बड़े घर की पाकीज़ा चूतें 2

Family me sabki chudai ki kahani:- जैसे ही मैं बाहर निकली तो मुझे पहली बार उसे देखते ही घिन आने लगी… और एक अजीब सी बदबू भी… जो उसके गंदे कपड़ों से और उसके काले जिस्म के पसीने से मिली-जुली थी… उसने एक फटी-मैली सी शर्ट और नीचे एक गंदा सा सिला हुआ पैंट पहन रखा था… और उसके मुँह में शायद वो कुछ चबा रहा था… शायद तंबाकू था… और चेहरा क्या बताऊँ कोयले से भी काला… और सर पर कुछ गिने-चुने बाल थे… जो सफ़ेद पड़ने लगे थे… और दाढ़ी भी कुछ-कुछ सफ़ेद थी…

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Family me sabki chudai ki hindi sex story

कालिया: नमस्ते हम कालिया हैं… लोग प्यार से हमें कालु बुलाते हैं… हम आपका कुत्ता लेकर आए हैं…

वैसे तो वो मुझसे 7-8 फीट दूर था… लेकिन जैसे ही उसने ये सब बोलने के लिए मुँह खोला… वैसे ही मुझे शराब की स्मेल आने लगी… तो मुझे समझते देर नहीं लगी… ये ड्रिंक भी करता है… करता क्या करके आया भी है…

आक़िल (कालु से): अंकल आप मेरे को ले आइए…

कालु: हाँ बेटा ये ले तेरा कुत्ता…

आक़िल: ये… बड़ी अम्मी… बड़ी अम्मी… ये देखिए मेरा कोको…

जब मैं आक़िल से बात कर रही थी… तब मुझे लगा कि कोई मेरे बूब्स को घूर रहा है… और जब मैंने कालिया की तरफ़ देखा तो उसकी नज़रें मेरे बूब्स पर ही थीं… फिर एकदम से उसने अपनी नज़रें नीची कर लीं… और मुझे बिल पकड़ाते हुए बोला…

कालु: ये लीजिए मैडम जी बिल…

मैंने बिल लिया और अंदर जाने लगी… वैसे ही मुझे लगा कि कोई मुझे पीछे से घूर रहा है… और जब मैंने पलटकर देखा… तो फिर वही हो रहा था… कालु आँखें फाड़के मेरी गाँड को देख रहा था… चलते वक़्त मेरी गाँड की दोनों फाँकें आपस में टकरा रही थीं… और जब मैंने उसे देखते हुए पकड़ा तो इस बार उसने नज़रें नहीं फेरीं… बल्कि बहुत घिनौनी हँसी हँसने लगा… जिसे देखके मुझे ही शर्म आ गई… और मैं तेज़ क़दमों के साथ अंदर चली गई…

अलीना (ये क्या था… क्या वो कमीना मेरी बूब्स और ऐस को घूर रहा था…)

अब मुझे वो आदमी कुछ ठीक नहीं लगा… तो मैंने उसे दूर रहने की ही सोची और पैसे लिए… मरियम के हाथों कालु तक पहुँचा दिए…

अब हर महीने डॉग को वैक्सीन लगती थी… उसके अंदर के पॉइज़न को काटने के लिए… ताकि अगर वो किसी को बाइट भी कर ले तो कोई प्रॉब्लम न हो…

अब ऐसे ही 8 महीने निकल गए… इक़बाल स्टार्टिंग के दो महीनों में तो डॉग को ले गया था… फिर टाइम न निकलने की वजह से फ़रीना (नौकरानी) उसे लेकर जाने लगी…

ऐसे ही 4 महीने और निकल गए… और पूरा एक साल हो गया… जब हमने कोको (डॉग) को अडॉप्ट किया था… और दो दिन बाद उसे वैक्सीन भी लगनी थी…

(वैक्सीन डे…)

आक़िल: बड़ी अम्मी… आज कोको को इंजेक्शन लगना है… आप चलिए ना…

अलीना फ़रीना कहाँ है… अरे हाँ वो तो बीमार है ना… तेरी अम्मी को ले जा…

आक़िल: नहीं वो गुस्सा करती है… आप ही चलिए ना… प्लीज़ बड़ी अम्मी…

अलीना ठीक है चल… मैं तैयार होकर आती हूँ…

अब मुझे नहीं पता था कि मेरा आज पेट शॉप पर जाना मेरे लिए ज़िंदगी का सबसे गलत फ़ैसला होगा… बुरक़ा और उसके साथ नक़ाब पहनके जाना उससे भी गलत फ़ैसला होगा…

