बनारसी पान वाला – 1

Panwala se wife ki chudai kahani:- मेरा नाम निशीथ है और मैं 32 साल का हूँ। मेरी वाइफ का नाम नेहा है जो कि 25 की है। हमारी शादी को 2 साल हो चुके हैं। हमारी लाइफ बहुत जबरदस्त जा रही है। अपना घर है छोटा सा। अच्छा बिजनेस जा रहा है अपना।

मैं एक गुड-लुकिंग, खूबसूरत और केयरिंग हस्बैंड हूँ। रंग गोरा और जिस्म भी फिट है। यानी बिना डेली एक्सरसाइज के भी अपने आप को फिट रखा हुआ है। बस थोड़ी बहुत डेली की वॉक मेरी रूटीन का हिस्सा है।

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Panwala se wife ki chudai kahani

मेरी वाइफ, मेरी जान, मेरी डार्लिंग नेहा मोस्ट ब्यूटीफुल, प्रिटी, अट्रैक्टिव, सेक्सी लुकिंग और फेथफुल (जो मेरा भ्रम था) लड़की है। हमारी शादी माँ-बाप की मर्जी से ही हुई थी। और मैं तो उसे पाकर ऐसा समझने लगा था कि जैसे कोई परी ही मिल गई हो मुझे। कोई मिस वर्ल्ड मिल गई हो मुझे।

दूध से भी ज्यादा सफेद रंगत है उसकी। जिस पर अगर कोई बिना हाथ धोए टच भी कर दे तो उसके जिस्म पर गंदे निशान बन जाएँ। जब भी वो मेरे साथ कहीं बाहर जाती तो लोग उसे देखते के देखते ही रह जाते।

नेहा जितनी खूबसूरत थी उतनी ही वो सफाई पसंद थी। अपने घर की और अपने जिस्म की सफाई हर वक्त रखती थी। अपने जिस्म के गैर जरूरी बाल वो हमेशा ही साफ रखती थी। उसकी आर्मपिट्स और चूत हमेशा ही क्लीनली शेव्ड ही रहती थी। चिकनी और मुलायम।

ये सब कुछ यहाँ तक रहता तो भी ठीक था। बल्कि बहुत अच्छा था। मगर बात इससे आगे बढ़ जाती थी। लेकिन नेहा की यही सफाई वाली आदत कभी-कभी मुझे बहुत ही बुरी लगती थी। और ड्यूरिंग सेक्स मेरा मूड ही खराब कर देती थी। क्योंकि जब भी उससे सेक्स करने का इरादा करो तो कहती कि पहले नहा के आओ। और किस करने के लिए ब्रश करना पड़ता। जिससे मुझे इतनी एलर्जी होती और गुस्सा आता कि कभी-कभी तो मैं सेक्स करने का इरादा ही बदल देता।

बूब्स चूमने को झुकूँ तो उसे मेरे बालों में लगे हेयर ऑयल की बदबू आए। चुदाई के बाद सीमेन से भी उसे प्रॉब्लम। नेहा के कहने पर मैं कंडोम यूज करने लगा जिससे उसे सीमेन से भी छुटकारा मिल गया और प्रेग्नेंसी का भी टेंशन खत्म हो गया। जी हाँ ठीक समझे। क्लीननेस का भूत नेहा पर उस कदर चढ़ गया था कि वो बच्चा भी नहीं लाना चाहती थी। उसे हर जगह बदबू ही आती है। मतलब उसके दिमाग में पूरे दिन सिर्फ और सिर्फ सफाई ही घूमती रहती है। लेकिन धीरे-धीरे मैंने नेहा की हैबिट्स को एक्सेप्ट कर लिया।

वॉक करने का टाइम मुझे रात को ही मिलता था इसलिए मैं रात के खाने के बाद बाहर वॉक के लिए निकल जाता। कभी-कभी तो नेहा मेरे साथ जाती और कभी मैं अकेला ही जाता। हमारे घर की गली की नुक्कड़ पर बनारसी पान वाले की दुकान है। जिसके मालिक छेदीलाल से मेरी अच्छी पक्की है।

