बूढ़े चौकीदार और जवान बहुरानी – 2

Chawkidar aur jawan bahu ki chudai kahani:- पिछले पार्ट में जग्गू को नया चौकीदार बनाया गया और गोपी लाल को घर के अंदर के काम सौंप दिए गए। गोपी लाल इससे खुश था क्योंकि अब उसे श्रेया (स्नेहा) के आसपास रहने का मौका मिल गया था। वह श्रेया को हवस भरी नजरों से देखता रहता था और रात को उसके बारे में सोचकर मुठ मारता था। अब पढिए आगे …

Part 1 ==>> बूढ़े चौकीदार और जवान बहुरानी – 1

Chawkidar aur jawan bahu ki chudai kahani

एक दिन बहुत जोरों से भूकंप हुआ था। हवेली बहुत बड़ा था और मजबूत होने के बावजूद भी इस प्रचंड कंपन से हवेली की दीवारों के कुछ-कुछ हिस्से में दरारें पड़ गई थीं। गोल-गोल छोटे-छोटे होल बन गए थे। अनिल और स्नेहा के बेडरूम की दीवार भी कुछ हिस्से टूट पड़े थे। होल हो गए थे। ऐसा होल जो कि अगर कोई भी उस होल से अंदर देखने की कोशिश करे तो उसे सब साफ दिखाई देता है। अनिल और स्नेहा की बेड एकदम साफ-साफ दिखाई देती है।

जिस दिन ये भूकंप हुआ था उस दिन घर के सारे नौकर इधर-उधर ढूँढने लगे कि ये होल दीवार और कौन-कौन सी जगहों पर हुआ। भूकंप बहुत जोरदार था। सब लोग उसी समय काँप उठे थे और गिर जाते थे। इसलिए दीवार में होल पड़ गए थे। सीमेंट बहुत पुराना हो चुका था। मजबूत काम नहीं थी।

शारदा देवी यानी अनिल की माँ ने कहा…

शारदा: चलो सब लोग देखो कहाँ-कहाँ पर हैं ये। रामू तुम इधर जाओ। साकी तुम वहाँ। रमा तुम जाओ इस कमरे पर और जग्गू तुम दरवाजा पर चले जाओ चौकीदारी करने। यहाँ तुम्हारा कोई काम नहीं।

जग्गू: ठीक है मेमसाहब।

जग्गू तब भी नहीं जानता था कि बहुरानी भी हैं इस हवेली में जो कि बेहद खूबसूरत सेक्सी हैं।

अब शारदा देवी ने गोपी लाल को कहा।

शारदा: गोपी तुम ऊपर जाओ। अब वही रह गया।

गोपी: ऊपर यानी छोटे साहब के कमरे में?

शारदा: हाँ। अब तो तुम्हीं बचे हो और दूसरा कोई कमरा भी नहीं सिवाय अनिल के। जाओ तुम देखकर आओ सब कुछ ठीक है कि नहीं।

गोपी (मन में): अरे वाह! एक बार फिर किस्मत चमक रही है। अब तो जाने का मौका हो गया उस अप्सरा के दर्शन करने का। ना जाने क्या कर रही होगी। जाकर देखता हूँ।

मन में बोलके गोपी ने शारदा देवी को बोला।

गोपी: ठीक है मालकिन। जाता हूँ।

सीढ़ियों से ऊपर जाते वक्त एक-एक कदम गोपी लाल को एक अलग सा आनंद दे रहा था। ऊपर जाके दो कमरे थे। ऊपर दो कमरे हैं ये गोपी लाल को पता था। लेकिन अनिल साहब के शादी होने के बाद सिर्फ ऊपर फीमेल सर्वेन्ट को ही इजाजत थी जाने की। लेकिन शारदा देवी ने सोचा था गोपी लाल बहुत दिनों से काम कर रहा है, वफादार है और बुजुर्ग भी है। बहू के कमरे में अगर ये एक बार जाएगा तो कोई बात नहीं होगी।

लेकिन कौन जानता था कि इस मौका पाने से गोपी लाल को एक बड़ा सा सरप्राइज देने वाला है जिसमें उसे और भी आनंद मिलेगा।

उस समय नहा रही थी स्नेहा और भूकंप हो गया था। वो बाथरूम में गिर पड़ी थी। उसने दरवाजा लॉक की हुई थी लेकिन उसे पता नहीं था कि दीवार में एक छेद हो गया है। जो कि एक कॉर्नर पर है और वो छेद ऐसी तरह था कि अगर कोई बाहर से खड़े होकर वहाँ से देखे तो सब कुछ दिखाई देता है।

