जीजा जी ने मेरी चूत और गांड की सर्विस कर दी
Jija sali ki new hindi sex story:- नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम प्रिया है। उम्र 22 साल। फिगर 34-28-36। गोरा रंग, लंबे बाल और आकर्षक शरीर। मेरी बड़ी दीदी रिया की शादी को 2 साल हो चुके हैं। उनके पति यानी मेरे जीजा जी का नाम राजेश है। उम्र 29 साल। जीजा जी बहुत हैंडसम, फिट बॉडी वाले और शांत स्वभाव के इंसान हैं।
तो हुआ यूं कि दीदी का ट्रांसफर दिल्ली हो गया था। वो वहां अच्छी जॉब करती हैं, इसलिए ज्यादातर समय दिल्ली में ही रहती हैं। जीजा जी का बिजनेस यहां हमारे शहर में ही है, इसलिए वो यहीं रहते हैं। दीदी की शादी के पहले तक मम्मी पापा और हम दोनों बहने उनके साथ ही रहते थे। फिर दीदी की शादी हुई और मेरा कॉलेज भी खत्म हो गया, तो मैंने भी आगे की पढ़ाई और जॉब के लिए तैयारियां शुरू कर दी। पापा मम्मी अब गाँव जाना चाहते थे तो वो दोनों चले गए और मैंने जीजा जी के यहां रहना शुरू कर दिया। दीदी ने खुद कहा था कि “प्रिया, तुम जीजा जी के साथ रहो, अकेले रहने से उन्हें भी अच्छा लगेगा और तुम्हारी भी देखभाल हो जाएगी।”
Jija sali ki new hindi sex story
शुरू के महीनों में सब कुछ बिल्कुल नॉर्मल था। जीजा जी मुझे “प्रिया” कहकर पुकारते और बहुत प्यार से बात करते। वो मुझे पढ़ाई के लिए मोटिवेट करते, कभी-कभी साथ में खाना बनाते, या शाम को छत पर बैठकर गप्पें मारते। लेकिन धीरे-धीरे मैं उनकी नजरों में एक अलग सी चमक महसूस करने लगी।
जब मैं सुबह चाय बनाकर उनके पास जाती और झुककर रखती, तो उनकी नजर मेरे ब्लाउज के गले में चली जाती। मैं जैसे ही मुड़ती, वो तुरंत नजर हटा लेते। जब मैं साड़ी पहनकर घर के काम करती तो उनकी नजर मेरी कमर और गांड पर अटक जाती। कभी-कभी वो मेरी पीठ को देखते हुए कुछ देर तक खड़े रह जाते। मैं शर्मा जाती लेकिन अंदर से एक अजीब सी गुदगुदी महसूस होने लगती थी।
एक शाम दीदी दिल्ली गई हुई थीं। मैं किचन में खाना बना रही थी। साड़ी का पल्लू थोड़ा सरक गया था और मेरी कमर का गोरा हिस्सा दिख रहा था। जीजा जी पानी पीने आए। उन्होंने कुछ देर तक चुपचाप खड़े होकर मुझे देखा। फिर धीरे से पीछे आए और बोले, “प्रिया, तुम आजकल बहुत अच्छी लग रही हो।” उनका हाथ हल्का-सा मेरी कमर को छू गया। बस एक पल के लिए। लेकिन वो स्पर्श मेरे शरीर में बिजली की तरह दौड़ गया। मैं कुछ नहीं बोली, बस “थैंक यू जीजा जी” कहकर काम में लग गई।
उस रात मैं बिस्तर पर लेटी हुई थी। जीजा जी का वो स्पर्श मुझे बार-बार याद आ रहा था। मैंने करवट बदली, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। मन में तरह-तरह के ख्याल आ रहे थे।
अगले दिन शाम को हम दोनों छत पर बैठे थे। हल्की ठंडी हवा चल रही थी।
जीजा जी ने कहा, “प्रिया, दीदी तो दिल्ली में व्यस्त रहती है, तुम्हें अकेलापन तो नहीं लगता?”
