माँ बनी क्लाससमेट 7
Maa Bete ki desi chudai ki kahani:- पिकनिक के तीन दिनों का वो जुनूनी सफर अब खत्म हो चुका था। जंगल की वो ठंडी रातें, टेंट के अंदर का वो गुनाह, और राहुल के लंड की वो गरम रगड़… सब कुछ त्रुप्ति के ज़ेहन में एक गहरी यादों की तरह छप गया था। सब लोग वापस हॉस्टल लौट आए थे और आज कॉलेज का पहला दिन था।
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सुबह-सुबह त्रुप्ति अपने आईने के सामने खड़ी तैयार हो रही थी। आज उसने एक बेहद टाइट येलो ड्रेस पहनी थी जो उसके घुटनों से काफी ऊपर खत्म हो रही थी। वो ड्रेस उसके जिस्म पर किसी दूसरी खाल की तरह चिपकी हुई थी, जिसमें उसके 38 इंच के बूब्स और उसकी भारी-भारी गाँड कयामत ढा रहे थे। उसने हल्के से अपने बालों को खुला छोड़ा और होंठों पर वही रसीली रेड लिपस्टिक लगाई।
Maa Bete ki desi chudai ki hindi sex story
तभी कृति दबे पाँव कमरे में आई और त्रुप्ति का वो रूप देखकर वहीं ठिठक गई। उसने त्रुप्ति को ऊपर से नीचे तक देखा और उसके मुँह से एक सीटी निकल गई।
कृति: यार त्रुप्ति! तू तो दिन-ब-दिन और भी ज्यादा हॉट होती जा रही है। क्या बात है? जंगल की हवा ने कुछ ज्यादा ही असर दिखाया है क्या?
त्रुप्ति: (शर्माते हुए) धत्त… पागल! कुछ भी बोलती है। बस तैयार हो रही हूँ कॉलेज के लिए।
कृति: (त्रुप्ति के पास आकर उसके कुल्हों पर थप्पड़ मारते हुए) यार, सच बोल रही हूँ। अगर मैं तेरे जैसी होती ना, तो हर रोज़ एक नया गन्ना (लंड) चूसती और उसके रस का स्वाद लेती। तेरे पास तो खज़ाना है और तू है कि सिर्फ एक ही मर्द के पीछे पड़ी है।
त्रुप्ति: (शॉक होते हुए) कृति! तू पागल हो गई है क्या? कुछ भी बकती है… मैं ऐसी लड़की नहीं हूँ।
कृति: (हँसते हुए) अरे यार, कॉलेज के दिन ही तो होते हैं मजे करने के लिए। पूरे कॉलेज के लड़के तेरे पीछे पागल हैं, हर कोई तुझे अपनी बाहों में भरना चाहता है। अभय को देख, विक्की को देख… सब तेरे लिए तड़प रहे हैं। और तू है कि सिर्फ उस राहुल से चुद रही है। माना उसका गन्ना बड़ा है, पर कभी स्वाद बदलकर भी तो देख!
त्रुप्ति का दिल धक-धक करने लगा। उसे कृति की बातों में एक अजीब सी शरारत और थोड़ा सच महसूस हुआ। उसे याद आया कि कैसे जंगल में राहुल ने उसे रंडी कहा था और उसे वो सुनकर बुरा नहीं लगा था। आज कृति की बातें भी उसे थोड़ा-थोड़ा उत्तेजित कर रही थीं।
त्रुप्ति: (हँसी में उड़ाते हुए) तू वाकई पागल है कृति। मुझे राहुल काफी है, और वैसे भी वो मेरा… मेरा बॉयफ्रेंड है ना। दूसरों के बारे में सोचने की ज़रूरत नहीं है।
कृति: तू बहुत भोली है। एक मर्द से पेट नहीं भरता त्रुप्ति। देखना, एक दिन तू खुद कहेगी कि कृति सही कह रही थी। खैर, चल अब… कॉलेज के लिए देर हो रही है। आज तो तेरे इस येलो ड्रेस को देखकर कितने लड़कों के पैंट में टेंट बनने वाले हैं, उसका हिसाब मैं रखूँगी!
त्रुप्ति हँसी, पर अंदर ही अंदर वो सोच रही थी कि क्या सच में उसके जिस्म में इतनी आग है कि वो पूरे कॉलेज को जला सके। उसने अपने गाउन को थोड़ा और नीचे खींचा और कृति के साथ हॉस्टल से बाहर निकल गई, बेखबर कि आज पार्किंग में राहुल और उसके दोस्त उसका किस तरह इंतज़ार कर रहे हैं।
कॉलेज की पार्किंग में माहौल गरम हो चुका था। त्रुप्ति रेलिंग को पकड़कर खड़ी थी, उसकी पीठ राहुल की तरफ थी। वो अपनी दोस्तों से बातें कर रही थी, पर उसका जिस्म थोड़ा तना हुआ था। राहुल वहीं कुछ दूरी पर खड़ा होकर त्रुप्ति की गाँड को निहारने लगा। येलो फ्रॉक में त्रुप्ति के कुल्हे किसी चुंबक की तरह उसकी आँखों को खींच रहे थे।
राहुल के दिमाग में हवस का नशा चढ़ रहा था—
राहुल (मन में): ओह गॉड! क्या गाँड है साली की! दिल तो करता है अभी सबके सामने इसका फ्रॉक उठाऊँ और इसकी चिकनी दरार में अपना लंड डालकर इसे पूरे कॉलेज के सामने चोद दूँ। काश मम्मी मेरी पर्सनल रंडी बन जाए, तो सारी उम्र इसे इतनी बेरहमी से चोदूँगा कि ये 4-5 बच्चे और पैदा कर देगी।
उधर कृति की नज़र राहुल पर पड़ी और उसने त्रुप्ति को कोहनी मारी।
कृति: ओए त्रुप्ति! देख तेरा आशिक तुझ पर लाइन मार रहा है। बेटा, आज तो तू गई!
