माँ बनी क्लाससमेट 9

Maa beta hindi chudai kahani:- राहुल ने त्रुप्ति की नंगी गर्दन पर अपना मुँह रखा और वहाँ लव बाइट देने लगा। त्रुप्ति ने मस्ती में अपना सर पीछे दीवार पर टिका दिया। उसकी आँखें बंद थीं और मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थीं।

त्रुप्ति: “स्स… राहुल… काटो मत… आह्ह्ह… वहाँ… हाँ वहाँ… म्मम…”

डिस्को लाइट्स की फ्लैशिंग में किसी को दिख नहीं रहा था कि राहुल का एक हाथ त्रुप्ति की गाँड को मसल रहा है और दूसरा हाथ उसके नंगे कंधों को सहला रहा है। त्रुप्ति पूरी तरह डिज़ी और हॉर्नी हो चुकी थी।

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Maa beta hindi chudai kahani sex story

राहुल त्रुप्ति की गर्दन चूसते हुए मदहोश हो रहा था, तभी उसकी नज़र सामने वाले कोने पर पड़ी। वहाँ विक्की खड़ा था।

विक्की ने राहुल की आँखों में देखा और अपनी गर्दन घुमाकर इशारा किया— “ले आ इसे, अब वक्त हो गया है।”

राहुल का दिल एक पल के लिए बैठ गया। वो नहीं चाहता था कि जिस त्रुप्ति को वो अभी इतने पैशन से किस कर रहा है, उसे वो विक्की के हवाले करे। पर फिर उसके दिमाग में विक्की की धमकी और अभय से हारने का डर आ गया। और सबसे बड़ी बात, उसका खुद का थरकीपन जाग उठा।

राहुल ने सोचा: ‘कोई बात नहीं… आज रात विक्की के साथ एंजॉय कर लेने देता हूँ। वैसे भी ये विक्की की गर्लफ्रेंड बनेगी तो सिर्फ़ कॉलेज तक ही ना? कुछ सालों की बात है। कॉलेज खत्म होने के बाद तो त्रुप्ति हमेशा के लिए मेरी होगी। मैं इसे फुल-टाइम रखूँगा। आज रात शेयरिंग में ही मज़ा लेते हैं।’

राहुल ने अपने मन को मना लिया। उसने त्रुप्ति को किस करना बंद किया और उसके कान में बोला।

राहुल: “बेबी… यहाँ बहुत शोर है। चलो कहीं शांत जगह चलते हैं… लॉन्ग ड्राइव पर।”

त्रुप्ति: (नशे में, आँखें खोलने की कोशिश करते हुए) “हाँ… ले चलो राहुल… जहाँ तुम बोलो… बस ये गर्मी मिटा दो…”

राहुल ने त्रुप्ति को सहारा दिया और उसे लेकर पब के बाहर निकल गया, जहाँ विक्की की ब्लैक एसयूवी और उसके फार्महाउस का ‘डार्क रूम’ उनका इंतज़ार कर रहा था।

राहुल ने लड़खड़ाती हुई त्रुप्ति को सहारा देकर विक्की की ब्लैक एसयूवी तक पहुँचाया। त्रुप्ति की हालत अब बहुत खराब थी। ब्लू पिल का नशा और अल्कोहल का मिक्सचर उसके दिमाग को सुन्न कर चुका था। उसकी आँखों के सामने सब कुछ धुँधला (ब्लरी) था, बस जिस्म में एक ऐसी आग लगी थी जो उसे किसी मर्द के टच के लिए तड़पा रही थी।

राहुल ने पीछे का दरवाज़ा खोला और त्रुप्ति को बैक सीट पर धकेल दिया। वो खुद भी उसके बगल में बैठ गया। आगे ड्राइवर ने गाड़ी स्टार्ट की और एसयूवी तेज़ी से शहर के बाहर फार्महाउस वाले सुनसान रास्ते पर दौड़ने लगी।

अँधेरे और एसी की ठंडक में त्रुप्ति ने राहुल को टटोला। राहुल ने मौका पाते ही त्रुप्ति के होंठों को चूसना शुरू कर दिया। त्रुप्ति पूरे पैशन से रिस्पॉन्ड कर रही थी, उसकी ज़बान राहुल के मुँह में घूम रही थी।

गाड़ी अभी फुल स्पीड में चल ही रही थी कि आगे वाली पैसेंजर सीट से विक्की ने अपनी सीट रिक्लाइनिंग की और पीछे की तरफ कूद कर आ गया। एसयूवी के पीछे अब तीन लोग थे—बीच में त्रुप्ति, एक तरफ राहुल और दूसरी तरफ विक्की।

त्रुप्ति को जब एहसास हुआ कि कोई और भी उनके साथ आ गया है, तो उसने अपनी धुँधली आँखों से विक्की को देखा। नशे में उसका दिमाग काम नहीं कर रहा था, और ज़बान फिसल गई।

त्रुप्ति: (भारी हुई आवाज़ में) “राहुल… बेटा… ये… ये कौन है?”

