मेरी दीदी बनी देसी रंडी 6

Didi ki mochi se harcore chudai kahani:- पिछले पार्ट में आपने पढ़ा कि दीदी अकरम और अब्दुल के साथ बाज़ार में खूब मज़े कर चुकी थीं। लौटने के बाद उनकी हालत एक रंडी जैसी हो गई थी। अब घर आकर आगे क्या हुआ…

Didi ki mochi se harcore chudai kahani

दीदी घर आकर नहाने चली गईं। मैं हॉल में बैठकर उनका इंतज़ार कर रहा था। दस मिनट बाद दीदी नहाकर आईं और एक सेक्सी सी नाइटी पहन रखी थी। दीदी ने आज तक वैसी नाइटी कभी नहीं पहनी थी। पता नहीं दीदी के पास ऐसी नाइटी कहाँ से आ गई।

फिर दीदी खाना बनाने चली गईं और मैं भी अपना फोन चलाने लगा। मैंने सोचा चलो छोड़ो क्या ही पूछूँ उस बारे में दीदी से। दीदी कौन सा सच बोलेगी। लेकिन मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि दीदी एक सीधी-सी लड़की जो कभी किसी दूसरे लड़कों को नहीं देखती थी, अपने काम से काम करती थी, वो कैसे एक बूढ़े के हाथ आ गईं और दीदी उसके साथ वैसे काम करने लगीं साथ में उस बूढ़े के दोस्त के साथ भी। पता नहीं उसने दीदी के ऊपर क्या जादू किया है।

एक घंटे बाद दीदी ने खाना बना लिया और खाना लगा दिया। उसके बाद मैं और दीदी खाना खाने लगे। जब हम खाना खा रहे थे तो मैंने दीदी से मज़े लेने का सोचा। क्यों न दीदी से उस बारे में पूछकर मज़े लिए जाएँ। देखते हैं दीदी क्या बोलती हैं।

मैं: दीदी एक बात पूछूँ?

मैंने एकदम आराम से बोला।

दीदी: हाँ पूछ।

मैं: आप के एक घंटे से अंदर क्या कर रही थीं?

दीदी ने ये सुनते ही गले में खाना अटक गया। दीदी खांसने लगीं। मैंने दीदी को पानी दिया और वापस से बोला।

मैं: दीदी बताओ तो।

दीदी मन में सोच रही थीं— क्या बताऊँ इसको क्या बताऊँ।

फिर दीदी बोलीं—

दीदी: अरे तेरे सामने ही तो मैं अंदर केला लेने गई थी।

मैं: हाँ दीदी मुझे पता है लेकिन एक घंटा थोड़ी लगता है। आप कौन सा केला ले रही थीं जो एक घंटा लग गया। आप उगा रही थीं क्या?

दीदी मन में— केला ही तो लेने गई थीं लेकिन कोई और सा ही केला मिल गया था। और हँसने लगीं।

मैं: दीदी क्यों हँस रही हो?

दीदी: अरे कुछ नहीं।

मैं: पता है जब आप नहीं आई थीं तो मैं आपको देखने आया था।

दीदी चौंककर—

दीदी: क्या तू मुझे देखने आया था? क्या देखा था तूने?

मैं: दीदी चौंक क्यों रही हो? क्या हो गया?

दीदी: अरे नहीं… क्या देखा था तूने?

मैं: आया था जब अब्दुल अंकल आपको देखने गए थे लेकिन वो भी नहीं आए तो मैं भी देखने आया था।

दीदी: अच्छा तो क्या देखा?

मैं: रूम के पास गया और जैसे ही डोर खोलने लगा तो गेट खुल नहीं रहा था। शायद बंद था अंदर।

दीदी: हाँ वो इसलिए बंद किया था कि कुत्ता न जाए।

मैं: अच्छा।

दीदी: अच्छा फिर क्या किया था तूने?

मैं: मैं जैसे गेट बजाने ही वाला था उससे पहले आपकी अंदर आवाज़ आने लगी।

दीदी वापस से चौंककर—

दीदी: क्या आवाज़ आ रही थी?

मैं: दीदी आप चिल्ला रही थीं कि दर्द हो रहा है अकरम जी… आआह्ह… ऐसे ऐसी आवाज़ आ रही थी।

दीदी मन में— लगता है इसने सब कुछ सुन लिया। क्या करूँ मैं अब क्या करूँ।

मैं: दीदी आप क्यों चिल्ला रही थीं?

मैं अंदर ही अंदर बहुत खुश था दीदी को परेशान देखकर।

दीदी सोचकर—

दीदी: अरे हाँ वो मेरे पैर में मोच आ गई थी तो अकरम जी ठीक कर रहे थे।

मैं: अच्छा इसलिए आप चिल्ला रही थीं अकरम जी आराम से… आराम से…

मैं अंदर ही अंदर हँस रहा था।

दीदी: चल बहुत बात कर ली जल्दी से खाना खा।

गुस्से में।

मैं: खा रहा हूँ गुस्सा क्यों हो रही हो?

दीदी: मैं कहाँ हो रही हूँ।

मैं: अच्छा ठीक है।

उसके बाद हमने खाना खा लिया। फिर हम टीवी देखने चले लगे।

थोड़ी देर बाद—

मैं: दीदी मैं सोने जा रहा हूँ नींद आ रही है।

दीदी: अच्छा ठीक है जा। मैं भी जा रही हूँ।

उसके बाद मैं जैसे ही अपने कमरे में गया वैसे ही बेड पर लेटते ही नींद आ गई क्योंकि आज मैंने बहुत बार हिला लिया था।

सुबह सात बजे उठा। दीदी उस समय सो रही थीं। मैंने सोचा दीदी इतनी देर तक आज कैसे सो रही हैं। मैंने फोन चेक किया तो देखा दीदी ने अकरम से चार बजे तक बात की है तभी दीदी अभी तक सो रही हैं।

उसके बाद मैं चैट पढ़ने लगा।

अकरम: बेगम खाली हो गई?

दीदी: हाँ अकरम जी।

अकरम: अच्छा बेगम जी क्या कर रही हो?

दीदी: टीवी देख रही थी।

अकरम: अच्छा घर जाने के बाद कुछ हुआ था?

दीदी: नहीं लेकिन राहुल पूछ रहा था कि हम अंदर क्या कर रहे थे।

अकरम: तुमने क्या बोला?

दीदी: उसको बोल दी कि केला लेने गई थी।

अकरम: तुमने तो अंदर कोई और सा ही केला लिया था।

हँसने वाला इमोजी।

दीदी: आप भी ना कहीं भी शुरू हो जाते हो। और तो अपने दोस्त के सामने ही मुझको नंगा कर दिया था।

अकरम: अरे तो तुम भी तो बड़े मज़े से उसका लंड चूस रही थी।

दीदी: पता नहीं मुझको क्या हो गया था।

अकरम: बेगम मैं तुमसे निकाह करना चाहता हूँ।

दीदी शरमाने वाला इमोजी भेज दीं।

दीदी: अकरम जी…

अकरम: बताओ ना बेगम कब तक तड़पाओगी?

दीदी: मैं कहाँ तड़पा रही हूँ। मैं तो ये सोच रही हूँ कि अगर किसी को पता चल गया तो मेरा क्या होगा। मेरी फैमिली की तो रेप्युटेशन चली जाएगी।

अकरम: बेगम किसी को पता भी चलेगा मैं हूँ ना।

दीदी: यही बोलकर अपने दोस्त के सामने मेरे साथ वो किया था।

अकरम हँसने वाला इमोजी।

अकरम: बताओ ना।

दीदी: अच्छा अकरम जी मैं सोचकर बताऊँगी।

अकरम: कब?

दीदी: कल तक बता दूँगी।

अकरम: अच्छा आज क्या पहना है?

दीदी: आपको क्या। आप तो मुझको नंगा ही देखना चाहते हो।

अकरम हँसने वाला इमोजी।

अकरम: निकाह तो हो जाने दो उसके बाद तुम्हें दिन-रात नंगा ही रखूँगा अपने झोपड़ी में।

दीदी हँसने वाला इमोजी।

अकरम: निकाह के बाद तो तुमको मेरे साथ ही रहना है।

दीदी: ना बाबा ना। मैं नहीं रहूँगी आपके साथ। आपने आज की तरह किया तो।

अकरम: क्या किया था मैंने?

