कबाड़ी वाले ने मम्मी को लंड दिखाया 1

Kabadi wala aur mummi ka romance:- मेरा नाम अमित है। मैं अपने मम्मी-पापा और छोटे भाई के साथ यूपी के एक शहर में रहता हूँ। दोस्तों, मेरी उम्र 21 साल है और मैं अभी कॉलेज में पढ़ाई कर रहा हूँ। दोस्तों, मेरे पापा की अपनी एक दुकान है और भाई स्कूल में पढ़ाई कर रहा है। मम्मी की उम्र 47 साल है और वो ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं हैं। पर जैसे शहर में रहते हैं, वो वैसे ही रहती हैं। मेरी मम्मी बहुत ही ज्यादा पतिव्रता नारी हैं। साथ ही मेरी माँ बहुत ही ज्यादा सीधी और भोली-भाली हैं। मेरी मम्मी की हाइट बहुत ज्यादा अच्छी है।

Kabadi wala aur mummi ka romance

मेरे पापा से वो ज्यादा लंबी हैं और मम्मी का नाम सुनीता है। दोस्तों, मेरी मम्मी बहुत ज्यादा पूजा-पाठ भी करती हैं और डेली मंदिर भी जाती हैं। मंदिर हमारे मोहल्ले में ही बना हुआ है।

हमारे मोहल्ले में हिंदू और मुस्लिम सब लोग रहते हैं। पर मुस्लिम थोड़ा दूर की साइड में रहते हैं। दोस्तों, मंदिर के पीछे एक खाली और बहुत सरकारी मैदान है जहाँ पर लोग कचरा डालते हैं।

वहीं पर एक कबाड़ीवाले की झोपड़ी बनी हुई है। उस झोपड़ी में एक कबाड़ी रहता है और वो अपनी भंगार की दुकान भी चलाता है।

दोस्तों, उस कबाड़ी का नाम आसिफ है। आसिफ डेली दुकान अपने झोपड़े से चलाता है। और वो हर संडे अपना ठेला लेकर गली-मोहल्ले में कबाड़ लेने जाता है। उसकी हाइट करीब 6 फीट है पर वो बहुत ही दुबला-पतला है। उसकी उम्र करीब 27 साल की होगी।

आसिफ बहुत ही हरामी लड़का था। दोस्तों, वो बहुत ही झगड़ालू भी था। वो साला बहुत लड़ियाँ करता था। दोस्तों, आसिफ से मेरी भी एक बार लड़ाई हो चुकी थी। मेरी और मेरे दोस्तों की उससे पुरानी दुश्मनी चल रही थी।

आप लोगों को गली-मोहल्ले की लड़ाई का पता ही होगा जो अक्सर होती ही रहती है। उसकी दुकान मंदिर के एकदम पीछे ही थी और मैंने आपको बताया था कि वहाँ कोई आता-जाता नहीं था।

आसिफ से हमारी लड़ाई हुए काफी टाइम हो चुका था। दोस्तों, मैंने उस लड़ाई में आसिफ को एक चांटा भी मारा था। उसने मुझे जाते-जाते माँ की गाली दी थी और उसने मुझे बोला था कि—

आसिफ: साले तेरी माँ को भोसड़ा मारूँ, तेरी माँ की चूत।

ये सुनकर मुझे बहुत गुस्सा आया था पर उस टाइम हमारा कॉम्प्रोमाइज हो गया था। उसके बाद हमारी कभी लड़ाई नहीं हुई थी। दोस्तों, अब मेरी लाइफ एकदम नॉर्मल चल रही थी।

मम्मी रोज जल्दी उठकर खाना बनाती और 9 बजे तक नहा-धोकर मंदिर चली जाती थीं। जैसे कि मैंने आपको बताया था कि वो रोज पूजा-पाठ करती थीं। मेरे कॉलेज की हॉलिडेज चल रही थीं।

तो मैं आराम से 9 बजे उठता था। मम्मी उस टाइम मंदिर जाने के लिए तैयार हो जाया करती थीं। और पापा और भाई अपने-अपने काम के लिए निकल जाते थे। दोस्तों, मेरी मम्मी हमेशा घर से साड़ी में ही निकलती थीं।

