माँ बनी क्लाससमेट 6
Maa ki gand par lund ka maal nikala:- टेंट के अंदर की मद्धम रोशनी त्रुप्ति के चेहरे पर एक अजीब सी कशमकश दिखा रही थी। राहुल ने जब त्रुप्ति को गद्दे पर धकेला, तो त्रुप्ति का शरीर एक पल के लिए पत्थर जैसा सख्त हो गया। उसका दिमाग़ बार-बार चिल्ला रहा था कि ये उसका बेटा है, पर उसका जिस्म इस नए तजुर्बे की गर्मी में पिघलने लगा था।
Maa ki gand par lund ka maal nikala sex story
राहुल ने त्रुप्ति के ऊपर आते हुए उसके होंठों पर अपने होंठ जड़ दिए। पहले तो त्रुप्ति ने अपने होंठ सख्ती से बंद कर लिए, उसकी साँसें अटक गई थीं।
Pichla part yaha padhen ==> माँ बनी क्लाससमेट 5
राहुल: (किस के बीच सरगोशी करते हुए) “मम्मी… डर कैसा? आपने ही तो कहा था कि मैं आपके जिस्म से खेल सकता हूँ। अब पीछे मत हटो… वरना बाहर सबको शक हो जाएगा।”
राहुल की बातों ने त्रुप्ति की हिम्मत तोड़ दी। उसने धीरे-धीरे अपने होंठ ढीले छोड़ दिए। राहुल ने मौक़ा पाते ही त्रुप्ति के होंठों को स्मूच करना शुरू किया। वो त्रुप्ति के निचले होंठ को अपने मुँह में लेकर किसी रसीले फल की तरह चूस रहा था। त्रुप्ति ने भी डर और शर्म के बीच अपनी बाँहें राहुल के गले में डाल दीं और इस किस में डूबने लगी। उनके थूक के मिलने की चप-चप आवाज़ टेंट में गूँज रही थी।
“म्मम… स्स्स… आाह…” त्रुप्ति के मुँह से दबी हुई सिसकारियाँ निकलने लगीं।
राहुल ने अब अपने हाथ त्रुप्ति के रेड गाउन की ज़िप पर रखे। उसने एक झटके में गाउन की ज़िप नीचे गिरा दी और त्रुप्ति के कंधों से गाउन सरका कर उसे पूरी तरह उतार दिया। अब त्रुप्ति सिर्फ़ एक लाल रंग की लेस वाली ब्रा और मैचिंग पैंटी में राहुल के सामने खड़ी थी।
राहुल एक पल के लिए रुक गया। उसने त्रुप्ति को इंच-दर-इंच घूरना शुरू किया। त्रुप्ति का गोरा चिकना बदन उस लाल लिंजरी में क़यामत ढा रहा था। उसके 38 इंच के बूब्स ब्रा से बाहर आने को बेताब थे, और उसकी पतली कमर के नीचे उसकी भारी-भारी जाँघें लोहे जैसे लंड को दावत दे रही थीं। त्रुप्ति शर्म से दोहरी हो रही थी, उसने अपने हाथों से अपने जिस्म को छुपाने की कोशिश की।
त्रुप्ति: (काँपते हुए) “राहुल… ऐसे मत देखो… मुझे बहुत शर्म आ रही है… संजीव के बाद किसी ने मुझे ऐसे…”
राहुल को त्रुप्ति की इस हालत पर और भी ज़्यादा नशा आ रहा था। वो देख रहा था कि उसकी माँ कैसे एक जवान लड़की की तरह उसके सामने मचल रही है। राहुल का हाथ त्रुप्ति की ब्रा के हुक तक गया, पर उसने त्रुप्ति की आँखों में देखा। वहाँ दर्द और शर्म का समुंदर था।
