लॉकडाउन और तबस्सुम 4

Muslim housewife ki naukar se chudai ki kahani:- शाम 7 बजे के करीब तब्बसुम ने खाना बनाने की तैयारी शुरू कर दी। आटा गूँधा जो एक्स्ट्रा था, सब्ज़ी भी बनाकर गैस पर चढ़ा दी। बच्चा हमेशा की तरह पालने में खेलकर सो गया था। पर शाम को तब्बी ने अपना दूध न पिलाकर पाउडर का बनाया। क्योंकि जो थोड़ा दूध बूब्स में बचा था उसे शंकर को चाय बनाकर पिला दी।

कहानी का पूरा मज़ा लेने के लिए इसके पिछले 3 पार्ट जरूर पढ़ें ==> लॉकडाउन और तबस्सुम 3

Muslim housewife ki naukar se chudai ki hindi sex kahani

और दूध दोबारा बनने में 4 घंटे का टाइम लगता है। तो अब थोड़ा-बहुत तब्बसुम के चुचियों में भरने लगा।

जब कोई आहट होती तब्बसुम चौंक जाती।

पर वो ऊपर चला गया था। शंकर अब वो पूरा दिन क्या करता था ऊपर पता नहीं। इस बीच एक या दो बार अलताफ से बात भी हुई थी।

यहाँ तब्बसुम खुद को सिक्योर समझे या डरी-सहमी समझे, उसके अंदर ऐसा नहीं था कोई रांडीपन छुपा हुआ था। वो बहुत कायदे-क़रीने की लड़की थी। जिसने आज तक शादी से पहले बुर में कभी उँगली तक नहीं करी थी। अपने मज़हब की अच्छे से फॉलो करती थी।

पर आज वो अपने बच्चे के लिए ही शायद उस शंकर को बस से लेकर यहाँ तक बर्दाश्त कर रही थी। कई बार ख्याल आया कि इसको बाहर निकाल दे या गोली मार दे… जो नेचुरल किसी शरीफ औरत को आता है।

उसकी बुर का दर्द तो सही हो गया और जब वो किचन में खाना बनाने की तैयारी कर रही थी तो बार-बार उसके ज़हन में बस के अंदर जो हुआ, ख़ासतौर से जब उसकी बुर में लंड गया… और शंकर ने उसके बूब्स पर अपना माल निकाला, उस माल को लेकर घर तक आई… ये सब ख्याल आते ही उसका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच जाता। और जब नहाती इस कांड के बाद तो बहुत रगड़-रगड़कर नहाती। उसकी गंदगी का एक क़तरा भी सहन नहीं कर पा रही थी।

पर जब एक और ख्याल आता कि उसकी चुदाई जब हुई तो उसने क्यों एन्जॉय किया? क्या वो उसके शराब की बदबू से वो अपने होश खो बैठी थी? तब्बसुम को कुछ समझ ही नहीं आ रहा।

और उसने पूरे दो दिन जब से आया था बस के बाद कोई ऐसी हरकत नहीं करी।

तब्बी का दिमाग उसके काले लंड पर भी जाता और तब्बी फौरन तौबा करने लगती।

असल में कोई चीज़ अगर छाप दिमाग में छोड़ जाती है तो उसका ख्याल आता ही है।

ऐसे ही तब्बी को ये गंदे ख्याल आते तो वो इन ख्यालों में खोती नहीं बल्कि अपने को गुस्सा देकर ही कोसती।

तब्बी अब आटा गूँदने लगी। वैसे भी उसके हिप्स सीधा खड़े रहने पर भी कर्व देकर बाहर की तरफ़ निकलते थे। आगे से तो वो बेपनाह खूबसूरत बारबी डॉल की तरह थी।

मगर पीछे से तो क़यामत नज़र आती थी। लोग आगे से क्या देखते, पीछे का पिछवाड़ा, कमर-पीठ का कर्व देखकर ही उनके लंड खड़े हो जाएँ।

तब्बसुम का जिस्म इतना सेक्स अपील देता था कि बस आदमी देखता रह जाए। गुलाबी पतले होंठ और गज़ब के गोरे लाल रुख़सार, आँखें बड़ी जिनमें काजल की लाइन से वो बहुत ही खूबसूरत लगती।

7 बजे करीब वो खाना डर और सहम के बना रही थी। आज वो व्हाइट कुर्ती और चुन्नीदार पजामे पहने हुए थी।

जिसमें उसका जिस्म और भी क़ातिल नज़र आ रहा था। कुर्ती घुटने से थोड़ा ऊपर थी।

और पजामा टाइट ही थी। वो आटा गूँद रही थी तो थोड़ा झुककर आटा गूँद रही थी।

जिससे उसकी गाँड भी हिल रही थी और चुची भी आगे-पीछे हिल रही थी पर ज़्यादा नहीं।

पसीने से पीठ गीली हो गई थी जिससे पीछे से ब्रा की स्ट्रैप साफ दिख रही थी। और विल पहने हुए थी जिससे गर्मी की वजह से पसीना बहकर आगे-पीछे जा रहा था। और कुछ डर भी उसे लगा हुआ था।

अपने काम में वो बिज़ी थी कि तभी किचन में तब्बसुम का बेबी गोद में लेकर शंकर आता है।

और तब्बसुम को पीछे से देखता है तो उसके लंड में एक झटका लगता है।

तब्बी आटा गूँदने में बिज़ी थी जिससे उसकी गाँड की थिरकन हो रही थी। पसीने ने व्हाइट सूट भिगोने की वजह से पीठ का हल्का गोरा हिस्सा भी कपड़े चिपकने से दिख रहा था।

