एक परिवार की मस्त सेक्स कहानी 5
Pariwar me chudai aur hawas ki sex story:=मैं विनोद, हाज़िर हूँ कहानी का 5th पार्ट लेकर। अंजली ने दीपा से पूछा कि ऐसे मस्त लौड़ा से सालों चुदवाने के बाद भी उसकी माँ क्यों एक बच्चे से चुदवाने जाती है, उससे शादी कर ली है। अंजली ने चार्ज किया कि उसके घरवालों ने अनु को खरीद लिया है!
पिछला पार्ट यहाँ पढ़ें ==> एक परिवार की मस्त सेक्स कहानी 4
Pariwar me chudai aur hawas ki sex story
दीपा ने हमें अपनी और मेरी कसम देकर कहा कि शादी की बात हम सब अभी किसी और को न बोलें। उसने कहा,
दीपा: “अंजली, मेरे बाबूजी जल्दी ही आप लोगों से इस बारे में बात करने आएँगे। शादी के कई दिन पहले से जब दोनों बाहर निकलते थे कि ठीक 6 बजे मेरे बाबूजी आ जाते थे। देबू भैया को मंडी पर भेज देते थे और उसके बाद दोनों, मेरे बाबूजी और अनुपमा भाभी खूब बातें करते थे।”
अंजली: “तेरा बाप भी मेरी माँ को चोदता है क्या?”
दीपा अब हमसे पूरी तरह खुल गई थी, उसने कहा,
दीपा: “सच दीदी, मेरा बाप अनु भाभी को चोदता है कि नहीं मुझे नहीं मालूम। कभी-कभी भाभी हमारे सामने ही बाबूजी से बात करती है और कभी-कभी दोनों रूम के अंदर भी रहते हैं।”
“और आपने पूछा ना कि मेरे घरवालों ने अनु भाभी को क्या दिया तो मैं बताती हूँ। जिस दिन शादी हुई, शादी के बाद देबू भैया अपनी घरवाली को लेकर रात 12 बजे के बाद 2 बड़े-बड़े सूटकेस लेकर यहाँ आए थे। मुझे सरप्राइज़ है कि आप लोगों ने बड़े-बड़े बॉक्स नहीं देखे।”
उसने आगे कहा,
दीपा: “मेरी उषा भाभी को ना तो देबू और अनु भाभी का प्यार पसंद है, ना ही यह पसंद है कि अनु भाभी मेरे बाबूजी से भी खुलकर बात करती है। उन्होंने ही मुझे कहा,
‘दुल्हन दहेज लेकर ससुराल आती है लेकिन हमारे घरवालों ने दुल्हन को ही बहुत दहेज देकर विदा किया।’”
“अंजली अब ना देबू अपनी घरवाली को छोड़ेगा और ना ही मेरे बाबूजी ही अनुपमा को छोड़ेंगे। वो भी अब उससे बहुत पसंद करते हैं।”
अंजली: “कुतिया ने ज़रूर दोनों बाप-बेटे को अपना मस्त मस्त माल खिलाकर गुलाम बना लिया है। तुम दोनों फ्रेश हो जाओ, मैं नाश्ता लगाती हूँ।”
बोलकर अंजली किचन में चली गई। मैंने दीपा को चूमते हुए रिक्वेस्ट किया कि वो जल्दी अपनी उषा भाभी को लेकर आए।
हम दोनों फ्रेश हुए, कपड़े पहने और तीनों ने मिलकर नाश्ता किया। क़रीब 9 बजे संगीता घर के अंदर आई। उसने अंजली से कहा कि उसकी सास उसे जल्दी बुला रही है। मैंने संगीता से पूछा कि वो अपना कंप्यूटर क्लास करने नहीं जाएगी। तो उसने कहा कि उसने अपना टाइम चेंज करवा लिया है।