दीदी: आपने तो आज मेरी जान निकाल दी थी। पता है कितना दर्द हो रहा था पीछे।

अकरम हँसने वाला इमोजी।

अकरम: तुम अभी उंगली से डर आई। अभी तो मेरा लंड लेना भी बाकी है उसमें।

दीदी: ना बाबा ना। मैं नहीं लूँगी पीछे आपका।

अकरम: क्यों नहीं लोगी?

दीदी: आपने देखा है आपका लंड कितना बड़ा है। कैसे जाएगा मेरे पीछे। मैं तो मर जाऊँगी।

अकरम: बेगम निकाह की पहली रात में तुम्हारी गाँड मारके ही सुहागरात मनाऊँगा।

दीदी: अच्छा जी आप सुहागरात तक सोच लिया। फिर भी मैं करने नहीं दूँगी।

अकरम: नहीं बेगम मुझको वही चाहिए।

दीदी: आगे कर लेना अकरम जी लेकिन पीछे नहीं।

अकरम: नहीं बेगम मुझे वही चाहिए।

दीदी: क्यों अकरम जी?

अकरम: तुम्हारी गाँड की खुशबू ने मुझे पागल कर रखा है।

दीदी शरमाने वाला इमोजी।

अकरम: निकाह के बाद तुम्हारी गाँड पर ही खाना खाऊँगा। प्लेट की जरूरत ही नहीं है।

दीदी हँसते हुए—

दीदी: अच्छा अकरम जी और मेरा क्या?

अकरम हँसते हुए—

अकरम: तुम मेरे लंड पर खा लेना। तुमको तो अपना माल ही खिलाऊँगा वो भी रोटी के साथ।

दीदी: छी अकरम जी कैसी बात करते हो।

अकरम: बेगम मेरा लंड खड़ा हो रहा है।

दीदी: अच्छा तो मैं क्या करूँ?

अकरम: बताओ तो क्या पहना है?

दीदी शरमाते हुए—

दीदी: वही जो आपने दिया था।

अकरम: अच्छा अपनी वीडियो बनाकर भेजो ना। मेरा लंड तुम्हें देखना चाहता है।

दीदी—

दीदी: अच्छा छोटू अकरम मुझे देखना चाहता है। फिर तो भेजना पड़ेगा।

फिर दीदी ने अकरम को अपनी वीडियो भेजी।

अकरम: क्या ही माल लग रही हो।

दीदी: अच्छा जी बेगम से माल।

अकरम: बेगम तू तो मेरी रंडी है, माल है, डार्लिंग है।

दीदी: अच्छा जी अब रंडी भी बना लिया।

अकरम: हाँ मेरी जान तू मेरी ही रंडी है।

दीदी: अच्छा जी मुझको रंडी बोलेंगे।

अकरम: अरे मेरी जान प्यार करता हूँ तुझसे।

दीदी: अच्छा जी।

फिर दोनों ऐसे ही बात करने लगे।

उसके बाद अकरम ने दीदी को बोला—

अकरम: बेगम सुन। तुमसे मेरे दोस्त बात करना चाहते हैं।

दीदी: मुझसे क्यों बात करना चाहते हैं?

अकरम: बेगम देखना चाहते हैं कि मेरी होने वाली बेगम कैसी है।

दीदी: आपने किस-किस को बता दिया। अभी तो मैंने निकाह के लिए हाँ भी नहीं करी।

अकरम: अरे बेगम मैंने उसको तुम्हारे बारे में बता दिया है।

दीदी: अच्छा।

अकरम: हाँ तो वो तुझे देखना चाहते हैं।

दीदी: नहीं अकरम जी मैं नहीं मिल सकती।

अकरम: अच्छा नहीं मिल सकती तो मैं एक काम करता हूँ। मैं एक ग्रुप बनाता हूँ जिसमें मेरे दोस्त भी होंगे और तुम भी।

दीदी: नहीं अकरम जी मुझको शर्म आएगी। पहले ही आपने अब्दुल जी के सामने क्या-क्या कर दिया है।

अकरम हँसते हुए—

अकरम: बेगम मान है ना।

दीदी: ठीक है। आप तो अपनी बात बनवाकर ही रहते हैं।

अकरम हँसने वाला इमोजी।

उसके पंद्रह मिनट बाद अकरम ने दीदी को एक ग्रुप में ऐड किया जिसका नाम था— नीतू बेगम।

जिसे देखकर दीदी ने अकरम को मैसेज किया—

दीदी: आपने मेरे नाम पर ग्रुप का नाम क्यों रखा?

अकरम: अरे मुझको कुछ समझ नहीं आ रहा था तो इसलिए रख दिया।

तब ग्रुप में मैसेज आया।

ग्रुप में कुल चार लोग थे— दीदी, अकरम, अब्दुल और सुल्तान।

जब मैंने सुल्तान अंकल की डीपी चेक की तो मैं शॉक हो गया क्योंकि सुल्तान अंकल तो मेरे दोस्त इम्राहिम के पापा हैं। मुझको नहीं पता था कि अकरम और मेरे दोस्त के पापा दोनों दोस्त हैं। लेकिन एक बात थी कि दीदी को नहीं पता था कि सुल्तान मेरे दोस्त के पापा हैं और ना ही सुल्तान को क्योंकि आज तक कभी मिले ही नहीं हैं।

लेकिन मैं फिर भी सोच रहा था अगर सुल्तान अंकल को पता चल गया कि अकरम की बेगम कोई और नहीं बल्कि मेरे बेटे के दोस्त राहुल की ही बहन है तो… मैं तो पागल सा हो रहा था। क्या करूँ। अगर ये बात कहीं बाहर फैल गई तो… मेरे दिमाग में यही बातें चल रही थीं कि तभी ग्रुप में मैसेज आए।

अकरम: बेगम तुम तो अब्दुल को तो जानती ही होगी।

दीदी: हाँ अकरम जी।

अब्दुल: भाभी जी नमस्ते।

दीदी: नमस्ते अब्दुल जी।

तब अकरम बोला—

अकरम: मैं तुमको अपने नए दोस्त से मिलवाता हूँ। ये हैं सुल्तान।

अकरम सुल्तान को बोलता है—

अकरम: बोल भाई सुल्तान।

सुल्तान: नमस्ते भाभी जी।

दीदी: नमस्ते सुल्तान जी।

सुल्तान: अकरम भाई जान बहुत बात करते थे आपकी।

हँसने वाला इमोजी।

उसके बाद अकरम बोला—

अकरम: बेगम येसी मार्केट के थोड़ी दूरी पर ही है मीट की शॉप।

दीदी: ओह अच्छा।

सुल्तान: आओ कभी भाभी जी हमारे शॉप पर। आपके दर्शन हो जाएँ।

दीदी शरमाते हुए—

दीदी: ओके सुल्तान जी कभी आऊँगी।

सुल्तान: जरूर आना भाभी जी।

उसके बाद ग्रुप में कुछ बात नहीं हुई।

दीदी ने अकरम को पर्सनल में मैसेज किया—

दीदी: अच्छा मैं सोने जा रही हूँ।

अकरम: अच्छा भेज जा। गुड नाइट।

दीदी: गुड नाइट अकरम जी।

उसके बाद मैं नहाने चला गया और जब मैं नहाकर बाहर गया तो दीदी उठ चुकी थीं और नाश्ता रेडी कर रही थीं।

दीदी ने आज कुछ अलग ही साड़ी पहनी थी जिसमें दीदी और दिनों से कुछ ज्यादा ही अलग लग रही थीं। दीदी ने आज एक पिंक कलर नेट की साड़ी पहनी थी और दीदी ने आज ब्लाउज नहीं पहना था। खाली ब्रा पहनी थी।

मुझको नहीं पता था कि ये ब्लाउज है कि ब्रा क्योंकि मैंने आज तक ऐसा कुछ भी नहीं देखा था। मुझको तो वो एक ब्रा ही लग रही थी।

छोड़ो कुछ भी हो लेकिन पता नहीं दीदी ने अकरम पर जो जादू किया था जो दीदी पूरी तरह से बदल गई थीं। दीदी अब जैसे पहले रहा करती थीं सीधी-सादी अब वैसे नहीं रहतीं। दीदी अब एक देसी रंडी की तरह बन गई थीं।