उसकी ब्रा की लाइन भी सेक्सी नज़र आ रही थी।

हिप्स पर जब देखा तो उसकी कुर्ती गाँड की दरार में फँसी हुई थी और दोनों गाँड के हिस्से बहुत गोल नज़र आ रहे थे। ऐसा लगता कि अभी पीछे से इसको गाँड अभी के अभी मार ली जाए।

तब्बसुम की तरफ़ शंकर गाँड में फँसी कुर्ती को देखकर आगे बढ़ता है। बच्चा उसकी गोद में ही था और वो उसके गले लगकर आराम से कभी आँखें बंद करता कभी खोलता।

शंकर तब्बी के पास जाता है और अपने हाथ से वो गाँड में फँसी कुर्ती को निकालता है। तब्बसुम की लट विल से चेहरे पर आ रही थी तो वो अपनी बालों की लट साइड से करती है तो थोड़ा आटा उसके माथे पर लग जाता है।

पर जब शंकर उसकी गाँड से कुर्ती खींचता है तो वो डर के मारे एकदम से पीछे पलटकर देखती है। और उसके पैर लड़खड़ा जाते हैं। वो साइड से गिरते-गिरते बचती है।

अपने को सँभालकर कहती है—

तब्बसुम: ये क्या बदतमीज़ी है… और मेरा बेटा मुझे दो…

शंकर: अरे आप इतना डरती क्यों हो? मैं कुछ गलत तो नहीं कर रहा हूँ। आपकी कुर्ती फँसी थी आपके खूबसूरत नितंबों में तो मैंने उसे बाहर निकाला। आपको टच भी नहीं किया…

तब्बसुम: प्लीज़ मेरा बच्चा मुझे दो और यहाँ से दफ़ा हो जाओ…

शंकर: अरे कहाँ जाऊँगा? कल अगर बाज़ार खुलता है तो मैं फैक्ट्री चला जाऊँगा। आपको मेरी वजह से परेशान होने की कोई ज़रूरत नहीं…

और आपका बेबी देखो मेरी गोद में कैसे खेलकर सो रहा है। ऐसा लगता है मैं इसी का असली बाप हूँ… है ना बीवीजी?

तब्बसुम: खामोश! अपनी बद्ज़बान ज़ुबान से मेरे बेटे के बारे में कुछ न कहो। लाओ मेरा बेटा…

तब थोड़े गुस्से में शंकर कहता है—

शंकर: अरे शराब के नशे में कुछ गड़बड़ हो गई तो इसका मतलब आप जो कहेंगी मैं सुनता रहूँगा? क्या मैंने कुछ किया? देखो आपका बच्चा मेरी गोद में है… तो चुपचाप खाना बनाती रहो…

मुझे भूख लगी है… मैं जल्दी खाना खा लेता हूँ हमेशा…

तब्बसुम: प्लीज़ आप इतनी ज़्यादती न करो। मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है… मेरे बच्चे पर रहम खाओ…

शंकर: क्या है तुम्हारी समस्या? मैं कुछ करने के लिए या जो आप समझ रही हो मेरे बारे में गलत… क्या मैं आपके साथ कुछ गलत कर सकता हूँ? देखो इतना आप ख्याल रखो कि आप सोच रही हो कि आपके बच्चे की आड़ में आपके साथ कुछ गलत करूँगा ये आपकी भूल है…

आप बेकार में नहीं डरो… बस खाना बनाती रहो… माना कि आप बहुत हसीन हैं… मैं कितनी बार आपके यहाँ आया ही, क्या कभी मैंने आपको नज़र उठाकर देखा? नहीं ना… तो क्यों आप मुझसे इतना डर रही हो? मैं कोई चीज़ जबरदस्ती हासिल नहीं करता, प्यार से करता हूँ… हाँ जो बस में हुआ उसमें आपकी गलती कहाँ थी… आपने अपने बच्चे और अपनी इज़्ज़त बचाने के लिए मेरा साथ दिया… और मैं शराब के नशे में था… आप अपने बच्चे पर ध्यान हटाकर खाना बनाओ। मैं आपके बच्चे को पालने में लिटाकर आता हूँ…

ये कहकर शंकर बाहर आ गया। और तब्बसुम फिर से रोते हुए आटा गूँदने लगी।

तब फिर से शंकर अब अलग मूड में अंदर आता है।

पर तब्बसुम का ध्यान तो अपने बच्चे पर था जो इस वजह से उसकी ज़्यादती सह रही थी।

शंकर अंदर आता है तो तब्बी उसे देखकर अपने आँसू पोंछते हुए तवे पर अब रोटी बनाती है।

शंकर: वो मेरे लिए 4 रोटी बना देना और आप जितना चाहो अपने लिए… और एक बात और मुझसे डरने की ज़रूरत नहीं। मैं आपको टच न करूँगा। हाँ 11 बजे मुझे दारू पीने की हुड़क लगती है तो आप उस वक़्त डर लगे तो अंदर से अपने रूम का डोर बंद कर देना…

ये कहकर अपने जेब से बीड़ी निकालकर पीने लगता है और तब्बसुम को रोटी बनाते हुए देखता है।

