मेरी दीदी बनी देसी रंडी 4
Mochi ne didi ko lund chusaya:- पिछले पार्ट में आपने पढ़ा कि राहुल ने छिपकर देखा जब अकरम अंकल ने नीतू दीदी को अपने कमरे में बुलाया। अकरम ने दीदी को अपनी गोद में बिठाया, उनकी पीठ और गर्दन चूमने लगा और धीरे-धीरे बातों-बातों में दीदी को लंड चूसने के लिए मजबूर किया। दीदी पहले मना करती रही, लेकिन अकरम की जिद के आगे उन्हें झुकना पड़ा।
Part 3==> मेरी दीदी बनी देसी रंडी – 3
Mochi ne didi ko lund chusaya desi hindi sex story
अकरम: कुछ नहीं होगा बेगम।
दीदी: आप भी ना।
अकरम: आप हमको अपना शौहर मानती हैं ना?
दीदी: हम तो एक्टिंग कर रहे थे ना अकरम जी।
अकरम: बोलो तो।
दीदी: आप भी ना कितने जिद्दी हैं। हाँ लेकिन वो सब नहीं करना जो आप सोच रहे हैं।
अकरम: तो मैं कैसे मान लूँ कि नीतू तुम मेरे को शौहर मान रही हो?
दीदी: आप आ गए ना अपने असली रूप में।
अकरम हँसने लगा।
अकरम: अगर पति माना है तो एक किस दो।
दीदी: आप ज्यादा ही जिद्दी हैं।
अकरम बेड पर बैठ गया।
अकरम: आओ नीतू डार्लिंग मेरी गोद में बैठो।
दीदी: नहीं अकरम जी।
अकरम ने दीदी का हाथ पकड़ा और अपनी गोद में बिठा लिया। फिर दीदी की पीठ और गर्दन पर किस करने लगा।
अकरम: तुम्हारा हसबैंड कितना लकी है जिसे इतनी बड़ी गाँड वाली पत्नी मिली।
दीदी: अब तो आप भी लकी हो। आपने भी बिठा लिया मुझे अपनी गोद में।
दीदी ब्लश करने लगी। अकरम भी हँसने लगा।
अकरम: नीतू डार्लिंग लंड चूसो ना। बड़ा मन कर रहा है।
दीदी: छी! मैं वो सब नहीं करती।
अकरम: करो ना।
दीदी: नहीं करना जी।
फिर अकरम ने दीदी को अपनी गोद से उठाया और बेड पर बिठा दिया। खुद दीदी के सामने खड़ा हो गया और अपनी पैंट की जिप खोलने लगा।
दीदी: क्या कर रहे हो अकरम जी?
अकरम: देखो तुम।
अकरम ने अपना लंड निकाल लिया। दीदी उसे देखकर चौंक गई। क्योंकि दीदी ने कभी रियल में इतना बड़ा लंड नहीं देखा था।
अकरम: अब चूसो ना।
दीदी: नहीं अकरम जी।
अकरम: तुम नखरे बहुत करती हो।
दीदी: ठीक है अकरम जी।
दीदी ने फिर अकरम के टोपे पर अपनी जीभ से टच किया। जिससे अकरम पागल हो गया।
अकरम: आआआ!!! नीतू मेरी जाननन्न… मुँह में लोोोो…
दीदी ने फिर लंड को मुँह में लिया। लेकिन लंड पूरा दीदी के मुँह में नहीं जा रहा था।
अकरम: डार्लिंग पूरा लो ना…
दीदी अकरम का लंड चूस रही थी जितना चूस सकती थी। फिर दीदी उठने लगी।
दीदी: बस अकरम जी।
अकरम: अरे जान अभी और करो ना।
दीदी: नहीं अकरम जी।
लेकिन अकरम दीदी के लंड चूसने से पागल हो गया था। इसलिए उसने दीदी को जबरदस्ती बेड पर बिठाया।
अकरम: डार्लिंग मुँह खोलो।
दीदी: नहीं अकरम जी। मैं नहीं कर रही अब।
फिर अकरम ने दीदी के बाल पकड़े और दीदी का मुँह खुलवा लिया। दीदी के मुँह में लंड देने लगा। पहले तो धीरे-धीरे डाल रहा था लेकिन अकरम लंड चुसाई से पागल हो गया था। इसलिए अब अपना लंड दीदी के मुँह में पूरा डालने लगा।
जिससे दीदी की आँखों से आँसू आने लगे। लेकिन अकरम रुका नहीं और करता रहा। दस मिनट करते ही वो दीदी के मुँह में झड़ गया। लेकिन उसने लंड नहीं निकाला। वो चाहता था कि दीदी उसका माल पी जाए।
दीदी पी नहीं रही थी। दीदी के मुँह से माल गिरने लगा। लेकिन अकरम ने लंड नहीं निकाला। दीदी का मुँह और आँखें लाल हो गई थीं। जिसके कारण दीदी वो माल पी ली।
अकरम ने दीदी का लंड मुँह से निकाला। जैसे-तैसे दीदी बाथरूम गई और तीन मिनट के बाद आई।
दीदी: अकरम जी आपने मेरेको अपना माल पिला दिया।
अकरम: कैसा लगा फिर?