उस दिन सुबह के बदले शाम 5 से 7 तक क्लास करेगी। अंजली ने दीपा को अपनी एक सहेली कहकर इंट्रोड्यूस करवाया और साथ में यह भी बोली,
अंजली: “भाभी, जानती हो, मैं तो इसके साथ गप्पे मारना चाहती थी, लेकिन इस कुतिया ने रात 11 बजे से लेकर सुबह 8 बजे तक चुदवाया, मेरे बाप को पूरा चूस लिया है। देखो कितनी टायर्ड दिख रही है।”
संगीता ने दोनों के सामने मेरे गालों को ज़ोर से पिंच करते हुए कहा,
संगीता: “अंजली, लगता है तुमने कभी कुत्ते की चुदाई नहीं देखी है। यहाँ अहमदाबाद में तो बस 2-3 बार ही कुत्ता-कुतिया की चुदाई देखी है। लेकिन हमारे गाँव में बहुत कॉमन बात है।”
संगीता बोलती रही,
संगीता: “क़रीब 2 साल पहले ही देखा, एक तेरे बाप जैसा कुत्ता, एक-दो नहीं। मैंने गिनती की थी, एक के बाद एक लगातार 11 कुतिया को चोदा और वो भी सबको कम से कम आधा घंटा से ज़्यादा। तेरा बाप, विनोद अंकल सिर्फ़ देखने में आदमी है। लेकिन है उस कुत्ते से भी ज़्यादा हरामी चुद्दक्कड़।”
साफ़ दिख रहा था कि संगीता मेरी चुदाई से बहुत ख़ुश थी।
संगीता बोलती रही,
संगीता: “कोई भी औरत इनके साथ लगातार 10-12 दिन नहीं चुदवा सकती, बेचारी मर जाएगी। तेरी माँ (अनुपमा) भी ज़रूर कुतिया ही है जो इस कुत्ते को 22 सालों से सँभाल रही है।”
अंजली ने मुझे देखते हुए कहा,
अंजली: “आप शायद ठीक कह रही हैं भाभी। आपका ये कुत्ता माँ को सिर्फ़ एक-दो बार ही चोदता है। माँ से ज़्यादा दूसरी-दूसरी रंडियों के ऊपर अपना ताक़त खर्च करता है। मैं क़रीब 10-12 रंडियों को जानती हूँ जो सालों से मेरे बाप से चुदवा रही हैं। चलिए देखें आंटी को मुझसे क्या काम है।”
अंजली के कहने पर दीपा ने मना किया लेकिन संगीता उसे भी अपने साथ ले गई। मैं बहुत ख़ुश हुआ कि उस दिन सिर्फ़ 2 नहीं, 4-4 माल को एक साथ नंगा नहाते हुए देखूँगा। अंजली के सामने तीनों को चोदूँगा। यह भी डिसाइड किया कि बाक़ियों के सामने अपनी बेटी को न चोदूँ लेकिन उससे लौड़ा चुदवाऊँगा।
उन दोनों के जाने के बाद मैंने तीनों बेडरूम में ढूँढ़ा। लेकिन मुझे कहीं वो सूटकेस नज़र नहीं आया जो दीपा के कहने के अनुसार अनु अपने नए ससुराल से लेकर आई थी। हर एक कपबोर्ड, बेड बॉक्स में देखा लेकिन कोई भी नया सूटकेस मुझे नहीं दिखा।
क़रीब आधे घंटे बाद मैं किचन के बाहर आया। जैसा एक्सपेक्ट किया था चारों, संगीता, उसकी सास, दीपा और मेरी बेटी अंजली नंगी एक-दूसरे के बॉडी को रगड़ते हुए नहला रही थीं। लेकिन उस दिन एक नई बात देखी।