दोस्तों, अब मैं आपको थोड़ा सा अपनी माँ के बारे में भी बता देता हूँ। दोस्तों, मेरी मम्मी की हाइट 5.6″ है और वो 47 साल की हैं। उनके कुछ काले बाल सफेद हो गए हैं।

दोस्तों, मेरी माँ का रंग सांवला है। मेरी मम्मी बहुत सीधी थीं। कभी वो किसी के साथ लड़ती भी नहीं थीं। उम्र के साथ मम्मी की थोड़ी चर्बी भी बढ़ गई थी। उनका थोड़ा सा पेट और ब्रेस्ट और सबसे ज्यादा पीछे से उनकी गाँड निकल गई थी।

उनके बूब्स भी अब काफी अच्छे लगते थे। दोस्तों, अगर मम्मी का फिगर इमेजिन करना है तो वो थोड़ा-थोड़ा वेलेमा आंटी की तरह ही होगा। दोस्तों, आप गलत मत समझना। जब तक मेरी अपनी मम्मी पर कोई गंदी नजर नहीं थी।

ये सब मैंने आपको अपनी मम्मी के बारे में बताने के लिए डिस्क्राइब किया है। दोस्तों, मम्मी सीधी बहुत थीं पर उसे थोड़ा मॉडर्न तरीके से रहना भी आता था। टाइम के साथ-साथ शहर में रहकर सब सीख जाते हैं।

मम्मी साड़ी ही पहनती थीं पर मम्मी का ब्लाउज ज्यादातर बहुत डीप बैक के होते हैं। और वो ज्यादातर स्लीवलेस ही पहनती हैं और काफी बार तो पीछे से बैकलेस पहनी थीं। उस टाइम उनकी कमर पर सिर्फ एक डोरी होती है। मेरी मम्मी साड़ी बहुत अच्छे से पहनती हैं।

दोस्तों, एक बात तो मैं आपको बताना ही भूल गया। दोस्तों, जब से मैंने होश संभाला है तब से लेकर आज तक मैंने अपने घर में ब्रा-पैंटी कभी नहीं देखी है।

इसका मतलब है कि मेरी मम्मी नीचे कुछ नहीं पहनती हैं। शायद जब मम्मी जवान थीं उस टाइम वो पहनती हों। पर अब वो ये सब नहीं पहनती हैं ये मेरी गारंटी है।

ये तो था मेरी मम्मी के बारे में। अब मैं स्टोरी को शुरू करता हूँ।

संडे का दिन था और मैं सो रहा था। सर्दियों का टाइम था। मैं अपने सपनों में खोया हुआ था तभी मेरे कानों में आवाज सुनाई पड़ी। वो आवाज कबाड़ी वाले की थी। वो लोहा, टीन, प्लास्टिक, बोतल, पेपर कहकर बोल रहा था।

एकदम से मेरी नींद टूट गई और मुझे अपनी मॉर्निंग की नींद बहुत प्यारी थी। और ये आवाज आसिफ कबाड़ी वाले की थी। और उस टाइम सुबह के 8 बज रहे थे पर वो साला 9 बजे के बाद ही आता था।

पर आज पहली बार वो 8 बजे आया था। जैसे ही मेरी नींद टूटी मुझे बहुत गुस्सा आया। दोस्तों, मैं थोड़ा गुस्से वाला भी हूँ। मैं एकदम से भागकर बालकनी में गया और आसिफ को गुस्से से देखकर मैं बोला—

मै: ओये यहाँ क्यों चिल्ला रहा है? सुबह-सुबह साले तुझे दिखता नहीं यहाँ लोग अभी सो रहे हैं। साले उस दिन तो तू पीटा था। साले कबाड़ी अब जल्दी से यहाँ से निकल जा वरना बहुत मारूँगा बहनचोद।

आसिफ: मैं अपना काम कर रहा हूँ। देखता हूँ कि किसी की गाँड में दम है जो मुझे वहाँ से निकाल दे। ये तेरे बाप का मोहल्ला है क्या?