अब जैसे ही पेट शॉप में हम एंटर हुए…

आक़िल: बड़ी अम्मी… आप कोको को लेकर उस रूम में चली जाइए… वहीं इंजेक्शन लगता है…

अलीना तुम नहीं चलोगे…

आक़िल: नहीं… अंकल ने बोला था कि वहाँ सिर्फ़ बड़े लोग ही जा सकते हैं… बच्चे नहीं…

अलीना (अंकल… ओ शायद पेट शॉप ओनर ने बोला होगा…) (हँसते हुए) ठीक है मेरे बच्चे…

फिर मैं कोको को लेकर उस रूम में चली गई… रूम में रोशनी कुछ कम थी… लेकिन इतनी नहीं कि समझ में न आए और जब मैंने चारों तरफ़ नज़रें घुमाईं… तो मुझे वो वैक्सीनेशन रूम कम… स्टोर रूम ज़्यादा लग रहा था… अब मैं जैसे ही थोड़े आगे रूम में बढ़ी… तो मुझे ये एहसास हुआ कि मेरे पीछे कोई है… और जैसे ही मैं मुड़ने वाली थी… उससे पहले ही किसी ने मुझे पीछे से पकड़ लिया…

आदमी: तूने तो फ़ोन पर कहा था कि तू बीमार है… नहीं आ पाएगी… लगता है तू मुझे सरप्राइज़ देना चाहती थी… मैंने तुझे उस दिन बोला था ना… कि मुझे मुलियाँ बुरक़े पहने हुए कितनी पसंद हैं… इसीलिए तू बुरक़ा पहनके आई है…

ये कहते हुए उसने दोनों हाथ मेरे दोनों बूब्स पर रख दिए… और इससे पहले मैं कुछ रिएक्ट कर पाती… उसने ज़ोर से मेरे बूब्स को मसल दिया… जिससे मेरी आाह निकल गई… और एकदम से मेरा दिल बहुत ज़ोरों से धड़क उठा…

आदमी (बूब्स मसलते हुए): वाह मेरी जान… आज तो कपड़ों के ऊपर से भी तेरी चूचियाँ बहुत नरम लग रही हैं… इतनी नरम तो कभी तेरी नंगी चूचियाँ भी नहीं लगीं…

ये कहते हुए उसने मेरे बूब्स को ज़ोरों से दबाना शुरू कर दिया… जिससे न चाहते हुए भी मेरी दबी हुई सिसकियाँ निकलने लगीं… और मेरी धड़कनें बहुत तेज़ चलने लगीं…

अलीना उम्मम म्मम म्मम…

आदमी: आज तो तेरी सिसकियाँ भी बड़ी मदक लग रही हैं… चटकkkk…

फिर उसने उसका राइट हाथ मेरे राइट बूब से हटाया… और बुरक़े के ऊपर से ही मेरी गाँड की राइट फाँक पर एक तेज़ थप्पड़ जड़ दिया… जिससे मेरी थोड़ी तेज़ आाह निकल गई…

अलीना (चटकkkk) आहाआआआ…

आदमी: तेरी ये मदक आहें सुनके रहा नहीं जाता… मेरी मुली रंडी…

अलीना (क्या… ये मुझे क्या बोला… रन्न्न्…)

ये कहते हुए उसने मुझे एकदम से घुमाया… और जो मैंने देखा मेरे पैरों तले ज़मीन खिसक गई… क्योंकि जो चेहरा मेरे सामने था… वो कोई और नहीं काला-कलूटा कालिया ही था… और इससे पहले मैं कुछ रिएक्ट करती… या सँभल पाती… उससे पहले ही उसने नक़ाब के ऊपर से ही मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए… और नक़ाब के ऊपर से ही मेरे होंठों को चूसने लगा… और नक़ाब के बावजूद भी उसके मुँह से शराब की और तंबाकू की मिली-जुली स्मेल मेरी नाक में जाने लगी… और जैसे ही उसके होंठ मेरे होंठों से मिले… मेरा दिल इतनी ज़ोर से धड़का… जैसे सीने से बाहर ही निकल जाएगा…