उसके बाद कुछ देर बाद दीदी ने नाश्ता लगा दिया और मैं और दीदी ने नाश्ता करने लगे। जब मैं नाश्ता कर रहा था तो मेरी नज़र दीदी पर गई। दीदी ने आज जो ब्रा या ब्लाउज पहनी थी उसमें दीदी की क्लीवेज इतनी दिख रही थी पूछो ही मत। साथ में दीदी के निप्पल का पूरा शेप पता चल रहा था। शायद आज दीदी ने उसके अंदर कुछ नहीं पहना था। और साथ में दीदी की नेट वाली साड़ी जिसमें दीदी का हल्का-हल्का पेटीकोट भी दिख रहा था। जैसे कपड़े दीदी ने पहने थे वैसे कपड़े कोई अच्छे घर की लड़की नहीं पहनती। वैसे तो खाली कोई रंडी ही पहनती है।

मेरे दिमाग में यही सब चल रहा था और मेरे पैंट में मेरा लंड दीदी को देखकर खड़ा हुआ जा रहा था और मुझको एक अलग सी ही फीलिंग आ रही थी जो मैं बता नहीं सकता।

हम नाश्ता करने लगे। मैं एक हाथ से नाश्ता कर रहा था तो मेरा दूसरा हाथ मेरे लंड पर था जो कि मैं उसको बैठाने का ट्राई कर रहा था लेकिन बैठ ही नहीं रहा था। और बैठेगा भी क्यों जब सामने एक ये रंडी जैसी लड़की होगी और वो भी खुद ही बहन तो लंड क्यों ही बैठेगा।

मैं नाश्ता कर ही रहा था तभी दीदी बोलीं—

दीदी: राहुल सुन।

मैं: हाँ बोलो दीदी।

दीदी: तेरे को आज मामा के घर जाना है। मम्मी ने फोन करके बोला था।

मैं: लेकिन क्यों? क्या हो गया?

दीदी: अरे उसके घर में कोई प्रोग्राम है तो दस बजे का है तो तू चला जाइयो।

मैं: अच्छा दीदी तो आप भी चलना ना।

दीदी: नहीं मेरा मन नहीं है। अगर मैं चली गई तो मामी मुझको अपने घर ही रोक लेंगी। इसलिए तू ही चला जा।

मैं: ठीक है। अच्छा दीदी कब तक का प्रोग्राम है?

दीदी: दस बजे का है और शायद शाम के सात बजे तक का है।

मैं: अच्छा दीदी चला जाऊँगा।

उसके बाद मैं रेडी होने चला गया और दस बजे मैं मामा के घर पहुँच गया। मामा का घर हमारे घर से तीस मिनट की दूरी पर ही है अगर ट्रैफिक न मिले तो।

मैं उसके घर पहुँचा तो देखा इधर तो जागरण है तो उसकी तैयारी चल रही थी। मैं अपने मामा-मामी से मिला। कुछ बात की। उसके बाद जागरण की तैयारी में उनकी मदद करने लग गया और मुझको समय का पता भी नहीं चला। जब मैंने समय देखा तो एक बज रहे थे। मैंने काम करते समय अपना फोन भी चेक नहीं किया था। मेरा फोन साइलेंट था।

जब मैं फ्री हुआ तो मैंने देखा कि अकरम और दीदी की बहुत बातें हुई हैं और साथ में अकरम की कुछ कॉल भी आई हैं।

अकरम: बेगम कहाँ? क्या कर रही हो?

दीदी: कुछ नहीं अकरम जी टीवी देख रही हूँ।

अकरम: अच्छा तुम्हारी बड़ी याद आ रही है।

दीदी: मुझे पता है आपको क्यों मेरी याद आ रही है।

अकरम हँसने वाला इमोजी भेज दिया।

अकरम: बता तो बेगम आज आ रही हो मार्केट?

दीदी: नहीं अकरम जी।

अकरम: अच्छा बेगम घर पर कोई है क्या?

दीदी: नहीं अकरम जी मैं अकेली हूँ। राहुल मामा के घर गया है।

अकरम: तो बेगम तुमने मुझको बताया क्यों नहीं। मैं आ रहा हूँ तुम्हारे घर।

दीदी: नहीं अकरम जी घर मत आइए। कोई पड़ोसी देख लेगा तो तमाशा हो जाएगा।

अकरम: देख लेने दो। मैं आ रहा हूँ।

उसके दस मिनट बाद अकरम की दीदी को एक कॉल आई थी जो कि मुझको नहीं पता उसकी क्या बात हुई थी लेकिन उसकी कॉल एक मिनट की भी नहीं थी। मतलब अकरम दीदी को घर का गेट खोलने के लिए कॉल किया होगा। मतलब अकरम दीदी के साथ कुछ करने वाला है। मैं सोचने लगा यार अब इधर से कैसे निकलूँ। मैं मिस नहीं कर सकता दीदी और अकरम क्या करने वाले हैं।

मैं मामा के पास गया और उनको बहाना बनाया—

मैं: मामा जी मेरा दोस्त है ना…

मामा: बोल बेटा क्या हुआ?

मैं: मामा जी मेरे दोस्त का एक्सीडेंट हो गया है। मुझको देखने जाना होगा।

मामा: अरे बहाने मत बना।

मैं: बहाने नहीं कर रहा।

मामा मुस्कुराकर—

मामा: मैं समझ रहा हूँ। तेरी उम्र में मैंने भी बड़े बहाने किए हैं। जीएफ से मिलने जा रहा है ना?

मैं मन में— अरे मामा को क्या पता मेरी जीएफ है कि नहीं। हाँ बोलकर निकलने की कोशिश करता हूँ।

मामा: कहाँ खो गया?

मैं: हाँ मामा।

मामा: बेटा मुझको पता था। चल कोई ना तू जा। मैं देख लूँगा।

मैं: थैंक यू मामा जी।

मामा: अच्छा ठीक है।

उसके बाद मैं मामा के घर से निकला और ऑटो किया। मुझको तीस मिनट हो गए। घर दस मिनट की दूरी पर ही था। मैं ऑटो से उतरकर पैदल आ रहा था तो मैंने दीदी को कॉल लगाने की सोची। देखते हैं दीदी क्या बोलती हैं।

मैंने दीदी को कॉल किया। दीदी ने कॉल बहुत देर बाद पिक अप की।

मैं: हेलो दीदी।

दीदी: हाँ… राहुल…

मुझको पीछे से अकरम की हँसी की आवाज़ आई।

मैं: दीदी क्या कर रही हो?

दीदी: कुछ नहीं…

मुझको वापस से दीदी की अजीब सी आवाज़ आई। शायद दीदी कुछ तो कर रही हैं तभी दीदी की अजीब सी आवाज़ आ रही है।

तभी मैंने देखा कि जो कल अकरम ने ग्रुप बनाया था उस पर अकरम कॉल कर रहा है तो मैंने दीदी को बोला—

मैं: एक मिनट दीदी।

मैंने दीदी को म्यूट किया और अकरम की ग्रुप कॉल पिक अप की। उधर से अकरम कुछ बोलने लगा और बाकी सुन रहे थे।

अकरम: भाई लोग मैं तुमको एक चीज दिखाता हूँ। तुम देखकर पागल हो जाओगे।

अब्दुल: क्या भाई?

सुल्तान: क्या दिखा रहा है अकरम?

रुको मैं वीडियो कॉल करता हूँ। मैं घर पहुँचने ही वाला था।

मैंने वेट किया लेकिन एक मिनट में अकरम का कॉल नहीं आया तो मैंने दीदी का कॉल म्यूट से हटाकर बोला—

मैं: हाँ दीदी क्या कर रही हो?

