एक रील से मेरी दुनिया ही बदल गई – 1
Ghar me chudai ki hindi kahani:- ये कहानी शुरू करती है एक सामान्य देसी परिवार की। हमारा घर अपने कस्बे की मुख्य आबादी से थोड़ा अलग नदी किनारे है। हमारे यहाँ से कुछ दूर पर ही एक रिजर्व जंगल एरिया होने की वजह से हरियाली ज्यादा और लोग कम हैं। खेतों के बीच एक-दूसरे मकान में थोड़ी-थोड़ी दूरी है। ऐसा समझो कि आवाज जोर से लगाए तो आस-पड़ोस को सुनाई पड़ जाती है, पर वैसे एकांत रहता है। यहाँ की जमीन समतल नहीं है, कुछ उभार और कुछ गहराई है। पास में नदी और उससे कटा हुआ नाला भी है।
मेरी सास 60 की हैं। ससुर का इंतकाल हो चुका। जब से मैं घर में आई, उन्हें बड़ी चौधरैन का खिताब मिल गया और वो सरल स्वभाव की गृहिणी हैं। विधवा होने के बाद वो अब ज्यादा कुछ कहती नहीं हम लोगों से। मेरे पति ही अब चौधरी कहलाने लगे, हालाँकि सच्ची बात ये है कि इनमें वो रौबदार व्यक्तित्व नहीं है, इसलिए प्रधान भी नहीं बन पाए।
Ghar me chudai ki hindi kahani
मैं छोटी चौधरैन, घर की बहू। मेरा नाम ममता है। इस समय मैं 35 की हो गई। इस घर में ब्याह के आई तब मैं मात्र 18 की थी। मेरे 2 लड़के हुए – सोहन जो अब बड़ा हो चुका है और रोहन छोटा। मेरे पति कमल सिंह 40 के हैं। वो कॉलेज तक पढ़े और नौकरी भी करी प्राइवेट। अब 4 साल से वापस घर में हैं और खेती और डेयरी का काम संभाल रहे हैं।
मेरा एक देवर भी है, सगा नहीं। कमल के चाचा की औलाद। असल में चाचा-चाची का कई साल पहले एक्सीडेंट में इंतकाल हो गया और मेरी सास ने विमल को घर में रख लिया था। विमल अब 30 का है। पढ़ने में खास नहीं कर पाया सो अब खेती ही करवाता है। वैसे विमल मेरी सास का लाडला है, कैसे ये आगे पता लगेगा।
जैसा मैं बताई, शादी के टाइम कमल शहर में नौकरी करते थे और पहले 5 साल तो मेरी शादीशुदा जिंदगी में कुछ खास हुआ नहीं। जब ये आते तो उन रातों को हम सेक्स करते – साधारण इनका मेरे पे चढ़ जाना और 3-4 मिनट में फारिग हो जाना। इससे मेरे दोनों बालक हो गए। शुरू में तो बच्चे छोटे थे, समय निकल जाता। वैसे तो कुछ सहेलियाँ थीं, कभी चिढ़ती भी कि तू कैसे मर्द के बिना रह लेती है… पर क्या करती, काम से निबट के रात में दोनों बालकों को चिपका सो जाती। कभी कभार जब बहुत जोश चढ़ता तो उंगलियों का सहारा लेती।
वैसे मेरी सास समझदार भी थीं। जब मेरा छोटा वाला 2 साल का हुआ तो एक दिन मैं गाय का दूध पिलाने की कोशिश कर रही थी सोहन को, क्योंकि मेरे स्तन में तो रोहन था और अब इतना दूध नहीं बनता कि दो बच्चे पी लें। सो सास देख बोलीं – बहू दूध कम बन रहा क्या? जब तक हो सके दूध पिला बालकों को, मैंने कमल को 8 साल तक पिलाया था।
उसके बाद उन्होंने कुछ दवा लाके दी – तेरे ससुरजी लाए हैं, 15 दिन खा ले तेरा दूध फिर से बढ़ जाएगा। और हुआ ये कि दूध के साथ मेरे वक्ष भी मोटे हो गए। उससे पहले 34 के थे, उसके बाद 38 हो गए। मुझे अच्छा भी लगता। अब विमल भी चोर नजर से देखता, और सास भी मजाक की – दवा का असर तो अच्छा हुआ री। उस दिन मेरे मुँह से जाने कैसे निकल गया – पर सासु माँ क्या फायदा, ये तो है नहीं। उस दिन सासु मेरे पास आईं और बोलीं – मैं समझ सकती हूँ तेरी पीड़ा। ये भी फौज में रहे, मैं भी अकेली रही हूँ जवानी में… मैं शीला को कहूँगी तेरी भी मालिश अच्छे से करे।