दीदी कुछ नहीं बोली और ब्लश करने लगी।
अकरम ने अपनी पैंट ठीक की।
अकरम: अब चुदाई कब करवाओगी बेगम?
दीदी: अभी आपने बहुत कर लिया अकरम जी। अब जाइए इधर से। उससे पहले मेरा भाई हमको इस तरह देख ले।
अकरम: तो देखने दो ना। उसका नया जीजा कैसे उसकी बहन चोदता है।
दीदी मुस्कुराने लगी।
दीदी: आप भी ना। अरे वो क्या सोचेगा जब वो आपको देखेगा कि मैं अपनी बेटी की उम्र की हूँ और आप मेरे साथ ये सब कर रहे हो।
अकरम: बेगम साहिबा अब आप हमारी बेगम हैं। उसको जो सोचना है सोचने दो। अब हम ही हैं आपके पति।
दीदी: अच्छा अकरम जी। अभी तो जाइए। क्या मेरे भाई के सामने भी सब करेंगे?
अकरम: आप मौका तो दो। अभी कर देते हैं आपके भाई के सामने आपकी चुदाई।
दीदी खिलखिलाकर हँसने लगी।
दीदी: अब जाइए आप। जाइए।
जैसे ही अकरम और दीदी रूम से निकलने वाले थे मैं जल्दी से अपने रूम में चला गया। फिर अकरम अपने घर चला गया। दीदी रूम में जाकर नीचे गिरा हुआ स्पर्म साफ करने लगी। देखते-देखते रात हो गई।
मैं दिन का सोच-सोचकर पागल सा हो रहा था। मैंने कभी सोचा नहीं था कि दीदी एक बुड्ढे के साथ ये करेगी। वो भी एक मोची के साथ।
रात के नौ बजे दीदी ने डिनर लगाया। हमने डिनर किया। दीदी आज बहुत ही खुश दिख रही थी। डिनर करने के बाद दीदी अपने रूम में चली गई और मैं अपने रूम में।
रात को ग्यारह बजे अकरम और दीदी की व्हाट्सऐप से बात हुई।
मैं आज जो हुआ उसको सोचने लगा कि कैसे अकरम अंकल ने दीदी को अपना लंड चुसवाया और साथ में दीदी को अपना स्पर्म भी पिला दिया। मैं ये सब सोचकर दीदी के नाम की मुठ मारने लगा।
करीब साढ़े ग्यारह बजे अकरम का मैसेज आया।
अकरम: हेलो।
दीदी: हाई अकरम जी।
अकरम: आज तो बेगम तुमने मजा दे दिया।
दीदी: आपने अच्छा नहीं किया अकरम जी।
अकरम: मैंने क्या किया? (हँसने वाला इमोजी)
दीदी: अच्छा आपने क्या किया? आपने मेरे मुँह में क्यों निकाला? पता है मेरेको साँस भी नहीं ली जा रही थी।
अकरम: क्या करूँ बेगम। तुम्हारे मुँह में लंड डालने से पागल हो गया था। मैं तो कंट्रोल नहीं हुआ।
दीदी: अच्छा मुझसे बात मत कीजिए।
अकरम: अरे बेगम नाराज मत हो। अब नहीं करूँगा कभी।
दीदी: अब मैं कभी करने भी नहीं दूँगी।
ऐसे ही दीदी और अकरम के बीच थोड़ी देर बात हुई। उसके बाद दीदी सो गई। मैंने भी आज बहुत मुठ मार ली थी जिससे मुझे भी बहुत तेज नींद आ रही थी। तो मैं भी सो गया।
सुबह दस बजे उठा। दीदी ने मुझे उठाया।
दीदी: जा जल्दी रेडी हो कर आ। आज हमको मार्केट भी जाना है सामान लाने।
मैं: लेकिन दीदी आज तो मेरेको अपने कॉलेज के एडमिशन के लिए जाना है। नहीं तो शाम को साइट नहीं चलती और आज लास्ट डे है।
दीदी: तो तू वहीं पर करा लियो ना।
मैं: दीदी मैं अपने दोस्त के घर जाकर एडमिशन के लिए अप्लाई करूँगा।
मैं दीदी से झूठ बोल रहा था। मैं देखना चाहता था कि दीदी जब मार्केट जाएगी तो अकरम दीदी के साथ क्या करेगा। इसलिए मैं बहाना बना रहा था। क्योंकि अकरम मेरे सामने दीदी के साथ कुछ नहीं करेगा।