छेदीलाल जितना पान बनाने में माहिर है उतना ही बातें बनाने में। बहुत ही काला रंग और बड़ी तोंद का मालिक था। सिर पर थोड़े-थोड़े बाल थे। जिन पर उसने एक बड़ा सा रुमाल बाँधा होता था। नीचे धोती ही बाँधी होती थी। गले में अक्सर औकात एक मैली सी गंदी सी बनियान होती थी। जो कि कत्थे-चूने से खराब हुई होती थी।

इस सब के बावजूद उसकी रसीली बातें, रसीले पान और अच्छे बर्ताव की वजह से उसकी दुकान फेमस है। छेदीलाल हमेशा अपने रेगुलर कस्टमर्स का अपने तरीके से ख्याल रखता है। रेगुलर कस्टमर्स के लिए वो स्पेशल सुपारी अलग से रखता है और अपने ही हाथों से पान खिलाता है।

जिस दिन मैं और नेहा घूमने निकलते हैं तब भी छेदीलाल का पान खाकर ही हम आगे बढ़ते हैं। स्टार्टिंग में तो नेहा दुकान से दूर खड़ी रहती थी लेकिन एक बार मैंने नेहा को बिना सुपारी वाला मीठा पान खिलाया जो उसे इतना पसंद आया कि जब भी हम साथ निकलते और मैं पान खाने जाता वो भी मीठा पान खाने के लिए दुकान के नजदीक आ जाती।

छेदीलाल जब भी नेहा का पान बनाते मैं देखता एक अजीब सी आग लग जाती मेरे शरीर में। उसकी काली गंदी उंगलियाँ नेहा के पान पर कत्था लगाती तब मेरा खून गरम होने लगता और नेहा छेदीलाल का बनाया हुआ पान मुँह में डालती तब तो मेरा कॉक रॉक करने लगता। और फिर तो मैं नेहा को हर रोज छेदीलाल की दुकान पे पान खाने ले जाने लगा। पर कुछ ही दिनों में हर रोज एक ही सीन देखकर मेरी एक्साइटमेंट कम होने लगी लेकिन मैं वो एक्साइटिंग फीलिंग को खत्म होने देना नहीं चाहता था।

मैंने सोच लिया कि मुझे कुछ ऐसा करना पड़ेगा जिससे मेरा लंड फिर से रॉक करने लगे और उसका मुझे सॉलिड आइडिया भी नेहा ने ही दिया। एक बार मैं और नेहा पान खाकर निकले और वो बोली—

नेहा: निशीथ मुझे पान खाना तो अच्छा लगता है मगर पान से हाथ गंदे होते हैं वो अच्छा नहीं लगता इसलिए मैं कल से पान नहीं खाऊँगी।

उसकी बात सुनकर मैं हँसने लगा—

निशीथ: तू खाना खाती है तब भी तो हाथ गंदे होते होंगे तो खाना क्यों खाती है?

मेरी बात सुनकर नेहा ने मुझे पीठ पर हाथ मारा—

नेहा: तब घर में होते हैं तो हाथ धो सकते हैं। यहाँ तो घर जाएँ नहीं तब तक गंदे रहते हैं।

निशीथ: हम भी तो पान खाते हैं। हमारे भी हाथ गंदे होते हैं।

नेहा: आपको तो छेदीलाल पान खिलाता है। आपके हाथ कहाँ गंदे होते हैं।

नेहा की बात सुनकर मेरे दिमाग में विस्फोट हुआ—

निशीथ (मन में): यार ये मेरे दिमाग में अब तक क्यों नहीं आया। ये आइडिया सही रहेगा।

और दूसरे दिन मैं और नेहा पान खाने छेदी की दुकान गए। जैसे ही छेदी ने मुझे पान खिलाया मैं बोल पड़ा—

निशीथ: यार छेदीलाल मेमसाब कल तुम्हारी शिकायत कर रही थी कि छेदीलाल भैया सिर्फ आपको पान क्यों खिलाता है? मुझे क्यों नहीं खिलाता?

मेरी बात सुनकर नेहा ने अपना पैर मेरे पैर पर मारा। मैंने उसकी तरफ देखा। आँखें निकाल के इशारे से कहने लगी कि क्या बोल रहे हो?

