जवान बेटी ने दिया बीवी का प्यार 1

Beti ne bivi bankar chudai karwayi:- मेरा नाम अनिल भैया है। मैं रोहतक, हरियाणा का रहने वाला हूँ और किसी भी लड़की को अच्छे समय तक सेक्स का मजा दे सकता हूँ। जो लड़की सेक्स का असली मजा लेना चाहती है वो मुझे मेल करे। आज मैं अपनी पहली स्टोरी लिखने जा रहा हूँ जो कि मेरी और मेरी बेटी के बीच हुए सेक्स समझौते के बारे में बताऊँगा।

अब स्टोरी पर आता हूँ। मेरी बीवी का देहान्त 15 साल पहले बीमारी की वजह से हो गया था। तब मेरी बेटी शालू की उम्र सिर्फ 4 साल की थी। उस समय मुझे बहुत दुख हुआ था और साथ में टेंशन भी थी कि शालू की देखभाल कौन करेगा।

कुछ रिश्तेदारों ने तो बोला कि शालू को उसकी नानी के गाँव भेज दो पढ़ने के लिए। पर मैं नहीं माना क्योंकि मैं अपनी बेटी को अच्छे स्कूल में भेजना चाहता था। और लास्ट में मैंने फैसला किया कि मैं शालू को मेरे पास ही रखूँगा। और जल्दी ही मैंने उसे शहर के अच्छे स्कूल में डाल दिया।

Beti ne bivi bankar chudai karwayi hindi kahani

वो भी बहुत खुश थी मेरे साथ घर में। घर पर खाना बनाने और काम करने के लिए एक कामवाली को रखा हुआ था। और हाँ, मैं एक शॉपकीपर हूँ और मेरी लेडी क्लोथ्स की शॉप है।

धीरे-धीरे समय बीतता गया और आज शालू 19 की हो गई है और कॉलेज में नया एडमिशन हुआ है उसका। स्कूल के समय तक मेरा शालू की तरफ कोई गलत इरादा नहीं था। पर जब शालू 12वीं के लास्ट में थी तब एकदम से उसके फिगर में बहुत बदलाव आ गए थे। उसके बूब्स कुछ ज्यादा ही बढ़ चुके थे और जब वो घर पर सूट पहनती तो मुझे उसकी क्लीवेज साफ नजर आती और वो भी इस बात को समझती थी।

कॉलेज में एडमिशन लेते समय उसके बूब्स के साथ उसकी बैक की भी शेप आ गई थी जो किसी भी लड़के को उसकी तरफ देखने से रोक नहीं पाती थी। शालू इतने मस्त शरीर की मालकिन होने के साथ-साथ समझदार भी हो गई थी।

वो अब सब कुछ समझने लगी थी। साथ में घर का सारा काम भी सीख चुकी थी। एक दिन संडे को जब मैं सुबह शॉप पर जा रहा था तो वो पोछा लगा रही थी। उस समय उसने सूट-सलवार पहनी हुई थी जिसमें उसके बड़े-बड़े गोरे सुडौल बूब्स बाहर आने के लिए जिद कर रहे थे और उसने ब्रा भी नहीं पहनी थी नीचे। और सलवार को उसने नीचे से मोड़कर ऊपर कर रखा था जिसकी वजह से उसकी गोरी टाँगें दिख रही थीं।

शायद उसने सोचा था कि मैं शॉप पर जा चुका हूँ। तभी तो मुझे देखकर एकदम से चौंक गई थी और अपने सूट को ठीक करने लगी मुझे देखकर। जब वो सूट को ठीक कर रही थी तो उसे बड़ी परेशानी हो रही थी। शायद सूट ज्यादा भीड़ था। मैं भी उस समय शॉप की तरफ निकल गया।

शाम को जब घर वापस आया तो वो खाना बना रही थी और अब उसने बहुत खुला सूट डाल रखा था जो उसकी मम्मी का था। हम दोनों हमेशा से नीचे बैठकर खाना खाते थे। उस दिन जब वो खाना देने के लिए झुकी तो कसम से मेरा तो खड़ा हो गया था।

वो उसकी माँ से भी ज्यादा सेक्सी लग रही थी। पिछले 15 सालों में मुझे ऐसी फीलिंग नहीं आई जो आज उसके बूब्स को देखकर आई थी। मैंने सोचा कि अगर बूब्स की सिर्फ एक झलक ही ये हाल कर रही है तो जब इसे सीने से लगाऊँगा तो क्या होगा। खाना खाने के बाद मैंने सोने से पहले उसे अपने रूम में बुलाया।

वो थोड़ी डर रही थी। आज शायद उसे भी कुछ हो रहा हो। जैसे ही वो रूम में आई तभी छत से कुछ आवाज आई। जैसे ही हमने खिड़की से देखा तो बाहर आँधी चल रही थी और बारिश का मौसम हो रहा था। शालू ने मुझे बताया कि ऊपर छत पर कपड़े सूख रहे हैं। तो हम दोनों तुरंत ऊपर चले गए कपड़े लेने के लिए। ऊपर काफी अँधेरा था और हमारी छत भी काफी बड़ी थी।