संगीता ने एक थिक पॉलीथीन शीट को टाँग दिया था। जिससे कि रोड पर से आता-जाता कोई भी इन जल-परियों को न देख सके। मैंने सिर्फ़ लुंगी पहना था। मैं पार्टिशन वॉल से बिल्कुल सट कर खड़ा हो गया। सबकी नज़र मुझ पर पड़ी लेकिन बोली सबसे पहले मेरी बेटी अंजली।
अंजली: “पापा, हमारी जवानी को देखना ही है तो इतने दूर से क्या देख रहे हो? संगीता भाभी, आंटी और दीपा को आप कई बार चोद चुके हैं। मैंने कल रात भी और आज सुबह भी आपको दीपा को चोदते हुए देखा और आपका मस्त हल्लाबी लौड़ा भी देखा। मैं तो आपकी अपनी बेटी ही हूँ, मुझे बचपन से आप हज़ारों बार नंगा देख चुके हैं। आ जाइए, अब सबके सामने इन तीनों कुतिया को चोदिए।”
चार-चार माल, ख़ास कर अपनी ख़ूबसूरत बेटी अंजली को भी दूसरी तीन नंगी माल के साथ नंगा देखकर मेरी हालत खराब हो रही थी। जी तो कर रहा था कि सबसे पहले उन तीनों के सामने अपनी बेटी अंजली को ही खूब चोदूँ।
लेकिन फिर डिसाइड किया कि अंजली कुछ भी करे, मैं इतनी जल्दी उसे दूसरों के सामने नहीं चोदूँगा। संगीता और उसकी सास अब 20-22 दिनों से मेरे साथ मस्ती मार रही थीं, चुदवा रही थीं। खुले में नंगी ही बाथ लेती थीं।
संगीता ने पिछले दिन अंजली को मेरे साथ की मस्ती के लिए तैयार कर लिया था और 2 दिन पहले ही उसने मुझे वॉर्न कर दिया था कि वे दोनों अंजली को भी अपने साथ नंगा नहलाएँगी। जब मेरी बेटी को दूसरों के सामने बाप को अपनी नंगी जवानी दिखाने में शर्म नहीं आ रही थी तो मैं क्यों शर्म करूँ।
दीपा: “साहब, रात में आपने अपनी घरवाली के सामने और सुबह अपनी बेटी के सामने आपने मुझे चोदा। सच मुझे बहुत बढ़िया लगा। अब इन सबके सामने दिन में खुले में चोदिए। मुझे भी मज़ा आएगा और इन सबको भी चुदाई देखना बढ़िया लगेगा।”
मैंने वही लुंगी उतार फेंका। मुझे नंगा देखते ही संगीता बोली,
संगीता: “वाह अंकल, आपका लौड़ा देखकर दिल ख़ुश हो जाता है। अब मत तड़पाइए, देखिए आपकी ये प्यारी बुर कितना आँसू बहा रही है।”
साली चारों की चारों चुदासी थीं। रात में अपनी बेटी के साथ खूब मस्ती मारी थी। दो बार जमकर चोदा था। मैं पार्टिशन वॉल को जंप कर उन सबके सामने आया और सबसे पहले आंटी को बाँहों में दबोचा। लिप्स को चूसते हुए दोनों चुचियों को खूब मसला।
बुर को भी खूब दबाया, दोनों हाथों से चुत्तड़ों को कई बार मसल कर उन्हें छोड़ा और बोला,
मैं: “आंटी, आपकी चुची 40 इंच, कमर 30-इंच और मस्त कड़क चुत्तर 38–40-इंच की है। इन मस्त चुत्तड़ों के कारण ही आपको गाँड मरवाने में मज़ा आता है।”
आंटी और उनकी बहू संगीता ने अपने-अपने बुर को बिल्कुल चिकना करके रखा था। आंटी क़रीब 45 सालों से चुदवा रही थीं। झाँट बिल्कुल नहीं था फिर भी मर्द का धक्का खाते-खाते प्यूबिक एरिया डार्क कलर का हो गया था।
