देखकर उसने किताब छुपा ली और मैं उसको सामान देकर बोला—

मै: अब मैं दुकान पर जा रहा हूँ। शाम को खाना खाएँगे, तुम दरवाजा बंद रखना।

स्टूडियो में जाकर मैंने अपनी बहन की फिल्म देखनी शुरू कर दी। वेब कैम ठीक काम कर रहा था। नीरजा अपने कपड़े बदल रही थी। मुझे उसकी तस्वीर के साथ आवाज भी सुनाई पड़ रही थी। नीरजा ने अपनी टीशर्ट उतारी और उसकी चूची चमक उठी। वो मस्ट्रम की किताब लेकर अपने बिस्तर में बैठी हुई थी और एक हाथ से अपनी चूची मसल रही थी।

नीरजा: वाह भैया, किताब तो बहुत मस्त रखी हुई है घर में! साले बहनचोद गोपी, स्टेशन पर तो बहुत घूर रहे थे अपनी नीरजा बहन की चूची को। क्या बात है अपनी बहन को पत्नी बनाने का प्लान तो नहीं है? मेरे बहनचोद भाई, मैं जानती हूँ तू मुझे नहाते हुए देख रहे थे। अब कितनी देर लगाओगे मुझे अपनाने में? नीरजा की चूत बेकाबू हो जाती है भैया आपके लंड को याद करके।

मैं हैरान रह गया। मैं तो मैं, मेरी नीरजा खुद मेरी पत्नी बनना चाहती थी! मैंने पैंट की जिप खोली और घर फोन लगाया। नीरजा ने उठाया तो मैंने पूछा—

मै: नीरजा, मेरी बहन क्या कर रही हो?

मेरा हाथ मेरे लंड को सहला रहा था। वेब कैम में अब मेरी बहना अपनी चूत को मसल रही थी।

नीरजा: कुछ नहीं भैया कुछ जरूरी काम कर रही थी। क्या बात है भैया?

मै: कुछ नहीं, बस तेरी याद आ रही थी। खैर मैं जल्दी ही आ जाऊँगा।

तभी मेरा दोस्त हफीज आ गया। मैं उसको कुछ उधार दे चुका था। वो वापस करने आया था लेकिन मैं उसको घर आकर पैसे वापस करने को कहा—

मै: यार और साथ में अपनी भाभी को भी देख लेना।

हफीज हँसकर बोला—

हफीज: साले बहनचोद, भाभी भी ले आया और बताया भी नहीं?

शाम को हफीज पैसे देने आया तो मैंने नीरजा को दरवाजा खोलने को बोला।

हफीज: भाभी जी नमस्ते, ये पैसे गोपी भाई को देने थे। क्यों भाभी, ये साला आपको कहाँ छुपाकर रखता है? इतनी सुंदर बीवी अपने यारों से छुपाकर रखता है साला। अच्छा भाभी मैं चलता हूँ फिर आऊँगा।

मैंने सुना तो मुझे यकीन हो गया कि मेरा प्लान कामयाब होने वाला है। नीरजा हँसते हुए मेरे पास आई—

नीरजा: भैया आपका दोस्त तो मुझे भाभी बोलकर बुला रहा था। लेकिन मुझे बुरा नहीं लगा।

मैं हँसकर बोला—

मै: उसको कुछ पता नहीं है साला जो चाहे बोल देता है। मुझे खुशी है तुमने बुरा नहीं माना उसकी बात का।

खाना खाकर मैंने अपनी बहन को कहा—

मै: वाह बहना, ऐसा खाना कितनी देर के बाद नसीब हुआ है। तुम जिसकी पत्नी बनोगी, खुशनसीब होगा, नीरजा। बाजार का खाना खाकर तो मैं तंग आ चुका हूँ।

नीरजा प्यार से मेरी गोद में बैठकर बोली—

नीरजा: भैया अगर तुम चाहो तो ऐसा खाना तुमको सारी उम्र मिल सकता है, बस मुझे अपने पास रख लो, कभी अलग न करो।

मैंने उसको अपनी बाहों में भरके कहा—

मै: मैं भी तो यही चाहता हूँ, मेरी रानी बहना, लेकिन उसके लिए तुझे मेरी पत्नी बनाना होगा। ये दुनिया उसको कभी स्वीकार नहीं करेगी और फिर माँ क्या कहेगी? नीरजा मैं तुझे बहुत प्यार करता हूँ। तुझ जैसी प्यारी बहन को किसी और के संग भेजकर मैं तो मर जाऊँगा, सच मेरी बहना!

