ससुरजी ने अकेले मे मेरी चूत फाड़ दी

Sasur bahu ki hardcore chudai story:- मेरा नाम नैना है और मेरी उम्र 24 साल की है। मेरी शादी को हुए 3 साल हो चुके हैं लेकिन अभी मुझे और मेरे पति को बच्चा नहीं चाहिए… इसलिए हम लोग फैमिली प्लानिंग कर रहे हैं। मैं आपको अपने जिस्म के बारे में बता दूँ। मैं एक खूबसूरत लड़की हूँ, बदन भरा हुआ है। मेरा रंग गोरा और फिगर 36-30-38 का है। मेरे जिस्म का मुख्य आकर्षण अंग मेरे बड़े-बड़े दूध और बड़ी सी गाँड है जिस पर किसी भी मर्द की निगाहें अटक जाना स्वाभाविक है।

मेरे ससुराल में मैं, मेरे पति, एक देवर और मेरे ससुर जी ही हैं। मेरी सास का देहांत हुए 12 साल हो चुके हैं और परिवार में हम चार लोग ही रहते हैं। शादी के समय मेरे पति अपना खुद का एक बिजनेस चलाते थे लेकिन उसमें लगातार नुकसान होने के कारण उन्होंने उसे बंद कर दिया और शादी के 9 महीनों बाद ही वो सूरत में जाकर नौकरी करने लगे। वो वहाँ अकेले रहते हैं और घर पर हम तीन लोग ही रह गए।

Sasur bahu ki hardcore chudai hindi sex story

दोस्तों, जब से मैंने जवानी की दहलीज पर कदम रखा, तब से ही सेक्स मेरी जिंदगी का हिस्सा बन गया था। स्कूल टाइम से ही मेरा एक बॉयफ्रेंड बन गया था, जिसके साथ मैंने चुदाई की शुरुआत कर दी थी। उसके बाद मेरे ही मोहल्ले में एक लड़के के साथ मेरा संबंध बना, जिसके साथ भी मेरा काफी समय तक जिस्मानी संबंध रहा। शादी के पहले ही मैं चुदाई करवाने की आदी हो चुकी थी। उसके बाद मेरी शादी हो गई और मैं अपनी ससुराल आ गई। इसके बाद मेरे पति के अलावा मेरा किसी के साथ कोई संबंध नहीं था। मेरे पति मुझे हर तरह से संतुष्ट कर देते थे, जिससे मुझे कभी किसी और मर्द की जरूरत नहीं पड़ी।

शुरू के 9 महीने तक तो वो साथ में रहे लेकिन उसके बाद वो सूरत चले गए और मैं अपने देवर और ससुर जी के साथ घर पर अकेली रहने लगी। वो छह महीने में एक बार ही आते थे और मुश्किल से एक हफ्ते रुकने के बाद चले जाते थे। मेरी आदत ऐसी थी कि मुझे तो रोज ही चुदाई का सुख चाहिए था लेकिन अब वो मुझे नहीं मिल रहा था। मैं रात में अपने कमरे में अकेली बिस्तर पर लेटी हुई करवट बदलती रहती थी और जब कभी मुझसे सहन नहीं होता था तो अपनी उंगलियों से ही अपने आप को शांत करने की कोशिश करती। लेकिन उससे भी मेरी प्यास नहीं बुझती थी।

धीरे-धीरे समय आगे बढ़ रहा था और मेरे बदन की प्यास बढ़ती जा रही थी। कई बार मेरे दिमाग में आया कि किसी मर्द को अपना दोस्त बनाया जाए, जिससे मेरी प्यास वैसे ही बुझती रहे जैसे कि शादी से पहले बुझती थी। लेकिन यह बहुत मुश्किल काम था क्योंकि मेरे घर ऐसा कोई आता-जाता भी नहीं था और मैं अकेली कहीं भी बाहर जाती नहीं थी जिससे मेरी किसी मर्द के साथ दोस्ती हो सके।

दोस्तों, दुनिया में इंसान हर चीज को कंट्रोल कर सकता है लेकिन चुदाई की भूख ऐसी चीज है कि उसे कंट्रोल नहीं किया जा सकता। और ऐसी स्थिति में ही लोग सारे रिश्ते-नाते भूल जाते हैं। मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ और मेरी गंदी निगाह मेरे देवर की तरफ जाने लगी। मेरा देवर जो कि मुझसे काफी छोटा है और उसकी उम्र 19 साल की है। वो दिखने में भी पतला-दुबला है लेकिन हॉट लड़की की भूख ये सब भूल चुकी थी। मुझे बस वो एक मर्द नजर आ रहा था जिसके पास एक लंड था, जिसकी मुझे जरूरत थी।

धीरे-धीरे मैं वासना की मारी उसके ऊपर डोरे डालने लगी। देवर-भाभी का रिश्ता भी मजाक का होता है जिससे किसी को शक भी नहीं होता था। घर पर मैं गाउन ही पहनती थी और उसे अपनी ओर आकर्षित करने के लिए अंदर ब्रा और चड्डी नहीं पहनती थी ताकि मेरा गाउन मेरे जिस्म पर चिपका रहे और मेरे अंदर के अंग उसके सामने झलकते रहें। मैं जानबूझकर उसके सामने झुककर काम किया करती ताकि मेरे दूध उसे दिखें और उसके बदन में भी गर्मी आ जाए। उसके सामने जब मैं बिस्तर पर या सोफे पर लेटती तो अपने गाउन को घुटनों के ऊपर तक उठा लेती ताकि मेरी गोरी जाँघ पर उसकी नजर पड़े। जब कभी भी मैं उसके साथ बाइक पर कहीं जाती तो उससे चिपककर बैठती और अपने सीने को उसकी पीठ पर दबाती ताकि मेरे दूध का स्पर्श उसे मिले। अब ये मेरा रोज का काम हो गया था।