कालु (किस तोड़ते हुए): अब रहा नहीं जाता मेरी रंडी… आज तो तूने एक चुम्मी में ही मेरे लंड की क्या हालत कर दी… देख…

ये कहते हुए एकदम से उसने उसका पैंट अंडरवियर सहित नीचे गिरा दिया… और जो मैंने देखा… उससे मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं… और पहली बार मेरी चूत में कुछ हलचल सी हुई… और एक अजीब सी बदबू जो मैंने आज तक नहीं सूँघी थी… वो मेरी नाक से होते हुए मेरे दिल में उतरने लगी… जिससे मेरे हाथ-पैर ठंडे पड़ने लगे… और चाहके भी मैं कुछ रिएक्ट नहीं कर पाई या उसे पीछे नहीं धकेल पा रही थी… और इतने में ही बाहर शॉप में कुछ आवाज़ें आने लगीं…

कालु: साला इस मादरचोद को भी अभी आना था… चल जल्दी से मेरा माल निकाल दे…

ये कहते हुए अगले ही पल कालु ने मेरा लेफ़्ट हाथ पकड़के उसके लंड पर रख दिया… और उसकी इस हरकत से मैं तिलमिला उठी… साथ ही मुझे ये एहसास भी हो गया कि मैं किसके साथ किस हालत में हूँ… और इस बार मैंने पूरी ताक़त से उसे पीछे धकेला… और भागके रूम से बाहर निकल गई…

शॉप ओनर: अरे आप… इंजेक्शन लग गया??

अलीना (हाँफते हुए…) वो… वो… मा… मैंन्न्…

कालु: हाँ बस लगा ही रहा हूँ…

फिर कालु ने कोको को वैक्सीन लगाई… और मैंने बिल सेटल किया… फिर हम जैसे ही पेट शॉप से निकलने को हुए… कि मेरा मोबाइल बजने लगा… और इससे पहले मैं उठा पाती…

आक़िल: बड़ी अम्मी… किसका कॉल है…

कालु: (बड़ी अम्मी… मतलब ये फ़रीना नहीं है… और ये इसे बड़ी अम्मी बोल रहा है… मतलब ये वही है क्या…)

अलीना (ये फ़ोन भी अभी आना था…) रॉन्ग नंबर है…

अब मैंने आक़िल का हाथ पकड़ा… और शॉप से निकलके कार की तरफ़ जाने लगी… एक बार भी पीछे मुड़े बिना… और कार में बैठके मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं… और घर आकर ही आँखें खोलीं… और घर आकर मैं सीधे अपने रूम में घुस गई… और बेड पर लेट गई…

अलीना (ये… ये आज क्या हुआ… एक अनजान कोयले से भी काले बूढ़े ने मेरे जिस्म को जी भरके मसला… पूरी मनमानी की… यहाँ तक कि मेरे होंठों को तक चूस लिया… और मैं सब जानते हुए भी कुछ नहीं कर पाई…)

अब दोबारा मेरे दिमाग़ में वही सीन घूमने लगा… जब उसने मेरे मुलायम गुलाबी होंठों पर उसके काले फटे बदबूदार होंठ रखे थे… और दोबारा मेरी चूत में हलचल होने लगी…

अलीना (होश में आते हुए) ये ये मैं क्या-क्या सोच रही हूँ… छी… उस हरामखोर की इतनी हिम्मत कैसे हुई… उसकी तो मैं चमड़ी नुचवा दूँगी…

रेहान: अम्मी… अम्मी…

अलीना रेहान तुम यहाँ… मैंने कहा तो था कि आक़िल मिल गया… फिर क्यों…

रेहान: अम्मी मेरा ट्रांसफ़र इसी शहर में हुआ है… अब मैं इसी शहर का कलेक्टर हूँ… और आज से मैं यहीं रहूँगा…

अलीना (ख़ुश होते हुए): क्या… (शमा की तरफ़ देखते हुए) इज़ दैट ट्रू…

शमा: येस अम्मी जी इट्स एब्सोल्यूटली ट्रू…

अमीरा: (कालिया ने 4 आदमी बोले थे… उनमें से मुझसे बातें कौन कर रहा था… किसके पास मेरी ब्रा, पैंटी में फ़ोटो है…)