शंकर: माफ़ करना मैं आपके सामने बीड़ी पी रहा हूँ। आपको इस धुएँ से तकलीफ़ हो रही होगी… पर जब आपने मुझे दारू के नशे में देख लिया और समझ लिया कि मैं दारू पीता हूँ तो अब बीड़ी मैं आपके सामने पीने में क्या शर्म…

तब्बसुम उसकी बात सुनते हुए दूसरी रोटी तवे पर डालकर अपने काम में ध्यान देने लगी।

और दूसरे बर्नर पर सब्ज़ी बन रही थी।

अब शंकर ऐसी बात करना शुरू करता है जिसे सुनकर तब्बी हैरान हो जाती है और शर्म के मारे ज़मीन पर गड़ने लगती है। उसके गोरे गाल लाल हो जाते हैं और उसकी बात सुनकर उसकी चुचियों में टाइटपन सा आने लगता है… और भी उसके जिस्म की क़फ़ियत बदल जाती है। आँखों में शर्मा-हया के लाल डोरे तैरने लगते हैं, हाथ काँपने लगते हैं… रोटी बनाने में मुश्किल होने लगती है, पैर काँपने लगते हैं…

शंकर: बीवीजी एक बार पूछूँ आपसे… जो आपको हमेशा देखकर सोचता था…

पर अपनी लाइफ़ में कभी नहीं कह सकता था आपसे। पर भगवान ने आज ऐसा मौका दिया जो मैं आपके लिए सोचता था तो आज वो सब अपनी दिल की बातें कह देता हूँ… हाँ मैं गँवार हूँ तो कोई शब्द मेरे मुँह से गंदे निकलें तो आप बुरा न मानना। इंग्लिश मुझे नहीं आती इसलिए शुद्ध हिंदी में आपसे बात करता हूँ…

ये बात सुनकर एक नज़र उसके काले ख़तरनाक चेहरे पर देखकर अब तीसरी रोटी आराम से बेलने लगी। पर रोटी बेलते वक़्त उसके गाँड और चुचियों में वाइब्रेट होने लगता है… पर तब्बी इस बात का ख्याल रखती है कि वो आराम से अपने जिस्म को जितना हो सके छुपाकर काम करे…

शंकर: एक बात पूछूँ… आप अपने पति से बिस्तर पर खुश होती हैं हमेशा या कुछ कमी रह जाती है?

ये बात सुनकर तब्बी के हाथ रुक जाते हैं और वो बेसक्त सी खड़ी ही रह जाती है…

शंकर: मुझे मालूम है आप मेरे बात का जवाब नहीं देंगी… पर हाँ या ना करके तो कह सकती हो… चलो आप वो भी नहीं करोगी पर अपनी आँखों से बता सकती हो…

अच्छा बताओ आपके पति कभी अपना लंड आपसे चुसवाते हैं?

या अपनी चूत आप अपने पति से चटवाती हो? वो कितनी देर तक तुम्हें चोदते हैं? कभी घोड़ी बनाकर या गोद में बिठाकर चोदा है? या आपने कभी अपनी गाँड भी मरवाई है?

डायरेक्ट ऐसी गंदी बात सुनकर जो ऐसी बात लंड-चूत की अपने शौहर अलताफ से भी नहीं सुनी… और आज ऐसी बात सुनकर तब्बसुम का पूरा जिस्म सुन्न हो गया। उसकी ज़ुबान जैसे पलटकर हलक में आ गई। पूरे जिस्म में डर और ख़ौफ़ के साथ उसकी अश्लील बातों से सिहरन सी आ गई…

शंकर: बताओ ना… आप शादीशुदा हो तो आपको सब पता होगा ना… अच्छा मेरे लंड जैसा आपके पति का लंड है… या मुझसे छोटा या बड़ा है…

वैसे आपको मस्त नितंब बाहर की तरफ़ निकले हुए हैं… और मुझे लगता है कि शायद आपकी गाँड मारता होगा आपका पति…

पर आपका जिस्म साला कितना कामुक है… आप बता नहीं रही… अच्छा ये तो बताओ आपको सबसे ज़्यादा चुदना कैसे पसंद आता है?

कौन सा शॉर्ट आपको अच्छा लगता है और आपको चूत में कब तक लंड डालते हैं? क्या आप अपने पति के लंड से संतुष्ट हैं? क्या आपको कभी अधूरा छोड़ा है?

ये बात सुनकर फिर से आँखों से आँसू आ जाते हैं। वो अपने आप को दुनिया की सबसे ज़लील औरत समझ रही थी… पर वो सब किसी मजबूरी में सुन रही थी या पहली बार ऐसा किसी ने बात करके उसके अंदर से शर्म निकालने की कोशिश करने में कामयाब होने के लिए बात को आगे बढ़ा रहा था…

शंकर: वैसे काश मैं आपके एक बार नंगे चुची, पेट, जाँघ, गोल-गोल आपके नितंब और उन नितंबों में आपकी गाँड का छेद और सबसे ज़्यादा आपकी चिकनी गोरी चूत की देखने को मिल जाता… पर अब आप कहाँ मेरे कहने से दिखाएँगी…

वैसे जब मैंने आपकी बेपनाह टाइट चूत में लंड डाला तो मैं समझ गया कि आपके पति का लंड छोटा होगा…

कितनी टाइट कसी हुई चूत है आपकी… वैसे आपने भी मज़े तो लिए थे ना…

तब्बसुम: प्लीज़ ख़ुदा का वास्ता… प्लीज़ आप मेरे से ऐसी बात न करें। मुझे क्यों इतना ज़लील कर रहे हैं? मैंने आख़िर क्या बिगाड़ा है? मैं आपके सामने हाथ जोड़ती हूँ, पैर पकड़ती हूँ… मुझे रुसवा न करो। जितना पैसा चाहिए मैं देने को तैयार हूँ पर मुझे ज़लील न करो…