जब भी ससुर जी घर पर नहीं होते तो मैं उसके सामने बार-बार जाती और किसी न किसी बहाने से अपना अंग प्रदर्शन करती। लेकिन मेरे ऐसा करने का उस पर किसी भी प्रकार से कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा था। वो एक पढ़ाकू किस्म का लड़का है और अपनी पढ़ाई में ही खोया रहता था। मेरे अंग प्रदर्शन करने से उसके अंदर कुछ होता ही नहीं था। अब मैं सीधा उसका लंड तो पकड़ नहीं सकती थी। बस मुझे उसके द्वारा एक इशारे का इंतजार था लेकिन वो मुझे बिल्कुल भी भाव नहीं दे रहा था। कई महीनों तक मेरे द्वारा ये खेल चलता रहा लेकिन कोई परिणाम नहीं निकलता देख मैंने अब आर या पार करने की सोच ली।

अब मैं ऐसा कुछ करना चाहती थी, जिससे कि मेरे देवर का दिमाग हिल जाए और वो मेरा दीवाना हो जाए। इसलिए एक दिन सुबह 10 बजे तक मैंने घर का सारा काम खत्म कर लिया। घर पर मैं और मेरा देवर ही थे और ससुर जी किसी काम से बाजार गए हुए थे। मेरा देवर सोफे पर लेटा हुआ टीवी देख रहा था। उसी समय मैं नहाने के लिए बाथरूम चली गई। करीब 20 मिनट नहाने के बाद मैं चड्डी और ब्रा पहनी और अपनी चड्डी को और ऊपर की ओर सिकोड़ ली, जिससे कि मेरे बड़े-बड़े चूतड़ चड्डी के बाहर निकल आए। ऐसे ही ब्रा और चड्डी पहने हुए मैं बाथरूम से बाहर निकल आई। मैंने सोफे पर लेटे हुए अपने देवर को ऐसे अनदेखा किया जैसे कि मैंने उसे देखा ही नहीं था। बिना सोफे की तरफ देखे हुए हाथ में गीला तौलिया लिए मैं सोफे के सामने से गुजरी और थोड़ा आगे जाने के बाद जानबूझकर तौलिया नीचे फर्श पर गिरा दिया।

सोफे की तरफ मेरी पीठ थी और मैंने झुककर तौलिया उठाया, उसके बाद मैंने एक उंगली से अपनी चड्डी को ठीक की, जो कि मेरी गाँड की दरार पर घुस गई थी। मैं जान रही थी कि मेरे देवर की नजर गाँड से चड्डी ठीक करते हुए मुझ पर पड़ी होगी और उसने मेरी गाँड को गौर से देखा होगा। चड्डी ठीक करते हुए मैं धीरे-धीरे अपने कमरे की तरफ बढ़ रही थी। फिर मैंने सोचा कि पलटकर अपने देवर को देखूँ कि उसका क्या हाल है। मैंने अपने बालों को झटकारते हुए अपना सर पीछे की तरफ किया और पीछे का नजारा देखकर मेरे पैरों के नीचे से जमीन सरक गई।

दोस्तों, सोफे पर उस वक्त मेरा देवर नहीं बल्कि मेरे ससुर जी लेटे हुए थे और वो एकटक मुझे घूर रहे थे। मेरी गाँड फट गई और मैंने जोर से दौड़ लगाई और अपने कमरे में चली गई। कमरे में पहुँचकर मेरी साँसें तेजी से चल रही थीं, दिल की धड़कन अपने पूरी रफ्तार में थी। मेरे हाथ-पैर काँप रहे थे। मेरे दिमाग में बस एक ही बात आई कि ये क्या हो गया। मेरा देवर कहाँ गया और ससुर जी वहाँ कब आ गए? मैंने अपना माथा ठोकते हुए खुद से कहा कि मुझसे ये क्या हो गया। ये सब देखकर ससुर जी क्या सोचते होंगे? मैं उनके सामने ब्रा-चड्डी में कैसे चली गई और मेरी ऐसी गंदी हरकत देख वो क्या सोच रहे होंगे।

मैंने अपने कपड़े पहने और काफी देर तक बिस्तर पर बैठकर इस घटना के बारे में सोचती रही कि अब कैसे बाहर जाऊँ, ससुर जी क्या सोचेंगे। इधर खाना बनाने का समय होता जा रहा था और किसी तरह से मैं नजरें नीचे किए हुए बाहर निकली। उस वक्त बाहर कोई नहीं था और मैं जल्दी से किचन में चली गई। खाना बनाने के बाद मैंने नजरें नीचे किए हुए देवर और ससुर को खाना दिया और खाना खाने के बाद अपने कमरे में आ गई। कुछ दिनों तक मैं ऐसी कोई भी हरकत नहीं की क्योंकि मेरे अंदर काफी डर समा गया था। लेकिन कुछ दिनों बाद मेरे अंदर वासना का कीड़ा फिर से मचलने लगा।

मैंने अपने देवर के सामने अपनी हरकतें फिर से शुरू कर दीं, लेकिन मेरी किसी भी हरकत का उस पर कोई असर नहीं पड़ रहा था। ऐसे ही एक दिन मैं गाउन पहने हुए घर का काम कर रही थी। उस दिन मैंने अंदर चड्डी नहीं पहनी थी जिससे मेरा गाउन बार-बार मेरी गाँड की दरार में घुस रहा था। मैं बार-बार अपनी गाँड से गाउन को बाहर निकाल रही थी। उस वक्त मैं घर पर अकेली ही थी। फिर अचानक से मेरी गाँड के छेद में जोरों से खुजली हुई और मैं उंगली से गाउन के ऊपर से ही छेद को जोर-जोर से खुजाने लगी। उसी समय मेरे ससुर का आना हुआ और उन्होंने मुझे अपनी गाँड खुजाते हुए देख लिया।