दीदी: अरे कुछ नहीं कर रही।

उसी वक्त अकरम का कॉल आया ग्रुप में वीडियो कॉल। तो मैंने दीदी का वापस म्यूट किया और अकरम का कॉल उठाया तो मैंने जो देखा मुझे उस पर विश्वास नहीं हुआ। मैं तो सुन सा हो गया। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि दीदी ऐसा कर सकती हैं।

दीदी ऊपर से नीचे तक पूरी नंगी थीं और फर्श पर बैठी थीं। और अकरम ने पैंट नहीं पहनी थी और बेड पर बैठा था। और दीदी अकरम का लंड चूस रही थीं। चौंकने की ये बात नहीं है बल्कि ये कि जो दीदी अकरम का लंड चूस रही थीं उस पर दीदी का मंगलसूत्र लपेटा हुआ था और दीदी उसको एक रंडी की स्माइल के साथ चूसी जा रही थीं। और साथ में दीदी कॉल पर थीं और वो कॉल मेरी ही थी।

मैं मन में सोचा यार दीदी तो पूरी बदल गई हैं। अब दीदी संस्कारी नहीं रहीं। रंडी बन गई हैं।

उसके बाद अकरम की आवाज़ आने लगी। अकरम बोला—

अकरम: देखो दोस्तों कैसे मेरी जान कैसे मेरा लंड चूस रही है। और वही जब उसका भाई का कॉल आया है देखो।

उधर से सबकी हँसी की आवाज़ आने लगी। मैं ये देख ही रहा था कि दीदी बोलीं—

दीदी: क्या कर रहे हो अकरम जी? क्या दिखा रहे हो?

अकरम: बेगम तुमको दिखा रहा हूँ अपने दोस्तों को।

दीदी: हटो बदमाश। ये कोई दिखाने की चीज है?

अकरम: बेगम तू चीज ही ऐसी है। तुझे देखकर इन सबकी जलेगी।

जिसे देखकर दीदी रंडी की तरह हँसने लगीं।

उधर कॉल पर अब्दुल ने और साथ में मेरे दोस्त का पापा उसने अपना लंड निकाल लिया और हिलाने लगा और बोले—

सुल्तान: अरे भाभी जी आप तो कमाल की हो।

अब्दुल: भाई कमाल नहीं है माल है। क्या ही चूसती है भाभी।

सुल्तान: तुझे ज्यादा पता है क्या चूसती है?

अब्दुल हँसते हुए—

अब्दुल: भाई भाभी जी ने मेरा भी चूस रखा है।

सुल्तान: अकरम भाई क्या बात रहा है अब्दुल?

अकरम: हाँ भाई सही बोल रहा है।

सुल्तान: भाई फिर मेरा नंबर कब है?

अकरम: बेगम ये कुछ बोल रहा है।

दीदी उस समय अकरम का लंड इतने मज़े से चूस रही थीं कि दीदी को कुछ चीज की पड़ी ही नहीं। दीदी ऐसे चूस रही थीं जैसे लंड खा ही जाएँगी।

सुल्तान: भाभी जी हमें भी कभी मौका दे दो।

दीदी सुनकर—

दीदी: किस चीज की?

सुल्तान: वही जो आपने अब्दुल को दिया है।

दीदी खिलखिलाकर रंडी की तरह हँसने लगीं।

तो अकरम बोला—

अकरम: चलो बहुत देख लिया। मैं कॉल रखता हूँ। आज तो बेगम की बहुत मारनी है।

और हँसने लगा। उधर सब हँसने लगे साथ में दीदी भी।

अब्दुल: भाई कॉल क्यों काट रहा है। हमें भी तो दिखा कैसे कर रहा है।

अकरम—

अकरम: अरे जा अपना काम कर साले।

और हँसने लगा और कॉल काट दी।

उधर मैं भी अपने घर पहुँच गया और खिड़की से देखने लगा।

उधर मेरा तो बहुत बुरा हाल था। दीदी को मैंने ऐसी हरकत करते हुए नहीं देखा था। दीदी अब पक्की एक रंडी बन गई थीं।

मैं अंदर देखने लगा साथ में अपना लंड निकाल लिया। मैंने भी सोच लिया जो करना है साली रंडी को करने दो। मैं भी मज़े लेता हूँ।

और मैं अंदर देखने लगा।

दीदी: अकरम जी आप भी ना। अपने सारे दोस्तों को मेरे को ये करते हुए दिखा दिया।

अकरम: तो क्या हो गया नीतू मेरी जान?

दीदी: आप ना बहुत गंदे हो।

अकरम ने दीदी के बूब्स पकड़े और तेज से दबा दिए और हँसते हुए बोला—

अकरम: अच्छा मैं गंदा हूँ? बोल मैं गंदा हूँ।

दीदी: आआह्ह्ह… अकरम जी नहीं आप गंदे नहीं हैं।

अकरम हँसने लगा।

अकरम: चल आ जा मेरी जान। लेट जा बेड पर। आज तुझे अच्छे से रगड़ता हूँ।

दीदी शरमाने लगीं।

अकरम: आ जा लेट जा।

फिर दीदी उठकर बेड पर गईं और जाकर पीठ के बल लेट गईं। मैं ये सब बाहर खड़ा होकर देख रहा था। आज लगता है आज अकरम दीदी की चूत फाड़कर रख देगा।

दीदी लेट गईं। अकरम दीदी के पास गया और बोला—

अकरम: चल मेरी बेगम अपनी टाँग खोल।

दीदी: मुझे शर्म आ रही है।

अकरम: अच्छा लंड चूसते हुए नहीं आ रही है?

दीदी: आप भी ना।

अकरम: चल खोल ना बेगम।

फिर दीदी ने अपनी टाँगें खोलीं और अकरम दीदी की चूत देखते रह गया। उधर मैं भी दीदी की चूत देखकर पागल हो गया।

दीदी की चूत एकदम गुलाबी। ऊपर से दीदी की चूत पर एक भी बाल नहीं था। दीदी की चूत पूरी क्लीन थी।

अकरम: अरे बेगम क्या ही चूत है तुम्हारी।

दीदी शर्मा गईं और अपने हाथ से दीदी ने चूत ढक ली।

अकरम: बेगम हटा हाथ।

दीदी: नहीं अकरम जी शर्म आ रही है।

अकरम फिर दीदी के पैरों के बीच में जाकर बैठा और दीदी के हाथ हटा दिए। और दीदी की चूत पर अपना हाथ रखा और फेरने लगा। उधर दीदी ने अपनी आँखें बंद कर ली थीं।

फिर अकरम ने दीदी की चूत पर अपना मुँह रख दिया और दीदी की चूत पर जीभ फेरने लगा।

दीदी को तो जैसे जान ही निकल गई। दीदी की आज से पहले किसी ने भी चूत नहीं चाटी थी। दीदी पागल सी हो गईं और बोलीं—

दीदी: आआह्ह्ह… म्ह्ह… आआह्ह…

अकरम: बेगम अच्छा लग रहा है ना?

दीदी: हाँ अकरम जी अच्छ्छ्छाआआआ लग्ग्ग रहा है।

अकरम फिर दीदी की चूत को अच्छे से चाटने लगा। दीदी की हालत खराब होने लगी। दीदी ने अकरम का सर सहलाने लगीं और आआह्ह्ह… आआआ… अम्म्म्म आवाज़ निकालने लगीं।

ऐसे ही दस मिनट तक अकरम ने दीदी की चूत चाटी। उसके बाद अकरम दीदी के पास जाकर बैठ गया और बोला—

अकरम: तैयार हो ना।

दीदी शरमाने लगीं।

अकरम ने फिर दीदी की चूत पर लंड रखा। दीदी की हालत खराब होने लगी।

दीदी: अकरम जी धीरे से करना। आपका इतना मोटा है मैं मर जाऊँगी।

अकरम: बेगम आराम से ही करूँगा। थोड़ा दर्द तो होगा ही।

अकरम ने दीदी की चूत पर अपना लंड रखा और डालने की कोशिश करने लगा।

दीदी: आआह्ह… अकरम जी दर्द हो रहा है… आआआह्ह्ह…

अकरम: बेगम तेरी चूत तो बहुत टाइट है।

अकरम फिर बेड से उठा और तेल लेकर आया सरसों का और अपने लंड पर लगाया। और बोला—

अकरम: अब बेगम देखो अब दर्द नहीं होगा।

दीदी: ठीक है अकरम जी।

अकरम ने फिर दीदी की चूत पर लंड रखा और लंड के टोपे को चूत में घुसाने लगा और अंदर घुस गया।

दीदी: आआह्ह… अकरम जी दर्द हो रहा है प्लीज निकाल लीजिए।

अकरम: बेगम थोड़ा दर्द सह लो मेरे लिए।

दीदी की चूत अभी भी इतनी टाइट थी जैसे कोई कुँवारी लड़की है।

अकरम ने फिर एक तेज का धक्का मारा और अकरम का लंड पाँच इंच दीदी के चूत में चीरता हुआ अंदर घुस गया और उधर दीदी की एक तेज की आवाज़ निकली—