गोपी लाल ने स्नेहा के कमरे के पास खड़े रहकर देखा कि अंदर कोई नहीं। उसने अंदर घुसा नहीं और बालकनी थी वहाँ चले गए और देखा कि एक गेट है जो खुलने से स्नेहा के कमरे की पीछे की दीवार तक ले जाती है। वहीं सीमेंट से बनी हुई दीवार में एक होल है जो कि काफी बड़ा है। उसमें आँखें डालकर गोपी लाल देखने लगे। देखा कि अंदर सब कुछ दिखाई देता है।

गोपी लाल ने सोचा कि कुछ देर यहाँ खड़ा होकर देखता हूँ स्नेहा बाथरूम से बाहर निकलकर क्या करती है। तभी अचानक स्नेहा बाथरूम से बाहर निकलकर होल के बराबर खड़ी हो जाती हैं। तभी गोपी लाल जो सीन देखा उसे देखकर गोपी लाल की आँखें बड़ी हो जाती हैं। उसने जो देखा वो बहुत ही सेक्सी नजारा था और वो अपने आपको खुशनसीब समझने लगा कि ऐसी रूप में स्नेहा को देख लेगा जो कि उसने सपनों में भी नहीं सोचा।

उस समय बाथरूम से गिर जाने से थोड़ा चोट पाई थी इसलिए कपड़े ना पहनके फौरन ब्रा और पैंटी में ही बाहर चली आती हैं और सेवलॉन देने लगती हैं ड्रेसिंग टेबल के सामने जो कि बिल्कुल उस छेद के बराबर था। स्नेहा सेवलॉन मालिश करके मिरर के सामने खड़ी होती हैं और कपड़े पहनना शुरू करती हैं। जो दृश्य देखकर गोपी लाल ने लंड सहलाना शुरू कर दिया।

गोपी: आआह्ह्ह हाय रे किस्मत तू तो बहुत बड़ा निकला रे मेरे लिए। ये मैं क्या देख रहा हूँ आआह्ह्ह स्नेहा ब्रा-पैंटी में आआह्ह्ह कितनी सेक्सी है रे.. आह्ह्ह क्या माल है… मुझे तो ऐसा सोचना ठीक नहीं है। वो मेरे बेटी जैसी लेकिन क्या करें इस लंड मुझे सुकून नहीं देता। ऐसा लगता है कि बुढ़ापे में आकर और भी ये तड़प रही है। जिंदगी में कितनों को चोदा हूँ लेकिन ऐसी रईस खानदान अमीर लड़की को ऐसी रूप में पहली बार देख रहा हूँ।

स्नेहा ने अब साड़ी पहन ली थी। रेड साड़ी।

गोपी काका: हाय्य मैं मर जाऊँ बहुरानी क्या चीज है.. आआह्ह्ह क्या कमर है क्या पेट और नाभि पाई है स्नेहा वाह्ह्ह कहकर लंड सहलाने लगते हैं धोती के अंदर हाथ ले जाके। गोपी लाल का लंड बहुत बड़ा हो चुका था। मानो एक मजबूत रॉड जैसा।

इस तरह कुछ दिन और बीत गए। स्नेहा के बेडरूम में दीवार पर जो छेद थी वो गोपी लाल ने देखा तो था लेकिन किसी को जानबूझकर बताया नहीं।

एक दिन अनिल जब घर लौटा तो नीचे अपनी माँ से पहली मुलाकात और बातचीत कर रहा था।

शारदा: अरे बेटे इतना काम करते हो। जरा कुछ दिन ठहर जा। बहू का भी ख्याल रखना। हो गया। इसी तरह शादी के बाद इतना बाहर रहना ठीक नहीं है। नई-नई शादी हुई है और फिर स्नेहा भी तो अकेली हो जाती है ना।

अनिल: अरे माँ तुम क्यों इतना टेंशन लेती हो। मैं हूँ ना। मैं स्नेहा से हर दिन रात फोन पे उसका खबर लेता हूँ ना बातें करता हूँ ना।

ये कहते ही स्नेहा ऊपर से नीचे आ जाती हैं।

स्नेहा: तुम आ गए?