त्रुप्ति ने मुड़कर देखा तो सामने राहुल था। त्रुप्ति ने उसे एक सेक्सी स्माइल दी, पर उस स्माइल के पीछे एक गहरा दर्द छुपा था। वो जानती थी कि ये रास्ता गलत है, पर अब वो इस ‘एक्टिंग’ के दलदल में इतनी गहराई तक उतर चुकी थी कि पीछे हटने का हर रास्ता बंद लग रहा था। वो एक सेक्सी पोज़ में खड़ी हो गई, पर अंदर ही अंदर खुद को कोस रही थी।
राहुल ने इशारे से कहा— “तुम बहुत हॉट लग रही हो!” और एक फ्लाइंग किस दे दी। त्रुप्ति शर्म से लाल हो गई। फिर राहुल ने गंदा इशारा किया— “मुझे अपनी गोद में बैठाओ, मुझे तुम्हारे ये बड़े-बड़े बूब्स चूसने हैं।”
त्रुप्ति ने पहले इशारे में ‘नो’ कहा, पर राहुल ‘प्लीज़-प्लीज़’ करने लगा। त्रुप्ति का दिल पिघलने लगा। उसने सोचा कि अगर उसे दोस्तों के सामने ये अफेयर बरकरार रखना है, तो राहुल को खुश रखना ही होगा। उसने इशारा किया— “दो मिनट रुको।”
त्रुप्ति: यार कृति, मैं थोड़ा बोर हो रही हूँ। लाइब्रेरी जाकर कोई बुक पढ़ लेती हूँ।
कृति: (हँसते हुए) रहने दे त्रुप्ति! हमें पता है तू कहाँ जा रही है। तेरा आशिक कब से तड़प रहा है।
त्रुप्ति: (झूठी स्माइल के साथ) नहीं यार, ऐसा कुछ नहीं है।
कृति: हम अंधे नहीं हैं। जा, रूम नंबर 3 खाली है, वहाँ कोई नहीं आता। मजे कर!
त्रुप्ति शर्म से पानी-पानी हो गई। उसने सोचा, ‘हे भगवान, लोग मेरे बारे में क्या सोच रहे हैं। मैं एक माँ हूँ, पर आज एक रंडी की तरह अपने बेटे से मिलने कमरे में जा रही हूँ।’ उसका मन उदास था, पर जिस्म पर हवस का रंग चढ़ चुका था।
त्रुप्ति ने राहुल को पीछे आने का इशारा किया और अपनी गाँड मटकाते हुए रूम नंबर 3 की तरफ बढ़ गई। राहुल अपनी ज़ुबान होंठों पर फेरते हुए, शिकारी कुत्ते की तरह उसके पीछे चल पड़ा। त्रुप्ति को अब राहुल के साथ रोमांस में मज़ा आने लगा था। वो उसे अपना बेटा कम और अपना मर्द ज़्यादा मानने लगी थी।
त्रुप्ति की मटकती हुई गाँड को देखकर राहुल का लंड पैंट के अंदर लोहे जैसा सख्त हो गया था। वो जानता था कि आज इस कमरे में त्रुप्ति को घोड़ी बनना ही पड़ेगा। त्रुप्ति कमरे के दरवाज़े पर पहुँचकर एक बार पीछे मुड़ी, उसकी आँखों में डर और चाहत का मिलन था। उसने दरवाज़ा खोला और अंदर दाखिल हो गई, ये जानते हुए कि आज उसकी ममता की एक और दीवार टूटने वाली है।
राहुल ने जैसे ही रूम नंबर 3 का दरवाज़ा बंद किया, अंदर की खामोशी उनकी तेज़ साँसों से भर गई। त्रुप्ति वहाँ चेयर पर एक बेहद कामुक (प्रोवोकेटिव) अंदाज़ में बैठी हुई थी, उसके चेहरे पर एक ऐसी मुस्कान थी जो मर्द को पागल कर दे।
राहुल ने जब त्रुप्ति को इस रूप में देखा, तो उसने अपने होंठ दाँतों तले दबा लिए। उसका लंड पैंट के अंदर किसी लोहे की रॉड की तरह फटने को तैयार था। वो वहीं खड़ा होकर अपने लंड को मसलने लगा। उसके दिमाग में सिर्फ एक ही धुन थी— “साली क्या सेक्सी माल है, आज तो इसकी गाँड की धज्जियाँ उड़ा दूँगा।”
उधर त्रुप्ति, राहुल के पैंट में बने उस विशाल ‘टेंट’ को देख रही थी। उसके मन में एक भयानक युद्ध चल रहा था। एक तरफ उसकी ममता और वो गहरा गिल्ट था कि वो अपने ही बेटे के साथ ये सब कर रही है, पर दूसरी तरफ उसके जिस्म की भूख थी जो संजीव के साथ कभी पूरी नहीं हुई थी। उसने सोचा, ‘क्या मुझे ये सेक्स एन्जॉय करना चाहिए? राहुल का ये तगड़ा, मोटा लंड जब मेरी पुसी में जाएगा, तो शायद मैं वो सुख पा सकूँ जो आज तक सिर्फ सपनों में था। वो मुझे किसी कुतिया की तरह चोदेगा… और शायद मुझे वही चाहिए।’
राहुल अब और इंतज़ार नहीं कर सकता था। वो त्रुप्ति के पास गया और उसकी कमर में हाथ डालकर उसे उठाया। अगले ही पल, उसने त्रुप्ति को अपने खड़े लंड पर बिठा दिया।
त्रुप्ति: इस्स… आआह्ह्ह…
त्रुप्ति के मुँह से सिसकारी निकल गई। येलो फ्रॉक के पतले कपड़े के नीचे से उसे राहुल के लंड की सख्ती अपनी गाँड की दरार में महसूस हो रही थी।
राहुल पागल हो चुका था। उसने त्रुप्ति के बूब्स को मुट्ठियों में भरा और उन्हें बेरहमी से मसलने लगा। वो त्रुप्ति के नंगे कंधों और गर्दन को अपनी ज़ुबान से चाटने लगा, उसका थूक त्रुप्ति की त्वचा को भिगो रहा था।