राहुल ने अपने दिमाग़ में सोचा: ‘अगर मैं अभी ज़बरदस्ती करूँगा तो त्रुप्ति सिर्फ़ मजबूरी में करेगी। मुझे इसे पूरी तरह अपना बनाना है। मैं चाहता हूँ कि ये खुद अपनी पसी मेरे लंड के हवाले करे। ज़बरदस्ती से तो मैं इसे चोद दूँगा, पर ये हमेशा के लिए मुझसे दूर हो जाएगी। मुझे इसे प्यार और हवस के उस मोड़ पर लाना है जहाँ ये खुद सब कुछ मिटा दे।’
राहुल ने ब्रा खोलने का ख़याल अभी टाल दिया। उसने त्रुप्ति को ऊपर-ऊपर से ही तड़पाना शुरू किया। उसने अपने दोनों हाथ त्रुप्ति की ब्रा के ऊपर रखे और उसके बूब्स को मसलना शुरू किया। त्रुप्ति के बूब्स इतने नरम और मुलायम थे कि राहुल की उँगलियाँ उनमें धँसती जा रही थीं। ब्रा के कपड़े के ऊपर से ही राहुल ने त्रुप्ति के निप्पल्स को अपनी उँगलियों से दबाया। वो निप्पल्स पहले से ही सख्त हो चुके थे।
“आआाह्ह्ह… राहुल… इस्स… धीरे… म्मम…” त्रुप्ति ने अपना सिर पीछे गद्दे पर दे मारा।
राहुल ने अब अपना मुँह त्रुप्ति के गले पर रखा। वो वहाँ की कोमल त्वचा को चूमने और चाटने लगा। उसने त्रुप्ति के गालों को अपने दाँतों से हल्के से चबाया, फिर उसके कान के निचले हिस्से को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा।
राहुल: “मम्मी… आपका बदन कितना मीठा है… ऐसा लगता है सारा रस आज ही पी जाऊँ।”
त्रुप्ति अब पूरी तरह मदहोश हो चुकी थी। राहुल का हाथ अब उसकी ब्रा के कपड़े के अंदर घुसा और उसने नंगे बूब्स को मुट्ठी में भर लिया। नंगे जिस्म की गर्मी जब राहुल के हाथ से टकराई, तो त्रुप्ति ने एक ज़ोर की सिसकारी भरी।
“ओओओह्ह्ह… हाआ… राहुल… बेटा… आाह्ह्ह… बहुत मज़ा… स्स्स… और मसलो… म्मम… अपने मम्मी के बूब्स को… आाह्ह्ह…!”
राहुल अब त्रुप्ति के निप्पल्स को ब्रा के कपड़े के ऊपर से ही अपने मुँह में भरकर चूसने लगा। वो उस सख्त निप्पल को अपनी ज़ुबान से सहला रहा था और कभी-कभी दाँतों से हल्के से दबा रहा था। त्रुप्ति की कमर अब ऊपर-नीचे उछल रही थी, उसका जिस्म राहुल के लंड की रगड़ महसूस कर रहा था जो पैंटी के ऊपर से उसकी गाँड की दरार में फँसा हुआ था।
“इस्स… स्स्स… उम्मम… हाआ… राहुल… तुम पागल… कर रहे हो… आाह्ह्ह…!”
राहुल त्रुप्ति के दोनों बूब्स को बारी-बारी मसल रहा था और उनकी शेप को महसूस कर रहा था। वो त्रुप्ति के जिस्म की हर आहट को एंजॉय कर रहा था, ये जानते हुए कि अगला क़दम त्रुप्ति को हमेशा के लिए एक रंडी बना देगा।
टेंट के अंदर की गर्मी अब दुश्मनी और डर से निकलकर एक अजीब से समझौते की तरफ़ बढ़ रही थी। राहुल ने त्रुप्ति की आँखों में देखा, जहाँ दर्द के आँसू अभी सूखे नहीं थे। त्रुप्ति ने जब देखा कि राहुल उसे एक मर्द की तरह घूर रहा है, तो उसने थरथराते हाथों से एक फ़ैसला किया।
राहुल: (गहरी आवाज़ में) “मम्मी… क्या आप अपने हाथ से मेरे इस तनाव को शांत करोगी? क्या आप BF-GF की इस एक्टिंग को अंजाम तक पहुँचाओगी?”