दीदी: आआआह्ह्ह्ह्ह्ह… मम्मीईईईईईईईई… आआआह्ह्ह्ह्ह… दर्दддड होओओ रहा आआआ है… आआआईईईईईईई… आआअम्म्…

दीदी: आआअकरम म्म्म्म्म जी निकाल्ल्ल्ल्ल्लीजिएएएएएए…

अकरम फिर रुक गया और दीदी को बोला—

अकरम: बेगम थोड़ा सा और रह रहा है।

दीदी: नहीं अकरम जी मैं अब और नहीं सह सकती। प्लीज अकरम जी।

अकरम: बेगम थोड़ा सा रह रहा है।

दीदी: प्लीज अकरम जी।

फिर अकरम ने बोला ठीक है और उतना ही लंड अंदर डालकर बाहर करने लगा और दीदी आवाजें निकालने लगीं—

दीदी: आआह्ह्ह… आआह्ह्ह्ह… आआआआआह्ह्ह…

पाँच मिनट तक अकरम दीदी को पाँच इंच लंड से ही चोदने लगा।

मैं ये बाहर देखकर लंड हिला-हिलाकर पागल हो गया था। मेरा तो एक बार झड़ भी गया था।

अब दीदी भी नॉर्मल हो गई थीं और दीदी भी थोड़ा मजा ले रही थीं। और जैसे ही दीदी मजे ले रही थीं अकरम ने अपना लंड बाहर निकाला और एक इतनी तेज धक्का दिया कि अकरम का लंड दीदी की चूत को चीरता हुआ दीदी के बच्चेदानी में टकरा गया और दीदी की चीख भी निकल गई—

दीदी: आआआ… अकरम जीईईईईईईई… आआआह्ह्ह्ह्ह… आआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह…

अकरम: बेगम हो गया हो गया बेगम।

दीदी की चूत में अकरम का पूरा दस इंच का लंड चला गया था और अकरम थोड़ा सा दीदी को नॉर्मल होने के लिए दीदी के बूब्स को दबाने लगा और दीदी के होठों को चूमने लगा और पाँच मिनट तक यही किया।

जब दीदी नॉर्मल हो गईं तो अकरम दीदी की चूत के धक्के देने लगा। पहले तो अकरम धीरे-धीरे धक्के दे रहा था और दीदी ने तकिए को दोनों हाथों से पकड़ लिया और दीदी बोलीं—

दीदी: अकरम जी आराम से।

अकरम: बेगम आराम से कर रहा हूँ।

अकरम: बेगम तुम्हारी चूत कितनी गरम है। एकदम गरम भट्टी की तरह।

दीदी इस बात पर मुस्कुरा दीं।

अकरम: मेरी जान तूने मुझको कितना तड़पाया था। अब जाकर तेरी चूत मिली है। आज तो तेरी चूत ही फाड़ दूँगा मेरी जान।

दीदी भी धीरे-धीरे नॉर्मल हो गई थीं और एकदम गरम भी।

अब अकरम भी दीदी की चूत में तेज-तेज धक्के मारने लगा।

दीदी को अब भी दर्द हो रहा था। उनके आँसू आ गए थे। अकरम अब धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाने लगे। अब थोड़ी दीदी भी चिल्लाना छोड़कर मोन करने लगी थीं।

अकरम: बेगम तेरी चूत कितना कसा हुआ है। लगता है तेरा हसबैंड ज्यादा चुदाई नहीं करता है।

आआआह्ह्ह्ह्ह… आआह्ह्ह्ह्ह… करके अकरम अपना लंड चूत में अंदर-बाहर कर रहे थे।

अब दीदी को भी थोड़ा-थोड़ा मजा आने लगा था। उनका दर्द अब बहुत कम हो गया था।

दीदी: उउउउम्म्म्म… आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह…

अकरम ने देखा कि दीदी अब मजे ले रही हैं तो अब वो अपनी स्पीड बढ़ा रहे थे। अब दीदी और ज्यादा मोन कर रही थीं।

दीदी: आआआआव्ह्ह्ह्ह्ह्ह… आआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह… अकरम जीईई… आआआआह्ह्ह्ह… आआआआह्ह्ह्ह… उउउम्म्म्म्म…

अकरम भी अब पूरे जोश में दीदी को चोद रहे थे।

अकरम: आआआह्ह्ह्ह… बेगम आआआह्ह्ह्ह… बहुत मजा आ रहा है… आप बहुत हॉट हो तू… आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह… मेरी रंड… मैं तुझे ऐसे ही हमेशा चोदना चाहता हूँ।

दीदी भी अब फुल मजे में थीं। वो भी अब खुलकर मोन कर रही थीं।

दीदी: आआआह्ह्ह्ह… आआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह… अकरम जी… आआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह… बहुत अच्छा लग रहा है… आआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह… आआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह…

अकरम चुदाई के साथ दीदी को किस भी कर रहे थे। दोनों एक-दूसरे से ऐसे लिपटे थे जैसे अलग न होंगे। अकरम अब दीदी को फुल मजा दे रहे थे और अकरम भी फुल मजे में थे।

अकरम दीदी के ऊपर लेटे-लेटे ही चुदाई कर रहा था। अब ऐसे चुदाई करते हुए पंद्रह मिनट से ज्यादा समय हो गया था पर न दीदी और अकरम थकने का नाम ले रहे थे। दोनों फुल मजे में चुदाई कर रहे थे। अकरम को मस्त माल मिल गया था और दीदी को मस्त चुदाई करने वाला।

इसी पोजीशन में अकरम दीदी की जबरदस्त चुदाई करने लगे। अब दीदी झड़ने वाली थीं।

दीदी: आआआआआआआह्ह्ह्ह्ह… आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह… अकरम जी और जोर से करो… आआआआह्ह्ह्ह… आआआआआह्ह्ह्ह… और जोर से…

फिर थोड़ी देर बाद दीदी शांत हो गईं।

अकरम जान गए कि दीदी झड़ गई हैं। पर उन्होंने अपना लंड निकाला और वो भी लेट गए। उनका अभी तक पानी नहीं निकला था। फिर थोड़ी देर बाद अकरम दीदी के चूत के पास आ गए और दीदी के रस भरे चूत को चाटने लगे। दीदी फिर उत्तेजित होने लगीं और कुछ ही देर में दीदी मोन करने लगीं। दीदी और अकरम का ये पहला चुदाई था इसलिए अकरम दीदी को पूरी तरह से संतुष्ट करना चाहते थे।

अब अकरम समझ गए कि दीदी फिर से रेडी हैं तो उन्होंने फिर से लंड को दीदी के चूत पर सेट किया और एक झटका मारा। इस बार ज्यादा परेशानी के बिना लंड चूत में चला गया।

दीदी अब खुलकर मोन कर रही थीं।

दीदी: आआआह्ह्ह्ह… बहुत मजा आ रहा है अकरम जी… आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह… ऐसे ही करते रहिए… राहुल के जीजा ने तो कभी इतना देर मेरी चुदाई नहीं की… आआआआआह्ह्ह्ह्ह… आप तो इतने अच्छे से और इतने देर करते हो… आआआआआह्ह्ह्ह्ह… और जोर से करिए… आआआह्ह्ह…

अकरम: कोई बात नहीं बेगम। अब मैं तेरी ऐसे ही मजे से चुदाई करूँगा… तेरी प्यास अब मैं बुझाऊँगा… आआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह… तू मुझसे निकाह करेगी ना बेगम?