दीदी: अच्छा ठीक है। जा जल्दी से आ। मैं नाश्ता लगा रही हूँ।
उसके बाद मैंने और दीदी ने नाश्ता किया। मैं दीदी को बोलकर चला गया।
दीदी घर पर अकेली थी। दीदी सोच रही थी कि अगर मैं शाम को मार्केट जाऊँगी तो भीड़ बहुत होगी। क्यों न अभी जाकर सामान लेकर आ जाया जाए।
मेरे जाने के तीस मिनट बाद दीदी घर से निकली। दीदी ने आज रेड कलर की साड़ी पहनी थी और ब्लैक कलर का ब्लाउज। जिसमें से दीदी के बूब्स बाहर को निकल रहे थे। ऐसा लग रहा था कि दीदी कोई रंडी है और कहीं अपने कस्टमर के पास जा रही है चुदने। दीदी को देखकर ऐसा ही लग रहा था।
मैं अपने घर के पास पार्क में आराम से बैठा था। दीदी का वेट कर रहा था।
फिर दीदी मार्केट की तरफ गई। उस समय दिन के बारह बज रहे थे। दीदी अकरम की दुकान के सामने से निकली। मुझे लगा दीदी अकरम के पास जाएगी। लेकिन वैसा नहीं हुआ। दीदी सीधा मार्केट में चली गई सब्जी लेने।
दोपहर के समय बहुत कम लोग आते हैं। ना के बराबर ही लोग आते हैं और ज्यादा दुकानें भी नहीं खुली होती हैं। कुछ दुकानें ही खुली रहती हैं।
दीदी मार्केट में जाकर सब्जी लेने लगी।
दीदी: भैया आलू कैसे दिए हैं?
सब्जीवाला: मैडम जी बीस रुपये किलो।
दीदी: अच्छा दो किलो कर दो। और दो किलो प्याज भी कर दो।
सब्जीवाला: ठीक है मैडम जी।
फिर दीदी वो सामान लेकर दूसरी दुकान पर चली गई। दीदी को कुछ फ्रूट लेने थे। तो दीदी मार्केट के एकदम कोने में जाकर एक फ्रूट वाले से फ्रूट लेने चली गई। वो दुकान कोने में थी जहाँ ज्यादा लोग नहीं आते थे।
फ्रूट वाला बुड्ढा था जिसका नाम अब्दुल था।
दीदी: अंकल जी आम कैसे दे रहे हो?
अब्दुल: मैडम जी आप दस मिनट रुकिए। मैं अभी पेशाब करके आता हूँ।
बोलकर चला गया।
दीदी उधर खड़ी उसका वेट ही कर रही थी कि किसी ने दीदी की गाँड पर अपना हाथ रख दिया और दीदी की गाँड को बहुत तेज दबा दिया। दीदी की सिसकी निकल गई।
दीदी: आआआ!!!
दीदी गुस्से में पीछे मुड़ी तो देखा अकरम पीछे खड़ा था।
अकरम: बेगम आज बिना बताए मार्केट आ गई?
दीदी: आप क्या कर रहे थे?
अकरम: अब अपनी बेगम के तरबूज के साथ खेलूँ भी ना।
दीदी: कोई देख लेता तो क्या होता?
अकरम: क्या होता? लोगों को लगता कि हम पति-पत्नी हैं और क्या।
दीदी मुस्कुराने लगी।
दीदी: अरे अपनी एज तो देखो। कौन कहेगा कि आप मेरे पति हैं।
अकरम ने दीदी की गाँड पर चाटा मार दिया और दीदी की गाँड दबाने लगा।
दीदी: छोड़िए। कोई देख लेगा।
अकरम: देख लेने दो। उन लोगों की भी जलनी चाहिए कि मैं इतनी सेक्सी मोहतरमा को अपना बेगम बनाया है।
दीदी: मैं आपकी रियल की बेगम नहीं हूँ अकरम जी।
अकरम: तो बन जाओ मेरी डार्लिंग। कर लो निकाह।
दीदी फिर इस बात पर ब्लश करने लगी।
अकरम: कर लो। मेरे से कंट्रोल नहीं हो रहा तुम्हें चोदे बिना।
दीदी: अकरम जी आप भी ना।
दीदी और अकरम ऐसे ही बात कर रहे थे कि तभी फ्रूट वाला अब्दुल आ गया।
अब्दुल: अरे अकरम भाई जान आप इधर?