जैसे ही मेरी नजर उन पर पड़ी, मैं तुरंत वहाँ से चली गई। मैं सोच में पड़ गई कि ‘हे भगवान… ये सब क्या हो रहा है। मेरी ऐसी हरकत बार-बार ससुर जी क्यों देख लेते हैं।’ काफी दिनों तक ऐसा ही सब चलता रहा। फिर एक दिन मुझे पता चला कि मेरा देवर अपनी पढ़ाई के लिए बाहर जाने वाला है। उस दिन मेरी सारी उम्मीदें टूट गईं और मैं समझ गई कि अब मेरा कुछ नहीं हो सकता। कुछ दिन बाद ही मेरा देवर पढ़ाई के लिए बाहर चला गया और अब मैं और ससुर जी ही घर पर अकेले रह गए। मेरी जिंदगी भी पहले की तरह चलती रही और अभी भी मुझे अपनी उंगलियों का ही सहारा लेना पड़ता था।

लेकिन दोस्तों, मैंने कई बार गौर किया कि ससुर जी का नजरिया पहले से बदल गया था। उनका मुझे देखने का तरीका, मुझसे बात करने का तरीका, इन सबमें काफी फर्क आ गया था। अब वो हमेशा मेरे लिए कुछ न कुछ खाने के लिए लाने लगे, मेरे लिए साड़ी खरीद कर लाने लगे और यहाँ तक कि मेरे लिए गाउन भी खरीद लाते थे। इससे पहले वो कभी ऐसा नहीं करते थे इसलिए मुझे उन पर थोड़ा शक होने लगा था।

अब जब भी मैं साड़ी पहनती तो उनकी नजर मेरे पेट पर और कमर पर टिक जाती थी। मैं घर का काम करती रहती और उनकी नजर मुझे ही देखती रहती थी। धीरे-धीरे ऐसा होना शुरू हो गया कि जब भी मैं उन्हें चाय-पानी देने जाती तो वो मेरे हाथों को छूने लगे। उनकी निगाहों में मुझे मेरे प्रति हवस साफ-साफ दिखाई दे रही थी। मेरे ससुर की उम्र 54 साल है और वो शरीर से काफी हट्टे-कट्टे मर्द हैं। उनके शरीर पर बुढ़ापे का एक भी असर नहीं दिखाई देता और वो अभी पूरी तरह फिट हैं। लेकिन वो थे तो मेरे ससुर ही… और मैं उनके लिए ऐसी गंदी बात सोच भी नहीं सकती थी।

अब कोई मुझे गलत समझे या सही… अपनी वासना से मजबूर होकर मैं भी उनके प्रति झुकने लगी। जिस्म की आग तो मेरे अंदर भी लगी हुई थी और मैंने भी उनको जलाना शुरू कर दिया और मैं जानबूझकर उनके सामने झुककर काम करने लगी, जिससे मेरे बड़े-बड़े गोरे दूध उनको नजर आएँ। धीरे-धीरे मैं उनके साथ वैसा ही करने लगी, जैसा मैं अपने देवर के साथ किया करती थी। मेरे ससुर इस मामले में होशियार थे और वो मेरी इन हरकतों को अच्छे से भाँप गए। जल्द ही वो मुझे देखकर मुस्कुरा देते और उन्हें देखकर मेरे चेहरे पर भी हल्की मुस्कुराहट आ जाती।

अब हाल ये हो गया था कि दोनों के बदन पर बारूद लगा हुआ था, बस कमी थी उस बारूद में आग लगाने की। लेकिन पहल कोई भी नहीं कर रहा था। दोनों के ही मन में एक-दूसरे का डर था क्योंकि दोनों का रिश्ता ही ऐसा था और ऊपर से हम दोनों की उम्र भी एक-दूसरे से मेल नहीं खाती थी। मेरे ससुर मुझसे 30 साल के बड़े थे। इधर मैंने भी सोच लिया था कि अगर ससुर जी ने मेरे साथ कुछ करना चाहा, तो मैं उन्हें मना नहीं करूँगी क्योंकि मुझे अपने जिस्म की आग अब बरदाश्त नहीं हो रही थी।

हम दोनों ही घर पर अकेले रहते थे। मैं उन्हें रिझाने के लिए अक्सर गाउन के अंदर चड्डी-ब्रा नहीं पहनती थी जिससे गाउन मेरे जिस्म पर चिपका रहता था और मेरे अंदर के अंग गाउन से झलकते थे, जिन्हें देखने के लिए मेरे ससुर बार-बार मेरे सामने आते थे। हम दोनों के बदन में ही चुदाई की गर्मी भरती जा रही थी और हम दोनों ही जानते थे कि दोनों के दिल में क्या चल रहा है लेकिन किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी कि किसी को कुछ बोले या आगे बढ़कर पहल करे। फिर साल 2020 में अचानक से सारे देश में लॉकडाउन लग गया।