मैंने उसके ऊपर से अपना ध्यान हटाकर छेदी की तरफ देखा। उसके फेस पर हैप्पीनेस की लहर आ गई थी।

निशीथ: क्या सोच रहे हो छेदीलाल? मेमसाब को अपने हाथों से पान खिलाओ।

मेरी बात सुनकर छेदीलाल ने हिम्मत करके नेहा की तरफ पान किया। नेहा मुझे घूरने लगी पर मैंने उसके पर ध्यान दिए बगैर उसे पान खाने को कहा तो वो ज्यादा आँखें दिखाने लगी। तभी पास खड़े अंकल ने नेहा को कहा—

अंकल: खा ले बिटिया। मैं भी अपनी बीवी के साथ आता हूँ तब वो भी छेदी के हाथों ही पान खाती है।

नेहा ने आनाकानी करते हुए अनिच्छा से अपना मुँह खोला और छेदी ने बड़ी सफाई से नेहा के मुँह में पान सरका दिया। जो देखकर मेरा खून फिर से गरम होने लगा और कॉक रॉक न रोल करने लगा। मैंने अपनी आँखें बंद कीं तो नेहा मुझे छेदी की काली और गंदी उंगलियाँ बड़े ही प्यार से चूसती हुई नजर आई। मेरा लंड पैंट फाड़ के बाहर निकल आएगा ऐसा मुझे लगने लगा। उस रात मैंने पहली बार नेहा और छेदी के बारे में सोचकर मुठ मारी।

दूसरे दिन रात को मैंने नेहा को पान के लिए बोला। मेरा मानना था कि वो नहीं आएगी लेकिन नेहा तुरंत आने को रेडी हो गई। छेदी ने जैसे ही नेहा का पान बनाया नेहा ने सामने से ही छेदी को अपने हाथों से पान खिलाने को कहा। मेरे लंड की तो जैसे मुराद पूरी हो गई। पैंट के अंदर ही फड़फड़ाकर वो अपनी खुशी दिखाने लगा।

घर पहुँचते ही मैंने नेहा को वेडिंग नाइट वाली नाइटी पहनने को बोलकर मैं बाथरूम में फ्रेश होने चला गया। नेहा नाइटी की शौकीन है। उसके पास कम से कम एक से एक बढ़िया 25 से 30 नाइटी हैं। दिन में भी वो जब तक नहाए नहीं तब तक नाइटी ही रखती है लेकिन उसकी ज्यादातर नाइटी में वो हाफ-न्यूड ही दिखती है इसलिए सुबह-सुबह कोई आ जाए तब दरवाजा मैं ही खोलता हूँ और तब तक नेहा बेडरूम में जाकर नाइटी चेंज कर लेती है।

मैं बाथरूम से बाहर आया तब तक नेहा ने नाइटी पहन ली थी। वो रेड कलर की ट्रांसपेरेंट नाइटी में ब्यूटीफुली सेक्सी लग रही थी। नेहा की पिंकिश बॉडी पर रेड कलर गजब का निखार रहा था और उसके बाद मैंने नेहा की चुदाई की जिसमें नेहा ने हर रोज से बेहतर साथ दिया।

दूसरे दिन सुबह मैंने नेहा से पूछा—

निशीथ: परसों तो तुझे छेदी के पान खिलाने पर बड़ी प्रॉब्लम थी और कल तो तूने सामने से पान खाया।

नेहा: मुझे मालूम नहीं था कि छेदी ऐसे पान खिलाता है।

निशीथ: कैसे? कैसे खिलाता है?

नेहा: छेदी पूरा पीछे से पान पकड़ते हैं और फिर मुँह के अंदर पुश कर देते हैं इसलिए उनका हाथ हमारे फेस पर टच नहीं होता। फिर उनके हाथ से पान खाने में क्या प्रॉब्लम?