‘बेटा’ शब्द सुनते ही राहुल का कलेजा मुँह को आ गया। वो डर गया कि कहीं त्रुप्ति का राज़ खुल न जाए। लेकिन विक्की, जो खुद हवस और शराब के नशे में था, उसने इस बात को पकड़ लिया और ज़ोर से हँसा।

विक्की: (राहुल को आँख मारते हुए) “सुन रहा है राहुल? नशे में तुझे ‘बेटा’ बुला रही है तेरी बंदी। लगता है रोलप्ले का मूड है।”

फिर विक्की त्रुप्ति के कान के पास झुका और एक गंदी, शैतानी आवाज़ में बोला:

विक्की: “कोई बात नहीं डार्लिंग… अगर तू इसे बेटा बुला रही है, तो आज हम तुझे माँ समझ के ही चोद देंगे।”

राहुल ये सुनकर नर्वस हुआ कि कहीं विक्की को सच न पता चल जाए, लेकिन विक्की की बात सुनकर उसके अंदर का थरकीपन भी जाग उठा। अपनी माँ को ‘माँ’ समझकर चुदते हुए देखने का ख्याल उसे गरम कर गया।

विक्की ने बिना वक्त गँवाए त्रुप्ति को अपनी तरफ खींचा। त्रुप्ति ने पहले थोड़ा विरोध किया।

त्रुप्ति: (कमज़ोर आवाज़ में) “राहुल… ये क्या… हटो…”

लेकिन विक्की ने त्रुप्ति की गर्दन पकड़ी और अपना मुँह सीधा त्रुप्ति के मुँह पर दे मारा। त्रुप्ति नशे में इतनी चूर थी कि जैसे ही विक्की के होंठ उससे लगे, उसका जिस्म पिघल गया।

विक्की ने ज़बरदस्ती अपनी ज़बान (टंग) त्रुप्ति के मुँह में ठूँस दी। त्रुप्ति, जो गर्मी से पागल हो रही थी, उसने विरोध करने की बजाय विक्की की ज़बान को चूसना शुरू कर दिया। वो विक्की की ज़बान को वैसे ही सक कर रही थी जैसे कुछ देर पहले राहुल की कर रही थी।

राहुल बगल में बैठा ये नज़ारा देख रहा था। उसकी माँ, जो उसकी जीएफ बनी हुई थी, अब उसके दोस्त के साथ फ्रेंच किस कर रही थी। विक्की का थूक त्रुप्ति के मुँह में जा रहा था और त्रुप्ति बड़े मज़े से उसे पी रही थी। ये देखकर राहुल का लंड पैंट में ब्लास्ट होने को तैयार हो गया।

राहुल से अब रहा नहीं गया। उसने त्रुप्ति को दूसरी तरफ से पकड़ा। त्रुप्ति का चेहरा विक्की की तरफ था, तो राहुल ने त्रुप्ति के ब्लैक गाउन को कंधे से थोड़ा नीचे खींच दिया और उसकी नंगी गर्दन (नेक) पर टूट पड़ा।

त्रुप्ति: (विक्की के मुँह में घुटी हुई आवाज़ में) “म्मम… ह्मम… स्स…”

एक तरफ विक्की त्रुप्ति के होंठ और ज़बान चबा रहा था, और दूसरी तरफ राहुल अपनी माँ की गर्दन और कान के नीचे वाले हिस्से को चाट और काट रहा था। त्रुप्ति दोनों मर्दों के बीच सैंडविच बन गई थी। उसकी सिसकारियाँ विक्की के मुँह में दब रही थीं, पर उसका जिस्म बता रहा था कि वो इस डबल अटैक से कितनी गरम हो रही है।

एसयूवी की स्पीड बढ़ती जा रही थी, और उसके अंदर त्रुप्ति की इज़्ज़त की धज्जियाँ उड़ने की शुरुआत हो चुकी थी। फार्महाउस आने में अब बस कुछ ही देर बाकी थी।