मैंने सर झुकाकर कहा, “थोड़ा बहुत लगता है जीजा जी, लेकिन आप हो ना।”
उन्होंने मुस्कुराते हुए मेरे कंधे पर हाथ रखा और बोले, “हां, मैं हूं ना। तुम्हें कभी भी कुछ जरूरत हो तो बताना।”
उनका हाथ मेरे कंधे पर कुछ ज्यादा देर तक रहा। मैंने महसूस किया कि उनकी उंगलियां हल्का-हल्का मेरे कंधे को सहला रही हैं। मैं कुछ नहीं बोली, लेकिन मेरा शरीर गर्म होने लगा था।
अब जीजा जी रोज छोटी-छोटी बातों के जरिए से मेरे करीब आने लगे थे। कभी वो मेरी पढ़ाई देखने आ जाते और मेरे बगल में बैठकर बात करते। कभी रसोई में मदद करने का बहाना करके मेरे पास खड़े हो जाते। उनकी नजरें अब खुलकर मेरे शरीर पर घूमती थीं। मैं भी अब जानबूझकर थोड़े हल्के ब्लाउज और साड़ी पहनने लगी थी। ये सब अब रोज का काम बन गया था।
एक दिन शाम को मैं बालकनी में कपड़े सुखा रही थी। साड़ी का पल्लू हवा में उड़ रहा था। जीजा जी वहां आए और बोले,
जीजा जी – “प्रिया, ये भारी गमले नीचे रख देते है”
उन्होंने गमले उठाने में मेरी मदद की। इस दौरान उनकी बॉडी मेरी बॉडी से हल्का-हल्का टच हो रही थी। उनकी सांस मेरी गर्दन पर पड़ रही थी। मैं शर्मा गई लेकिन हट भी नहीं पाई। उन्होंने गमला रखकर मेरी कमर पर हाथ रखा और बोले,
जीजा जी – “तुम्हें थकान तो नहीं लग रही ना?”
उनका हाथ कुछ देर तक मेरी कमर पर ही रहा।
मैंने बस “नहीं जीजा जी” कहा और अंदर चली गई।
लेकिन अंदर जाकर मेरे दिल की धड़कन बहुत तेज हो गई थी। उस रात मैं बिस्तर पर लेटकर काफी देर तक सो नहीं पाई। जीजा जी का वो स्पर्श, उनकी नजरें, उनकी मुस्कान — सब याद आ रहा था। मैंने करवट बदली, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। मन में तरह-तरह के ख्याल आ रहे थे। क्या जीजा जी मुझे पसंद करते हैं? या ये सिर्फ मेरी सोच है?
अगले दिन सुबह मैं चाय बना रही थी। जीजा जी किचन में आए और मेरे पीछे खड़े हो गए।
उन्होंने कहा, “प्रिया, आज दीदी का फोन आया था। वो अगले हफ्ते आएंगी।”
मैंने मुड़कर कहा, “अच्छा जीजा जी।”
इस दौरान मेरी साड़ी का पल्लू थोड़ा सरक गया था। जीजा जी की नजर मेरे ब्लाउज पर अटक गई। उन्होंने कुछ देर तक देखा और फिर नजर हटा ली।
उस दिन शाम को हम दोनों टीवी देख रहे थे। फिल्म में एक रोमांटिक सीन आया।
जीजा जी ने हल्के से कहा, “प्रिया, तुम्हें ऐसा प्यार वाला कोई लड़का पसंद है?”