अब्दुल और अकरम दोनों दोस्त थे।
अकरम: हाँ अब्दुल भाई जान। हाँ इधर अपनी होने वाली बेगम को फ्रूट दिलाने आए हैं।
दीदी इस बात पर शॉक हो गई।
दीदी: अकरम जी क्या बोल रहे हैं आप? ऐसा नहीं है अंकल जी। अकरम जी बस मजाक कर रहे हैं।
अकरम: अरे बेगम साहिबा इसको सब पता है हमारे बारे में। आप मिलिए इससे। ये मेरा दोस्त है अब्दुल। अब्दुल मैंने तुझे बताया नहीं था नीतू के बारे में। ये वही है।
दीदी: क्या बता दिया आपने इनको?
अकरम: सब बता दिया बेगम साहिबा। दोस्त है हमारा। कैसे छुपा सकते हैं।
दीदी: अरे मैं आपकी रियल की बेगम थोड़ी हूँ जो आप सबको बता रहे हैं।
तभी अब्दुल बोला—
अब्दुल: नमस्ते भाभी जी। आप तो बहुत ही सेक्सी हो भाभी जी।
अकरम: अरे ठीक से बात कर। भाभी है तेरी।
अब्दुल: अरे अपनी भाभी से मजाक भी ना करूँ?
दीदी: नमस्ते अब्दुल जी। अब्दुल जी मुझे भाभी मत कहिए।
अब्दुल: अरे आप तो हमारे अकरम भाई की सेटिंग हैं तो भाभी ही तो बुलाऊँगा।
इस बात पर अकरम और अब्दुल हँसने लगे। दीदी ही ब्लश करने लगी।
अकरम: नाराज मत हो बेगम साहिबा। ये अपने परिवार वाला ही है।
दीदी: ठीक है अकरम जी।
अब्दुल: भाभी जी क्या चाहिए आपको? कौन सा फ्रूट लोगे आप?
दीदी: अब्दुल जी एक दर्जन केला दे दो।
इस बात पर अब्दुल हँसकर बोला—
अब्दुल: हम कैसे दे दें आपको केला? अकरम भाई नहीं देते क्या आपको केला?
इस पर अकरम भी हँसने लगा।
दीदी: आप भी बड़े मजाकिया हैं।
फिर अब्दुल ने एक दर्जन केला पैक कर दिया। जब दीदी ये सब ले रही थी तो अकरम पीछे से दीदी की गाँड को मसल रहा था। गाँड की एक फाँक को अपने हाथ से पूरा पकड़ने की ट्राई कर रहा था। लेकिन पकड़ नहीं पा रहा था। दीदी की गाँड बहुत बड़ी थी। तो उसके हाथ में जितनी भी आई उसने दबा दी। इस पर दीदी की सिसकी निकल गई।
दीदी: आआआआ…
लेकिन दीदी कुछ नहीं बोली। ऐसे ही अकरम दीदी की गाँड की दरार में अपनी उंगली डालने की ट्राई करने लगा। और उंगलियों को पूरी ताकत के साथ अंदर डालने की कोशिश करने लगा। लेकिन साड़ी के कारण वो अंदर नहीं जा रही थी। लेकिन अकरम फिर से ट्राई करता रहा। और इस बार अकरम की उंगली दीदी के गाँड के छेद के ऊपर साड़ी के ऊपर से ही हल्की सी घुस गई। जिससे दीदी की—
दीदी: आआआआhhhhh…
निकल गई। जिसे सुनकर अब्दुल हँसने लगा।
अब्दुल: भाई इतना क्या उतावला हो रहा है? भाभी कहीं भागी जा रही हैं?
फिर अकरम भी हँसने लगा। दीदी की भी हँसी निकल गई। दीदी अकरम की तरफ नकली गुस्से वाले चेहरे के साथ देखने लगी। लेकिन अकरम फिर भी गाँड मसलता रहा।
अकरम: भाई तरबूज कैसे दे रहा है?
इस बार अब्दुल हँसकर बोला—
अब्दुल: कौन से? भाभी के या जो इधर रखे हुए बोल रहा है? अगर ये बोल रहा है तो तू फ्री ले जा। और अगर भाभी के बोल रहा है तो उन्हीं से पूछ ले।
इस पर अकरम भी हँसने लगा।
अकरम: बेगम कैसे दे रही हो अपने तरबूज?