राहुल: (घूरते हुए) आई लव यू त्रुप्ति डार्लिंग! तेरे इस बदन के लिए मैं पागल हो गया हूँ… आज तुझे निचोड़ दूँगा।
त्रुप्ति पर भी अब हवस का भूत सवार था, पर डर अभी बाकी था। वो राहुल की गोद से उठी और रूम के बीच में जाकर एक ऐसे सेक्सी पोज़ में खड़ी हुई कि उसकी गाँड हवा में लहरा रही थी। उसकी कातिलाना नज़रें राहुल को दावत दे रही थीं— ‘आओ और मिटा दो मुझे।’
राहुल ने लपककर त्रुप्ति को पीछे से जकड़ लिया। उसने अपना लंड ड्रेस के ऊपर से ही त्रुप्ति की गाँड की दरार में सेट किया और बैक-स्ट्रोक्स लगाने लगा और रब करने लगा। त्रुप्ति की सिसकारियाँ अब तेज़ हो रही थीं।
त्रुप्ति: (हाँफते हुए) राहुल… तुम्हें वादा याद है ना? मैं तुम्हें शांत कर दूँगी… पर जो भी करना लिमिट में करना… पुसी मत छूना… इस्स… आआह्ह्ह!
राहुल: त्रुप्ति, तुझे तो मैं अपने लंड की रानी बनाऊँगा! तुझे उछाल-उछाल के चोदूँगा!
राहुल वहीं घुटनों के बल बैठ गया। उसने त्रुप्ति का फ्रॉक ऊपर किया। उसने त्रुप्ति के नंगे, गोरे बट्स पर हाथ फेरा और उन्हें चूमने-चाटने लगा। फिर उसने अपना मुँह त्रुप्ति की गाँड की दरार में घुसा दिया और पैंटी के ऊपर से ही उसकी गाँड को ‘खाना’ शुरू किया। त्रुप्ति ने मदहोशी में अपनी आँखें बंद कर लीं, उसका पूरा शरीर करंट की तरह काँप रहा था।
तभी, बाहर कॉरिडोर में किसीके कदमों की आहट हुई। दोनों एक झटके में अलग हो गए। दरवाज़ा खुला और शीतल अंदर आई।
शीतल: त्रुप्ति! कहाँ रह गई? चल, दीपक सर हमें लेक्चर हॉल में बुला रहे हैं।
त्रुप्ति: (अपने बिखरे बाल सँभालते हुए) रुक… आ रही हूँ।
त्रुप्ति ने राहुल की तरफ एक ‘नॉटी स्माइल’ फेंकी और अपनी गाँड मटकाते हुए शीतल के साथ निकल गई। राहुल वहाँ खड़ा का खड़ा रह गया। उसे ऐसा लगा जैसे शीतल ने उसके खड़े लंड पर तलवार चला दी हो। थोड़ी देर पहले जो माहौल बना था, उससे लग रहा था कि आज त्रुप्ति पक्का चुद जाएगी।
त्रुप्ति जब बाहर जा रही थी, उसके मन में उदासी भी थी और एक अजीब सा सुकून भी। वो जानती थी कि उसने आज फिर पाप की दहलीज़ छुए बिना हवस का लुत्फ उठाया है। राहुल भी गुस्से और तनाव में वहाँ से बाहर निकल गया, अपने लंड को पैंट के ऊपर से मसलते हुए।
रूम नंबर 3 के बाहर का सन्नाटा अब ज़हर उगलने वाला था। शीतल और त्रुप्ति वहाँ से निकलकर कॉरिडोर में आगे बढ़ चुकी थीं, जबकि राहुल थोड़ी देर बाद कमरे से बाहर निकला। उसके चेहरे पर थोड़ी देर पहले की मदहोशी और मौजूदा गुस्से का मिश्रण था। लेकिन उसे खबर नहीं थी कि दो जोड़ी आँखें उसे और त्रुप्ति को एक साथ उस कमरे से निकलते हुए देख चुकी हैं।
विक्की और अभय, जो पिछले कुछ देर से पार्किंग के पास ही घूम रहे थे, अचानक एक-दूसरे के सामने आ गए थे। उन्होंने देखा कि कैसे त्रुप्ति अपने कपड़े दुरुस्त करते हुए और बाल सँभालते हुए निकली, और उसके पीछे-पीछे राहुल अपना लंड मसलते हुए बाहर आया।
विक्की: (एक गंदी हँसी के साथ) साला! देख रहे हो अभय? राहुल के तो मजे ही मजे हैं यार। रोज़ इस गरमा-गरम माल को किसी न किसी कमरे में ले जाकर चोदता रहता है। इसकी किस्मत तो देखो, ऐसी रसीली औरत इसके लंड पर सवार है।
अभय ने जब विक्की की बातें सुनीं, तो उसका खून खौल उठा। अभय के लिए त्रुप्ति सिर्फ एक जिस्म नहीं थी, उसके लिए वो उसकी सच्चाई और जुनून थी। उसे ये बर्दाश्त नहीं हो रहा था कि राहुल उसकी ‘क्वीन’ को एक रंडी की तरह कमरों में इस्तेमाल कर रहा है।
अभय: (दाँत पीसते हुए) चुप कर विक्की! वो कोई ‘माल’ नहीं है। वो मेरी है, और राहुल जैसा लड़का उसके लायक नहीं है।
विक्की: (चिढ़ाते हुए) अरे वाह! आशिक-ए-आज़म… तो फिर कर ना कुछ! कब तक दूर से देखकर मुठ मारता रहेगा? हिम्मत है तो छीन ले उसे राहुल से।
अभय ने विक्की की आँखों में देखा। जलन और गुस्से ने उसके दिमाग को सुन्न कर दिया था। उसने एक खौफनाक फैसला किया।
अभय: ठीक है विक्की! एक चैलेंज लगाते हैं। देखते हैं कि हम दोनों में से कौन त्रुप्ति का राहुल से ब्रेकअप करवाके उसे अपनी बाहों में लाता है। जो भी त्रुप्ति को पहले पटायेगा और उसे अपने बिस्तर तक ले जाएगा, वो जीतेगा।
विक्की: (शैतानी चमक के साथ) और हारने वाले का क्या होगा?