एसयूवी तेज़ रफ़्तार से फार्महाउस की तरफ भाग रही थी, लेकिन गाड़ी के अंदर जो रफ़्तार थी, वो हवस की थी। त्रुप्ति पूरी तरह नशे और वियाग्रा की गर्मी में डूबी हुई थी। उसे बस एहसास हो रहा था कि दो मर्द उसे दोनों तरफ से निचोड़ रहे हैं।

विक्की ने त्रुप्ति के चेहरे से अपना मुँह हटाया और अपनी नज़रें त्रुप्ति के क्लीवेज पर गड़ाईं। उसने धीरे से त्रुप्ति के शोल्डर-लेस ब्लैक गाउन को पकड़ा और उसे नीचे की तरफ खींच दिया। गाउन सरक कर त्रुप्ति के पेट तक आ गया, और उसकी ब्लैक लेस ब्रा में क़ैद भरे-भरे गोरे बूब्स विक्की की आँखों के सामने आ गए। ब्रा इतनी टाइट थी कि त्रुप्ति का आधा सीना बाहर उभड़कर ‘हेलो’ बोल रहा था।

विक्की ने मस्ती भरी नज़रों से उन्हें देखा और बिना देर किए अपना सर त्रुप्ति के दोनों बूब्स के बीच में घुसा दिया। उसने “हुबा-हुबा” करते हुए अपना चेहरा त्रुप्ति के नरम स्तनों (बूब्स) के बीच ज़ोर-ज़ोर से रगड़ना शुरू कर दिया। वो अपने मुँह से ‘ब्र्र्र्र’ की आवाज़ निकालकर त्रुप्ति के बूब्स को हिला रहा था।

त्रुप्ति: (सर पीछे फेंककर) “आआह्ह्ह… स्स… क्या कर रहे हो… म्मम…”

विक्की मस्ती में बूब्स दबा रहा था और त्रुप्ति लगातार मोन कर रही थी। दूसरी तरफ, राहुल भी शांत नहीं था। उसने त्रुप्ति के दोनों हाथ पकड़कर ज़बरदस्ती पीछे की तरफ मोड़ दिए। इस वजह से त्रुप्ति का सीना और बाहर आ गया और उसकी बग़लें (आर्मपिट्स) पूरी तरह खुल गईं।

राहुल की नज़र त्रुप्ति की क्लीन-शेव्ड, गोरी और पसीने से चमकती हुई आर्मपिट्स पर पड़ी। उस नशीली ख़ुशबू ने राहुल को पागल बना दिया। उसने सोचा: ‘यार, माँ आज भी क्या हॉट लगती है! कितनी सेक्सी आर्मपिट्स हैं साली की… मन कर रहा है आज यहीं चाट कर प्यास बुझा लूँ।’

राहुल ने बिना शर्म के अपना मुँह त्रुप्ति की बग़ल (आर्मपिट) में घुसा दिया और वहाँ जमा नमकीन और गरम पसीने को चाटना शुरू कर दिया। वो अपनी ज़बान से त्रुप्ति की बग़ल को किसी आइस-क्रीम की तरह चाट रहा था।

विक्की ने जब राहुल को ऐसे करते देखा तो वो ज़ोर से हँसा।

विक्की: “साले! बंदी को कुत्ते जैसा चाट रहा है बे तू? बड़ा प्यासा लग रहा है!”

लेकिन राहुल रुका नहीं, वो बस अपनी माँ की महक में खोया हुआ था। विक्की ने भी अपना खेल आगे बढ़ाया। उसने अपना एक हाथ त्रुप्ति की टाइट ब्रा के कप के अंदर डाल दिया। उसकी उँगलियाँ त्रुप्ति के नरम मांस को टटोलते हुए सीधा निप्पल तक पहुँचीं।

विक्की ने त्रुप्ति के खड़े हुए निप्पल को अपनी उँगलियों में पकड़ा और ज़ोर से दबा (पिंच) दिया। दर्द और मज़े की एक लहर त्रुप्ति के जिस्म में दौड़ गई।

त्रुप्ति: (सिसकते हुए) “इस… आह्ह्ह… दुख रहा है… पर… मत रुको… म्मम…”