मैंने एक-एक हाथ से बाक़ी दोनों दीपा और बेटी के झाँटों भरी बुर को सहलाते हुए कहा,
मैं: “संगीता, इन दोनों बुर को भी अपनी जैसी चिकनी कर दो फिर चारों एक-दूसरे की चिकनी बुर को चूसोगी, चाटोगी तो ज़्यादा मज़ा आएगा।”
अंजली ने अपनी बुर पर से मेरा हाथ हटाते हुए कहा,
अंजली: “जैसा आंटी का नाप लिया वैसे ही हम तीनों का नाप लेकर बताइए। देखें आपका एस्टिमेट कितना सही है।”
मेरी बेटी खुद चाहती थी कि मैं दूसरी तीन माल के सामने उसे प्यार करूँ, चुची दबाऊँ। मैं क्यों मौका छोड़ता? आंटी ने दोनों हाथों से लौड़ा को सहलाकर छोड़ दिया।
मैंने अंजली को अपनी तरफ खींचा, दोनों हाथ को पीछे ले जाकर दोनों चुत्तड़ों को सहलाते हुए अपनी ओर दबाया। अंजली ने हाथ नीचे कर बाप का लौड़ा पकड़ बुर पर रगड़ने लगी। मैंने बेटी के लिप्स और चीक्स का किस लिया और फिर उसे थोड़ा पीछे कर दोनों चुचियों को 3–4-मिनट सहलाया और बोला,
मैं: “बेटी कोई कितना भी लालच दे, कितना भी धन-दौलत दे अभी तुम गाँड में किसी का भी लौड़ा मत लेना। हाँ कोई एक्सपर्ट गाँड मारने वाला हो तो वो बहुत प्यार से तेरी गाँड में लौड़ा पेलेगा। तुम्हारी गाँड/चुत्तर अभी सिर्फ़ 32–33-इंच की ही है। मेरे जैसे चुद्दक्कड़ से भी गाँड मरवाने में तुझे शायद कोई मज़ा नहीं आएगा।”
“पतली कमर सिर्फ़ 24-इंच और ये मस्त मस्त कसी हुई बहुत ही कड़क चुचियाँ सिर्फ़ 34-इंच की हैं। बहुत ही किस्मत वाला है तेरा यार जो तेरी मस्त मस्त जवानी का मज़ा ले रहा है। इतनी टाइट रसीली बुर में लौड़ा पेल रहा है।”
मैंने अपने टाइट हैंड की मिडिल फिंगर को अंजली के बुर में घुसने सेट कर 8-10 बार अंदर-बाहर करने लगा। कुछ देर तेज़ी से अंदर-बाहर किया और बोला,
मैं: “तेरी बुर भी तेरी संगीता भाभी के बुर जैसा बहुत ही लचीली और रसदार है। मोटा से मोटा लौड़ा भी बहुत प्यार से अंदर घुस जाएगा। और अगर कोई बढ़िया चोदने वाला हो तो तू आराम से 2-3 घंटा चुदवा सकती है।”
बेटी ने लौड़ा को कसकर 3-4 बार दबाया और मुझे आँख मारते हुए बोली,
अंजली: “अभी जो मेरा यार है वो भी आपके ही उम्र का है। साला एक दिन में 3-4 बार चोद लेता है लेकिन अब तक कभी आधा घंटा तक भी मेरे बुर में टाइट नहीं रह पाया।”
संगीता ने बेटी के हाथ से मेरा लौड़ा को मसलते हुए बोली,
संगीता: “तू बहुत अनलकी है ही कि तू मेरे प्यारे विनोद अंकल की बेटी है। तेरे पापा अब हमें एक महीना से चोद रहे हैं और एक बार भी 40–45-मिनट से कम नहीं चोदा। 2-3 बार तो लगातार 2-2 घंटा चोदा। तेरे पुनीत भैया (संगीता के हसबैंड) 2 साल से पेल रहा है लेकिन कभी 15-मिनट से ज़्यादा नहीं चोद पाया।”