दीदी इस पर कुछ नहीं बोली और हँसने लगी। जिसे देखकर अब्दुल बोला—
अब्दुल: अगर भाभी के देने वाली चीज होती तो हमको भी दे दो।
और हँसने लगा।
दीदी: अब्दुल जी आप भी ना।
ऐसे ही दीदी ने सामान ले लिया। उसके बाद दीदी जाने लगी।
अब्दुल: आते रहना भाभी जान।
फिर अकरम और दीदी सामान लेकर चलने लगे। और मार्केट से बाहर निकल गए।
मैं वो सब देखकर सोचने लगा—ये अकरम तो पूरे शहर में बता देगा कि दीदी इसकी बेगम है।
उसके बाद दीदी घर आ गई। दीदी अकरम ने जो किया उसको सोचकर खुश सी हो रही थी। क्योंकि मेरा जीजा मेरी दीदी को खुश नहीं कर पाता था। लेकिन अकरम तो दीदी को गरम ही कर देता था और चूत गीली ही कर देता था। अब दीदी के मन में भी अकरम के लिए प्यार बढ़ सा रहा था।
ऐसे ही शाम हो गई। मैं शाम को घर पहुँचा। दीदी ने नाश्ता लगा दिया था। हमने नाश्ता कर लिया। फिर हम टीवी देखने लगे।
दीदी: हो गया तेरा एडमिशन?
मैं: हाँ दीदी।
दीदी: अच्छा।
हम ऐसे ही बात कर रहे थे कि दीदी के फोन पर किसी का मैसेज आया और दीदी अपने रूम में चली गई।
जब मैं अपने रूम में गया और फोन चेक किया तो अकरम का मैसेज था।
रात को दीदी और अकरम की चैट—
अकरम: क्या कर रही हो नीतू बेगम?
दीदी: सोए हुए हूँ अकरम जी।
अकरम: मैं भी आ जाऊँ आपके साथ लेटने?
दीदी: कैसी बात कर रहे हो अकरम जी। (शर्माने वाला इमोजी)
अकरम: बेगम तुम्हारे बिना रहने का मन नहीं करता। तुमने क्या पहना है बेगम?
दीदी: क्या करेंगे जानकर? (हँसने वाला इमोजी)
अकरम: बताओ तो।
दीदी: साड़ी।
अकरम: कौन से कलर की?
दीदी: ब्लैक।
अकरम: अपनी एक फोटो भेजो ना।
दीदी: आप भी अकरम जी।
फिर दीदी ने अपनी फोटो भेजी। उसके बाद अकरम बोला—
अकरम: अरे बेगम थोड़ी अपने बूब्स वाली भेजो। जिसमें तुम्हारे बूब्स दिख रहे हों। बहुत मन कर रहा है तुम्हारे बूब्स देखने को।
दीदी: आप भी ना अकरम जी। कैसी-कैसी बातें करते हो। (शर्माने वाला इमोजी)
अकरम: भेजो ना।
दीदी: ठीक है अकरम जी।
फिर दीदी ने अकरम को अपनी एक फोटो भेजी। जिसमें दीदी लेटी हुई थी। दीदी पेटीकोट और ब्लाउज में थी। और दीदी के ब्लाउज के हुक खुले हुए थे। उसमें दीदी एक देसी रंडी की तरह लग रही थी। जैसे दीदी किसी को फोन सर्विस दे रही हो। ऐसा लग रहा था।
दीदी की फोटो देखकर मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ। और मेरा माल दीदी के फोटो पर जाकर गिर गया। हिला लेने के बाद मुझे नींद आने लगी और मैं सो गया।
उसके बाद दीदी और अकरम ने ऐसी ही बातें कीं जो कि मैं सुबह उसकी चैट देख रहा था।
अकरम: अरे नीतू जी तुमने तो मेरेको पागल बना दिया है। मेरेको कंट्रोल नहीं हो रहा।
दीदी: किस चीज का कंट्रोल नहीं हो रहा अकरम जी?
अकरम: तुम्हारे बूब्स चूसने का। काश उसके अंदर दूध होता।
दीदी ने मुस्कुराने वाला इमोजी भेज दिया।
अकरम: कब चुसवा रही हो बेगम अपने बूब्स?
