लॉकडाउन और तबस्सुम – 2
Ghar ke naukar ne jabardasti chudai ki:- जैसा कि आपने पिछले पार्ट में पढ़ा कि तबस्सुम अपने छोटे बेटे के साथ शंकर के साथ लक्जरी बस में मुरादाबाद जा रही थी। रात में बस ढाबे पर रुकी तो शंकर ने चुपके से शराब पी ली। वापस बस में आने के बाद जब तबस्सुम बच्चे को दूध पिलाने लगी तो शंकर ने नशे में उसका फायदा उठाया। उसने तबस्सुम की चूचि को छूना शुरू किया, और फिर उसमे से दूध पिया और धीरे-धीरे इस सबसे भी आगे बढ़ गया। तबस्सुम डर और मजबूरी में चुप रही क्योंकि बच्चा गोद में था और बस में लोग थे। आगे क्या हुआ पढिए इस पार्ट मे ।
अगर आपने पिछला पार्ट नहीं पढ़ा है तो यहाँ पढ़ें ==> लॉकडाउन और तबस्सुम – 1
Ghar ke naukar ne jabardasti chudai ki
भले तबस्सुम के आगे के बुर्के के बटन खुले हुए थे।
तब शंकर ने जाँघ के साइड से अपना हाथ ले जाकर कमर की तरफ फेरने लगा। पर उसने दूध पीना बंद नहीं किया।
बस तबस्सुम मुजाहिमत जितना करना चाह रही थी उतना शंकर अपना दबाव भी बढ़ाता जा रहा था।
दूध पिलाते-पिलाते कुछ सिसकारियाँ भी उसके मुँह से निकलने लगीं। पर ये एक सेक्स के दबाव में सिसकारी नहीं थी क्योंकि शंकर निप्पल को भी हल्के से काट लेता था तो शhhh की हल्की आवाज तबस्सुम के मुँह से निकल जाती थी।
तभी शंकर ने अपने ऊपर से कंबल हटाया और पैंट की जिप ओपन करके अपना काफी काला बड़ा बदबूदार लंड निकाला। जो पूरे शबाब में तना हुआ था।
शंकर की शराब की बदबू ने तबस्सुम के ऊपर असर दिखाना शुरू कर दिया और जो उसके सिर को अपने दूध से हटा रही थी अब बस अपना हाथ उसके सिर पर रखा पर अपने निप्पल पर दबाया नहीं।
तबस्सुम के आँसू रुक गए। और वह एक नशे में जाने लगी।
तब शंकर ने अपना मुँह दूध की टंकी खाली करने के बाद हटाया जिससे काफी दूध शंकर ने पी लिया था।
तब शंकर ने तबस्सुम का हाथ पकड़कर अपने लंड को पकड़ा दिया।
तो तबस्सुम एक झटके में ही अपनी खोई चेतना से वापस आ गई।
पर तब तक शंकर का मोटा लंड उसके पूरी मुट्ठी में था। तबस्सुम की सही मायनों में पूरी मुट्ठी में भी नहीं आ रहा था।
जबकि बहुत कम अपने शौहर का लंड पकड़ा था वह भी जब वह पीरियड से थी। और उसके शौहर को मस्ती आती तो वह तबस्सुम को अपने लंड हिलाकर वीर्य निकालने के लिए मजबूर करता। पर अल्ताफ का लंड तबस्सुम ने मुट्ठी में बड़े आराम से आ जाता।
तबस्सुम सोचती थी कि ये लंड इतना ही बड़ा होता। अल्ताफ का 5 इंच का था जब खड़ा होता और मोटा 1.5 था।
यहाँ शंकर का लंड का अहसास जब हुआ तो तबस्सुम के एक दिमाग में चला कि इसका तो कम से कम 9 इंच और 2.5 मोटा होगा।
यहाँ बहुत बार तबस्सुम ने अपना हाथ हटाना चाहा पर वह हर बार शंकर उसे नाकामयाब कर देता।
तब बहुत ज्यादा शराब की भाँप तबस्सुम की साँसों में समा गई।
शंकर: ओह मेरे जान तू अब अपना हाथ मेरे लंड से जब तक नहीं हटाना जब तक तू खुद इसे मुठ मारकर मेरा माल निकला न दे।
वरना तेरे साथ तेरा ये बच्चा खतरे में आ जाएगा।
तबस्सुम बहुत डर गई। और तब शंकर ने कहा कि अब रुकना नहीं चाहिए तेरा हाथ मुठ मारकर मेरा माल निकाल। काफी सालों से अपने हाथ से मुठ मार रहा हूँ। अब तेरे नाजुक हाथों से ये मजा लेना चाहता हूँ।
कुछ धमकी शंकर की देने के बाद तबस्सुम ने अब अपना हाथ डर के मारे उसके लंड के टोपे पर रखकर मुठ मारने लगी।
और फिर से उसके आँसू निकल गए। ऐसा जलालत का काम वह कभी नहीं सोच सकती।
शंकर ने भी फिर से उसकी चुची पकड़कर अब बड़े प्यार से दबाने लगा।
शंकर: क्या मस्त मम्मे हैं तेरे। जितना सोचा था उससे बड़े गोल हैं। और तेरा दूध भी खूब आता है।
वाह क्या मुलायम है जैसे रूई का गला हो।
मैंने आज तक तुझे देखकर तरसता रहा। जब से तेरा खूबसूरत चेहरा और इतना कटीला शरीर देखा तब से मैं सोचता था कि कब ऐसे मैं तेरे साथ कर सकता हूँ।
पर सामने से कहता तो तू कुछ नहीं करवाती बल्कि मुझे सिक्योरिटी ऑफिसर के हाथों में पकड़वा देती।
रोज़ मैं तेरा चेहरा देखने के लिए किसी न किसी काम से आता था तेरे घर।
और जिस दिन तुझे न देखता तो मेरा बुरा हाल हो जाता। ऐसा लगता किसी ने मेरा दिल निकाल दिया हो। बहुत अच्छी है तू। बस तुझे एक दिन देखे बगैर नहीं रह सकता।
तबस्सुम उसका लंड हिला रही थी और उसे गौर से सुन भी रही थी।
शंकर: तुझे पता है कि तेरी जवानी कितनी खतरनाक है। किसी दिन मेरे कहने पर पूरी नंगी होकर शीशे के सामने खड़े होकर अपने जिस्म का एक-एक हिस्सा देख।
और मुझे यकीन नहीं हो रहा है भले अपने बच्चे की मजबूरी में ही सही मैं तेरा दूध पी रहा हूँ और तू मेरा लंड हिला रही है। काश थोड़ी रोशनी होती तो तेरा दूध जैसा मखमली जिस्म देख पाता।
तब हिचकी लेते हुए तबस्सुम ने कहा,
तबस्सुम: आप अपने होश में नहीं हैं। आप मेरी पाकीजगी परहेजगारी को खत्म न करो। मुझे माफ कर दो। देखो मैं किसी से कुछ नहीं कहूँगी। मेरी इज्जत बख्श दो। मैं ऐसी खातून नहीं कि अपने शौहर को धोखा दे सकूँ।
शंकर: अरे मेरे जान सब एक शौहर के बाद पाकीजा पवित्र ही रहती हैं। मैं कब तुझसे तेरी अमीर चूत माँग रहा हूँ। और तू कौन सी अपनी खुशी से मेरा लंड हिला रही है।
बस कुछ देर में मेरा माल निकल जाएगा तो तू आराम से अपना बाकी का सफर पूरी कर सकती है। और यहाँ कौन सी तेरी पाकीजगी चूत में अपना लंड डाल पाऊँगा।
यहाँ तबस्सुम उसका लंड हिलाके या अपनी चुची पिलाकर इतना इरोटिक नहीं हुई जितना अब शंकर की बात सुनकर। वह भी बार चूत का नाम ले रहा था तो उसके जहन में ये चूत नाम छाप गया। और वह लंड का नाम भी ऐसे खुले आम उसके सामने ले रहा था कि ये बातें सुनकर उसकी पैंटी में गीलापन आ गया। तबस्सुम ये समझी कहीं उसका पेशाब तो नहीं निकला जा रहा है।
तब शंकर ने अपना हाथ तबस्सुम के गले में डाला और कहा,
शंकर: कुछ भी हो जाए तेरे हाथ से मेरा लंड नहीं छूटना चाहिए।
अगर छूटा तो तेरा बच्चा गोद में है तो तू समझ जा मैं क्या करूँगा।
शंकर ने फिर तबस्सुम को डरा दिया।
और तबस्सुम के हाथ जब लंड के टोपे पर चल रहे थे तो एक चमड़ी कभी ऊपर जाती तो कभी नीचे आती।
ये पहला अनुभव था तबस्सुम का। अल्ताफ के लंड में कोई खाल ऐसे ऊपर-नीचे नहीं जाती थी। तभी एक ख्याल तबस्सुम के दिल में कहीं से चोरी से आया।
या खुदा ये इसका कैसे अजीब है। ये खाल कैसे ऊपर-नीचे हो रही है और इसका टोपा का भी कुछ नहीं पता।
जब तबस्सुम ये सोच रही थी तो अपनी सोच पर गुनाह लाजिम करके तौबा करने लगी।
तभी शंकर थोड़ा सा साइड करवट लेकर उठा और तबस्सुम का चेहरा अपनी तरफ करा। इससे पहले उसकी शराब के बदबू वाला मुँह सामने अपने लाता तो तबस्सुम घबरा जाती है।
वह सोच नहीं पाती अब ये क्या करने वाला है।
तभी शंकर अपने काले मोटे होंठ तबस्सुम के पिंक होंठों पर लगाकर नीचे वाला होंठ अपने मुँह से लगाकर चूसता है। तो उसके हाथ लंड से छूट जाता है और बच्चे का गिरने का भी अंदेशा रहता है तो वह अपने को नहीं उसके चंगुल से बचा पाती। शराब की बदबू ने अपना कमाल दिखाना शुरू किया।
तबस्सुम का दिमाग चकराने लगा। और शंकर ने उसके होंठों को कभी ऊपर से चूसा कभी नीचे वाला चूसा तो कभी दोनों होंठों को दबा दिया।
तो कभी उसके गालों को चाटा तो कभी अपनी जुबान नाक के अंदर डालकर घुमाया।
तबस्सुम के हाथ से बच्चा सरकने लगा तो अब शंकर ने उसका बच्चा लेकर अपनी सीट पर आराम से सुला दिया। और खुद वह उसके सामने आ गया। सीट के आगे अच्छी लग रखने की जगह भी थी। और उसने थोड़ी सीट पीछे कर दी जिससे एक तरह से तबस्सुम सीट पर आधे से ज्यादा लेट गई।
हाँ उसे ये होश था कि उसका बच्चा अब शंकर की सीट पर है।
पर्दा और अच्छे से विंडो पर लगाकर सामने से पूरा बुर्के के बटन खोल दिए।
उसकी कुर्ती गले तक चढ़ाकर दूसरा बूब्स भी नंगा करके उस पर अपना मुँह लगाकर चूसने लगा।
यहाँ तबस्सुम की हालत मानो तो काटो खून नहीं।
पर अब ये नहीं पता कि कहीं तबस्सुम इसका मजा तो नहीं ले रही थी।
बस तबस्सुम के मुँह से सिसकारी ज्यादा निकलने लगी। तभी शंकर का हाथ सलवार के नाड़े पर गया। और उसे खींचकर सलवार ढीली कर दी।
और बड़े आराम से उसके चूतड़ से खींचकर सलवार पैरों पर डाल दी।
और दूध चूसते-चूसते अपनी एक मोटी उँगली गीली चूत में डाली तो तबस्सुम सिसक गई।
अपनी मोटी उँगली चूत के अंदर आगे-पीछे करने लगा पैंटी को सरकाकर।
तबस्सुम अपना सिर इधर-उधर हिलाने लगी।
तबस्सुम का हाल अब कहीं न कहीं उसके शराब की बदबू के असर से आह्ह शhhh करने को होने लगा। और तबस्सुम भी आह्ह ओह्ह करने भी लगी।
तब शंकर ने सोचा कि यही मौका है चोद देता हूँ। वरना ये अगर बिना चोदे छोड़ा तो आगे उसे मौका नहीं मिलेगा।
और बस में ज्यादा देर सेक्स का मजा भी नहीं ले सकते तो ये सोचकर शंकर ने देखा कि मस्ती इसे भी आ रही है तभी तो इसकी चूत गीली इतनी हो गई।
ये सोचकर शंकर ने उसके दोनों टाँगें उठाकर सलवार को निकाला और आधे से ज्यादा तबस्सुम के लेटने से अच्छी पोजीशन शंकर को मिल गई।
उसने सोचा कि यही मौका है इस जवानी को चोदने का वरना जिंदगी भर इसके नाम की मुठ मारकर जया कर देगा।
शंकर ने उसके टाँगें साइड हैंडल पकड़कर अपने हाथों में फँसाई जिससे चूत का हिस्सा सामने आ गया।
और अपना लंड का मोटा सुपाड़ा चूत पर रखकर एक धक्का लगाया तो तबस्सुम की आँखें खुल गईं। और वह थोड़ा होश में भी आई। लेकिन तब तक देर हो गई एक झटका शंकर ने मार दिया।
तो इस मोटे लंड के असर से अपनी चूत फटती हुई महसूस हुई और अपनी चीख दबाने के लिए तबस्सुम ने अपने मुँह पर हाथ रखकर ये चीख रोकी।
शंकर: माँ कसम तेरी चूत बच्चा जन्म देने के बाद भी कितनी टाइट है। ओह्ह मजा आ गया। जैसे ऐसा लगा कि मेरा लंड सच में किसी कुँवारी चूत में घुस गया हो।
तब फिर एक झटका मारा तो सप से आधा लंड चूत की दीवारों को चीरता हुआ घुस गया। तबस्सुम की आँखों से आँसू निकल आए।
तबस्सुम के आँखों से आँसू तारी हो गए और अब आहिस्ता-आहिस्ता अपना मोटा लंड गोरी नाजुक चूत में गुदने लगा। और उसके गोरे रुखसार से आँसू चाटने लगा।
तबस्सुम: बहुत दर्द आ रहा है। आह्ह हो रहा है प्लीज निकाल दो। मैं बरदाश्त नहीं कर पा रही हूँ।
शंकर: बस मेरे जान तुझे कुछ देर में मजा आएगा।
ये कहकर उसके गुलाबी होंठों पर अपने काले बड़े होंठ रखकर एक करारा झटका मार दिया। और तबस्सुम की आँखें फट गईं चूत के साथ।
उसकी आँखों से आँसू का बहाव ज्यादा हो गया।
तबस्सुम ने इस दर्द के आवेश में शंकर के कंधों को पकड़ा और शर्ट के ऊपर से कसकर दबाया तो शंकर को ऐसा लगा कि पूरे नाखून गड़ गए हैं।
इसी वजह से अपना लंड सर से निकालकर एक थप की आवाज से पूरा लंड फिर एक झटके से डाल दिया।
तबस्सुम बेहोश होने के करीब आ गई। कुछ देर ऐसे ही लंड को चूत में रखा और फिर उसका दर्द कम हुआ तो अपना मुँह होठों से हटाकर चुची पर लगा दिया जो अब लेफ्ट साइड की चुची थी।
और तबस्सुम की कमर में हाथ डालकर दूध पीता हुआ झटके मारने लगा।
पर आराम-आराम से। कुछ देर बाद चूत को आराम मिला और अपना दूध पिलते हुए कब तबस्सुम ने उसके सिर पर हाथ रखकर सहलाने लगी ये उसे पता भी न चला।
पर यहाँ इस बस में सही से मजे नहीं ले सकता था तो वह दूध चूसता कभी दबाता और झटके मारते हुए अपनी कमर हिलाता।
तभी शंकर को लगा कि तबस्सुम भी अपने चूतड़ हिला रही है यानी वह भले नशे में थी।
पर अब कहीं न कहीं उसे अच्छा लगने लगा। बस सी सी आह्ह ओह्ह की आवाज आने लगी।
शंकर सोचने लगा कि कैसे इसे पूरा नंगा कर दूँ। पर बस में पॉसिबल नहीं था और अँधेरे में दूधिया जिस्म भी ज्यादा साफ नजर नहीं आ रहा था ना वह नेवल को सही से देखा ना चूत को। बस अपनी कमर हिला-हिलाकर 10 मिनट तक कभी होंठ चूसता रहा कभी दोनों दूध की टंकी खाली करता रहा।
तभी तबस्सुम का जिस्म अकड़ने लगता है उसकी सिसकारियों में तेजी आने लगती है।
शंकर को लगा कहीं पूरी बस में उसकी सिसकारी और आहें न गूँज जाएँ।
इसलिए उसने अपना हाथ उसके मुँह बंद करके कस-कस के झटके मारने लगा। पर उसकी चुदाई की आवाज भी ज्यादा थप-थप की होने लगी।
तभी अपनी आँखें खोलकर तबस्सुम झड़ने लगी। और कुछ लम्हों में पूरा जिस्म ठंडा हो गया।
तब शंकर ने अपना गीला लंड निकालकर और अपने लंड को तबस्सुम के दोनों दूध की बीच की गहराई में समाकर झटके मारने लगा। तभी 5 मिनट बाद उसके लंड से भी जोरदार पिचकारी निकली जिसे ऊपर ब्रा जो गले पर थी उसने चेहरे पर आने से रोक दिया।
और शंकर ने थोड़ा अपना वीर्य गोरे दूध पर भी निकाला और जब सारा वीर्य निकल गया तो अपने हाथों से वह वीर्य दोनों चुची पर लेकर और जो ब्रा पर कुर्ती पर था उसे हाथ में लेकर अच्छे से दोनों चुची निप्पल पर लगाकर। और वही हाथ में थोड़ा वीर्य तबस्सुम के होंठों पर लगा दिया और तब्बी का मुँह खोलकर अपनी चारों उँगलियाँ तबस्सुम के मुँह में भी डालकर ऐसे ही नंगा करके उसके बुर्के से अपने हाथ पोंछकर। पैंट की चेन लगाकर।
अपनी सीट पर बच्चे को लेकर आराम से अपना चेहरा दूसरी तरफ करके आँखें बंद कर लीं।
5 मिनट तक तबस्सुम ऐसे ही हालत में पड़ी रही और जब उसे ठीक से होश आया तो अपने मुँह में कड़वा कसैला जायका लगा।
तो वह हड़बड़ाकर उठी। अपनी हालत देखकर उसे बहुत रोना आया। वही ब्रा अपने चुची पर लाकर मैल लगे सीने पर ढक ली। उसे बड़ी गैरत और घिनौना लग रहा था।
उसका सीने पर बहुत ज्यादा गीलापन लग रहा था।
तब उसने अपनी कुर्ती सही करी बुर्का के बटन लगे थे। चूत का पानी सब पैंटी में भी जज्ब हो रहा था।
पर वह इतनी घबराई हुई थी कि ये किस अजाब से निकली। उसी घबराहट में तब्बी ने अपनी सलवार पहनना ही भूल गई।
और वह सलवार भी सीट के नीचे छुप गई थी।
तब बहुत नफरत से शंकर को देखा। और उसकी आँखों में नफरत ही थी। उसने अपना बच्चा गोद में लिया और एक-एक पल वह अपने को नीचा गिरते हुए महसूस कर रही थी।
पर भले नशे में ही सही वह कई हफ्तों बाद झड़ी वह भी एक लंड से।
पूरा रास्ता बाकी का जागते हुए रोते हुए गुजारा। पेशाब की भी सख्ती हो रही थी। बस अपना पेशाब कैसे भी रोके रही।
सुबह 9 बजे मुरादाबाद के बस स्टैंड पर दोनों उतरे और तब वहाँ पता चला कि आज 10 बजे से जनता कर्फ्यू है।
और अब वहाँ भीड़ की कमी आने से रिक्शा नहीं कर सके। तबस्सुम चंद कदम के फासले से चल रही थी।
और जैसे कुछ हुआ ही नहीं शंकर तबस्सुम से ऐसे रिएक्ट कर रहा था। और उसने बड़ी मुश्किल से एक रिक्शा मिला तो एक बैग और ब्रीफकेस उसमें रखकर वह घर की तरफ चले। वह बैटरी रिक्शा था।
तो शंकर आगे की तरफ बैठा कर 10 मिनट बाद घर पहुँचे। तबस्सुम का दिल चाह रहा था ये कहीं उतर जाए। पर वह इतनी डरी-सहमी थी कि उसे शंकर से कुछ कहने की हिम्मत नहीं हुई।
घर के दरवाजे पर पहुँचकर जल्दी से वह रिक्शे से उतरकर दरवाजा ओपन करा। बस गोद में उसका बच्चा था। सामान वह रिक्शे में रखा छोड़ आई।
तब पैसे का हैंड बैग भी वहीं था। तो शंकर ने उस हैंड बैग को खोलकर 100 रुपये उस रिक्शे वाले को देकर विदा करा।
और एक 2000 के नोट की गड्डी में से करीब 20000 निकालकर और 500 के 4 नोट और थे वह भी निकालकर अपने पॉकेट में रख लिए। ऐसा क्यों किया शंकर ने ये बात की बात।
और सामान लेकर वह अंदर चला गया।
उस टाइम अपने बच्चे को बेड पर लिटाकर अंदर का दरवाजा रूम का बंद कर दिया तबस्सुम ने।
और जल्दी से बाथरूम जाकर अपने बुर्खा उठाकर पेशाब के लिए सलवार का नाड़ा ढूँढा पर उसे मिला नहीं।
तबस्सुम: ओह खुदा मेरी सलवार बस में ही रह गई।
पर पेशाब की शिद्दत में जल्दी से कमोड पर बैठकर मूत कर हल्का अहसास लिया।
फिर सारे कपड़े उतारकर शावर के नीचे आकर अपने जिस्म पर लगी गंदगी को साफ करने लगी। यहाँ भी उसके आँखों से आँसू निकल रहे थे। और शावर के पानी पर अपना मुँह खोलकर बहुत सारी कुल्ली करी।
10 मिनट बाद अपने जिस्म को साफ करके अपने रूम तक नंगी आई और नया पैंटी और ब्रा को पहनने लगी। तभी उसकी नजर आईने पर गई जहाँ उसका बदन देख रहा था तो वह पता नहीं कैसे उस आईने के सामने जाकर अपने आप को देखने लगी।
और बाहर सिक्योरिटी ऑफिसर की सख्ती बढ़ गई और लाउडस्पीकर्स से एलान होने लगा कि शाम तक कर्फ्यू का ख्याल रखकर बाहर न निकलें।
तबस्सुम ने अपने जिस्म पर बारीकी नजर डालती है और खुद शर्म की वजह से आईने के सामने से हट जाती है।
अपने बेटे की तरफ आती है जो अब जागकर खेल रहा था। अपने छोटे हाथ-पैर चला रहा था।
तब उसे देखकर और बस के अंदर जो हुआ वह सोचकर तबस्सुम फिर से फफक-फफक कर रोने लगी। ये उसकी जिंदगी में कैसा तूफान आया जो सब कुछ उजाड़कर चला गया।
काफी देर तबस्सुम रोती रही। उसका दिल करने लगा कि अलमारी में से पिस्तौल निकालकर शंकर का कत्ल कर दे।
या अपने आप को गोली मार दे। पर वह शायद अपने को ही गोली मार देती अगर उसको अपने बच्चे का ख्याल न आता।
तब उसका बच्चा रोने लगा तो उसे उठाकर अपनी गोद में लेकर अपनी कुर्ती उठाकर दूध पिलाने लगी पर सब दोनों चुची का दूध तो शंकर पी गया था। बस जो थोड़ा था तो उसे पिलाने लगी। और बच्चा दूध सही से न आने पर खींचने लगा जिससे तबस्सुम को तकलीफ होने लगी।
वह बाहर जाना नहीं चाहती थी। और तबस्सुम को इस बात पर हैरानी हुई कि वह शंकर को बस स्टैंड से कैसे घर ले आई। पेशाब तो लग रहा था लेकिन शंकर को कैसे साथ ले आई वहीं के वहीं उसे बुरा-भला कहकर भगाया क्यों नहीं।
बच्चा रोने लगा क्योंकि दूध सही से जा नहीं रहा था।
तब बड़ी हिम्मत करके अपने आँसू पोंछते हुए जो रो-रोकर आँख भी लाल हो गई थी।
अपने को संभालते हुए वह बाहर निकली तब उसकी नजर वहीं सोफे के पास अपने बैग पर गई। उसका पर्स भी रखा हुआ था। और उसका बैग जिसमें मिल्क पाउडर भी था। हाँ गरम पानी के जार घर ही भूल आई थी।
हॉल में कोई नजर न आया तो तबस्सुम ने सुकून लिया।
जल्दी से किचन में जाकर पानी गरम करके मिल्क पाउडर से फीडर बनाकर रूम में पहुँची तो उसका बेटा जोर-जोर से रोने लगा। तो जल्दी फीडर को ठंडा करके उसे पिलाई। बैग के साथ वह अपना पर्स भी अंदर ही ले आई और फिर से अंदर से दरवाजा बंद कर दिया।
जब उसने अपना मोबाइल निकालने के लिए चेक किया तो उसे अपने पैसों पर भी ध्यान गया।
पर्स को चेक किया तो 500 के नोट नहीं थे और जो 2000 के नोट भी थे वह भी कम थे।
तबस्सुम फौरन समझ गई ये काम शंकर का ही है। वह अब दिलो-जान से शंकर से नफरत करने लगी।
तभी मोबाइल पर कॉल आता है उस पर जानू लिखा था। पर इस वक्त बिल्कुल भी बात करने का मूड नहीं था। लेकिन फिर भी बात तो करनी ही थी।
तब तबस्सुम ने कॉल रिसीव किया तो ही-हेलो हुए। अल्ताफ ने बताया कि आज सिटी बंद होने से परेशानी हो गई यानी 1 दिन उसका खराब हो गया।
कल वह अपनी पार्टी से मिलाकर दूसरे सिटी जाएगा।
थोड़ी बात तबस्सुम ने भी करी पर उसकी आवाज सुनकर अल्ताफ बोला क्या तुम रो रही हो।
तो तबस्सुम यहाँ अब क्या बताए कि जिस इज्जत की हिफाजत अपने जवान होने से कल तक करी वह लूट गई है अब वह अपना मुँह नहीं देख सकती। पर ये तो वह कह नहीं सकती थी।
इसलिए बहाना लगाकर जहाँ कि आप जल्दी से आ जाओ मेरा दिल नहीं लग रहा।
अल्ताफ: अरे मेरे जान बस कुछ दिन की बात है मैं आ जाऊँगा।
ऐसा कहकर आपस में कुछ देर बात करने लगे पर अल्ताफ आना चाहता था जैसा न्यूज में देखा कि लॉकडाउन हो सकता है पर उसके दोस्त ने कहा कि पेमेंट लेना जरूरी है कल का काम खत्म करके परसों शाम की फ्लाइट पकड़कर घर चले जाएँगे।
पर दोनों को क्या पता था कि वह भी औरों की तरफ बड़ी मुसीबत में फँसने वाले थे।
अब इस वक्त बात करने के बाद तबस्सुम को भूख सताने लगी। उसका कोई खाने-पीने को दिल नहीं कर रहा था। पर अपने बच्चे के लिए कुछ तो खाना ही था वरना दूध कैसे बनेगा।
वह फिर एक डर के साथ बाहर चुपके से निकली। उसका दिल धड़क रहा था कि कहीं ये जानवर न आ जाए और अब तो उस जानवर के साथ घर में अकेली ही थी। और अकेलेपन का वह फायदा न उठा ले।
जब डरते हुए तबस्सुम किचन में गई तो उसका सामना शंकर से हुआ। वह नाश्ता बना रहा था।
तब्बी के जिस्म से आती हुई खुशबू से फौरन शंकर ने पलटकर देखा।
शंकर को फिर से देखकर तब्बी का जिस्म काँपने लगा जैसे ठंड की वजह से जिस्म काँपता है।
उसका चेहरा खौफ से पीला पड़ गया। उसके हाथ-पैर वहीं जम होकर रह गए।
पैरों में कपकपाहट से जिस्म हिलने लगा।
शंकर: अरे बीवी जी आप जाग गईं। मैं नाश्ता ही बना रहा था। मैंने तो खा लिया आपके लिए सोचा कि अब बना दो। खाला भी आज नहीं आई है। तो सोचा मैं बना देता हूँ।
हाँ बीवी जी आप मुझे घर का सोदा लिखकर दे देना मैं कल ले आऊँगा। किचन में सामान भी खाने-पीने का नहीं है।
और बाहर अभी गया था तो सिक्योरिटी ऑफिसर वालों ने मुझे डाँट दिया और मैंने सुना है कल से पूरा इंडिया शायद बंद हो जाए कुछ दिनों के लिए। शायद 2 या 3 दिन के लिए।
इसलिए आप सामान वैसे भी मँगवा ही रही थीं।
पर आप बाहर चली गईं तो सामान कहाँ से आता। चूनी भी खत्म होने पर है रिफाइंड भी नहीं है। मैं जानता हूँ बेबी की वजह से आपको याद नहीं रहा होगा।
उसकी बात इतनी नॉर्मल थी कि लगा नहीं कि ये रात वाला शंकर है।
तबस्सुम के दिमाग में एक ख्याल आया कि इसने आज रात कहीं से शराब पी ली थी तो इसे आज क्या हुआ होश नहीं था।
या ये दिमागी तौर से पागल है।
शंकर: आइए मैं नाश्ता बाहर लगा देता हूँ। जल्दी से खा लेना और शाम का क्या प्रोग्राम है शाम को क्या बनाऊँ। थोड़ा-बहुत बना लेता हूँ।
या आज शाम को आपकी दोस्त वो मैम साहब आएँगी। या आप वहाँ जाओगी।
ये सुनकर तबस्सुम बड़ा कंफ्यूज्ड हुई कि ये शंकर है या फिर से कोई ये नया पावित्र खेल रहा है। नहीं अगर इसकी कोई चाल होती तो आज तो मैं घर में अकेली हूँ तो ये कुछ भी कर सकता था।
शंकर नाश्ता लगाकर कहने लगा कि मैं ऊपर जा रहा हूँ थोड़ा आराम करने।
और शाम को आपको खाना बनाकर चला जाऊँगा।
ये कहकर बिना कोई तकल्लुफ किए हुए ऊपर चला गया।
तबस्सुम समझ नहीं पा रही थी कि ये क्या हो गया।
तबस्सुम को भूख तो लग रही थी इसलिए वह जो शंकर ने बनाया था वह नाश्ता करने लगी।
जब उसके हाथ का निवाला खाते हुए ध्यान आया कि उसकी चूत में अब भी दर्द सा है।
और ये भी ध्यान आया कि कैसे शंकर ने अपना वीर्य उसके जिस्म पर लगाकर मला था।
पर अपने हाथ से शंकर का लंड पकड़कर अहसास तो लिया कि कितना बड़ा मोटा था पर लंड देखा नहीं।
और ताज्जुब हुआ कि अल्ताफ का लंड बड़े आराम से घुस जाता था। पर यहाँ इसका लंड कितना चूत को चीरकर घुसा था।
ये ध्यान आते ही अपने जिस्म पर हरारत से महसूस करने लगी।
पर उसे ये भी ध्यान आया कि चुदवाते वक्त कैसे अपनी गाँड भी हिलाई थी सिसकारी भी भरी थी। कहीं न कहीं उसने भी सेक्स का मजा लिया था।
ये सोचकर खुद पर उसको बहुत फिर से गुस्सा आया और अपने को ऐसा लगने लगा कि जलाकर खाक कर दे। वह ऐसे कैसे उस टाइम कहीं न कहीं इस शंकर मवाली का साथ दे सकती थी। और वह कैसे उसकी बेइज्जती देके बात कर रहा था।
खैर फिर से अपने रूम में आकर अपने को जितना हो सके कोसने लगी।
शाम 5 बजे सब तरफ से शोर-शराबे की आवाज आने लगी जैसा लग रहा था कि कोई जलसा शुरू हो गया।
पर ये जलसा कुछ घंटों का ही था। क्योंकि रात को ऐसा होने वाला था कि तबस्सुम की लाइफ में भूचाल आने वाला था।
रात 7 बजे वह अपने बेटे को लेकर नादिया के यहाँ चली गई। पर नादिया से ज्यादा बात नहीं करी।
नादिया ने उससे कहा कि क्या बात है उसे क्या अल्ताफ की याद आ रही है। तब उसने कहा कि हाँ अल्ताफ बहुत याद आ रहे हैं।
ऐसे ही कुछ देर बात होती रही तभी न्यूज पर दिखाया कि कल 11 बजे से लॉकडाउन शुरू हो रहा है और आज सब फ्लाइट ट्रेन कैंसिल हो गई हैं।
ये सुनकर वैसे तो दोनों के ही होश उड़ गए। पर सबसे ज्यादा तो तबस्सुम का बुरा हाल होने लगा।
दोनों ने अपने शौहर को कॉल लगाकर आने को कहा कि वह आ जाएँ।
पर अब 2500 किमी दूर केरला से कैसे आ सकते थे। उड़कर नहीं आ सकते ना पैदल ही आ सकते थे।
तबस्सुम का रो-रोकर बुरा हाल होने लगा।
ये रात बड़ी मुश्किल से गुजारी।
और उधर जब शंकर को पता चला तो उसने सबसे पहले जो पैसे चुराए थे किसी और काम के लिए। उन पैसों की 1 वीक की बड़ी मुश्किल से दारू मिली।
और वह उसे लेकर एक बड़े थैले में अपनी फैक्ट्री न जाकर सीधा तबस्सुम के घर चला आया।
और वहीं घर के पीछे जो जंगल था वहाँ डेरा डालकर दारू पीने लगा। उसे पता था कि तबस्सुम घर पर नहीं होगी।
और वह दारू पीकर घर के पीछे की दीवार के सहारे ऊपर चढ़ गया।
और जब नीचे की तरफ आया तो नसीब से दरवाजा खुला हुआ था सीढ़ियों का।
तब अपनी दारू ऊपर टंकी के नीचे एक कोने में रखकर एक थैले से फ्राई मुर्गा निकालकर सीधा नीचे आया और डायरेक्ट तबस्सुम के रूम में चला गया। पूरा रूम की तलाशी लेने लगा तो अलमारी में कई सेट ब्रा-पैंटी के मिले।
तो नशे की हालत में पहले तो उसने मुर्गा खाया और उसकी हड्डी वहीं बेड के पास फेंक दी।
2 या 3 बीड़ी भी लगातार पी। तो उसे सेक्स का बुखार चढ़ा।
मगर अब तो यहाँ कोई नहीं था। ना किसी रंडी के पास जा सकता था।
तब उसने ब्रा को पैंट खोलकर यानी नंगा होकर अपने लंड पर लगाया और पैंटी के एक हिस्से को अपने गले में डालकर तबस्सुम का पिछवाड़ा उसके दूध उसकी कमर सोचकर मुठ मारने लगा।
और काफी देर सोचकर उसका माल निकल आता है और वह माल ब्रा के दोनों कप में डालकर उसे अपने से दूर फेंक देता है।
पैंटी को भी अपने गले से निकालता है और उसे भी दूर फेंककर नरम आलिशान बिस्तर पर सो जाता है जिस पर सिर्फ आज तक दोनों मियाँ-बीवी सोए थे।
सुबह नादिया को लाइब्रेरी जाना था बस 3 घंटे के लिए। और तबस्सुम को अपने घर भी जाना था कि वह कुछ खाने-पीने का इंतजाम खाला से कहकर करवा ले। और अब खाला को यहीं रोकना होगा।
ये सोचकर जल्दी वहाँ से निकल जाते हैं। 11 बजे नादिया को आना भी था कुछ बुक्स लेकर। वरना उसका टाइम खुद कैसे कट पाती उसे बुक्स पढ़ने का भी शौक था।
पर नादिया को ये नहीं पता था कि आज लाइब्रेरी बंद हो गई है।
जब थोड़ी दूर कार से तब्बी को उतारकर वह नादिया निकली तो कुछ दूर जाकर पता चला कि सब ही पूरे तरह से बंद हो गए हैं बस कुछ खास शॉप को छोड़कर जो रोज-मर्रा के लिए 3 घंटे के लिए खुले थे और बाहर सड़क पर अब सिक्योरिटी ऑफिसर का कड़ा पहरा भी हो गया था।
नादिया ने सोचा कि वह तब्बी के घर ही चली जाए। पर उसे भी कुछ लेना था तो वह चंद शॉप ओपन थीं उसने वहाँ से सामान लेने के लिए कार रोककर कुछ सामान किया और सामान लेकर अपने घर आ गई।
अब उधर तबस्सुम ने अपना दरवाजा खोला तो वह घर में आकर अपने बेटे को वहीं सोफे पर पहले लिटाकर उसका पैम्पर चेंज करा। और फिर उसने काम करने वाली खाला को कॉल लगाकर बात करी तो पता चला कि वह 40 किमी दूर अपने गाँव में शादी में गई थी। 2 दिन पहले और वह वहाँ फँस गई।
घर में भी सामान ज्यादा नहीं था पर आज के लिए तो हो जाता पर दूध का डिब्बा भी आज खत्म होने वाला था। और वैसे वह आज अपना ज्यादातर दूध पिलाती थी फिर भी अगर आज दूध कम पड़ गया तो उसका बच्चा भूखा रह जाएगा और बेबी फूड्स भी उसने मँगवाया नहीं था।
पर राहत की ये बात थी कि दोपहर तक मेडिकल खुले रहेंगे जिससे कम से कम मिल्क पाउडर और बेबी फूड आ जाते पर अकेले तो नहीं जा सकती और अब 11 बजे किसको भेजे तब उसके दिमाग में शंकर का ख्याल आया।
पर उसका ख्याल आने से गुस्सा भी बहुत आया। लेकिन ये कहाँ पता कि शंकर उसी के दिमाग के साथ-साथ घर में ही था।
तब अपने बच्चे को लेकर उसकी डायपर चेंज करने के बाद हॉल में लगा एक बड़ा सा झूले में लिटाकर थोड़ी देर खेलती रही।
और जब वह सो गया तो अपने रूम में आती है। जब जैसे ही रूम में आती है तो एक बार फिर से तबस्सुम के होश उड़ जाते हैं। उसे लगता है कि फिर से उसके पैरों से जमीन निकाल दी हो।
जो नजारा देखा तो उसे यकीन ही नहीं हुआ कि वह अपने घर के रूम में ही है।
आगे क्या हुआ पढिए अगले पार्ट मे

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