माँ भाई का मिलन बहन ने कराया 4

Mummy bhai ka lund lene ko ready hui:- जैसे ही उन दोनों का खाना ख़त्म हुआ मैं बाहर आ गई और मुझे देखकर आकाश अपने रूम में चला गया और मैं मम्मी के बग़ल में बैठ गई और उनको देखने लगी पर बोली कुछ नहीं।

पिछला पार्ट नहीं पढ़ा तो जरूर पढ़ लें नहीं तो स्टोरी समझ नहीं आएगी ==> माँ भाई का मिलन बहन ने कराया 3

Mummy bhai ka lund lene ko ready sex story

मम्मी: ऐसे क्या देख रही है?

मैं: देख रही हूँ कि घोड़े को महसूस भी कर लिया।

तो मम्मी मुस्कुरा दीं।

आज का नहीं 1 महीने पहले ही महसूस कर लिया था और इसी वजह से उसके रूम में झाँकना शुरू किया था पता करने के लिए कि कच्छी और ब्रा का यूज़ कहाँ करता है और किससे करता है।

तब पता चला था कि कच्छी क्यों इतनी गंदी होती है क्योंकि जब गधे जैसा होगा तो माल भी तो उतना ही ज़्यादा निकलेगा।

मैं: सही है आपको सब पता है। उसे सब पता है तो देर किस बात की।

मम्मी: हाँ देर किस बात की। बेटे को अपनी मम्मी को चोदने की जल्दी है और बेटी को देखने की पर दोनों में से कोई ये नहीं सोच रहा कि मैं अपने मुँह से कैसे आकाश को दूँ कि चोद ले मुझे अपने घोड़े जैसे लंड से।

मैं: मैंने ये कब कहा मम्मी। मैं तो चाहती हूँ कि आकाश ख़ुद सब करे अपनी तरफ़ से बस आप उसे रास्ता दिखाती जाओ जैसे आज दिखाया इस तरह तैयार हो कर। अब कुछ नया करो।

मम्मी: ओके मास्टरनी जी जैसे आप कहें।

मैं मम्मी की इस हरकत पर मुस्कुरा दी और

मैं: क्यों नहीं क्यों नहीं ज़रूर। अब एक काम करो ख़ुद अपने हाथों से आकाश को अपनी कच्छी और ब्रा देना।

मम्मी: हा हा क्यों नहीं। मेरा पति है वो।

मैं: नहीं है तो बन जाएगा आपको एक बार चोदने के बाद।

मम्मी: अब तू पीटने वाली है। चल जा यहाँ से मुझे थोड़ी देर आराम करना है।

मैं: आराम करना है या अपने होने वाले पति के बारे में सोचना है।

मम्मी मुझे देखकर

मम्मी: अरे बाबा ये तो सोचना पड़ेगा कि अपनी कच्छी और ब्रा कब और कैसे दूँ।

मैं: मैं हूँ ना। अभी जाओ और उसे दे कर आ जाओ ये बोल कर कि छत पर नहीं गया लेने तो मैं देने आ गई।

मम्मी: माँ हूँ उसकी। कोई बाज़ारू नहीं।

मैं: मम्मी हो इसीलिए कच्छी देने की बोल रही हूँ नहीं तो उसके नीचे लेटने की बोल देती मेरी प्यारी मम्मी।

मम्मी: कुछ ज़्यादा तेज़ नहीं चल रही तू।

मैं: क्योंकि मुझे अपनी शादी से पहले आप दोनों की चुदाई देखनी है किसी भी हाल में।

मम्मी: तो इसके लिए अपनी मम्मी को बेशर्म बना दे।

मैं: अच्छा जब अपने बेटे के लंड को अपनी गाँड पर महसूस करती हो तब तो नहीं कहती कुछ। अब ज़्यादा नखरे मत करो। जाओ अपनी कच्छी और ब्रा उसे दे आओ और वो भी जो अभी पहनी हुई है। इसमें ज़्यादा ख़ुशबू आएगी उसे।

और मुस्कुरा दी।

मम्मी: सोच कर निशा। ज़रूरी है।

मैं: बेटे का लौड़ा चाहिए तो करना पड़ेगा नहीं तो आकाश को करने दो जो वो कर रहा है और मुझे यक़ीन है कि अगर तुम उसे न रोको तो वो पक्का तुम्हें कुछ दिनों में चोद देगा।