शंकर: क्या हो गया आपको? अच्छा पैसों से मेरी क़ीमत लगा रही हो? चलो ठीक है आप ही बताओ आपके हुस्न की क्या क़ीमत होगी… वही मुझे दे दो… मंज़ूर है आपको? क्या बीवीजी जैसा मुझे बोलना आता है पूछ लिया…

मैं भी इंसान हूँ। मुझे भी जानने का अधिकार है कि आप जैसी मज़हबी लड़की शादी से पहले या शादी के बाद क्या सोचती है… उनके दिल में क्या ख्याल रहते हैं…

क्या आपको सेक्स नहीं चढ़ता या आप खुद कभी अपने पति से पहले शुरुआत नहीं करतीं? क्या कभी उसके सामने नंगा नहीं होतीं? हाँ उसने आपसे दुनिया के हिसाब से शादी करी है तो वो जब चाहे आपको चोद सकता है, जब चाहे आपको नंगा कर सकता है… बस यही तो मैं जानना चाहता हूँ…

जो मेरे जैसे कई मर्द ये सब आप जैसी पर्दानशीन मज़हबी औरत से पूछना चाहता है… तो आज मौका मिला तो पूछ लिया… हाँ मेरे शब्द ज़रूर गंदे हैं पर मुझे कहना पड़े क्योंकि आप लोग अपने कपड़े तो अपने पति के सामने उतार देती हो पर अपनी ज़ुबान को नंगा नहीं करतीं या खुद ऐसी बातें अपने पति से नहीं करतीं… जब एक रिश्ते से तुम नंगी हो सकती हो अपने पति के सामने तो अपनी ज़ुबान को नंगा क्यों नहीं कर सकतीं…

ये लंड, चूत, झाँत, गाँड, चूतड़ के बारे में कभी नहीं सुना? सुना तो होगा ही ना तभी लंड-गाँड के नाम लेते ही आप डर गईं, शर्मा गईं… अगर इनका नाम नहीं जानती तो कैसे पता होता कि मैं गंदी बात कर रहा हूँ…

ऐसा कहकर उसने अपना लुंगी खोल दी। उसका काला अजगर फुंकार मारकर खड़ा हो रहा था। बहुत ही भयानक और ऐसा लग रहा था कि काले जंगलों में से बाहर अपना फन फैलाता हुआ खड़ा हो रहा हो…

ज़ाहिर सी बात है कि ये देखकर और नया फिर से एक लंड देखकर हैरत-शर्म-हया से तब्बी की आँखें खुली की खुली रह गईं…

शंकर: मैं चाहूँ तो अभी तुम्हें चोद सकता हूँ तीनों छेद तुम्हारे… पर मैं ऐसा कभी नहीं करूँगा। तुम्हारी बेबसी का या तुम्हारे बच्चे का फ़ायदा मैं नहीं उठा सकता। तुम इस बात की परवाह न करो…

इसे कहते हैं लंड। मेरा लंड देखने में क्या शर्म? इसे तो अपनी चूत में लिया था ना… और अपने पति का लंड भी देखा है कई बार तुमने तो मेरा लंड देखने में क्या शर्म… अपना बनाने के लिए क्या मुझे तुमसे शादी करनी पड़ेगी? और तुम क्यों करोगी भला मुझ जैसे मर्द से शादी…

ये कहकर वो लुंगी बाँध लेता है… और कहता है—

शंकर: रोटी जल रही है…

यहाँ सच में तब्बी की जान हलक में आ गई थी… और वो अपने को सँभालते हुए और उसका फिर से एक बार लंड देखकर उसकी बातें सुनकर उसके जिस्म ने अपना काम करना शुरू कर दिया जो उसके इख़्तियार में बिल्कुल नहीं था… यानी फिर से पैंटी में गीलापन आने लगा…

शंकर: मेरे दिल की बात तो आपने सुन ली। क्या मैंने अभी तक आपको हाथ लगाया या नहीं?

देखो अब मैं जो पूछूँ तुम सही-सही सच जवाब देना… मुझे मालूम है ये मुश्किल है तुम्हारे जैसे शरीफ़ विली औरत को मेरे सवाल का जवाब देना… पर हाँ या ना में ज़रूर जवाब दे सकती हो। सच-सच तुम्हारे बच्चे की कसम तुम झूठ नहीं बोलोगी…

तब्बी हकलते हुए—

तब्बसुम: ख़ुदा के वास्ते कुछ न पूछो। जो कहना था आपने कह दिया। जितना मुझे ज़लील करना था कर लिया। अब न पूछो कुछ भी…

शंकर: तुम रोती बहुत हो… मैं बिना पूछे जब तक मुझे तुम जैसे शरीफ़ औरत दूसरों के बारे में क्या सोचती है या खुद अपने सेक्स के बारे में क्या सोचती है जब तक नहीं पूछूँगा मुझे तसल्ली नहीं मिलेगी…

मैंने तुमसे कोई जबरदस्ती नहीं कर रहा हूँ और झूठ मैं सुन नहीं सकता… इसलिए तुम्हें तुम्हारे बच्चे का वास्ता… अब जो पूछूँगा वो तुम हाँ या ना में कहोगी जिससे थोड़ी शर्म कम होगी तुम्हारी और तुम मेरी तरफ़ न देखकर हाँ या ना में जवाब दो। जो मुश्किल लगे बस अपना सिर हिलाकर हाँ या ना कह देना…