नीरजा मेरी प्यार भरी बात सुनकर भावुक हो उठी और मेरे होंठ चूमने लगी—

नीरजा: सच भैया? बनाओगे मुझे अपनी दुल्हन? मेरी किस्मत खुल जाएगी, भैया अगर ऐसा हो जाए कि मैं अपने भैया की पत्नी बन जाऊँ! मुझे अपना लो भैया, मेरे पति बन जाओ, मेरी माँग के स्वामी, मेरे मालिक। मैं आज तक ये शब्द आपके मुख से सुन लेना चाहती थी। भैया मुझे प्यार करो! मुझे आज बहन का नहीं पत्नी का प्यार दो, मेरे प्यारे भैया! कब से अपने भैया की प्यार भरी नजर को तरस रही हूँ, गोपी भैया वरना अभी तक शादी न कर लेती। लड़के तो मुझसे शादी करने को आतुर रहे हैं, लेकिन मैंने अपनी जवानी अपने गोपी भैया के लिए संभालकर रखी है!

उस वक्त नीरजा ने सफेद स्कर्ट और सफेद कुर्ती पहनी हुई थी और एक अप्सरा दिख रही थी। मैं उसके मुख पर झुककर उसको चूमने लगा। उसकी बाहें मेरे गले पर थीं और वो मुझे चूम रही थी जैसे एक पत्नी अपने पति को चूमती है। मेरा एक हाथ अपनी बहन की जाँघों के बीच चला गया और उसने अपनी जाँघें खोल दीं। नीरजा की चिकनी जाँघें बिल्कुल रेशम जैसी थीं। मैंने देखा कि नीरजा ने चड्डी नहीं पहनी थी। उसकी चूत किसी फूल की तरह मुलायम थी। मेरी बहन ने शायद मेरे लिए ही चूत साफ करी हुई थी। उसकी चूत पर बाल नाम की कोई चीज नहीं थी। मेरे हाथ के स्पर्श से मेरी बहन का जिस्म काँप उठा और वो मुझसे चिपक गई।

नीरजा का मखमली जिस्म मेरी बाहों में मचल रहा था। मुझे मालूम ही न था कि मेरी सेक्सी बहन मुझ पर फिदा है और मुझसे ही चुदवाने के सपने देखती आ रही है। पाँव रोटी की तरह फूली हुई चूत को जब मेरे हाथों ने स्पर्श किया तो मेरी बहन की आह निकल गई—

नीरजा: भैया… धीरे-धीरे करो, प्लीज, मेरी चूत में आग लगा दी है आपने, मेरे प्यारे भैया… मुझे प्यार करो भैया… आज अपनी नीरजा को अपनी पत्नी बनाकर प्यार करो भैया… आआह्ह्ह… मेरे गोपी भैया!!!

मेरी खुशी का कोई ठिकाना न रहा जब नीरजा अपना हाथ नीचे ले जाकर मेरे लंड को पकड़कर सहलाने लगी। मेरा लंड लोहे की तरह सख्त हो चुका था और मेरी बहन के हाथ में तो जैसे कोई जादू था। मेरा रोम-रोम खिल उठा जब मेरी नीरजा ने मेरे लंड को मुट्ठी में लिया। जोश में आकर मैंने अपनी उँगली अपनी प्यारी नीरजा की चूत में घुसेड़ दी। चूत पानी-पानी हो रही थी। मेरी प्यारी बहना उत्तेजित थी और शायद लंड अपनी चूत में घुसवाने को बेकरार थी। उसने अपने चुत्तर ऊपर उठाकर मेरी उँगली पूरी तरह चूत में लेने का प्रयास किया—

नीरजा: भैया, अपनी बहन को चोदोगे नहीं? क्या उँगली से ही तड़पाते रहोगे? मेरे हाथ में जो प्यारा लंड है उसको नहीं पेलोगे अपनी बहना की चूत में? भैया आपका लंड अब मेरी संपत्ति है जिसको अब आपकी बहन अपनी चूत में छुपाकर रखेगी! भैया अब देर मत करो, अपनी नीरजा को चोद डालो, गोपी भैया, प्लीज!!!