अभय: (एक कड़वी मुस्कान के साथ) जो हारेगा, वो पूरे कॉलेज के सामने ‘नंगी दौड़’ (नेकेड रन) लगाएगा। सबके सामने उसकी इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी। मंज़ूर है?
विक्की: मंज़ूर है! अब मज़ा आएगा। त्रुप्ति की पुसी के लिए इतनी बड़ी कुर्बानी तो बनती है।
दोनों ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया, एक ऐसी शर्त पर जो उनमें से किसी एक की ज़िंदगी तबाह करने वाली थी। राहुल इस खतरे से बिल्कुल बेखबर था। वो समझ रहा था कि त्रुप्ति सिर्फ उसकी है, पर उसे नहीं पता था कि अब दो भूखे भेड़िए उसकी ‘माँ’ का शिकार करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
उधर त्रुप्ति, जो शीतल के साथ लेक्चर हॉल की तरफ जा रही थी, उसे अचानक एक ठंडक सी महसूस हुई। उसे ऐसा लगा जैसे कोई उसे बहुत बुरी नज़र से घूर रहा हो। वो नहीं जानती थी कि उसकी एक ‘नॉटी स्माइल’ ने उसके लिए कितनी बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है।
लेक्चर हॉल में माहौल बिल्कुल शांत था, पर तीन दिमागों में तूफान उठा हुआ था। पहली रो में त्रुप्ति अपनी सहेली कृति के साथ बैठी थी। येलो ड्रेस में त्रुप्ति पीछे से किसी अप्सरा की तरह लग रही थी, उसकी नंगी गोरी गर्दन और बिखरे बाल पीछे बैठे लड़कों को पागल कर रहे थे।
राहुल और विक्की हमेशा की तरह सबसे पीछे वाली बेंच पर बैठे थे, जबकि अभय एक दूसरे कोने में बैठा त्रुप्ति को एक-टक घूर रहा था। राहुल अभी भी रूम नंबर 3 के अधूरे मजे के बारे में सोच रहा था, तभी विक्की उसके कान के पास झुका।
विक्की: (धीरे से) ओए राहुल, सुन… मैंने और अभय ने एक शर्त लगाई है। चैलेंज ये है कि हम दोनों में से जो त्रुप्ति को पहले पटायेगा और तेरे साथ उसका ब्रेकअप करवाएगा, वो जीतेगा। और हारने वाला पूरे कॉलेज में नंगा दौड़ेगा।
राहुल का चेहरा गुस्से से तमतामा उठा। उसने विक्की का कॉलर पकड़ने की कोशिश की।
राहुल: साले! तेरी हिम्मत कैसे हुई? वो मेरी बंदी है, कोई खेलने की चीज़ नहीं!
विक्की ने ठंडी हँसी हँसते हुए राहुल का हाथ झटक दिया। उसके चेहरे पर वो पुरानी दोस्ती वाला हक था जो अब ज़हर बन चुका था।
विक्की: अरे गुस्सा क्यों होता है? तू भूल गया कॉलेज और कॉलेज की शुरुआत में हमने कितनी लड़कियों को आपस में शेयर किया है? कितनी बार मैंने तेरे लिए रास्ता साफ किया और तूने मेरे लिए? आज बड़ा ‘लॉयल’ बन रहा है… क्या इस येलो माल में कोई खास बात है जो तू भाई को भूल गया?