मम्मी: तो उसे ही करने दे ना।

मैं: ओके तो उसे ही करने दो पर उसे रोकना मत।

मम्मी इस बार एक क़ातिल मुस्कान के साथ।

मम्मी: तेरे से ज़्यादा जल्दी तेरी मम्मी को है अपने बेटे के घोड़े को लेने की।

और मेरे पास से उठ गईं और मुस्कुराते हुए अपने रूम में जाने लगीं तो मैं

मैं: हाये हाये आग लगी हुई है भोसड़े में अपने बेटे का लंड लेने के लिए।

तो मम्मी पलट कर

मम्मी: क्यों जब मेरी बेटी को देखने की, बेटे को मम्मी को चोदने की जल्दी है तो क्या जिसको चुदना है उसे जल्दी नहीं होगी मेरी गुड़िया रानी।

और दरवाज़ा बंद कर लिया।

मैं बाहर खड़ी मुस्कुराती रही कि अब पक्का इन दोनों की चुदाई देखने को मिलेगी।

और ख़ुशी-ख़ुशी मैं अपने रूम में आ गई और सोचते-सोचते कब आँख लग गई पता नहीं।

पर जब आँख खुली तो मम्मी के मुस्कुराने की आवाज़ आ रही थी।

और मैं जब उठ कर बाहर आई तो उनकी आवाज़ किचन से आ रही थी तो मैं धीरे से किचन के गेट पर पहुँची तो आकाश ने मम्मी को वही दिन की तरह पीछे से अपनी बाँहों में भर रखा था और मम्मी मुस्कुराते हुए।

मम्मी: क्या कर रहा है उठ कर आते ही मुझे अभी बाँहों में भर लिया।

आकाश: क्या करूँ मम्मी अब एक पल के लिए भी तुम से अलग नहीं रहा जाता।

मम्मी: अच्छा तो अभी पूरे 2 घंटे बाद अपने रूम में क्या कर रहा था।

आकाश: अपनी कमर को मम्मी के बूम पर रगड़ते हुए उनके कान में

आपको पता है मैं क्या कर रहा था क्योंकि डेली मैं वही काम करता हूँ कॉलेज से आने के बाद।

ये सुनकर मेरे साथ मम्मी भी थोड़ी हैरान रह गईं क्योंकि आकाश तो आज छत पर गया ही नहीं था फिर कैसे।

ये ही सवाल

मम्मी: पर तू तो आकाश बीच में ही

आकाश: हाँ आज उनके साथ नहीं पर इसको महसूस कर रहा था।

और आकाश ने शुद्ध हिंदी में कहूँ तो मम्मी के चूतड़ पर हाथ फेर दिया था।

मम्मी: बेशर्म क्या कर रहा है।

और आकाश का हाथ पकड़ लिया जो अभी भी मम्मी के चूतड़ पर था बस मम्मी ने उसके ऊपर अपना हाथ रख दिया था।

आकाश: बता रहा हूँ कि क्या कर रहा था।

आज आपने साड़ी इतनी कस के बाँधी है कि ये बहुत बड़े और भारी लग रहे हैं।

और शायद अपने हाथों में मम्मी के चूतड़ को भर कर मसल दिया तभी तो मम्मी के मुँह से एक हल्की सी सिसकारी निकल गई थी।

पर मम्मी ने उसका हाथ अपने चूतड़ से नहीं हटाया और

मम्मी: आाह्ह क्या कर रहा है कुत्ते तेरी दीदी घर पर ही है।

आकाश: आप दीदी से डरती हो।

और फिर से उनके चूतड़ मसल दिए।

मम्मी: क्योंकि तू मेरा पति नहीं बेटा है और ये जो तू कर रहा है वो बेटा नहीं पति करता है।

आकाश: अपने मुँह को मम्मी के कान के पास ला कर

और मैं क्या कर रहा हूँ जो एक बेटा नहीं कर सकता अपनी मम्मी के साथ।

और साथ में चूतड़ को मसल रहा था।

मम्मी आकाश की आँखों में देखकर

मम्मी: वही जो अभी कर रहा है अपनी मम्मी के चूतड़ मसल रहा है।

मम्मी ने खुल कर बोल दिया और आकाश मम्मी की आँखों में देखते हुए मसलता रहा और मम्मी कुछ नहीं बोल रही थीं सिर्फ़ उनकी साँसें भारी होने लगी थीं।