त्रुप्ति के बड़े सॉफ्ट बूब्स विक्की के हाथ में थे और वो निप्पल से खेल रहा था। त्रुप्ति अपनी ही धुन में मज़े ले रही थी। तभी विक्की ने त्रुप्ति का एक हाथ (जो अभी तक राहुल ने पकड़ रखा था) वहाँ से खींच लिया और उसे अपने पैंट के उभार (क्रॉच) पर रख दिया।

त्रुप्ति ने नशे में महसूस किया कि उसके हाथ के नीचे कुछ सख्त और गरम है। उसने अनजाने में ही सही, विक्की के लंड को पैंट के ऊपर से ही मुट्ठी में पकड़ लिया और ज़ोर से दबा दिया।

विक्की: (आँखें बंद करके) “ओह्ह्ह फक… हाँ बेबी… दबा इसे… तेरा नया खिलौना यही है!”

राहुल बग़ल चाट रहा था, विक्की निप्पल मसल रहा था, और त्रुप्ति विक्की का लंड दबा रही थी। फार्महाउस आने से पहले ही गाड़ी के अंदर पाप का घड़ा भर चुका था।

एसयूवी की रफ़्तार तेज़ थी, पर उसके अंदर वक्त जैसे थम गया था। अँधेरे में सिर्फ़ डैशबोर्ड की लाइट और विक्की के मोबाइल की स्क्रीन चमक रही थी। त्रुप्ति पूरी तरह विक्की और राहुल के बीच फँस चुकी थी। उसका दिमाग सुन्न था, पर उसका जिस्म किसी ज्वालामुखी की तरह धधक रहा था।

विक्की ने त्रुप्ति के चेहरे से अपना मुँह हटाया और एक शैतानी मुस्कान के साथ अपने पैंट की ज़िप पर हाथ रखा। ‘ज़्ज़्ज़िप…’ की एक हल्की आवाज़ आई और विक्की ने अपना पैंट खोल दिया। अंदर से उसका सख्त लंड फन उठाए बाहर आने को बेताब था।

विक्की ने ज़बरदस्ती त्रुप्ति का नरम हाथ पकड़ा और उसे सीधा अपने नंगे लंड पर रख दिया। त्रुप्ति ने जैसे ही उस गरम और सख्त मांस को छुआ, उसकी उँगलियाँ अपने आप उस पर कस गईं।

विक्की: (कान में फुसफुसाते हुए) “मेरी रंडी… चल शुरू हो जा। इसे मसल… इसे प्यार कर। आज ये तेरा नया खिलौना है।”

त्रुप्ति नशे में थी, उसे समझ नहीं आ रहा था कि ये किसका लंड है, बस उसे वो गर्मी अच्छी लग रही थी। वो विक्की के लंड को धीरे-धीरे अपनी मुट्ठी में लेकर ऊपर-नीचे मसलने (स्ट्रोक) लगी। विक्की ने गर्दन पीछे फेंक दी और मज़े से आँखें बंद कर लीं।

विक्की ने एक हाथ से त्रुप्ति को सँभाला और दूसरे हाथ से अपना मोबाइल निकालकर वीडियो रिकॉर्डिंग ऑन कर दी। फ्लैश लाइट की जगह उसने ‘नाइट मोड’ ऑन किया ताकि सब साफ़ दिखे पर ज़्यादा चमक न हो।

मोबाइल की स्क्रीन पर वो नज़ारा रिकॉर्ड हो रहा था जो त्रुप्ति की ज़िंदगी बर्बाद करने के लिए काफ़ी था— एक माँ अपने बेटे के दोस्त का लंड मसल रही थी, और उसका अपना बेटा (राहुल) उसकी गर्दन और गालों को चूम रहा था। विक्की ने कैमरा को एडजस्ट किया ताकि त्रुप्ति का चेहरा और उसका लंड एक फ्रेम में आ सके।

विक्की: (वीडियो बनाते हुए, राहुल को ऑर्डर देते हुए) “ओये राहुल… बहुत चाट लिया तूने। अब माल को खोलने का वक्त आ गया है। इसका ब्रा और ब्लाउज़ खोल। मुझे इसके खज़ाने देखने हैं।”

राहुल एक पल के लिए ठिठका। उसने सोचा, ‘यार, ये तो मेरी माँ है… विक्की के सामने इसे नंगा करना…’ पर विक्की की आँखों में धमकी और कैमरा की रिकॉर्डिंग देखकर वो मजबूर हो गया। और सच कहूँ तो, राहुल खुद भी उन छुपे हुए पहाड़ों को देखने के लिए तड़प रहा था।