दीदी: जब आप बोलें अकरम जी। (शर्माने वाला इमोजी)
ऐसे ही उनकी बातें हुईं। उसके बाद मैं फ्रेश होकर नीचे चला गया दीदी के पास। दीदी ने आज येलो कलर की सेक्सी सी साड़ी पहनी थी।
दीदी दिन पर दिन मुझे एक रंडी की तरह लगने लगी थी। जो कि अपने कस्टमर्स के लिए रोज सेक्सी-सेक्सी साड़ी पहनकर रेडी रहती है चुदने के लिए। मैं भी दीदी को देख-देखकर पागल सा हो रहा था। दीदी नाश्ता बना रही थी और मैं दीदी की बड़ी सी गाँड हिलते हुए देख रहा था। मन कर रहा था कि दीदी की गाँड में जाकर लंड डाल दूँ। लेकिन कर नहीं सकता था।
उसके बाद दीदी ने नाश्ता लगाया और हम नाश्ता करने लगे। उसके बाद मैं अपने दोस्तों के पास चला गया और दीदी घर पर अकेली थी।
करीब दो बजे के करीब अकरम ने दीदी को कॉल किया।
अकरम: कैसी हो डार्लिंग?
दीदी: ठीक हूँ।
अकरम: क्या कर रही हो?
दीदी: कुछ नहीं। टीवी देख रही हूँ।
अकरम: सुना बेगम। आज मूवी देखने चलोगी?
दीदी: नहीं अकरम जी। कोई देख लेगा तो क्या होगा?
अकरम: कोई नहीं देखेगा।
दीदी: नहीं अकरम जी।
अकरम: अरे रात को चलेंगे आठ बजे। उस समय कम लोग आते हैं। कोई नहीं देखेगा।
दीदी: रात को कैसे आ सकती हूँ?
अकरम: मैं आ जाऊँगा तुमको लेने।
दीदी: अरे ये बात नहीं है। राहुल से क्या बोलकर निकलूँगी?
अकरम: बोल देना कहीं जा रही हूँ। लेट आऊँगी।
दीदी: कैसी बात कर रहे हो अकरम जी। कैसे बोल दूँ? मैं कभी रात को नहीं गई बाहर।
अकरम: तो अब चल लेना। मैं टिकट बुक कर दे रहा हूँ। तुम रेडी रहना आठ बजे। ठीक है?
दीदी: अच्छा ठीक है। मैं देखती हूँ।
अकरम: ठीक है। मैं तुमको रात को कॉल करता हूँ। ठीक है।
उसके बाद कॉल कट हो गया। दीदी आज पहली बार अकेली रात को कहीं जाने वाली थी। मैं ये बात सुनकर रात का वेट करने लगा कि आज रात को दीदी बाहर जाती है कि नहीं। और दीदी मुझसे क्या झूठ बोलती है।
मैं अपने दोस्त के घर से पाँच बजे निकला और घर गया। जब घर गया तो दीदी नॉर्मल थी। फिर मैं भी अपने रूम में चला गया।
करीब साढ़े सात बजे मैंने दीदी को देखा कि दीदी एकदम रेडी होकर अपने रूम से निकलकर बाहर आई। मैं दीदी को देखकर सरप्राइज सा हो गया था। दीदी ने ब्लैक कलर की साड़ी पहनी थी। और दीदी ने ब्लाउज ऐसा पहना था जिसमें पीछे एक डोरी से होती है। जिसको खींचने से ब्लाउज खुल जाता है।
मैं दीदी को देखकर सोचने लगा कि दीदी आज अकरम से चुदने के लिए ही जा रही है। इतनी सेक्सी बनकर। दीदी मेरे पास आई।
दीदी: राहुल मैं अपनी फ्रेंड के साथ मूवी देखने जा रही हूँ। रात को थोड़ा लेट आऊँ।
मैं: अच्छा दीदी। लेकिन कौन सी फ्रेंड के साथ?
दीदी अब थोड़ी सोच में पड़ गई कि किसका नाम लूँ। अगर राहुल ने उसके पास कॉल कर लिया तो क्या होगा। लेकिन दीदी कैसे भी आज अकरम के साथ मूवी देखने जाना चाहती थी।
दीदी: अपनी फ्रेंड अनीता के साथ जा रही हूँ।
मुझे पता था दीदी झूठ बोल रही है।
मैं: अच्छा दीदी।
दीदी: तू खाना बाहर से मँगा लियो। ठीक है?