मैं शर्मा गई और बोली, “अभी तो नहीं जीजा जी।”
उन्होंने मुस्कुराते हुए मेरे कंधे पर हाथ रखा और बोले, “कोई बात नहीं, समय आने पर सब हो जाएगा।”
उनका हाथ मेरे कंधे से नीचे सरक रहा था। मैंने महसूस किया कि उनकी उंगलियां मेरी बांह को हल्का-हल्का सहला रही हैं।
मैं कुछ नहीं बोली। बस टीवी देखती रही। लेकिन अंदर से मेरी सांसें तेज हो रही थीं। उस रात मैं बिस्तर पर लेटकर सोच रही थी कि जीजा जी जानबूझकर मेरे करीब आ रहे हैं। मैंने अपनी उंगलियों से अपने बूब्स को हल्का-हल्का दबाया। नीचे हाथ ले जाकर अपनी चूत को बाहर से सहलाया। जीजा जी का चेहरा याद करके मैं काफी देर तक खुद को छूती रही। लेकिन पूरी तृप्ति नहीं हुई।
अगले दिन जब जीजा जी ऑफिस से लौटे तो वो मेरे लिए आइसक्रीम लेकर आए थे। हम दोनों बैठकर आइसक्रीम खा रहे थे।
जीजा जी ने मेरा हाथ पकड़कर कहा, “प्रिया, तुम्हारे साथ समय बिताना मुझे बहुत अच्छा लगता है।”
उनकी उंगलियां मेरी हथेली में घूम रही थीं। मैंने शर्माते हुए कहा, “मुझे भी जीजा जी।”
उसके बाद से हम दोनों के बीच की बातें और नजदीकियां बढ़ने लगीं। लेकिन अभी तक कोई सीमा पार नहीं हुई थी। बस तड़प बढ़ती जा रही थी।
अब जीजा जी की हरकतें और नजदीकियां बढ़ती जा रही थीं। वो अब मेरे साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने के बहाने ढूंढ रहे थे। एक दिन शाम को मैं बालकनी में फूलों को पानी दे रही थी। जीजा जी वहां आए और मेरे पास खड़े हो गए।
उन्होंने कहा, “प्रिया, ये फूल देखकर मुझे तुम्हारी मुस्कान याद आती है, तुम्हारी मुस्कान भी इनकी तरह खूबसूरत है।” उनकी बात सुनकर मैं शर्मा गई।
उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रखा और धीरे से बोले, “तुम्हें देखकर मन शांत हो जाता है।”
उसके बाद वो अक्सर मुझे छोटी-छोटी चीजें गिफ्ट लाने लगे। कभी कोई सुंदर ईयररिंग, कभी चॉकलेट, कभी कोई अच्छी किताब। हर बार देते समय वो मेरे हाथ को थोड़ा ज्यादा देर तक पकड़े रहते। उनकी उंगलियां मेरी हथेली पर हल्का-हल्का घूमती रहतीं। मैं शर्माती लेकिन हाथ नहीं छुड़ाती थी।
एक शाम हम छत पर बैठे थे। सूरज डूब रहा था। हल्की ठंडी हवा चल रही थी। जीजा जी ने मेरे हाथ को अपनी हथेली में ले लिया और बोले, “प्रिया! कभी-कभी लगता है कि तुम्हारी दीदी के अलावा तुम भी मेरी जिंदगी का बहुत जरूरी हिस्सा हो गई हो।”
उनकी ये बात सुनकर मेरा दिल जोरों से धड़का। मैं कुछ नहीं बोली, बस उनकी उंगलियों को महसूस करती रही।
अगले दिन रात को बारिश और तूफान की वजह से बिजली चली गई (इन्वर्टर की बैटरी भी कुछ देर बाद डाउन हो गई)। अब पूरा घर अंधकार में था। जीजा जी फोन की टॉर्च लेकर मेरे कमरे में आए। उन्होंने कहा, “प्रिया, तुम्हें डर तो नहीं लग रहा? अगर लग रहा है तो डरो मत। मैं तुम्हारे पास हूं।” उन्होंने मेरे बगल में बैठकर बातें शुरू कर दीं। बातों-बातों में उन्होंने मेरे बालों को सहलाना शुरू कर दिया। उनकी उंगलियां मेरे बालों में फंस रही थीं।
मैं चुपचाप बैठी रही। उनकी सांस मेरे चेहरे के पास थी। उन्होंने धीरे से कहा, “तुम्हारी ये खामोशी भी मुझे बहुत पसंद है।” मैंने शर्माते हुए कहा, “जीजा जी, आप भी आजकल बहुत अच्छे लगते हैं।”
उन्होंने मुस्कुराते हुए मेरे कंधे पर हाथ रखा और बोले, “प्रिया, तुम्हारे पास बैठकर लगता है कि दुनिया की सारी परेशानियां जैसे भूल ही गया हूँ।” उनका हाथ मेरे कंधे से धीरे-धीरे नीचे सरक रहा था। मैंने महसूस किया कि उनकी उंगलियां मेरी बांह को हल्का-हल्का सहला रही हैं।
उस रात मैं बिस्तर पर लेटकर काफी देर तक सो नहीं पाई। जीजा जी की बातें, उनका स्पर्श, उनकी मुस्कान — सब याद आ रहा था। मैंने अपनी उंगलियों से अपने बूब्स को हल्का-हल्का दबाया। नीचे हाथ ले जाकर अपनी चूत को बाहर से सहलाया। जीजा जी का चेहरा याद करके मैं काफी देर तक खुद को छूती रही। लेकिन वो तृप्ति कहा मिलने वाली थी जो किसी मर्द से ही पूरी हो पाती। मन में बस एक ही सवाल घूम रहा था — क्या जीजा जी भी मेरी तरह तड़प रहे हैं?