अनिल: हाँ। मैं फ्रेश होकर आता हूँ।

स्नेहा: ठीक है। मैं खाना लाती हूँ।

कहके रसोई पे जाती हैं। जाकर देखती हैं वहाँ दो मेड सर्वेन्ट काम कर रही हैं और गोपी लाल इन दोनों के पीछे खड़ा है और उस समय गोपी लाल की नजर उन दो जवान लड़कियों की कमर की तरफ आती हुई है।

स्नेहा ने गौर से देखा था। ये नोटिस करती ही मन में कहती हैं।

स्नेहा: अरे ये गोपी काका रसोई में हैं। और उन्होंने ये क्या देख रही हैं। छी छी क्या देख रहे हैं और इनका हाथ नीचे लेकर छी छी छी… ये क्या कर रहे हैं इस उम्र में आकर ये सब। छी गोपी काका का सोच बहुत ही गंदी है।

स्नेहा अब बुलाती हैं।

स्नेहा: तुम लोग जल्दी से टेबल पर सारा खाना ले आओ।

ये सुनते ही गोपी लाल हड़बड़ा जाते हैं और घबराकर स्नेहा को देखते हैं और फिर कहते हैं।

गोपी: अरे बहुरानी आप। आप क्यों तकलीफ किया यहाँ आने में। किसी को भेज देते हम सब को खाना दिलाने।

स्नेहा ने उनकी तरफ कुछ गुस्से अंदाज लेकर नजरअंदाज की और फिर चले गए और कुछ नहीं कहा।

अनिल आने के बाद स्नेहा को बेडरूम में जाकर अपनी बाहों में ले लिया।

अनिल: अरे वाह आज तो मेरी रानी बहुत क्यूट लग रही है। कोई खास वजह?

स्नेहा: क्यों मैं पहले सुंदर नहीं थी क्या जो अब सुंदर लग रही हूँ?

अनिल: नहीं डार्लिंग मेरे कहने का वो नहीं था। तुम तो हमेशा सुंदर लगती हो लेकिन आज तुम्हें देखकर ना जाने क्यों दिल बहक गया है। तुम्हें बहुत ही सुंदर सेक्सी लग रही हो।

ये कहके अनिल उसे चूम लेता है।

स्नेहा: उफ्फ अब छोड़ो भी। अभी नहीं। जाओ फ्रेश होकर आओ।

कहके स्नेहा चले जाते हैं।

उस दिन भी गोपी लाल के लिए एक बढ़िया दिन था। दिन ढले शाम आई और जब रात सोने का वक्त आया तो शारदा देवी ने गोपी लाल को कहा।

शारदा: गोपी लाल सुनो। तुम आज यहीं सो जाना। रसोई के पास की कमरा खाली है जो सो लोग रहता था वो नौकरी छोड़के चले गए। अब अगर तुम्हें कोई प्रॉब्लम है तो तुम तुम्हारे कमरे में जा भी सकते हो।

गोपी सोचता है… अरे ये तो और भी अच्छा हुआ। अगर मैं रात को अंदर रह जाऊँ तो एक मौका है ऊपर जाने का। सब सारे लोग गहरी नींद में सोते रहेंगे तब मैं ऊपर जाकर उस छेद से देखने की कोशिश कर लूँगा कि बहुरानी अपनी बेडरूम में क्या कर रही हैं। क्यों ना आज ही एक कोशिश करके देख लेता हूँ।

ये सोचकर गोपी कहता है।

गोपी: ठीक है मालकिन। मुझे कोई समस्या नहीं होगा और ये तो मेरे लिए बहुत खुशी की बात है।

शारदा: कैसे?

गोपी: ओ यानी कि मैं अगर हर पल आपके आसपास रहूँ तो मैं आपकी सेवा कर सकता हूँ। इसलिए कहा है। ये तो आपका बड़प्पन है और मेरे लिए खुशी की बात।

शारदा: ठीक है तो फिर आज से रह लेना। सोने से पहले सब कुछ ठीक है कि नहीं वो देख लेना। मैं जाती हूँ अपनी कमरे में।

गोपी: ठीक है मालकिन।

कहकर एक लंबी साँस लेता है मानो कि वो अंदर ही अंदर खुश होता है।

आज रात उसने वही किया जो उसने सोचा था। जब रात को 1 बज गए तो गोपी लाल अपने कमरे से बाहर आकर देखा। बड़ा सा ड्रॉइंग रूम में अँधेरा छाया हुआ है। आसपास कोई आवाज नहीं। अँधेरा ही अँधेरा। उसने धीरे-धीरे सीढ़ियों से ऊपर को जाने लगा स्नेहा की बेडरूम में।

गोपी लाल: आह्ह आज एक मौका है। शायद आज कुछ देखने का मौका मिल जाए क्योंकि छोटे साहब आए हैं। शायद ये दो लोग अभी भी सोए नहीं हैं। आखिर इतने दिनों के बाद अनिल साहब घर आए हैं और स्नेहा भी इतनी खूबसूरत है तो ऐसी माल को चोदने के बजाय इतनी जल्दी कौन सो सकता है। देखता हूँ मेरी किस्मत में आज उस अप्सरा के भरे हुए जिस्म का कुछ दर्शन होता है या नहीं।