राहुल ने काँपते हाथों से त्रुप्ति के ब्लैक गाउन की ज़िप पीछे से नीचे की और अंदर पहनी हुई ब्लैक ब्रा के हुक पर उँगलियाँ रखीं। त्रुप्ति नशे में झूल रही थी।

‘खट्ट…’ की एक आवाज़ आई और ब्रा का हुक खुल गया।

राहुल ने धीरे से त्रुप्ति के गाउन और ब्रा को सामने से नीचे खिसका दिया। जैसे ही कपड़ा हटा, त्रुप्ति के दूधिया सफ़ेद (मिल्की व्हाइट) बूब्स आज़ाद हो गए। वो रबर की बॉल की तरह उछलकर बाहर आ गए।

नज़ारा देखकर राहुल और विक्की, दोनों की साँसें अटक गईं। त्रुप्ति के बूब्स किसी भी एंगल से 45 साल की औरत के नहीं लग रहे थे। वो एकदम टाइट, गोल और भरे हुए थे। उनमें बुढ़ापे का कोई निशान नहीं था, वो गुरुत्वाकर्षण (ग्रेविटी) को मात दे रहे थे।

उनके ऊपर लगे पिंक निप्पल्स ठंड और एक्साइटमेंट की वजह से अकड़कर खड़े हो गए थे। ऐसा लग रहा था जैसे दो रसीले अनार (पोमेग्रेनेट्स) खाने के लिए तैयार हों।

राहुल के लंड ने तो ये नज़ारा देखकर पैंट में ही पानी छोड़ दिया (प्री-कम)। वो बस घूरता रह गया।

विक्की: (लालार टपकाते हुए) “साले कमीने राहुल! इसीलिए तू इसे मेरे साथ शेयर नहीं करना चाहता था? क्या कड़क माल है यार ये! इसके बूब्स तो किसी 20 साल की वर्जिन लड़की से भी ज़्यादा टाइट हैं।”

विक्की ने मोबाइल साइड में रखा और अपना मुँह सीधा त्रुप्ति के राइट बूब पर दे मारा। उसने त्रुप्ति का पिंक निप्पल अपने मुँह में भरा और उसे ज़ोर से चूसना शुरू कर दिया।

त्रुप्ति: (ज़ोर से) “आआह्ह्हह… स्स… हाँ… और ज़ोर से… म्मम…”

विक्की किसी भूखे जानवर की तरह निप्पल को चबा रहा था। त्रुप्ति को इतना मज़ा आ रहा था कि उसने अपने दोनों हाथ विक्की के सिर पर रख दिए और उसे अपने बूब पर दबा दिया, जैसे वो चाहती हो कि विक्की उसके अंदर घुस जाए।

नशे और मज़े के बीच त्रुप्ति की ज़बान फिसल गई। उसने अपने पति का नाम पुकारा:

त्रुप्ति: “आह्ह्ह… संजीव… स्स… संजीव… चूसोоо… आह्ह्ह…!”

विक्की निप्पल छोड़कर ज़ोर से हँसा।

विक्की: (हँसते हुए) “सुन रहा है राहुल? लगता है तेरे से पहले भी इसका कोई ‘संजीव’ बना हुआ है जिसका नाम ये ले रही है। तेरा बाप याद आ गया इसे!”

राहुल को ये सुनकर अपने बाप (संजीव) पर गुस्सा आया और जलन भी हुई। पर उस जलन ने उसकी हवस को और भड़का दिया। उसने सोचा, ‘आज मैं दिखाता हूँ कि संजीव से बेहतर मैं चूस सकता हूँ।’

राहुल ने आगे बढ़कर त्रुप्ति के लेफ्ट बूब पर हमला बोल दिया। उसने पूरा बूब अपने हाथ में भरा और निप्पल को ज़बान से चाटना और चूसना लगा।

अब गाड़ी की पिछली सीट पर एक अजीब सा नज़ारा था। त्रुप्ति बीच में थी, उसका सर पीछे सीट पर टिका हुआ था, आँखें बंद थीं और मुँह खुला हुआ था जिससे लगातार “आह्ह्ह… ओह्ह्ह… उम्म…” की आवाज़ें आ रही थीं।

उसके राइट बूब को विक्की चूस रहा था और लेफ्ट बूब को उसका अपना बेटा राहुल। दोनों किसी दूध-पीते बच्चे की तरह, पर हवस के साथ, उसकी छाती को निचोड़ रहे थे। त्रुप्ति का दायाँ हाथ (राइट हैंड) अभी भी विक्की के पैंट में था और वो उसके खड़े लंड को ज़ोर-ज़ोर से हिला रही थी।