राहुल सुन्न हो गया। विक्की सही कह रहा था। उनकी दोस्ती ऐसी ही ‘शेयरिंग’ पर टिकी थी। पर त्रुप्ति… वो सिर्फ एक लड़की नहीं थी। वो उसकी माँ थी। लेकिन ये बात वो विक्की को कभी नहीं बता सकता था। अगर उसने ज़्यादा विरोध किया, तो विक्की को शक हो जाएगा और वो गहराई तक जाएगा।
राहुल: (घबराहट में) पर विक्की… वो दूसरों जैसी नहीं है। वो मुझसे बहुत प्यार करती है।
विक्की: (एक शैतानी स्माइल के साथ) वही तो देखना है! अगर वो तेरे लिए सच में लॉयल होगी, तो मेरे पास नहीं आएगी। तू डर क्यों रहा है? लेकिन सुन… तुझे मेरी मदद करनी पड़ेगी। तुझे बीच-बीच में रास्ता साफ करना होगा ताकि मैं उसे कॉर्नर कर सकूँ।
राहुल का दम घुट रहा था। उसने त्रुप्ति को अपनी “पर्सनल रंडी” बनाने का सपना देखा था, पर अब उसके सामने एक खौफनाक कुआँ था और पीछे खाई।
विक्की: देख राहुल, या तो तू मेरा भाई बनकर मेरी मदद कर, या फिर मैं समझूँगा कि तू हमसे कुछ छुपा रहा है। और तुझे पता है, जब मुझे शक होता है तो मैं पीछा नहीं छोड़ता।
राहुल का शरीर ठंडा पड़ गया। उसने त्रुप्ति की तरफ देखा— वो कितनी मासूमियत से कृति से बातें कर रही थी, बेखबर कि उसके ही बेटे ने उसे भेड़ियों के सामने फेंकने का फैसला कर लिया है।
राहुल: (टूटी हुई आवाज़ में) ठीक है… मैं तेरा साथ दूँगा। पर देख लेना विक्की, वो तेरे हाथ नहीं आएगी।
विक्की: वो तो वक्त बताएगा मेरे भाई! आज रात से ही खेल शुरू होगा।
राहुल का दिल गिल्ट और डर से भर गया। उसे बुरा लग रहा था कि वो अपनी माँ को अपने गंदे दोस्त के हवाले करने जा रहा है, पर ‘असलियत’ छुपाने की कीमत इतनी बड़ी होगी, उसने कभी नहीं सोचा था। उधर त्रुप्ति ने मुड़कर राहुल को देखा और एक प्यारी सी स्माइल दी, पर राहुल ने अपनी नज़रें झुका लीं। उसने आज एक ऐसा सौदा किया था जिसका अंजाम सिर्फ तबाही था।
लेक्चर खत्म होते ही क्लास में शोर मच गया। त्रुप्ति ने अपना बैग उठाया और कृति के साथ बातें करती हुई बाहर निकलने लगी। राहुल वहीं पीछे बैठा रहा, उसकी नज़रें अपनी माँ की मटकती हुई गाँड पर थीं, पर उसके दिमाग में विक्की की दी हुई धमकी गूँज रही थी।
अभय ने देखा कि ये सही मौका है। जैसे ही त्रुप्ति थोड़ा आगे निकल गई, अभय ने लपककर कृति का रास्ता रोका।
अभय: (धीमी और मिन्नत भरी आवाज़ में) कृति, एक मिनट… मुझे तुमसे बहुत ज़रूरी बात करनी है।
कृति ने हैरानी से अभय को देखा। वो जानती थी कि अभय त्रुप्ति के लिए पागल है, पर उसे अभय का तरीका पसंद नहीं था।
कृति: (तनाव में) अभय, अब क्या है? देखो, त्रुप्ति पहले ही बहुत परेशान है। तुमने पहले ही उसे बहुत दुख पहुँचाया है।
अभय: कृति, प्लीज़ मेरी बात सुनो…
कृति: (गुस्से में) क्या सुनूँ? त्रुप्ति ने मुझे सब बताया है। पिकनिक पर तुमने उसके साथ जबर्दस्ती की, उसे कॉर्नर करके किस किया… वो तुमसे डर गई है अभय। अब उसका तुम्हारे पास आना या तुम्हारा उसे पटाना लगभग नामुमकिन है।
अभय का चेहरा उतर गया। उसे अपनी गलती का एहसास था, पर उसकी हवस और जुनून उससे बड़े थे। वो कृति के सामने लगभग गिड़गिड़ाने लगा।
अभय: कृति, मैं जानता हूँ मैंने गलत किया। पर मैं उससे सच्चा प्यार करता हूँ। राहुल उसे सिर्फ इस्तेमाल कर रहा है, वो उसे वो इज्जत नहीं देगा जो मैं दूँगा। प्लीज़, मेरी मदद करो। बस एक मौका दिलवा दो कि मैं उससे माफी माँग सकूँ और अपना दिल बयान कर सकूँ।
कृति थोड़ी देर सोच में पड़ गई। वो जानती थी कि त्रुप्ति के दिमाग में राहुल के लिए ‘लस्ट’ जाग चुका है, पर उसे ये भी लगता था कि राहुल एक ‘बिगड़ा हुआ लड़का’ है। अगर अभय जैसा मस्कुलर और पावरफुल मर्द त्रुप्ति को मिल जाए, तो शायद वो ज़्यादा खुश रहेगी।
कृति: (गहरी साँस लेते हुए) ठीक है अभय… मैं तुम्हारी मदद कर दूँगी। पर याद रखना, अगर इस बार तुमने कोई बदतमीज़ी की, तो मैं खुद तुम्हें कॉलेज से निकलवा दूँगी।
अभय: (खुशी से) वादा रहा कृति! बस तुम उसे आज शाम को हॉस्टल के पीछे वाले गार्डन में ले आना। मैं वहाँ उसका इंतज़ार करूँगा।
कृति: ठीक है… मैं कोशिश करूँगी। पर ये बहुत मुश्किल होने वाला है।
कृति वहाँ से निकल गई, पर उसके दिमाग में एक खिचड़ी पक रही थी। वो त्रुप्ति की ‘सहेली’ थी, पर वो त्रुप्ति की जिस्म की आग को भी जानती थी। उसने सोचा, ‘अगर त्रुप्ति और अभय मिल गए, तो मज़ा दुगना हो जाएगा।’
उधर, अभय ने दूर से राहुल को देखा और एक शैतानी मुस्कान दी। उसे नहीं पता था कि विक्की ने पहले ही राहुल को अपने साथ मिला लिया है। अब त्रुप्ति एक ऐसे भँवर में फँसने वाली थी जहाँ एक तरफ उसका बेटा था, दूसरी तरफ उसका दीवाना आशिक अभय, और तीसरी तरफ हवस का भूखा विक्की।
कॉलेज का लेक्चर खत्म होने के बाद, राहुल और विक्की कॉलेज के गार्डन के सबसे कोने वाली बेंच पर बैठे थे। विक्की बड़े आराम से सिगरेट के धुएँ के छल्ले बना रहा था, जबकि राहुल के चेहरे पर पसीना था और पैर लगातार हिल रहा था। विक्की ने अभय के साथ जो शर्त लगाई थी, उसने राहुल की रातों की नींद उड़ा दी थी।
विक्की: (सिगरेट का कश लेते हुए) क्यों बे राहुल? तेरा चेहरा क्यों उतरा हुआ है? ऐसा लग रहा है जैसे तेरी किडनी माँग ली हो मैंने।
राहुल: (चिड़चिड़ाते हुए) मज़ाक मत कर विक्की। तूने अभय से शर्त लगा ली है त्रुप्ति को पटाने की। तुझे पता है ना वो मेरी बंदी है? तू कैसे सोच सकता है कि मैं अपनी बंदी… अपनी GF तुझे दे दूँगा?