मम्मी: आआह आकाश रुक जा कुत्ते तेरी दीदी आ सकती है।

मम्मी आकाश को मेरे आने का डर तो दिखा रही थीं पर आकाश को रोक नहीं रही थीं।

और इतने में मम्मी का पल्लू मम्मी के सीने से गिर गया तो आकाश ने मम्मी को एकदम से अपनी तरफ़ घुमाया और उनके सामने बैठ गया और उनकी नाभि को चूमने लगा जो एक दिन के हिसाब से काफ़ी फ़ास्ट था और मम्मी सिर्फ़ सिसकती रहीं और आकाश उनकी नाभि को चूमता रहा।

मम्मी: आआाह मत कर लड़के।

और उसके सर पर हाथ फेरने लगीं रोक नहीं रही थीं और अब आकाश उनकी कमर को अपनी बाँहों में भर कर मसल भी रहा था और नाभि को चूम भी रहा था और ये सब देखकर मेरे हाथ मेरी पसी पर चल रहे थे।

आकाश: उम्मम मम्मी आपका सब बड़ा-बड़ा है।

मम्मी: आआह तेरा भी तो बड़ा है।

आकाश: उम्मम नाभि को चूमते हुए बेटा किसका हूँ अपनी मम्मी का ही ना तो मम्मी की तरह मेरा भी बड़ा ही होगा ना।

यहाँ मम्मी और आकाश मम्मी के चूतड़ की बात कर रहा था और मम्मी उसके लंड की।

मम्मी: आआह आकाश छोड़ ना रुक जा।

आकाश: क्यों अच्छा नहीं लग रहा क्या अपने बेटे का प्यार।

मम्मी: ऐसा नहीं है पर सुन तो प्लीज़ रुक ना।

और उसके सर को अपने हाथों में भर लिया और उसको अपनी तरफ़ किया और

मम्मी: तू क्या अपनी मम्मी के जिस्म से ही प्यार करता है उन बुक्स की तरह।

मैं ये सुनकर हैरान थी कि मम्मी भी आकाश की बुक्स पढ़ती हैं।

आकाश चौंक कर

आकाश: आपको कैसे पता।

मम्मी: चल पहले खड़ा हो तो।

आकाश इस बार खड़ा हो गया और उनकी आँखों में देखने लगा।

मम्मी मुस्कुरा कर

मम्मी: डर क्यों रहा है। जब अपनी मम्मी के कपड़े गंदे करके बाथरूम में रख सकता है बिना डरे तो अब क्यों डर रहा है।

मम्मी अब शायद मेरी तरह खुल के सामने आना चाहती थीं।

आकाश मम्मी को देखता रहा।

मम्मी: चल बता ये सब कैसे शुरू हुआ जो अपनी ही मम्मी के साथ ये सब हरकत कर रहा है।

आकाश इस बार थोड़ा खुला और

आकाश: मम्मी ये सब ऐसे ही शुरू हो गया। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं आपके साथ

और चुप हो गया।

मम्मी: बोलता जा सुन रही हूँ।

आकाश: ऐसे ही एक दिन मेरे दोस्त ने मुझे ये बुक दी। मुझे लगा कि कुछ होगा पर उसमें सब माँ-बेटे की स्टोरीज़ थीं तो मुझे शॉक्ड लगा कि ये कैसे हो सकता है और जब बुक के पन्ने पलटता रहा तो सब ऐसी ही कहानी थी।

और एक अजीब का पागलपन छाता चला गया और मैं वो सब ऑनलाइन भी सर्च करता रहा और पता नहीं कितने पन्ने खुलते रहे माँ-बेटे के तो धीरे-धीरे यक़ीन होने लगा कि ऐसा हो सकता है।

मम्मी: तो अपनी मम्मी पर ही ट्राई कर लिया।

आकाश: इस बार थोड़ा मुस्कुरा कर

हाँ ट्राई ही किया था पर पता नहीं था कि वो स्टोरीज़ सच होती हैं।

मम्मी: मतलब।

आकाश मम्मी के क़रीब आ कर

आकाश: अगर सच नहीं होती तो आप मेरे पास नहीं होतीं मम्मी मेरे पास नहीं होतीं।

और मम्मी को अपनी बाँहों में भर लिया तो मम्मी एकदम से पलट गईं पर आकाश ने वो किया जो मैंने नहीं सोचा था। मम्मी की गर्दन पर अपने होठ रख दिए और चूमने लगा और मम्मी की साड़ी का पल्लू गिरा दिया और इस बार आकाश ने मम्मी के बूब्स पर हाथ रखकर मम्मी के बूब्स दबा दिए और मम्मी सिसकारी लेने लगीं और उसके सर को अपने से चिपका लिया।