शीला हमारे गाँव की नाउन थी, मालिश वाली। मुझसे उम्र में बड़ी 10 साल। मैंने कहा वो क्या करेगी? सासु तो केरा ले एक बार फिर बताना। मैं सच में नहीं समझी थी क्या होगा। आखिर शीला आईं और दोनों बच्चों को सासु के पास भेज मेरा कमरा बंद कर दीं। प्यार से मुझे देख बोलीं – बहू अब शांति से लेट जा और टोकना ना मुझे। मैं अब भी प्रश्न वाली नजर से देखी पर ये ख्याल आया कि कुछ तो नया है, सो चुपचाप साये ब्लाउज में लेट गई। ऐसा तो कई बार हो चुका था, महीने में एक बार तो वो आकर तेल मालिश करती ही थी – टाँगों की, पेट की, बाहों की। उस टाइम शीला साड़ी पहने रहती, एक-दो बार वो भी साड़ी-ब्लाउज में रहकर की थी, सो कोई खास नहीं था।
पर आज फर्क था। शीला बोलीं – बहुरानी जमीन पे लेटो चटाई बिछा के। और वो मेरे बगल में पहले जैसे बैठीं और उंगलियों से हल्के स्पर्श से मेरी पिंडलियाँ सहलाने लगीं। ये पहली बार हुआ। कुछ उसके स्पर्श का जादू कह सकती हूँ, धीरे से मेरी आँख बंद हो गई और मैं चुपचाप मुँह बाहों में रख आँख बंद कर दी। मेरा बदन हल्का होता जा रहा था। कुछ देर में कोमल हाथ पिंडलियों से बढ़ने लगे, मेरे घुटनों के नीचे तक हल्का गुदगुदी वाला स्पर्श, और फिर तेल लगा हाथ – गरम तेल और वही अहसास।
मैं और ढीले बदन चित पेट के बल पड़ी थी, तभी मेरे टाँगों को फैला दिया गया। कुछ सरसराहट हुई, मैंने पलट के देखा – शीला अपने घुटनों पर बैठी मेरी टाँगों के बीच मुझे देख मुस्कुराईं और बोलीं – बहू आँख बंद। और फिर उसके हाथ मेरी दोनों टाँगों पे फिसलने लगे। अब मेरे टाँगें घुटनों तक खुल चुकी थीं, और हाथ साये के अंदर बढ़ते जा रहे थे। आधी जाँघ के ऊपर कभी नहीं गए थे पहले और इस बार बढ़ने से मैं सतर्क हो गई। नेचुरली अपने को सिकोड़ पलटने की कोशिश की, पर शीला की पकड़ मजबूत है, मेरी टाँगें खुली ही रहीं। पर नजरें मिल गईं। शीला अब मंद-मंद मुस्कान के साथ, और ऊपर खिसक आईं और मेरी पीठ दबाते हुए… लेटी रह बहू, अपनी सास की बात याद रख।
मैं फिर से धड़कते दिल के साथ वापस लेट गई, और टाँगों को ढीला कर दिया। और एक बार फिर से दोनों जाँघों में शीला की उंगलियों ने अपना जादू बिखेरना शुरू किया। कुछ ही मिनटों में ये हथेलियाँ मेरे भरे हुए चूतड़ पर आ गईं, साये के नीचे। मेरी साँस उखड़ने लगी, मुँह तमतमाने लगा। कुछ देर दोनों फाँकों को सहलाने के बाद उसने हाथ नीचे करने शुरू कर दिए और मैं गरम होने लगी। एकदम से मुझे पलट दिया, उस पोजीशन में। मेरा साया आधी जाँघ पर सिमटा था, और शीला नीचे तलवे में तेल मल रही, टाँगें खुली थीं जहाँ वो थी आराम से मेरे झांटे देख पा रही होगी। सोच मैं लज्जित गई – क्या कर रही हो शीला।
शीला: अच्छा लग रहा है ना बहू, बस आराम से आनंद ले।