ये बात ऐसी थी कि मैं किसी को बता भी नहीं सकती थी… और ऐसे ही एक महीना गुज़र गया… मैंने बहुत कोशिश की… लेकिन मुझे उस आदमी का कोई पता नहीं चला… कालिया भी अब एडजस्ट हो चुका था… अब वो आक़िल को कॉलेज छोड़ने के साथ गार्डन की ग्रास कटिंग… प्लांट्स और फ़्लावर्स को पानी देना… और घर की साफ़-सफ़ाई भी करने लगा था… वो मेरे घर में ही ये काम करता… आपी के घर में तो उसने एक महीने में क़दम भी नहीं रखा था… (कालु मुझे मालकिन बोलता था… और मैं उसे कालु जी… क्योंकि उन्होंने आक़िल को तो बचाया ही… साथ में मेरी इज़्ज़त भी… माना अनजाने में… पर बचाई तो… तब से मेरी आँखों में उनकी इज़्ज़त बहुत बढ़ गई थी… इसीलिए मैं उनसे हमेशा रिस्पेक्ट से बात करती थी…)

और मैंने ये नोटिस किया कि फ़रीना का भी आना कुछ ज़्यादा ही बढ़ गया था… वैसे वो हफ़्ते में दो बार मेरी किचन साफ़ करने आती थी… लेकिन पिछले एक महीने से तो वो लगभग रोज़ ही आने लगी…

(फिर एक दिन…)

मैं अक्सर दोपहर में आराम करती हूँ… लेकिन आज मेरी नींद खुल गई… मुझे बहुत ज़ोरों की प्यास लगने लगी… तो मैं किचन में पानी पीने निकल गई… और जैसे ही सीढ़ियाँ उतरने लगी… मुझे कुछ आवाज़ें आने लगीं… और जैसे-जैसे मैं सीढ़ियाँ उतरती गई… आवाज़ें तेज़ होने लगीं… और जब मैंने किचन गेट से अंदर झाँका तो…

कालु जी पूरे नंगे किचन के बीचों-बीच खड़े थे… और फ़रीना भी पूरी नंगी फ़र्श पर बैठी थी और कालु जी के लंड को बड़े मज़े से चूस रही थी…

अमीरा (शॉक्ड): (या अल्लाह ये क्या है…)

कालु: वाह मेरी रंड ऐसे ही चूसती रह… आहाआआआ…

ये कहते हुए कालु जी ने फ़रीना के सर को पकड़ा… और रफ़्ली मुँह चोदना शुरू कर दिया… जिससे मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं…

अमीरा: (ये… ये ये सब क्या है… कोई एक औरत के साथ ऐसा कैसे कर सकता है…)

क़रीब 5 मिनट कालु जी ने ऐसे ही फ़रीना के मुँह को चोदना जारी रखा… फिर जब लंड निकाला… तो फ़रीना जैसे हाँफने सी लगी…

और जैसे ही लंड मुँह से निकाला… वैसे ही जो मैंने देखा मेरी आँखों को यक़ीन नहीं हुआ… लंबा निहायती काला लंड… जिसके ऊपर चमड़ी थी… और जो फ़रीना के थूक की वजह से अलग ही चमक रहा था… और जैसे ही लंड मुँह से निकाला एक अजीब सी बदबू पूरे किचन में फैल गई… जो धीमी-धीमी मेरी नाक पर भी चढ़ने लगी…

अमीरा: (या अल्लाह ये क्या है… इतना मोटा और लंबा ये तो उस फ़ोटो से भी बड़ा है… और फ़रीना कैसे इसे मुँह में ले सकती है… और इससे आती ये बदबू…)

फ़रीना (लंबी साँसें लेते हुए): आज क्या मुझे मार डालने का इरादा है…

कालु: क्या करूँ… तेरा मुँह ही इतना गरम है… चल जल्दी खोल…

फ़रीना: अब और नहीं… मुँह दुखने लगा है…

कालु: अरे मेरा माल तो निकाल…

फ़रीना: 20 मिनट से तो कर रही हूँ… फिर भी नहीं निकला… अब और नहीं… कहीं बड़ी मालकिन न उठ जाएँ…