अब जीजा जी की हरकतें और भी बढ़ती जा रही थीं। वो अब मेरे साथ समय बिताने के लिए कोई भी बहाना ढूंढ लेते थे। एक दिन शाम को मैं अपनी किताब पढ़ रही थी। जीजा जी मेरे कमरे में आए और बोले, “प्रिया, आजकल तुम्हारा पढ़ाई में कितना मन लगता है।” उन्होंने मेरे बगल में बैठकर किताब देखनी शुरू कर दी। बातों-बातों में उनका हाथ मेरी जांघ पर आ गया। उन्होंने हल्का-हल्का सहलाना शुरू कर दिया। मैं कुछ नहीं बोली, बस किताब पढ़ने का नाटक करती रही। लेकिन अंदर से मेरा पूरा शरीर गर्म हो रहा था।
उसके बाद से वो रोज शाम को मेरे कमरे में आकर बैठने लगे। कभी पढ़ाई देखने का बहाना, कभी मोबाइल पर कोई वीडियो दिखाने का, कभी बस बातें करने का। हर बार उनका हाथ मेरे कंधे, बांह या जांघ पर जरूर पड़ता। कभी-कभी वो मेरे बालों को सहलाते हुए कहते, “प्रिया, तुम्हारी खुशबू बहुत अच्छी है।” मैं शर्मा जाती लेकिन हटती नहीं थी।
अगले दिन जीजा जी ऑफिस से जल्दी आ गए। उन्होंने मेरे लिए फूल लाए थे। मुझे देते समय बोले, “प्रिया, ये फूल तुम्हारी मुस्कान जितने खूबसूरत हैं।” मैंने शर्माते हुए फूल ले लिए। उन्होंने मेरे बालों को पीछे किया और मेरे माथे पर हल्का किस कर दिया। मैं सिहर गई।
उसके बाद से हम दोनों के बीच की नजदीकियां और बढ़ती जा रही थीं। लेकिन अभी तक कोई सीमा पार नहीं हुई थी। बस तड़प बढ़ती जा रही थी। मैं हर रात बिस्तर पर लेटकर जीजा जी को याद करके बेचैन हो जाती। जीजा जी भी अब मुझे देखते समय अपनी नजरें छुपा नहीं पाते थे।
एक रात वो मेरे कमरे में आए और बोले, “प्रिया, आज नींद नहीं आ रही है। तुम्हारे पास बैठकर बातें करूं?” मैंने हां में सर हिला दिया। उन्होंने मेरे बगल में बैठकर बातें शुरू कर दीं।
बातों-बातों में उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रखा। फिर धीरे-धीरे उनका हाथ मेरी बांह पर सरक गया। उन्होंने मेरे बालों को सहलाते हुए कहा, “प्रिया, तुम्हारे पास बैठकर बहुत अच्छा लगता है।” मैं कुछ नहीं बोली, बस उनकी उंगलियों को महसूस करती रही।
धीरे-धीरे उनका हाथ मेरे ब्लाउज के ऊपर से मेरे बूब्स के पास आ गया। उन्होंने हल्का-हल्का दबाव डाला। मैं सिहर गई। “जीजा जी…” मैंने धीमी आवाज में कहा। लेकिन उन्होंने हाथ नहीं हटाया। उन्होंने मेरे ब्लाउज के ऊपर से ही मेरे बूब्स को सहलाना शुरू कर दिया। मैं आह भर रही थी।
“आह्ह्ह जीजा जी… ये क्या कर रहे हो…”