और एक बात और… मैं तुम्हें नहीं चोदूँगा। उस चुदाई से क्या फ़ायदा जो सामने वाला खुद ना-ना साथ दे… और न तुम्हें छुऊँगा… बस एक काम करूँगा जो तुम्हें करवाना होगा। इस काम में मेरे हाथ तुम्हें टच भी नहीं करेंगे।

तो शुरू करता हूँ अपना सवाल… और हाँ सवाल करने से पहले रात को सोते वक़्त तुम्हें मुझे बिना माँगे… 10 बजे रात को अपने दूध की चाय बनाकर देना होगा…

वैसे आपके शौहर कुछ दिन बाद आ जाएँगे तो सुबह-शाम मुझे अपने दूध की चाय बनाकर देना होगा मेरे बिना कहने पर…

ये बात सुनकर अब बहुत ही हैरत से उसका काला चेहरा देखने लगी कि ये अब क्या है… और उसके सवाल शुरू होने से पहले ब्रा में टाइटपन सा भी आने लगा…

और चूत में गर्मी बढ़ने लगी… पर सच मानो इसमें कोई भी हरकत पर तब्बी की कोई शह नहीं थी… उसके जिस्म में ही अलग कुछ हो रहा था जो ये बात तब्बी समझ नहीं पा रही थी… पर वो कोई रांडी नहीं थी जो ऐसी बात सुनकर अपने पति की याद में किसी से भी चुद जाए…

पर वक़्त का क्या भरोसा कि वो क्या खेल खेले… शंकर ने गैस का चूल्हा बंद करके तब्बी को वहीं एक चेयर पर मुश्किल से बिठाया और अब वो यहाँ अपने बच्चे के लिए सब सहन कर रही थी। ता उसे सेक्स के बारे में ज़्यादा पता नहीं था तो नया कुछ सुनने के लिए अपना चेहरा नीचे किए हुए अब हाँ या ना में अपना जवाब देने को तैयार थी…

पर यहाँ भले ही वो मजबूर थी पर ये मजबूरी उसे क्या करवाती। अभी थोड़ी देर में उसने अपना लंड देखा था जिसका ख्याल उसके दूसरे ज़हन में आने लगा कि ऐसा लंड कैसा होता है… ऐसा अलताफ का नहीं है ये… पर अजीब चमड़ी में क्या छुपा सा है… जो उसका थोड़ा जैसे चमड़ी में कोई मोटी चीज़ झाँक रही हो… वो देखने की मुझे कोशिश कर रही हो…

इतना बड़ा मैं कैसे ले गई मेरे बुर में? क्या इतनी जगह थी जो ऐसा अजीब सातर ले जा सकता है…

ऐसा ख्याल जो इंसान के ज़हन में आता है पर इंसान चाहकर भी ये सवाल अपने ज़हन से नहीं निकाल पाया है…

अब शंकर की बारी थी। उसके अंदर भी ऐसी मज़हबी शरीफ़ औरत के बारे में भी जानना था और उसे विश्वास था कि उसके बच्चे की कसम देके ये कुछ झूठ नहीं बोलेगी… जो जानना था वो निहायत शर्म लहज़े वाली खूबसूरत विली ईमानदार औरत सब बताएगी… जो एक मर्द ऐसी औरत के बारे में सुनना चाहता है… और जानना चाहता है… पर क्या सवालों के जवाब देने के बाद तब्बी की लाइफ़ में क्या चेंज आएगा ये अभी पता आज रात को चल ही जाएगा…

तब्बसुम फिर से खाना बनाने लगी। जल्दी-जल्दी रोटियाँ बनाने लगी… पर अपनी कमर को शंकर की तरफ़ करके क्योंकि वो नहीं चाहती कि उसके हिलते बूब्स न देख सके…

शंकर: आराम-आराम से बनाओ। अभी तो तुम्हारी बारी है अपने बारे में बताने की। देखो मैंने अपने दिल की बात बता दी।

तब्बसुम कुछ रोटी बना लेती है और कुकर की सीटी भी बजती है…

तब्बसुम: देखो आपने मुझे इतना ज़लील-रुसवा कर दिया। अब मेरे अंदर कुछ हिम्मत नहीं…

शंकर: अच्छा ये बताओ अपने बेटे से कितना प्यार करती हो?

ये सुनकर तब्बसुम घबरा जाती है… और एक रहम भरी नज़रों से देखती है…

शंकर: अरे अब क्या हुआ? बस मैंने यही पूछा ना कि अपने बेटे से कितना प्यार करती हो और तुम फिर से आँसू निकालकर मेरी तरफ़ हाथ जोड़कर क्यों खड़ी हो…

देखो मुझे तुम्हारे बारे में बहुत कुछ जानना है… इसलिए अब जैसा मैं कहूँ वैसा करो…

और ये मेरे साथ कहो… कि मैं अपने बच्चे की कसम खाकर कहती हूँ जो कहूँगी सच कहूँगी, सच के अलावा कुछ नहीं कहूँगी… हाँ मैं इतना तुम्हारे साथ कर सकता हूँ कि तुम फिलहाल अपने गर्दन के इशारे से हाँ या ना में जवाब देना…