एसयूवी अब फार्महाउस से सिर्फ़ 2 किमी दूर थी। अंदर का माहौल पूरी तरह गरम था, विक्की अपने क्लाइमेक्स पर था और त्रुप्ति की चीखों का मज़ा ले रहा था। तभी अचानक ड्राइवर ने ब्रेक लगाया और घबराते हुए बोला:

ड्राइवर: “विक्की बाबू… सँभालिए! आगे सिक्योरिटी ऑफिसर का चेक नाका है। बड़ी चेकिंग चल रही है।”

विक्की, जो बस अपना कम त्रुप्ति के चेहरे पर निकालने ही वाला था, ये सुनकर आग-बबूला हो गया।

विक्की: (गुस्से में) “हट साला! इन ठुल्लों को भी अभी मरना था? मूड की माँ-बहन कर दी!”

विक्की ने झल्लाते हुए अपना लंड त्रुप्ति के हाथ से खींचा। वो गुस्से में फुफकार रहा था। उसने जल्दी से अपनी ज़िप लगाई और पीछे की सीट से उठकर आगे पैसेंजर सीट पर जा बैठा।

राहुल की भी हालत खराब हो गई। उसने जल्दी से त्रुप्ति को सँभाला। त्रुप्ति नशे में पूरी तरह लुढ़क गई थी और राहुल की गोद में सर रखकर लेटी हुई थी। राहुल ने घबराहट में त्रुप्ति का ब्लैक गाउन ऊपर खींचकर उसके बूब्स ढके और ड्रेस ठीक की, हालाँकि त्रुप्ति के बाल बिखरे हुए थे और लिपस्टिक फैली हुई थी।

गाड़ी चेक पोस्ट पर रुकी। किस्मत देखो, ये वही चेक नाका था जहाँ कुछ देर पहले इंस्पेक्टर विजय और हवलदार बोसले ने त्रुप्ति को रोका था। विजय ने एसयूवी को पहचान लिया।

विजय डंडे से शीशे पर खट-खटाया। ड्राइवर ने शीशा नीचे किया।

विजय: (सख्त आवाज़ में) “क्या चल रहा है अंदर? इतनी रात को कहाँ भागे जा रहे हो? लाइट जलाओ!”

विक्की ने मन ही मन गाली दी पर लाइट जला दी। विजय ने अपनी टॉर्च (फ्लैशलाइट) सीधा पीछे की सीट पर मारी। रोशनी सीधा राहुल और उसकी गोद में पड़ी त्रुप्ति पर गिरी। त्रुप्ति बेहोश सी हालत में थी, उसका चेहरा लाल था और कपड़े थोड़े अस्त-व्यस्त।

विजय: (शक करते हुए) “ये लड़की कौन है? और इस हालत में क्या कर रही है? तुम लोग इसके साथ कुछ ग़लत करने की सोच रहे थे क्या?”

राहुल डर गया, उसने जल्दी से जवाब दिया।

राहुल: “नहीं सर! ऐसा कुछ नहीं है। ये… ये मेरी गर्लफ्रेंड है। हम बस पार्टी से आ रहे हैं, थोड़ी ज़्यादा पी ली है इसने। हम वापस हॉस्टल जा रहे हैं।”

विजय: (घूरते हुए) “हॉस्टल जा रहे हो या कहीं और? शक्ल से तो तुम लोग शरीफ़ नहीं लगते। बाहर निकलो सब! लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन निकालो। अभी तुम्हारे घर फोन करता हूँ, देखते हैं माँ-बाप क्या कहते हैं।”

‘घर पर फोन’ का नाम सुनते ही राहुल की फट गई। अगर संजीव (त्रुप्ति के पति/राहुल के पापा) को पता चला तो सब खत्म। लेकिन विक्की गुस्से में था।

विक्की गुस्से में कार से नीचे उतरा। उसने सोचा कि ये मामला पावर से ही सुलझेगा।

विक्की: (अकड़कर) “ओये इंस्पेक्टर! आवाज़ नीचे। जानते नहीं हो किससे बात कर रहे हो? मेरे पापा एमएलए [पॉलिटिशियन का नाम] हैं। अगर मैंने अभी एक कॉल घुमा दी ना, तो वर्दी उतारते देर नहीं लगेगी। चुपचाप जाने दे।”