मैं: ठीक है दीदी।
उसके बाद दीदी के फोन पर फोन आया। दीदी मुझे बाय बोलकर घर से बाहर चली गई।
जैसे ही दीदी बाहर गई मैं भी जल्दी से दीदी के पीछे घर से निकल गया। हमारे घर से पाँच मिनट की दूरी पर अकरम दीदी का वेट कर रहा था। मैं बाइक लेकर दीदी को दूर से देखने लगा।
अकरम दीदी को दूर से देखकर बहुत खुश हो रहा था। और अपनी पैंट के ऊपर से अपना लंड मसल रहा था। और दीदी को देख रहा था। दीदी उसके पास जाते हुए अकरम को लंड मसलते हुए देख लिया और दीदी ब्लश करने लगी।
अकरम: अरे बेगम आज तो तुम कहर ढा रही हो।
दीदी: अच्छा जी।
अकरम: तुम्हें देखकर मेरा अब मूवी देखने का मन नहीं कर रहा है।
दीदी: तो क्या मन कर रहा है अकरम जी?
दीदी ये बात एकदम सेक्सी अदा के साथ बोली।
अकरम: तुम्हें चोदने का मन कर रहा है मेरी नीतू जान।
दीदी खिलखिलाकर हँसने लगी। और अकरम की छाती पर हाथ से हल्का सा मारकर बोली—
दीदी: आप बड़े नॉटी हो रहे हो।
अकरम: क्या करूँ। तुम हो ही ऐसी।
दीदी: चलो। जाओगे नहीं मूवी देखने?
अकरम: चलो।
उसके बाद अकरम ने एक ऑटो को रोका। जब ऑटो रुका तो रिक्शेवाला दीदी को ही देखने लगा। और सोचने लगा—साले बुड्ढे को ऐसा माल कहाँ से मिल गया। क्या ही माल है रे… काश मिल जाए ये एक बार।
अकरम: भाई इनॉक्स चलोगे?
रिक्शेवाला: हाँ बैठो।
उसके बाद अकरम और दीदी रिक्शे में बैठ गए। उसके बाद अगर अकरम ने दीदी के साथ कुछ किया होगा तो वो मैं नहीं देख पाया। क्योंकि मैं बाइक से उनका पीछा कर रहा था।
उसके बाद दीदी और अकरम सिनेमा हॉल के सामने उतरे और अंदर जाने लगे। और वो चले गए।
मैं जल्दी से बाइक पार्क करके आया और जल्दी से मूवी की टिकट ली। लेकिन मुझे नहीं पता था कि उन्होंने किस मूवी की टिकट ली है। फिर मैंने टिकट काउंटर वाले से पूछा तो उसने बताया कि उन्होंने इस मूवी की टिकट ली है। फिर मैं भी जल्दी लेकर गया।
जब मैं पहुँचा तो मूवी स्टार्ट हो गई थी। जिसके कारण सिनेमा हॉल में अंधेरा था। मैं जल्दी से अंदर गया और दीदी को ढूँढने लगा। दीदी और अकरम सबसे लास्ट वाली रॉ के तीसरे वाले रॉ में बैठे थे। मैं भी उनके पीछे जाकर बैठ गया।
उस समय हॉल में दस लोग और होंगे।
फिर दीदी और अकरम मूवी देखने लगे। और मैं उनको देख रहा था।
अकरम दीदी के कंधे पर हाथ रख रखा था। और दीदी उसको कुछ नहीं बोल रही थी। इसका मतलब दीदी अकरम के साथ पूरी खुल चुकी है।
अकरम दीदी के कंधे को अपने हाथ से मसलने लगा। दीदी कुछ नहीं बोल रही थी। बस मूवी देख रही थी। उसके बाद अकरम दीदी की पीठ पर हाथ ले गया और दीदी की पीठ को अपने हाथ से मसलने लगा। दीदी की एकदम मुलायम पीठ पर अकरम अपना हाथ फेरने लगा।
अकरम ने फिर वापस से दीदी के कंधे पर हाथ रख लिया और मूवी देखने लगा।
उसके कुछ मिनट बाद अकरम धीरे-धीरे हाथ दीदी के बूब्स के पास ले जाने लगा। और ब्लाउज के ऊपर से ही बूब्स को पकड़ लिया। दीदी इस पर अकरम को देखने लगी।
दीदी: अरे अकरम जी क्या कर रहे हो? कोई देख लेगा।
अकरम: कोई नहीं देखेगा।
फिर अकरम दीदी के बूब्स को एक हाथ से दबाने लगा। दीदी उसको कुछ नहीं बोल रही थी। क्योंकि दीदी को भी मजा आने लगा था। दीदी ने अपनी आँखें बंद कर दीं। और अकरम दीदी के बूब्स को दबाता रहा। अब दीदी अकरम को देखने लगी और अकरम भी दीदी को देखने लगा।