दीदी पूरे जोश में बोल रही थीं—

दीदी: हाँ अकरम जी ऐसे ही जोर से चोदो मुझे… इतना मजा तो कभी नहीं आया जितना मजा आज आप दे रहे हैं… हाँ मैं आपसे निकाह करूँगी… आआआआआआह्ह्ह्ह… आआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह… और जोर से करो… आआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह… अब तो मैं आपसे ही चुदूँगी… रोज चोदना मुझसे… मेरी प्यास मिटा देना… आआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह… आआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह… उउउउउम्म्म… आआआआआआह्ह्ह… और जोर से… आआआआआआह्ह्ह्ह… मैं तो गई…

कहकर दीदी झड़ गईं। फिर भी अकरम नहीं रुके और पूरे जोश से चोदने लगे।

दीदी चुदाई के नशे में डूब गई थीं। पूरे कमरे में चुदाई की आवाजें आ रही थीं और आवाजें बाहर तक भी आ रही थीं।

अकरम: हाँ मेरी बेगम। निकाह के बाद मैं तुमको ऐसे ही रोज चोदूँगा… आआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह… अब अपने हसबैंड के साथ करने और उससे चुदने की जरूरत नहीं है… मैं तेरी रोज ऐसे ही चुदाई करूँगा… आआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह… ये मेरी बेगम…

कहकर अकरम और जोर-जोर धक्के लगाने लगे और दीदी भी फुल रिस्पॉन्स देने लगीं अपनी गाँड उठा-उठाकर चुदवाने लगीं।

अंदर का नजारा देखकर मेरे लंड पूरे तन गए थे। मैं अपने लंड को पैंट से बाहर निकालके सहला रहा था।

अंदर का नजारा ऐसा था कि दो प्रेमी जोड़े बहुत दिनों बाद मिले हों और जबरदस्त चुदाई कर रहे हों। वो चुदाई में इतना खो गए थे।

अकरम: आआआआआह्ह्ह्ह्ह… और जोर से करिए… आआआह्ह्ह… आआआह्ह्ह्ह्ह्ह… उम्म्म्म…

अकरम जोर-जोर से चोदने लगे। दीदी भी खुलके जोर-जोर से मोन करने लगीं। फिर चालीस मिनट की चुदाई के बाद अकरम भी अब बहुत तेज चोदने लगे और दीदी भी बहुत मोन करने लगीं। फिर थोड़ी देर बाद दीदी का पानी फिर से निकलने लगा।

दीदी: आआआह्ह्ह्ह्ह… आआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह…

करने लगीं और पानी निकल गया। अब अकरम का भी निकलने वाला था। उन्होंने अपनी रफ्तार से चोदते रहे। दीदी झड़कर शांत हो गई थीं पर अंकल रुके नहीं और कुछ देर में वो भी दीदी के चूत में अपना वीर्य गिरा दिया और जब तक पूरा वीर्य न गिरा अंकल दीदी को चोदते रहे। फिर निढाल होकर दीदी के ऊपर लेट गए। दीदी ने भी उनको अपनी बाहों में समेट लिया।

चुदाई के बाद दोनों ऐसे ही लिपटे रहे और अब भी अकरम का लंड दीदी के चूत में था। अकरम दीदी को किस कर रहे थे और दीदी भी अकरम को किस कर रही थीं। फिर कुछ देर ऐसे ही रहने के बाद जब दोनों थक गए थे और दोनों लेटे ही रहे।

दीदी की चूत में अब भी अकरम का लंड था और दीदी के चूत से अकरम का गाढ़ा पानी निकल रहा था। उसके बाद दोनों बेड पर ही थककर सो गए। मैं भी वेट कर रहा था कि और कुछ होगा क्या लेकिन तीस मिनट तक कुछ नहीं हुआ। ढाई बज गए थे और वो दोनों लेटे रहे तो मैं अपने दोस्त के घर जाने का सोचा क्योंकि मैं अपने घर तो जा नहीं सकता था तो मैं अपने दोस्त के घर चला गया और वापस पाँच बजे आया।

अकरम और दीदी की चुदाई हो गई थी और अकरम ने दीदी की चूत में अपना पानी छोड़ दिया था। दीदी अकरम के पीछे इतना पागल हो गई थीं वो भूल भी गईं कि अकरम बिना कंडोम के दीदी को चोद रहा था।

अकरम और दीदी की चुदाई के बाद अकरम ने दीदी की चूत में पानी छोड़कर चूत में लंड अटकाकर ही दीदी के ऊपर लेट गया और मैं बाहर ये सब खिड़की से देखकर लंड हिला रहा था। मेरा दो बार पानी निकल गया था। मैंने थोड़ा वेट किया कि अकरम दीदी के साथ कुछ और करता है कि नहीं या अकरम अपने घर जाता है कि नहीं लेकिन ना ही अकरम घर गया और ना ही अकरम ने दीदी के साथ कुछ किया तो मैं बाहर खड़ा होकर थक गया था तो मैं अपने दोस्त के घर चला गया था ये सोचकर कि अब दोनों के बीच कुछ नहीं होने वाला।

अब आगे…

मैं अपने दोस्त के घर गया हुआ था और उधर से मैं वापस घर पाँच बजे निकल गया क्योंकि मुझे लगा कि अकरम अपने घर चला गया होगा। अब घर चलते हैं क्योंकि हिलाने के बाद थकान हो जाती है तो घर जाकर आराम करना चाहता था।

तो अपने घर की तरफ निकल गया और मैं अपने घर पहुँच गया तो मैंने सोचा कि क्यों न एक बार दीदी का रूम चेक कर लिया जाए कि दीदी अकेली हैं या अकरम अभी भी है। तो मैं दीदी के रूम की तरफ गया और मैंने अंदर देखा और मैंने देखा कि दीदी अपने कमरे में… नहीं हैं। तो मुझको अब कन्फर्म हो गया था कि अकरम अपने घर चला गया है।

तो मैं वापस से मैंने डोर की तरफ गया और मैंने जब मैंने गेट चेक किया तो गेट तो ओपन ही था। लॉक था ही नहीं।

मैंने सोचा दीदी कितनी केयरलेस हो गई हैं। गेट बंद भी नहीं किया। कब कौन चोर आकर चोरी कर ले। मेरे दिमाग में यही चल रहा था कि मैंने गेट ओपन किया और अंदर घुस गया।

और मैं अंदर घुस गया था। मैंने जो देखा चौंक गया। उसे देखकर तो बुरा हाल था। आँखें खुली की खुली रह गई थीं। सीन ही ऐसा था। मैं जैसे ही घर में घुसा तो दीदी सामने सोफे पर पूरी नंगी थीं और डॉगी स्टाइल में थीं और दीदी का फेस मेरी तरफ था लेकिन दीदी की आँखें बंद थीं और अकरम ने दीदी की चूत में लंड डाल रखा था और दीदी को चोद रहा था। अकरम का एक हाथ दीदी की कमर पर था और दूसरा हाथ से दीदी की गाँड पर हाथ फेरके दीदी के पीछे से धक्का दे रहा था।

जैसे ही गेट खुला तो गेट खुलने की आवाज़ आई जिससे दीदी की आँख जो बंद थीं वो खुल गईं और अकरम की नज़र भी गेट की तरफ गई।

सीन कुछ ऐसा था कि मैंने दीदी को लाइव अकरम से चुदते हुए पकड़ लिया था। मैंने ये जानबूझकर नहीं किया था। मुझे क्या पता था कि दीदी इतनी केयरलेस हो सकती हैं और हॉल में चुदाई करवा सकती हैं।

जैसे ही दीदी ने मुझको देखा अब मैं भी नाटक करने लगा कि मैं भी दीदी को पहली बार देख रहा हूँ चुदते हुए।

मैं: (चौंकते हुए) दीदी ये आप क्या कर रही हो?

दीदी: (घबराहट से) राहुलllll… तू… तू… इधर…

फिर दीदी जल्दी से उठीं और जल्दी से दीदी ने एक कपड़ा लिया और अपने ऊपर डालने लगीं। लेकिन मैंने तो दीदी को देख लिया था पूरा नंगा।

और अकरम को तो जैसे कोई फर्क भी नहीं पड़ा। साला मुझको देखकर हँसने लगा। मादरचोद।

जब उसने देखा दीदी अपने आपको ढक रही हैं तो साला भड़वा अपनी धोती लपेटने लगा।

दीदी को समझ नहीं आ रहा था कि अब दीदी क्या करें। दीदी के मन में तो बस यही चल रहा था कि अब मेरा क्या होगा। अब मैं मुँह दिखाने लायक नहीं रही। अगर राहुल ने मम्मी और पापा को बता दिया तो क्या होगा। दीदी के दिमाग में यही सब चल रहा था तो मैं बोला—

मैं: दीदी बोलो क्या कर रही थीं आप ये सब वो भी इस मोची के साथ?