मैंने भी अब उत्तेजित होते हुए उसकी कुर्ती उतार फेंकी। वाह क्या नजारा था! नीरजा का दूधिया जिस्म कमरे में चमक उठा। उसकी दूध जैसी चूचियाँ कितनी सेक्सी लग रही थीं! मैं मस्ती से भर गया। मैंने अपने होंठ अपनी बहन के निप्पल पर रख दिए और चूसने लगा। नीरजा के निप्पल्स ब्राउन रंग के थे जो अब कड़े हो चुके थे। मेरे होंठ लगाते ही और कड़े हो गए और मैं उनको चूसने लगा। नीचे मेरी बहन के हाथ मेरे लंड से खेल रहे थे और मेरी उँगली उसकी चूत में अंदर-बाहर हो रही थी—

नीरजा: चूसो भैया, चूसो मेरी चूची… ओओह्ह… मेरे प्यारे भैया, चूस लो मेरे निप्पल्स… बहुत प्यारे हो मेरे भैया!!!

मेरी बहन चुत्तर उठा-उठाकर मेरी उँगली से चुदवाने लगी और साथ मेरी मुठ मारने लगी थी। अब मुझसे नहीं रहा जा रहा था। अगर कुछ देर और ऐसा ही चलता रहता तो मेरा लंड झड़ ही जाता। मैंने नीरजा की चूची को जोर से चूसकर अपने से अलग कर दिया।

मै: नीरजा, मेरी बहना, अब मैं तुझे चोदे बिना नहीं रह सकता। तेरा भाई आज पहली बार किसी लड़की को चोद रहा है और वो भी अपनी सगी बहन को! तुझ जैसी बहन को चोदना किसी के ही किस्मत में होता है। मुझे बहनचोद कहलाने में कोई अफसोस नहीं होगा अगर मेरी बहन मुझसे ऐसे ही प्यार से चुदवाती रहे। मुझे बस एक बार अपनी चूत के अमृत को चाट लेने दो फिर मैं तुझे चोदूँगा मेरी बहना, चल अब पूरी तरह से नंगी हो जा अपने पति के सामने, मेरी बहना!

नीरजा की स्कर्ट और कुर्ती जमीन पर पड़ी थी और मैं पूरा नंगा हो चुका था। मैंने उसको उठाकर पलंग पर रखा और अपने पैर उसके कंधों की तरफ रखकर अपनी बहन की चूत को चाटने लगा। मेरा लंड मेरी बहन के मुख के सामने था। मेरी बहन ने झट से मेरे लंड को खींचकर अपने मुँह में ले लिया और अपने हाथों से मेरे अंडकोष सहलाने लगी। हम भाई-बहन 69 की पोजीशन में थे और मैं चूत चाटने में और नीरजा मेरा लंड चूसने में लग गई। मेरी जुबान पर नीरजा के चूत रस की बौछार हो रही थी। वो बहुत गरम हो चुकी थी और मेरे सुपाड़े को लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी। मैंने भी अपनी बहन की गोरी जाँघों को फैला रखा था और उसकी मक्खन जैसी चूत को चाट रहा था। कभी-कभी नीरजा मेरे अंडकोष चाट लेती तो मेरा जिस्म काँप-काँप जाता। फिर उसने अचानक मेरी गाँड में एक उँगली घुसेड़ दी तो मेरा पूरा बदन ऐंठ गया।

फिर हम एक-दूसरे से अलग हुए और मैंने अपनी बहन को चित लिटा दिया और उसके मखमली चुत्तर के नीचे एक तकिया रख दिया जिस कारण मेरी प्यारी बहना की चूत ऊपर उभर गई। नीरजा की आँखों में अब लाल डोरे नजर आ रहे थे और वो मेरे लंड को भूखी नजरों से देख रही थी। मैं भी हवस भरी नजर से अपनी बहन के नंगे हुस्न को निहार रहा था और फिर मैं उसके नंगे जिस्म पर झुका। मैंने अपने लंड का सुपाड़ा उसकी कुँवारी चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया। चूत किसी आग के शोले की तरह तप रही थी। मैं नीचे से ऊपर तक लंड को रगड़ रहा था कि वो चीख पड़ी—

नीरजा: गोपी भैया, क्यों तड़पा रहे हो? अब मेरी चूत को ठंडी करो ना? इसकी आग शांत कर दो मेरे भैया! अपनी बहन को इतना उत्तेजित कर रहे हो, अब चोद भी डालो, प्लीज!!!