फिर अकरम दीदी के बूब्स को छोड़ दिया। और दीदी के चेहरे को अपने हाथों से पकड़ लिया।
अकरम: तुम्हारे होंठ कितने रसीले हैं बेगम।
दीदी कुछ नहीं बोली।
अकरम: मन तो कर रहा है कि इनको चूस जाऊँ।
दीदी इस पर मुस्कुरा दी।
फिर अकरम ने दीदी के लिप्स के करीब अपने लिप्स को कर दिया और एक किस कर दिया। और दूर हट गया। दीदी जैसे सरप्राइज सी हो गई। क्योंकि पहली बार कोई दूसरा आदमी दीदी को किस कर रहा था।
अकरम ने वापस अपने होंठ दीदी के लिप्स पर रख दिए और दीदी को किस करता रहा। पहले तो दीदी उसका साथ नहीं दे रही थी। लेकिन अकरम एक हाथ से दीदी के बूब्स को अपने हाथ में लेकर तेज दबा दिया। जिससे दीदी का मुँह खुल गया। और अकरम ने दीदी की जीभ को अपने होंठों से चूसने लगा।
ऐसे करते-करते पाँच मिनट हो गए थे। दीदी अब बहुत गरम हो गई थी। दीदी का अब कंट्रोल नहीं हो रहा था। क्योंकि अकरम दीदी के बूब्स भी दबा रहा था। साथ में दीदी के होंठ भी चूस रहा था। जिससे दीदी इतनी गरम हो गई कि अब दीदी की किस में अकरम का साथ देने लगी। और अपनी जीभ को जितना हो सके उतना बाहर निकाल दी। जिससे अकरम खुश हो गया।
और सोचने लगा अब दीदी भी मन लगा रही है। ऐसे ही दीदी और अकरम का किस दस मिनट चला। उसके बाद अकरम दीदी का पल्लू हटाकर दीदी के क्लीवेज पर किस करने लगा। और दोनों हाथों से दीदी के बूब्स दबाने लगा। दीदी अपनी आँखें बंद करके इसका मजा लेने लगी।
अकरम इतना पागल हो गया था कि उसने दीदी के बूब्स को तेज दबा दिया। जिससे दीदी की सिसकी निकल गई।
दीदी: आआआआhhhhh… अकरम जी थोड़ा धीरे करिए।
अकरम: अपना ब्लाउज खोलो ना। तुम्हारे बूब्स चूसने का मन कर रहा है।
दीदी: नहीं अकरम जी। कोई देख लेगा।
अकरम: अरे कोई नहीं देखेगा। देखो बहुत कम लोग हैं। खोलो ना।
दीदी: आप ना बहुत जिद्दी हैं। अपने मन की करवा लेते हैं।
अकरम मुस्कुराने लगा।
दीदी: अच्छा ठीक है। लेकिन जल्दी करना।
अकरम: ठीक है मेरी डार्लिंग।
दीदी अपना हाथ अपने पीछे ले जा रही थी। लेकिन दीदी को दिक्कत हो रही थी।
दीदी: आप ही खोल लीजिए। मेरा हाथ नहीं पहुँच रहा।
अकरम को तो जैसे चाँदी ही चाँदी हो गई थी। वो खुद दीदी का ब्लाउज खोलने की सोचकर मुस्कुराने लगा। जिसे देखकर दीदी भी नॉटी स्माइल देने लगी।
फिर अकरम अपना हाथ दीदी के पीछे ले गया और उस डोरी को खींच दिया। और दीदी का ब्लाउज दीदी के शरीर से अलग हो गया और नीचे गिर गया।
अकरम पागलों की तरह दीदी के बूब्स को ब्रा के ऊपर से ही चूसने लगा।
दीदी: अरे अकरम जी आराम से कीजिए। मैं कहीं नहीं भागी जा रही।
दीदी ने ये एकदम सेक्सी अदा के साथ बोला। अकरम ने दीदी के लिप्स पर एक किस दिया और वापस से बूब्स दबाने लगा और चूसने लगा। अब अकरम कंट्रोल नहीं कर पाया। और उसने दीदी के बूब्स को ब्रा के नीचे से निकाल लिया। जो कि बहुत बड़े थे। और दीदी के बूब्स के निप्पल्स एकदम गुलाबी-गुलाबी थे।
अकरम: बेगम तुम्हारे बूब्स तो इतने मुलायम हैं। मन तो कर रहा है इनको दिन-रात मुँह में डालकर रहूँ।
अकरम दीदी के बूब्स को चूसने लगा। और दूसरे हाथ से दीदी के ब्रा के हुक खोलने लगा। और खोलकर अलग कर दिया।
आगे क्या हुआ पढ़ें नेक्स्ट पार्ट में।
Next Part ==> मेरी दीदी बनी देसी रंडी 5

Bro please next part jaldi post karo
I’m waiting for the next part