नेहा की बात तो बिल्कुल सही थी। आज तक छेदी का हाथ मेरे फेस पर भी टच नहीं हुआ था लेकिन कब तक छेदी अपने आप पर कंट्रोल करेगा। एक ना एक दिन तो वो नेहा को छुएगा ही लेकिन मेरी एक्सपेक्टेशन गलत निकली। उसके बाद और चार दिन निकल गए लेकिन छेदी जैसे मुझे पान खिला रहा था वैसे ही नेहा को भी खिला रहा था। वो थोड़ा से भी आगे बढ़ने का नाम ही नहीं ले रहा था।

ये कैसे हो सकता है मैं सोचने लगा कि नेहा को पान खिलाते हुए छेदी को कुछ होता नहीं होगा? उसके सपने में भी नेहा जितनी खूबसूरत लड़की आ नहीं सकती फिर भी वो क्यों आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं कर रहा है। बहुत सोचने पर मुझे उसके दो रीजन लगे कि या तो छेदी निहायती शरीफ इंसान है या फिर दुकान की प्रेस्टीज से डरता है कि कहीं वो नेहा को छूने जाए और कहीं हमने उसके साथ लड़ाई की और उसका इश्यू बन गया तो उसकी जमी-जमाई दुकान बंद हो जाएगी।

मैंने आगे सोचा कि अगर छेदी शरीफ है तो उसका कोई इलाज नहीं लेकिन वो डर रहा है तो उसका डर दूर करना चाहिए। पर कैसे मालूम पड़े कि छेदी शरीफ है या नहीं? उसकी पुरानी पहचान वाला या फिर उसका कोई अड़ोस-पड़ोस वाला मिल जाए तो उससे पता लग सकता है।

रात को पान खाते हुए मैंने छेदी से पूछा—

निशीथ: छेदीलाल आप कहाँ रहते हो?

छेदीलाल: सब पीछे गवर्नमेंट क्वार्टर (सरकारी आवास) है उसमें रहते हैं।

छेदी की बात सुनकर मुझे खुशी हुई कि चलो अच्छा है। छेदी नजदीक रहता है तो उसके बारे में जानना ईजी होगा। तभी नेहा ने कहा—

नेहा: छेदीलाल आप आवास में रहते हैं तो मुझे एक मेड ढूँढ दीजिए ना।

छेदीलाल तो जैसे नेहा के काम सपने पर खुश हो गया—

छेदीलाल: आ जाएगी। 3-4 दिन में आपके घर पूरे दिन के लिए मेड आ जाएगी।

नेहा: नहीं नहीं मुझे पूरे दिन के लिए नहीं चाहिए। दोपहर को 12 से 5 बजे तक की मिल जाए तो भी बहुत है।

नेहा और छेदी की बातें मैं चुपचाप सुन रहा था लेकिन मुझे ये सोचके अच्छा लग रहा था कि छेदी के पहचान वाला कोई हमारे घर आएगा तो उसके पीछे-पीछे छेदी को घर में आने का बहाना मिल जाएगा।

दूसरे दिन सुबह मैं ऑफिस जाते हुए गवर्नमेंट क्वार्टर के पास से गुजरा। वहाँ बाहर बैठे पंचर वाले की तरफ मेरा ध्यान गया तो मैं उसके पास गया और उसे बाइक में एयर चेक करने को बोला। वो चेक करने लगा। मैंने उसे धीरे से पूछा—

निशीथ: आवास में ही रहते हो?

लड़का: हाँ।

निशीथ: छेदीलाल को पहचानते हो?

लड़का: कौन से? लंबू है वो कि काले से मोटे हैं वो?

निशीथ: काले से मोटे हैं वो।

लड़का: पहचानता हूँ ना। क्या काम है साब?

निशीथ: कैसा आदमी है?

लड़का: दिलदार आदमी है साब। कभी भी कोई भी प्रोग्राम के लिए पैसे माँगो ना नहीं बोलता। आवास का सबसे अमीर आदमी है।

निशीथ: औरतों के मामले में कैसा है?