इस बीच न हम लोग कहीं जाते थे और न ही हमारे यहाँ कोई आता था। मेरे पति और देवर का भी आना मुश्किल हो गया था क्योंकि सभी साधन बंद हो चुके थे। अब मैं और ससुर जी सारा दिन घर पर ही रहते। इस बीच हम दोनों के बीच की वासना अपने चरम पर पहुँच गई। ससुर जी की हवस भरी नजरें मुझे बेहद ही गंदी तरह से देखने लगीं और अब मुझसे भी अपने आप पर कंट्रोल नहीं होता था। मैं रोज अपनी उंगलियों से अपने आप को शांत करने लगी लेकिन फिर भी मेरा बदन किसी मर्द को पाने के लिए उतावला हो गया था। आखिर में वो दिन आ ही गया जब हम दोनों का सब्र टूट गया।

हुआ यूँ कि एक दिन शाम को खाने से पहले मैं खाना खाने के लिए ससुर जी को बुलाने उनके कमरे में गई। उस वक्त वो बिस्तर पर बैठे हुए थे और सामने मेज पर शराब रखकर पी रहे थे। मैं उन्हें खाने के लिए बोली और वापस चली आई। कुछ समय बाद वो खाना खाने के लिए आए और हम दोनों ने खाना खाया। खाना खाने के बाद मैं साफ-सफाई करने लगी और फुर्सत होकर अपने कमरे में जाने लगी। तभी मेरे ससुर जी ने मुझे आवाज लगाई। मैं उनके कमरे में गई तो उन्होंने मुझसे पानी लाने के लिए कहा।

मैं पानी का जग लेकर उनके पास गई और उन्होंने पानी अपने दारू वाले गिलास में भरा और बाकी का जग का पानी अपने जग में भर लिया। फिर उन्होंने दारू का एक सिप पिया। जब मैं उनसे खाली जग वापस लेने लगी तो उन्होंने मेरे हाथों को बड़े प्यार से सहलाया और मुझे देखते हुए मुस्कुरा दिए। उन्हें देखकर मेरे चेहरे पर भी मुस्कान की लहर आ गई। ऐसा होना हम दोनों के लिए अब आम बात हो गई थी। तभी अचानक से ससुर जी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और एक झटके में मुझे अपनी ओर खींचकर मुझे अपनी गोद में बिठा लिया। मैं उनसे छूटने के लिए जोर लगाने लगी और बोली—

मैं: ये क्या कर रहे हैं आप पापा जी… छोड़िए ये सब गलत है। आपने ज्यादा पी ली है शायद इसलिए भूल गए हैं कि मैं आपकी बहू हूँ।

ससुर जी: हाँ मैंने ज्यादा पी ली है नैना और ये कुछ भी गलत नहीं है। नैना, हम दोनों ही को पता है कि हम एक-दूसरे से क्या चाहते हैं। आज तुम मुझे मत रोको। तुम भी एक मर्द का साथ पाने के लिए तड़प रही हो।

मैं: नहीं नहीं पापाजी, आप मुझे छोड़ दीजिए। ये सब किसी को पता चल गया तो बड़ी बदनामी होगी, आप इस बात को समझिए।

ससुर जी: जब कोई किसी को बताएगा, तभी तो किसी को पता चलेगा। जो बात रहेगी, हम दोनों के बीच रहेगी।

इतना कहते हुए उन्होंने मेरी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया और मेरी चिकनी कमर को कसकर पकड़ लिया। वो मेरे गालों को चूमने लगे। मैं मचल रही थी और बोले जा रही थी—

मैं: नहीं पापाजी, ऐसा मत कीजिए।

लेकिन मजा मुझे भी आ ही रहा था और मैं केवल झूठा विरोध कर रही थी। कुछ देर में मेरा विरोध भी खत्म हो गया और मैं भी उनसे लिपट गई। मन ही मन मैं बहुत खुश हो रही थी और सोच रही थी कि अच्छा हुआ कि आज ससुर जी ने शराब पी ली, जिससे उनके अंदर इतनी हिम्मत आ गई कि उन्होंने शुरुआत कर दी। कुछ देर मेरे गालों को चूमने के बाद उन्होंने मेरे चेहरे का दोनों हाथों से थामा और मेरे होठों पर अपने होंठ लगा दिए। मैं भी उनके होठों से होंठ लगाकर उनको चुंबन में साथ देने लगी थी, साथ ही मैं अपने हाथों से उनके बालों को सहलाने लगी थी।

वो भी समझ गए थे कि चिड़िया ने दाना चुग लिया है। वो मेरे मुँह में अपनी जीभ डालने की कोशिश करने लगे थे। खुद मैं इतनी जोश में आ गई थी कि अपनी जीभ निकालकर उनके मुँह में डालने लगी जिसे वो अपने दाँतों से हल्के-हल्के काटते हुए चूसने लगे। मैं उनकी जाँघ पर बैठी हुई थी और उन्होंने मेरी साड़ी कमर तक निकाल दी थी। मेरे सामने टेबल पर ससुर जी का दारू का ग्लास बना रखा था। मुझे प्यास लग रही थी और मेरा गला सूख रहा था। मैंने झट से उनका पेग उठाया और एक ही साँस में हलक के नीचे उतार लिया। ससुर जी ने ये देखा तो मुस्कुरा दिए। मैं उनकी बाँहों में अतृप्त यौवना सी मचल रही थी। अब मेरे अंदर भी शराब की मस्ती छाने लगी थी।