उन्होंने मेरे कान में फुसफुसाकर कहा, “प्रिया, तुम्हें भी तो अच्छा लग रहा है ना?” मैं शर्म से लाल हो गई लेकिन “हां” कहने की हिम्मत नहीं हुई। उन्होंने मेरे ब्लाउज के हुक खोलने शुरू कर दिए। एक-एक करके हुक खोलते हुए उन्होंने मेरे ब्लाउज को ऊपर किया। मेरे 34 साइज के बड़े बूब्स बाहर आ गए।
जीजा जी उन्हें देखकर बोले, “प्रिया… कितने सुंदर हैं तुम्हारे बूब्स…” उन्होंने एक बूब्स को हाथ में लिया और धीरे-धीरे दबाने लगे। फिर दूसरे बूब्स को भी। मैं “आह्ह्ह… जीजा जी…” कर रही थी।
उन्होंने एक बूब्स मुंह में ले लिया और धीरे-धीरे चूसने लगे। निप्पल को जीभ से घुमाते, हल्का-हल्का काटते। मैं उनकी पीठ को जकड़े हुए थी। वो दूसरा बूब्स हाथ से मसल रहे थे। काफी देर तक उन्होंने मेरे बूब्स का मजा लिया।
फिर उनका हाथ नीचे सरका। उन्होंने मेरी साड़ी ऊपर की और पैंटी के ऊपर से मेरी चूत को सहलाने लगे। मैं पूरी गीली हो चुकी थी। उन्होंने पैंटी के अंदर हाथ डालकर मेरी चूत को बाहर से सहलाया। फिर धीरे से एक उंगली अंदर डाल दी।
“आह्ह्ह जीजा जी… धीरे…” मैं कराह रही थी।
वे धीरे-धीरे उंगली अंदर-बाहर कर रहे थे। दूसरी उंगली भी डाल दी। मैं तड़प रही थी। उन्होंने काफी देर तक उंगलियों से मुझे मजा दिया। फिर उन्होंने अपना लंड निकाला। मुझे दिखाते हुए बोले, “प्रिया, देखो… ये तुम्हारे लिए कितना तड़प रहा है।”
मैंने शर्माते हुए उनका लंड हाथ में लिया और हल्का-हल्का हिलाने लगी। जीजा जी आह भर रहे थे।
जीजा जी का लंड मेरे हाथ में था। वो गर्म, मोटा और पूरी तरह खड़ा था। मैंने पहली बार किसी मर्द का लंड हाथ में पकड़ा था। मैं शर्माते हुए उसे हल्का-हल्का हिला रही थी। जीजा जी आंखें बंद करके “आह्ह्ह प्रिया…” कर रहे थे।
उन्होंने मुझे लिटा दिया। मेरी साड़ी पूरी तरह ऊपर कर दी। उन्होंने मेरी पैंटी उतार दी। अब मैं उनकी नजरों के सामने पूरी तरह नंगी थी। उन्होंने मेरी जांघों को चूमते हुए ऊपर आए। फिर अपनी जीभ मेरी चूत पर फेर दी। मैं झटके से काँप गई।
“आह्ह्ह जीजा जी… क्या कर रहे हो…”
वे मेरी चूत को चाटने लगे। पूरी जीभ से ऊपर से नीचे तक। क्लिटोरिस को चूसते हुए दो उंगलियां अंदर डाल दीं। मैं तड़प रही थी। “जीजा जी… आह्ह्ह… और करो… बहुत मजा आ रहा है…”
वे काफी देर तक मेरी चूत चाटते रहे। मैं दो बार झड़ गई। फिर उन्होंने मुझे अपनी गोद में बिठाया। उनका लंड मेरी चूत के बिल्कुल मुंह पर था। उन्होंने लंड की टिप मेरी चूत पर रगड़नी शुरू कर दी। काफी देर तक सिर्फ रगड़ते रहे। मैं बेचैन होकर कमर हिला रही थी।
“जीजा जी… अब डालिए ना… प्लीज…”
जीजा जी ने धीरे से सुपाड़ा अंदर डाला। “आह्ह्ह… जीजा जी… धीरे… दर्द हो रहा है…”