मैं अपने एक्चुअल क्वेश्चन पे आ गया। लड़का मेरी तरफ संदेह की नजरों से देखने लगा। वो कुछ ज्यादा सोचे-समझे उसके पहले मैं यहाँ से निकल जाना चाहता था। मैंने 100 का नोट निकाला और उसके हाथ में थमा के झूठ बोला—

निशीथ: मुझे इसके पैसे मिलने वाले हैं तो थोड़ा तू भी कमा ले।

लड़का: आप जासूस हो क्या? वो शायद मूवीज ज्यादा देखता होगा।

मैंने झूठ-मूठ ही सिर हिलाया।

लड़का: तो साब 1000 का नोट दो। आप भी तो कमाओगे।

मैंने उसे 1000 का नोट दिया और वो बोलने लगा—

लड़का: एक नंबर का औरतबाज है। आवास की सारी औरतों को चोद चुका है। पर साब मैंने बताया किसी को कहना मत।

निशीथ: नहीं बताऊँगा।

कहकर मैंने बाइक स्टार्ट की।

लड़के की बात में मुझे खास दम नहीं लग रहा था। छेदी औरतबाज? बात हजम नहीं हो पा रही थी लेकिन बात सही है तो छेदी मेरे काम का आदमी था। मुझे चाहिए था वैसा ही है। अब तो सिर्फ छेदी का डर दूर करना है। उसके बाद नेहा के ऊपर चढ़ने का इंतजाम वो खुद कर लेगा।

गाइज आप सोच रहे होंगे कि मैं कैसा इंसान हूँ जो अपनी वाइफ को दूसरे से चुदवाना चाहता हूँ तो उसके पीछे 4 महीने पहले का इंसिडेंट है। उस दिन मेरा खास दोस्त विकी मुझे मिलने आया था। बातों ही बातों में उसने बताया कि—

विकी: कल रात तो रेशमा (उसकी बीवी) ने मस्त ब्लोजॉब दिया। परफेक्ट पोर्न मूवी जैसा। मजा आ गया।

निशीथ: जलसे हैं तेरे साले।

विकी: मेरे जलसे हैं तो तुझे क्या कमी है? साले तेरी नेहा तो अपने ग्रुप में सबसे सेक्सी दिखती है।

निशीथ: सिर्फ सेक्सी दिखती है। दिमाग से तो पूरी देसी है।

विकी: क्या बात कर रहे हो?

निशीथ: हाँ यार। तुझे रेशमा ब्लोजॉब देती है और नेहा से लिप्स किस के लिए मुझे मनाना पड़ता है। अब बता जलसे किसके हैं?

विकी: सच कह रहा है तू?

निशीथ: झूठ क्यों बोलूँगा भाई? उसे हर वक्त हर चीज में से बदबू आती है। सेक्स करना हो तो नहाओ। किस करना हो टूथब्रश करो। और ये सब करने के बाद भी नेहा कोऑपरेट नहीं करती।

विकी: औरतें सेक्स में थोड़ी चुजी तो होती ही हैं भाई। रेशमा मुझे जब भी ब्लोजॉब देती है उसके पहले मैं डेटॉल से लंड को अच्छी तरह से रगड़-रगड़ के साफ करता हूँ और उसके बाद स्प्रे लगाता हूँ तब ब्लोजॉब देती है।

निशीथ: वो तो मैं भी समझता हूँ लेकिन यार लिप्स किस में कोई ऐसा करता है क्या?

विकी: यार मुझे एक बात बता। पहले दिन से ही नेहा ऐसी है क्या?

निशीथ: नहीं यार। शुरुआत में तो किस-बिस में उसे कोई प्रॉब्लम नहीं थी लेकिन मैरिज के 2 साल बाद धीरे-धीरे उसे सेक्स में से इंटरेस्ट कम होने लगा है।

विकी: निशीथ यार मुझे लग रहा है नेहा को सेक्स में से नहीं तुझमें से इंटरेस्ट कम हो गया है।

निशीथ: क्या पागलों जैसी बातें कर रहे हो?

विकी: सही कह रहा हूँ दोस्त। नेहा को चेंज चाहिए।

निशीथ: नहीं ऐसा नहीं है।

विकी: वैसा ही है और एक बार नेहा को चेंज मिल गया ना तो वो फिर से तुमसे पहले से भी बेहतर तरीके से चुदवाएगी।

निशीथ: लेकिन यार नेहा को देखकर तो कभी ऐसा नहीं लगा। वो मेरे सिवा किसी की तरफ आँख उठाकर भी नहीं देखती।

विकी: नेहा शाय नेचर की है यार। वो कभी भी दूसरे के सामने नहीं देखेगी। उसमें ओपननेस तुझे लानी पड़ेगी।

निशीथ: मतलब?