फिर उन्होंने मुझे अपनी बाँहों में जकड़ लिया और बिस्तर पर खींच लिया। बिस्तर पर ले जाकर उन्होंने तुरंत अपनी बनियान निकाल दी और मेरी साड़ी को भी अलग कर दिया। एक झटके में वो मेरे ऊपर आ गए और मेरे चेहरे को जोर-जोर से चूमने लगे। हम दोनों ही बेहद उतावले हो गए थे और एक-दूसरे को तेजी से चूम रहे थे। कुछ देर बाद ससुर जी मेरे ब्लाउज के बटन खोलने लगे, लेकिन मेरे दूध के कसाव के कारण बटन खुल नहीं रहा था। ससुर जी बेहद उतावले हो चुके थे और उन्होंने दोनों हाथों से ब्लाउज को पकड़ा और एक झटके में सामने से ब्लाउज फाड़ दिया, जिससे सारे बटन टूट गए। अंदर ब्रा नहीं होने के कारण मेरे दोनों दूध एक झटके में उछलकर उनके सामने तन गए। मेरे बड़े-बड़े तने हुए दूध देखकर ससुर जी जैसे पागल से हो गए। उन्होंने मेरे मम्मों पर हमला बोल दिया और अपने दाँतों से मेरे निप्पलों और स्तनों को बारी-बारी से काटने लगे। मेरे बड़े-बड़े दूध पर वो जगह-जगह काटे जा रहे थे और मैं मचलती जा रही थी—

मैं: आआह्ह हाहा आह्ह पापा जी आआ हह कैसे कर रहे हैं… आआ हह दर्द हो रहा है पापा जी… आओओच आआ आह्ह।

ससुर जी मेरे मम्मों को बिल्कुल निचोड़ रहे थे और मुझे काफी तकलीफ हो रही थी लेकिन मैं भी उस समय पूरे जोश से भरी हुई थी और अपनी शर्म को दूर करते हुए अपने आप को उनको सौंप चुकी थी। वो दोनों हाथों से मसलते हुए दोनों मम्मों को बुरी तरह से चूम रहे थे। फिर वो अपना एक हाथ नीचे ले जाकर मेरे पेटीकोट के अंदर डालने लगे लेकिन मैंने उनका हाथ पकड़ लिया। मेरे रोकने के बावजूद उन्होंने अपना हाथ अंदर डाल दिया और मेरी जाँघ को सहलाते हुए अपना हाथ मेरी चूत तक ले गए। मैंने चड्डी भी नहीं पहनी थी और उनका हाथ मेरी चूत पर चला गया। उन्होंने अपने अंगूठे से चूत को मसलना शुरू कर दिया और चूत से निकल रहा पानी उनके अंगूठे पर लग रहा था जिससे अंगूठा चिपचिपा हो गया और उन्होंने अंगूठा चूत में डाल दिया।

मैं: ओएएएएए आआह्ह आह्ह नहींईईईई रुकिए आआह्ह रुकिए।

फिर उन्होंने पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और एक झटके में पेटीकोट नीचे खींच दिया। अब मैं पूरी तरह से नंगी हो गई थी। उन्होंने भी अपनी चड्डी निकाल दी और पहली बार मैंने उनका लंड देखा। लंड देखकर ही मैं समझ गई कि ये मेरी हालत खराब कर देंगे। उनका लंड लगभग 8 इंच लंबा और काफी मोटा था। उन्होंने मेरी चूत को देखा और मेरे दोनों पैरों को एक साथ झटके से फैला दिया और अपना मुँह चूत पर लगाकर चाटने लगे। मैं जोर-जोर से उछलने लगी क्योंकि उनके चाटने से मुझे काफी गुदगुदी हो रही थी—

मैं: आह्ह हाहाह आआह्ह ओएएएएए माँ आओओच ओह होह रुकिए आआह्ह!

जल्द ही मेरी चूत पानी से भर गई थी। मेरे ससुर भी काफी उतावले हो गए थे और वो तुरंत ही मुझे चोद लेना चाहते थे। वो मेरे ऊपर आ गए और मेरे पैरों को फैलाकर लंड को चूत में लगाया और तुरंत एक धक्का लगा दिया। लंड चूत को फैलाते हुए आधा अंदर तक घुस गया। तुरंत ही उन्होंने दूसरा धक्का भी लगा दिया और लंड चूत के आखिरी छोर तक पहुँच गया—

मैं: ओएएएएए मम्मी रेरे… मर गई।

मुझे हल्का ही दर्द हुआ लेकिन बहुत अच्छा लगा। कई दिनों बाद मेरी चूत ने लंड का स्वाद चखा था। ससुर जी ने मुझे जकड़ लिया और अपने दोनों हाथों को मेरी पीठ पर लगाकर मुझे अपने सीने से लगा लिया। अब उन्होंने दनादन धक्के लगाना शुरू कर दिए।

मैं: आह्ह आह्ह ओएएएएए ओएएएएए धीरे-धीरे आह्ह आओओच आह्ह…

ऐसी आवाज पूरे कमरे में गूँजने लगी। जिस हिसाब से वो मुझे चोद रहे थे उससे मुझे पक्का यकीन हो गया कि ससुर सेक्स के एक माहिर खिलाड़ी हैं और इनके साथ मुझे बहुत मजा आने वाला है। ऐसी चुदाई करने का स्टाइल न मेरे बॉयफ्रेंड का था और न ही मेरे पति का… और न ही ऐसा लंड ही उन दोनों के पास था। ससुर जी को चोदते हुए करीब 2 मिनट ही हुए थे कि उन्होंने अपना सारा माल मेरी चूत में उड़ेल दिया। अब तक तो मैं झड़ी भी नहीं थी लेकिन मैं जानती थी कि इनका पहला बार है अभी और वो काफी उतावले होकर चोद रहे थे। इसके बाद उनका समय और ज्यादा होने वाला है। क्योंकि पहली बार सभी का जल्दी ही निकल जाता है।

फिर ससुर जी उठे और बगल में लेट गए। कुछ देर बाद मैंने भी अपने पेटीकोट से अपनी चूत को पोंछा और चादर ओढ़कर लेट गई।