और 5 मिनट में पूरी टाँगें तेल से चमकने लगीं। मैंने देखा मेरे निप्पल कड़क खड़े हैं, ब्लाउज में नोक साफ नजर आ रही। चूत रानी में कुलबुलाहट ऐसी जो कि इनके साथ ही होती है, पसीना आने लगा है। तभी शीला उठीं तेल डाली बोतल से कटोरी में और झट से अपनी साड़ी खोल मेरे बगल में उकडू बैठ गईं। अब उसका निशाना मेरा पेट था। नाभि में गरम तेल की धार डाल मलते हुए बोलीं – पेटीकोट ढीला कर ले। और बिना रुके अपना हाथ नाड़े के किनारे घुमाने लगीं।
मेरा तो दिल तेज रफ्तार भाग रहा। अब मैंने उसके हाथ पे हाथ रख दिया, शायद नजरों से पूछा अब क्या। शीला मुस्काईं और मेरे निप्पल को दबाते बोलीं – बहू अब ये खोल दे। और दूसरे हाथ से मेरा साया पलट दीं। झटके में मैं नंगी हो गई उनके सामने। फौरन ही शीला उठीं अपना साया गिराते हुए मेरी जाँघों के बीच बैठीं, और झुक के मेरी चूत को मुँह भर लीं।
ममता: स्स्स्स क्या कर रही हो शीला… आआह्ह।
उसका चाटना शुरू हो गया। आज ये पहली बार मेरी चूत पे जीभ रखी थी किसी ने। मैं तो सोची भी नहीं थी ये होता है। उफ्फ मुझसे रहा नहीं गया और अब टाँगें फैला के उसके मुँह को दबा ली मैं। हे कितना आनंद है। 2-3 मिनटों में मैं झरझरा के पानी निकाल दी और शीला मेरी चूचियाँ दबाते हुए सारा पी गईं…..
मैं निढाल लेट गई। शीला मेरे ऊपर पड़ गईं और मुझे चूमने देने लगीं।
शीला: बहू खुश है ना तू…
मैं नजर नहीं मिला पाई थी, और नंगी ही सो गई। मुझे नहीं पता कब वो कमरे से बाहर गईं, जाते में मेरे ऊपर चादर डाल गईं।
तो दोस्तों ये थी मेरी जिंदगी की पहली चिंगारी। उस दिन 10 साल पहले मैं नहीं जानती थी कि इस चिंगारी से लगी आग मेरे को कितना तबदील करने वाली है, मेरे को क्या मेरे पूरे परिवार की दिशा बदलने वाली है।
मेरी नींद टूटी दरवाजे पे हो रही दस्तक से। रोहन की सिसकियाँ की आवाज आ रही थी और सास बोलीं – बहू उठ जा, दूध माँग रहा है बचुआ।
मैंने अपने आप को देखा। उफ्फ ये कैसे हुआ। फिर फटाफट उठी साया पहनी और ब्लाउज बिना बाँधे दरवाजा खोल रोहन को गोदी ले वापस मुड़ गई। घंटे भर उसे सुलाने के बाद ही नहा-धो के बाहर निकली। मेरी सास रसोई में थीं। जल्दी से उनके पास पहुँच बिना कुछ कहे काम में लग गई। सास भी कुछ ना बोलीं, बस उठ के जाते हुए हँस के मेरे पास आईं और गले लगा माथे पे चूम मुस्काती हुई चली गईं। शाम तक मैं सामान्य महसूस करने लगी। विमल आया अपनी मसखरी कर चला गया, और ससुरजी आए। मैं उनसे नजर वैसे भी नहीं मिलाती थी पर आज मेरे मन में ख्याल आया जरूर कि क्या उन्हें पता है शीला के बारे में। पर मन को शांत करती काम में लग गई।
उन दिनों हमारे पास 2 सिंपल मोबाइल थे, एक ससुरजी का और एक मेरे पास। मेरा क्या, बीच-बीच में मायके बात होती और बाकी हफ्ते में 2-3 बार अपने पति कमल से। हाँ ये जरूर है कि हफ्ते-दस दिन में कमलजी मुझे मोबाइल पे पुचकारते पर मैं अब तक उनकी ऐसी हरकतों और बातों को तूल नहीं देती थी, पर आज मेरे मन में गिलानी थी। मुझसे रहा ना गया और जब…
वैसे बता दूँ कमल मुझे अच्छे से समझते हैं, मेरी आवाज से जान जाते हैं मैं दुखी हूँ या खुश।
कमल: और भी कुछ बोल ना डार्लिंग… बाल-बच्चों की बात ही करेगी।
(जब ये ऐसा कहते मैं जान जाती आज इनका मुठ मारने का मन है)
ममता: क्या बात करूँ… ये दूर-दूर से… आप अकेले हैं लगे मुझे। (मेरे पति उस समय 2 और लड़कों के साथ रहते थे) आपके दोनों साथी कहाँ हैं?