शालू को अँधेरे से काफी डर लगता है इसलिए वो मेरे बिल्कुल साथ-साथ थी और उसके बूब्स मेरी कमर पर लगातार टकरा रहे थे। कपड़ों में उसकी कई ब्रा और पैंटी भी थीं जो उसके साइज से काफी छोटी हो चुकी थीं। जब हम कपड़े लेकर नीचे गए तो उसकी 2 ब्रा मेरे हाथ में थीं। उसने बिना कुछ बोले ब्रा मुझसे लेकर अलमारी में रख दी। अब फिर हम वापस कमरे में आ गए। अब वो काफी गरम हो चुकी थी।

मैंने उससे पूछा कि उसने उसकी मम्मी का सूट क्यों पहना है। तो वो बोली—

शालू: पापा मेरे सभी सूट भीड़ हो गए हैं और अंडरगारमेंट्स भी।

जब उसने अंडरगारमेंट्स बोला तो मैं चौंक गया पर मुझे खुशी भी थी कि मेरी बेटी मुझसे ऐसी बातें डिस्कस कर रही है आसानी से। और करे भी क्यों न, उसकी माँ भी तो मैं ही था। अब मैं भी थोड़ा ओपन होना चाहता था।

मै: तुम ये सभी ड्रेसेस मत पहना करो जिनमें तुम्हें परेशानी हो। मैं तुम्हारे लिए नए सूट सिलवा दूँगा। और घर में तुम अपनी मम्मी के सूट पहन सकती हो। और हाँ, घर पर भी अंडरगारमेंट्स पहना करो। कोई भी आ सकता है।

वो एकदम से भोली सी आवाज में बोली—

शालू: पापा आपके सिवा और कौन आएगा?

जैसे मुझे कह रही हो कि आप मेरे बूब्स देख सकते हो। मैंने भी जल्दबाजी न करते हुए समझदारी दिखाई और बोला—

मै: जैसे तुम्हारी मर्जी।

अब वो शरारत भरे मूड में आ चुकी थी। उसने मुझसे कहा—

शालू: पापा मम्मी के बारे में कुछ बताओ ना।

मैं थोड़ा मना करने लगा पर वो मानी नहीं और जिद करने लगी और बोली कि जब तक नहीं बताओगे तब तक वो वहीं रहेगी।

मै: ठीक है, मैं बताता हूँ। तुम्हारी मम्मी मुझे बहुत प्यार करती थी और मेरी हर एक बात मानती थी। घर का सारा काम करती थी और मेरी टाँगें भी दबाती थी। और जब कमर दर्द करती तो कमर भी।

तो वो एकदम से बोली—

शालू: पापा मैं भी आपकी टाँगें दबाऊँगी।

मै: नहीं, लड़कियाँ ऐसा नहीं करतीं।

शालू: कमर तो दबाने दो।

मै: कल दबाना।

तो वो मान गई और सोने चली गई। कसम से आज तो पूरा दिल कर रहा था कि अपनी ही बेटी को पत्नी बना दूँ। पर थोड़ा सोचने के बाद फैसला किया कि अभी नहीं, थोड़े दिन बाद। उस रात के बाद सब कुछ बदल गया।

अब मैं और मेरी बेटी एक-दूसरे की तरफ आकर्षित होने लगे थे। पर दोनों में से कोई भी ये रिस्क नहीं लेना चाहता था कि हम सीधे बाप-बेटी के रिश्ते की मर्यादा क्रॉस करें। बस दोनों एक सही मौके की तलाश में थे। ये मैंने तब नोटिस किया जब मुझे बीच में सब्जियाँ देने के लिए घर आना पड़ा क्योंकि शालू के मामा का मेरे पास फोन आया था कि वो आज हमारे घर आ रहे हैं।

जब घर गया तो शालू को बताया कि आज उसके मामा घर आ रहे हैं क्योंकि कुछ दिन बाद शालू के मामा की लड़की की शादी थी गाँव में। इसलिए इनवाइट करने के लिए आ रहे हैं। शालू तब बर्तन साफ कर रही थी किचन में और उसने आज भी उसका एक भीड़ वाला व्हाइट सूट पहना था जो काफी पतला भी था और ऊँचा भी। जिसके कारण पीछे से उसकी कमर का काफी हिस्सा दिख रहा था।

जिसे देखकर मुझे थोड़ी फीलिंग्स आ रही थीं और जी कर रहा था कि अभी फाड़ दूँ उसके पतले से सूट को और दबोच लूँ उसके सुडौल शरीर को बाहों में। पर मैं शालू को फीलिंग्स शो नहीं करना चाहता था इसलिए एक्सप्रेशन ठीक रखे। शालू भी कुछ ऐसे ही बिहेव कर रही थी जैसे कल रात कुछ हुआ ही न हो हमारे बीच।