विकी: मतलब यही कि तुम्हें ककल्ड बनना पड़ेगा। तुम्हारी नेहा के लिए तुम्हें खुद उसका प्रेमी ढूँढना पड़ेगा।

निशीथ: नहीं नहीं हो सकता मुझसे ऐसा।

विकी: तेरी मर्जी। चल मैं निकलता हूँ।

विकी के जाने के बाद मैं उसकी बात पर गौर करने लगा कि क्या सच में नेहा को चेंज चाहिए? क्या ऐसा हो सकता है और क्या नेहा एक्स्ट्रामैरिटल अफेयर के लिए रेडी होगी? कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था लेकिन एक बात जरूर थी नेहा के दूसरे मर्द के साथ सोचने से भी मेरा कॉक रॉक करने लगता था।

फाइनली दो दिन सोचने के बाद मैंने नेहा को दूसरे मर्द से चुदवाने का डिसीजन ले ही लिया। नेहा का जिस तरह का नेचर था उससे ये ईजी तो नहीं था पर मैंने सोच लिया था कि लास्ट तक ट्राई करना है लेकिन एक डर भी था कि नेहा कहीं उस आदमी से प्यार करने लगे तो? बहुत सोचने के बाद मुझे उसका हल मिला कि नेहा को मैं ओल्डर, डर्टी लुक वाले पर्सन से सेक्स कराऊँगा जिससे नेहा उस आदमी से प्यार करने लगेगी उस बात का टेंशन तो खत्म हो जाएगा और दूसरा नेहा मेरा उस आदमी के साथ मेरा सेक्स परफॉर्मेंस कंपेयर करेगी तो उसे मैं अच्छा लगूँगा।

4 महीने से मैं ये बात को अपने जेहन में लेकर घूम रहा था। आज मुझे चाहिए था वैसा आदमी मिल गया था—छेदी। अब मुझे दो काम करने थे। पहला—छेदी के दिमाग से डर निकालना था और दूसरा—नेहा को छेदी से चुदवाने को रेडी करना था।

उसी दिन दोपहर को मुझे नेहा का फोन आया—

नेहा: एक घंटे में मेरी फ्रेंड्स आने वाली हैं निशीथ।

निशीथ: वेरी गुड।

नेहा: क्या वेरी गुड निशीथ? ना तो घर पे स्नैक्स हैं ना कोल्ड ड्रिंक्स हैं और अभी तक मैं नहाई भी नहीं हूँ।

निशीथ: जल्दी से नहाकर ले आओ।

नेहा: इतना कहाँ समय है निशीथ। एक घंटे के अंदर तो आ जाएँगी। तुम ऑफिस में से किसी को भेजो।

निशीथ: नहीं भेज पाऊँगा। दो में से एक ही पीयन आया है। तुम खुद ही कुछ जुगाड़ कर लो।

नेहा: मुझसे हो सकता तो मैं तुम्हें क्यों फोन करती?

निशीथ: तुम भी नेहा यार। ना बोल दो तुम्हारी फ्रेंड्स को। वैसे अचानक क्यों आने वाली हैं? अगले दिन कहना चाहिए ना।

नेहा: हर मंथली हम ऐसा ही करते हैं। अलग-अलग फ्रेंड्स के घर अचानक जाने का प्लान बनाकर सरप्राइज देते हैं। इस बार मेरा नंबर आ गया। निशीथ छेदीलाल की दुकान पे कोल्ड ड्रिंक्स और स्नैक्स तो मिलते ही हैं। उनको कहो ना घर देने आ जाएँ।

मुझसे ज्यादा मेरे लंड को नेहा का आइडिया पसंद आया। नेहा के मुँह से छेदी का नाम सुनके वो फुदकने लगा—

निशीथ: ये अच्छा रहेगा। मैं छेदी को पूछ के तुम्हें रिप्लाई देता हूँ।

मैंने नेहा के फोन को काटकर छेदी को फोन लगाया—

निशीथ: छेदीलाल घर पे गेस्ट आ रहे हैं तो 10-12 कोल्ड ड्रिंक और स्नैक्स चाहिए तो आप अभी दे आएँगे?