त्रुप्ति ने दर्द भरी आँखों से राहुल की तरफ़ देखा और धीमे से ‘हाँ’ में सर हिला दिया। वो जानती थी कि ये पाप है, पर अपने परिवार और सपनों की ख़ातिर उसने ये ज़हर पीने का फ़ैसला कर लिया था।
राहुल ने त्रुप्ति का उदास चेहरा देखा तो उसके अंदर का शैतान थोड़ा पिघल गया। उसने त्रुप्ति को दर्द में देखकर एक शातिर मुस्कान दी और आगे बढ़कर उसके होंठों पर एक गहरा, नम चुम्मा दिया। उसने त्रुप्ति के निचले होंठ को हल्के से अपने दाँतों से काटा, जिससे त्रुप्ति के मुँह से एक दबी हुई सिसकारी निकल गई।
राहुल: (प्यार से विस्पर करते हुए) “डोंट वरी मम्मी… मुझे पता है तुम्हें ये सब पसंद नहीं आ रहा। मैं इतना भी गिरा हुआ नहीं हूँ कि अपनी ही पसंदीदा औरत को तकलीफ़ दूँ। मैं ऐसा कुछ नहीं करूँगा जिससे तुम्हारी रूह काँप जाए।”
त्रुप्ति ने हैरत से राहुल को देखा। राहुल ने उसके बालों को सहलाते हुए आगे कहा।
राहुल: “मैं सिर्फ़ अपने लंड को तुम्हारी गाँड की दरार से रगड़कर कम कर लूँगा। मैं दो साल के लिए तुम्हारा बॉयफ़्रेंड हूँ, और मैं वादा करता हूँ कि तुम्हारी मर्ज़ी के बिना तुम्हें कोई तकलीफ़ नहीं दूँगा। तुम्हारी पसी महफ़ूज़ रहेगी।”
यह सुनते ही त्रुप्ति के सीने से एक बहुत बड़ा बोझ हट गया। उसका दिल हल्का हो गया। उसे लगा कि उसका बेटा अभी भी वही पुराना राहुल है जो अपनी माँ की इज़्ज़त करता है। उसने एक गहरी साँस ली और नम आँखों से कहा—
त्रुप्ति: “थैंक यू बेटा… थैंक यू मुझे समझने के लिए।”
राहुल: (शैतानी दिमाग़ लड़ाते हुए) “पर मम्मी… बॉयफ़्रेंड होने के नाते कम से कम मुझे किस करने और तुम्हारे ये रसीले बूब्स दबाने का हक़ तो मिलेगा ना? इतना तो मैं कर ही सकता हूँ हमारी एक्टिंग को असली दिखाने के लिए।”
त्रुप्ति ने शर्मा कर अपनी निगाहें झुका लीं। उसने सोचा कि अगर इतने से राहुल शांत रहता है और पसी बच जाती है, तो ये सौदा बुरा नहीं है। उसने धीमे से ‘हाँ’ कह दिया। उसके मन में आया, ‘मेरा बेटा… आखिरकार उसे अपनी माँ की मजबूरी समझ आ गई। शुक्रिया भगवान!’
राहुल ने त्रुप्ति को इशारा किया, और त्रुप्ति घुटनों और हाथों के बल झुक गई। राहुल ने अपने पैंट की ज़िप खोली और अपना 10-इंच का मॉन्स्टर लंड बाहर निकाला। जैसे ही उसने अपना नंगा लंड त्रुप्ति की भरी हुई गाँड के दरार से सटाया, त्रुप्ति का पूरा बदन थर-थरा गया।
त्रुप्ति को अपनी गाँड पर एक मोटा, मज़बूत और लोहे जैसा सख्त लंड महसूस हो रहा था। वो गाउन के नीचे सिर्फ़ पैंटी में थी, और उसकी गाँड का उभार राहुल के लंड की गर्मी को सोख रहा था। त्रुप्ति ने अपनी आँखें बंद कर लीं और शर्म से लाल होते हुए कहा—
त्रुप्ति: “बेटा… कर लो… जो करना है जल्दी करो… बस पसी मत छूना।”
राहुल ने त्रुप्ति की कमर को दोनों हाथों से कसके पकड़ा और पहला ज़ोरदार स्ट्रोक मारा। उसका नंगा लंड त्रुप्ति की गाँड की दरार में पैंटी के ऊपर से फिसलने लगा। त्रुप्ति की सिसकारियाँ अब पूरे टेंट में गूँजने लगीं।
“आआाह्ह्ह… राहुल… स्स्स… म्मम… बहुत मोटा है… आाह्ह्ह…!”