जब वापस शॉप पर जाने लगा तो शालू ने आवाज लगाई और बोली—

शालू: पापा गैस सिलेंडर चेंज कर दो।

पुराना सिलेंडर उसने पहले से ही उतार रखा था और नया सिलेंडर हमारे घर की बैक साइड में बने स्टोर में था जहाँ हमारी गेहूँ रखी होती है और स्टोर आगे से खुला हुआ था। जो हरियाणा से हैं उन्हें पता होगा कि हमारे यहाँ स्टोर कैसे होते हैं।

जब हम दोनों सिलेंडर लेने के लिए स्टोर में गए तो वहाँ धूप आ रही थी और जैसे ही शालू पर धूप पड़ी तो वो मानो किसी सेक्स की परी से कम नहीं लग रही थी। और उसने नीचे ब्रा भी नहीं पहनी थी। धूप में उसके सूट से आधे बाहर निकले बूब्स साफ चमक रहे थे। अब मैं अपनी फीलिंग्स को नहीं रोक सका और वो भी नीचे देखने लगी ताकि मैं अच्छे से उसके बूब्स देख सकूँ।

हम सिलेंडर उठाने लगे तो सिलेंडर की एक साइड वाली दीवार से छिपकली एकदम नीचे गिर गई और शालू छिपकली को देखकर एकदम मेरी तरफ आई और उसके चूतड़ मेरे आधे खड़े लंड से टकरा गए। और मैंने भी उसी दौरान उसे एक हाथ से पकड़ लिया मानो मैं उसे छिपकली से बचा रहा हूँ।

जब उसे पकड़ा तो उसके दोनों बूब्स मेरे एक हाथ में आ गए थे और मेरा लंड अब पूरा खड़ा हो गया था और शालू को भी फील हो रहा था। छिपकली चली गई थी पर हम दोनों पूरी फीलिंग्स ले रहे थे एक-दूसरे के साथ। पर जैसे मैं पहले बोला था कि हम में से कोई भी सीधा रिस्क नहीं लेना चाहता था। और कुछ पल बाद हमने अपने आप को ठीक किया और चुपचाप सिलेंडर किचन में रख दिया। अब मैं सीधे शॉप पर चला गया।

शाम को शालू के मामा सीधे शॉप पर आ गए थे और हम दोनों ने घर जाने से पहले शॉप पर थोड़ी ड्रिंक की और घर चले दिए। ड्रिंक तो हम घर जाकर भी कर सकते थे लेकिन शालू के अकेले होने की वजह से हमने शॉप पर ही 2-2 पेग लगा लिए और शालू के मामा भी ये बात समझते थे। जब घर पहुँचे तो देखा कि शालू ने नॉर्मल सूट डाला हुआ था जो उसको फिट आ रहा था और नीचे ब्रा भी पहनी हुई थी। मुझे बहुत अच्छा लगा देखकर कि मेरी बेटी सिर्फ सेक्स परी ही नहीं समझदार भी है।

वो मामा के सामने बिल्कुल एक आम लड़की की तरह बिहेव कर रही थी। उसने जल्दी से हमारा खाना लगाया और हम तीनों ने साथ मिलकर खाना खाया। और खाना खाते समय शालू के मामा बोले—

मामा: शालू बेटा तुम तो कल ही मेरे साथ चलो गाँव में शादी को। एक हफ्ता ही तो रह गया है।

और मैंने भी बोला—

मै: शालू तुम चली जाओ अपने मामा के साथ।

पर शालू ने मना कर दिया और बोली—

शालू: पापा मैं अपनी स्टडी नहीं मिस करना चाहती।

आज सेकंड सैटरडे था और शालू का कॉलेज आज ऑफ था। मुझे ऐसा भी लगा कि शायद वो मेरा बिना न रहना चाहती हो उसके मामा के घर। रात को मैं और शालू के मामा मेरे रूम में सो रहे थे। सोने से पहले शालू के मामा के साथ कुछ बातें चल रही थीं।

वो बोले—

मामा: शालू अब काफी बड़ी हो चुकी है।

(वो भी शालू का सुडौल शरीर को निहार चुके थे जो पहले से काफी मस्त हो चुका था।)

मै: हाँ, पर शालू अभी स्टडी करना चाहती है। और शालू कॉलेज के फ्री टाइम में रेसलिंग की ट्रेनिंग लेने की सोच रही थी क्योंकि उसे शुरू से रेसलिंग का शौक रहा है और स्कूल टाइम में कभी-कभी स्कूल की तरफ से भी खेलने के लिए गई थी। पर कभी मेडल्स नहीं लेकर आई। शायद वो रेसलिंग को सिर्फ अपनी हॉबी मानती थी।

इस पर उसके मामा बोले—

मामा: स्टडी की ठीक है शालू के लिए। अगर जॉब मिल गई तो अच्छा लड़का मिल जाएगा।

इसके बाद हम दोनों सो गए और सुबह शालू के मामा जल्दी ही निकल गए गाँव के लिए। और संडे होने की वजह से मैं भी बिना नहाए ही शालू के मामा को छोड़ने बस स्टैंड चला गया और वहीं से सीधा शॉप पर चला गया।

दोस्तों, आगे की कहानी अब आपके कमेंट्स और मेरी मेल पर फीडबैक आने पर ही बताऊँगा।

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