कमल: अरे बाहर हैं दोनों। अब तो अपनी बात बता।
ममता: क्या बोलूँ… वही सब तो है।
कमल: हम्म लग रहा कुछ पेट में पुचकार नहीं पा रही मेरी भाग्यवान परी।
ममता: नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं।
कमल: अब 5 साल में इतना तो जानूँ तुझे। चल बोल डाल। माँ-पिताजी से कोई बात हुई, विमल से?
ममता: ना जी… ऐसा कुछ नहीं… वो…
कमल: बोल ना और किसे?
ममता: वो शीला आई थी आज।
कमल: हम्म फिर।
ममता: आज… रहने दीजिए आपकी बात ना।
कमल: देख परी पेट में रखेगी तो बीमार और पड़ेगी। बोल ना।
ममता: आप नाराज ना हो। लेडीज बात है।
कमल: लेडीज बात है तो नाराज क्यों हूँ? बोलना।
ममता: जी वो सासु माँ बोलीं आप बाहर रहते हो, सो शीला से कह के खास मालिश करवा देती हूँ।
कमल: बोल क्या खास?
ममता: जी जब आओगे तब बता दूँगी।
कमल: ना ना अब बोल ना।
ममता: जी आज उसने मुझे नंगा करके तेल लगाया….
कमल: आआह्ह तेल ही तो लगाया। मैं सोचने लगा कि वो नंगा करके क्या कर लेगा तेरा।
ममता: जी पर उसने ऐसा लगाया मैं…. मैं झर गई।
कमल: ……… मतलब उसने मेरी परी की…. उफ्फ कैसे मेरे जान।
ममता: आपको बुरा लगा ना तभी मैं बोली लेडीज की बात है। सासु जी भी कराती थीं जब ससुर जी फौज में थे…. ये तो लेडीज कर लेती हैं… जैसे आप हाथ से…
(ये कहने से पहले मेरे मन में शैतान आ चुका था। मैं अपने पतिदेव की वाणी और मनोदशा भाँपना चाहती थी)
कमल: ……… उफ्फ परी… मतलब उसने हाथ से तेरा… तेरा पानी निकाल दिया……
(मैं सुन के जान गई थी कि अचंभे से वासना की तरफ मुड़ गया है उनका दिल, और मुझे भी अब बात बढ़ाने में मजा आने लगा दोबारा से)
ममता: बस यही समझ गए ना अब…. प्लीज सासु माँ को कुछ ना कहना।
(मैंने जानबूझकर अपना नाम नहीं लिया)
कमल: नहीं नहीं माँ से क्यों नाराज हूँगा। वो तो हमारा भला ही चाहती हैं… चिंता ना कर।
…. ये तो बता मालिश से कैसे हो गया तेरा?
ममता: छी अब फिर शुरू हो गए… आपको तो बस गंदी बातें करा लो…. ये लेडीज बात है आपके लिए नहीं।
कमल: स्स्स अरे परी बता ना।
ममता: क्यों सोच रहे हो वो शीला कैसे कर रही थी तुम्हारी पत्नी को… हेहे।
अब रहने दो जी। अब नींद आ रही। तुम भी सो जाओ।
कमल: अरे मेरी जान.. थोड़ा तो रुक….
ममता: (आवाज धीमे कर प्यार भरे स्वर में) सुनो आज तो मैं ठंडी हो गई… अगली बार… वैसे कब आ रहे हो?
कमल: अरे यार आता हूँ कुछ जुगाड़ करता हूँ… आआआह्ह गया।
ममता हँस दीं….
ममता: चलो शीला के नाम से तुम आ तो जाओगे… अच्छा बाय रखती हूँ।
कॉल कट के मंद मुस्कान के साथ मैंने आँखें तो बंद कर लीं पर अब मेरा दिल डोल रहा था। एक ही दिन में इतना बदलाव… दुविधा सोचते सो गई मैं।
आगे क्या हुआ पढ़िए अगले पार्ट में।