दीदी अब डर के मारे रोने लगीं और रोते-रोते मेरे पास आईं।

दीदी: राहुल… प्लीज मुझे माफ कर दे राहुल।

मैं: दीदी मुझे आप पर विश्वास नहीं हो रहा कि आप ऐसी…

दीदी: राहुल प्लीज माफ कर दे। प्लीज मम्मी-पापा को मत बताइए इसके बारे में। प्लीज राहुल।

और दीदी बहुत रोने लगीं। अब दीदी को देखकर मुझको भी बुरा लगने लगा तो पहले मैं दीदी को चुप करने की कोशिश करने लगा।

मैं: दीदी चुप हो जाओ। नहीं बताऊँगा मैं किसी को। पहले चुप तो हो जाओ।

फिर अकरम दीदी के पास आया और वो भी चुप करने लगा। फिर थोड़ी देर बाद थोड़ी नॉर्मल हुईं तो मैं बोला—

मैं: अंकल तू इधर क्या कर रहा है मेरे घर पर भोसड़ीके बूढ़े?

दीदी: राहुल प्लीज इनको कुछ मत बोल।

मैं: क्यों दीदी? साले बूढ़े की हिम्मत कैसे हुई?

अकरम: बेटा मैं तेरी बहन से प्यार करता हूँ।

उसने सीधा ये बोल दिया।

मैं: दीदी क्या बोल रहा है ये?

दीदी: हाँ राहुल अकरम जी सही बोल रहे हैं। मैं भी अकरम जी से प्यार करने लगी हूँ।

मैं: दीदी आप भी?

दीदी: प्लीज राहुल किसी को मत बताइयो।

मैं: ठीक है दीदी किसी को नहीं बताऊँगा लेकिन ये आपका कब से चल रहा है…

तब अकरम हँसते-हँसते लगा तेज-तेज कि मुझे समझ नहीं आ रहा था साला बूढ़ा हँस क्यों रहा है। जिसे देखकर दीदी बोलीं—

दीदी: अकरम जी आप पागल हो गए हो क्या?

अकरम: बेगम देखो तो अपने भाई को कैसे भोला बन रहा है जैसे इसको कुछ पता ही नहीं है।

मैं: क्या क्या नहीं पता मुझको?

दीदी: क्या बोल रहे हो अकरम जी आप?

थोड़ा दुखी होकर।

अकरम: बेगम तेरे भाई को तो ये कब का पता था कि तू मेरे साथ सोती है।

दीदी एकदम से चौंकते हुए—

दीदी: क्या…… क्या बोल रहे हो आप?

अकरम: बेगम पूछो अपने भाई से।

दीदी: (दीदी को चौंकते हुए) क्या…… बोल सही बोल रहे हैं क्या अकरम जी?

मैं: मुझे क्या पता ये साला बूढ़ा क्या बोल रहा है।

तब अकरम हँसते हुए बोला—

अकरम: बेटा झूठ मत बोल।

मैं: मैं क्या झूठ बोल रहा हूँ?

अकरम: अच्छा तो उस दिन तू क्या कर रहा था जब तेरी बहन नंगी मेरे गोदी में बैठी हुई थी और तू खिड़की से देख रहा था?

दीदी: क्या…… राहुल सच बता तुझे पता था?

अब मैंने सोचा अब झूठ बोलकर कोई फायदा नहीं है। सच ही बोल देता हूँ।

मैं: हाँ दीदी मैंने आपको उस दिन देख लिया था जब आप केला लेने गई थीं।

दीदी: क्या तुझे पता था? तब तूने क्यों नहीं बताया तुझे?

मैं: दीदी वो……

अब दीदी एकदम नॉर्मल हो गई थीं। दीदी ने अभी भी एक कपड़ा लपेट रखा था। दीदी की थाई और क्लीवेज बहुत अच्छे से दिख रहे थे।

दीदी: क्या वो……

मैं: दीदी…… दीदी मुझको ना……

दीदी: क्या तेरे को?

मैं: दीदी आप अकरम के साथ बहुत खुश थीं तो मैंने किसी को बोलना ठीक नहीं समझा।

मैं: दीदी मुझे पता था कि आप अकरम से प्यार करती हो तो चाहता था आप खुश रहें इसलिए।

दीदी: (प्यार से) राहुल तू अपनी दीदी से इतना प्यार करता है।

और आकर मेरे गले लग गईं।

तब अकरम हँसते हुए बोला—

अकरम: पूरा तो बताओ साले साहब।

मैं: क्या पूरा बताऊँ?

अकरम: मैं बताता हूँ फिर।

अकरम: बेगम जब मैं तुम्हें उस दिन चोद नहीं रहा था और आज भी तब तेरा भाई तुझे चुदते हुए देखकर हिला रहा था।

दीदी: क्या राहुल तू ये कर रहा था?

मैं: दीदी……

दीदी: क्या दीदी बोल अब।

मैं: दीदी मुझको आपको दूसरे से चु……

दीदी: क्या चु आगे बोल।

दीदी अब मेरे से खुल गई थीं क्योंकि दीदी को मेरे बारे में पता जो चल गया था।

मैं: दीदी मुझको आपको दूसरे से चुदते हुए देखना अच्छा लगता है।

दीदी: तू मुझको देखकर हिला रहा था?

मैं: हाँ दीदी।

अकरम हँसते हुए—

अकरम: बेगम तेरा भाई तो बहनचोद निकला।

दीदी नकली गुस्सा करते हुए—

दीदी: अकरम जी आप भी ना।

दीदी: कब से कर रहा है ये?

मैं: दीदी जब आप अकरम का केला ले रही थीं।

दीदी ब्लश करते हुए—

दीदी: हाथ बेशर्म।

अकरम—

अकरम: बेगम तेरा भाई तो तुझसे भी तेज निकला।

दीदी रंडी की तरह हँसते हुए—

दीदी: आप भी ना।

अकरम: साले साहब अब तुम आदत डाल लो इस चीज के। अब तेरी दीदी मेरे साथ रहेगी।

मैं: दीदी……

दीदी: अरे राहुल अकरम जी मजाक कर रहे हैं।

अकरम: भूल गई बेगम निकाह की बात?

दीदी: हाँ याद है अकरम जी।

अकरम: साले जी तेरी दीदी मुझसे निकाह करना चाहती है।

मैं: दीदी क्या बोल रहा है ये?

दीदी ब्लश करते हुए हाँ में सर हिलाती हैं।

अकरम: साले जी अब मुझको जीजा बोलने की आदत डाल लो।

और हँसने लगा। जिसे देखकर दीदी भी खिलखिलाकर हँसने लगीं।

मैं: दीदी आप मनीष जीजा को और मम्मी-पापा से क्या बोलोगी अगर उनको पता चल जाएगा तो?

अकरम: अरे साले साहब किसी को कुछ नहीं पता चलेगा।

मैं: दीदी अगर पता चल जाएगा तो?

दीदी: नहीं पता चलेगा किसी को।

अकरम दीदी का रिप्लाई देखकर खुश हो गया। उसने मेरे सामने ही दीदी को पकड़ा और अपने पास खींचा और दीदी के बूब्स पकड़के दबाने लगा।

दीदी: अकरम जी क्या कर रहे हैं मेरे भाई के सामने?

अकरम: इससे क्या छुपाना बेगम। इसने तो सब देख ही लिया है।

दीदी नॉटी स्माइल के साथ—

दीदी: फिर भी अकरम जी नहीं इसके सामने नहीं।

मैं: अच्छा दीदी अब आपको मेरे सामने शर्म आ रही है जब आप अब्दुल अंकल का लंड ले रही थीं तब नहीं आई?

दीदी: हाथ बदमिजाज।

अकरम हँसने लगा।

दीदी: वो अकरम जी के दोस्त हैं।

मैं: अच्छा उसके दोस्त से आप कुछ भी कर लोगी?

अकरम: अरे बेगम देखने दो।

दीदी: ठीक है राहुल तुझे मुझे चुदते हुए देखना है ना तो देख आज कैसे तेरे सामने चुदती हूँ मैं।

मैं: सच दीदी?

दीदी नॉटी स्माइल।

अकरम: बेगम तेरा पूरा घर रंडी वाला है क्या?