वहाँ खड़ी सबमें संगीता सबसे लंबी थी क़रीब 5ft 6 इंच। मेरी बेटी उससे एक-डेढ़ इंच छोटी थी और दीपा सबसे छोटी सिर्फ़ 5ft 2-इंच की ही थी। जैसा अंजली के माल को मसल-कर बुर में उँगली पेल कर नाप लिया था वैसा ही संगीता और दीपा का भी लिया।
संगीता की चुची भी मेरी घरवाली जैसी 36-इंच की थी। कमर 26 और चुत्तर 34 इंच। दीपा की चुची 32 इंच, कमर 22-इंच और चुत्तर 34 इंच। लेकिन आंटी के अलावा बाक़ी तीनों में से दीपा के चुत्तड़ों की गोलाई सबसे बढ़िया थी। दीपा के चुत्तड़ों के बीच गैप सबसे ज़्यादा था।
चारों गोरी थीं, सबके लंबे-लंबे घने बाल थे। मेरी बेटी अंजली ज़रूर सबसे ज़्यादा सुंदर थी। लेकिन वहाँ खड़ी 4 नंगी औरतों में सबसे बढ़िया माल संगीता ही थी। संगीता ने कहा,
संगीता: “अंजली, तेरे पापा क़रीब-क़रीब रोज़ हम दोनों को नहलाते हैं, चल आज हम सब मिलकर तेरे पापा को नहलाते हैं।”
मैं कुछ बोलता उससे पहले ही चारों ने मिलकर मुझे पकड़ा और एक साथ मुझ पर भीड़ पड़ी। कोई मेरे ऊपर पानी डाल रही थी तो कोई साबुन लगा रही थी और सबसे पहले वो ही नीचे बैठ दीपा लौड़ा को चूसने लगी। दीपा ने कुछ देर लौड़ा चूसा और वो खुद हट गई और उसकी जगह संगीता ने ले ली।
उसने खूब चुभला-चुभला कर बॉल्स को दबाते हुए, इनर थाइज़ और मेरे चुत्तड़ों को दबाते हुए कुछ देर लौड़ा चूसा। उसके हटते ही मेरी बेटी ने जगह ली और वो भी संगीता जैसा ही लौड़ा चूसने लगी। उसने पहले वाली दोनों से ज़्यादा देर तक लौड़ा चूसा।
मैंने खुद उसे हटाया। आंटी लौड़ा चूसती उससे पहले संगीता ने लौड़ा पकड़ लिया और बोली,
संगीता: “राजा अब बरदाश्त नहीं हो रहा। पहले मेरी जवानी को ठंडा करो फिर माँ को लौड़ा चुसाना।”
वो वहीं खुले में चुदवाना चाहती थी लेकिन मैं सबको लेकर रूम के अंदर आया और अंजली को बेड पर लेटने कहा।
अंजली के लेग्स को पूरा फैलाया और बुर पर हाथ फेरते हुए बोला,
मैं: “संगीता, तुम तीनों की चुदाई देखकर ये लड़की अपनी बुर खुजलाती रहेगी। इसलिए जब तक मैं तुम तीनों को चोदता हूँ तब तक तुम लोग इसे चोदो, इसकी बुर चाटो, चूसो।”
मैंने सोचा था कि मेरी बात सुनकर संगीता नाराज़ होगी, नहीं उल्टे वो बहुत ख़ुश हुई और बोली,
संगीता: “अंकल मैं खुद इस ख़ूबसूरत हसीना की जवानी का मज़ा लेना चाहती थी। लेकिन सोच रही थी कि आप दोनों को खराब लगेगा। उफ्फ अंकल, आप बहुत ही अच्छे हैं।”