मम्मी: आआआह आकाश ये सब इन बुक्स का असर है मम्मी का नहीं।

आकाश: बुक्स का असर इतना है कि मम्मी के बारे में सोचने पर मजबूर किया पर बाक़ी का आपका असर है मम्मी जो आपके पास ये सब बड़े-बड़े हैं ना उनका असर है मम्मी उनका असर है आपके बेटे पर।

और मम्मी के दोनों बूब्स को खुल कर मसलने लगा और मम्मी के बूब्स इतने बड़े थे कि आकाश के हाथों में भी नहीं आ रहे थे।

मम्मी: आआआह आकाश मत कर बेटा।

आकाश: अब नहीं रुक सकता मम्मी। बहुत इंतज़ार किया है इस दिन का आपके बेटे ने कि कब मैं भी उन स्टोरीज़ की तरह अपनी मम्मी के साथ…….

मम्मी: मम्मी के साथ क्या बेटा उन स्टोरीज़ की तरह।

आकाश: उन स्टोरीज़ की तरह मेरी मम्मी मेरा अपने बेटे का साथ देंगी और मैं वो सब कर सकूँगा जो उन स्टोरीज़ के बेटे अपनी मम्मी के साथ करते हैं और उनकी मम्मी करने देती हैं।

मम्मी: सिसकते हुए क्या करने देती हैं उनकी मम्मी मेरे बेटे।

आकाश मम्मी के एक बूब्स को कस कर मसल देता है

आकाश: ये करने देती हैं अपने बड़े-बड़े बूब्स मसलने देती हैं।

मम्मी कुछ कह पातीं उससे पहले गेट पर किसी ने नॉक किया और आप यक़ीन नहीं करेंगे मम्मी ने जो बोला

मम्मी: कौन कुत्ता हरामज़ादा मर गया इस वक़्त।

और आकाश से अलग हो गईं और उसकी आँखों में देखकर अपने कपड़े सही करने लगीं और

मम्मी: तेरी मम्मी भी वही सब करने देगी अपने बेटे को पर उसे इस बात का ख़्याल रखना पड़ेगा कि उन स्टोरीज़ की तरह किसी को पता नहीं चलना चाहिए कि इन माँ-बेटे में ये सब हो सकता है।

और गेट खोलने के लिए किचन से बाहर आईं और मुझ पर नज़र पड़ी तो

मम्मी: कर ले अपने अरमान पूरे अपनी मम्मी और भाई की चुदाई देखने के।

और गेट खोलने लगीं।

गेट पर पड़ोस वाली आंटी थीं किसी काम से आई थीं और वहीं मम्मी से बात करके चली गईं। आकाश किचन से निकल कर अपने रूम में चला गया और मैं मम्मी के पास जा कर खड़ी हो गई थी।

आंटी के जाने के बाद

मम्मी: कुत्तिया को इसी वक़्त मरना था।

तो मैं मम्मी को देखकर

मैं: बड़ी जल्दी पड़ी है बेटे के लंड को अपने भोसड़े में लेने की।

मम्मी ने मुझ से पहली बार बोला जब से मेरी शादी फ़िक्स हुई है

मम्मी: अच्छा जब तू अपने होने वाले ख़सम से बात करने के लिए घंटों कमरे में बंद रहती है तो मैं तो कुछ नहीं बोलती।

मैं: मुस्कुरा कर हम तो बात करते हैं।

मम्मी: मुझे मत सिखा कि अकेले में तू क्या बात करती है। जब अपनी कच्छी मेरे धोने के लिए छोड़ देती है तो जब अपने बेटे के माल को पहचान सकती हूँ तो तेरा माल नहीं पहचान सकती जो अपनी कच्छी में निकाल देती है अपने ख़सम से बात करके। मुझे तो मेरा बेटा छेड़ रहा है पता रहा है।

अब मम्मी को क्या बताऊँ कि इन दोनों की चुदाई की सोच कर मेरा माल निकलता है ना कि मेरे ख़सम की वजह से।

पर अच्छा था कि मम्मी अब खुल रही थीं और मुझे मेरी शादी से पहले इन दोनों की चुदाई देखने को मिल जाए।

क्योंकि मैं बाहर आ गई थी तो आकाश अपने रूम से बाहर तभी आया जब पापा आ गए और उसके बाद खाना हुआ और किचन का काम ख़त्म करके मम्मी ऊपर छत पर जाने लगीं तो