और हँसने लगा।

दीदी: हाँ अकरम जी हूँ ना मैं आपकी रंडी।

और हँसने लगीं।

अकरम ने दीदी ने जो कपड़ा लपेटा था उसे उतारके फेंक दिया और दीदी के बूब्स को दबाने लगा और दीदी के नेक पर किस करने लगा। दीदी अपनी आँखें बंद करके मजा लेने लगीं और मैं उनको देखने लगा।

मुझे दीदी की पहली बार दीदी की गुलाबी चूत इतनी पास से दिख रही थी और दीदी के बूब्स क्या ही कमाल के थे। मजा आ गया था दीदी को देखकर।

फिर अकरम ने दीदी को अपने साइड घुमाया और दीदी को लिप्स टू लिप्स किस करने लगा और साथ में दीदी भी साथ दे रही थीं। अकरम का एकदम अच्छे से अकरम दीदी के मुँह में अपनी जीभ डाल रहा था साथ में दीदी भी दोनों एक-दूसरे की जीभ चूस रहे थे।

मुझको अब दीदी दूध जैसी गोरी गाँड दिखाई दे रही थी। दीदी की गाँड कितनी बड़ी थी।

ऐसे ही अकरम और दीदी किस कर रहे थे। फिर अकरम अपना हाथ नीचे ले आकर दीदी की गाँड को दबाने लगा और मसलने लगा।

अकरम ने एक बार तेज से दीदी की गाँड दबा दी जिससे दीदी—

दीदी: उह्ह्ह्ह…

फिर भी अकरम को किस करती रहीं। दीदी अब कोई रंडी की तरह अकरम से प्यार कर रही थीं। अकरम दीदी को अपना थूक खिला रहा था और दीदी उसे खा भी जा रही थीं। दीदी बहुत अच्छे से किस कर रही थीं। अकरम साथ में दीदी की गाँड मसल रहा था। फिर दीदी भी अपना एक हाथ ले जाकर अकरम का लंड मसलने लगीं।

पाँच मिनट तक ऐसा ही करा। फिर दीदी खुद अकरम की धोती उतार दीं और अकरम को सोफे पर धक्का दे दिया और अब अकरम पूरा नंगा था साथ में दीदी भी।

अब जैसे ही अकरम सोफे पर बैठ गया दीदी फर्श पर बैठ गईं और अकरम का लंड हाथ में पकड़कर हिलाने लगीं और फिर खुद ही अपनी जीभ से पूरे लंड पर जीभ से चाटने लगीं ऊपर से नीचे तक अच्छे से पूरा लंड दीदी चाट रही थीं। दीदी के मुँह में अकरम के झांट के बाल भी आ रहे थे। दीदी फिर भी उसका लंड बड़े मज़े से चाट रही थीं।

फिर दीदी ने उसका लंड मुँह में डाल लिया और चूसने लगीं जिससे अकरम कराह गया—

अकरम: आह्ह… बेगम क्या चूस रही है मजा आ रहा है।

दीदी अकरम की आँख में देखकर नॉटी स्माइल दे दीं और चाटने लगीं।

अकरम: आह… आह… आह……

मैं: दीदी आप तो प्रोफेशनल रंडी की तरह चाट रही हो।

दीदी ने लंड मुँह से निकाला और बोलीं—

दीदी: हट बदमिजाज। मुझको रंडी बोलेगा।

अकरम हँसने लगा और साथ में मैं भी।

फिर दीदी ने अकरम का लंड वापस से मुँह में लिया और दीदी लंड को पूरा मुँह में ले रही थीं। अकरम का लंड दीदी के गले तक जा रहा था। ऐसे ही दीदी अकरम का लंड चाटने लगीं।

उसके बाद मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ तो मैंने अपना लंड पैंट से निकाला जो कि इतना टाइट हो गया था पूछो मत। मैंने लंड निकाला और लंड को हिलाने लगा जिसे देखकर अकरम हँसने लगा और बोला—

अकरम: बेगम पीछे तो देख।

दीदी ने लंड निकाला।

दीदी: वो बेशर्म मेरे सामने ही हिलाने लगा।

मैं: दीदी आप जो मेरे सामने ही अंकल का चूस रही हो वो क्या?

दीदी हँसने लगीं और मैं भी।

अकरम: साले साहब अंकल मत बोल। जीजा बोल। बेगम बोलो ऐसे।

दीदी: राहुल अंकल मत बोल अकरम जी को।

और शरमाने लगीं।

मैं: अच्छा दीदी अभी निकाह करा नहीं और अभी से ही साला बनवा दिया मुझको।

जिस पर सब हँसने लगे।

उसके बाद अकरम बोला—

अकरम: चल आ जा बेगम। लेट जा ऊपर आकर।

दीदी: इधर ही करोगे अकरम जी? अंदर बेडरूम में चलो।

अकरम: चल फिर बेगम।

दीदी खड़ी हुईं और अकरम का लंड पकड़ा और पकड़कर अकरम को साथ में लेकर चलने लगीं और मैं भी पीछे-पीछे जाने लगा लंड हिलाते-हिलाते।

दीदी बेडरूम में गईं और अकरम भी। जब मैं जाने वाला था तो दीदी—

दीदी: अरे चल भाग यहाँ से। बहुत देख लिया। जा अपने कमरे में।

मैं: दीदी देखने दो ना।

दीदी: चल भाग बेशर्म। बड़ा मजा आ रहा है तुझे मुझको चुदने देखने में।

मैं: दीदी देखने दो ना।

दीदी: भाग यहाँ से बेशर्म।

रंडी जैसी आवाज में।

उसके बाद दीदी ने गेट बंद कर दिया और खुद अकरम और वो रूम में चले गए और मैं उनके रूम के बाहर था।

उसके बाद मैं उनके रूम के बाहर खड़ा थक गया था तो मैं अपने रूम में चला गया। मुझको अपने रूम में गए पंद्रह मिनट हुए थे तभी मुझको दीदी की चिल्लाने की आवाज़ आने लगी।

दीदी: आआह्ह… अकरम जी… आआह्ह्ह…

अकरम: मजा आ रहा है ना बेगम?

दीदी: कितना बड़ा है आपका। इसने तो मेरी चूत ही फाड़ दी।

अकरम: अभी तो चूत ही फाड़ी है तो तेरी गाँड भी रह रही है बेगम।

दीदी: नहीं अकरम जी आज नहीं।

अकरम: आज कौन कर रहा है मेरी जान। तेरी तो निकाह के बाद फाड़ूँगा।

उसके बाद रूम में से थप-थप की बहुत तेज-तेज आवाज़ आने लगी।

मैं उनकी सभी चीखें सुन रहा था क्योंकि दीदी कुछ ज्यादा ही चिल्ला रही थीं और वो भी लंड के मजे में।

ऐसे ही अकरम दीदी को छह बजे तक चोदा। उसके बाद दीदी रूम से बाहर आईं खाली ब्रा और पेटीकोट में। मैं उस समय दीदी की चीखें सुनकर हिला रहा था।

दीदी: अभी तक तू यही कर रहा है?

मैं: आपने तो मजे कर लिए ना।

नाराज होकर।

दीदी: अरे नाराज मत हो। मैं तुझे नहीं दिखा सकती ना बाबू।

मैं: तो आप मेरे सामने तो बड़े रंडी की तरह चूस रही थीं वो क्या?

दीदी: वो बात अलग है।

तब अकरम भी रूम से आया धोती और कुर्ते में।

अकरम: बेगम तूने तो आज मजा दिला दिया। कितने अच्छे से तूने चुदाई के बाद मेरा लंड साफ किया। वाह्!!

दीदी शरमाने लगीं।

अकरम: तो बेगम आज रात का क्या प्लान है?

दीदी: कुछ भी नहीं है। अब जाइए।

अकरम: अच्छा ठीक है। कल तुम रेडी रहना। कल हम अपनी निकाह की प्लानिंग करेंगे।

दीदी: अच्छा ठीक है बाबा। अब जाइए। अगर किसी पड़ोसी ने देख लिया तो बवाल हो जाएगा।

अकरम: बेगम अब शर्माना छोड़ दो। निकाह के बाद तो तुमको मेरे साथ ही घूमना है।

दीदी: मुझको पता है आप मेरे कैसे घुमाने वाले हैं।

अकरम हँसने लगा—

अकरम: अच्छा फिर मैं चलता हूँ।

दीदी: अच्छा ठीक है।

अकरम: बाय मेरी डार्लिंग।

दीदी शरमाने लगीं।

अकरम: साले साहब अपनी बहन का ख्याल रखना।

मैं: अच्छा अंकल मजे आप लो और ख्याल मैं रखूँ।

अकरम: साले जी अंकल नहीं जीजा बोल।

दीदी हँसने लगीं।

उसके बाद अकरम अपने घर चला गया।

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