बोलकर संगीता ने अंजली के लेग्स को पकड़कर खींचा, अंजली का हिप्स बेड के एज पर आ गया। संगीता ने अंजली के एक-एक नी को अपने शोल्डर्स पर रखा और चुचियों को मसलते हुए बुर पर टंग चलाने लगी। संगीता खुद कुतिया के पोज़ में हो गई।
मैं भी झुका और संगीता के चुत्तड़ों को सहलाते हुए क़रीब 10–12-मिनट बुर से लेकर गाँड के छेद तक खूब बढ़िया से चूसा और चाटा। उसके बाद चुत्तड़ों को पकड़ संगीता के बुर में लौड़ा पेलने लगा।
संगीता का पीरियड क़रीब 15-17 दिन पहले ही आया था। अपनी बेटी की मस्त थाइज़ को सहलाते हुए संगीता को चोदने लगा। बीच-बीच में साइड्स से हाथ घुसाकर उसकी चुचियों को भी मसलता था।
जब भी संगीता मेरी बेटी की चुचियों से हाथ हटाती थी तब मैं अपने दोनों हाथों को आगे बढ़ाकर बेटी की चुचियों को सहलाता मसलता था। बाक़ी दोनों भी अंजली के अगल-बगल बैठ उसकी जवानी पर हाथ फेरती रहीं। संगीता लगातार मेरी बेटी की बुर को चूस-चाट रही थी।
मैं चोद रहा था संगीता को लेकिन मस्ती की आवाज़ मेरी बेटी निकाल रही थी। अनडाउटेडली उसे बहुत मज़ा आ रहा था। खैर ऐसे ही हम चारों मस्ती ले रहे थे। क़रीब 40–45-मिनट की चुदाई के बाद संगीता झटके से अंजली के लेग्स को कंधों से हटाया और वो बेड पर फ्लैट हो गई।
संगीता: “सच कहती हूँ अंजली, शर्म छोड़, अपने बाप से चुदवा ले। लिख कर गारंटी देती हूँ कि तेरे बाप जैसा औरतों को कोई ख़ुश नहीं कर सकता। चुदवा ले बाप से।”
अंजली ने बाप को चोदने के लिए नहीं कहा लेकिन वो बोली,
अंजली: “पापा, आपकी रंडी संगीता ने बहुत मस्त कर दिया। मुझे आपकी कि क्या किसी और को लंड की ज़रूरत नहीं है। दीपा अब तू मेरी जवानी का मज़ा ले, पापा तेरी गाँड मारेंगे लेकिन संगीता भाभी के बुर के रस से आपका लौड़ा बहुत चिपचिपा हो गया है। दीपा को बढ़िया नहीं लगेगा, लंड दीजिए चूस कर चाट कर साफ़ कर देती हूँ।”
अंजली पहले ही सबके सामने लौड़ा चूस चुकी थी इसलिए अब बाप-बेटी में कोई शर्म नहीं थी। दीपा ने अंजली के लेग्स के बीच संगीता का जगह लिया। वो अंजली के झाँटों को फैलाकर मेरी बेटी, अपनी नई भाभी की बेटी के बुर का स्वाद लेने लगी।
मैं बेड पर आया और अंजली के हेड के बगल में अपने नी के सपोर्ट पर बैठा। अंजली खुद लंड को पकड़कर टंग से लौड़ा को हर तरफ से चाटा। मैं भी झुककर बेटी की एक चुची को सहलाते हुए दूसरी चुची को चूसने लगा।
अंजली ने लाउडली पूछा,
अंजली: “संगीता भाभी, ऐसे क्यों मुस्कुरा रही हो, बाप बेटी की चुची को चूस रहा है इसलिए?”
संगीता ने अंजली के लिप्स को किस कर कहा,
संगीता: “नहीं, तेरे लिए नहीं मुस्कुरा रही हूँ। 4 साल पहले का एक सीन याद आ गया और मुस्कुरा पड़ी।”
अंजली: “क्या हुआ था, कौन सा सीन?”