मैं: मैं भी ऊपर आऊँ क्या चुदाई देखने के लिए।

मम्मी: तूने क्या मुझे उन स्टोरीज़ की तरह समझ रखा है कि बेटे के सामने इतनी आसानी से टाँगें खोल कर लेट जाऊँगी।

बेटा है मेरा तो आराम-आराम से खेलूँगी उसके साथ और मज़े लूँगी और दूँगी।

पर हाँ चुदाई तुझे तेरी शादी से पहले दिखा दूँगी जिससे तू अपने ख़सम से भी इसी तरह मज़े ले सके जैसे मैं अपने बेटे से लूँगी उसके नीचे आ के।

अगर तुझे देखना है कि हम क्या करते हैं आज तो तू झाँक कर देख ले कल की तरह।

और मुस्कुरा कर छत पर जाने लगीं और मैंने सब लाइट ऑफ़ की और मैं भी ऊपर आ गई और गेट जो बंद था उसमें से झाँकने लगी।

मम्मी और आकाश की चारपाई साथ-साथ ही होती थी।

तो अभी आकाश लेटा हुआ था और मम्मी अभी ऊपर आई थीं तो वो बैठी हुई आकाश को देख रही थीं और वो मम्मी को।

मम्मी: ऐसे क्या देख रहा है।

आकाश: उठ कर बैठ गया

देख रहा हूँ ये सपना है या हक़ीक़त कि जो मैंने सोचा वो सच होने जा रहा है।

मम्मी: और मेरे बेटे ने क्या सोचा था।

आकाश: यही कि मेरी मम्मी मुझे उसी तरह से प्यार करे जैसे उन बुक्स की मम्मी अपने बेटों को प्यार करती हैं।

मम्मी: और वो कैसे करती हैं।

आकाश: वो अपने बेटों की हर बात मानती हैं जो वो बोलते हैं वो करती हैं।

मम्मी: हर बात का मतलब।

आकाश: हर बात का मतलब अभी मैं अपनी मम्मी से बोलूँ कि नंगी हो जाओ तो वो हो जाती हैं।

मम्मी: पर मैं तो नंगी नहीं हूँ।

आकाश: क्योंकि आपके बेटे ने बोला नहीं है इसलिए।

मम्मी थोड़ा मुस्कुरा कर

मम्मी: इतनी कॉन्फ़िडेंस।

आकाश: क्योंकि मेरी मम्मी उन सब की मम्मी से बहुत अच्छी है और मैं जानता हूँ जो मेरे दिल में है वही मेरी मम्मी के दिल में है।

तभी मम्मी कुछ काम से खड़ी हुईं तो आकाश ने मम्मी की साड़ी पकड़ ली।

तो मम्मी उससे देखने लगीं।

आकाश: इसे उतार दो ना मम्मी काफ़ी गर्मी है।

और मम्मी की साड़ी पकड़ कर खींचने लगा।

और मम्मी अपनी तरफ़ पर ऐसे होने से मम्मी का सीना साफ़ दिख रहा था और आकाश की नज़र वहीं पर थी।

आकाश: उम्म कितने बड़े हैं मम्मी आपके।

तो मम्मी ने उसकी नज़र का पीछा किया और

मम्मी: तू मार खाएगा कुत्ते छोड़ मेरी साड़ी।

पर आकाश ने साड़ी तो छोड़ दी पर मम्मी को घुमा कर पकड़ लिया और उनकी कमर को पकड़ कर उनकी कमर कंधे और गले को चूमने लगा।

मम्मी: आआआह कुत्ते रुक जा हम छत पर हैं किचन में नहीं। कोई देख लेगा तो बदनामी हो जाएगी मेरे बेटे रुक जा।

पर मम्मी ज़ोर नहीं लगा रही थीं आकाश को रोकने के लिए।

आकाश: मत रोको मम्मी आज अपने बेटे को बहुत तड़पा हूँ इस दिन के लिए मम्मी मत रोको।

और उनकी आँखों में देखने लगा रुक कर तो मम्मी ने उसके सर पर हाथ रखा प्यार से और उसे देखने लगीं और उसे अपने आप से चिपका लिया तो आकाश ने अपने होठ मम्मी के पेट पर रख दिए और चूमने लगा।

मम्मी: आआह आकाश तेरी मम्मी भी तेरी हर बात मानेगी पर अभी तू मान ले ना छत पर कोई भी देख सकता है। अभी मान जा प्लीज़।

आकाश मम्मी की आँखों में देखकर एक बार अच्छे से उनके पेट को चूमा और उठ कर चारपाई पर बैठ गया तो मम्मी मुस्कुरा दीं।