दोस्तों, अब मुझे बहुत ज्यादा गुस्सा आया और मैं बोला—

मै: रुक मादरचोद। अभी तेरी गाँड फाड़ता हूँ।

आसिफ: आजा मारेगा साले तू मुझे। आजा।

देखते ही देखते आस-पास के लोग खड़े हो गए। पूरी गली में भीड़ लग गई। अब मैं नीचे आकर बोला—

मै: क्या बोल रहा है? अब बोल?

उस टाइम तक पापा और भाई घर पर ही थे। दोस्तों, सच बताऊँ तो मुझे कबाड़ी से बहुत नफरत थी क्योंकि ये बहुत ही गंदा था। और लोग और पापा-मम्मी-भाई मुझे बालकनी से देख रहे थे।

उस टाइम मेरी माँ ने मैक्सी पहनी हुई थी और मैंने आसिफ को चांटा मार दिया। आसिफ ने मुझे गाली दी और बोला—

आसिफ: तेरी माँ की चूत भोसड़ी के। तेरी माँ को चोदू साले माँ के लोडे रांडी के।

ये सब गालियाँ मैंने भी उसको दी थीं। हमारे बीच हाथापाई भी हो गई थी। मैंने उसे नीचे लिटा दिया और उसके फेस पर घूसे ही घूसे बजा दिए। अब तक मेरे दोस्त भी आ गए थे।

इसलिए अब आसिफ अकेला पड़ गया था और अब उसे मैं और मेरे दोस्त मार रहे थे। पर वो साला फिर भी हमें गालियाँ दिए ही जा रहा था। जब बात ज्यादा बढ़ गई तो मेरे पापा और कुछ आस-पास के लोग बीच में बचाव करने के लिए आए।

पर दोस्तों, आसिफ पागल हो गया था और मेरी माँ को गालियाँ दिए ही जा रहा था। हमने उसके कपड़े फाड़ दिए थे। फिर कुछ लोग उसको समझा-बुझा कर ले गए। फिर जाते-जाते उसने मेरी माँ को देखा और मुझे देख धमकी देते हुए बोला—

आसिफ: साले तुझे तो मैं जरूर मार दूँगा भोसड़ीके।

दोस्तों, उस दिन मुझे घर में बहुत ज्यादा डांट पड़ी। पापा ने मुझे बहुत डांटा और मम्मी ने भी। मम्मी अब पूरी तरह से घबराई हुई थीं। पापा मुझे ताने मारने लग गए कि मैं पढ़ाई-लिखाई में तो ध्यान नहीं है और इससे फफूंद गिरवा लो बस।

मुझे अब बहुत गुस्सा आ रहा था। कुछ दिन ऐसे ही बीत गए। उस दिन मम्मी मंदिर भी नहीं गई थीं। बहुत ही टेंशन वाला माहौल था। उसके बाद कुछ दिन ऐसे ही बीत गए और सब कुछ नॉर्मल हो गया।

ऐसे ही एक दिन मैं दोस्तों के साथ बाहर घूम रहा था तो हमें हमारे ही मोहल्ले का एक लड़का मिला। दरअसल वो आसिफ का दोस्त था। वो अपने खाली टाइम में आसिफ की शॉप पर अपना टाइम पास करता था।

मै: और कैसा है तेरा कबाड़ी दोस्त?

वो: बेटा वो तो बहुत मजे में है। भाई मैंने तुझे एक बात बतानी है। तू मुझे बाद में मिलियो।

ये कहकर वो चला गया। उसके बाद नेक्स्ट डे मैं उस लड़के से मिला। उसका नाम राहुल था और वो बोला—

राहुल: भाई तू मेरा दोस्त है। एक बात और मैंने तुझे एक बात बतानी थी।

मै: हाँ बोल यार। क्या बात है?

राहुल: यार वो माया है ना जिसके चक्कर में हमारी आसिफ से लड़ाई हुई थी। जिसको आसिफ ने छेड़ा था जब वो ट्यूशन से आ रही थी।

दोस्तों, माया मेरे दोस्त राजेश की छोटी बहन थी। तो मैं बोला—

मै: हाँ बोल। क्या माया?