ये कहते हुए मन में और गोपी लाल के अंदर एक एक्साइटमेंट चढ़ जाती है। उसे भी कुछ अंदाजा था कि आज उस छेद से वो कुछ ऐसी चीज देखेगा कि उसे बहुत आनंद मिलेगा।

जब पीछे दीवार पर पहुँच जाते हैं तब गोपी लाल ने धीरे बाहर की पर्दे हटाकर उस छेद में आँखें डाल देता है और देखते हैं कि अनिल और स्नेहा खड़े हुए हैं बातचीत कर रहे हैं। उन दोनों की बातचीत भी थोड़ा सुनाई देता है बुड्ढे गोपी को।

अनिल: अरे मेरी जान अब और ना तड़पाओ। मेरे पास आओ।

स्नेहा: हम्म आज तो लगता है आपका तड़पना बहुत ज्यादा ही हो रहा है।

अनिल: हो क्यों नहीं मेरी जान। मेरी पत्नी जैसी खूबसूरत इस दुनिया में और कोई नहीं है। तुम्हें देखकर कोई भी पुरुष अपने आपको काबू में नहीं रख पाएगा। सिर्फ पुरुष ही नहीं। आई थिंक अगर कोई थरकी बुड्ढे भी तुम्हें देख ले तो वो भी तुम्हें हर हाल में पाने के लिए तड़प तो रहेंगे। तुम्हें साड़ी में बहुत ही सेक्सी लगती हो मेरी जान और आज तो कुछ ज्यादा ही लग रही हो।

स्नेहा: छी क्या कह रहे हो। यहाँ बुड्ढे क्यों बीच में ले आते हो।

अनिल: क्यों जानते नहीं हो आजकल तो न्यूजपेपर में देख रही हूँ कि पैसों के लिए जवान लड़कियाँ अपने आपको सौंप देती हैं। अपने जिस्म को। कुछ औरतें भी पैसों के लिए और कुछ ऐसा भी हो सकता है उन लड़कियाँ और औरतें सेक्स के लिए भूखी हों। शायद हो सकता है शादीशुदा जिंदगी में खुश नहीं हैं इसलिए बुड्ढे से करवा लेती हैं।

स्नेहा: छी अनिल ये सब बातें छोड़ो। अभी बुड्ढे-बुड्ढे लगा रखे हैं।

अनिल: मैं तो सही कह रहा हूँ। ये तो हो रही है। एक बात पूछूँ स्नेहा तुम मेरे साथ खुश तो हो ना? देख लेना अगर खुश नहीं हो तो किसी दिन कोई बुड्ढा या फिर और कोई जवान सही तुम्हें बहलाकर…

स्नेहा: अब रुको और कुछ भी नहीं कहो।

ये कहते ही साड़ी उतार देती हैं स्नेहा और धीरे-धीरे अपनी ब्लाउज भी उतार देती हैं। अब स्नेहा सिर्फ ब्रा और पैंटी में थीं। अनिल अपने आपको काबू नहीं रख पाता और सीधा देर ना करके स्नेहा के पास जाके उसे कसके पकड़ लेता है और बेड में धकेल देता है। वो भी अपने कपड़े उतार देता है और सिर्फ अंडरवियर में थे।

ठीक उसी समय गोपी लाल ने छेद पर अपनी आँखें घुसा दी हैं। और अंदर का नजारा उसे दिखाई देता है।

स्नेहा: उफ्फ छोड़िए ना। मुझे शर्म आ रही है।

अनिल: अब शरमाना क्यों मेरी जान। आज तो मैं आ गया हूँ तुम्हें आनंद देने। क्यों तुम नहीं चाहती हो क्या?

स्नेहा अपनी आँखें बंद कर लेती हैं और कुछ नहीं कहती हैं।

गोपी लाल (मन में): आआह्ह्ह क्या देख रहा हूँ वाह्ह्ह आआह्ह्ह क्या माल है यार वाह। आज तो पूरा का पूरा ही देखने का मौका मिल रहा है। आह्ह्ह।