वे रुक गए। मेरे माथे को चूमते हुए बोले, “आराम से करूंगा प्रिया… धीरे-धीरे पूरा अंदर जाएगा।” फिर उन्होंने और धीरे से आधा लंड अंदर किया, मुझे बहुत दर्द हो रहा था। मैं दांत भींच रही थी। लेकिन उस दर्द मे भी अजीब स मज़ा था, दर्द के साथ मजा भी आ रहा था।
कुछ देर रुककर उन्होंने बाकी पूरा लंड भी धीरे-धीरे मेरी चूत में उतार दिया। अब जीजा जी का पूरा लंबा मोटा लंड मेरी चूत में समा चुका था।
“आह्ह्ह जीजा जी… पूरा अंदर चला गया… ऐसा लग रहा है की अंदर जगह ही ना बची हो…”
फिर जीजा जी ने बहुत धीमी गति से धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के के साथ मैं “आह्ह्ह… आह्ह्ह…” कर रही थी। वे मेरे बूब्स को चूसते हुए धीरे-धीरे चोद रहे थे। उन्होंने अपनी रफ्तार जानबूझकर slow रखी हुई थी।
करीब 10-12 मिनट बाद उन्होंने मेरी टांगें अपने कंधों पर रख लीं और थोड़े गहरे और तेज धक्के मारने लगे। वो पूरा लंड बाहर खींचते और फिर पूरी ताकत से जड़ तक अंदर डालते। अब उनकी टेस्टिस की थैलियाँ मेरी गांड से हल्का-हल्का टकरा रही थीं। “घप्प… घप्प…” की हल्की आवाज कमरे में गूंज रही थी।
मैं उनकी पीठ पर नाखून गड़ा रही थी। “जीजा जी… और अंदर… आह्ह्ह और तेज करो… मुझे बहुत अच्छा लग रहा है…”
जीजा जी ने मेरे कान में फुसफुसाकर कहा, “प्रिया… तेरी चूत बहुत टाइट है… मैं तुझे पूरी रात चोदना चाहता हूं…”
फिर जीजा जी ने मेरी टांगें अपने कंधों पर रख ली थीं। अब उनके धक्के थोड़े गहरे और तेज हो गए थे। हर धक्के पर उनका मोटा लंड मेरी चूत के गहराई तक अंदर तक जा रहा था। मैं तकिए में मुंह दबाकर कराह रही थी — “आह्ह्ह जीजा जी… बहुत मज़ा आ रहा है… आह्ह्ह… फाड़ दो मेरी चूत…”
जीजा जी पसीने से तर हो रहे थे। वे मेरे बूब्स को चूसते हुए जोर-जोर से धक्के मार रहे थे। उनकी थैलियाँ मेरी गांड से टकरा रही थीं। “घप्प… घप्प… घप्प…” की आवाज अब साफ सुनाई दे रही थी। मैं उनकी पीठ पर नाखून गड़ा रही थी। दर्द और मजा दोनों एक साथ फ़ील हो रहा था।
करीब 15-20 मिनट तक उन्होंने मुझे इसी पोजीशन में चोदा। फिर उन्होंने मुझे घुमाकर कुतिया बनाया। मेरी गांड ऊपर थी। जीजा जी ने पीछे से लंड रखा और एक जोरदार धक्का मारा। पूरा लंड मेरी चूत में घुस गया। मैं “आह्ह्ह्ह…” करके चीख पड़ी।
जीजा जी ने मेरी कमर पकड़कर तेजी से चोदना शुरू कर दिया। “ले साली… ले अपना जीजा का लंड… कितनी टाइट चूत है तेरी…” वे बोल रहे थे। मैं भी अपनी गांड पीछे करके उनका साथ दे रही थी।
“जीजा जी… और तेज… आह्ह्ह… मुझे और जोर से चोदो…”