ये कहकर वो चेयर पर बैठ जाता है… और अपने सामने उसे खड़ा ही रखता है…

शर्म-हया में लिपटी हुई तब्बसुम अपनी नज़र नीचे करके खड़ी थी… और थोड़ा ज़ोर देने पर जैसा कसम खाने को कहा वैसा कसम खा ली। इस बात पर शंकर खुश हो गया…

शंकर: चलो अब अच्छा है। सुनो अब मेरी बात गौर से। पहले मैं आसान सवाल पूछूँगा जिससे तुम्हें परेशानी कम होगी आगे बढ़ाने तक…

ये समझो एक सीढ़ी है जिसे तुम्हें एक-एक क़दम चढ़कर जाना है। जितना देर लगाओगी उतना मुश्किल सवाल होंगे… तो चलें शुरू करता हूँ। आख़िर मैं भी तो जानूँ तुम्हारे दिल में क्या है… और तुम झूठ बोल नहीं सकतीं। आख़िर तुमने अपने बच्चे की कसम खाई है…

एक बात और… मैंने सच मानो 1 साल से तुम्हारी तरफ़ गंदी नज़रों से नहीं देखा…

पर जब मैं कोई हीरोइन के बारे में सोचकर मुठ मारता था तो तुम कुछ महीनों पहले मेरे ख्यालों में आ जाती थीं… मैं इस ख्याल को अपने दिल से निकालता और इसे पाप समझता पर ये ख्याल निकले ही नहीं…

और जब तुम अपने घर जाती थीं तो लगता था कि कुछ कमी सी होने लगी मेरी ज़िंदगी में…

और जब वापिस आती थीं तो वो कमी मेरे अंदर खत्म हो जाती थी… तुम्हें बार-बार देखने का दिल करने लगा… पर सच है ये कि मैंने तुम्हारे बारे में गंदा नहीं सोचा…

पर जब तुम अपना बच्चा डिलीवर करवाने अपने घर 3 महीने के लिए गई थीं… यानी तुम अपने यहाँ 3 महीने रुकी थीं तो मुझे किसी काम में मन ही नहीं लगता और कब तुम मेरे ख्यालों में आने लगी पता नहीं चला और तुम्हें चोदने का ख्याल मेरे अंदर आने लगा और फिर हफ़्ते में तुम्हें अलग-अलग तरीके से सोचकर साला मुठ मारना शुरू कर दिया… ख़ासतौर से जब मैं पीछे से तुम्हारी गाँड का हिस्सा देखता तो बस मेरा लंड फटने को तैयार हो जाता…

फिर आगे से कभी-कभी जब दुपट्टे में तुम्हारे बड़े दूध गोल-गोल देखता तो इन्हें दबाने के लिए मेरे हाथों में खुजली होने लगती… और भी बहुत कुछ जो मैंने पहले भी बता दिया कि मैं तुम्हें देखकर क्या-क्या सोचने लगा…

एक-एक बात तब्बसुम अच्छे से सुन रही थी और उसकी पैंटी भी अब लगातार गीली होने लगी… पर सच मानो उसका मतलब ये नहीं था कि वो चुदने के लिए तैयार हो रही थी… बस एक नेचर समझो जिस्म का या कुछ और… पर जो बस में हुआ उसकी वजह से कहीं न कहीं तब्बसुम बेबस हो रही थी शंकर के सामने…

शंकर: अब मैं पूछता हूँ… अब जल्दी-जल्दी मेरे सवालों का जवाब देना…

अच्छा जब तुम जवान होने लगी तो किसी लड़के या आदमी का ख्याल या कुछ जिसे तुम उससे शादी करना चाहती थीं या उसे पसंद करने लगी थीं… कभी किसी लड़के को पसंद किया अपनी ज़िंदगी में?

तब्बी का सिर फौरन ना में हिला…

शंकर: ओह्ह अच्छा… तुम्हें कभी नहाते वक़्त या कभी सोते वक़्त ऐसा लगा कि तुम्हारा जिस्म कुछ माँग रहा है? सपनों में या नहाते वक़्त जब तुम नंगी होती थीं तो तुम्हें लगता है कि कोई तुम्हें अपनी बाँहों में भरकर किस करे, प्यार करे…

तब्बी फिर से ना में सिर हिला देती है… ये देख शंकर को ताज्जुब होता है कि ये तो बहुत पाक-साफ़ औरत है…

शंकर: अच्छा कभी तुम बाज़ार जाती हो तो कोई लड़का या आदमी कोई भी हो उस भीड़ का फ़ायदा उठाकर तुम्हारी गाँड में उँगली या सहलाकर या दबाकर आगे बढ़ जाता है…

इस सवाल से एक झटके से मुस्कुराते हुए शंकर की तरफ़ देखा और फिर अपना सिर झुकाकर हाँ में हिलाया…

शंकर: तब तुम्हें मज़ा आता था या गुस्सा या दोनों ही आते थे?

मध्यम की आवाज़ में तब्बी ने “गुस्सा” कहा…

शंकर: ओह्ह यानी तुम अपने जिस्म की भाषा समझ ही नहीं पाईं…

तुम्हारी शादी से पहले अलताफ से बात होती थी मोब पर या कभी बाहर?