राहुल: भाई तू प्लीज किसी को बोलना मत और इसमें मेरा नाम नहीं आना चाहिए।

मै: बात क्या है बता ना भोसड़ीके।

राहुल: भाई आसिफ ने उसे सेट कर लिया है और अब उसके बहुत मजे ले रहा है। भाई तू ये बात राजेश मत बोलियो वरना बहुत बड़ा बवाल हो जाएगा।

मै: भोसड़ी के ये क्या चूतियापा है? उस कबाड़ी की शिकायत माया ने ही तो की थी।

राहुल: भाई पता नहीं पर आज माया उससे सेट है और वो उसके खूब मजे ले रहा है।

मै: तुझे कैसे पता है?

राहुल: भाई मैं दोपहर को उसकी शॉप पर बैठा था तो 2 बजे माया अपनी छुट्टी करके उसकी शॉप के सामने से जा रही थी। तो माया उसे बार-बार स्माइल पास कर रही थी। फिर माया मंदिर में चली गई और आसिफ भी मंदिर के पास जाकर उससे बातें करने लग गया।

मेरे दोस्त राजेश की बहन माया बहुत ही कमाल की लड़की है। वो काफी सेक्सी और हॉट है। पर मैं शॉक था कि कुछ दिन पहले ही तो माया ने हमसे आसिफ की शिकायत की थी और फिर ये सब कैसे हो सकता है।

मुझे राहुल की बात पर यकीन नहीं हुआ। मैं बोला—

मै: भोसड़ी वाले ज्यादा बोलेगा तो तेरी गाँड फाड़ दूँगा। वो अपनी बहन है और अपनी गली की लड़की है। और वो अभी बच्ची है और उस कबाड़ी की गाँड में इतनी हिम्मत नहीं है।

राहुल: भाई तुझे यकीन नहीं है तो मैं कुछ नहीं कर सकता। मैंने जो देखा वो तुझे बता दिया है। वो साला मुझे एक दिन कह भी रहा था कि मैं तेरी गली वालों की बहन को चोदूँगा।

ये सुनकर मेरा खून खौल रहा था पर मैंने उसकी बातों पर ध्यान नहीं दिया। कुछ दिन बाद दोस्तों, 2 बजे के करीब मैं बाहर कुछ काम से गया हुआ था। मैं अकेला ही बाइक पर था।

मैंने एक नुक्कड़ पर सिगरेट पी रहा था तभी मुझे आसिफ वहाँ थोड़ी दूर जहाँ पर माया का कॉलेज था वो वहाँ खड़ा था। कुछ ही देर में माया अपने कॉलेज की ड्रेस में बाहर आई।

उसने टाइट शर्ट और नीचे मिनी स्कर्ट डाली हुई थी। वो साली काफी सेक्सी लग रही थी। माया के बूब्स उसमें बहुत ही मस्त लग रहे थे। मैंने कभी उसको इस नजर से नहीं देखा था पर दोस्तों, तभी मैं शॉक हो गया।

माया सीधा आसिफ की बाइक के पास जाकर खड़ी हो गई और वो दोनों हँस-हँसकर हाथ में हाथ डालकर बातें करने लग गए। तभी माया ने इधर-उधर देखा और बैग से कपड़ा निकालकर अपने फेस पर बाँध लिया।

फिर आसिफ ने अपनी बाइक स्टार्ट करी और माया उसकी बाइक पर बैठकर चली गई। दोस्तों, ये देखकर मेरी तो गाँड ही फट गई थी कि मेरे दोस्त की बहन ऐसी निकली है। मतलब वो राहुल सच कह रहा था।

मुझे अब कुछ समझ नहीं आ रहा था। मैंने सोचा जाकर इसे पकड़ लूँ। पर दोस्तों, ये लड़की का मैटर था तो मैंने राजेश को बताने की सोची और फोन निकाला पर मैं ये सोचकर रुक गया।

कि कहीं उसे मेरी बात का विश्वास नहीं आया तो हमारी दोस्ती खराब हो जाएगी और बदनामी भी हो जाएगी। फिर मैंने बाइक स्टार्ट करी और आसिफ की बाइक का पीछा करने लग गया।

दोस्तों, मैंने देखा कि आसिफ 3 किमी दूर जाकर एक सुनसान सी जगह पर रुक गया जो हमारे मोहल्ले के पास ही थी।

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