मैं और ससुर जी एक बार चुदाई करने के बाद बिस्तर पर लेटे हुए थे। मैंने तो चादर ओढ़ रखी थी लेकिन ससुर जी ऐसे ही खुले में नंगे लेटे हुए थे। जल्द ही उनका बड़ा सा लंड सिकुड़कर बैठ गया। ससुर जी का बदन पसीने से भीग चुका था और वो आँख बंद किए लेटे हुए थे। मैं भी लेटी हुई पहली चुदाई के बारे में सोच रही थी। हम दोनों के बीच आज से एक नए रिश्ते की शुरुआत हो गई थी लेकिन इस रिश्ते को हम दोनों ही किसी के सामने नहीं ला सकते थे। मुझे खुशी इस बात की थी कि अब मुझे अपनी प्यास बुझाने के लिए घर पर ही एक लंड का सहारा मिल गया था। भले ही वो मेरे ससुर हैं और मेरे बाप की उम्र के थे लेकिन हम दोनों ही एक-दूसरे की प्यास बुझाने के लिए यह सब कर रहे थे।

मुझे इस बात का बिल्कुल भी पछतावा नहीं था क्योंकि अगर मैं बाहर किसी से चुदाई करवाती तो भी बदनामी होनी ही थी। इससे अच्छा है कि घर में ही मुझे अब सब कुछ मिल जाएगा। यही सब सोचते हुए मैं ससुर जी के लंड की तरफ देख रही थी जो कि सिकुड़ गया था और उसका सुपाड़ा बाहर निकला हुआ मेरी तरफ ही था। इतने बड़े सुपाड़े को मैं पहली बार ही देख रही थी क्योंकि इतना बड़ा लंड और सुपाड़ा न तो मेरे बॉयफ्रेंड का था और न ही मेरे पति का। कुछ देर बाद मेरे ससुर जी ने अपनी आँख खोली और मेरी तरफ देखा। मैंने शर्म से अपनी आँखें बंद कर लीं। उन्होंने मुझसे कहा—

ससुर जी: नैना, तुम चिंता न करो, ये सब बात कभी किसी को पता नहीं चलेगी। हम दोनों ही इस बात को गुप्त रखेंगे।

मैंने भी अपना सर हिलाकर सहमति जताई। इसके बाद ससुर जी ने मेरे चादर को एक झटके में हटा दिया और मेरा हाथ पकड़कर मुझे अपने ऊपर खींच लिया। इसके बाद तो हम दोनों फिर से गुत्थमगुत्था होने लगे। कभी मैं ससुर जी के ऊपर आती, कभी वो मेरे ऊपर आते। इस तरह हम दोनों ही बिस्तर पर पलटते रहे। कुछ देर बाद हम दोनों रुके और मैं ससुर जी के ऊपर थी। मेरे बड़े-बड़े दूध उनके सीने पर दबे हुए थे। उन्होंने मेरे सर को नीचे किया और मेरे होठों को चूमने लगे। मैं भी उनका साथ देने लगी। ससुर जी अपने दोनों हाथों से मेरे उभरे हुए चूतड़ों को सहलाते हुए दबा रहे थे।

फिर मेरे चूतड़ को फैलाकर अपनी एक उंगली को गाँड के छेद पर रगड़ते हुए नीचे चूत तक ले जाते और उंगली को चूत में डाल देते। उनके बार-बार ऐसा करने से मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था और मैं अपनी जीभ ससुर जी के मुँह के अंदर डालने लगी, जिसे वो बड़े प्यार से चूस लेते। मेरे पेट में उनका गरम-गरम लंड महसूस हो रहा था जो कि अब पूरी तरह से खड़ा हो गया था और उनका सुपाड़ा मेरी नाभि में घुस रहा था। उनके लंड से निकल रहा चिपचिपा पानी मेरी नाभि को गीला कर चुका था। फिर कुछ देर बाद ससुर जी ने मेरे दोनों निप्पलों को अपने सीने के बगल से बाहर निकाला क्योंकि मेरे दूध उनके सीने में दबे हुए थे। वो मेरे दोनों निप्पल को चुटकी में लेकर मसलने लगे। ऐसा करने से मेरे बदन के अंदर करंट सा दौड़ने लगा और मैं अपने दूध को उनके सीने पर रगड़ने लगी। उनके सीने पर बहुत बाल थे जिसके कारण जल्द ही मेरे दूध पर कई जगह जलन होने लगी।

फिर ससुर जी ने मुझे अपने ऊपर से उठाया और खुद घुटनों पर बैठ गए। उन्होंने मुझे अपने ऊपर आने का इशारा किया। मैंने भी अपनी दोनों टाँगें फैलाईं और उनकी कमर में टाँग डालकर उनके गले में अपनी बाँहें डाल दीं। ससुर जी ने नीचे से मेरे चूतड़ को एक हाथ से थामते हुए मुझे सहारा दिया और मुझे चूमने लगे। कभी गाल पर कभी गले पर, कभी होंठ पर कभी सीने पर। वो एक हाथ से मेरी गदरी हुई पीठ को सहलाते जा रहे थे। मैं भी आँख बंद किए उस हसीन पल का मजा ले रही थी। कुछ देर में ही मेरी चूत पानी से भर गई और टप-टप करते हुए पानी ससुर जी के हाथ में गिरने लगा। ससुर जी ने उस पानी को मेरी गाँड पर लगाने लगे। जल्द ही मेरी गाँड पूरी तरह से चिपचिपा गई। अब ससुर जी ने अपने नीचे लगाए हुए हाथ की एक उंगली मेरी चूत में डाल दी।

मैं: ओएएएएए अम्मा… हाय आह्ह।

ससुर जी उंगली को अंदर-बाहर करने लगे जिससे कि पोच-पोच की आवाज निकल रही थी।

मैं: ये क्या कर रहे हैं आह्ह!