इस पर फिर से ना में सिर हिलाया…

शंकर: कमाल है इस ज़माने की लड़की इतनी परहेज़गार है वाह्ह्ह… अच्छा शादी से पहले तो कभी देखा होगा…

तब्बसुम: हाँ…

शंकर: अच्छा चलो तुम्हारी अलताफ से शादी हुई और तुम्हें पता था कि सुहागरात है आज चुदना है…

अब ये सवाल सुनकर तब्बसुम सुन्न रह गई। इसका अब कैसे जवाब दे। पूरा चेहरा फिर से लाल हो गया। होंठों में कंपन ज़्यादा होने लगा। कुछ बूँदें पैंटी को और गीला करने लगीं…

शंकर: देखो मैंने कहा था कि मेरे सवाल और ज़्यादा बढ़ते रहेंगे। अभी तो बस कुछ सीढ़ियाँ ही चढ़ी हो… मंज़िल दूर है…

और तुमने कसम भी खाई है तो मुझे कुछ ऐसा करने को मजबूर न करो कि… तुम समझदार हो… तुम्हारा बच्चा आराम से बाहर पालने में सो रहा है। टेंशन न लो… अब बिना रुके, बिना डरे मेरे सवालों का जवाब देती चली जाओ जब तक मैं पूछना बंद न करूँ…

एक बार फिर से अपने हाथ जोड़ती हुई अपने को बख्शने की भीख माँगी… तो शंकर गुस्से से जैसे ही खड़ा हुआ तो…

तब्बसुम: आप बैठे रहिए। जो पूछना है पूछिए। अपने बच्चे की कसम खाई है। झूठ नहीं बोलूँगी…

शंकर: शाबाश! यही उम्मीद है। चलो मेरे सवाल का जवाब दो कि सुहागरात में तुम्हें पता था कि तुम चुदने वाली हो…

सिर हाँ में हिलते हुए…

शंकर: अच्छा तुम्हें किसे ने बताया कि शादी के बाद चुदना है…

और तुम्हें कैसे पता चला कि शादी के बाद चुदाई होती है…

अब ये सवालों का जवाब तो हर औरत के पास होता है जो कुदरती तौर पर जवान होने तक सब लड़कियों को पता चल ही जाता है…

तब्बसुम: मेरी कुछ ख़ास सहेलियों से… और मुझे भी पता नहीं कैसे पता है कि शादी के बाद…

ये कहकर तब्बसुम खामोश हो गई…

शंकर: चलो मैं ज़्यादा अंदर नहीं जाता। ये बताओ… तुम्हारी चूत में जब उस अलताफ का लंड डाला था तो खून निकला था या कभी अपने आप ही कुछ करने पर सील टूट गई… बताओ खून आया था क्या…

ये सवाल सुनकर शर्म से कई गज़ ज़मीन में अपने को धँसते हुए जाते देखती है… और अपने हाथों के नाखूनों से ही पूरे हाथों की बंद मुट्ठी में ऐसा दबाती है कि खून निकल आता है… पर यहाँ बस अब आँसू नहीं बह रहे थे। आँखें डबडबा रही थीं…

तब्बी ने अपना सिर हाँ में हिलाया…

शंकर: खून निकला था… बहुत अच्छे… दर्द हुआ होगा है ना… पर जब तुम्हारा दर्द खत्म होकर तुमने भी जैसे बस में चूतड़ उठाकर मज़े ले रही थी भले मेरे शराब की बदबू से ही नशे में थी… ऐसे मज़े लिए थे यानी तुम झड़ी थी… और कितनी बार तुम रात को चुदी अपने पति के साथ… तुम ये तीन सवाल का जवाब एक-एक करके दो…

तब्बी को बोलना ही था सच-सच भले अपने बच्चे की मजबूरी में ही सही…

तब्बी ने पहले सवाल का ना में सिर हिलाया यानी वो गरम तो हुई, मज़ा भी आने लगा जो आता भी है पर वो झड़ नहीं पाई। उसके अंदर से कुछ टेक्स निकलने वाला था, जिस्म में अकड़न होने लगी थी पर तब तक अलताफ का लंड का पानी निकल गया था…

अब 2 उँगली दिखाकर इशारा किया कि वो दो बार चुदी और फिर भी न झड़ पाई…

शंकर: अब जैसे तुम बस में झड़ी ऐसे कभी अलताफ ने झड़ा था तुम्हें?

कुछ देर ये सवाल सुनकर खामोश रही पर आख़िर तब्बी ने ना में सिर हिला दिया…

शंकर: ये आजकल के नौजवान क्या खाते हैं जो अपनी बीवी को मंज़िल तक भी नहीं पहुँचा पाते हैं…

अच्छा ये बताओ कि तुम सबसे ज़्यादा किस पोजिशन में चुदना पसंद करती हो… मैं तुम्हारे सवाल को आसान कर देता हूँ… 1 लेटकर जब अलताफ तुम्हारे ऊपर होता है… 2 जब तुम अलताफ की गोद में होती हो… 3 जब तुम उसके सामने घोड़ी बनती हो… 4 जब तुम कभी खड़े-खड़े चुदना पसंद करती हो… तुम नंबर बता सकती हो…

अब इस सवाल का क्या जवाब दे। पर जवाब दो थे। एक जब कभी अलताफ गोद में लेकर चोदता था तो लंड काफ़ी अंदर तक महसूस करती थी… दूसरा जवाब ये था कि जब अलताफ उसे कभी घोड़ी बनाता था पर उसकी खूबसूरत बाहर को ज़ालिमाना गाँड में लंड के चंद डालके मारकर झड़ जाता था और गाँड को देखकर वो अपने नफ़्स पर कंट्रोल ही नहीं कर पाता था…