जाँघों को खोलकर मैंने लंड का सुपाड़ा अपनी बहन की चूत के मुख पर रखा और भगवान का नाम लेकर जोरदार धक्का मार दिया। नीरजा की चूत की गुलाबी फाँकों को चीरता हुआ लंड मेरी बहन की चूत में घुसता चला गया। मुझे महसूस हुआ कि मेरा लंड किसी आग की भाठी में घुस गया हो। मखमल से भी अधिक मुलायम चूत की दीवारों ने मेरे लंड को जकड़ लिया और मुझे जन्नत का मजा मिलने लगा। मैंने प्यार से लंड अंदर पेलना जारी रखा तो मेरी बहन कराह उठी—

नीरजा: भैया प्यार से चोदो अपनी बहना को! बहुत मस्त लंड है आपका मेरे गोपी भैया। पेलते जाओ भैया… बहुत मस्त है आपका लंड!

चूत से बहने वाले रस ने लंड का रास्ता आसान बना दिया था और थोड़ी देर में ही मेरा पूरा 8 इंच का लौड़ा मेरी बहन की बुर में घुस चुका था।

मैंने अपना मुख झुकाकर नीरजा की चूची पर रख दिया और चाटने लगा। मेरा लंड मस्ती में चूत के अंदर-बाहर हो रहा था और मैं अपनी कमर हिला-हिलाकर अपनी सगी बहन को चोद रहा था—

मै: नीरजा, मेरी रानी बहना, मैंने ऐसा आनंद पहले कभी नहीं महसूस किया! सच बहना, तू मेरी पत्नी है आज से। तुझे चोदकर मेरी किस्मत खुल गई है। देख तेरे गोपी भैया का लंड तेरी चूत की गहराई में समा चुका है। आज से गोपी तेरा भैया नहीं सैंया है! तुझे अपनी पत्नी बनाकर सारी उम्र चोदूँगा, ये तेरे गोपी भैया का वादा है तुमसे!

नीरजा चुदाई के आनंद में इतनी खो चुकी थी कि कुछ बोल नहीं पा रही थी। लंड फचा-फच से चुदाई कर रहा था। मेरी बहन अब अपने चुत्तर उठाकर चुदवा रही थी। मेरे हाथ अब उसके चुत्तर को थामकर अपने जिस्म से चिपका रहे थे।

नीरजा: ओह्ह्ह्ह्ह… भैया… चोदो जोर से!! पेलो मुझे मेरे राजा भैया… बहुत आनंद दे रहा है आपका लंड मेरी चूत को, मेरे सैंया… चोद डालो आज अपनी बहन को… बना लो मुझे अपनी पत्नी!!!!

वो हाँफ रही थी।

हमारे जिस्म पसीना-पसीना हो चुके थे और हम पागलों की तरह चोद रहे थे। चुदाई अपनी ऊँचाई तक पहुँच चुकी थी। मेरा झड़ने का वक्त नजदीक आ रहा था। मेरे अंडकोष से रस ऊपर उठ रहा था। उधर नीरजा जिस रफ्तार से गाँड उछाल रही थी, मुझे लगा कि वो भी झड़ने वाली है।

नीरजा: भैया… जोर से… मैं गई… मेरी चूत गई… मैं झड़ी मेरे भैया… चोद लो अपनी बहन को जोर से… पेलो भैया… अपना रस गिरा दो मेरी चूत में… मुझे अपने बच्चे की माँ बना दो मेरे भैया… अपनी पत्नी को माँ बना दो… मैं गई… ओह्ह्ह… बहनचोद गोपी भैया… तुम आज से बहनचोद बन गए हो मेरे भैया… मेरे पति!!!!!

मेरा लंड भी पिचकारी छोड़ने को था। मैंने अपनी बहन को अपनी बाहों में जकड़कर जोर-जोर से चोदने शुरू कर दिए। मुझे अपने नीचे अपनी बहन न दिख रही थी। मुझे अपनी बीवी दिख रही थी। वासना की चमक से भरी मेरी नीरजा मुझे मेरी पत्नी दिख रही थी जो मुझसे प्यार से चुदवा रही थी। तभी मेरे लंड का बाँध टूट पड़ा और रस का फव्वारा नीरजा की चूत में गिरने लगा। चूत भी झड़ रही थी। लंड रस अब चूत रस में मिक्स हो रहा था। तूफानी धक्के अब धीरे होने लगे और पूरी तरह से शांत होकर हम पति-पत्नी की तरह आलिंगनबद्ध होकर लेटकर नंगे सो गए।

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