ससुर जी: यही सब में तो मजा आता है, तू बस मजा लेती रह!

कुछ देर तक ऐसे ही मैं उनसे लिपटी रही। फिर उन्होंने अपने लंड को चूत में रगड़ना शुरू कर दिया। वो बोले—

ससुर जी: ऐसे ही डाल रहा हूँ मजा आएगा।

ऐसा बोलते ही उन्होंने लंड अंदर डाल दिया और मेरी गाँड को जोर से अपनी तरफ दबा लिया जिससे उनका पूरा लंड एक बार में ही अंदर तक समा गया। ससुर जी ने मेरी कमर को थामा और मुझे ऊपर-नीचे करने का इशारा किया।

मैं अपनी कमर को नागिन की तरह लहराने लगी जिससे लंड अंदर-बाहर होने लगा। ऐसा मैंने कभी नहीं किया था और मुझे इस पोजीशन में काफी मजा आ रहा था। ससुर जी भी दोनों हाथों से मेरी गाँड को थामे हुए गाँड को आगे-पीछे कर रहे थे और उनका लंड मेरी चूत में बिल्कुल अंदर तक जा रहा था। इसके बाद ससुर जी ने मुझसे कहा—

ससुर जी: तुम घुटनों पर होकर बैठ जाओ।

और मैं वैसे ही हो गई। वो मेरे पीछे आए और मेरी गाँड की तरफ से मुझे जकड़ लिया। अब वो लंड चूत में डालकर हल्के-हल्के से मुझे चोदने लगे। इस पोजीशन में भी मुझे काफी मजा मिल रहा था लेकिन मैं चाह रही थी कि ससुर जी मुझे जोर-जोर से चोदें जिससे मेरा पानी निकल जाए। कुछ देर ऐसे चोदने के बाद ससुर जी ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और मेरे दोनों पैरों को फैला दिया। एक बार फिर से वो मेरी चूत को चाटने लगे। उन्होंने मेरी चूत को हाथ से फैलाया और मेरे चूत के दाने, जिसे कुछ लोग लहसुन भी कहते हैं, उसे अपने मुँह में भरकर चूसने लगे। मुझे उस वक्त फुल सेक्स का असीम आनंद मिल रहा था।

मैं: सीईईईईई ईईई ओएएएएए आह्ह आह्ह।

की आवाज के साथ मैं उस मजे को ले रही थी। कुछ देर बाद ससुर जी मेरे ऊपर आ गए और उन्होंने एक झटके में अपना लंड चूत में पेल दिया। इस बार उनकी रफ्तार शुरू से ही काफी तेज थी और वो दनादन मेरी चुदाई शुरू करने लगे थे। मैंने बिस्तर की चादर को जोर से पकड़ लिया और आँख बंद किए हुए लंड का मजा लेती रही। सारा कमरा मेरी आवाजों से गूँज रहा था। ससुर जी ने मेरे एक हाथ को ऊपर की तरफ उठा लिया और मेरे अंडरआर्म को चाटने लगे। पूरा पलंग उनकी चुदाई से बुरी तरह से हिल रहा था। मेरी चूत पानी से भर गई थी और फच-फच की आवाज निकल रही थी। इस पोजीशन में उन्होंने मुझे करीब 10 मिनट तक बुरी तरह से चोदा, जिससे मैं झड़ गई और उनसे लिपट गई।

अभी भी ससुर जी मुझे चोदे जा रहे थे और उनका पानी निकलने का नाम नहीं ले रहा था। कुछ देर बाद ससुर जी ने मुझे बिस्तर से बाहर उतार कर मुझे खड़ी कर दी और मेरे पीछे आ गए। मेरी कमर को दोनों हाथ से थाम लिया और लंड मेरी गाँड की तरफ से चूत में डालकर जोर-जोर से चोदने लगे। मुझे खड़े होते नहीं बन रहा था क्योंकि उनके हर धक्के से मैं आगे की ओर चली जाती थी। उन्होंने मुझे बुरी तरह से जकड़ लिया और अपनी पूरी ताकत से मुझे चोदने में लगे थे। इस बीच मैं दूसरी बार भी झड़ गई और मेरी चूत का पानी फर्श पर गिरने लगा। ससुर जी ने मुझे अपनी तरफ घुमाया और मेरा एक पैर उठाकर पलंग पर रख दिया और अब सामने से चूत में लंड डाल दिया। मैं उनके गले में बाँहें डालकर एक पैर पर खड़ी थी और वो मेरी गाँड को थामे हुए जोर-जोर से चोदने लगे। बीच-बीच में वो मेरी जाँघ को सहला रहे थे और अपने सीने से मेरे दूध को दबाए जा रहे थे। ससुर जी को मुझे चोदते हुए अभी तक आधा घंटा हो गया था और मैं दो बार झड़ गई थी लेकिन उनका पानी नहीं निकल रहा था। मैं जानती थी कि ये लंबे रेस के घोड़े हैं और अब वो वैसा ही कर भी रहे थे।