विक्की ने सिगरेट ज़मीन पर फेंककर उसे पैर से मसल दिया और राहुल के कंधे पर हाथ रखा। उसकी पकड़ में दोस्ती कम और धमकी ज़्यादा थी।
विक्की: सुन मेरे भाई… बंदी है, कोई पत्थर की लकीर नहीं। और तुझे पता है मैंने शीतल को सेट कर रखा है? वो मेरी ‘खबरी’ बन चुकी है अब। उसने बताया है कि आज रात कृति, शीतल और त्रुप्ति तीनों ‘पाइप्स पब’ में पार्टी करने जा रही हैं।
राहुल: तो? उससे क्या होगा?
विक्की: (एक शैतानी मुस्कान के साथ) प्लान सिंपल है मेरी जान। मैंने शीतल को बोल दिया है। वो मौका देखते ही त्रुप्ति की ड्रिंक में ‘ब्लू पिल’ (वियाग्रा/सेक्स ड्रग) मिला देगी। एक बार वो गोली अंदर गई, तो त्रुप्ति सेक्स की आग में जलने लगेगी। उस वक्त उसे बस एक चीज़ चाहिए होगी— एक तगड़ा लंड।
राहुल का दिल ज़ोर से धड़कने लगा। एक तरफ उसे ये सुनकर गुस्सा आ रहा था कि उसकी माँ को कोई ड्रग देने वाला है, पर दूसरी तरफ ‘सेक्स की आग में जलने वाली त्रुप्ति’ का खयाल उसे अंदर से उत्तेजित भी कर रहा था।
राहुल: तो मैं वहाँ हूँगा ना… मैं सँभाल लूँगा उसे।
विक्की: (ज़ोर से हँसते हुए) अबे घुंघू! तू नहीं… मैं! मैं उसे सँभालूँगा। प्लान ये है कि जब वो नशे में धुत होगी, तो तू उसे लेकर मेरे फार्महाउस पर आएगा। लेकिन वहाँ कमरे में तू नहीं जाएगा… वहाँ मैं जाऊँगा।
राहुल अपनी जगह से खड़ा हो गया।
राहुल: क्या? पागल है क्या विक्की? ये नहीं हो सकता! वो मेरी है… मैं किसी और को उसे छूने नहीं दूँगा।
विक्की का चेहरा सख्त हो गया। वो भी खड़ा हुआ और राहुल की आँखों में आँखें डालकर बोला।
विक्की: आवाज़ नीचे राहुल! तू भूल रहा है कि हम कौन हैं। मेरे पापा पॉलिटिशियन हैं, और तुझे पता है अगर मैं अपनी पर आ गया तो क्या कर सकता हूँ। और सबसे बड़ी बात… क्या तू चाहता है कि मैं उस अभय के सामने हार जाऊँ? क्या तू चाहता है कि तेरा ये जिगरी यार पूरे कॉलेज के सामने नंगा दौड़े? मेरी इज्जत का सवाल है बे!
राहुल: (धीरे पड़ते हुए) पर विक्की… यार वो मुझसे प्यार करती है। ये धोखा होगा।
विक्की: प्यार-व्यार सब बकवास है। सुन, मेरा प्लान परफेक्ट है। मैं उसे फार्महाउस पे ले जाके तोड़ूँगा। उस हालत में जब मैं उसकी फोटोज़ और वीडियोज़ बनाऊँगा, तो वो डर जाएगी। फिर मैं उसे ब्लैकमेल करके बोलूँगा कि राहुल से ब्रेकअप कर ले और मेरी GF बन जा। इससे मैं शर्त जीत जाऊँगा।
राहुल का दिमाग सुन्न हो गया था। उसकी माँ का सौदा उसका दोस्त कर रहा था, और वो मजबूर था।
राहुल: और उसके बाद? जब शर्त जीत जाएगा तू?
विक्की ने वापस राहुल के कंधे पर हाथ रखा और एक गंदी हँसी हँसी।
विक्की: अरे मेरे भाई, टेंशन क्यों लेता है? एक बार शर्त जीत गया, फिर मैं कहाँ उसे शादी करके घर ले जा रहा हूँ? वो रहेगी तो हमारे ग्रुप में ही ना।
विक्की ने राहुल के कान के पास मुँह ले जाकर वो बात कही जिसने राहुल की रही-सही हिम्मत भी तोड़ दी।
विक्की: देख राहुल… त्रुप्ति को मैं गर्लफ्रेंड बनाऊँगा दुनिया को दिखाने के लिए। पर असलियत में… GF किसकी भी हो, क्या फर्क पड़ेगा? रंडी तो दोनों की रहेगी ना… दोनों भाई मिल-बाँट के मिठाई खाएँगे। तू भी चोदना, मैं भी चोदूँगा। शेयरिंग इज़ केयरिंग, याद है ना?