छेदी: बाबूजी दो बजे खाना खाने जाता हूँ तब देने जाऊँगा तो चलेगा?

निशीथ: चलेगा छेदीलाल पर भूलना मत।

कहकर मैंने फोन काट दिया और फिर से नेहा को फोन लगाया—

निशीथ: छेदी दो बजे दे जाएँगे।

नेहा: चलो ठीक है। अब मैं शांति से नहा सकती हूँ। बाय।

कहकर नेहा ने फोन काटा और मेरे दिमाग में एक धासू प्लान आया। मैंने पाँच मिनट बाद फिर से छेदी को फोन लगाया—

निशीथ: छेदीलाल नेहा का फोन आया था कि गेस्ट आ गए हैं तो कोल्ड ड्रिंक और स्नैक्स अर्ली चाहिए।

छेदी: मैं आपको फोन करने ही वाला था। आपके घर के एड्रेस के लिए। आप एड्रेस दे दीजिए मैं 5-10 मिनट में जाता हूँ।

मैंने छेदी को एड्रेस लिखाया और फिर पूरा दिन यही सोचता रहा कि छेदी घर पहुँचा होगा तब नेहा किस हाल में होगी। अलग-अलग फैंटसी करके पूरे दिन मैं नेहा को छेदी से चुदवाता रहा।

शाम को मैं जल्दी घर पहुँचा—

निशीथ: कितनी फ्रेंड्स आई थीं तुम्हारी नेहा?

नेहा: बारह।

निशीथ: छेदी सारी चीजें टाइम पे दे गया था ना?

मुझे जो जानना था वो सवाल किया।

नेहा: तुमने उसे जल्दी आने को बोला था।

निशीथ: नहीं तो क्यों?

नेहा: तुमने तो कहा था छेदीलाल 2 बजे आएँगे लेकिन वो तो तुरंत आ गया था।

निशीथ: जल्दी आ गया तो अच्छा है ना।

नेहा: क्या अच्छा। मैं नहा रही थी तब डोरबेल बजी। मैंने सोचा मेरी एकाद फ्रेंड आ गई होगी। मैं जल्दी-जल्दी नहाकर टॉवल लपेटकर बाहर आई और डोर खोल दिया तो सामने छेदीलाल खड़े थे।

निशीथ: ओएमजी फिर?

मेरा लंड डिस्को करने लगा।

नेहा: फिर क्या। मैंने फटाफट से उनके हाथों से सारी चीजें ले लीं और डोर बंद कर दिया।

निशीथ: कुछ देखा तो नहीं था ना छेदी ने?

मैंने आँख मिचकाते हुए पूछा।

नेहा: क्लीवेज दिख रहे थे पर मैंने फटाफट लेकर डोर बंद कर दिया था। उनका खास ध्यान नहीं था।

मैं मन ही मन मुस्कुराया कि—

निशीथ (मन में): नेहा डार्लिंग मर्द बड़े कमीने होते हैं। छेदी ने तेरे क्लीवेज पर से तेरे बोब्स और गाँड का मैप निकाल दिया होगा और आज रात को वो तेरे नाम की मुठ मारेगा।

खाना खाकर मैं पान खाने गया। नेहा थक गई थी इसलिए नहीं आई और मैं भी वही चाहता था। दुकान पे पहुँचते ही मैंने छेदी से कहा—

निशीथ: सॉरी छेदीलाल दोपहर को आपको परेशान किया लेकिन क्या करता। नेहा का फोन कि छेदीलाल को तुरंत भेजिए मेरी सारी फ्रेंड्स आ गई हैं। वैसे आप घर गए होंगे तब नेहा की फ्रेंड्स आ गई थीं ना?

मैं छेदी से झूठ इसलिए बोल रहा था कि उसे जताना चाहता था कि नेहा जानबूझकर उनके सामने टॉवल में गई थी।

छेदी मेरी बात सुनकर सोच में पड़ गया—

छेदी: हाँ मैं घर पहुँचा तब बीवी जी की फ्रेंड्स आ गई थीं।

छेदी भी मेरी तरह झूठ बोल रहा था। पान खाकर मैं वहाँ से निकला तब मेरे जेहन में एक ही बात घूम रही थी कि अब आगे क्या करना है?