उसकी सास ने पूछा। अंजली बाप का लौड़ा चाटने-चूसने लगी। संगीता ने कहा,
संगीता: “क़रीब चार साल पहले एक रात मैं बेड पर सो रही थी। अचानक मुझे लगा कि मेरे माउथ में कुछ मोटा सा घुस गया है, किसी का हाथ मेरे बदन को दबा रहा है।”
“आँख खोली तो देखा कि मेरा बाप ऐसे ही जैसे तेरा बाप बैठा है, मेरे बगल में बैठा है। उसका लौड़ा मेरे माउथ के अंदर घुस रहा है और एक हाथ से मेरी एक चुची को मसल रहा है और दूसरी चुची को चूस रहा है।”
“और साथ ही मुझे दिखाई दिया कि मेरे पेट पर एक मोटा, थिक गोल्ड नेकलेस और साथ ही 100-100 के 5 बंडल हैं यानी पूरे 50000/- रुपया। मुझे लालच हो गया और क़रीब 2 घंटे तक बाप ने मुझे अपना लौड़ा चुसवाया, चुचियों को दबाया, चूसा और मेरे बॉडी पर अपना रस भी गिराया।”
“वो मुझे चोदना चाहता था, मैं नहीं मान रही थी। आख़िर उसने मुझे 5 लाख नगद का लालच दिया। मैंने कह दिया कि मैं बाप से चुदवाऊँगी लेकिन तभी जब उनसे पहले मुझे कोई दूसरा आदमी चोदेगा तब। मैंने कह दिया कि मैं बाप से अपनी वर्जिनिटी नहीं तुड़वाऊँगी।”
“उस समय तो बाप रूम से निकल गया। लेकिन अगले ही दिन टिफिन टाइम में वो मेरे कॉलेज आया और मेरे हाथों में एक मोटा लिफ़ाफ़ा/एन्वलप रखा। वो बोला कि मैं ठीक तीन बजे एक ख़ास होटल के एक ख़ास रूम में चली जाऊँ। बाप के जाने के बाद मैंने एन्वलप खोलकर देखा, उसमें 5 लाख थे।”
हम सब संगीता की बात सुन रहे थे और मेरी बेटी खूब प्यार से मेरा लौड़ा चूस रही थी। संगीता आगे बोली,
संगीता: “किसी ने मेरे ऊपर इतना खर्च किया है तो फिर मैं उसे धोखा क्यों दूँ। मैं ठीक समय पर होटल के रूम में पहुँच गई। देखा रूम में एक मोटा मारवाड़ी सेठ बैठा है। खैर जैसा भी हो मेरी सील उस सेठ ने लूटी। चुदाई उसने 2 बार की, 10–12-मिनट चोदा, उसने लौड़ा बहुत चुसवाया और फिर वो बाहर चला गया। मैं रूम में आराम कर ही रही थी बाबूजी भी रूम में आ गए और उन्होंने भी उसी होटल के रूम में 2 बार चोदा, लौड़ा चुसवाया। और पिछले महीने भी जब घर गई तो हर रात बाप ने चोदा। बाप से हर रात की चुदाई का दस हज़ार लेती हूँ।”
संगीता ने मेरे गालों को चूम कर कहा,
संगीता: “उस मारवाड़ी सेठ, बाबूजी और पुनीत के बाद विनोद अंकल का लंड मेरी बुर में 4 था लंड है। अब विनोद अंकल से चुदवाने के बाद किसी और मर्द से चुदवाने का कोई डिज़ायर नहीं है।”
मालूम नहीं सच था या झूठ 21-22 साल की लड़की ने बाप से अपनी चुदाई की कहानी सुनाने। मैं कुछ बोलता उससे पहले मेरा लौड़ा को पकड़ अंजली ने मुँह से बाहर निकाला।
वो बोली,
अंजली: “मेरे पापा मेरे साथ जो भी करना चाहें करूँगी। लेकिन अपनी बुर में उनका लौड़ा कभी नहीं लूँगी, किसी भी क़ीमत पर नहीं लूँगी। लीजिए पापा लौड़ा साफ़ हो गया, अब दीपा को चोदिए।”
मैं बेड से उतरा और दीपा को पीछे से चोदने लगा। रात और सुबह की चुदाई से दीपा बहुत टायर्ड हो गई थी या फिर बहुत ही ज़्यादा एक्साइटेड हो गई थी। मेरे धक्के को 20-मिनट भी नहीं सँभाल पाई। उसने भी मुझे संगीता जैसा झटका दिया और अलग हट गई।