राहुल के अंदर गिल्ट का तूफान था। वो अपनी माँ को भेड़ियों के आगे फेंक रहा था। पर विक्की की दोस्ती, उसके बाप का पॉलिटिकल पावर, और अभय से हारने का डर… सबने मिलकर राहुल को कायर बना दिया था। और कहीं न कहीं, उसके अंदर छुपा वो ‘थरकी बेटा’ भी देखना चाहता था कि जब उसकी माँ नशे में होगी और कोई और मर्द उसे चोदेगा, तो वो नज़ारा कैसा होगा।
राहुल: (नगाहें झुकाकर) ठीक है विक्की… पर ध्यान रखना, उसे ज़्यादा चोट नहीं लगनी चाहिए।
विक्की: तू बस उसे फार्महाउस ले आना… बाकी आगे की ‘सेवा’ मैं करूँगा।
राहुल वहाँ से निकल गया, एक भारी मन और गंदे खयालों के साथ। आज रात त्रुप्ति के लिए कयामत की रात होने वाली थी, और उसका अपना बेटा ही उसे उस कयामत तक ले जाने वाला था।
हॉस्टल के कमरे में आज एक अलग ही रौनक थी। विक्की और राहुल के बीच हुई सौदे-बाज़ी से बेखबर, त्रुप्ति और कृति ‘पाइप्स पब’ जाने के लिए तैयार हो रही थीं। कृति पहले ही रेडी हो चुकी थी, लेकिन जब त्रुप्ति बाथरूम से बाहर निकली, तो कमरे का तापमान अचानक बढ़ गया।
त्रुप्ति ने आज एक बेहद बोल्ड और सेक्सी ब्लैक शोल्डर-लेस गाउन पहना हुआ था। वो गाउन उसके जिस्म पर किसी दूसरी खाल की तरह चिपका हुआ था, जिसमें उसके 38-28-38 का फिगर साफ उभरकर आ रहा था। गाउन की लंबाई सिर्फ उसके घुटनों तक थी, जिसके नीचे उसके नंगे, गोरे और चिकने पैर (लेग्स) किसी संगमरमर की मूर्ति की तरह चमक रहे थे। उसने अपने पैरों में काले रंग की पेंसिल हील्स पहनी थीं, जो उसकी हाइट और उसकी चाल में एक अलग ही लचक ला रही थीं।
उसके गोरे चेहरे पर हल्का मेकअप था, पर आँखों में गहरा काजल और होंठों पर ग्लॉसी पिंक लिपस्टिक किसी को भी घायल करने के लिए काफी थी। कानों में लंबे झुमके लटक रहे थे जो उसकी नंगी गर्दन को छू रहे थे। खुले बाल उसके नंगे कंधों पर बिखरकर उसकी खूबसूरती में चार चाँद लगा रहे थे। उंगलियों में लगी रेड नेल पॉलिश उसके गोरे हाथों पर खून की तरह लाल चमक रही थी।
कृति: (आँखें फाड़े देखते हुए) वाओ त्रुप्ति! तू आज सच में बिजली गिराने वाली है। तू जो भी पहन ले, लाजवाब लगती है। तभी तो कॉलेज के लड़के क्या, प्रोफेसर्स भी तेरे दीवाने हैं। आज तो पब में आग लग जाएगी!
त्रुप्ति शर्म से मुस्कुरा दी, पर अंदर ही अंदर उसे अपने इस रूप पर नाज़ भी था।
त्रुप्ति: तू भी ना कृति… बस कर अब, ज़्यादा मत चढ़ा।
कृति: रुक, एक पिक तो बनती है। इस लुक को कैप्चर नहीं किया तो पाप लगेगा।
त्रुप्ति कृति के कहने पर दीवार के पास गई। उसने एक पैर को थोड़ा आगे किया जिससे उसका गाउन थोड़ा ऊपर उठ गया और उसकी नंगी जाँघ (थाई) की झलक दिखने लगी। उसने गर्दन को थोड़ा तिरछा किया और एक बेहद सेक्सी पोज़ दिया।
कृति ने फटाफट अपने मोबाइल में त्रुप्ति की तस्वीरें खींच लीं।
त्रुप्ति: अब चलें? देर हो रही है।
कृति: हाँ चलो, आज तो रात रंगीन होने वाली है।
दोनों हॉस्टल से नीचे उतरीं और पार्किंग की तरफ बढ़ीं। त्रुप्ति जब अपनी हाई हील्स पर चल रही थी, तो उसकी गाँड गाउन के अंदर मस्त थिरक रही थी। हर कदम पर उसके नितंब (बट्स) ऊपर-नीचे हो रहे थे, जिसे देखकर वहाँ खड़ा वॉचमैन भी अपना डंडा पकड़कर रह गया।
त्रुप्ति ने कार निकाली और ड्राइविंग सीट पर बैठ गई। कृति उसके बगल में बैठी। रात के 9 बज रहे थे, सड़क पर सन्नाटा और ठंडक थी, पर कार के अंदर त्रुप्ति की परफ्यूम की खुशबू महक रही थी।
नकाबंदी और हवस भरी नज़रें
शहर के बाहर जाने वाले रास्ते पर सिक्योरिटी ऑफिसर की नकाबंदी चल रही थी। वहाँ इंस्पेक्टर विजय (उम्र करीब 28 साल, फिट और हैंडसम पर आँखों में शैतानी) और कांस्टेबल रवि बोस्ले (उम्र 50-55 साल, पेट निकला हुआ और थरकी बूढ़ा) ड्यूटी पर थे। वो आती-जाती गाड़ियों को रोककर चेकिंग कर रहे थे।
त्रुप्ति की कार जैसे ही नके के पास आई, कांस्टेबल बोस्ले ने हाथ दिखाकर कार रोकने का इशारा किया। त्रुप्ति ने कार साइड में लगाई और शीशा नीचे किया।
रवि बोस्ले कार के पास आया और झुककर अंदर देखा। जैसे ही उसकी नज़र ड्राइविंग सीट पर बैठी त्रुप्ति पर पड़ी, उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। त्रुप्ति के शोल्डर-लेस गाउन की वजह से उसके नंगे कंधे और बूब्स की घाटी (क्लीवेज) साफ दिख रही थी।
बोस्ले: (लार टपकाते हुए) कहाँ जा रही हो मैडम इतनी रात को?