राहुल ने अब बेरहमी से बैक-स्ट्रोक्स देना शुरू किया। वो त्रुप्ति की गाँड को किसी मशीन की तरह ठोंक रहा था। हर स्ट्रोक पर त्रुप्ति का जिस्म आगे-पीछे हो रहा था। राहुल ने अपने हाथ आगे बढ़ाकर त्रुप्ति के नंगे बूब्स को मुट्ठियों में भरा और उन्हें बुरी तरह मसलने लगा।
टेंट के बाहर खड़े लोगों को उनकी परछाइयाँ दिख रही थीं—एक मर्द एक औरत को घोड़ी बनाकर उसकी गाँड मार रहा था। राहुल ने त्रुप्ति के कान के पास झुककर ज़ोर-ज़ोर से हाँफना शुरू किया। त्रुप्ति भी अब उस रगड़ का लुत्फ़ लेने लगी थी। उसका गिल्ट अब हवस की गहराइयों में कहीं खो गया था।
टेंट के अंदर सिर्फ़ उनकी तेज़ साँसें और जिस्म के टकराने की आवाज़ गूँज रही थी। राहुल ने अपना नंगा लंड त्रुप्ति की गाँड की दरार में पूरी ताक़त से फँसा दिया था। वो कोई पीछे हटने वाला नहीं था। उसने त्रुप्ति की कमर को इतनी सख्ती से जकड़ रखा था कि त्रुप्ति के नरम बदन पर उसकी उँगलियों के निशान छप रहे थे। राहुल अपने लंड को त्रुप्ति की गाँड की दरार में ऊपर-नीचे रगड़ रहा था, और हर स्ट्रोक के साथ त्रुप्ति का जिस्म थर्र-थर्रा उठता।
त्रुप्ति ने अपनी आँखें कसकर बंद कर रखी थीं। शुरुआत में जो डर और घिन थी, वो अब धीमे-धीमे एक अजीब से नशीली जलन में बदल रही थी। उसे अपने बेटे के लंड की गर्मी और सख्ती अपनी गाँड पर महसूस हो रही थी, जो उसे एक अजीब सा “गिल्टी प्लेज़र” दे रही थी। वो जानती थी कि ये गलत है, पर राहुल के झटके इतने ज़ोरदार थे कि उसका पूरा वजूद हिल गया था।
राहुल को त्रुप्ति की भरी हुई और टाइट गाँड के बीच अपने लंड को रगड़ने में जन्नत का मज़ा आ रहा था। उसका 10-इंच का मॉन्स्टर अब अपना सब्र खो रहा था। उसने त्रुप्ति के कुल्हों को और ज़ोर से दबोच लिया और स्ट्रोक्स की रफ़्तार तेज़ कर दी। त्रुप्ति की सिसकारियाँ अब सिसकियों में बदल गई थीं।
“आआाह्ह्ह… राहुल… स्स्स… बस करो… म्मम… आाह्ह्ह…!”
राहुल का शरीर अब थरथरा ने लगा। उसने त्रुप्ति को पीछे से पूरी ताक़त से दबोचा और अपने लंड का सारा गरमा-गरम लोड एक झटके में निकाल दिया। उसका गाढ़ा और सफ़ेद वीर्य (कम) पिचकारियों की तरह त्रुप्ति की गाँड के ऊपर और उसकी दरार में हर तरफ़ फैल गया।
त्रुप्ति को अपनी गाँड पर पीछे से एक अजीब सी गीलापन और चिपचिपाहट महसूस हुई। उसे एहसास हो गया कि राहुल ने अपना काम पूरा कर लिया है। राहुल वहीं कुछ देर हाँफते हुए त्रुप्ति की पीठ पर लेटा रहा, उसकी गरम साँसें त्रुप्ति की नंगी पीठ को जला रही थीं।
कुछ देर बाद, राहुल बिना कुछ कहे उठा, अपने कपड़े दुरुस्त किए और टेंट से बाहर निकल गया। वो जानता था कि आज उसने त्रुप्ति के जिस्म पर अपना निशान छोड़ दिया है। बाहर खड़े दोस्तों को उसने एक शैतानी मुस्कान दी, जैसे वो उन्हें दिखा रहा हो कि उसने “शिकार” कर लिया है।
अंदर त्रुप्ति अकेली रह गई। वो वहीं घोड़ी बनी हुई हालत में कुछ देर पड़ी रही। उसके दिल में रोना आ रहा था पर आँखों में आँसू सूख चुके थे। उसने हल्के से पीछे मुड़कर देखा—उसकी लाल पैंटी और उसकी गोरी गाँड राहुल के सफ़ेद रस से सनी हुई थी। वो निशान उसे उसके गुनाह की याद दिला रहा था।