पॉलिटिशियन का नाम सुनते ही विजय थोड़ा ठिठका। वो समझ गया कि ये बड़े बाप की बिगड़ी औलाद है। सीधा पंगा लेना महँगा पड़ सकता है। लेकिन विजय भी खिलाड़ी था, उसने त्रुप्ति को पहचान लिया था और वो इतनी आसानी से ‘माल’ को जाने नहीं देना चाहता था।

विजय: (थोड़ा नरम पड़ते हुए, पर शातिर दिमाग से) “अच्छा… एमएलए साहब के बेटे हो? पहले बताना चाहिए था ना। देखो बेटा, मैं रोक नहीं रहा हूँ। पर मसला ये है कि तुम्हारे साथ लड़की है, और वो भी नशे में धुत है।”

विजय ने ऊपर लगे सीसीटीवी कैमरा की तरफ इशारा किया।

विजय: “वो देखो, ऊपर कैमरा लगा है। कंट्रोल रूम में सब दिख रहा है कि लड़की किस हालत में है। अगर मैंने तुम्हें ऐसे ही जाने दिया और आगे कुछ हो गया, तो मेरी नौकरी जाएगी और तुम्हारे पापा की बदनामी होगी।”

विक्की चिढ़ गया।

विक्की: “तो क्या चाहते हो?”

विजय: (मुस्कुराते हुए) “सेफ्टी ज़रूरी है। मैं तुम्हें अकेले नहीं जाने दे सकता। मेरी पेट्रोलिंग वैन तुम्हारे पीछे-पीछे आएगी। वो तुम्हें सीधा कॉलेज हॉस्टल तक ड्रॉप करेगी ताकि लड़की सेफ पहुँच जाए। रास्ते में कहीं और (फार्महाउस) रुकने का कोई सीन नहीं होगा।”

विक्की का दिमाग खराब हो गया। विजय ने बड़ी सफ़ाई से उसका फार्महाउस प्लान चौपट कर दिया था। अगर सिक्योरिटी ऑफिसर वैन पीछे होगी, तो वो त्रुप्ति को फार्महाउस नहीं ले जा सकता। उसे मजबूरन हॉस्टल ही जाना पड़ेगा।

राहुल: (धीरे से विक्की से) “यार विक्की… मान जा। अगर इसने घर फोन कर दिया तो लोडे लग जाएँगे। फार्महाउस कभी और चल लेंगे।”

विक्की ने गुस्से में पैर पटका।

विक्की: “ठीक है! भेजो अपनी वैन। पर जल्दी करो।”

विक्की वापस कार में बैठा। ड्राइवर ने गाड़ी स्टार्ट की। पीछे त्रुप्ति अभी भी राहुल की गोद में पड़ी थी, बेखबर कि उसकी इज़्ज़त आज सिक्योरिटी ऑफिसर की वजह से विक्की से तो बच गई, पर विजय की नज़रों में चढ़ गई है।

एसयूवी आगे बढ़ी और उसके ठीक पीछे सिक्योरिटी ऑफिसर की जीप लग गई। विक्की स्टीयरिंग व्हील पर मुक्का मार रहा था क्योंकि उसके हाथ आया ‘शिकार’ आज रात के लिए छूट गया था।

जैसे ही विक्की की काली एसयूवी सिक्योरिटी ऑफिसर वैन की निगरानी में आगे बढ़ी, चेक पोस्ट पर खड़े हवलदार बोसले ने डंडे को ज़मीन पर पटका और निराशा से बोला।

बोसले: “अरे यार साहब! आज तो किस्मत ही खराब थी। वो लड़की पूरी धुत थी, अगर वो बड़े बाप की औलाद साथ न होती, तो आज हमारे मज़े ही मज़े थे। उस गोरी चमड़ी को मसलने का मज़ा ही कुछ और होता।”

इंस्पेक्टर विजय ने अपनी सिगरेट जलाई और एसयूवी की लाल बत्तियों को दूर जाते हुए देखा। उसके चेहरे पर एक शैतानी सुकून था।

विजय: (धुआँ उड़ाते हुए) “धीरज रखो बोसले जी। ऐसी अप्सरा के लिए थोड़ा इंतज़ार तो बनता है। कोई नहीं, साथ में गाड़ी भेजी है ना? अब हमें पता चल जाएगा कि वो कौनसे कॉलेज और हॉस्टल में रहती है। आज नहीं तो कल, शिकार तो हमारा ही होगा। बाद में जाएँगे ना कॉलेज में ‘इन्वेस्टिगेशन’ के बहाने… तब कोई बाप का बेटा बीच में नहीं आएगा।”