दूसरे दिन रात को मैं और नेहा पान खाने गए तब मुझे लग रहा था कि आज तो छेदी कुछ ना कुछ जरूर करेगा। कल उसका डर मैंने कम किया था इसलिए आज छेदी नेहा के साथ कोई ना कोई गलत हरकत जरूर करेगा। मेरा अनुमान सही निकला।

छेदी ने मुझे पान खिलाया और इमीडिएटली मैं फोन का बहाना निकाल के थोड़ा दुकान से दूर खिसक गया। फोन पर बात करते हुए मेरा ध्यान नेहा और छेदी पर ही था। छेदी ने नेहा को पान खिलाते समय नेहा के लिप्स को छू लिया और बड़ी बात ये थी कि नेहा ने कोई ऑब्जेक्शन नहीं लिया। मैं तो पागल हो गया ये देखके। मेरे लंड ने अंगड़ाई ली और बाहर आने को फड़फड़ाने लगा।

रात को नेहा ने मुझे कहा—

नेहा: अब मैं पान खाने कभी नहीं आऊँगी।

निशीथ: क्यों?

नेहा: आपने देखा नहीं छेदीलाल ने मेरे लिप्स को छुआ।

मैंने अनजान बन गया—

निशीथ: मैंने तो नहीं देखा। तुम्हें कोई मिसअंडरस्टैंडिंग हुई होगी। छेदी ऐसा कर ही नहीं सकता।

उसके बाद नेहा ने उस बारे में कोई बात नहीं की जैसे वो जानना चाहती हो कि मैंने छेदी को उसके लिप्स छूते देखा है कि नहीं।

दूसरे दिन सुबह छेदी का मुझ पर फोन आया—

छेदी: बीवी जी को बोलना मेड का इंतजाम हो गया है। मैं उसको आपके घर का एड्रेस दे दिया है वो बारह बजे तक आ जाएगी।

मैंने नेहा को बता दिया। मैं ग्यारह बजे ऑफिस के लिए निकल रहा था तब मैंने देखा कि नेहा हर रोज की तरह अभी तक नहाई नहीं थी। उसने अपनी हैबिट के अनुसार अभी तक नाइट वाले ही कपड़े पहने थे। उसने आज सेक्सी लिंगरी पहना हुआ था।

निशीथ: नेहा थोड़ी ही देर में मेड आ जाएगी। तुम नहाकर कपड़े चेंज कर लो।

नेहा: मेड आने वाली है। सर्वेंट नहीं आने वाला। मैं हर रोज की तरह घर का सारा काम निपटाके ही नहाऊँगी और तभी ही कपड़े चेंज करूँगी।

निशीथ: ठीक है।

कहकर मैं निकल गया लेकिन उसकी बात से मेरे दिमाग में फिर से एक धासू प्लान आया। मैंने ऑफिस पहुँचते ही 11:30 बजे छेदी को फोन लगाया—

निशीथ: छेदीलाल नेहा का फोन आया था कि मेड के साथ आप भी आइए। वो मेड को पहचानती नहीं कोई और आ गई तो।

छेदी: लेकिन बाबूजी मेड तो घर से आने वाली है और मैं दुकान पे हूँ। हम एक साथ कैसे जा सकते हैं।

निशीथ: अरे आप दुकान से जाओ मेड आने वाली है उसी समय। क्या फर्क पड़ेगा 5 मिनट पहले आप पहुँचोगे या मेड। बस नेहा की और मेड की पहचान कराके निकल जाना।

मैं जानता था कि छेदी ना नहीं बोलने वाला और पहले भी वो ही पहुँचने वाला था।

छेदी: ठीक है साब।

कहकर छेदी ने फोन काट दिया। फिर से मैं कल जैसी सिचुएशन में आ गया था। छेदी घर जाएगा तब नेहा किस हाल में होगी वही सोच-सोचके शाम तक मेरे लंड पर सूजन हो गई।

आगे क्या हुआ पढ़ें नेक्स्ट पार्ट में।

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