गोपी लाल ये सोचता है और अपनी धोती के अंदर हाथ ले जाता है। उनका लंड थोड़ा सा खड़ा हुआ था लेकिन कुछ ही देर में हाथ से बहुत सहलाना शुरू कर देता है और गोपी लाल का लंड अपनी प्रचंड मजबूत आकार में आ जाती है। गोपी लाल की धोती अचानक फर्श पर गिर जाती है लेकिन फिर भी उसने अपना काम जारी रखा। गोपी लाल का लौंडा बहुत लंबा और चौड़ा भी था। सिर्फ यही नहीं लंड के नीचे दो अंडे जैसा अंडकोष भी बड़ा था और झूल रहा था। अब उनका लंड एक भयंकर रूप लिए हुए थे। अंदर का नजारा देखकर गोपी लाल पूरा का पूरा हॉट हो चुका था।

अनिल: आआह्ह्ह मेरी जान आ जाओ मेरे गोद में।

अनिल सोफे पर स्नेहा को ले आता है और अपनी गोद में बैठाकर चोदने लगता है।

बेडरूम का पूरा का पूरा सीन दिखाई दे रहा था बुड्ढे को। स्नेहा का पूरा भरा हुआ नंगा जिस्म दिखाई देता है। स्नेहा की गाँड पूरा का पूरा नंगा एकदम छेद के बराबर थी जो कि गोपी लाल की आँखों के बराबर।

गोपी: आआह्ह्ह आआह्ह्ह लंड को सहलाने लगा और कहा।

आआह्ह्ह क्या गाँड है। क्या चमड़ी है एकदम सफेद दूध जैसा आआह्ह्ह इतना नरम हिलता हुआ गाँड आज तक नहीं देखा मैंने आआह्ह्ह क्या माल है..

गोपी लाल ने अपना मास्टर्बेशन जारी रखा।

अनिल: आह जाओ मेरे गोद में मेरी जान आआह्ह्ह उम्म अह्ह उम्म अह्ह।

अनिल ने स्नेहा को गोद में ले लिया सोफे पर ले आए और पूरे नंगे जिस्म पर हमला किया। स्नेहा के नरम गोरे जिस्म के हर कोने पर चूमने और चाटने लगा और फिर एक बार गोद से उठाकर स्नेहा को सोफे पर बिठा दिया और उसकी चूत को चाटने लगा अनिल।

स्नेहा: उउफ्फ्फ आआह्ह्ह अनिल धीरे आआह्ह्ह उफ्फ्होओ उम्मम आआह्ह्ह आआह्ह्ह बस करो ना अनिल अब और नहीं हो रहा है। अब तो मुझे कर ही दो।

अनिल: क्या करूँ मेरी जान?

स्नेहा: नहीं पता। तुम्हारे जो मर्जी करो…

अनिल ये सुनके खुश हो जाते हैं और अपना अकड़ा हुआ लंड जो कि उतना बड़ा नहीं था गोपी लाल की तरह उस लंड को हाथ से सहलाकर कुछ और बड़ा करने की कोशिश करते हैं और स्नेहा को फिर से अपनी गोद में ले लेते हैं और एक-दो धक्का चूत में लंड से दे देते हैं और इसी तरह धीरे-धीरे और बाद में जोर-जोर से स्नेहा को गोद चुदाई करते हैं अनिल।

गोपी: हाय मेरी जान क्या माल है तू। अगर एक बार तुझ जैसा कोई मिल जाती तो जितनी भी लड़की और औरतों को चोदा है वो मिलकर जो सुख मुझे मिला था उससे भी ज्यादा सुख मुझे मिल जाता। आआह्ह्ह क्या माल है कैसे चुद रही है अनिल साहब। अनिल साहब की जगह अगर मैं होता तो काश ये हो पाता। आआह्ह्ह अपनी लंड सहलाते हुए बुड्ढे थरकी गोपी लाल।

गोपी लाल: आआह्ह्ह इस परी जैसा खूबसूरत बाला को चोदना पड़ेगा रे। जैसे भी हो मुझे चोदना है। यार क्या माल है क्या भरा हुआ नरम जिस्म उम्म आह्ह आआह्ह्ह।

स्नेहा: आआह्ह्ह अनिल धीरे आह्ह।

अनिल: उम्म अह्ह उम्म अह्ह आह्ह ये लो मेरी जान मेरे प्यार लो जी भरके लो।

स्नेहा: उम्मम उहू आआह्ह्ह उउह्ह्हू आह्ह दे दो जो देना है आह्ह और प्यार करो अनिल और भी ज्यादा करो।

स्नेहा: आआह्ह्ह

अनिल: आआह्ह्ह जानेमन क्या मस्त हो तुम।

गोपी: आआह्ह्ह आआह्ह्ह्ह

आगे क्या हुआ पढ़िए अगले पार्ट में।

Next Part ==> बूढ़े चौकीदार और जवान बहुरानी – 3

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