अमीरा (शॉक्ड): (क्याआआ… 20 मिनट से…)

कालु: जल्दी मेरे लंड से पानी निकाल दे…

फ़रीना: 20 मिनट से तो चूस रही हूँ… और क्या करूँ…

फिर कालु जी ने फ़रीना को उठाके किचन स्टैंड पर झुका दिया…

फ़रीना: नहीं… यहाँ नहीं…

कालु: चिंता मत कर तुझे छुऊँगा नहीं…

फिर कालु जी ने डाइनिंग टेबल से एक चेयर उठाई… और उसपर बैठ गए…

कालु: आजा तेरी गाँड मेरे लंड पर रगड़…

फ़रीना ने देर न करते हुए अपनी गाँड को कालु जी के लंड पर रगड़ना शुरू कर दिया…

कालु: आहाआ चिनाल ऐसे ही घिसती रह… बोल मज़ा आ रहा है…

फ़रीना: स्स्स आाह्ह्ह ह्हाआ म्मज़ा आ रहा है…

ये कहते हुए फ़रीना ने स्पीड बढ़ा दी…

कालु: आहाआ साली मैं आने वाला हूँ… आहाआ…

ये कहते हुए कालु जी के लंड ने पिचकारी पर पिचकारी मारना शुरू कर दिया… जिससे देखके मैं दंग रह गई…

अमीरा: (या अल्लाह ये क्या है… इतना गाढ़ा… वो भी इतना सारा… एक ही बार में…)

और आखिरकार किचन में शांति हो ही गई… मैं भी अपने रूम में आ गई और बेड पर लेट गई… तभी मुझे दोबारा उसी नंबर से कॉल आया…

अनजान कॉलर: दो महीने हो गए… मेरी चिनाल मुझे भूल तो नहीं गई…

अमीरा (गुस्से में): साले हरामखोर तेरी हिम्मत कैसे हुई मुझे दोबारा फ़ोन करने की…

अनजान कॉलर: साली तुझ जैसी माल को कोई भला कैसे छोड़ सकता है… स्स्स आहाआ…

अमीरा: हरामखोर मुँह बंद कर वरना तुझे जान से मरवा दूँगी…

अनजान कॉलर: अच्छा किसको बोलेगी… तेरे शौहर को… या उस डीजीपी को हाँ…

अमीरा: मैं इक़बाल को बता दूँगी…

अनजान कॉलर: अच्छा बोलके दिखा उस चक्के को… कल उससे ही बात करूँगा… पूछूँगा एक रात का तेरा रेट क्या है… हा हा हा…

अमीरा (तिलमिलाते हुए): हरामखोर तेरी जान ले लूँगी मैं… अगर इक़बाल को कुछ भी कहा तो…

अनजान कॉलर: साली तुझे ब्रा, पैंटी में देखके कई बार मेरे लंड ने पिचकारियाँ छोड़ी हैं… देख…

फिर एकदम से मेरे व्हाट्सऐप पर एक वीडियो क्लिप आई…

और जब मैंने ये देखा तो पता नहीं क्यों… मुझे कालु जी की याद आ गई… कैसे उनका वो काला लंड फ़रीना की गोरी गाँड पर पिचकारी पर पिचकारी मारे जा रहा था… और मुझे पता ही नहीं चला कब… लाइफ़ में पहली बार मेरी चूत गीली हो गई…

फिर ऐसे ही ये दिन भी निकल गया… और एक हफ़्ता भी… लेकिन उसका ये रोज़ का काम हो गया… वो रोज़ मुझे ठीक 5 बजे कॉल करता था… और सिर्फ़ गंदी बातें ही करता था… जिससे मैं बहुत फ़्रस्ट्रेड महसूस करने लगी…

अमीरा: बहुत हो गया… इस हरामखोर का कुछ करना पड़ेगा… लेकिन मैं किसको बोलूँ जो मेरी हेल्प करे… घरवालों से बोल नहीं सकती… फिर किससे…

कालु: क्या हुआ मालकिन… आप कुछ परेशान लग रही हैं…

अमीरा: नहीं कालु जी… ऐसा कुछ नहीं है…

कहानी जारी रहेगी।

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