वे मेरी कमर पकड़े हुए घपाघप चोद रहे थे। कभी-कभी मेरी गांड पर थप्पड़ मार देते। मेरे बूब्स लटककर हिल रहे थे। मैंने एक हाथ नीचे ले जाकर अपनी चूत को सहलाना शुरू कर दिया।
काफी देर तक कुतिया स्टाइल में चुदाई के बाद जीजा जी रुके। उन्होंने मुझे फिर से अपनी गोद में बिठा लिया। अब मैं उनके लंड पर ऊपर-नीचे हो रही थी। वे नीचे से मेरे बूब्स दबा रहे थे और कभी-कभी जोर से ऊपर धक्का लगा देते थे। मैं तेजी से उछल-उछलकर चुदवा रही थी। “आह्ह्ह जीजा जी… बहुत मजा आ रहा है… मैं फिर झड़ने वाली हूं…”
मैं दो बार और झड़ गई। जीजा जी अभी तक नहीं झड़े थे। उन्होंने मुझे नीचे लिटाया और मेरी टांगें चौड़ी करके फिर से चोदने लगे। अब उनकी रफ्तार काफी तेज हो गई थी।
“प्रिया… मैं झड़ने वाला हूं… कहाँ डालूं?”
“अंदर ही डाल दो जीजा जी… अपनी साली की चूत में भर दो…”
जीजा जी ने आखिरी कुछ तेज धक्के मारे और मेरी चूत के अंदर गर्म-गर्म माल भर दिया। वे मेरे ऊपर ही ढेर हो गए। हम दोनों पसीने से तर थे और हांफ रहे थे।
कुछ देर आराम करने के बाद जीजा जी ने मेरे कान में कहा, “प्रिया… अब तेरी गांड भी लेनी है…”
उन्होंने मुझे पेट के बल लिटाया। मेरी गांड ऊपर थी। उन्होंने पहले मेरी गांड के दोनों गोलों को चूमा, फिर जीभ से चाटा। “तेरी गांड कितनी सुंदर है प्रिया…” कहते हुए उन्होंने अपनी उंगली मेरी गांड के छेद पर रखी और हल्का-हल्का घुमाने लगे।
मैं सिहर गई। “आह्ह्ह जीजा जी… धीरे…”
उन्होंने लंड पर थूक लगाया और मेरी गांड के छेद पर रगड़ने लगे। फिर बहुत धीरे से सुपाड़ा अंदर डाला। “आह्ह्ह्ह… जीजा जी… दर्द हो रहा है… धीरे…”
जीजा जी रुक गए। उन्होंने मेरी कमर सहलाई और बोले, “आराम से ही डालूँगा से प्रिया… देखना आसानी से पूरा अंदर चला जाएगा।” फिर उन्होंने और धीरे से आधा लंड अंदर किया। मैं दांत भींच रही थी।
“आह्ह्ह्ह… जीजा जी… दर्द हो रहा है… धीरे…” मैंने तकिए में मुंह दबाकर कहा।
दर्द बहुत था लेकिन एक अजीब सा मजा भी आ रहा था।
कुछ देर बाद पूरा लंड मेरी गांड में समा गया। जीजा जी ने मुझे कुछ देर ऐसे ही रहने दिया ताकि उनका लंड अंदर जगह बना ले। फिर बहुत धीमी गति से धक्के मारने शुरू कर दिए।
“आह्ह्ह जीजा जी… आह्ह्ह… धीरे… लेकिन अच्छा लग रहा है…”
जीजा जी की रफ्तार धीरे-धीरे बढ़ने लगी। अब वे मेरी कमर पकड़कर ठीक से चोद रहे थे। उनकी थैलियाँ मेरी चूत से टकरा रही थीं। “घप्प… घप्प… घप्प…” की आवाज कमरे में भर गई थी।