इस बार फिर अंजली खुद उठकर बैठी और दोनों बॉल्स के साथ खेलते हुए इनर थाइज़ को सहलाते हुए पहले लौड़ा को चारों तरफ से चाटा। उसके बाद लौड़ा को अंदर लेते हुए खूब चुभला-चुभला कर चूसने लगी।
इधर हम मस्ती ले रहे थे और उधर आंटी बीच-बीच में किचन में जाकर खाना भी बनाती रहीं। अंजली ने उन्हें बता दिया था, उस दिन अनु कॉलेज के काम से बाहर गई है और देर रात ही वापस आएगी।
लौड़ा को साफ़ कर चूस कर अंजली फिर फ्लैट हो गई। पहले संगीता और उसके बाद 60 साल की औरत भी मेरी जवान बेटी की जवानी से खेलने लगी। मैंने बिना किसी ओरल के आंटी को क़रीब 10-मिनट चोदा और उसके बाद आंटी की गाँड मारने लगा।
गाँड मरवाते हुए भी आंटी ने अंजली की बुर को कुछ देर चूसा-चाटा। और उसके बाद अंजली को फिंगर्स से चोदते हुए बोली,
आंटी: “तुम लोगों ने संगीता की कहानी सुनी कि वो दूसरे से चुदवाने के बाद अपने बाप से चुदवाने लगी। अब मेरी कहानी सुनो।”
“मैं दीपा से भी 2-3 साल छोटी थी कि मेरी शादी हो गई। मैं यह देखकर बहुत ख़ुश थी कि मेरा घरवाला बहुत सुंदर है। ससुराल में चौथी रात। सुबह से ही सभी लेडीज़ मेरा मज़ाक बनाने लगीं कि रात में लौड़ा मेरी बुर में घुसेगा।”
“मुझे इतना तो मालूम था कि शादी के बाद लड़की अपने हसबैंड के साथ ही सोती है और उसके लौड़ा को बुर में लेती है। रात हुई और अपने दूल्हा से बातें करते हुए हम नंगे हो गए। मेरा दूल्हा मेरे ऊपर आ गया। मेरे कंधों को पकड़कर धक्का लगाने लगा।”
“उस बेवकूफ़ को यह भी मालूम नहीं पड़ा कि लौड़ा मेरी बुर में नहीं मेरी जाँघों के बीच घुस रहा है। वो बार-बार बोल रहा था कि उसे बहुत मज़ा आ रहा है लेकिन मुझे तो कुछ भी मज़ा नहीं आ रहा था। और धक्का लगाते-लगाते वो झड़ भी गया और थोड़ी देर में सो भी गया।”
“मैं घरवाला के बारे में कुछ सोच ही रही थी कि मेरा ससुर ना जाने कहाँ से आ गया। मैं नंगी ही थी, वो भी नंगा हुआ। उसका लौड़ा देख मैं डर गई। विनोद के लौड़ा जैसा लंबा नहीं लेकिन इतना ही मोटा था। और घरवाला के बदले ससुर ने मेरी बुर फाड़ दी।”
“आधे घंटे में उसने चुदाई खत्म की और बिना कुछ बोले बाहर चला गया। लेकिन तुरंत एक दूसरा आदमी अंदर घुसा। वो भी मेरे ससुर के ही एज का था। ना वो कुछ बोला और ना मैंने कुछ पूछा। वो आदमी भी ससुर जैसा फटाफट चोदकर बाहर चला गया।”
“और उसके बाद एक-एक कर 9 और आदमी अंदर घुसे। सभी मेरे ससुर के ही एज के थे। कोई आधा घंटा भी नहीं चोद पाया। मुझे समझ नहीं आया कि क्या करूँ क्या न करूँ। शायद ही किसी की ऐसी सुहागरात गुज़री हो। हसबैंड के बगल में रहते हुए एक नहीं 11 लोगों ने चोदा।”
“सच पूछो तो मुझे चुदाई बढ़िया लगने लगी। मैं अपनी बुर और चुचियों को सहला रही थी कि ससुर फिर कमरे में आए। दरवाज़े को अंदर से बंद किया, मुझे गहनों का एक नहीं 5 बॉक्स दिए और बहुत सा रुपया भी दिया।”
आगे क्या हुआ पढ़ें अगले पार्ट में।