त्रुप्ति ने काँपते हाथों से एक कपड़ा उठाया और बड़ी मुश्किल से अपनी गाँड और जाँघों को साफ़ किया। उसने हर एक बूँद को पोंछा, पर वो चिपचिपाहट उसके ज़ेहन में बैठ गई थी। उसने दबे पाँव अपने बिखरे हुए कपड़े उठाए, अपना रेड गाउन पहना और खुद को समेट लिया। आज रात उसने संजीव को धोखा नहीं दिया था, पर उसने एक बेटे को मर्द बनने का रास्ता दिखा दिया था… एक ऐसा रास्ता जो सिर्फ़ तबाही की तरफ़ जाता था।
राहुल के जाते ही त्रुप्ति जैसे टूटकर गद्दे पर गिर गई। उसका बदन अभी भी थरथरा रहा था। टेंट की खामोशी में उसे अपनी ही तेज़ साँसें साफ़ सुनाई दे रही थीं। उसने महसूस किया कि उसकी जाँघों और गाँड पर अभी भी वो चिपचिपाहट बाक़ी थी—उसके बेटे के जौर (कम) का वो निशान जो इस बात का सबूत था कि आज एक माँ और बेटे के बीच की मर्यादा की दीवार थोड़ा और दरक गई है।
त्रुप्ति के दिमाग़ में एक अजीब सा युद्ध चल रहा था। एक तरफ़ वो गहरा गिल्ट और शर्म थी कि उसने अपने ही बेटे को अपने जिस्म से खेलने दिया, लेकिन दूसरी तरफ़ एक अजीब सी राहत भी थी। राहत इस बात की, कि राहुल ने अपना वादा निभाया था। उसने त्रुप्ति को पूरी तरह नंगा नहीं किया था, और सबसे बड़ी बात—उसकी चूत अभी भी महफ़ूज़ थी। राहुल ने सिर्फ़ उसकी गाँड की दरार पर रगड़कर खुद को शांत कर लिया था।
“मेरा बेटा वाक़ई बड़ा हो गया है,” त्रुप्ति ने अँधेरे में छत को घूरते हुए सोचा। उसके दिमाग़ में राहुल के वो एग्रेसिव स्ट्रोक्स और उसका लोहे जैसा सख्त लंड बार-बार याद आ रहा था। वो समझ गई थी कि राहुल अब वो छोटा बच्चा नहीं रहा, उसके अंदर एक पूरा मर्द जाग चुका है जो शिकार करना जानता है।
लेकिन असली चिंता अब शुरू हुई थी। त्रुप्ति ने सोचा, ‘मैंने उसे किसिंग और बूब्स दबाने की इजाज़त तो दे दी है… पर क्या ये काफ़ी होगा? आज तो वो इतने में मान गया, पर कल अगर उसके अंदर का ये मर्दाना शेर दोबारा जागा, तो क्या वो रुक पाएगा? राहुल की हवस एक ऐसी आग है जिसे मैंने ही हवा दी है।’
एक पल के लिए उसके मन में आया कि वो ये सब छोड़-छाड़ कर घर लौट जाए। संजीव के पास, अपनी पुरानी दुनिया में। पर फिर उसे अपना वो सपना याद आया—अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी करके एक पहचान बनाने का जुनून। उसने इतनी मुश्किल से ये क़दम उठाया था, और अब बात इतनी आगे बढ़ चुकी थी कि पीछे हटना नामुमकिन था। पूरा कॉलेज उन्हें लवर समझता था, अभय और विक्की जैसे गंदे लड़कों से बचने का यही एक रास्ता था।
उसने गहरी साँस ली और अपने बिखरे हुए कपड़ों को सँभाला। उसने खुद को दिलासा दिया, ‘ठीक है… अगर राहुल सिर्फ़ इतने पर ही रुका रहता है, सिर्फ़ ऊपर-ऊपर से खेलकर शांत हो जाता है, तो शायद ये इतनी बड़ी बात नहीं है। आखिर है तो मेरा ही बेटा… मेरे ही ख़ून का हिस्सा। मैं इसे धीरे-धीरे समझा लूँगी, इसकी हवस को धीरे-धीरे सही रास्ते पर ले आऊँगी। मैं इसे भटकने नहीं दूँगी।’