उन्होंने इस पोजीशन में चोदते हुए मेरे गदरे जिस्म को निचोड़ लिया था। सारा बदन पसीने से भीग चुका था और मेरी हालत खराब हो गई थी। फिर एकाएक ससुर जी ने अपनी रफ्तार काफी तेज कर दी और मेरे अंदर ही झड़ गए। उनके गरम-गरम पानी के कारण मैं भी उसी समय झड़ गई। ये मेरा झड़ने का तीसरा अवसर था। इस धुनाधार चुदाई से हम दोनों ही बेहद बुरी तरह से थक गए थे और जल्द ही दोनों लोग नंगे बदन ही सो गए। सुबह 8 बजे मेरी नींद खुली। उस वक्त भी हम दोनों नंगे एक-दूसरे से लिपटे हुए सो रहे थे। मैं ससुर जी से अलग हुई और अपने कपड़े लेकर बाथरूम चली गई। नहा-धोकर हम दोनों ने चाय-नाश्ता किया।

जब मैं रसोई में दोपहर का खाना बना रही थी, उस वक्त ससुर जी बाहर कमरे में बैठे हुए मुझे देख रहे थे। मैं उस वक्त केवल गाउन पहनी हुई थी। अचानक से ससुर जी रसोई में आए और पीछे से मुझे जकड़ लिया और मेरे गाउन को कमर तक उठा लिया। मैं दोनों हाथ से आटा गूंध रही थी। मैंने उनसे कहा—

मैं: अभी नहीं, अभी ऐसा कुछ न कीजिए, पहले मुझे खाना बना लेने दीजिए।

बड़ी मिन्नतों के बाद उन्होंने मुझे छोड़ा, नहीं तो वो वहीं मुझे चोद देते। खाना बनाने के बाद जब मैं रसोई से बाहर निकली, ससुर जी सोफे पर बैठे हुए लुंगी के ऊपर से ही अपना लंड सहला रहे थे। उन्होंने मुझे देखा और इशारे से अपने पास बुलाया। मैं समझ गई कि इनका फिर से मुझे चोदने का मन है। मैंने अपने गाउन को पूरी तरह से उतारा और पूरी तरह से नंगी हो गई। ससुर जी ने भी अपनी लुंगी निकाल दी और पूरी तरह से नंगे होकर सोफे पर बैठ गए। मैं उनके पास गई और अपनी दोनों टाँगें फैलाकर उनके लंड को चूत पर लगाकर उस पर बैठ गई।

फचफचाता हुआ पूरा लंड मेरी चूत में समा गया। मैं उनके गले में अपनी बाँहें डालीं और लंड पर कूदने लगी। ससुर जी मेरे एक दूध को मुँह में भरकर चूसने लगे। कुछ देर बाद उन्होंने मुझे सोफे पर ही घोड़ी बना दिया और मेरे पीछे आकर मेरी धुनाधार चुदाई करने लगे। जल्द ही मैं झड़ गई लेकिन वो अभी भी मुझे घोड़ी बनाए चोदे जा रहे थे। फिर उन्होंने लंड बाहर निकाला और मेरी गाँड के छेद में लंड डालने लगे लेकिन लंड अंदर नहीं जा रहा था।

मैं: नहीं नहीं पापा जी, वहाँ मत डालो, वहाँ नहीं जाएगा।

ससुर जी: जाएगा क्यों नहीं… जब छेद है तो पक्का जाएगा, तू बस देखती जा।

मैं: अरे यार अभी नहीं, वहाँ से बाद में कर लेना ना।

ससुर जी: क्यों पीछे से चालू नहीं है क्या?

मैं: हाँ, मगर उधर से ज्यादा नहीं किया है।

मैं मना करती रही, पर ससुर जी नहीं माने और अपना थूक छेद में लगाकर लंड डालने लगे। जैसे ही उनका सुपाड़ा अंदर गया उन्होंने एक बार में ही पूरा लंड अंदर पेल दिया। मुझे बहुत ज्यादा दर्द हुआ और मेरी चीख निकल गई। उन्होंने मुझे जकड़ लिया और सोफे पर लिटा दिया। कुछ देर में ही उन्होंने मेरी गाँड की जोर-जोर से चुदाई शुरू कर दी। जल्द ही मुझे भी मजा आने लगा और उन्होंने मुझे फिर से घोड़ी बना दिया। मेरे ससुर ने मेरी गाँड की बहुत बुरी तरह से चुदाई की।

मैं चूत से फिर से झड़ गई और उन्हें रोकती रही लेकिन वो तब तक नहीं माने जब तक कि अपना पानी मेरी गाँड में नहीं डाल दिया। इस बार भी उन्होंने लगभग आधे घंटे तक मुझे चोदा था। उसके बाद तो लगातार चार दिन तक हम दोनों के ऊपर बस चुदाई का भूत सवार था। बिस्तर पर, बाथरूम में, रसोई में, सोफे पर। जहाँ-जहाँ हमारा मन करता, हम लोग चुदाई करते रहे। हम लोग दिन और रात मिलाकर 7 से 8 बार तक चुदाई करने लगे। चार दिन के बाद ये सिलसिला थोड़ा कम हुआ और फिर केवल 2 या 3 बार ही चुदाई होती थी।

तीन महीने लॉकडाउन में हम दोनों अकेले रहे और दोनों ने ही फुल सेक्स, चुदाई का भरपूर मजा लिया। उसके बाद मेरे पति और देवर आ गए और वो एक महीने तक साथ रहे। उसके बाद मैं और ससुर जी फिर से अकेले हो गए और अब मैं रात में उनके साथ ही सोती हूँ। लगभग दो सालों में ससुर जी ने मुझे इतना चोदा है कि जितना मेरे पति ने भी नहीं चोदा है। एक बार मैं उनसे प्रेग्नेंट भी हो गई थी, तब ससुर जी ने मुझे टैबलेट लाकर दी, जिससे सब ठीक हो गया। अभी भी हम दोनों एक-दूसरे की प्यास बुझाते हैं और किसी को कुछ पता नहीं है।

More Stories

One Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *