सानिया एक मजबूर हाउसवाइफ – 1

Saniya ek housewife ki chudai kahani:- दोस्तों, मेरी पिछली कहानी आप लोगों को पसंद आई इसलिए नई कहानी लिखने जा रहा हूँ। ये कहानी एक सोच है, काल्पनिक है। किसी भी धर्म-जाति से इसका कोई संबंध नहीं है। कैरेक्टर के नाम बस फॉर्मेलिटी हैं। किसी भी धर्म को टारगेट करने के लिए ये कहानी नहीं लिखी जा रही है।

इसको पढ़ने वालों से निवेदन है कि इसको सिर्फ एंटरटेनमेंट के लिए पढ़ें और भूल जाएँ…… थैंक यू।

Saniya ek housewife ki chudai kahani

सानिया खान… उम्र 30 साल, हाइट 5.7, बेहद खूबसूरत, एक बच्चे की माँ है। बदन भरा हुआ, ज्यादा मोटी नहीं, ज्यादा पतली नहीं। बड़ी गाँड, बड़े बूब्स जो देखे तो देखता रह जाए…

अल्ताफ खान… उम्र 34 साल, सानिया का हस्बैंड। गोरा रंग, बॉडी सलमान खान की तरह, बेहद स्मार्ट-खूबसूरत, किसी हीरो से कम नहीं। हाइट 6 फीट। एक कामयाब बिजनेसमैन, एक रेडीमेड कपड़ों के स्टोर का मालिक।

बबलू… उम्र 4 साल, सानिया और अल्ताफ का क्यूट सा बेटा। अभी शहर की बड़ी सी इंग्लिश नर्सरी में पढ़ रहा है।

सुरेश कुमार (सुरेश काका)… उम्र 55 साल, हाइट 5.9 इंच। दिखने में काला, मुँह पर बहुत से गड्ढे बने हुए थे ओम पुरी की तरह। चेहरे पर मूँछें। बीवी मर चुकी है, बेटा और बहू छोड़कर चले गए हैं। मगर पैसों की कोई कमी नहीं है। बहुत पैसा था सुरेश काका के पास। किराए पर टैक्सी और ऑटो भी देता था सुरेश काका। सुरेश काका की कॉलोनी में बहुत इज्जत थी इसलिए सब उसको सुरेश काका कहते थे।

संजय (संजया)… उम्र 38 साल, मोटा सा, हाइट 5.10 इंच। एक मैकेनिक, हमेशा मैला सा दिखने वाला। ये सुरेश काका का दोस्त था। दोस्त क्या, फ्री की शराब पीने के लिए और उधार पैसे लेने के लिए संजय ने सुरेश काका को पटा रखा था। सुरेश काका ने इसको एक गैरेज डाल कर दी थी।

केशव एम. (केशव मामा)… उम्र 56 साल, हाइट 5.9 इंच। ज्यादा मोटा नहीं था। बड़ी मूँछें रखता, काला सा जैसे बहुत दिनों से नहीं नहाया। इस तरह का कैरेक्टर। ये भी सुरेश काका के रहमो-करम पर जीने वाला था। इसको सुरेश काका ने ही केशव मामा नाम दिया था। ये भी रोज़ सुरेश काका के यहाँ फ्री की दारू पीने आता। सुरेश काका ने इसको भी एक पान की दुकान खोल कर दी थी।

सचिन नाइक… सचिन अल्ताफ का बचपन का दोस्त। सचिन इस कहानी में गेस्ट अपीयरेंस में है। उसका ज्यादा रोल नहीं है इस कहानी में।

आगे भी कुछ कैरेक्टर आते रहेंगे……

दोस्तों, जैसे मैंने इंट्रोड्यूस किया पिछले अपडेट में, तो हम कहानी पर आते हैं।

उत्तर प्रदेश के एक शहर, जिस शहर में गुलशन नगर एक बड़ी सी कॉलोनी है। वहाँ एक कपल सानिया, अल्ताफ और उनका बच्चा बबलू रहते थे। शानदार डुप्लेक्स रो हाउस है इनका इस कॉलोनी में। शहर के सभी बड़े पैसे वाले इज्जतदार लोग रहते थे।

सानिया आज से 5 साल पहले इस घर में दुल्हन बनकर आई थी। बड़े प्यार से अल्ताफ के अब्बू-अम्मी ने सानिया को दुल्हन बनाकर लाया था अपने इकलौते बेटे अल्ताफ के लिए। सानिया के माँ-बाप की माली हालत बहुत खराब थी। सानिया की एक बड़ी बहन थी जिसकी शादी हो गई थी।

आज शादी की पहली रात, सुहागरात थी अल्ताफ और सानिया की।

सानिया अपने शानदार बेडरूम के बेड पर, जो फूलों से सजाया था, उस पर अपने शौहर अल्ताफ का इंतजार कर रही थी, घूँघट ओढ़े हुए…

कुछ देर में एक शानदार शेरवानी पहने हुए एक खूबसूरत जवान अंदर दाखिल होता है। ये अल्ताफ था। वह सानिया के करीब पहुँचकर बोला,

अल्ताफ: तुम जैसी खूबसूरत बीवी मुझे मिलेगी, ऐसा मैंने सपने में भी नहीं सोचा था…

सानिया सिर झुकाए हुए नीचे देख रही थी, घूँघट ओढ़े हुए।

अल्ताफ सानिया का घूँघट हटाता है और सानिया का चेहरा ऊपर उठाता है। सामने का नजारा एक बेहद खूबसूरत हसीना थी जिसका गोरा सा चेहरा, जिस पर रेड लिपस्टिक लगी हुई थी। अल्ताफ उसको देखकर बोला,

अल्ताफ: उफ्फ पहली बार जब तुमको देखा था तब से ये दिल तुम्हारा हो गया था मेरी जान।

सानिया अपनी आँखें बंद कर देती है।

अल्ताफ आगे बढ़कर सानिया को चूम लेता है। सानिया की शर्म के मारे बुरा हाल था। अल्ताफ सानिया की खूबसूरती देखकर पागल सा हो गया था।

अल्ताफ ने सानिया के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और चूसने लगा।

सानिया की आँखें बंद ही थीं। 10 मिनट तक अल्ताफ सानिया के होंठों को चूस रहा था, सानिया के होंठों का रस पी रहा था……

अल्ताफ ने सानिया के होंठों को छोड़ा और सानिया का दुपट्टा जो घूँघट की तरह सानिया ने ओढ़ा था, उसको निकाल दिया। सानिया अब रेड कलर की सलवार-कमीज में थी।

अल्ताफ ने आगे बढ़कर सानिया के सभी गहने उतार दिए। सानिया अपनी आँखें बंद किए हुए थी। उसको पता था आज उसका शौहर उसके साथ क्या करने वाला था……

धीरे-धीरे अल्ताफ ने सानिया का कमीज उतारना शुरू किया। सानिया ने अल्ताफ के हाथों को रोकने की कोशिश की मगर कामयाब ना हुई और अल्ताफ ने सानिया का कमीज उतार दिया। सानिया रेड कलर की ब्रा में सिर झुकाए बैठी थी।

अल्ताफ ने सानिया की सलवार का नाड़ा ढीला किया। कुछ ही देर में सानिया की सलवार नीचे आने लगी। सानिया ने कोशिश की सलवार नीचे ना जाए मगर अल्ताफ अब कहाँ मानने वाला था। अल्ताफ ने सानिया की सलवार उतार दी। सानिया अब ब्रा-पैंटी में बैठी अपना जिस्म छुपाए बैठी। सानिया को बहुत शर्म आ रही थी। उसने अब भी अपनी आँखें बंद कर रखी थीं……

अल्ताफ ने सानिया को जल्दी ही नंगा कर दिया। सानिया इशारों से ना-ना कर रही थी मगर अल्ताफ ने सानिया को नंगा कर ही दिया। सानिया का भरा हुआ गोरा जिस्म अल्ताफ के सामने था……

अल्ताफ ने भी अपने कपड़े उतार दिए। वह भी नंगा हो गया……

अल्ताफ सानिया के बूब्स पर टूट पड़ा। अल्ताफ ने बारी-बारी सानिया के दोनों बूब्स को चूसने लगा। सानिया अल्ताफ को रोकने के लिए उसके सिर को पकड़ रही थी मगर अल्ताफ सानिया के बूब्स चूसे जा रहा था। अब हल्के-हल्के सानिया को भी मजा आने लगा……

सानिया: सsssshhhhhhhhhh आааааааhhhhh नहीं……

सानिया को अब मजा आ रहा था। अब बूब्स को चुसवाकर फर्स्ट टाइम एक्सपीरियंस था सानिया का बूब्स चुसवाने का……

अल्ताफ भी पूरे मजे लेकर सानिया के बूब्स चूस रहा था। अल्ताफ का लंड 9 इंच लंबा था जो तन कर खड़ा हो चुका था। अल्ताफ ने अपना लंड सानिया की चूत पर सेट किया और धक्का लगा दिया। सानिया की चूत सील पैक थी इसलिए अल्ताफ का मोटा लंड अंदर नहीं जा रहा था……

अल्ताफ ने फिर जोर लगाया और अल्ताफ का सुपाड़ा सानिया की चूत में घुस गया। सानिया की चूत से हल्का-हल्का खून आने लगा और सानिया ने अपने मुँह पर हाथ रख दिया मगर फिर भी दर्द उसको बरदाश्त नहीं हो रहा था।

सानिया: सsshhh आааааааиииииииии аммммммииииии मार गई… छोड़िए…… मुझे…… आааhhh

सानिया का मुँह खुल गया था। अगले धक्के में अल्ताफ का आधा लंड सानिया की चूत में जा चुका था।

आधे लंड से अल्ताफ सानिया को चोदने लगा अपनी कमर हिलाए……

सानिया: आааааааииииииии बस अब और नहीं…… आаааааааhhh ऐसा कर रही थी।

सानिया की आज पहली चुदाई थी। सानिया की आँखों में हल्के आँसू भी आ गए थे……

अल्ताफ धक्के लगा रहा था कंटीन्यू। अल्ताफ का आधा लंड भी बरदाश्त नहीं कर पा रही थी सानिया……

अब अल्ताफ ने जोर का धक्का लगा दिया और पूरा 9 इंच लंड सानिया की चूत में जा घुसा।

सानिया: म्माааमाаа मर गई…… बस कीजिए…… ना…… आааааааааааааh

सानिया की आँखों से बहने लगे। ये देखकर अल्ताफ कुछ देर रुक गया।

सानिया को कुछ देर अल्ताफ ने कंफर्टेबल होने दिया और हल्के-हल्के झटके मारने लगा……

कुछ देर के बाद सानिया भी गरम होने लगी। उसको अलग ही मजा आने लगा। जिंदगी की पहली चुदाई थी सानिया की। वह अलग ही दुनिया में खोने लगी…… अब सानिया की दर्द भरी सिसकारियाँ मजे की सिसकारियों में तबदील होने लगीं……

सानिया: आааааааhhhhhhhh आаааааааааааааааааhhhhhh मर गई।

अल्ताफ भी समझ गया कि सानिया अब पूरे जोश में आ रही है। सानिया भी अपनी कमर धीरे-धीरे नीचे से हिलाने लगी……

अल्ताफ ने धना-धन चुदाई जारी रखी। कुछ ही देर बाद सानिया झड़ने के करीब पहुँचने लगी……

सानिया के लिए ये नया एक्सपीरियंस था……

सानिया: आаааааhhhhhhh बस करो…… मुझे…… कुछ हो रहा है…… आаааhhh करके सानिया झड़ गई।

मगर अल्ताफ अब तक नहीं झड़ा था। अपना मूसल लंड सानिया की चूत में अंदर-बाहर करे जा रहा था।

कुछ देर बाद अल्ताफ भी सानिया की चूत में झड़ गया……

आज अल्ताफ और सानिया का फर्स्ट सेक्स था तो अल्ताफ ने भी दूसरा राउंड नहीं लगाया……

सुबह हुई। आज सानिया बहुत हल्का-हल्का महसूस करके नींद से जागी। अल्ताफ अब तक सोया हुआ था…… आज से अल्ताफ और सानिया की नई जिंदगी की शुरुआत हो रही थी……

ये सुबह सानिया के नए घर में नई सुबह थी। सानिया फ्रेश होकर बाहर किचन में आई और पहले ही दिन किचन संभाल लिया। ये देखकर सानिया के सास-ससुर बहुत खुश हुए कि उनको एक नेक और जिम्मेदार बहू मिली……

इसी तरह जिंदगी आगे बढ़ने लगी। दिन बीतने लगे। अल्ताफ और सानिया की सेक्स लाइफ भी अच्छी चलने लगी। अल्ताफ सानिया को संतुष्ट करता अपने बड़े लंड से……

वक्त बीतता गया…… एक दिन अल्ताफ के अम्मी-अब्बू शहर से बाहर कुछ काम के लिए गए और लौटते हुए रास्ते में उनका एक्सीडेंट हुआ और दोनों की मौत हो गई। ये बुरी खबर अल्ताफ और सानिया पर बिजली की तरह टूटी……

अल्ताफ के माँ-बाप की मौत के बाद अल्ताफ कुछ टूट गया। सानिया को भी अपने सास-ससुर की कमी खल रही थी……

अल्ताफ का रेडीमेड का स्टोर बहुत अच्छा चलता था। पैसों की कोई कमी नहीं थी। खुद का आलिशान घर था, कार थी, एक बाइक थी, बैंक बैलेंस था। मगर बिजनेस के लिए अल्ताफ ने बैंक से कुछ कर्ज ले रखा था……

धीरे-धीरे अल्ताफ और सानिया का गम भी कम होता गया वक्त के साथ…… उस पर एक और खुशखबरी आई कि सानिया माँ बनने वाली है…… अल्ताफ और सानिया खुशी के मारे जैसे पागल से हो गए थे……

और कुछ ही महीनों बाद एक खूबसूरत बेटे को सानिया ने जन्म दिया।

अल्ताफ की अधूरी जिंदगी पूरी हो गई थी। उसकी फैमिली अब कंप्लीट हो गई थी……

अल्ताफ की जिंदगी में खुशियाँ ही खुशियाँ थीं। सानिया जैसी खूबसूरत बीवी और चाँद जैसा बेटा……

मगर हर वक्त सबकुछ ठीक नहीं चलता। एक अँधेरे ने अल्ताफ के मोबाइल पर दस्तक दी……

अल्ताफ शॉप पर बैठा था कि उसको कॉल आया।

सामने से एक आदमी ने अल्ताफ से कहा,

सचिन: कैसा है भाई? पहचाना या नहीं?

अल्ताफ: कौन? पहचाना नहीं।

दूसरी तरफ से: अबे साले मैं सचिन हूँ।

अल्ताफ: अबे सच्या, कैसा है? कहाँ है तू?

सचिन: इसी शहर में हूँ।

अल्ताफ: कब आया?

सचिन: अबे आज ही ट्रांसफर हुआ है। तेरा फोन नंबर मिला अपने गाँव के दोस्त से। मुझे भूल गया ना कमीने?

अल्ताफ: अरे नहीं यार, आजकल काम में बिजी रहता हूँ।

सचिन: साले शादी में तक नहीं बुलाया।

अल्ताफ: भाई तेरा पता नहीं था। सॉरी।

सचिन: चल कोई बात नहीं। मैं आ रहा हूँ तेरे घर। एड्रेस बता।

अल्ताफ सचिन को एड्रेस देता है। अगले दिन सचिन घर आ जाता है……

अल्ताफ सानिया से सचिन को मिलता है।

सचिन: यार क्या नसीब है भाई तेरा। कितनी खूबसूरत भाभी है मेरी।

अल्ताफ मुस्कुरा देता है। सानिया सचिन की बातों से शर्मा जाती है……

सचिन सानिया को देखता ही रह गया मगर सचिन अल्ताफ का बचपन का दोस्त था। इस लिहाज से उसने सानिया को बुरी नजर से नहीं देखा……

नॉर्मली बातें हुईं। अल्ताफ ने जबर्दस्ती की तो सचिन खाना खाकर गया…… सचिन कभी घर पर तो कभी अल्ताफ के शॉप पर आता रहता……

सचिन: भाई चल आज मेरे साथ।

अल्ताफ: अरे कहाँ?

सचिन: तू चल ना यार।

अल्ताफ शॉप पर काम करने वालों के हवाले कर सचिन के साथ चला जाता है। सचिन अल्ताफ को शहर के बड़े से बीयर बार में ले जाता है……

अल्ताफ: अरे भाई ये तुम कहाँ ले आए मुझे? कोई देख लेगा तो बदनामी होगी।

सचिन: अबे कुछ नहीं होता यार। असली जिंदगी का मजा तो पीने में है। चल आजा।

सचिन अल्ताफ को जबर्दस्ती बार में ले जाता है। सचिन खुद के लिए व्हिस्की ऑर्डर करता है। अल्ताफ को बहुत जबर्दस्ती करता है मगर अल्ताफ सिर्फ सॉफ्ट ड्रिंक लेता है…… शराब पीने के बाद सचिन अल्ताफ को जुए के अड्डे पर ले जाता है……

अल्ताफ: सची क्या हो गया तुझे? ऐसे गंदे शौक कब लग गए तुझे? पहले शराब, अब जुआ। भाई बर्बाद हो जाएगा। कुछ नहीं बचेगा जिंदगी में। ये सब हराम है……

सचिन: तू लेक्चर बहुत देने लगा है। चलना मेरे साथ।

अल्ताफ: यार कोई देख लेगा। पहले ही डर-डर के शराब के अड्डे पर बैठा था तेरे साथ। अब यहाँ नहीं भाई……

सचिन यहाँ भी जबर्दस्ती करता है और अल्ताफ जुए के अड्डे में भी सचिन के साथ चला जाता है……

ऐसे ही अब रोज़ होने लगा था। सचिन ड्यूटी से आता, हर दिन शराब के अड्डे पर जाता, उसके बाद जुए के अड्डे पर। सचिन खानदानी पैसे वाला था। उसको सरकारी नौकरी, पैसों की कमी नहीं थी……

हर दिन की तरह एक दिन सचिन ने कहा अल्ताफ से,

सचिन: अबे बीयर पी। मजा आएगा।

अल्ताफ: नहीं भाई, मैं मर जाऊँ मगर शराब को हाथ नहीं लगाऊँ।

सचिन: अबे बीयर शराब कहाँ? ये तो लड़कियाँ पीती हैं। वो देख सामने वाले टेबल पर वो लड़की बीयर पी रही है। मैं तेरा बचपन का दोस्त हूँ। तुझे गलत रास्ता थोड़े ना दिखाऊँगा।

बहुत देर तक बहस चलती है। अल्ताफ बचपन के दोस्त की बातों में आता है और बीयर पीने को राजी हो जाता है……

सचिन बीयर ऑर्डर करता है। बीयर आती है…… सचिन खुद बीयर का ग्लास भरता है अल्ताफ के लिए……

अल्ताफ डरते-हिचकिचाते हुए आखिर उस ग्लास को थाम लेता है जिसमें बीयर थी…… अल्ताफ बीयर को नहीं, अपनी बर्बादी को थाम रहा था……

एक घूँट पीते ही अल्ताफ ने थोड़ा मुँह बनाया जैसे बहुत कड़वी लगी बीयर उसको…… सचिन ने फिर फोर्स किया, दोस्ती का वास्ता दिया और फिर दूसरा घूँट अल्ताफ ने लिया। इस बार ज्यादा कड़वी नहीं लगी बीयर अल्ताफ को। अल्ताफ अब हल्का-हल्का नशे में आने लगा। उसको मजा आने लगा……

अल्ताफ: यार मैं तो हवा में उड़ रहा हूँ जैसे। बहुत मजा आ रहा है यार। सच कहा तूने। गजब की चीज है ये बीयर तो।

सचिन: देख मैंने बोला था ना। मजा आया ना?

अल्ताफ: हाँ आया।

अल्ताफ दंडुरस्त बॉडी बिल्डर था, कसा हुआ था। एक बीयर से उसको मजा आया। वह लड़खड़ा नहीं रहा था। बातें भी रिलैक्स कर रहा था……

अल्ताफ अपने घर पहुँचा। अल्ताफ नॉर्मली चलकर घर पहुँचा और नॉर्मली जैसे बात करते हैं वैसे ही सानिया से बात की तो सानिया को बीयर की बदबू आई।

सानिया: ये कैसी बदबू आ रही है?

अल्ताफ: वो… वो मैंने चीकू खाए थे। सचिन आया था शॉप पर। सचिन को चीकू बहुत पसंद है।

सानिया भी इतना ध्यान नहीं देती……

अब ये रोज़ का सिलसिला होता था। अल्ताफ बीयर पीता, सचिन व्हिस्की और बाद में दोनों जुआ खेलने जाते……

सचिन और अल्ताफ एक दिन नशे में जुए के अड्डे पर……

सचिन: यार तेरा लक मुझसे अच्छा है।

अल्ताफ: वो कैसे?

सचिन: देख तुझे अच्छी बीवी मिली, इतना प्यारा बेटा है। मुझे देख, अब तक कुँवारा हूँ। तेरा लक अच्छा है। आज तू जुआ खेलेगा, पैसे मैं लगाऊँगा।

अल्ताफ ने नशे में हाँ भर दी।

अल्ताफ: मैं तैयार हूँ। बोल क्या करना है……

सचिन: कुछ नहीं करना। बस एक नंबर बता। मैं उस पर पैसे लगाऊँगा।

अल्ताफ: नंबर… नंबर… कौन सा नंबर बोलूँ? 22।

सचिन: 22 ओके।

सचिन 22 नंबर पर 2000 लगाता है और जीत जाता है।

अल्ताफ और सचिन दोनों खुश होते हैं……

सचिन फिर अल्ताफ को बोलता है,

सचिन: अब अगला बता।

अल्ताफ: 16।

सचिन 16 लगाता है और जीत जाता है……

आज सचिन ने पहली बार पैसे जीते थे और अल्ताफ को भी आज समझ आया था कि जुआ कैसे खेला जाता है।

अल्ताफ घर पहुँचा। सानिया ने कहा,

सानिया: आजकल डेली चीकू खाते हो?

अल्ताफ: वो… वो सचिन को बहुत पसंद है।

सानिया: ठीक है ठीक है।

अल्ताफ खाना खाता है, बच्चे को प्यार करता है। अल्ताफ अब तक शराब पी रहा था। शराब अल्ताफ को नहीं पी रही थी इसलिए शराब के नशे पर अल्ताफ भारी पड़ता……

अल्ताफ रात भर सोचता है, साला इतना आसान खेल है जुआ और आज सचिन ने मेरी वजह से बहुत पैसे जीते। अगर मैं खुद ट्राई करूँ तो… हाँ कल मैं खुद ट्राई करूँगा मेरे लिए……

और हर शाम की तरह ये शाम भी नशे में अल्ताफ और सचिन जुए के अड्डे पर……

अल्ताफ: भाई आज मैं अपने लिए खेलूँगा।

सचिन: ये हुए ना बात मेरे शेर। चल आजा, लगा दाव।

ये दाव अल्ताफ ने जुए का नहीं, अपनी जिंदगी का लगा दिया था……

और पहले ही दाव पर अल्ताफ जीत गया। अल्ताफ बहुत खुश हुआ। फिर अल्ताफ ने दूसरा दाव लगाया, फिर जीत गया……

सचिन: यार लुट लिया साले। बहुत लकी है तू।

अल्ताफ लकी था या नहीं, ये तो आने वाला वक्त बताएगा……

आगे की कहानी अगले पार्ट में।

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