दोनों सिक्योरिटी ऑफिसर वाले ज़ोर से हँसे, उनकी हँसी में त्रुप्ति के लिए एक नया जाल बुना जा रहा था।

सिक्योरिटी ऑफिसर वैन की निगरानी में विक्की को मजबूरन गाड़ी सीधा हॉस्टल के गेट पर रोकनी पड़ी। राहुल ने पीछे का दरवाज़ा खोला और नशे में झूलती हुई त्रुप्ति को बाहर निकाला। त्रुप्ति के पैर ज़मीन पर टिक नहीं रहे थे, वो पूरी तरह राहुल के सहारे थी।

राहुल उसे किसी तरह घसीटते हुए उसके रूम तक ले गया। अंदर पहुँचकर उसने त्रुप्ति को बेड पर पटक दिया। त्रुप्ति का ब्लैक गाउन ऊपर चढ़ गया था, उसकी नंगी जाँघें और बिखरे हुए बाल उसे किसी उजड़ी हुई रानी की तरह दिखा रहे थे।

राहुल वहीं खड़ा होकर अपनी बेबस माँ को देखने लगा। उसका लंड अभी भी पैंट में तना हुआ था, दर्द कर रहा था। उसने सोचा:

“शिट यार! काश वो इंस्पेक्टर न होता तो आज फार्महाउस पर त्रुप्ति की चीखें गूँज रही होतीं। मैंने सोचा था आज इसकी चूत को कुत्तों की तरह चोदूँगा, विक्की के साथ मिलकर इसका हर छेद भर दूँगा। साली माँ भी ऐसी मिली है जो दिखने में किसी टॉप पॉर्नस्टार से कम नहीं है। इसकी ये हालत देखकर तो और भी मन कर रहा है कि यहीं चोद दूँ।”

लेकिन कॉरिडोर में वार्डन की आवाज़ सुनकर राहुल डर गया। उसने त्रुप्ति को वहीं छोड़ा, लाइट बंद की और दरवाज़ा बाहर से बंद करके निकल गया। त्रुप्ति अपने कमरे में अकेली, नशे और अधूरी हवस के साथ बेड पर पड़ी रह गई।

राहुल जब वापस पार्किंग में आया, तो सिक्योरिटी ऑफिसर वैन वहाँ से जा चुकी थी। विक्की गुस्से में गाड़ी के टायर पर लात मार रहा था।

विक्की: (गाली देते हुए) “मादरच**द! साला पूरा मूड खराब कर दिया उस ठुल्ले ने। इतना मस्त माल हाथ में था, पूरा गरम करके छोड़ना पड़ा।”

विक्की के अंदर की आग अभी शांत नहीं हुई थी। त्रुप्ति को न चोद पाने का गुस्सा और लंड की गर्मी उसे पागल कर रही थी। उसने तुरंत अपना फोन निकाला और शीतल को कॉल लगाया।

विक्की: (फोन पर) “कहाँ है तू? जल्दी मेरे रूम पे आ, या मैं पिक करने आऊँ? … हाँ, बस अभी मूड खराब है, तू आजा, गर्मी निकालनी है।”

फोन काटने के बाद विक्की ने राहुल की तरफ देखा।

विक्की: “सुन राहुल, मैं जा रहा हूँ शीतल को उठाने। मेरा लंड फट रहा है, आज त्रुप्ति की सारी कसर शीतल पर निकालूँगा। तुझे आना है तो बोल? तू भी मार लेना एक-दो शॉट।”

राहुल का मूड अभी खराब था। वो अपनी माँ को उस हालत में देखकर आया था और फार्महाउस वाला प्लान फेल होने से वो चिड़चिड़ा हो गया था।

राहुल: “नहीं यार… मेरा मूड नहीं है अभी। तू ही जा।”

विक्की: “ठीक है, तेरी मर्ज़ी। पर याद रखना, त्रुप्ति बच नहीं पाएगी। आज नहीं तो कल, वो मेरे नीचे होगी।”

विक्की गुस्से में गाड़ी में बैठा और तेज़ी से निकल गया—शीतल की तरफ, ताकि त्रुप्ति की प्यास वो शीतल के जिस्म से बुझा सके। राहुल वहीं अँधेरे में खड़ा रह गया, एक अजीब सी उलझन और हवस के बीच फँसा हुआ।

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