त्रुप्ति: (कॉन्फिडेंट आवाज़ में) हम पब जा रहे हैं, फ्रेंड्स की पार्टी है।
बोस्ले की नज़रें त्रुप्ति के चेहरे से हटकर सीधा उसके बूब्स पर अटक गई थीं। वो बेशर्मी से उन्हें घूर रहा था, और त्रुप्ति को ये महसूस हो रहा था।
बोस्ले: मैडम, लाइसेंस दिखाओ।
त्रुप्ति ने अपने बैग से लाइसेंस निकाला और बोस्ले के हाथ में दिया। बोस्ले ने लाइसेंस देखा, पर उसका ध्यान लाइसेंस पर कम और त्रुप्ति के नंगे, गोरे हाथों पर ज़्यादा था।
बोस्ले: रुको… मैं साहब को दिखाके आता हूँ।
बोस्ले लाइसेंस लेकर इंस्पेक्टर विजय के पास गया जो जीप के पास खड़ा सिगरेट पी रहा था।
बोस्ले: (धीरे से) साहब… कार में जो माल है वो काफी धसू है। एकदम कड़क आइटम है, आज तक ऐसी औरत नहीं देखी इस रोड पे।
विजय: (सिगरेट फेंकते हुए) क्या बोल रहा है बोस्ले? ऐसा क्या देख लिया तूने? रुक, मुझे भी एक नज़र मारने दे।
विजय अपनी यूनिफॉर्म ठीक करते हुए कार की तरफ बढ़ा। जैसे ही वो खिड़की के पास आया, त्रुप्ति ने ऊपर देखा। विजय की नज़र त्रुप्ति के रसीले होंठों, भरे हुए बूब्स और नंगे पैरों पर पड़ी तो वो भी दंग रह गया। उसने मन में सोचा, ‘यार, ये तो कोई हीरोइन लगती है।’
विजय: (थोड़ा सख्त बनने का नाटक करते हुए) मैडम, आपने ड्रिंक कर रखी है क्या? गाड़ी चला रही हैं, चेकिंग करनी पड़ेगी।
त्रुप्ति: जी नहीं इंस्पेक्टर साहब, मैं ड्रिंक नहीं करती। हम बस जा ही रहे हैं।
विजय: (नज़रें त्रुप्ति के क्लीवेज पर गड़ाते हुए) ऐसे कैसे मान लें? मशीन तो खराब है… आपको फूँक (ब्लो) मारनी पड़ेगी, मुझे स्मेल चेक करनी है।
त्रुप्ति समझ गई कि ये इंस्पेक्टर सिर्फ बहाना बना रहा है ताकि वो उसके करीब आ सके। पर वो सिक्योरिटी ऑफिसर से पंगा नहीं लेना चाहती थी।
त्रुप्ति: ठीक है।
विजय खिड़की के और करीब आया और अपना चेहरा त्रुप्ति के चेहरे के पास ले गया। त्रुप्ति ने हल्के से अपने रसीले होंठों को गोल किया और विजय के चेहरे पर फूँक मारी। त्रुप्ति की साँसों की गरम और मीठी खुशबू विजय के चेहरे से टकराई तो उसका नशा और बढ़ गया। वो कुछ सेकंड तक त्रुप्ति की आँखों और होंठों को देखता रहा।
त्रुप्ति: हो गया ना चेक? अब हम जा सकते हैं?
विजय: (होश में आते हुए) हाँ… हाँ… स्मेल तो नहीं है। जा सकती हैं आप। पर ध्यान रखना, रात का वक्त है और रास्ता सुनसान है।
त्रुप्ति ने तुरंत शीशा ऊपर किया, कार स्टार्ट की और तेज़ी से वहाँ से निकल गई।
विजय और बोस्ले वहीं खड़े उस कार की रेड टेल-लाइट्स को देखते रहे।
विजय: बोस्ले जी… कसम से, क्या कड़क माल था! इसके होंठ देखकर तो मेरा ईमान डोल गया।
बोस्ले: हाँ साहब, मस्त माल था। ऐसी औरत के साथ एक रात मिल जाए तो आदमी स्वर्ग पहुँच जाए।
विजय: (एक शैतानी मुस्कान के साथ) बोस्ले जी, आज शिफ्ट खत्म होने के बाद भी घर नहीं जाएँगे। आज सारी रात यहीं ड्यूटी करेंगे।
बोस्ले: क्यों साहब?
विजय: क्योंकि वो पब गई है… वापस तो यहीं से लौटेगी ना? और जब वापस आएगी, तो पक्का ड्रिंक करके आएगी। तब हम इसे ‘ड्रंक एंड ड्राइव’ में पकड़ेंगे… और फिर इस माल के साथ ‘फाइन’ की जगह कुछ और वसूल करेंगे।
बोस्ले: (खुश होते हुए) बिल्कुल साहब! आज पूरी रात ड्यूटी करेंगे और इस हसीन चिड़िया के वापस लौटने का इंतज़ार करेंगे।
विजय और बोस्ले ने एक-दूसरे को देखा और हँसने लगे, फिर बाकी गाड़ियों को चेक करने में लग गए। त्रुप्ति को खबर भी नहीं थी कि आगे राहुल और विक्की का जाल है, और पीछे सिक्योरिटी ऑफिसर की ये गंदी साज़िश उसका इंतज़ार कर रही है।

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