मैंने एक हाथ नीचे ले जाकर अपनी चूत को सहलाना शुरू कर दिया। जीजा जी मेरी पीठ और गर्दन को चूम रहे थे। “प्रिया… तेरी गांड बहुत टाइट है… आह्ह्ह… बहुत मजा आ रहा है…”
वे काफी देर तक मेरी गांड चोदते रहे। फिर उन्होंने मुझे फिर से कुतिया बनाकर चूत में लंड डाल दिया। कुछ देर चूत चोदने के बाद फिर गांड में डाल दिया। इस तरह वे दोनों जगह चोद रहे थे।
आखिरकार वे झड़ने वाले थे। उन्होंने मेरी गांड में ही गर्म माल भर दिया। “आह्ह्ह प्रिया… ले साली… अपने जीजा का माल…”
हम दोनों थककर बेड पर गिर पड़े। जीजा जी ने मुझे गले लगा लिया और बोले, “प्रिया… तू अब पूरी तरह मेरी है।”
उस रात के बाद हम दोनों की तड़प थोड़ी शांत हुई, लेकिन भूख और बढ़ गई थी। अगली कई रातें हम पूरी पूरी रात सेक्स करते रहे। हर रात नई पोजीशन ट्राई करते। कभी मैं ऊपर होती, कभी जीजा जी मुझे दीवार से सटाकर खड़े-खड़े चोदते, कभी शावर के नीचे।
एक रात जीजा जी ने मुझे बाथरूम में ले जाकर शावर के नीचे चोदा। गर्म पानी हमारे शरीर पर गिर रहा था। जीजा जी ने मुझे दीवार से सटाया और पीछे से मेरी चूत में लंड डाल दिया। पानी की आवाज के साथ “घप्प घप्प” की आवाज बाथरूम मे घूम रही थी। मैं मुंह में तौलिया दबाकर चीख रही थी।
“जीजा जी… आह्ह्ह… और तेज… फाड़ दो मेरी चुत को…”
उन्होंने मेरी गांड पर थप्पड़ मारते हुए कहा, “ले साली… तेरी चूत और गांड दोनों मेरी हैं।”
धीरे-धीरे हम और बोल्ड होते गए। कभी-कभी दिन में भी जब दीदी दिल्ली होती, हम जल्दी-जल्दी सेक्स करते। एक दिन जीजा जी मुझे किचन में झुकाकर चोद रहे थे। मैं बर्तन पकड़े हुए थी और जीजा जी पीछे से घपाघप कर रहे थे। और दीदी अचानक दिल्ली से आ गईं और हमें देख लिया। लेकिन हमने किसी तरह उन्हें मना लिया। उसके बाद हम और सावधानी से चुदाई करने लगे।
हम अब एक दूसरे के बिना नहीं रह पाते थे। रात को सोने से पहले जीजा जी जरूर आते। कभी-कभी पूरे दिन की तड़प के बाद रात भर चुदाई चलती। मैं अब उनकी गांड भी चूसने लगी थी। जीजा जी को ये बहुत पसंद था।
अब हम दोनों पूरी तरह आदी हो चुके थे। जीजा जी जब भी मौका मिलता मुझे चोदते। कभी कार में, कभी छत पर, कभी होटल में। हम दोनों को पता था कि ये गलत है, लेकिन ना हम रुक सकते थे, ना हम रुकना चाहते थे।
मैं अब जीजा जी की पूरी रंडी बन चुकी थी। वो चाहे चूत हो, गांड हो या मुंह — हर जगह अपना माल भर देते थे। और मैं भी उन्हें पूरा मजा देती।
कहानी यहीं खत्म होती है। लेकिन हमारी चुदाई वाली कहानी अभी भी जारी है…
कहानी कैसी लगी कमेन्ट करके जरूर बताएं।
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