तब कुछ देर शर्म-हया से लड़ते हुए 2 नंबर बोल दिया…

तब्बी के सामने फिर से अपना खड़ा लंड निकाला तो तब्बी के होश उड़ गए कि उसने कैसे इतना बड़ा लंड वो भी चमड़ी चढ़ा हुआ गंदा सा काला सा है… वो अपने लंड को हिलाने लगा तो कुछ लम्हात के लिए आँखें वहीं जम गईं… और पैंटी में एक बार और गीलापन सा आ गया…

शंकर: तुम ऐसे ही बिना पलकें झपकाए मेरे लंड को देखती रहो… एक पल के लिए अपनी नज़र इससे नहीं हटाओ… वरना तुम जानती हो मैं क्या कर सकता हूँ अभी के अभी…

उसकी बात सुनकर तब्बसुम फिर से सहम गई… उसे लगने लगा कि अभी ज़मीन फट जाए और वो उसमें समा जाए…

शंकर: क्या तुमने अपनी गाँड मरवाई है?

इस सवाल को लंड देखते हुए कुछ लम्हात बाद ना में सिर हिलाया…

शंकर: तो कभी अलताफ ने तुम्हारी गाँड लेने की ज़िद नहीं करी या तुम्हें इसके लिए तैयार नहीं करा… बताओ कभी गाँड मराने के लिए कहा या नहीं…

इस सवाल का जवाब भी था। वो ऐसा था कि कई बार अलताफ ने गाँड मारने के लिए ज़ोर डाला और एक बार तब्बसुम को कैसे भी राज़ी कर लिया… पर तब्बसुम अनाड़ी थी… और अलताफ को भी नहीं पता कि गाँड कैसे मारी जाती है। बहुत क्रीम लगाई, बहुत कोशिश करी पर गाँड के तंग छेद में लंड नहीं गया… वो इसलिए भी औरत को खुद अपने दिल से राज़ी होना पड़ता है। जब औरत दिल से राज़ी होती है तो उस दौरान गाँड का पहरेदार सिर्फ 30 सेकंड के लिए गाँड के छेद से हट जाता है… वही 30 सेकंड में क़िला फ़तेह करना होता है या आदमी तजुर्बेकार हो तो वो लंड डाल सकता है…

तब्बी ने डरते-सहमते कह दिया कि उन्होंने कोशिश करी थी पर घुसा ही नहीं और उनका माल निकल गया… पर जैसे मैंने लिखा वैसे न कहकर इतना ही शर्म से कह दिया कि वो कर न पाए…

शंकर: क्या साला ढीला आदमी मिला है। देखने में बॉडी बिल्डर लगता है पर अंदर से साला खोखला है…

अच्छा तुमने उसका लंड चूसा या नहीं…

थोड़ा सहन कर ना में सिर हिला दिया और तब्बसुम उसके अजीब लंड को देखे जा रही थी… तो उसके सवाल का जवाब अब जल्दी देने लगी और जिस्म की ख़ुराफ़ात से पैंटी गीली होने लगी थी और भी ज़्यादा… और शंकर के लंड से भी प्रीक्यूम बाहर बूँदों की शक्ल में बाहर आने लगा…

शंकर: अच्छा उसने कभी तुम्हारी चूत चाटी… और कभी तुम चूत चटवाकर ऐसा लगा कि अपना पानी उसके मुँह में छोड़ दो…

इस सवाल का जवाब तब्बी के अंदर की एक औरत उसे ही खुद देती है…

अलताफ चूत पर किस कभी-कभी कर लेता था… पर चटाता बहुत कम था। जब चटाता तो तब्बसुम के दिल में ये ख्याल आता कि उसकी ज़ुबान चूत के सेंटीशन पर लगे जिससे वो झड़ जाए…

पर वो शर्म की वजह से कह ही नहीं पाती थी…

बस इस सवाल का जवाब हाँ में सिर हिलाकर दिया पर अपने दिल के अल्फ़ाज़ में न दे सकी…

शंकर: अच्छा तुम्हारे निप्पल तो खूब चूसे होंगे, चुचियों को भी दबाया होगा, तुम्हारे दूध पिया होगा…

इस सवाल के जवाब में ये था कि अलताफ निप्पल को कभी अपने मुँह में रखकर नहीं चूसता था। वो ये समझता था कि ऐसा करने से निकाह टूट जाता है… और ये ख़्वाहिश अलताफ ने कभी पूरी नहीं करी। हाँ उसने दूध दबाए थे… पर जब से निप्पल में बच्चा होने के बाद दूध आने लगा तो वो उसे भी नहीं दबाता… यानी देखने में दोनों मियाँ-बीवी खुश थे पर जो सुख तब्बी को मिलना चाहिए था वो आज तक यानी फोरप्ले का सुख भी नहीं मिला…

तब्बसुम हाथ जोड़कर जहाँ तक उसके पैरों को पकड़ने के लिए भी जाती है… और कहती है कि मुझे रुसवा न करो…

उस पर शंकर कहता है—

शंकर: तुम एक अधूरी प्यास हो… जो तेरे गंदू शौहर न तुझे सुख दे पाया न ले पाया। साला मैं उसकी जगह होता तो तीनों छेद को कभी खाली नहीं छोड़ता…

यहाँ थोड़ा अब शंकर को तरस सा आया पर ऐसा नहीं था कि वो ऐसे ही जाने देता…

आगे क्या हुआ पढ़िए अगले पार्ट में।

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