त्रुप्ति ने कपड़े से खुद को साफ़ किया और वापस अपना रेड गाउन पहन लिया। उसकी आँखों में अब दर्द के साथ एक पक्का इरादा भी था। उसे इस “फ़ॉरबिडन” रास्ते पर चलना ही था, पर अपनी शर्तों पर। वो नहीं जानती थी कि एक भूखे शेर को ख़ून का स्वाद लगने के बाद उसे क़ाबू करना कितना मुश्किल होता है, पर अभी के लिए, उसने अपनी ममता और मजबूरी के बीच एक नया समझौता कर लिया था।
राहुल टेंट से बाहर निकला तो उसके चेहरे पर एक ऐसी विजेता वाली मुस्कान थी जो किसी भी मर्द का ख़ून खोल देने के लिए काफ़ी थी। उसने अपनी जींस की बेल्ट को थोड़ा दुरुस्त किया और सीधा उस तरफ़ बढ़ा जहाँ अभय किसी घायल शेर की तरह एक पत्थर पर बैठा पहरादारी कर रहा था। राहुल को पता था कि अभय ने अंदर की वो सिसकारियाँ और जिस्मों के टकराने की आवाज़ें सुनी हैं, और इसी बात का मज़ा राहुल दोगुना करना चाहता था।
राहुल: (हँसते हुए) “अरे अभय! तू अब तक यहीं पहरादारी कर रहा है? क्या बात है यार, बड़ा ईमानदार दोस्त है तू।”
अभय ने सर उठाकर राहुल को देखा। राहुल के बिखरे हुए बाल और उसके चेहरे की चमक साफ़ बयान कर रही थी कि अंदर क्या माहौल था। अभय के अंदर गुस्से का एक ज्वालामुखी फटने को तैयार था, पर उसने किसी तरह खुद को क़ाबू में रखा। उसके लिए त्रुप्ति सिर्फ़ एक जिस्म नहीं, उसका सच्चा प्यार थी।
अभय: (ठंडी पर कड़वी आवाज़ में) “अच्छी बात है… कम से कम तुम दोनों तो इस पिकनिक का पूरा आनंद ले रहे हो।”
राहुल: (उसको और चिढ़ाते हुए) “आनंद? भाई, तुझे क्या बताऊँ! त्रुप्ति वाक़ई एक कमाल की औरत है। आज तो मैं उसे ढंग से चोदकर आया हूँ… उसकी गाँड मारके इतना सुकून मिला कि क्या बताऊँ। वो तो अभी अंदर गहरी साँस ले रही है, होश ठिकाने आने में वक़्त लगेगा।”
अभय का दिल छलनी हो गया। उसे दर्द हो रहा था ये सोचकर कि जिसके सामने वो नज़रें उठाने से डरता था, राहुल उसे एक ‘आइटम’ की तरह ट्रीट कर रहा है।
अभय: (राहुल की आँखों में देखते हुए) “तो क्या इरादा है? इतना सब करने के बाद… क्या तुम उससे शादी करोगे?”
राहुल ने एक ज़ोर का ठहाका लगाया, जैसे अभय ने दुनिया का सबसे बड़ा मज़ाक किया हो।
राहुल: “शादी? पागल है क्या! शादी-वादी के चक्कर में कौन पड़ता है यार। त्रुप्ति तो बस मज़े लेने की चीज़ है, शादी की नहीं। जब तक ये रसीला बदन साथ है, तबीयत से निचोड़ूँगा… फिर देखा जाएगा।”
अभय की मुट्ठियाँ कस गईं। उसके लिए ये बर्दाश्त से बाहर था कि जिस औरत को वो अपनी रानी बनाना चाहता था, राहुल उसे सिर्फ़ एक ‘यूज़ एंड थ्रो’ खिलौना समझ रहा है। उसने मन ही मन फ़ैसला किया कि त्रुप्ति को किसी भी तरह राहुल के इस ‘जाल’ से निकालना ही पड़ेगा। पर उसे अपनी गलती का भी एहसास हुआ—आज जंगल में जो उसने त्रुप्ति के साथ ज़बरदस्ती की थी, शायद उस वजह से त्रुप्ति उससे नफ़रत करने लगी होगी।
अभय: “तुम उसकी क़दर नहीं करते, राहुल। एक दिन पछताओगे।”
अभय वहाँ से उठा और बिना पीछे मुड़े अँधेरे जंगल की तरफ़ निकल गया। उसका दिल दर्द से भरा था, पर दिमाग़ में एक ही धुन थी: त्रुप्ति को राहुल की हवस से बचाना और उसे अपना बनाना। उधर राहुल मुस्कुरा रहा था, उसे अभय को तड़पाने में एक अजीब ही मज़ा आ रहा था। वो नहीं जानता था कि उसका ये ‘टीज़िंग’ वाला खेल अभय को किसी भी हद तक ले जा सकता है।
Next Part ==> माँ बनी क्लाससमेट 7

Next part