मम्मी: जैसे मेरा बेटा मेरी हर बात मान रहा है वैसे ही उसकी मम्मी उसकी हर बात मानेगी।

और अपनी साड़ी पहनने लगीं आकाश की आँखों में देखते हुए।

जब भी ऊपर दो रूम थे पर फिर भी न मम्मी ने बोला उसमें चलने के लिए न आकाश ने बस दोनों एक-दूसरे की बात मान कर ख़ुश थे।

दोनों अपनी-अपनी चारपाई पर बैठ कर फिर से एक-दूसरे को देखने लगे।

मम्मी: क्या देख रहा है।

आकाश: कुछ नहीं सोच रहा हूँ कि क्या सच में मेरी मम्मी उन स्टोरीज़ की मम्मियों की तरह अपने बेटे के लिए कुछ भी करेगी।

मम्मी: आज माँ कर देख ले।

आकाश: अभी तो आपने मना कर दिया।

मम्मी: तुझे पता है यहाँ रिस्क है और अगर तू फिर भी चाहता है तो ये ले।

और मम्मी आगे को झुकीं तो उनका पल्लू फिर से गिर गया और उनके बूब्स दिखने लगे और मम्मी आकाश को देखकर मुस्कुरा दीं।

मम्मी: अब ख़ुश।

आकाश: नहीं मम्मी मुझे पता है ये स्टोरी नहीं हक़ीक़त है और मैं समझता हूँ कि यहाँ कोई भी देख सकता है।

तो मम्मी ने अपना पल्लू ऐसे ही छोड़ दिया और आकाश को देखते हुए

मम्मी: मैं तेरी हर बात मानूँगी मेरे बेटे बस इतना ख़्याल रखना कि किसी को कभी भी कुछ पता न पड़े नहीं तो हमारा परिवार किसी को मुँह दिखाने के लायक़ नहीं रहेगा।

आकाश: समझता हूँ मम्मी।

और उनका पल्लू ख़ुद अपने हाथों से उनके कंधे पर रख दिया।

मम्मी: मेरा बच्चा।

चल अब काफ़ी रात हो गई है सो जा अब।

आकाश: मम्मी नींद नहीं आ रही।

मम्मी: मुझे भी नहीं आ रही इसलिए कल से हम नीचे ही सोएँगे।

आकाश: मम्मी नीचे क्यों ये रूम है ना ऊपर।

मम्मी: पता है और काम आ सकते हैं।

पर मम्मी ने गेट की तरफ़ देखा मतलब मुझे और

मम्मी: पर यहाँ रूम की खिड़की से कोई अंदर झाँक सकता है इसलिए नीचे तेरे रूम में सोया करूँगी कल से जिससे मैं अपने बेटे की हर बात मान सकूँ।

और शर्मा गईं।

इसका मतलब था मम्मी चाहती थीं कि मैं उनकी चुदाई देख सकूँ इसलिए उन्होंने नीचे का प्लान बनाया था।

आकाश: हाँ मेरा रूम सही है।

पर पापा।

मम्मी: तुझे उनकी आदत पता है एक बार सोए तो सुबह ही उठते हैं।

आकाश: और दीदी।

मम्मी: गेट की तरफ़ देखते हुए

वो भी सो जाती है और तेरे होने वाले जीजाजी का फ़ोन आ जाता है तो वो लॉक लगा कर अंदर ही रहती है।

आकाश कुछ नहीं बोला और दोनों अपनी-अपनी चारपाई पर लेट गए पर एक-दूसरे की आँखों में देखते हुए।

आकाश: मम्मी।

मम्मी: बोल बेटा।

आकाश: मुस्कुरा कर आपका सब बड़ा है।

मम्मी: जैसे कि।

आकाश: धीरे से जैसे कि आपके ये बड़े-बड़े मुम्मे।

मम्मी: बेशर्म हो गया है तू।

आकाश: हाँ मम्मी जब से आपकी

मम्मी: मेरी क्या।

आकाश: जब से आपकी कच्छी और ब्रा को देखा है पागल हो गया हूँ।

मम्मी: आकाशhhhh चुप कर बेशर्म कोई सुन लेगा कितना सुनसान है यहाँ।

आकाश: कल बात करता हूँ।

मम्मी: मुझे भी करनी है।

और अपनी आँखें बंद कर लीं और मुस्कुराने लगीं और मैं नीचे आ गई क्योंकि अब जो होना है कल से होना है।

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